मजदूर दिवस पर भाषण

मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है जिसे दुनिया भर में मनाया जाता है। इसे 1 मई को भारत में संगठनों, कारखानों, साइटों, कंपनियों आदि में श्रमिकों की कड़ी मेहनत के उपलक्ष में मनाया जाता है। विभिन्न गैर-सरकारी संगठन, एनपीओ, सरकारी या निजी प्रतिष्ठान, कल्याण संघ आदि श्रमिकों के लाभ के लिए काम करते हैं। आपको किसी भी अवसर पर मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस पर स्पीच देने की आवश्यकता पड़ सकती है। यहाँ हमने मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस पर विभिन्न स्पीच को साझा किया है जिसे आप ज़रूरत पड़ने पर उपयोग कर सकते हैं। सभी स्पीचों की भाषा बहुत ही सरल, आसान और प्रभावी रखी गई है। मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस पर हमारी संक्षिप्त स्पीच एक संगठनात्मक स्तर पर नमूने के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस पर लंबी स्पीच बहुत ही पेशेवर है जिसे विभिन्न अवसरों जैसे महोत्सवों, समारोहों आदि पर इस्तेमाल किया जा सकता है। हम इस बात को लेकर निश्चित हैं कि आप इन उदाहरणों से बहुत मदद प्राप्त कर सकते हैं और मजदूर दिवस पर अपनी स्वयं का भाषण बना सकते हैं।

मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस पर स्पीच (Speech on Labour Day in Hindi)

मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस पर स्पीच – 1

सुप्रभात मित्रों।

आज हम सब यहाँ हमारी कंपनी में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस मनाने के लिए इकट्ठे हुए हैं। यह सालाना 1 मई को मनाया जाता है ताकि संगठन में मज़दूरों की शक्ति, स्थिति, भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बावजूद उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को याद किया जा सके। मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक उपलब्धियों को सम्मान देना  है। मजदूर/श्रम दिवस को 'मई दिवस' या अंतर्राष्ट्रीय कार्यकर्ता दिवस के रूप में भी जाना जाता है और इसे लगभग 80 देशों में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाता है। यह आदर्श रूप से देश की समृद्धि, शक्ति और कल्याण को सुनिश्चित करने वाले श्रमिकों की भक्ति और योगदान के प्रति वार्षिक और राष्ट्रीय स्वीकृति का गठन करता है।

हमारे संगठन के लिए हर कर्मचारी की कड़ी मेहनत का महत्व बहुत ज्यादा है तथा हम उन्हें समान अधिकार देने में विश्वास रखते हैं। मैं लगभग 35 वर्षों से इस कंपनी से जुड़ा हुआ हूं और मुझे आज तक एक भी ऐसी समस्या या शिकायत नहीं मिली है जो मज़दूरों के अधिकारों के दमन से संबंधित हो।

चूंकि हमारे संगठन में कई नई नियुक्तियां हुई हैं जो आज यहाँ मौजूद भी हैं तो मैं मजदूर/श्रम दिवस की उत्पत्ति के बारे में संक्षिप्त जानकारी देना चाहता हूं। मई दिवस या मजदूर/श्रम दिवस संयुक्त राज्य अमेरिका श्रमिक संघ आंदोलन से 19वीं सदी के उत्तरार्ध में शुरु हुआ जिसमें प्रति दिन आठ घंटे काम करने की वकालत की गई। चूंकि उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध की परिस्थियाँ कार्यरत मजदूरों के लिए दयनीय और असुरक्षित थी इसलिए उन्हें प्रति दिन लगभग 12-16 घंटे काम करना पड़ता था। 1884 में फेडरेशन ऑफ ऑर्गनाइज्ड ट्रेड्स एंड लेबर यूनियन (FOLTU) ने एक संकल्प पारित किया कि 1 मई, 1886 से 8 घंटे का कार्यकाल कानूनी रूप से कार्य करने के लिए मान्य होगा। कार्यरत श्रमिक कई आंदोलनों, हमलों आदि द्वारा आठ घंटों के कार्यदिवस की मांग कर रहे थे। पांच साल बाद 1 मई को एक समाजवादी संगठन द्वारा राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मान्यता दी गई और धीरे-धीरे कई देशों ने इस संस्कृति को अपनाया।

