भ्रष्टाचार पर भाषण

भ्रष्टाचार से तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा शक्तिशाली स्थिति में होकर बेईमानी या अनैतिक आचरण का कोई कार्य करना है। कई लोगों को विशेष रूप से युवा छात्रों को भ्रष्टाचार और इसके असंतोष के बारे में विस्तार से जानने के लिए बहुत जिज्ञासा होता है और ऐसा इसलिए क्योंकि यह हमारे देश के आर्थिक विकास और समृद्धि को प्रभावित कर रहा है। भ्रष्टाचार पर हमारी स्पीच खासकर की लम्बी वाली स्पीच इस विषय पर विस्तृत जानकारी को साझा करती है। यदि आप बहस के लिए स्पीच तैयार करना चाहते हैं तो भ्रष्टाचार पर लघु भाषण को एक नमूने के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। भ्रष्टाचार पर स्पीच में प्रयुक्त भाषा इतनी सरल है कि एक बच्चा भी इसके अर्थ को समझ सकता है। स्पीच इतनी प्रभावशाली है कि यह आपके दर्शकों पर असर छोड़ने में आपकी मदद भी कर सकती है।

भ्रष्टाचार पर स्पीच (Speech on Corruption in Hindi)

भ्रष्टाचार पर स्पीच - 1

आदरणीय शिक्षकगण और छात्रों को मेरा शुभ नमस्कार!

आज की स्पीच का विषय भ्रष्टाचार है और मैं उसी पर अपने विचारों को साझा करूँगा विशेष रूप से राजनीतिक भ्रष्टाचार पर। हमारे देश के गठन के बाद से सब कुछ राजनीतिक नेताओं और सरकारी क्षेत्रों में शासन करने वालों द्वारा तय होता है। जाहिर है हम एक लोकतांत्रिक देश हैं लेकिन जो भी सत्ता में आ जाता है वह उस शक्ति का दुरुपयोग करके अपने निजी लाभ के लिए धन और संपत्ति हासिल करने की कोशिश करता है। आम लोग खुद को हमेशा अभाव की स्थिति में पाते हैं।

हमारे देश में अमीर और गरीब के बीच का अंतर इतना बढ़ गया है कि यह हमारे देश में भ्रष्टाचार का एक स्पष्ट उदाहरण है जहां समाज के एक वर्ग के पास समृद्धि और धन है और वहीँ दूसरी तरफ अधिकांश जनता गरीबी रेखा से नीचे रहती है। यही कारण है कि कुछ देशों की अर्थव्यवस्था को गिरावट का सामना करना पड़ रहा है जैसे अमरीका की अर्थव्यवस्था।

यदि हम अपने देश के जिम्मेदार नागरिक हैं तो हमें यह समझना चाहिए कि यह भ्रष्टाचार हमारे राष्ट्र के आर्थिक विकास में खाई है और हमारे समाज में अपराध को जन्म दे रहा है। यदि हमारे समाज का बहुसंख्यक वर्ग अभाव और गरीबी में रहना जारी रखेगा और किसी भी रोजगार का अवसर नहीं मिलेगा तो अपराध दर कभी कम नहीं होगी। गरीबी लोगों की नैतिकता और मूल्यों को नष्ट कर देगी जिससे लोगों के बीच नफरत में वृद्धि होगी। हमारे इस मुद्दे को हल करने और हमारे देश के संपूर्ण विकास के लिए मार्ग प्रशस्त करने हेतु संघर्ष करने का यह सही समय है।

इस तथ्य की परवाह किए बिना कि असामाजिक तत्व हमारे देश की राजनीतिक व्यवस्था के भीतर हैं या बाहर हैं संसद को इनके खिलाफ सख्त कानूनों को पारित करना चाहिए। हमारे देश में सभी के लिए एक समान व्यवहार होना चाहिए।

यदि कोई भ्रष्टाचार के पीछे कारणों का विचार और मूल्यांकन करता है तो यह अनगिनत हो सकते हैं। हालांकि भ्रष्टाचार के रोग फैलने के लिए जिम्मेदार कारणों में मेरा मानना ​​है कि सरकार के नियमों और कानूनों के प्रति लोगों का गैर-गंभीर रुख तथा समाज में बुराई फ़ैलाने वालों के प्रति सरकार का सहारा है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिन लोगों को भ्रष्टाचार का अंत करने के लिए नियोजित किया जाता है वे स्वयं अपराधी बन जाते हैं और इसे प्रोत्साहित करते हैं। हालांकि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कई सख्त कानून हैं जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम, भारतीय दंड संहिता 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 आदि लेकिन इन कानूनों का कोई गंभीर क्रियान्वयन नहीं है।

