जल संरक्षण पर लेख

पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही एकमात्र ज्ञात ग्रह है जहां जीवन संभव है और इसकी वजह सिर्फ इतनी है कि यहां जल एवं ऑक्सीजन दोनो ही उपलब्ध हैं। जल पृथ्वी पर सभी जीवित प्राणियों के लिए जीवन की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। बिना जल के कोई एक दिन भी जीवित नहीं रह सकता है। हम यह भी जानते हैं कि पृथ्वी पर साफ जल या पीने योग्य जल की बहुत ही कम मात्रा उपलब्ध है और इसलिए हमें स्वच्छ जल को बर्बाद नहीं करना चाहिए बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए इसे बचाना होगा। इसके लिए हमें अपनी बुरी आदतों को बदलते हुए लोगों को स्वच्छ जल के महत्व के बारे जागरूक करना होगा। हमें स्वच्छ जल के किफायती इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा ताकि पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता बनाई रखी जा सके।

छात्रों को आम तौर पर उनके शिक्षकों के द्वारा अक्सर 300, 500, 600 या 800 शब्दों में जल बचाव के उपर लेख लिखने के लिए कहा जाता है अतः हम यहां छात्रों की सहायता के लिए इस विषय पर कुछ छोटे-बड़े लेख प्रस्तुत कर रहे हैं। स्कूलों में किसी भी उत्सव के आयोजन के दौरान निबन्ध लिखना आजकल प्रचलन में है और ऐसा किसी भी विषय के बारे में छात्रों में हिंदी लेखन कौशल एवं उनके ज्ञानवर्धन के लिए किया जाता है। ये सभी जल बचाव सम्बंधित लेख बेहद सरल भाषा में लिखे गए हैं और आप अपनी आवश्यकतानुसार लेखों का चयन कर सकते हैं।

जल संरक्षण पर लेख

जल संरक्षण पर लेख 1 (300 शब्द)

प्रस्तावना

जल पृथ्वी पर ईश्वर का एक अमूल्य उपहार है। इस धरती पर जीवन जल की उस्थिति की वजह से ही संभव हुआ है। स्वादहीन, गंधहीन एवं रंग-विहीन होते हुए भी जल इस धरती पर प्राणियों के जीवन को स्वाद, रंग एवं अच्छी सुगंध से परिपूर्ण बनाता है। यह हर जगह पाया जाता है एवं यह जीवन का ही दूसरा नाम है। यह हमें जीवन देता है पर बदले में हमसे कुछ नहीं लेता है। हमें यह हर जगह— नदियों, समुद्रों, टंकियों, कुओं एवं तालाबों इत्यादि— में मिल जाता है, लेकिन स्वच्छ पीने योग्य जल की फिर भी कमी है। इसका अपना तो कोई स्वरूप नहीं है लेकिन हम इसे जिस बर्तन में रखते हैं यह उसका ही स्वरूप ले लेता है। वैसे तो जल धरती के तीन-चौथाई हिस्से में मौजूद है लेकिन फिर भी हमें जल के संरक्षण की आवश्यकता है क्योंकि साफ जल की उपलब्धता का प्रतिशत बेहद कम है।

जल संरक्षण

 

स्वच्छ जल का महत्व

जल के बिना धरती पर जीवन संभव नहीं है। सभी जीवित प्राणियों जैसे मानव, पशु, पौधों इत्यादि को जीने एवं बढ़ने के लिए जल की आवश्यकता होती है। हमें खाने-पीने, खाना पकाने, स्नान, कपड़े धोने, पौधों में जल देने इत्यादि सभी कार्यों के लिए सुबह से रात तक जीवन के हर क्षेत्र में जल की आवश्यता होती है। विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों को विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जल की आवश्यकता होती है जैसे कि किसानों को अपनी फसल के उत्पादन के लिए, मालियों को पौधों की सिंचाई के लिए, उद्योगपतियों को उद्योग से संम्बंधित कार्यों के लिए, बिजली उत्पादन संयत्र को हाईड्रोइलेक्ट्रिसिटी पैदा करने के लिए, इत्यादि। अतः हमें हमारी भावी पीढ़ी के कल्याण तथा जल एवं वन्य जीवन के संरक्षण के लिए स्वच्छ जल का संरक्षण करना चाहिए। दुनिया में कई जगहों पर लोग जल की किल्लत या पूरी तरह से अनउपलब्धता की समस्या से जूझ रहे हैं।