मई डे को विशुद्ध रूप से श्रमिकों द्वारा संगठन की भलाई के लिए किए गए योगदान और इसके परिणामस्वरूप हमारे समाज को सम्मान और श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। लेकिन आज मजदूर/श्रम दिवस एक श्रमिक संघ उत्सव के रूप में विकसित हुआ है जो इस दिन के गहरे और सच्चे महत्व को खो रहा है।

हालांकि हमारी संस्था श्रमिकों के अधिकारों को बख़ूबी पहचानती है जिन्हें कर्मचारियों के रूप में भी जाना जाता है लेकिन कई कंपनियां हैं जो वास्तव में कर्मचारियों से बेहिसाब काम लेती हैं। हालांकि मजदूर/श्रम दिवस को प्रति दिन 8 घंटे काम करने के लिए लागू करने के लिए शुरू किया गया था लेकिन संगठन में कार्यरत एक कर्मचारी के भी अधिकार हैं। यह महत्वपूर्ण है कि संगठन केवल लाभ पैदा करने के इरादे से ही संचालित नहीं होना चाहिए बल्कि इसे अपने कर्मचारियों की आवश्यकताओं और जरूरतों का ध्यान भी रखना चाहिए जिनके बिना कंपनी अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकती है। साथ ही मजदूरों या कर्मचारियों को भी अपने संगठन की कार्य संस्कृति का सम्मान करना चाहिए और संगठन की आचार संहिता के अंतर्गत रहना चाहिए जिनके साथ वे काम कर रहे हैं।

मजदूर/श्रम दिवस निश्चित रूप से मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करता है और कर्मचारियों को अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए प्रबंधन को धमकी देने के हथियार के रूप में इसका उपयोग नहीं करना चाहिए तभी तो मजदूर/श्रम दिवस का उद्देश्य पूरा होगा।

धन्यवाद।

मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस पर स्पीच – 2

सुप्रभात मित्रों।

इस फ़ोरम का हिस्सा बनने के लिए आप सभी का धन्यवाद। आज हम मजदूर/श्रम दिवस के बारे में चर्चा करेंगे जिसे मई दिवस भी कहा जाता है। यह हर साल 1 मई को दुनिया भर में मनाया जाता है। हमारा संगठन एक निजी कल्याण संगठन है जो राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करता है। हम मूल रूप से निम्न स्तर से संबंधित श्रमिकों के विकास के लिए काम करते हैं। आज हमारे बीच बहुत प्रसिद्ध उद्योगपति भी मौजूद हैं जो इस आंदोलन का समर्थन करते हैं। दोस्तों जब भी हम श्रम शब्द सुनते हैं तो हमें कड़ी मेहनत या शारीरिक श्रम का ध्यान आता है। आज हम यहां बड़े और प्रमुख संगठनों के लिए काम करने वाले श्रमिकों के कुछ महत्वपूर्ण अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इकट्ठे हुए हैं।

ऐतिहासिक रूप से मजदूर/श्रम दिवस की शुरुआत अमेरिका में हुई थी जिसमें मजदूरों के लिए 8 घंटे के काम की वकालत करते हुए बिल पारित किया गया था और 1886 के बाद से मजदूरों या कर्मचारियों के कड़ी मेहनत का सम्मान करने के लिए श्रम दिवस का जश्न शुरू हुआ।

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कोई भी कंपनी या संगठन बिना परिश्रम नहीं चल सकती लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कंपनी के लिए काम करने वाले किसी भी कर्मचारी को नज़रंदाज किया जाए। कंपनी को 8 घंटे के काम के बाद यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मजदूरों या कर्मचारियों के साथ जाति, धर्म, पंथ, लिंग, विकलांगता आदि के आधार पर भेदभाव न किया जाए और उन्हें प्रतिस्पर्धी मजदूरी या वेतन का भुगतान होना चाहिए। इसके अलावा प्रत्येक श्रमिक पहले एक व्यक्ति है और इस प्रकार उनकी स्थिति या नौकरी को ध्यान में ना रखकर उनका सम्मान होना चाहिए।

