सुगम्य भारत अभियान पर निबंध

सुगम्य भारत अभियान, भारत में विकलांग लोगों की मदद करने के लिए भारत सरकार द्वारा चलाए जाने वाला एक अभियान है। ये सुलभ भारत अभियान के रूप में भी जाना जाता है, जो देश को असक्षम (विकलांगों) का अनुकूल देश बनाने के लिये और अधिक आर्थिक वृद्धि प्राप्त करने के लिये शुरु किया गया है। ये भारत के विकास के सन्दर्भ में बहुत महत्वपूर्ण विषय हैं, जिसे बच्चों को जानना चाहिये। इसलिये, शिक्षक किसी प्रतियोगिता, कार्यक्रम उत्सव पर या परीक्षा में सुगम्य भारत अभियान पर निबंध लिखने का कार्य विद्यार्थियों को दे सकते है। निबंध और पैराग्राफ लेखन छात्रों को दिये गये विषय के बारे में लिखने की कला और ज्ञान को बढ़ाते हैं। हम विद्यार्थियों की मदद करने के लिये इस विषय “सुगम्य भारत अभियान” पर नीचे बहुत से पैराग्राफ और निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। नीचे लिखे गये सुगम्य भारत अभियान पर निबंध सरल हिन्दी भाषा का प्रयोग करते हुये लिखे गये हैं। आप इनमें से अपनी आवश्यकता और जरुरत के अनुसार कोई भी चुन सकते हैं:

सुगम्य भारत अभियान पर निबंध (एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन एस्से)

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सुगम्य भारत अभियान निबंध 1 (100 शब्द)

सुगम्य भारत अभियान को एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन या सुलभ भारत अभियान भी कहा जाता है क्योंकि इसे देश के आर्थिक विकास में लोगों की सार्वभौमिक पहुँच के लिये शुरु किया गया हैं। ये भारतीय सरकार द्वारा चलाये जाने वाला एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम हैं जो विकलांगों सहित सभी भारतीय नागरिकों को स्वतंत्र रुप से जीने में सक्षम बनाने के लिये शुरु किया गया हैं। इस अभियान के प्रमुख घटक क्षमता निर्माण, बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करना, हस्तक्षेप का लाभ लेने के लिये सीएसआर संसाधनों सहित कॉरपोरेट सेक्टर के प्रयास, (तकनीकी समाधान, वैधानिक ढांचा और संसाधन उत्पादन) और नेतृत्व समर्थन हैं। ये अभियान विकलांग और असक्षम लोगों के आवागमन को सार्वजनिक स्थानों पर लिफ्टों, रैंप और सभी सार्वजनिक इमारतों और परिवहन के साथ ही स्थानीय नगरपालिका/इमारत में रेलिंग के निर्माण के माध्यम से बाधामुक्त बनाने की राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश के प्रशासकों के मंत्रिमंडल और मुख्य आयुक्त (विंकलांगों के लिये) की समय-समय पर की गयी सिफारिश का परिणाम है।

सुगम्य भारत अभियान निबंध 2 (150 शब्द)

सुगम्य भारत अभियान (एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन या सुलभ भारत अभियान भी कहा जाता है) को भारत के प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी ने 3 दिसम्बर 2015 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में लागू किया था। ये एक राष्ट्रव्यापी प्रमुख अभियान है जिसे सभी विकलांग व्यक्तियों को शामिल करते हुये उन्हें बाधामुक्त वातावरण प्रदान करते हुये स्वतंत्रतापूर्वक जीते हुये सार्वभौमिक पहुँच को प्रदान करने के लिये लागू किया गया है। विकलांग या असक्षम व्यक्ति सार्वजनिक भवनों, परिवहन और कार्यालयों में लिफ्टों, रैम्पों और रेलिंग का प्रयोग करते हुये भी पहुँच सकते हैं। ये कार्यक्रम सार्वजनिक परिवहन, सूचना एवं संचार तकनीकों का पुनरुद्धार विशेषरुप से विकलांग या असक्षम व्यक्तियों के साथ ही पूरे देश की आर्थिक वृद्धि में सुधार करने के लिये लागू किया गया हैं।