निष्कर्ष

हमें अपने जीवन में जल के महत्व को समझते हुए और जल के उपयोग के उचित प्रबंधन के द्वारा इसके दुरुपयोग को रोकना होगा। साथ ही, साफ जल को मिट्टी या जल प्रदूषण द्वारा गंदा होने से बचाने की भी नितांत आवश्यकता है। खास तौर पर हमें शौचालय में साफ जल के बजाए बारिश के जल को जमा करके उसका इस्तेमाल करना चाहिए।

जल संरक्षण पर लेख 2 (500 शब्द)

प्रस्तावना

जल हमारे शरीर और जीवन की बुनियादी आवश्यकता है। जल को सभी जीवित प्राणियों के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व के रूप से भी जाना जाता है और इस वजह से इसे 'जीवन' के रूप में भी नामांकित किया गया है। इस धरती पर बिना जल जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। धरती के तीन-चौथाई हिस्से में जल है किंतु इसमें से सिर्फ 2 प्रतिशत ही हमारे लिए उपयोगी है। भारत में कुछ स्थानों पर लोगों को जल की कमी और सूखे के हालात का सामना करना पड़ता है, जबकि अन्य स्थानों पर प्रचूर मात्रा में जल की उपलब्धता है। इसलिए जो लोग ऐसे स्थानों पर रह रहे हैं जहां जल की अत्यधिक उपलब्धता है, उन्हें जल का महत्व एवं जल संरक्षण के महत्व का एहसास होना चाहिए।

जल संरक्षण क्यों जरूरी है

हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब हमें स्वच्छ जल बचाने एवं इसे हमारे जरूरत के हिसाब से खर्च करने की आवश्यकता है। भारत एवं अन्य देशों के कई स्थानों में लोग जल की बड़ी कमी से जूझ रहे हैं। उन्हें सरकार द्वारा टैंकों के द्वारा की जा रही जल की आपूर्ति या लंबी दूरी पर स्थित कुछ प्राकृतिक जलाशयों पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्हें हर रोज पीने के जल की व्यवस्था करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। जल की कमी की स्थिति उन लोगों के लिए और भी दयनीय है जिनके पास अपनी दैनिक जरूरतों जैसे पीने, नहाने-धोने इत्यादि के लिए भी पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध नहीं है। भारत दुनिया भर के उन देशों में से एक है जो आज विकराल जल की कमी की समस्या का सामना कर रहे हैं। भारत में राजस्थान एवं गुजरात के कुछ हिस्से तो ऐसे हैं जहां घरों की लड़कियों एवं महिलाओं को नंगे पैर सिर्फ बर्तन भर जल के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कुछ शहरों जैसे कि बैंगलुरू में लोगों को स्वच्छ जल की एक बोतल खरीदने के लिए 25रू से 30रू तक चुकाने पड़ते हैं। हाल ही में एक स्टडी के अनुसार 25 प्रतिशत शहरी आबादी को स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है। गर्मियों के महीनों में जल की दैनिक आवश्यकता बढ़ जाने की वजह से लोगों को और भी अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है। कुछ क्षेत्रों में जल निकायों का निजीकरण जल की कमी का मुख्य कारण है। 

जल संरक्षण कैसे करें

जल की कमी की समस्या से निपटने के लिए हम विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। वर्षा जल संग्रहण जल संरक्षण की विभिन्न तकनीकों में से सबसे प्रभावी एवं उपयुक्त विधि है। वनरोपण भी एक सर्वोत्तम विधि है जो सतही अपवाह को कम कर देता है एवं भूजल को रीचार्ज करता है। यह भूमिगत जल संरक्षण को बढ़ावा देता है। ऐसे तरीकों को अपनाकर हम प्राकृतिक रूप से और भी अधिक जल का संरक्षण कर सकते हैं और साथ ही भावी पीढ़ियों के लिए इसकी उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते हैं। हमें प्रतिज्ञा लेनी होगी एवं हमारा आजीवन आदर्श वाक्य होना चाहिए - “जल बचाओ, जीवन बचाओ, पृथ्वी बचाओ”।

