गरीबी पर निबंध

विद्यार्थियों की मदद के लिये हम यहाँ गरीबी पर विभिन्न निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। आज के दिनों में, किसी भी विषय के बारे में विद्यार्थियों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाने के लिये स्कूल और कॉलेज में शिक्षकों के द्वारा निबंध या पैराग्राफ लेखन के रुप में एक सामान्य कार्यनीति अपनायी जाती है। विद्यार्थियों की जरुरत के अनुसार बेहद सरल और विभिन्न शब्द सीमाओं में सभी निबंधों को लिखा गया है। इसकी मदद से वो किसी भी स्कूली परीक्षा या अन्य प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

गरीबी पर निबंध (पावर्टी एस्से)

Find here some essays on Poverty in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

गरीबी पर निबंध 1 (100 शब्द)

किसी भी व्यक्ति या इंसान के लिये गरीबी अत्यधिक निर्धन होने की स्थिति है। ये एक पराकाष्ठा की स्थिति होती है जब छत, जरुरी भोजन, कपड़े, दवाईयाँ आदि जैसी जीवन को जारी रखने के लिये महत्वपूर्ण चीजों की कमी एक व्यक्ति को महसूस होती है। निर्धनता व्याप्त होने के सामान्य कारण हैं जैसे अत्यधिक जनसंख्या, जानलेवा और संक्रामक बीमारियाँ, प्राकृतिक आपदा, कम कृषि पैदावर, बेरोज़गारी, जातिवाद, अशिक्षा, लैंगिक असमानता, पर्यावरणीय समस्याएँ, देश में अर्थव्यवस्था की बदलती प्रवृति, अस्पृश्यता, लोगों का अपने अधिकारों तक कम या सीमित पहुँच, राजनीतिक हिंसा, प्रायोजित अपराध, भ्रष्टाचार, प्रोत्साहन की कमी, अकर्मण्यता, प्राचीन सामाजिक मान्यताएँ आदि। भारत में निर्धनता को निम्न सरकारी समाधानों के द्वारा घटाया जा सकता है हालाँकि सभी नागरिकों के व्यक्तिगत प्रयासों की जरुरत है।

गरीबी

गरीबी पर निबंध 2 (150 शब्द)

हम निर्धनता को भोजन, उचित घर, कपड़े, दवाईयाँ, शिक्षा और एक जैसे मानवाधिकार की कमी के रुप में परिभाषित कर सकते हैं। गरीबी इंसान को लगातार भूखे रहने, घर के बिना, कपड़ों के बिना, शिक्षा और उचित अधिकारों के बिना रहने को मजबूर करता है। देश में गरीबी के बहुत सारे कारण हैं हालाँकि समाधन भी है लेकिन इन परिस्थितियों में लिये भारतीय नागरिकों के बीच उचित एकता की कमी के कारण, गरीबी दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। किसी भी देश में संक्रामक रोगों का फैलना निर्धनता का एक कारण है क्योंकि गरीब लोग अपने स्वास्थ्य और स्वास्थ्यकर स्थिति का ध्यान नहीं रख सकते।

गरीबी उचित चिकित्सा, स्कूल जाने के लिये, ठीक से बोलने के लिये, तीन वक्त का भोजन खाने के लिये, जरुरी कपड़े पहनने के लिये, खुद का घर खरीदने के लिये, काम के लिये उचित तरीके से पैसा प्राप्त करने आदि के लिये लोगों को अक्षम बनाता है। बीमारी की ओर जाने के लिये एक व्यक्ति को निर्धनता मजबूर करती है क्योंकि वो गंदा पानी पीते हैं, गंदी जगह पर रहते हैं और अपर्याप्त भोजन खाते हैं। गरीबी के कारण शक्तिहीनता और आजादी की कमी होती है।

 

गरीबी पर निबंध 3 (200 शब्द)