ये पहल वास्तव में असक्षम व्यक्तियों (स्वलीनता, मानसिक अवरोध, लकवा, बहु-विकलांगता से पीड़ितों) के लिये बहुत सहायक सिद्ध होगी। इस पहल के अनुसार, सार्वजनिक इमारतों और कार्यालयों का पुर्निर्माण करके उन्हें असक्षम व्यक्तियों के योग्य बनाना हैं। सीढ़ियाँ, जाली, फुटपाथ, रास्तों पर मोड़ या घुमाव, छोटे रास्ते, आदि असक्षम लोगों के लिये बहुत बड़ी बाधाएँ हैं। ये पहल असक्षम लोगों को सामान्य गतिविधियों में शामिल करने के लिये भारत सरकार द्वारा लिया गया एक बड़ा कदम हैं।

सुगम्य भारत अभियान निबंध 3 (200 शब्द)

सुगम्य भारत अभियान, भारत सरकार द्वारा चलायी जाने वाली पहल है, जो अक्षम व्यक्तियों की सार्वजनिक स्थानों पर पहुँच को सुगम बनायेगी। ये एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन के नाम से जाना जाता हैं और जिसे भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 3 दिसम्बर (अर्थात् अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस पर) 2015, को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में असक्षम लोगों को समान पहुँच प्रदान करने के लिये लागू किया गया था। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में कुल जनसंख्या के लगभग 2.21% लोग असक्षम (2.68 करोड़ लोग) है। इसलिये, उनके लिये सुलभ और बाधामुक्त वातावरण बनाना बहुत आवश्यक है, ताकि वो सामुदायिक जीवन के सभी क्षेत्रों में भाग ले सके।

ये पहल असक्षम या विकलांग व्यक्तियों के लिये समान अवसर आरंभ करने और समाज में पूरी तरह भाग लेने का अवसर प्रदान करती हैं जो केवल सार्वजनिक स्थानों और परिवहन के साधनों तक इनकी बाधामुक्त पहुँच को बनाने से ही संभव हैं। ये पहल सभी को बराबर सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए है जैसे: ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में विकलांग लोगों के लिये शारीरिक वातावरण, परिवहन के साधन, सूचना एवं संचार के साधन और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को उपलब्ध कराना। ये पहल आर्थिक वृद्धि और विकास के साथ ही देश में विकलांग लोगों के, उत्पादक, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन के लिए है।

सुगम्य भारत अभियान निबंध 4 (250 शब्द)

सुगम्य भारत अभियान या एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन, 3 दिसम्बर 2015 को भारत के प्रधानमंतारी नरेन्द्र मोदी के द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में शुरु किया गया था। इस अभियान को भारत में विकलांग लोगों को बराबर पहुँच प्रदान करने के लिए विशेष रूप से शुभारंभ किया गया हैं। ये अभियान 3 दिसम्बर को शुरु किया गया, जो पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस के रुप में मनाया जाता हैं। ये अभियान 50% सरकारी भवनों (चाहे वो राजधानी में हो या राज्यों में) को जुलाई 2018 तक विकलांग लोगों के लिये पूरी तरह से सुलभ बनाने के उद्देश्य को पूरा करने के लिये शुरु किया हैं।

कातिबेनला, 100% गति विकलांगता से पीड़ित एक 9 साल की बच्ची, को 3 दिसम्बर (विश्व विकलांगता दिवस) को नई दिल्ली विज्ञान भवन में राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया। वो खेंसा गाँव, जिला मोकोकचुंग, नागालैंण्ड से हैं और सबसे सृजनात्मक विकलांग बच्चे के रुप में देश में नि:शक्त व्यक्ति काs सशक्तिकरण पुरुस्कार के लिये चुनी गयी थी। ये पहल भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी कदम है जिसका उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों की सार्वभौमिक पहुँच को सुलभ बनाकर उन्हें विकास के समान अवसर प्रदान करना। ये अभियान उनके जीवन के लगभग सभी पहलुओं पर सक्रिय भागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भरता से जीवन जीने में मदद करेगा।

