मैं कौन हूँ पर निबंध

मैं एकमात्र व्यक्ति हूं जो पूरी तरह से अपने आप को जानता हूं। हालांकि जब भी लोग मुझसे अपने बारे में कुछ बताने के लिए कहते हैं तो मैं अक्सर उलझन में पड़ जाता हूँ। मैं ज्यादातर समय यह सोच कर घबरा जाता हूँ कि मुझे कहना क्या है। बहुत से लोग इस परेशानी का अनुभव करते हैं और यह अक्सर बहुत शर्मनाक होता है जबकि हम खुद को अच्छी तरह जानते हैं। हमें पता होना चाहिए कि कैसे खुद को परिभाषित करना है।

क्या आपके साथ ऐसा हुआ है कि एक साक्षात्कार के दौरान आपको अपने बारे में कुछ पंक्तियां बोलने के लिए कहा गया हो और आप चुप-चाप गूंगे की तरह बैठे रहे? जीं हा, ज्यादातर लोग इस समस्या का सामना करते हैं। क्या यह विडंबना नहीं है कि हम खुद को परिभाषित करने में सक्षम नहीं हैं? हमने मैं कौन हूँ इस विषय पर विभिन्न लंबाई के निबंध उपलब्ध करवाएं हैंI आप अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी भी निबंध का चयन कर सकते हैं:

मैं कौन हूँ पर निबंध (Essay on Who Am I in Hindi)

मैं कौन हूँ पर निबंध 1 (200 शब्द)

मैं एक शांत मनोवैज्ञानिक और उत्साही व्यक्ति हूं और अपने खुद के काम में व्यस्त होना पसंद करता हूँ लेकिन अगर कोई मेरी ज़िंदगी में हस्तक्षेप करता है या परेशानी खड़ी करता है तो मैं बिना वक़्त गवाएं उसे जवाब देने की हिम्मत रखता हूं। मैं अपनी चीजों को सही जगह रखता हूं और उन्हें किसी को छूने नहीं देता हूं।

मेरे हंसमुख और सरल स्वभाव के कारण मेरे कई दोस्त हैं। मेरे दोस्त, चचेरे भाई और परिवार के अन्य सदस्य मेरे साथ समय बिताना पसंद करते हैं। हम सभी एक साथ अच्छी गुणवत्ता का समय बिताते हैं। हालांकि वे जानते हैं कि मैंने अपने लिए कुछ सीमाएं निर्धारित की हैं और जब कोई उन्हें पार करता है तो मैं अपना आपा खो देता हूं। इसलिए हालांकि वे मेरे साथ का आनंद उठाते हैं पर वे यह सुनिश्चित करते हैं कि वे उन चीजों के बारे में सावधान रहें जो मैं पसंद नहीं करता।

मैं पढ़ाई में अच्छा हूं और अतिरिक्त अभ्यास गतिविधियों में भी भाग लेना चाहता हूं। मैं गणित को विशेष रूप से पसंद करता हूं। मुझे यह विषय बहुत दिलचस्प लगता है और जब भी मुझे समय मिलता है मैं गणित की समस्याओं को हल करना पसंद करता हूँ। मैं बड़ा होकर इस विषय में पीएचडी करना चाहता हूं। मैं बास्केट बॉल भी खेलना पसंद करता हूँ। मैं अपने स्कूल की बास्केट बॉल टीम का कप्तान हूं और हमने कई इंटर-स्कूल बास्केट बॉल टूर्नामेंट जीते हैं। इस खेल को खेलना मेरे लिए तनाव को दूर भगाने का सबसे अच्छा तरीका है।


 

मैं कौन हूँ पर निबंध 2 (300 शब्द)

प्रस्तावना

लोग मुझे अलग-अलग नामों से बुलाते हैं - कुछ मुझे अंतर्मुखी कहते हैं, कुछ मुझे प्यारा कहते हैं, कुछ मुझे गुस्सैल कहते हैं जबकि कुछ कहते हैं कि मैं अपने आप में रहता हूं। लोगों को दूसरों के बारे में बात करने की आदत होती है। वे न्याय करने और दूसरों के बारे में बातें फ़ैलाने के लिए तत्पर रहते हैं। मुझे लगता है कि किसी के भी बारे में बातें फ़ैलाना गलत है। हम इंसान हैं और हम हर दिन कई भावनाओं का अनुभव करते हैं। मैं हर दिन विभिन्न भावनाओं का मिश्रण भी अनुभव करता हूं और मुझे किसी भी पूर्वोक्त नामों से बुलाना गलत होगा।