गरीबी, दास की उस स्थिति की तरह ही होती है, जब व्यक्ति अपनी इच्छानुसार कुछ भी करने में अक्षम होता है। इसके कई चेहरे हैं जो व्यक्ति, स्थान और समय के अनुसार बदलता रहता है। इसे बहुत तरीकों से परिभाषित किया जा सकता है जोकि व्यक्ति महसूस करता या जीता है। निर्धनता एक परिस्थिति है जिसका कोई भी अनुभव नहीं करना चाहेगा हालांकि प्रथा, स्वाभाव, प्राकृतिक आपदा या उचित शिक्षा की कमी की वजह से इसे ढोना पड़ता है। इंसान इसे जीता है, लेकिन आमतौर पर इससे बचना चाहता है। भोजन के लिये पर्याप्त धन अर्जित करने के लिये, शिक्षा तक पहुँच के लिये, पर्याप्त रहने का स्थान पाने के लिये, जरुरी वस्त्रों के लिये तथा गरीब लोगों के लिये सामाजिक और राजनीतिक हिंसा से सुरक्षा के लिये निर्धनता एक आह्वान है।

ये एक अदृश्य समस्या है, जो एक व्यक्ति और उसके सामाजिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है। गरीबी पूरी तरह से एक निरोध्य समस्या है हालांकि बहुत सारे कारण है जो इसे बीते काफी समय से ढोने के साथ जारी रखे हुए हैं। इसकी वजह से किसी व्यक्ति में स्वतंत्रता, मानसिक और शारीरिक रुप से ठीक न रहना और सुरक्षा की कमी रहती है। ये बहुत जरुरी है कि एक सामान्य जीवन जीने के लिये, उचित शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, पूर्ण शिक्षा, हरेक के लिये घर, और दूसरी जरुरी चीजों को लाने के लिये देश और पूरे विश्व से गरीबी को हटाने के लिये सभी को एक जुट होकर कार्य करना होगा।

 

गरीबी पर निबंध 4 (250 शब्द)

गरीबी एक मानवीय परिस्थिति है जो मानव जीवन में निराशा, दुख और दर्द लाती है। गरीबी पैसे की कमी है और जीवन को उचित तरीके से जीने के लिये सभी चीजों की जरुरत होती है। गरीबी एक बच्चे को बचपन में स्कूल में दाखिला लेने में अक्षम बनाती है और वो एक दुखी परिवार में अपना बचपन बिताने या जीने को मजबूर होते हैं। निर्धनता, पैसों की वजह से दो वक्त की रोटी, बच्चों के लिये किताबें नहीं जुटा पाने और बच्चों का सही तरीके से पालन-पोषण नहीं कर पाने के लिये जिम्मेदार अभिवावक का दुख आदि है। हमलोग गरीबी को बहुत तरीके से परिभाषित कर सकते हैं। भारत में गरीबी देखना बहुत आम-सा हो गया है क्योंकि ज्यादातर लोग अपने जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को भी नहीं पूरा कर सकते हैं। यहाँ पर जनसंख्या का एक विशाल भाग निरक्षर, भूखे और बिना कपड़ों और घर के जीने को मजबूर हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के कमजोर होने का यही मुख्य कारण है। निर्धनता के कारण लगभग भारत में आधी आबादी दर्द भरा जीवन जी रही है।

गरीबी एक स्थिति उत्पन्न करती है जिसमें लोग पर्याप्त आय प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं इसलिये वो जरुरी चीजों को नहीं खरीद पाते हैं। एक निर्धन व्यक्ति अपने जीवन में मूल वस्तुओं के ऊपर बिना अधिकार के जीता है जैसे दो वक्त का भोजन, स्व्च्छ जल, घर, कपड़े, उचित शिक्षा आदि। ये लोग जीने के न्यूनतम स्तर को भी बनाए रखने में विफल हो जाते हैं जैसे अस्तित्व के लिये जरुरी उपभोग और पोषण आदि। भारत में निर्धनता के कई कारण हैं हालांकि राष्ट्रीय आय का गलत वितरण भी एक कारण है। कम आय वर्ग समूह के लोग उच्च आय वर्ग समूह के लोगों से बहुत ज्यादा गरीब होते हैं। गरीब परिवार के बच्चों को उचित शिक्षा, पोषण और खुशनुमा बचपन का माहौल कभी नसीब नहीं हो पाता है। निर्धनता का मुख्य कारण, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, बढ़ती जनसंख्या, कमजोर कृषि, अमीरी और गरीबी के बीच बढ़ती खाई आदि है।

 

गरीबी पर निबंध 5 (300 शब्द)