भारत के प्रधानमंत्री ने अपना भाषण ये कहते हुये शुरु किया कि सभी स्मार्ट शहरों को भविष्य में नि:शक्त व्यक्ति के लिए पूर्ण पहुंच की योजना के साथ बनना चाहिए। विकलांग लोगों के बारे में लोगों की सोच के तरीके में बदलाव लाने के लिए, प्रधानमंत्री ने ‘विकलांग’ शब्द को ‘दिव्यांग’ से बदलने के लिये विचार करने को कहा है। ये पहल भविष्य में “सबका साथ, सबका विकास” के नारे को सही अर्थों में पूरा करेगी।

सुगम्य भारत अभियान निबंध 5 (400 शब्द)

परिचय

एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन या सुगम्य भारत अभियान, भारत सरकार द्वारा अलग-तरह से सक्षम व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार करने के लिये शुरु की गयी पहल है। ये कार्यक्रम असक्षम अनुकूल इमारतें और अन्य सार्वजनिक स्थानों को बनाने के लिये शुरु किया गया है। ये 3 दिसम्बर 2015 को नई दिल्ली में शुरु किया गया। ये कार्यक्रम असक्षम या विकलांग लोगों के लिये समर्पित हैं। यही कारण हैं कि इसे अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस पर शुरु किया गया।

इस अभियान के लक्ष्य

इस अभियान का उद्देश्य विकलांगों और असक्षमों के लिये सार्वजनिक स्थानों पर सुलभ आसान पहुँच प्रदान करना है। 2011 की जन-गणना के अनुसार, लगभग 21 मिलियन भारतीय (कुल जनसंख्या का 2.21%), विकलांगता से पीड़ित है। पूरे भारत में लगभग पचास प्रतिशत सरकारी इमारतों और 25 प्रतिशत सरकारी परिवहनों, वाहनों को 2016 के अन्त और 2017 के मध्य तक विकलांगों के अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखा हैं। इस कार्यक्रम के बारे में बड़े लक्ष्यों के साथ आगे का विकास बाद के वर्षों में जारी रखा जाएगा। 2018 तक, लगभग समग्र वातावरण विकलांग लोगों के लिए और अधिक व्यापक हो जाएगा। ये अनुमान लगाया गया है कि जुलाई 2016 तक देश में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डें और रेलवे स्टेशन (ए1, ए और बी श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले) विकलांग के उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगें। ये उन्हें अन्य सामान्य जनता की तरह समान अवसर प्रदान करेगी।

आम नागरिकों के लिये सरकारी इमारत की पहुंच के बारे में अपने विचार अपलोड करने के लिये ऑनलाइन वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने की योजना भी हैं। देखने में असक्षम लोगों के लिये विशेष सेट टॉप बॉक्स उपलब्ध कराये जायेगें जो उनके टीवी देखने को और अधिक सुविधाजनक और आसान बनायेगा। अगले 5 सालों में टीवी पर सरकार चैनलों के माध्यम से संकेत भाषाओं में बात करने के लिए लगभग 200 विकलांग व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने के लिए भी योजना बनाई गई है (संचार की एक प्रणाली जो दृश्य इशारों और बहरे लोगों को पढ़ाने के लिए संकेत का उपयोग करता है)। ये निजी कंपनियों को भी अलग विकलांगों के लिए 'पहुंच सूचकांक' मानकों को पूरा करने के लिए लक्ष्य बनाया गया है।