मेरी प्रकृति और लक्षण

मैं एक समझदार प्रवृत्ति का व्यक्ति हूं जो जीवन के हर पल का आनंद लेता है। मैं अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों या अन्य लोगों के जीवन में हस्तक्षेप करना पसंद नहीं करता और उनसे भी यही उम्मीद करता हूं। मैं चाहता हूं कि वे अपने दूसरों के कामों में टांग अड़ाने की बजाए अपने स्वयं के कामों में व्यस्त रहे। लोग अक्सर मेरे इसी शांत स्वभाव को गलत समझ बैठते हैं और समझते हैं कि मैं अभिमानी और बिगड़ैल हूँ। उन्हें लगता है कि मेरा रवैया गलत है और मैं खुद को उनसे बेहतर समझता हूं। पर यह सच नहीं है। मैं नहीं चाहता हूं कि लोग मुझे तंग या परेशान करें क्योंकि मैं ऐसा इंसान हूँ जो हमेशा मदद के लिए तैयार रहता हूं। अगर लोगों को वास्तव में मेरी मदद की आवश्यकता होती है तो मैं लोगों की मदद करने के लिए कुछ भी करने में संकोच नहीं करता।

मैं भी काफी अनुशासित हूँ। हर सुबह जाग कर मैं सूची तैयार करता हूं कि मुझे क्या-क्या करना है। मैं उसी क्रम में कार्य करना चाहता हूं जो मैंने तैयार किया है और समय सीमा के भीतर करना चाहता हूँ जो मैंने अपने लिए निर्धारित किया है तथा इसे पूरा करने की अपनी पूरी कोशिश करता हूं। समय पर इन कार्यों को पूरा करने में सक्षम नहीं होने से मुझे असंतुष्टता हो सकती है और मुझे गुस्सा भी आ सकता है।

निष्कर्ष

मेरे दोस्त अक्सर मुझे शांत, चिंतामुक्त और अनुशासन का एक अनूठा संयोजन कहते हैं। मुझे ईश्वर से हमेशा समर्थन करने वाला परिवार तथा पागल और मज़ेदार दोस्तों के एक समूह का आशीष मिला है। मैं इतने अच्छे जीवन को मुझे वरदान में देने के लिए भगवान का शुक्रिया अदा करता हूं।

मैं कौन हूँ पर निबंध 3 (400 शब्द)

प्रस्तावना

मैं एक साधारण लड़की हूं जो सरल जीवन को पसंद करती है। जैसे जैसे मैं बड़ी हो रही हूं मैं स्वतंत्र रहने का सपना देखती हूँ। मैं प्यारे संबंध बनाए रखना चाहती हूँ लेकिन मैं किसी चीज़ के लिए किसी पर भी निर्भर नहीं रहना चाहती। मैं दोनों आर्थिक और भावनात्मक रूप से स्वतंत्र और मजबूत होना चाहती हूं।

मेरा लक्ष्य

मैं एक बहुत ही महत्वाकांक्षी लड़की हूँ। मैं पढाई में हमेशा अपनी कक्षा में प्रथम आती रही हूं और जैसे-जैसे जीवन में अधिक चुनौतियां आती जाएँगी मैं आगे भी इसी प्रवृत्ति को जारी रखना चाहती हूं। मैं विज्ञान विषय पढ़ना चाहती हूं क्योंकि जैसे ही मैं कक्षा ग्यारवीं में प्रवेश करुँगी तो मुझे वहां जीव विज्ञान पढ़ना है। आयुर्वेद के क्षेत्र ने हमेशा मुझे मोहित किया है। मैं इस प्राचीन विज्ञान का अध्ययन करना चाहती हूं और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और उपचारों की सहायता से विभिन्न मानसिक और शारीरिक बीमारियों से लोगों को छुटकारा दिलाना चाहती हूं।

चिकित्सा में एक कैरियर बनाना न केवल सम्मानजनक है बल्कि काफी आकर्षक भी है। मैं इन दोनों पहलुओं के कारण न केवल चिकित्सा क्षेत्र में जाना चाहती हूं बल्कि ऐसा इसलिए भी क्योंकि मैं जरूरतमंदों की मदद करना चाहती हूं। मैं अपना स्वयं का क्लिनिक खोलना चाहती हूं या पहले से स्थापित आयुर्वेदिक केंद्र के साथ काम करने के अच्छे अवसर तलाशना चाहती हूं। इसके अतिरिक्त मैं दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मुफ्त में चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए 2-3 महीने में कम से कम एक बार चिकित्सा शिविरों का आयोजन करना चाहती हूं।

