प्रदूषण पर लेख

प्रदूषण पर्यावरण को हानिकारक बनाने में अपना योगदान देता है और इसके दुष्परिणाम सभी जीव-जंतुओं को भुगतने पड़ते हैं और इस वजह से दुनिया भर में प्रदूषण एक भारी चिंता का विषय है। इस वैश्विक मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र, स्वैच्छिक संस्थाएं और मीडिया सहित सभी सरकारें आम राय रखती हैं। बढ़ते प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव के बारे में छात्रों को पूरी तरह जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। यदि भविष्य की यह नई पीढ़ी मानव जाति के अस्तित्व के लिए प्रदूषण रूपी इस खतरे से परिचित हो जाए तो वे प्रदूषण को नियंत्रित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यहाँ हम आपको विभिन्न श्रेणियों के तहत अलग-अलग शब्द सीमा में प्रदूषण पर कुछ उपयोगी लेख- प्रदान कर रहे हैं जिनमें से आप अपनी जरूरत के अनुसार चयन कर सकते हैं।

Article on Pollution in Hindi

प्रदूषण पर लेख 1 (300 शब्द)

कछ भी ऐसा जो वातावरण में घुलकर जीव-जंतुओं पर हानिकारक या जहरीला प्रभाव छोड़ता है, उसे प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसकी वजह से प्रकृति के संसाधन जैसे कि भूमि, जल, वायु या पर्यावरण के अन्य हिस्से उपयोग करने लायक नहीं रह जाते।  वातावरण में घुल जाने वाले ये हानिकारक या जहरीले पदार्थ सांस लेते वक्त हमारे शरीर के भीतर चले जाते हैं। प्रदूषण कई प्रकार के हो सकते हैं: जैसे कि जल, वायु, मिट्टी, उष्मीय, और रेडियोधर्मी प्रदूषण।

प्रदूषण

 

प्रदूषण एवं इसके  कारण:

जहरीली हवा में सांस लेना धूम्रपान के समान ही खतरनाक है। केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि जानवर भी प्रदूषित वातावरण के दुष्परिणाम झेलते हैं क्योंकि प्रदूषण की वजह से अत्यधिक विषाक्त गैस पूरे वातावरण में घुल जाते हैं। ये खतरनाक गैस जीवाश्म इंधन को जलाकर बिजली पैदा करने वाले संयंत्र या ऐसे उद्योग जो अपने कचरे का निपटान उसे जल में प्रवाहित करके करते हैं के अलावा किसानों द्वारा कीटनाशकों के इस्तेमाल एवं कृत्रिम रोशनी के अत्यधिक इस्तेमाल द्वारा भी पैदा होते हैं। इन सभी वजहों से प्रदूषण पैदा होता है जो जीवन के लिए खतरनाक है। प्रकृति की प्रतिस्थापन करने की क्षमता की तुलना में अधिक तेज दर से  प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का दुष्परिणाम हमें हवा, जल या भूमि के प्रदूषण के रूप में मिलता है। मानवीय गतिविधियों के अलावा समय-समय पर कुछ अन्य प्राकृतिक गतिविधियां भी जैसे ज्वालामुखी विस्फोट, जंगल में लगी हुई आग, इत्यादि से भी प्रदूषण फैलता है। वैश्वीकरण भी प्रदूषण का एक और प्रमुख कारण बनकर उभरा है और प्रदूषण को बढ़ाने में इसका योगदान बढ़ता ही जा रहा है।

निष्कर्ष

प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रति हर व्यक्ति की कुछ न कुछ जिम्मेदारी है जैसे कचरा निर्धारित जगह पर ही फेंकना, वृक्षारोपण, अपना वाहन इस्तेमाल करने के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना इत्यादि। हमें संसाधनों के अत्यधिक खपत से बचना होगा एवं खपत के बाद अपशिष्ट संसाधनों के जानबूझकर किए गए लापरवाह निपटान करने की अपनी प्रवृत्ति पर लगाम लगाना होगा और साथ ही अपशिष्ट संसाधनों को साफ करके दुबारा इस्तेमाल करने की प्रक्रिया का विकास करना होगा तभी प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। प्रदूषण को तब तक कम या नियंत्रित नही किया जा सकता है जब तक सभी लोगों को धरती मां के प्रति अपनी जिम्मेदारी की एहसास ना हो जाए।