निष्कर्ष

विभिन्न क्षेत्रों की निजी कम्पनियाँ भी (जैसे टेक्सटाइल्स़, निर्माणी कम्पनियाँ, आदि) को भी उनके प्रशिक्षण और कैरियर के विकास के लिए अलग तरह से सक्षम कर्मचारियों के लिए सुविधाओं की गुणवत्ता में निवेश के अनुसार एक से दस तक की रेंकिंग प्रदान की जायेगी। विकलांग और असक्षम लोगों को औद्योगिक क्षेत्र में लाने के लिये ये सरकार द्वारा उठाया गया बहुत बड़ा कदम है जो दो तरफा फायदा रखता हैं विकलांगों की आजीविका वृद्धि और देश का आर्थिक विकास।

सुगम्य भारत अभियान निबंध 6 (500 शब्द)

परिचय

प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी ने 3 दिसम्बर 2015 को विज्ञान भवन, दिल्ली में एक पहल शुरु की हैं जिसे सुगम्य भारत अभियान (एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन भी कहा जाता हैं) कहा जाता हैं। ये विशेष रुप से विकलांग व्यक्तियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर शुरु किया गया जो पूरे संसार में 3 दिसम्बर को मनाया जाता हैं। ये भारत सरकार द्वारा भारत को विकलांगों के अनुकूल देश बनाने के लिये उठाया गया बहुत ही सक्रिय कदम है। इस अभियान का आत्मिक उद्देश्य पूरे देश में विकलांगों को शक्ति प्रदान करके उनके रोजगार में वृद्धि करके आर्थिक वृद्धि को बढ़ाना है।

सुगम्य भारत अभियान के उद्देश्य और कार्य योजना

इस अभियान के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:

  • इसका उद्देश्य सरकारी भवनों, कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों, पर्यटन स्थलों, परिवहन के साधनों, रेलवे स्टेशन, हवाई-अड्डे (एयर-पोर्ट), सूचना एंव संचार के साधनों की तकनीकों को देश में विकलांगों के अनुकूल बनाना है।
  • विकलांग लोगों के लिये सार्वभौमिक सुलभता प्रदान करने के लिये बाधा-मुक्त वातावरण का निर्माण करना।
  • ये स्वतंत्र जीवन जीने के लिए विकलांगों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए जोर देती है।
  • इसका उद्देश्य उनके जीवन को आसान, सुरक्षित, उत्पादक, और गरिमामय बनाने के लिए जीवन के प्रत्येक पहलुओं में भाग लेने के लिए देश के सभी विकलांग लोगों को प्रेरित करना है।
  • इसका उद्देश्य एक विशेषज्ञ टीम के माध्यम से बिल्डरों और कार्यकर्ताओं के बीच इस कार्यक्रम के बारे में जागरूकता फैलाना है।
  • इसका उद्देश्य विकलांग लोगों के लिए भारत सरकार द्वारा विशेष पाठ्यक्रम होने के साथ विशेष विश्वविद्यालय की स्थापना करना है।
  • इसका उद्देश्य सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लगभग 70-90% विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए मुफ्त में मोटर चालित तिपहिया साइकिलें प्रदान करना हैं।
  • विकलांग व्यक्तियों के लिए प्रत्येक राज्य द्वारा चारों ओर 50-100 सार्वजनिक इमारतों का पुनरुद्धार।
  • वर्ष 2016 तक 50 भारतीय शहरों में अधिक सार्वजनिक भवनों का निर्माण करना।

इस अभियान की कार्य योजना है:

इस अभियान का मुख्य लक्ष्य अनुकूल वातावरण, सूचना और संचार पारिस्थितिकी तंत्र, और परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना हैं। लोगों के बीच जागरुकता फैलाने के लिये, सूचना प्रौद्योगिकी, सामाजिक मीडिया और अन्य ऑनलाइन उपकरण का प्रयोग करना होगा। नागरिक-केन्द्रित सार्वजनिक वेबसाइटों को विकलांगों के लिये अनुसार परिवर्तित करने की योजना है। अस्पतालों, पुलिस स्टेशनों, पर्यटन-स्थलों आदि पर पहुँच को सुलभ बनाने और गृह मंत्रालय, परिवार कल्याण मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, सूचना और संचार व प्रसारण मंत्रालय के टीवी प्रसारण के लिये पहुँच को बढ़ाने के लिये आपसी सहयोग से कार्य करना हैं।