भ्रष्टाचार के पीछे एक और महत्वपूर्ण कारण नौकरशाही और सरकारी कार्यों की पारदर्शिता है। विशेष रूप से सरकार के अधीन चलाए जाने वाले संस्थान गंभीर मुद्दों के तहत नैतिक अस्पष्टता दिखाते हैं। जो धन गरीब लोगों के उत्थान के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए वह खुद राजनीतिज्ञों ने अपने इस्तेमाल के लिए रख लिया। इससे भी बदतर जो लोग समृद्ध नहीं हैं और सत्ता में बैठे लोगों को रिश्वत नहीं दे सकते वे अपना काम नहीं करवा पा रहे हैं इसलिए उनकी काम की फ़ाइल कार्रवाई के बजाए धूल फांक रही है। जाहिर है किसी भी बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में गिरावट तब-तब आएगी जब-जब भ्रष्ट अधिकारियों ने देश पर शासन किया है।

स्थिति बहुत तनावग्रस्त हो गई है और जब तक सामान्य जनता कोई कदम ना उठाए और सतर्क नहीं हो जाती तब तक भ्रष्टाचार को हमारे समाज से उखाड़ फेंका नहीं जा सकता है। तो आइए हम एक साथ खड़े हो और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ें।

धन्यवाद।

भ्रष्टाचार पर स्पीच - 2

हमारे आदरणीय प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, साथी सहकर्मियों और मेरे प्रिय छात्रों सभी को नमस्कार!

मैं इतिहास विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्यों में से एक स्वतंत्रता दिवस समारोह की पूर्व संध्या पर आप सभी का स्वागत करता हूं। उत्सव और प्रसन्नता के बीच संकाय सदस्यों द्वारा हमारे गंभीर संकट को दूर करने पर विचार किया गया है, जो मुख्यतः भ्रष्टाचार है, जिससे हमारे देश की जनसँख्या पीड़ित है।

यद्यपि हमारे महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतंत्रता संग्राम को सालों पहले जीता था लेकिन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, गरीबी आदि जैसे गंभीर मुद्दे अभी भी हमारे देश की अर्थव्यवस्था को खा रहे हैं और इसे विकसित करने में सक्षम नहीं हैं। शासन या समाज में पूरी तरह से समस्या कहां है? हमें उन क्षेत्रों की पहचान करने की जरूरत है जो भ्रष्टाचार को फ़ैलाते हैं और उन कारणों को समाप्त करने के लिए सख्त उपाय अपनाने की जरुरत है। ब्रिटिश शासन से आजादी हासिल करना एक चीज थी लेकिन हम अपनी स्वतंत्रता का मज़ा तब उठा पाएंगे जब इस देश का हर नागरिक जीवित रहने के बुनियादी मानकों का आनंद उठा पाएंगे। उसके बाद हमारे समाज में कोई बुराई नहीं रहेगी।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारा देश प्रकृति और उज्ज्वल परिदृशयों का देश है। हालांकि हमारी भूमि की सुंदरता और सद्भावना आगामी भ्रष्ट गतिविधियों से जूझ रही है जो चारों ओर हो रही हैं। लगभग हर क्षेत्र में हम भ्रष्ट कर्मियों को देख सकते हैं जो अपनी भूमिकाएं और जिम्मेदारियों को तब तक सही तरीके से नहीं निभाते जब तक कि आम लोगों द्वारा उन्हें रिश्वत नहीं दी जाती। इस तरह की अवैध गतिविधियां दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं। हम इस देश के निवासी के रूप में इन लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं और उनके खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही भी नहीं की जा रही है।

इसके अलावा ऐसे लोगों का मानना ​​है कि वे आसानी से कानूनों से बच सकते हैं और सुरक्षित रह सकते हैं। अधिक अधिकार और शक्तियों की वजह से अधिकारी भ्रष्ट हो गए हैं और स्थिति इतनी खराब हो गई है कि अगर किसी आम आदमी को सरकारी कर्मचारी या प्रशासन से काम करवाने की ज़रूरत होती है तो उसे भ्रष्ट विधि को अपनाना होगा। वास्तव में आपको प्रशासन में वरिष्ठ पदों और जूनियर स्टाफ से लेकर लिपिक पदों पर भ्रष्ट आदमी काम करते मिल पाएंगे। एक आम आदमी के लिए यह वास्तव में मुश्किल है कि वह उनसे बचे या अपना काम पूरा करे।

न केवल शहर बल्कि छोटे क़स्बे और गांव भी इसके प्रभाव में आ गए हैं। मुझे लगता है कि यह सही समय है जब हम अपने देश के नागरिक के रूप में अपनी धरती मां के चेहरे से भ्रष्टाचार को खत्म करने और हमारे देश की अगली पीढ़ी के लिए एक भ्रष्ट मुक्त देश बनाने तथा इस पर गर्व महसूस करने की जिम्मेदारी ले।