प्रदूषण पर लेख 2 (500 शब्द)

प्रदूषण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा वातावरण गंदा, अस्वस्थ एवं मनुष्यों तथा अन्य जीव-जंतुओं के रहने के लिए लिए अनुपयुक्त हो जाता है। यह दृश्य एवं अदृश्य दोनो ही तरह के प्रदूषकों के उत्सर्जन द्वारा फैलता है। प्रदूषण प्राकृतिक रूप से तथा मनुष्यों द्वारा जानबूझकर या गलती से फैल सकता है।

प्रदूषण की वजह से कुछ देशों में अपंग या विकारयुक्त बच्चों का जन्म हो रहा है और साथ ही वहां मृत्यु दर भी बढ़ रही है। मनुष्य नियमित रूप से विषाक्त हवा में श्वास ले रहे हैं और इस वजह से प्रदूषण के संपर्क में आ रहे हैं।

प्रदूषण को अगर समाप्त नहीं किया जा सकता तो कम-से-कम नियंत्रित तो किया ही जा सकता है। कुछ साधारण उपाय जैसे कि पर्यावरण में हरियाली को प्रश्रय देना, कचरे का उचित निपटान, इत्यादि द्वारा पर्यावरण की व्यवस्था को संतुलित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास किया जा सकता है।

प्रदूषण निवारक उपाय

  1. पेड़ या बाग-बगीचे लगाए जिससे प्रदूषित हवा साफ हो सके और वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाई जा सके।
  2. जब इस्तेमाल न हो रहे हों तब विद्युत उपकरणों जैसे लाइटें, पंखे, मशीन, इत्यादि के स्विचों को बंद कर दें।
  3. विद्युत ऊर्जा की तुलना में प्राकृतिक ऊर्जा का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें जैसे कि कपड़ों को प्राकृतिक तरीके से सुखाएं।
  4. जहां तक हो सके पुनर्चक्रण करने योग्य उत्पादों का प्रयोग करें।
  5. प्लास्टिक की थैलियों के बजाय कागज के थैलियों का इस्तेमाल करें।
  6. कागज की बर्बादी से बचें और इसका इस्तेमाल दोनो तरफ से करें।
  7. खतरनाक रसायनों के उपयोग को प्रतिबंधित करें।
  8. हीटर एवं एयर कंडीशनर के अत्यधिक इस्तेमाल से बचें।
  9. ध्वनि, वायु एवं प्रकाशीय प्रदूषण से बचने के लिए सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल करें।
  10. धरती की रक्षा करने के लिए तेल, कूड़ा, सीवेज का पानी इत्यादि को इधर-उधर न बिखेरें।
  11. विवाह समारोहों एवं दीवाली, आदि त्योहारों के दौरान पटाखें न जलाएं।
  12. खाद्य सामग्रियों, पैकेटों इत्यादि से छुटकारा पाने के लिए उन्हें समुद्रों, नदियों इत्यादि में न फेंकें।

प्रदूषण हमारे पारिस्थितिकी तंत्र एवं पर्यावरण को असंतुलित कर देता है। उपर बताए गए छोटे-छोटे उपायों को प्रयोग में लाकर हम अपने-अपने स्तर पर प्रदूषण को प्रतिबंधित कर सकते हैं लाखों लोग हर साल प्रदूषण की वजह से उत्पन्न विभिन्न रोगों के कारण मर जाते हैं। प्रदूषण से पर्यावरण की रक्षा स्वस्थ जीवन जीने की कुंजी है। पिछले कुछ वर्षों में मानव और प्राकृतिक कारणों से प्रदूषण के स्तर में वृद्धि की वजह से धरती के पारिस्थितिकी तंत्र को भारी क्षति पहुंची है। जीवन शैली, और जीवों का आवास आदि सब कुछ प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहे है। लेकिन मनुष्यों द्वारा आकस्मिक एवं जानबूझकर की जाने वाली कार्रवाई को आसानी से रोका जा सकता है और इससे प्रदूषण के उत्पत्ति को नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रदूषण के प्रकार