निर्धनता जीवन की खराब गुणवत्ता, अशिक्षा, कुपोषण, मूलभूत आवयश्यकताओं की कमी, निम्न मानव संसाधन विकास आदि को प्रदर्शित करता है। भारत में खासतौर से विकसित देशों के लिये ये एक बड़ी चुनौती है। ये एक ऐसा तथ्य है जिसमें समाज में एक वर्ग के लोग अपने जीवन की मूलभूत जरुरतों को भी पूरा नहीं कर सकते हैं। पिछले पाँच वर्षों में गरीबी के स्तर में कुछ कमी दिखाई दी है (1993-94 में 35.97% से 1999-2000 में 26.1%)। ये राज्य स्तर पर भी घटा है जैसे उड़ीसा में 47.15% से 48.56%, मध्य प्रदेश में 37.43% से 43.52%, उत्तर प्रदेश में 31.15% से 40.85% और पश्चिम बंगाल में 27.02% से 35.66% तक। भारत में गरीबी के स्तर में कुछ गिरावट होने के बावजूद भी ये बहुत खुशी की बात नहीं है क्योंकि भारतीय बीपीएल अभी-भी बहुत बड़ा है (26 करोड़)।

भारत में गरीबी कुछ प्रभावकारी कार्यक्रमों के प्रयोगों के द्वारा मिटायी जा सकती है, हालांकि इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिये केवल सरकार के द्वारा ही नहीं बल्कि सभी के समन्वित प्रयास की जरुरत है। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा, जनसंख्या नियंत्रण, परिवार कल्याण, रोज़गार सृजन आदि जैसे मुख्य संघटकों के द्वारा गरीब सामाजिक क्षेत्रों को विकसित करने के लिये कुछ असरकारी रणनीतियों का लक्ष्य भारतीय सरकार को बनाना चाहिये।

गरीबी का क्या प्रभाव है?

गरीबी के ये कुछ निम्न प्रभाव हैं जैसे:

  • निरक्षरता: पैसों की कमी के चलते उचित शिक्षा प्राप्त करने के लिये गरीबी लोगों को अक्षम बना देती है।
  • पोषण और संतुलित आहार: गरीबी के कारण संतुलित आहार और पर्याप्त पोषण की अपर्याप्त उपलब्धता जो ढ़ेर सारी खततरनाक और संक्रामक बीमारियाँ लेकर आती है।
  • बाल श्रम: ये बड़े स्तर पर अशिक्षा को जन्म देता है क्योंकि देश का भविष्य बहुत कम उम्र में ही बहुत ही कम कीमत पर बाल श्रम में शामिल हो जाता है।
  • बेरोज़गारी: बेरोज़गारी की वजह से गरीबी होती है क्योंकि ये पैसों की कमी उत्पन्न करता है जो लोगों के आम जीवन को प्रभावित करता है। ये लोगों को अपनी इच्छा के विपरीत जीवन जीने को मजबूर करता है।
  • सामाजिक चिंता: अमीर और गरीब के बीच आय के भयंकर अंतर के कारण ये सामाजिक चिंता उत्पन्न करता है।
  • घर की समस्या: फुटपाथ, सड़क के किनारे, दूसरी खुली जगहें, एक कमरे में एक-साथ कई लोगों का रहना आदि जीने के लिये ये बुरी परिस्थिति उत्पन्न करता है।
  • बीमारियां: विभिन्न संक्रामक बीमारियों को ये बढ़ाता है क्योंकि बिना पैसे के लोग उचित स्वच्छता और सफाई को बनाए नहीं रख सकते हैं। किसी भी बीमारी के उचित इलाज के लिये डॉक्टर के खर्च को भी वहन नहीं कर सकते हैं।
  • स्त्री संपन्नता में निर्धनता: लौंगिक असमानता के कारण महिलाओं के जीवन को बड़े स्तर पर प्रभावित करती है और वो उचित आहार, पोषण और दवा तथा उपचार सुविधा से वंचित रहती है।

गरीबी पर निबंध 6 (400 शब्द)