हमें अपने बच्चों एवं परिवार के अन्य सदस्यों को जल संरक्षण के साधारण तरीके सिखाने होंगे, जैसे कि हर इस्तेमाल के बाद नल को कस कर बंद करना, बगीचे में जल देने के लिए  फव्वारों का इस्तेमाल, पालतू जानवरों को बगीचे में नहलाना, सभी रिसाव वाले पाईपों की मरम्मत, पौधों में जल देने एवं कपड़े धोने के लिए वर्षा जल संग्रहण कर उसका इस्तेमाल इत्यादि। हमें नदियों (खासकर गंगा) के जल को भविष्य में इस्तेमाल के लिए एवं जलीय जीवों की सुरक्षा के लिए स्वच्छ रखना चाहिए।

निष्कर्ष

जल जीवन के लिए अमृत है और इसलिए हमें इसे बचाना चाहिए ताकि धरती पर जीवन को बचाया जा सके। हमें हमारे जीवन की कई दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जल की आवश्यकता पड़ती है और इसलिए हमें जल की बूंदों का मूल्य समझते हुए इनका संरक्षण करना चाहिए।

जल संरक्षण पर लेख 3 (600 शब्द)

प्रस्तावना

जीवन के सभी कार्यक्षेत्रों जैसे कि गृहस्थी, कृषि, घरेलू, उद्योग इत्यादि में जल की नितांत आवश्यकता है। यह पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता के लिए प्रकृति द्वारा प्रदत्त अनमोल उपहार है। सभी जीवों को अपने अस्तित्व के लिए जल की अधिकाधिक आवश्यकता होती है क्योंकि उनके शरीर में ज्यादातर जल ही होता है। मानव शरीर के दो-तिहाई हिस्से में जल ही है। जल का कोई रंग, गंध, स्वाद या आकार नहीं होता फिर भी यह हमारे जीवन में सबकुछ प्रदान करने में सहायक होता हैं।

हमारे जीवन में स्वच्छ जल का महत्व

धरती की सतह का 71 प्रतिशत हिस्सा जल से आच्छादित है। यह पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवन के सभी रूपों के लिए महत्वपूर्ण है। यह जमीन के नीचे, महासागरों, बड़े जल निकायों एवं छोटे जलाशयों में पाया जाता है। जल अन्य भी कई रूपों जैसे कि वाष्प, बादलों, सतहीय जल, हिमनद, ध्रुवीय बर्फ के आच्छादनों इत्यादि में उपलब्ध है। इस धरती पर जल का जीवन चक्र लगातार वाष्पीकरण, अवक्षेपण, वर्षा, बहाव, आदि के माध्यम से चलता है। इसके अलावा हमारे देश के कई हिस्सों में स्वच्छ पीने योग्य जल का अभाव है। जल की कमी का मतलब वास्तव में सुरक्षित जल की अनुपलब्धता है। जल की कमी की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए धीरे-धीरे जल की गुणवत्ता का प्रबंधन मुश्किल होता जा रहा है। कुछ इलाकों में जल की कमी एक दैनिक समस्या है। जल की कमी की वजह से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जल की कमी वाले क्षेत्रों में, जल की उपलब्धता का प्रबंधन काफी लागत, समय एवं प्रयासों के द्वारा करना पड़ता है। जिन लोगों के पास जल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है वे जल का महत्व नहीं समझते और वे रोज कई अनावश्यक गतिविधियों में बड़ी मात्रा में जल की बर्बादी करते है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि पृथ्वि पर स्वच्छ जल लगभग 2 प्रतिशत या उससे भी कम मात्रा में उपलब्ध है और जो मानव उपभोग के योग्य है। ज्यादातर जल हिमनद या बर्फ के रूप मे तथा अन्य खुले स्रोतों को रूप में मौजूद है। प्राकृतिक फिल्टरेशन की वजह से ही भूजल स्वच्छ जल का मुख्य स्रोत है। स्वच्छ जल की उपलब्धता का विषय जल सुरक्षा तथा सस्ती कीमत पर लोगों तक इसके पहुंच पर सवाल उठाता है। वातावरण में बहुत बड़े पैमाने पर जलवायु में बदलाव की वजह से भूजल की गहराई बढ़ती जा रही है। बेमौसम के सूखे एवं प्राकृतिक आपदाओं की वजह से कई स्थानों पर स्वच्छ जल की असुरक्षा में वृद्धि हुई है। आने वाले दशकों में जनसंख्या वृद्धि, नकारात्मक जलवायु परिवर्तन इत्यादि की वजह से खेती एवं उद्योगों की आवश्यकताएं बढ़ेंगी और इस वजह से स्वच्छ जल के आपूर्ति की मांग बढ़ेगी।