प्रदूषण के मुख्य प्रकार एवं उनके कारण

भूमि प्रदूषण: धरती की सतह पर पर अपशिष्ट पदार्थों का जमा होना, सड़कों पर कूड़ा डालना, औद्योगिक मलबा, कीटनाशक इत्यादि प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। जमीन पर पड़े-पड़े कूड़ा सड़ता रहता है और उससे हानिकारक गैस निकलनी शुरू हो जाती है और प्रदूषण फैलने लगता है।

जल प्रदूषण: नदियों या महासागर में निपटान के लिए कूड़े को प्रवाहित करने से जलीय निकायों में प्रदूषण फैल जाता है। बिना साफ किया हुआ मलजल, तेल का रिसाव, रासायनिक मल, इत्यादि जल में मिल जाते हैं और जल प्रदूषित हो जाता है।

वायु प्रदूषण: जीवाश्म ईंधन को जलाना, वाहनों से मोनो ऑक्साईड, कार्बन डाई ऑक्साईड गैसों का उत्सर्जन, परमाणु विकिरण, औद्योगिक प्रदूषण इत्यादि द्वारा वायु प्रदूषण फैलता है।

ध्वनि प्रदूषण: गाड़ी के हॉर्न की आवाज, तेज संगीत, निर्माण मशीनरी की ध्वनि एवं अन्य कई मानवीय गतिविधियों द्वारा शोर उत्पन्न होता है और इस तरह ध्वनि प्रदूषण पैदा होता है जिससे मानव, पशु एवं उनका प्राकृत्तिक परिवेश प्रभावित होता है।

ऊष्मीय प्रदूषण: विनिर्माण गतिविधियों द्वारा पानी एवं जमीन के तापमान में वृद्धि हो जाता है और इससे समुद्री जीव जंतुओं एव् पेड़-पौधों के जीवन पर असर पड़ता है। इस तरह की गतिविधियों से ऊष्मीय प्रदूषण फैलता है।

प्रदूषण पर लेख 3 (600 शब्द)

आज प्रदूषण दुनिया के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। धुआं या हवा में फैली धूल प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है और यह मनुष्य के लिए बहुत बुरा है क्योंकि यह सीधे फेफड़ों को प्रभावित करता है। सीवेज एवं अन्य हानिकारक अवयवों का पानी में मिलना भी प्रदूषण का एक प्रमुख प्रकार है जो लोगों को अस्वस्थ बना देता है क्योंकि इसमें बिमारी फैलाने वाले रोगाणु एवं वायरस मिल जाते हैं। अचानक तेज गति से हुए औद्योगिकीकरण के परिणामस्वरूप पर्यावरण पर बहुत बुरा असर पड़ा है और भूमि, वायु एवं जल के संसाधनों के विषाक्त पदार्थों तथा अन्य प्रदूषकों द्वारा दूषित होने की कई घटनाएं हुई हैं। इससे मनुष्यों को गंभीर स्वास्थ्य से संबंधित जोखिमों के साथ ही परिस्थितिकी प्रणालियों को भी खतरा पैदा हो गया है।

हर देश अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वस्तुओं के निर्माण के दौरान प्राकृतिक संसाधनों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। उपरोक्त सभी कारणों के लिए विनिर्माण एक प्रमुख वजह है जिससे बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैलता है। ऐसा पाया गया है कि किसी निर्माण स्थल जहां बहुत शोर होता रहता है और साथ ही जोर-शोर से निर्माण की गतिविधि भी चलती रहती है, के बगल में रहने वाले लोग अक्सर बिमार पड़ जाते हैं।

प्रदूषण को हम जीवमंडल के किसी भी घटक में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आए ऐसे बदलाव के रूप देख सकते हैं जिसकी वजह से जीव-जंतुओं एवं मऩुष्यों को नुकसान पहुंचता है और उससे औद्योगिक प्रगति, सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा या वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस सब के बीच सबसे बड़ी विडंबना यह है भले ही हमें पता चल जाता है कि पृथ्वी प्रदूषित हो रही है फिर भी हम अपनी ही गतिविधियों पर अंकुश न लगाते हुए जानबूझकर वही गतिविधियां करते हैं जिनसे प्रदूषण फैलता है और इस प्रकार हम खुद ही अपने लिए कब्र खोदते हैं।