जाहिर है हमारे विद्यार्थी ही इस देश का भविष्य हैं। इसलिए आपको किसी भी स्थिति में किसी भ्रष्ट पथ को अपनाने की प्रतिज्ञा नहीं करनी चाहिए और वास्तव में आप किसी भी गैरकानूनी या अवैध गतिविधि के खिलाफ अपनी आवाज उठाए। जब हम जान-बूझ आँख बंद कर लेते हैं तो समस्याएं बढ़ जाती हैं परन्तु मैं आशा करता हूं कि हम सभी हमारे देश में कहीं भी होने वाली भ्रष्ट गतिविधियों का कड़ा विरोध करेंगे और ऐसे अधिकारियों का पर्दाफाश करेंगे जो हमारे विकास के क्षेत्र में रुकावट डालने का काम करते हैं।

धन्यवाद।

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भ्रष्टाचार पर स्पीच - 3

सुप्रभात प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्रिय मित्रों,

इस सभा का विषय है, 'भ्रष्टाचार'। भ्रष्टाचार एक जहर है जो व्यक्तियों और देश के मूल्यों को नष्ट कर देता है।

भ्रष्टाचार के साधन के रूप में मेरा दृष्टिकोण यह है कि यह एक ऐसा कृत्य है जो जानबूझ कर किया जाता है जिससे देश की प्रामाणिकता और गुणवत्ता कम हो जाती है। लोग भ्रष्टाचार को एक सरल बात के रूप में इस तरह समझाते हैं, 'मुझे जल्दी थी इसलिए मैंने थोड़े पैसे देकर अपना काम तुरंत करवा लिया’ लेकिन मेरे प्यारे दोस्तों यह सरल वक्तव्य इतनी हानिकारक है कि यह सीधे देश की छवि और कद पर असर करता है।

हमें व्यक्तियों के रूप में समझना चाहिए कि भले ही हमारा काम पैसे देकर तुरंत हो जाता है लेकिन भीतर ही भीतर यह हमारे जीवन की गुणवत्ता को बिगाड़ती जा रही है। यह देश की बुरी छवि बनाता है और हमारे देश को भ्रष्टाचार देशों की सूचि में ऊपर पहुंचाता है। हालाँकि यह बड़ी बात नहीं है कि हम अतिरिक्त राशि का भुगतान करके या कुछ लोगों से लाभ लेने के लिए उन्हें रिश्वत दूँ लेकिन मुझे विश्वास है कि आप एक बार गहराई से सोचे तो आपको पता चलेगा की यह लोगों के नैतिक गुणों या मूल्यों को खत्म करता है।

मनुष्य का गिरता आत्ममूल्य केवल उस व्यक्ति का नहीं है जो रिश्वत ले रहा है बल्कि उस व्यक्ति का भी है जो इसे देता है। भ्रष्टाचार देश और व्यक्ति की प्रामाणिक समृद्धि और विकास के बीच बाधा है। यह देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सभी पहलुओं के विकास को प्रभावित करता है।

भ्रष्टाचार से तात्पर्य सरकार द्वारा बनाए गए सभी नियमों को तोड़कर कुछ निजी लाभों के लिए सार्वजनिक शक्ति का अनुचित उपयोग भी है। हमारे देश में भ्रष्टाचार का एक सामान्य उदाहरण नकद रूप में काला धन प्राप्त करना भी है। यहां तक ​​कि चुनावों के दौरान ऐसा भी देखा जाता है कि कुछ मंत्रियों के परिसर में छापे मारे जाते हैं या घर में नकदी मिलती हो।

जी हां, ये सब भ्रष्टाचार के रूप हैं। कई राजनीतिक नेताओं का कहना है कि हम भ्रष्टाचार को समाप्त करना चाहते हैं लेकिन ईमानदारी से मैंने इसको खत्म करने का कोई ठोस प्रयास नहीं देखा है। भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के लिए हमें मूल कारणों पर काम करना होगा। हमारे देश की जड़ों के अंदर गहराई तक भ्रष्टाचार फ़ैल गया है और इसका उन्मूलन करने के लिए हमें पूर्ण समर्पण के साथ एक बड़ी गतिविधि या एक परियोजना चलानी चाहिए।

सख्त कार्रवाइयों को नीतियों में प्रलेखित किया जाना चाहिए और उन्हें उन पर लागू करना चाहिए जो भ्रष्टाचार को अपने लालच के लिए अभ्यास में लाते हैं।

इस सभा का हिस्सा बनने के लिए आप सभी का धन्यवाद। मुझे खुशी है कि हमने इस महत्वपूर्ण विषय को हमारी चर्चा बिंदु के रूप में चुना है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया जहाँ भी दिखे वहां भ्रष्टाचार को रोकें। हमें स्वार्थी नहीं होना चाहिए और बस हमारी सुविधा के बारे में सोचना चाहिए। मुझे आशा है कि आप सब मेरी और हमारे देश को भ्रष्टाचार के इस बदसूरत कार्य से मुक्ति दिलाने में मदद करेंगे।