निष्कर्ष

इस अभियान सहित मोदी सरकार द्वारा लागू किये गये अन्य बहुत से अभियान हैं। उनमें से बहुत से अगले पाँच वर्षों में पूरा होने की समय अवधि रखते हैं। इस अभियान को भी अगले पाँच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान का उद्देश्य विकलांग या असक्षम व्यक्तियों को सार्वभौमिक सुलभता, सुलभ अधिकार प्रदान करके आत्मनिर्भर जीवन जीने के योग्य बनाना हैं। जैसा कि हम पहले अभियानों के शुरु करने की सकारात्मक प्रतिक्रिया को देख चुके हैं, उस आधार पर इस अभियान के सफल होने पर कोई संदेह नहीं है। ये समाज के विकलांग व्यक्तियों के लिये और अधिक सुलभ आधारभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराकर उनके जीवन को वास्तव में स्वतंत्र बनायेगा।

सुगम्य भारत अभियान निबंध 7 (800 शब्द)

परिचय

सुगम्य भारत अभियान पहल समाज के विकलांग व्यक्तियों को मजबूती प्रदान करने के लिये शुरु की गयी है। ये आसानी से सभी सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना है। ये अभियान सुलभ भारत अभियान (एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन) के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि ये विकलांग लोगों के लिये समान सुविधाओं के लिए आसान पहुँच प्रदान करता है। ये कदम भारत सरकार द्वारा विकलांग लोगों द्वारा झेली जा रही बड़ी समस्या को हल करने के लिए लिया गया है। ये अभियान पूर्ण गरिमा के साथ शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य देखभाल, परिवहन, खेल, मनोरंजन, और कई और अधिक के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिये विकलांग लोगों के लिए सार्वभौमिक पहुँच प्राप्त करने के उद्देश्य से शुरु किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में विकलांग व्यक्तियों को दिव्यांग (असाधारण क्षमताओं के लोग) कहकर संबोधित किया था न कि विकलांग।

सुगम्य भारत अभियान क्या हैं

सुगम्य भारत अभियान भौतिक वातावरण को विकलांगों के लिये सुलभ, सहज और सहने योग्य बनाने के उद्देश्य से शुरु किया गया है। ये विकलांग लोगों के लिए सार्वजनिक स्थानों, परिवहन, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की पहुंच के साथ-साथ प्रयोज्य (उपयोग को) बढ़ाने के लिए है।

सुगम्य भारत अभियान के लक्ष्य

इस अभियान के प्रमुख लक्ष्य निम्नलिखित हैं:

  • इस कार्यक्रम के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए ऑनलाइन वेब पोर्टलों और मोबाइल अनुप्रयोग विकसित करना।
  • ऑनलाइन वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशन के उपयोग के माध्यम से इस अभियान के बारे में अपने दृष्टिकोणों और विचारों को अपलोड करने के लिए आम जनता को सक्षम करने के लिए।
  • लिफ्टों, रैंप, शौचालय, और साइनेज (वाणिज्यिक या सार्वजनिक प्रदर्शन के संकेत) के निर्माण से विकलांग व्यक्तियों के लिए पूरी तरह से सुलभ हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, और मेट्रो बनाने के लिए।
  • जुलाई 2016 तक लगभग 75 महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों और सभी हवाई-अड्डों को सुलभता के मानकों के साथ ही साथ जुलाई 2019 तक लगभग 200 पूल सांकेतिक दुभाषियों के मानकों को प्राप्त करना।
  • इस अभियान में समर्थन करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निगमों को आडिट और परिवर्तन के लिए आमंत्रित करना।
  • महाराष्ट्र के चार प्रमुख शहरों (मुम्बई, नागपुर, पुणे और नासिक) को पूरी तरह से विकलांगों के अनुकूल बनाना।
  • विकलांगों के लिये आन्तरिक और बाहरी सुविधाओं (जैसेः स्कूलों, कार्यस्थलों, चिकित्सा सुविधाएं, फुटपाथों, परिवहन व्यवस्था, भवनों, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, आदि) के बारे में बाधाओं और अवरोधों को खत्म करना।