सरकार की भूमिका

सरकार प्रदूषण की रोकथाम के लिए विभिन्न नीतियां एवं अधिनियम बनाए हैं जो कई तरीके से प्रदूषण को नियंत्रित करने पर केंद्रित है और उनमें से कुछ निम्न प्रकार हैं:

स्वच्छ और कम अपशिष्ट पैदा करने वाली प्रौद्योगिकी को अपनाना, पुनर्चक्रण एवं पुनः प्रयोग करना, पर्यावरण की लेखा परीक्षा, प्रदूषण की निगरानी, जहां तक संभव हो सके स्रोत पर ही खतरनाक पदार्थों को कम करना, कचरे के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना इत्यादि। "प्रदूषण की रोकथाम के दृष्टिकोण" के नाम से एक अवधारणा है जिसके अंतर्गत स्रोत पर ही प्रदूषण की मात्रा को कम करने की क्षमता में वृद्धि करने का प्रयास किया जाता है। सरकार की नीतियों को प्रभावी करने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं जिनमें वैधानिक कड़े नियमों के अलावा, पर्यावरण मानकों के विकास करना, वाहनों के माध्यम से उत्पन्न प्रदूषण को नियंत्रित करना एवं स्थानिक पर्यावरणीय योजना जिसके अंतर्गत औद्योगिक सम्पदा और क्षेत्रीय मानचित्र तैयार करना आदि शामिल हैं।प्रदूषण में कमी लाने के लिए सरकार का नीति वक्तव्य प्रदूषण के निवारक पहलुओं पर जोर देता है और साथ ही ऐसे प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की वकालत करता है जिसकी मदद से प्रदूषण को कम किया जा सके।प्रदूषण नियंत्रण वर्तमान दौर में पर्यावरण के लिए आवश्यक है और सरकार ने प्रदूषण से बचाव करने के लिए उद्योगों द्वारा प्रदूषण को एक आर्थिक समस्या के समान ही महत्व दिए जाने एवं उन्हें स्वयं ही प्रदूषित / विषाक्त / हानिकारक गैसों की उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

सरकार द्वारा किए जा रहे कुछ प्रमुख प्रदूषण नियंत्रण के उपाय इस प्रकार हैं: ·

  • अपशिष्टों की मात्रा को कम से कम करने की तकनीकों एवं उचित प्रदूषण नियंत्रण उपायों का परिपालन।
  • स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और प्रदूषण नियंत्रण के उपयोग पर कार्यक्रमों द्वारा जागरूकता संदेशों का प्रसार करना।
  • सतत विकास के लिए सहायता।
  • प्लास्टिक की थैलियों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध, कागज की थैलियों का निर्माण करना।
  • हार्न प्रतिबंधित क्षेत्रों का निर्माण
  • औद्योगिक साइटों को शहर से दूर बनाने की नीति।
  • विभिन्न स्थानों पर कूड़ा-घर बनाना ताकि भूमि पर जहां-तहां कचरा फेंकने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाई जा सके।

पर्यावरण पर खतरनाक प्रभाव डालने वाले इस प्रदूषण से निपटने के लिए जोरदार प्रयास किए जाने चाहिए। प्रदूषण विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। जल प्रदूषण को रोकने के लिए सीवेज एवं कारखानों के कचरे का ठीक से निपटारा किया जाना चाहिए। पर्यावरण प्रदूषण आज एक वैश्विक समस्या है। जन जागरूकता प्रदूषण को रोकने के लिए बहुत जरूरी है। जनसंख्या नियंत्रण, पर्यावरण प्रदूषण से दुनिया को बचाने में सहायता करेगा। प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग वैज्ञानिक तरीके से करना पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए लिया गया एक और कदम है।

---------------

प्रदूषण विषय पर लेख 4 (800 शब्द)