यह समय एकजुट होकर जल संरक्षण की दिशा में जितना हो सके प्रभावी कदम उठाने का समय है। अलग-अलग तरीकों से हम दैनिक रूप से भारी मात्रा में जल की बचत कर सकते हैं। जल की बचत एवं उसे गंदा होने से बचाना वर्तमान एवं भविष्य की मांग की आपूर्ति के लिए नितांत आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन जल की कमी का एक अन्य पहलू है। भविष्य में जल की मांग और बढ़ेगी और इस वजह से हमें इसे बचाना होगा ताकि भावी पीढ़ियों के लिए भी जल उपलब्ध हो सके। अगर हम इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाएंगे तो स्थिति बद से बदतर होती चली जाएगी और यह इस स्तर पर पहुंच जाएगी कि पारिस्थितिकी तंत्र में ताजे जल की कमी इसके प्राकृतिक प्रतिस्थापन दर से कहीं ज्यादा हो जाएगी। मानव के लिए जल की जरूरत को कम करके ताजे जल के उत्पत्तिस्थानों, स्थानीय वन्यजीवों एवं प्रवासी पक्षियों को भी बचाया जा सकता है। हमें हमारी आदतों और गतिविधियों में ऐसे सकारात्मक परिवर्तन करने होंगे ताकि हम जल की एक-एक बूंद को बचा सकें।

निष्कर्ष

जल की कमी कई देशों में एक ज्वलंत समस्या है। यह एक सहजीवी अवयव एवं एक महत्वपूर्ण तत्व है जिसपर जीवन निर्भर करता है। प्राकृतिक फिल्टरिंग प्रणाली में गड़बड़ी की वजह से जमीन के नीचे के पीने योग्य जल का स्तर कम होता जा रहा है। वनों की कटाई एवं पौधों की कमी की वजह से वर्षा जल जमीन के नीचे संचय होने के बजाय बह जाता है। हमें जल की बर्बादी को रोकने, अनावश्यक इस्तेमाल एवं कचरे के जल में मिल जाने की वजह से हो रही जल की गुणवत्ता की क्षति को रोकने के लिए सभी महत्वपूर्ण गतिविधियों का पालन करना चाहिए।

 

जल संरक्षण पर निबन्ध 4 (800 शब्द)

प्रस्तावना

ऑक्सीजन, जल एवं भोजन, तीन ऐसे तत्व हैं जिनके बिना इस धरती पर हम जीवित नहीं रह सकते। लेकिन इन सबमें ऑक्सीजन सबसे ज्यादा जरूरी है और फिर जल एवं भोजन क्योंकि ऑक्सीजन के बिना हम एक सेकेंड भी नही जी सकते। स्वच्छ जल भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि हमें अपनी दैनिक गतिविधियों को पूरा करने में और खासकर पीने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है। पहले से ही स्वच्छ जल का प्रतिशत कम था लेकिन औद्योगिक गतिविधियों की वजह से जमीन के नीचे का स्वच्छ जल भी गंदा एवं प्रदूषित होता जा रहा है। ताजे मिनरल वाटर की बढ़ती हुई कमी की वजह से कई वर्षों से स्थानीय दुकानों पर इसकी बिक्री शुरू हो चुकी है और लोग इसे 30 से 35 रू में भी खरीदने को तैयार रहते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि साधारण नल का जल खासकर वे जो सार्वजनिक स्थानों पर उपलब्ध होते हैं ज्यादातर स्वच्छ नहीं होते। जल बचाने एवं उसकी सुरक्षा को लेकर लोगों की बढ़ती हुई लापरवाही और विकराल होती जनसंख्या की वजह से निश्चय ही भावी पीढ़ी को स्वच्छ जल की कमी की समस्या से जूझना पड़ेगा। इस धरती पर उपलब्ध जल का बहुत कम प्रतिशत ही पीने योग्य है और जल की कमी वाले स्थानों पर रहने वाले लोगों को प्रति दिन बहुत कम जल का इस्तेमाल करते हुए जीवित रहना पड़ता है।