मेरी आदर्श

मेरी आदर्श मेरी मां है। हमारे बचपन के दिनों से मेरे और मेरी बहन के लिए वह प्रेरणा का स्रोत रही है। मेरी माँ नौकरी करती है और अपने करियर में उन्होंने महान ऊंचाइयों को हासिल किया है। उनके कार्यालय में हर कोई उनके मेहनत और काम के प्रति ईमानदार होने के लिए उनकी प्रशंसा करता है। घर का ख्याल रखते वक़्त उनकी यही ख़ूबी झलकती है। वह यह हर रोज़ सुनिश्चित करती है कि घर के सामान की सारी व्यवस्था बनी रहे। वह स्वादिष्ट भोजन बनाती है और इस बात का खास ख्याल रखती है कि हम सभी साथ बैठें और रोजाना कम से कम एक बार साथ भोजन करें। यद्यपि मेरी माँ काम करती है और उन्हें घर का ख्याल भी रखना है पर दोनों जिम्मेवारियों को निभाने के बावजूद भी वे हमारा ख्याल बखूबी रखती हैं। वे हमारे अध्ययन में हमें मदद करती है और अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों के लिए हमें प्रोत्साहित करती है। वह वास्तव में एक ऑलराउंडर है। मैं सिर्फ मेरी मां की तरह बनने की कामना करती हूं। मैं अपने निजी और व्यावसायिक जीवन के बीच के संतुलन को वैसे ही बनाए रखना चाहती हूँ जैसे उन्होंने बनाए रखा है।

निष्कर्ष

बहुत से लोग अपने जीवन में उच्च लक्ष्य रखते हैं और बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं। ऐसा करने के प्रयास में वे आखिरकर अपने स्वास्थ्य से हाथ धो बैठते हैं। मैं भी उन लोगों जैसी हूँ जो अत्यंत महत्वाकांक्षी हैं परन्तु मेरे लक्ष्य में न केवल सफल और धनी होना शामिल है बल्कि मैं स्वस्थ और खुश भी रहना चाहती हूँ।

मैं कौन हूँ पर निबंध 4 (500 शब्द)

प्रस्तावना

मैं बहुत दयालु व्यक्ति हूँ। मेरे इस विशेषता ने मुझे कई मित्र बनाने में मदद की है। इस वजह से मेरे परिवार के सदस्य और रिश्तेदार भी मेरी प्रशंसा करते हैं। हालांकि मेरी इस विशेषता ने कई बार मुझे मुसीबत में भी डाला है। समय बीतने के साथ मैंने सीखा है कि दयालु हृदय रखना और अन्य लोगों की मदद करना अच्छा है लेकिन हर चीज़ का ज़रूरत से ज्यादा होना खराब है।

कैसे मेरे दयालु स्वभाव ने मुझे मुसीबत में डाला

ऐसा कहा जाता है कि जो लोग दूसरों की सहायता करते हैं वे हमेशा संतुष्ट और खुश होते हैं। मेरे अंदर दूसरों के लिए दया स्वाभाविक रूप से है और मुझे दूसरों की मदद करना मुझे अच्छा लगता है। यह मुझे संतुष्टि की भावना देता है। स्कूल, घर या कहीं भी हो मुझे आसपास के हर किसी की मदद करना अच्छा लगता है। मैं चाहता हूं कि हर कोई खुश रहें। मैं सभी के चेहरे पर मुस्कुराहट लाने की पूरी कोशिश करता हूं।

हालांकि मेरी इस आदत ने अक्सर मेरे लिए समस्याएं पैदा की हैं। उदाहरण के लिए क्योंकि मैं पढ़ाई में अच्छा हूं तो छात्र अक्सर मेरी नोटबुक अपने काम को पूरा करने के लिए ले जाते हैं। यहां तक ​​कि जब अगले दिन परीक्षा हो और मेरे साथी छात्र मेरी मदद मांगते हैं तो भी मैं अपनी नोटबुक उन्हें देने से इनकार नहीं कर सकता। कई बार मेरे सहपाठियों ने समय पर मेरी नोटबुक वापस नहीं की है और ऐसे मामलों में परीक्षा के लिए तैयारी करना मेरे लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। कभी-कभी मुझे मेरी नोटबुक फटी हुई मिलती है। मैं दूसरों के लिए अच्छा करना चाहता हूं लेकिन मेरे लिए यह बुरा साबित होता है। कई बार मैं गरीब बच्चों को अपना दोपहर का भोजन देता हूं जो स्कूल जाने के लिए भोजन और धन के लिए भीख मांगते हैं। हालांकि इसके कारण मेरे पास आधे दिन तक खाने के लिए कुछ नहीं रह जाता। इसका मेरे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे दिनों में मुझे सिरदर्द, पेट में दर्द और एसिडिटी की समस्या हो जाती है।