इस अभियान के सफल होने की संभावनाएं

इस अभियान को सही दिशा में कार्यान्वित करने के लिये सरकार द्वारा कार्य योजना तैयार की गयी हैं। यहाँ इस पहल की कार्य-योजना के कुछ संकेत दिये गये हैं:

  • विभिन्न कार्यशालाओं को जोनल जागरूकता के लिए प्रमुख हितधारकों को अवगत करने के लिये आयोजित किए जाने की योजना बनाई गई है, (सरकारी अधिकारियों, आर्किटेक्ट, रियल एस्टेट डेवलपर्स, इंजीनियर, छात्रों आदि सहित)।
  • सुगम्यता के मुद्दे के बारे में ब्रोशर, शैक्षिक पुस्तिकाएं और वीडियो बनाने और वितरित करने के लिए योजना बनाई गयी है।
  • पब्लिक से सार्वजनिक दुर्गम स्थानों, सुलभ शौचालयों, रैम्पों आदि के बारे में सूचना प्राप्त करने के लिये वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन को (हिन्दी, अंग्रेजी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में) सोर्सिंग मंच के रुप में बनाया जायेगा।
  • सीएसआर (निगमित सामाजिक दायित्व) संसाधनों को सुलभ इमारतों और परिवहन साधन बनाने के लिए श्रंखलित किया जाएगा।
  • इस सन्दर्भ में की गयी कार्य-योजना शारीरिक सुलभता को प्रदर्शित करेगी जो शिक्षा, रोजगार और आजीविका में वृद्धि करेगी।

कार्य-योजना बन चुकी हैं और ये विकलांग और असक्षम लोगों की उत्पादकता के साथ ही साथ देश के लिये आर्थिक सहयोग में वृद्धि करने के लिये बहुत जल्द लागू भी हो जायेगी। इस अभियान के सफल और प्रगतिशील होने में कोई भी संदेह नहीं है। ये वास्तविकता में अपनी कार्य-योजना के अनुसार सभी लक्ष्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति करेगा।

निष्कर्ष

भारत को स्वतंत्र हुये बहुत साल बीत गये हांलाकि, हम ये नहीं कह सकते कि भारत के लोग आत्मनिर्भर हैं क्योंकि विकलांग या शारीरिक रुप से असक्षम व्यक्ति आज भी अपने माता-पिता और परिवार के लोगों पर निर्भर हैं या अपनी बहुत सी आधारभूत क्रियाओं के लिये अपने देखभाल करने वालों पर निर्भर हैं। विकलांग लोग आज भी पिछड़े हुये हैं क्योंकि वो सार्वजनिक स्थानों, भवनों, कार्यालयों, स्कूलों, सड़कों, रेलवे स्टेशनों, हवाई-अड्डों, मेट्रों आदि तक उनकी पहुँच नहीं है। वो शारीरिक रुप से अपनी व्हील चैयर को इस तरह के स्थानों पर नहीं ले जा सकते। समाज का एक होनहार व्यक्ति होने के बाद भी उनका जीवन बहुत कम स्थानों तक सीमित होता है। यह पहल सच में विकलांगता के किसी भी प्रकार से पीड़ित सभी व्यक्तियों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। यह उन्हें बहुत आसानी से सभी सुविधाओं तक पहुँचने के द्वारा आगे जाने के लिए समान अवसर प्रदान करेगी। इस अभियान के माध्यम से, वो अपने कैरियर को विकसित कर सकते हैं, आत्मनिर्भर हो सकते है और साथ ही साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान कर सकते हैं।