स्वच्छ जल का प्रतिशत

धरती के तीन चौथाई हिस्से में जल है और इसका 97% समुद्र का जल है अर्थात यह खारा जल है जो उपभोग के लिए अयोग्य है। बचे हुए लगभग 2.7 प्रतिशत जल ही स्वच्छ पीने योग्य जल है, लेकिन इसका भी 70 प्रतिशत बर्फ की चादरों के रूप में अंटार्टिका के हिमनद में समाया हुआ है। इस प्रकार हमारे पास सिर्फ एक प्रतिशत ही मीठा जल है जो मानव के उपयोग के लायक है। इस अनमोल स्रोत को सुरक्षित रखने के लिए जल संरक्षण बेहद आवश्यक है।

साथ ही, यह भी आवश्यक है कि हम पीने योग्य जल के संसाधनों में सीवेज, जहरीले रसायन एवं अन्य कूड़े-कचरे के सीधे मिलने की वजह से दूषित होने से बचाएं। आबादी की बढ़ती हुई दर, वनों की कटाई एवं तेजी से हो रहे शहरीकरण की वजह से स्वच्छ जल की मांग बढ़ती जा रही है और साथ ही जल प्रदूषित एवं कम होता जा रहा है।

स्वच्छ जल को दूषित करे वाले स्रोत

भूमि अपवाह, जलनिकास, रिसाव, मल, वायुमंडलीय निक्षेप, वर्षण, औद्योगिक अपशिष्ट इत्यादि भूमिगत जल को प्रदूषित करने वाले स्रोत हैं। ये सभी गंदे पदार्थ झीलों, नदियों, तटीय जलों इत्यादि में जमा हो जाते हैं और धीरे-धीरे बड़े जल निकायों और इस प्रकार भूमिगत जल में भी मिल जाते हैं। कृषि भूमि में अत्यधिक मात्रा में उर्वरकों, कीटनाशकों एवं खर-पतवार नाशकों के इस्तेमाल के अलावा, आवासीय क्षेत्रों से कपड़े धोने का पाउडर, साबुन इत्यादि जल को प्रदूषित करने वाले अन्य स्रोत हैं। इस तरह के गैर इंगित प्रदूषण स्रोत भी जल की गुणवत्ता को खराब करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

जल संरक्षण के साधारण उपाय

हम कई साधारण उपाय अपनाकर रोजाना कई गैलन जल बचा सकते हैं। नीचे, जल बचाने के तकनीक दिए गए हैं जिन्हें घर एवं अन्य जगहों पर अपनाए जाने की आवश्यकता है:

  • हमें कम बहाव वाले बाथरूम शावर (इन्हे ऊर्जा सक्षम बाथरूम शावर भी कहते हैं), कम पानी फ्लश करने वाले शौचालयों एवं खाद बनाने वाले शौचालयों (पारंपरिक पश्चिमी शौचालयों की जगह पर क्योंकि उनमें जल की बड़ी मात्रा का इस्तेमाल करना पड़ता है) या दो विकल्पों वाले फ्लश से युक्त शौचालयों (ये अन्य शौचालयों की अपेक्षा जल की बेहद कम मात्रा का इस्तेमाल करते हैं)।
  • हाथ धोते वक्त, दांत साफ करते वक्त, चेहरा धोते हुए या बर्तन धोते हुए नल बंद रखना।
  • बरसात के मौसम में बारिश के जल को जमा करें और टॉयलेट फ्लश, पौधो को जल देते वक्त या बगीचे में जल देते वक्त इस जल का इस्तेमाल करें। अपरिष्कृत जल जैसे कि समुद्री जल या बिना साफ किए हुए जल का इस्तेमाल टॉयलेट में करना भी एक अच्छा विकल्प है।
  • हमें खराब जल का पुनर्चक्रण करना दुबारा इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को अपनी आदत में लाना चाहिए।
  • हमें जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संग्रहण, उच्च क्षमता वाले कपड़े धोने की मशीनों का इस्तेमाल, मौसम पर आधारित सिंचाई नियंत्रक, बगीचे के नली नलिका एवं हाथ धोने के बेसिन में कम प्रवाह वाले नलों के इस्तेमाल के साथ स्विमिंग पूल कवर, स्वचालित नल इत्यादि के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए।
  • जल बचाने के तकनीकों को व्यावसायिक क्षेत्रों में भी प्राथमिकता से अपनाया जाना चाहिए क्योंकि ऐसी जगहों पे दैनिक रूप से कई गैलन जल बचाया जा सकता है।
  • व्यावसायिक स्थानों में निर्जल मूत्रालयों, निर्जल धुलाई करने वाले कार वॉश, इन्फ्रारेड या पैर द्वारा संचालित नलों, दबाव द्वारा संचालित झाड़ू, कूलिंग टॉवर कंडक्टिविटी नियंत्रक, वॉटर-सेविंग स्टीम स्टरलाईजर्स (अस्पतालों एवं हेल्थ-केयर युनिटों में), वर्षा जल संग्रहण, वॉटर टू वॉटर हीट एक्स्चेंजरों, इत्यादि का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • कृषि क्षेत्र भी बेहद विशाल है जहां यदि जल बचाने की तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए तो हम दैनिक रूप से और अधिक जल बचा सकते हैं। फसलों की सिंचाई के लिए हम ओवरहेड इरिगेशन (सेंट्रल-पिवोट या लैटरल मूविंग स्प्रिंकलरों के इस्तेमाल करते हुए), कम से कम वाष्पीकरण, रनऑफ या उपसतह जलनिकासी इत्यादि का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • हरित खाद का प्रयोग, फसल के अवशेष का पुनर्चक्रण, पलवार, पशु खाद इत्यादि का खेत में इस्तेमाल के द्वारा मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा को बढ़ाता है जिससे मिट्टी में जल धारण करने एवं जल अवशोषित (मूसलाधार बारिश के दौरान) करने की क्षमता में वृद्धि होती है।
  • जल संरक्षण के तकनीकों को म्युनिसिपल वॉटर युटिलिटीज या क्षेत्रीय सरकारों द्वारा एक समान रणनीति आम रणनीतियों जैसे सार्वजनिक आउटरीच कैंपेन जैसे कि जल के अधिक इस्तेमाल के लिए अधिक मूल्य चुकाना, बाहरी गतिविधियों जैसे फ्लोर क्लीनिंग, कार वॉशिंग इत्यादि के लिए स्वच्छ जल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना।
  • बिजली के मीटरों के समान ही हर घर में जलापूर्ति के लिए भी यूनिवर्सल मीटरों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यह सुविधा सिर्फ ग्रेट ब्रिटेन के रिहाईशी क्षेत्रों एवं कनाडा के शहरी घरों में ही उपलब्ध है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण संस्था के अनुमान के मुताबिक जलापूर्ति के लिए मीटर लगाना एक ऐसी प्रभावी तकनीक है जिससे द्वारा दैनिक जल के खपत में 20 से 40 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है।
  • जल के कम खपत से उपजने वाले फसल, अर्थात ऐसे फसल जिन्हें कम सिंचाई की जरूरत होती है, के विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, क्योंकि मात्र सिंचाई कार्य में ही दुनिया में उपलब्ध स्वच्छ जल का 70% खर्च हो जाता है।

निष्कर्ष

जल बचत की तकनीक समाज, समुदायों, व्यापार वर्गों सहित गांवों में रहने वाले लोगों के बीच प्रोत्साहित किया जाना चाहिए क्योंकि ये ही बेहिसाब तरीके से जल का इस्तेमाल करते हैं। किसानों, बच्चों एवं महिलाओं को जल का उपयोग कुशल तरीके से कैसे करें इस बारे में ठीक से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। उन्हें अपने जीवन में जल का महत्व समझना होगा। स्वच्छ जल की कमी सिर्फ किसी एक देश की समस्या नहीं है बल्कि यह पूरे विश्व की समस्या है जिसे वैश्विक स्तर पर लोगों के बीच जागरूकता फैला कर हल किए जाने की आवश्यकता है।