धन्यवाद। आप सभी का दिन शुभ हो। हम सभी को मिल कर भ्रष्टाचार खत्म करना है।

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भ्रष्टाचार पर स्पीच – 4

आप सभी को नमस्कार! इस अवसर का हिस्सा बनने और इसके लिए समय निकालने के लिए धन्यवाद।

इस शाम के लिए मेरी चर्चा का विषय 'भ्रष्टाचार' का कैंसर है जिसने हमारी जिंदगी बीमार बना दी है। भ्रष्टाचार एक प्राधिकरण या प्रभावशाली पार्टी के मापन पर एक गैरकानूनी व्यवहार है जो कि अवैध, भ्रष्ट या सैद्धांतिक मूल्यों के साथ अपरिवर्तनीय हैं। हालांकि यह शब्द किसी भी देश को परिभाषित करने के लिए बहुत आसान है लेकिन इससे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल है। भ्रष्टाचार सबसे बड़ा अनैतिक कार्य है जो देश की छवि को कमजोर और नकारात्मक बना देता है।

भ्रष्टाचार में धन की रिश्वतखोरी और गबन सहित कई गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। भ्रष्टाचार ने भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकार को इतना प्रभावित किया है कि इसका उन्मूलन करने के लिए कोई आसान समाधान नहीं है। अगर किसी देश के नागरिक भ्रष्ट होते हैं तो यह उस देश के मूल्यों में कमी को बढ़ाता है। हमें नहीं पता है कि हम जो करते हैं, कहाँ रहते हैं, क्या करते हैं उन सब का एक हिस्सा बन जाता है।

भ्रष्ट लोग हमेशा सच्चाई और ईमानदारी के नकली चेहरे के पीछे खुद को छिपाते हैं। हमेशा भ्रष्टाचार को नौकरशाही-राजनीतिक-पुलिस के गठजोड़ के रूप में जाना जाता है जो कि लोकतंत्र को खाती है।

ज्यादातर बार भ्रष्टाचार उच्च स्तर से शुरू होता है और यह बहुत कम स्तर तक भी जाता है। भ्रष्टाचार की ऊँचाई उस हद तक पहुंच गई है जहां इन भ्रष्ट लोगों के न्याय का कोई उचित कानून नहीं हैं। अत्यधिक भ्रष्ट लोग, जो पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं, की वजह से आम आदमी या गरीब लोगों के लिए जीवित रहना बहुत मुश्किल हो गया है।

भ्रष्टाचार का स्तर उतना कम हो सकता है जब ट्रैफिक पुलिस अधिकारी को हेलमेट नहीं पहनने के लिए रिश्वत देनी पड़े या निजी ठेकेदार सरकारी व्यक्तियों को सार्वजनिक काम की निविदा प्राप्त करने या नौकरी पाने के लिए रिश्वत देनी पड़े। आज भ्रष्टाचार विकास में बाधा पैदा करने वाले सबसे बड़े कारकों में से एक है और लोकतंत्र को नुकसान भी पहुंचाता है। भ्रष्टाचार एक राष्ट्र के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

हम सभी को यह समझना चाहिए कि भ्रष्टाचार देश की प्रगति के रास्ते में एक बाधा के रूप में कार्य कर रहा है। हम में से हर एक को उन कृत्यों से सावधान रहना चाहिए जो हम करते हैं। हम अपनी पसंदीदा सीट आवंटन के लिए यात्रा टिकट इंस्पेक्टर (टीटीआई) को 100-200 रुपये दे देते हैं लेकिन गहराई से देखे तो उस व्यक्ति ने सभी लोगों से पैसे लेकर सीट देना आदत ही बना ली है।

इस वार्तालाप का हिस्सा बनने के लिए धन्यवाद। मेरे सत्र के निष्कर्ष के रूप में मैं आपको सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि भ्रष्ट न केवल वह व्यक्ति है जो अवैध धन प्राप्त करता है बल्कि वह भी है जो रिश्वत देता है। मुझे आशा है कि अब से आप सभी किसी को रिश्वत नहीं देंगे और दूसरों को भी नियंत्रित करेंगे। हम चीजों को छोटे कर्मों के रूप में देखते हैं लेकिन अंत में ये छोटे कार्य ही भ्रष्टाचार के प्रति जागरूकता पैदा करते हैं।

धन्यवाद! आप सभी का दिन शुभ रहे और इस सन्देश को तब तक साझा करते रहें जब तक हमारा देश भ्रष्टाचार मुक्त नहीं हो जाता।