यह भी सच है कि मजदूर हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक प्रगति की प्रेरणा शक्ति हैं। श्रमिकों के पास एक बड़ा राजनीतिक प्रभाव भी है क्योंकि कुछ श्रमिक मुद्दों ने कई राजनीतिक दलों को चुनाव जीतने में मदद की है। श्रमिक कारखाने चलाने, सड़कों का निर्माण करने, इमारतें बनाने, तेल निकालने आदि अलग-अलग तरीकों से काफ़ी मदद करते हैं।

आज के मजदूर इतने भी अज्ञानी या अशिक्षित नहीं हैं कि वे अपने अधिकारों को ना समझ सकें या उन्हें आसानी से दबाया जा सकें लेकिन कुछ बड़ी कंपनियां है जो दूरस्थ क्षेत्रों या गांवों से श्रमिकों को आयात करती हैं। ये लोग भोले होते हैं और चूंकि वे गरीब भी होते हैं वे किन्हीं भी शर्तों पर काम करने के लिए सहमत हो जाते हैं। हमारे संगठन के सदस्य उन इलाकों में यात्रा करते हैं और उनके मुद्दों को सुनते हैं तथा राज्य सरकार के सामने इसे उजागर करते हैं और उनके भलाई के लिए काम करते हैं। हमने गांवों में कई स्कूल खोले हैं और बच्चों के साथ-साथ बड़े लोगों को भी शिक्षा प्रदान की है।

हमारा संगठन बाल श्रम के खिलाफ भी काम करता है। हमने कई खानों और कारखानों की पहचान की है जो बच्चों को अपने उत्पादन इकाई में नियोजित करते हैं। पिछले साल एनजीओ ने इस मुद्दे को उजागर किया था और हमने तुरंत संज्ञान लेते हुए उन सभी बच्चों को ऐसे इकाइयों से मुक्त कराया। अब हम उन्हें शिक्षा प्रदान करते हैं तथा उनके माता-पिता को कला और शिल्प प्रशिक्षण प्रदान करते हैं ताकि वे अपनी आजीविका कमा सकें।

मैं आम जनता सहित सभी उद्योगपतियों, सरकारों, दोनों निजी तथा सरकारी फर्मों से अपील करता हूं कि हमें अपने समाज से बुराई को खत्म करने और निम्न स्तर वाले लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए साथ आना चाहिए ताकि वे सम्मानजनक जीवन गुज़ार सकें।

धन्यवाद।


 

मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस पर स्पीच – 3

आप सभी को मेरी ओर से सुप्रभात। मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस समारोह के लिए विशेष रूप से समर्पित इस सम्मेलन में मैं आप सभी का स्वागत करता हूं।

इस दिन को आम तौर पर हर साल 1 मई को मनाया जाता है लेकिन यह अलग-अलग देशों के अनुसार भिन्न भी होता है। इस दिन को मई डे भी कहा जाता है। श्रमिकों की आर्थिक और सामाजिक उपलब्धियों को स्वीकार करने के लिए इसे मनाया जाता है। इसे श्रम संघों को बढ़ावा देने और प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का उद्देश्य मजदूरों के संघर्ष को समाप्त करने के साथ आठ घंटे के काम के दिन की आवश्यकता को बढ़ावा देना है जो इससे पहले एक दिन में 12 से लेकर 16 घंटे तक था। लोगों को आंदोलन करने से रोकने और नैतिक तथा शारीरिक दुखों से खुद को सुरक्षित रखने के लिए दिन में काम करने का समय को 8 घंटे करना आवश्यक था। इस दिन का हर देश में बहुत महत्व है क्योंकि यह कार्य बल के प्रयासों के प्रति समर्पण सुनिश्चित करता है।

जरा सोचिए अगर हमें दिन में 12 से 16 घंटे काम करना पड़े तो हम कितने बेचैन और परेशान हो जाएंगे। ईमानदारी से कहूँ तो मैं यह सोचती हूँ कि हर कर्मचारी या कार्यकर्ता को कार्यभार के आधार पर छूट का प्रावधान होना चाहिए। श्रमिकों के मूल्यांकन दिवस के रूप में मनाए जाने वाले इस दिन का महत्व बहुत अधिक है। इस दिन की वजह से श्रमिकों के काम के घंटो में कमी और कार्यबल की उपलब्धियों का आकलन करने के लिए आधार बना है।