प्रदूषण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा कुछ खतरनाक प्रदूषकों द्वारा पर्यावरण को दूषित कर दिया जाता है और परिणामस्वरूप पारिस्थितिकी तंत्र अव्यवस्थित हो जाता है एवं इससे सीधे या परोक्ष रूप से परिस्थितिकी तंत्र में निवास करने वाले मनुष्य, पशु-पक्षी एवं पौधों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। प्रदूषण द्वारा प्राकृतिक व्यवस्था अस्त व्यस्त हो जाती है और इस वजह से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है। जल, वायु एवं मिट्टी के भौतिक, रासायनिक या जैविक विशेषताओं में ऐसा अवांछनीय परिवर्तन होना जिससे किसी भी जीव का जीवन बुरी तरह से प्रभावित होता है या उसके स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो सकता है, प्रदूषण कहलाता है। मनुष्य द्वारा की गई तकनीकी प्रगति भी पृथ्वी पर प्रदूषण के मुख्य कारणों में से एक है।

प्रदूषण के विभिन्न प्रकार हैं, लेकिन मुख्य रूप से निम्नलिखित जीवन के लिए खतरनाक हैं एवं ये जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं:

वायु प्रदूषण

हवा में हानिकारक गैसों के छोड़े जाने की वजह से उत्पन्न सबसे खतरनाक और व्यापक प्रदूषण वायु प्रदूषण है। यह मुख्यत: कारखानों द्वारा वातावरण में रसायनों के प्रत्यक्ष रूप से छोड़े जाने की वजह से होता है। प्रदूषित हवा सांस द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश कर जाती है और हमारे शरीर के सभी प्रणालियों और मुख्य रूप से श्वसन क्रिया को प्रभावित करती है।

वायु प्रदूषण के कारण: ईंधन का जलना, वाहनों से निकलता धुआं, आतिशबाजी, जंगलों में लगने वाली आग, कारखानों से खतरनाक रसायनों या रसायनिक गैसों का उत्सर्जन।

वायु प्रदूषण के प्रभाव: वायु प्रदूषण जीवन के लिए खतरनाक बीमारियों जैसे कि अस्थमा, कैंसर, ब्रांकाईटिस, फेफड़ों के विकार सहित कई अन्य बीमारियों का जनक है। ओजोन परत का ह्रास भी वायु प्रदूषण की एक प्रमुख वजह है।

वायु प्रदूषण रोकने के उपाय: ऊर्जा संरक्षण, आतिशबाजी निषेध, ऊर्जा की कम खपत करना, ऊर्जा का पुनः प्रयोग एवं पुनर्चक्रण, ऊर्जा-कुशल उपकरणों का इस्तेमाल, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग इत्यादि।

मृदा प्रदूषण

मिट्टी में हानिकारक पदार्थों का निस्तारण मृदा प्रदूषण का प्रमुख कारण है। मृदा प्रदूषण मानव और अन्य जीवों को अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुंचाता है। पौधों द्वारा मिट्टी में से लिए गए पोषक तत्व इन पौधों पर निर्भर रहने वाले उपभोक्ताओं के शरीर में चले जाते हैं और इस प्रकार मिट्टी में मिले हुए प्रदूषक तत्व सिर्फ पौधों को ही नुकसान नहीं पहुंचाते बल्कि ये अप्रत्यक्ष रूप से पूरी आहार श्रृंखला को प्रभावित करते हैं।

मृदा प्रदूषण के कारण: बड़े कारखानों से औद्योगिक कचरे का निस्तारण, रासायनिक कचरे का निस्तारण, कृषि में इस्तेमाल होने वाले रासायन, वनों की कटाई, कीटनाशकों का उपयोग, खनन गतिविधियां, पेड़ों और पौधों को जलाना, इत्यादि।

मृदा प्रदूषण के प्रभाव: मृदा प्रदूषण पौधों के विकास, मिट्टी की उर्वरता, मिट्टी की संरचना में परिवर्तन इत्यादि को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है और साथ ही इसकी वजह से विषाक्त धूल भी पैदा होती है एवं मनुष्यों में जटिल बिमारियों का संचार होता है।

मृदा प्रदूषण रोकने के उपाय: प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करना, कूड़े का उत्पादन घटाना, उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग किए बिना जैविक खाद्य पदार्थों की फसल पैदा करना, स्वाभाविक तरीके से सड़नशील उत्पादों का प्रयोग, तरल रासायनों को बिखरने से रोकने वाले पात्र में रखना, ठोस अपशिष्टों का उपचार, वस्तुओं का पुनः प्रयोग एवं पुनर्चक्रण, इत्यादि।