कैसे मैंने खुद को बेहतर बनाया

मेरी माँ मुझे इस तरह से पीड़ित होते नहीं देख सकती। इसलिए वह मुझे ऐसे काम करने की इज़ाज़त नहीं देती जिनका मुझ पर बुरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि पहले मैंने नसीहतों को खारिज कर दिया था क्योंकि मुझे लोगों की मदद करना अच्छा लगता था लेकिन समय गुज़रने के साथ मुझे एहसास हुआ कि हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए लेकिन सबसे पहले खुद का ध्यान रखना आवश्यक है। एक प्रसिद्ध उदाहरण है, "आप एक खाली कप से चाय नहीं डाल सकते। पहले अपना ध्यान रखिए"। इसका अर्थ है कि हम दूसरों मदद तब ही कर सकते हैं जब हम मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं। हम खुद को भूखा रखकर दूसरों को खाना नहीं खिला सकते हैं।

तो भले ही मैं लोगों की मदद करने की इच्छा को महसूस कर रहा हूँ पर अब मैं खुद को रोकता हूं और खुद से पूछता हूं कि कहीं इसका मुझ पर कोई नकारात्मक प्रभाव तो नहीं पड़ रहा है। अगर जवाब हाँ है तो मैं ऐसा करने से खुद को रोकता हूं। मेरे व्यवहार में इस मामूली बदलाव को देखते हुए कुछ लोगों ने मुझे निर्दयी बोलना शुरू कर दिया है। हालांकि उनका ऐसा बोलना मुझे प्रभावित नहीं करता क्योंकि मुझे पता है कि मैं क्या कर रहा हूं। मेरे परिवार का मानना ​​है कि मैं समझदार बन गया हूं और यही मेरे लिए पर्याप्त है।

निष्कर्ष

मुझे जीवन में नई चीजों को सीखना और उनका अनुभव करना पसंद है। मैं जो कुछ हूं और दूसरों को खुश करने के लिए जो कुछ भी कर सकता हूं उसके लिए मैं आभारी हूं। हालांकि अब मैं इस बात का ध्यान रखता हूँ कि दूसरों की देखभाल करने और उन्हें खुश करने के लिए मुझे सबसे पहले खुद का ख्याल रखना होगा।


 

मैं कौन हूँ पर निबंध 5 (600 शब्द)

प्रस्तावना

मैं कौन हूँ? मैं एक लड़की हूं जो अभी अपनी किशोरावस्था में प्रवेश कर चुकी है। मैं अपने आप को आस-पास के लोगों के प्यार और समर्थन के साथ भरा हुआ महसूस करती हूं। मेरे जीवन में उच्च महत्वाकांक्षाएं हैं और मैं अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहती हूं।

मैं एक संयुक्त परिवार में रहती हूँ। परिवार में हम छह लोग हैं - मेरे दादा, दादी, पिता, मां और मेरा छोटा भाई। परिवार में हम सभी एक-दूसरे के बहुत करीबी हैं और हर त्योहार और अवसर को बड़े उत्साह से मनाते हैं। हमारा घर अक्सर विशेष रूप से सप्ताहांत और छुट्टियों पर मेहमानों से भर जाता है। मेरा परिवार मुझे परिभाषित करता है। मैं जो कुछ हूं सिर्फ़ उनके कारण हूं। मेरे परिवार का प्रत्येक सदस्य मुझे प्रेरणा देता है और मेरे जीवन को नई दिशा देता है। मैं संक्षिप्त में अपने परिवार के हर सदस्य का आपको परिचय देना चाहूंगी क्योंकि इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि मैं कौन हूं और मैं ऐसी क्यों हूं।