परिचय

निर्धनता एक परिस्थिति है जिसमें लोग जीवन के आधारभूत जरुरतों से महरुम रहते हैं जैसे अपर्याप्त भोजन, कपड़े और छत। भारत में ज्यादातर लोग ठीक ढंग से दो वक्त की रोटी नही हासिल कर सकते, वो सड़क किनारे सोते हैं और गंदे कपड़े पहनते हैं। वो उचित स्वस्थ पोषण, दवा और दूसरी जरुरी चीजें नहीं पाते हैं। शहरी जनसंख्या में बढ़ौतरी के कारण शहरी भारत में गरीबी बढ़ी है क्योंकि नौकरी और धन संबंधी क्रियाओं के लिये ग्रामीण क्षेत्रों से लोग शहरों और नगरों की ओर पलायन कर रहें है। लगभग 8 करोड़ लोगों की आय गरीबी रेखा से नीचे है और 4.5 करोड़ शहरी लोग सीमारेखा पर हैं। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले अधिकतर लोग अशिक्षित होते हैं। कुछ कदमों के उठाये जाने के बावजूद गरीबी को घटाने के संदर्भ में कोई भी संतोषजनक परिणाम नहीं दिखाई देता है।

गरीबी के कारण

भारत में गरीबी का मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या, कमजोर कृषि, भ्रष्टाचार, पुरानी प्रथाएं, अमीर और गरीब के बीच में बड़ी खाई, बेरोज़गारी, अशिक्षा, संक्रामक रोग आदि है। भारत में जनसंख्या का एक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर करता है जो कि गरीब है और गरीबी का कारण है। आमतौर पर खराब कृषि और बेरोज़गारी की वजह से लोगों को भोजन की कमी से जूझना पड़ता है। भारत में बढ़ती जनसंख्या भी गरीबी का कारण है। अधिक जनसंख्या मतलब अधिक भोजन, पैसा और घर की जरुरत। मूल सुविधाओं की कमी में, गरीबी ने तेजी से अपने पाँव पसारे हैं। अत्यधिक अमीर और भयंकर गरीब ने अमीर और गरीब के बीच की खाई को बहुत चौड़ा कर दिया है।

गरीबी का प्रभाव:

गरीबी लोगों को कई तरह से प्रभावित करती है। गरीबी के कई प्रभाव हैं जैसे अशिक्षा, असुरक्षित आहार और पोषण, बाल श्रम, खराब घर, गुणवत्ताहीन जीवनशैली, बेरोजगारी, खराब साफ-सफाई, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में गरीबी की अधिकता, आदि। पैसों की कमी की वजह से अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़ती ही जा रही है। ये अंतर ही किसी देश को अविकसित की श्रेणी की ओर ले जाता है। गरीबी की वजह से ही कोई छोटा बच्चा अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिये स्कूल जाने के बजाय कम मजदूरी पर काम करने को मजबूर है।

गरीबी को जड़ से हटाने का समाधान

इस ग्रह पर मानवता की अच्छाई के लिये त्वरित आधार पर गरीबी की समस्या को सुलझाने के लिये ये बहुत जरुरी है। कुछ समाधान जो गरीबी की समस्या को सुलझाने में बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं वो इस प्रकार है:

  • फायदेमंद बनाने के साथ ही अच्छी खेती के लिये किसानों को उचित और जरुरी सुविधा मिलनी चाहिये।
  • बालिग लोग जो अशिक्षित हैं को जीवन की बेहतरी के लिये जरुरी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिये।
  • हमेशा बढ़ रही जनसंख्या और इसी तरह से गरीबी को जाँचने के लिये लोगों के द्वारा परिवार नियोजन का अनुसरण करना चाहिये।
  • गरीबी को मिटाने के लिये पूरी दुनिया से भ्रष्टाचार का खात्मा करना चाहिये।
  • हरेक बच्चों को स्कूल जाना चाहिये और पूरी शिक्षा प्राप्त करनी चाहिये।
  • रोजगार के रास्ते होने चाहिये जहाँ सभी वर्गों के लोग एक साथ कार्य कर सकें।

निष्कर्ष

गरीबी केवल एक इंसान की समस्या नहीं है बल्कि ये राष्ट्रीय समस्या है। इसे त्वरित आधार पर कुछ प्रभावी तरीकों को लागू करके सुलझाना चाहिये। सरकार द्वारा निर्धनता को हटाने के लिये विभिन्न प्रकार के कदम उठाये गये हालांकि कोई भी स्पष्ट परिणाम दिखाई नहीं देता। लोग, अर्थव्यवस्था, समाज और देश के चिरस्थायी और समावेशी वृद्धि के लिये गरीबी का उन्मूलन बहुत जरुरी है। गरीबी को जड़ से उखाड़ने के लिये हरेक व्यक्ति का एक-जुट होना बहुत आवश्यक है।