जल प्रदूषण

पृथ्वी की सतह का एक बड़ा हिस्सा जल से आच्छादित है एवं दुनिया में पाए जाने वाली कुल प्रजातियों में आधे से ज्यादा पानी में रहते हैं। जल मनुष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक है और साथ ही यह प्राकृतिक वनस्पतियों के जीवित रहने के लिए भी अत्यावश्यक है। एक प्रदूषित झील से उपयोग किया गया पानी सीधे तौर पर उपयोगकर्ता को दूषित कर देता है।

जल प्रदूषण के कारण: खतरनाक प्रदूषकों का प्रत्यक्ष समावेश, कारखानों और उद्योगों द्वारा पानी में कचरे का निपटान, मनुष्यों द्वारा पानी में कचरे का निपटान, इत्यादि।

जल प्रदूषण के प्रभाव: जल प्रदूषण की वजह से जलीय जीव विलुप्त होने के कगार पर हैं, दूषित पानी से गंभीर स्वास्थ्य संबंधी विकार पैदा होते हैं, इत्यादि।

जल प्रदूषण रोकने के उपाय: नदियों या महासागरों में अपशिष्ट या कचरा न फेंके, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग, पानी में तेल, दवाईयां, हानिकारक तरल पदार्थ इत्यादि न फेंके, सफाई कार्य के लिए केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित तरल पदार्थ ही खरीदें, इत्यादि।

ध्वनि प्रदूषण: ध्वनि के स्तर में वृद्धि की वजह से ध्वनि प्रदूषण पैदा होता है। यह रसायन अथवा विषाक्त पदार्थों या खतरनाक गैसों के निस्तारण की वजह से नहीं बल्कि वातावरण में शोर उत्पन्न करने की वजह से पैदा होता है। शोर को एक ऐसी अप्रिय ध्वनि, जो मनुष्य के कानों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, के रूप में परिभाषित किया गया है। हालांकि इस प्रदूषण की वजहें अन्य दूसरे प्रकार के प्रदूषणों से अलग हैं लेकिन इस प्रदूषण का प्रभाव अन्य प्रदूषणों के समान ही खतरनाक हैं। यह सीधे मानव मस्तिष्क में प्रवेश करके, मानसिक विकारों को पैदा करने की क्षमता रखता है।

ध्वनि प्रदूषण का कारण: ध्वनि प्रदूषण का प्रमुख कारण चलते हुए वाहनों से निकलती हॉर्न की आवाज, तेज संगीत, साइटों पर मशीनों का चलना, रेडियो, टेलीविजन इत्यादि हैं।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव: मनोवैज्ञानिक बीमारी, बुरा व्यवहार, चिड़चिड़ाहट, उच्च रक्तचाप, अवसाद, विस्मृति, झुंझलाहट, तनाव, आक्रामकता एवं अन्य कई बीमारियां। यह न केवल मनुष्य बल्कि पशुओं को भी प्रभावित करता है एवं कई बार शोर के असहनीय स्तर तक पहुंचने की वजह से ध्वनि प्रदूषण मृत्यु का कारण भी बन जाता है।

ध्वनि प्रदूषण रोकने के उपाय: जब तक जरूरी न हो हॉर्न न बजाने के नियम का पालन, भारी मशीनों के लिए ध्वनिरोधी कमरों का निर्माण, लाउडस्पीकरों का दुरुपयोग रोकना, सड़कों के किनारे पेड़ लगाना इत्यादि ध्वनि प्रदूषण को रोकने के कुछ उपाय हैं।

निष्कर्ष

पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते हुए प्रदूषण की वजह से चिंताजनक रूप से मनुष्यों में बिमारियों की वृद्धि दर, मनुष्यों, जानवरों एवं पौधों की मृत्यु दर में इजाफा हुआ है। प्रदूषण हालांकि प्राकृतिक और मानवीय दोनो ही गतिविधियों द्वारा पैदा होता है लेकिन मुख्यत: यह मानव गतिविधियों के कारण पैदा होता है जिन्हें नियंत्रित करके आसानी से प्रदूषण की दर को कम किया जा सकता है।