मेरा प्यारा परिवार

मेरे दादाजी: मेरे दादा बहुत प्यारे और मददगार हैं। वे मेरा और मेरे भाई का हर चीज में समर्थन करते हैं। अपने बचपन और शुरुआती वयस्कता के दौरान वे भारत के उस हिस्से में रहते थे जो अब पाकिस्तान का एक हिस्सा है। अधिकांश अन्य हिंदुओं की तरह वे यहां विभाजन के दौरान आए थे। उस कठिन समय के दौरान उनके जीवन की कहानी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मेरी दादी: मेरी दादी बहुत धार्मिक महिला है। वे बेहद सख्त हैं पर बहुत प्यारी भी हैं। उन्हें अपने बचपन के दिनों की कई बातें अभी भी याद हैं खास कर उस वक्त की जब वे छोटी थी। अक्सर वे हमें उन दिनों के बारे में बताती हैं हम उनके साथ में बैठकर उन कहानियों को सुनना पसंद करते हैं।

मेरी माँ: मेरी मां नौकरी करने वाली महिला है। वे अपने कार्यालय की देखभाल करने के साथ-साथ घर के काम को भी बहुत अच्छे से संभाल लेती हैं I मेरी माँ हम सबके जागने से बहुत पहले जाग जाती हैं और घर के काम की शुरूआत कर देती हैं। वे खाना बनाती हैं, हमें तैयार करती हैं, हमें स्कूल में भेजती हैं और फिर उसके बाद अपने कार्यालय में जाती है। शाम में वह हमारी पढाई में मदद करती हैं, रसोई के काम-काज को निपटाती हैं और हमारे साथ गुणवत्ता का समय बिताती है। माँ अपने प्यार और प्रेम के साथ परिवार को बांधे रखती है।

मेरे पिताजी: मेरे पिता हर चीज़ के प्रति काफी सख्त हैं। वे चीज़ों को क्रम में रखना पसंद करते हैं। उनके अनुसार सभी को अनुशासित जीवन जीना चाहिए। वे समय के बहुत पाबंद हैं और चाहते हैं कि हम समय का सम्मान करें। वे हमारे परिवार की ताकत का आधार हैं।

मेरा भाई: परिवार में सबसे कम उम्र के होने के नाते मेरे भाई को सभी बहुत प्यार करते हैं। वह हम सभी के लिए खुशी का स्रोत है। वह खेलना पसंद करता है और हर किसी को अपने खेलों से किसी ना किसी तरह जोड़े रहता है। मैं उसके साथ बहुत खास बंधन साझा करती हूं। हम अध्ययन करते हैं, खेलते हैं, खाते हैं, हंसते हैं और यहाँ तक एक साथ रोते भी हैं। हम कई बार लड़ते भी हैं लेकिन समय गवाएँ बिना अपने मुद्दों को फिर से सुलझा लेते हैं।

मेरा परिवार मुझे परिभाषित करता है

ठीक ही कहा गया है कि हमारे दोस्तों की कंपनी और पर्यावरण का हमारे व्यक्तित्व पर बहुत प्रभाव पड़ता है। आज मैं जब खुद को देखता हूं तो मैं पाता हूं कि मैंने अपने परिवार के सदस्यों की विभिन्न आदतों को कैसे विरासत में पाया है। मेरे पास मेरे दादाजी की ताकत और साहस है। लोग मुझे जोशीला और दोस्ताना पाते हैं और मेरा मानना ​​है कि ये सभी गुण मुझे मेरी दादी से मिले हैं। मैं आसपास प्यार के साथ मुस्कुराहट फैला रही हूं और सभी कार्य ईमानदारी से करती हूं और इस गुणवत्ता को मैंने अपनी मां के हासिल किया है। मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं और मेरे पिता की तरह ही लक्ष्य निर्धारित करके कार्य करती हूं और कौन कहता है कि आप केवल अपने बड़ों से सीख सकते हैं? आप उन लोगों से भी सीख सकते हैं जो आपसे उम्र में छोटे हैं। मैं थोड़ी शरारती भी हूँ और मुझे लगता है कि यह मेरे शरारती छोटे भाई के साथ समय बिताने का परिणाम है।

निष्कर्ष

हमारे व्यक्तित्व को सही आकार देने में हमारा परिवार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारे परिवार के बुज़ुर्ग हमें हर दिन महत्व के बारे में बहुत कुछ सिखाते हैं। मुझे इस बात कि बेहद खुशी है कि मेरे पास एक अद्भुत परिवार है। मैं खुश हूँ और मुझे अपने उपर गर्व है।