यह उत्सव पूरे विश्व में एक ऐतिहासिक महत्व बन गया है और विश्वभर में श्रमिक संघों द्वारा इसे मनाया जाता है। श्रमिक हमेशा हमारी जिंदगी बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत रहते हैं और वास्तव में वे अपने काम के लिए सम्मान के हक़दार भीं हैं। भारत में इस मजदूर/श्रम दिवस को 1923 में पहली बार मनाया गया था। यह दिन एक विशेष अवसर है जब दुनिया भर में मजदूर वर्ग और मजदूरों की सच्ची भावना का सम्मान किया जाता है। यह वह दिन है जब श्रमिक एक साथ मिलकर अपनी शक्तियों का जश्न मनाते हैं जो दर्शाते हैं कि वे समाज के श्रमिक वर्ग के लिए सकारात्मक सुधार लाने हेतु संघर्ष कर रहे हैं और लगातार संघर्ष करते रहेंगे।

हम सभी को, जिन भी मामलों में हम कर सकते हैं, मजदूर वर्ग की रक्षा करनी चाहिए। यह वास्तव में एक विशेष कार्य बल है जो समाज के कल्याण और बेहतर जीवन के लिए लगातार प्रयास करते हैं। यद्यपि इस दिन को अधिकांश देशों में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाता है लेकिन हमें इस दिन को छुट्टी के तौर पर नहीं बल्कि श्रमिकों के प्रयास, गतिविधियों तथा सच्चे समर्पण को पहचानने के लिए करना चाहिए। हमें अपने बच्चों और अन्य सहयोगियों को भी इस दिन को अपने तरीके से मनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और इस दिन के महत्व का पता होना चाहिए।

श्रम बल के प्रयासों को पहचानने के लिए विशेष सेमिनार और सत्र आयोजित किए जाने चाहिए। इस अवसर को मनाने और मेरे साथ अपने विचार साझा करना के लिए आप सभी का शुक्रिया।

धन्यवाद।


 

मजदूर/श्रम/श्रमिक दिवस पर स्पीच – 4

यहाँ मौजूद सभी गणमान्य व्यक्तियों को मेरी ओर से सुप्रभात। यहां पधारने और अपना बहुमूल्य समय हमें देने के लिए आप सभी का धन्यवाद। मजदूर/श्रम/ श्रमिक दिवस के मौके पर मैं आज एक भाषण देने जा रहा हूं।

जैसा कि हम सभी जानते हैं मजदूर/श्रम दिवस दुनिया भर में हर साल 1 मई को मनाया जाता है। इस दिन को श्रमिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने विश्व को मजबूत और समृद्ध बनाने के लिए अपना अहम् योगदान दिया है।

इससे पहले 19वीं सदी में कामकाजी परिस्थितियां गंभीर थीं और उसी समय सभी श्रमिक आठ घंटे के आंदोलन की मांग करते हुए हड़ताल पर चले गए जिसमें उन्होंने मनोरंजन के लिए आठ घंटे और आराम के लिए आठ घंटे की वकालत की।

मजदूर/श्रम दिवस खुद ही काम करने वाले पुरुषों और महिलाओं के लिए कई विशेषाधिकार और कल्याणकारी नीतियों का गठन करता है। इसमें दिन में 12-16 घंटे से घटाकर 8 घंटे तक का दैनिक कामकाज समय शामिल है। कोई भी कंपनी, संगठन किसी भी कार्यकर्ता को उनके अतिरिक्त घंटो का भुगतान किए बिना 8 घंटे से अधिक काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

कामकाजी लोगों के हितों की रक्षा के लिए न्यूनतम मजदूरी दर तय की गई है। संघों को अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है।

बाल अधिनियम 1986 ने 14 वर्ष से कम उम्र के किसी भी बच्चे को रोजगार के लिए मजबूर करने को  क़ानूनी रूप से अपराध माना है। कोई भी कंपनी काम के प्रति समर्पित लोगों के बिना आगे नहीं बढ़ सकती। इसके बदले समर्पित लोगों को भी अपने द्वारा किये कर्तव्यों के लिए सम्मान और निष्पक्ष निर्णय मिलना चाहिए।

मजदूर/श्रम दिवस ने सभी श्रमिकों को राष्ट्र में उनके योगदान के लिए प्राप्त स्वतंत्रता और विशेषाधिकारों का आनंद लेने का अधिकार दिया है।

धन्यवाद।