स्वच्छ भारत अभियान पर लेख

एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 26 लाख से अधिक लोगों को खुले में शौच करने की आदत है। लगभग 60 प्रतिशत भारतीयों को अभी तक सुरक्षित और निजी शौचालय उपलब्ध नहीं है। इतनी बड़ी जनसंख्या का स्वच्छता सुविधाओं से वंचित रहना निश्चय ही हमारे देश के विकास के रास्ते में एक बड़ी बाधा है।

इसी पृष्ठभूमि में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को राजघाट, नई दिल्ली से पानी, स्वच्छता, एवं स्वच्छता संबंधित चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वच्छ भारत अभियान या क्लीन इंडिया मिशन की शुरूआत की। केंद्र सरकार के इस फ्लैगशिप कार्यक्रम का लक्ष्य अक्टूबर 02, 2019, जो कि महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती होगी, तक स्वच्छ भारत के सपने को साकार करना है। यहाँ हम आपको अलग-अलग शब्द सीमा के अनुसार विभिन्न श्रेणियों के तहत स्वच्छ भारत अभियान पर कुछ उपयोगी लेख प्रदान कर रहे हैं। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार इनमें से किसी का भी चयन कर सकते हैं:

स्वच्छ भारत अभियान पर छोटे तथा बड़े लेख

स्वच्छ भारत अभियान पर लेख 1 (150 शब्द)

स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हमारे प्रधानमंत्री जी द्वारा 2 अक्टूबर, 2014 को की गई थी। जैसा कि नाम से विदित है, यह अभियान स्वछता पर आधारित है, जिसका लक्षय वर्ष 2019 तक भारत को स्वछ बनाना है। इसे गांधी जयंती के मौके पर इस लिये मनाया जाता है क्यों कि गांधी जी स्वछता प्रेमी इंसान थे, उन्होंने स्वछ भारत का सपना देखा था और अपने दौर में उन्होंने स्वछता के लिये लोगों को बहुत सारे सीख भी दिये थे।

उन्होंने बहुत कोशिश की, पर लोग पुराने रीती रिवाज एवं अंधविश्वास की वजह से सफाई के नाम पर केवल रसोइ व घक तक ही सीमित रहते थे। इस लिये मोदी जी ने गांधी जी को उनके 150वीं जन्म तिथि पर उन्हे स्वछ भारत तोहफे के रुप में देने का निश्चय किया, जो कि वर्ष 2019 में है।

इस योजना में शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की सफाई शामिल है। जहां एक ओर शहरों की सफाई शहरी विकास मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र कि सफाई ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा। सरकार द्वारा निश्चित धन राशी तय कि गई है, जिसकी सहायता से ग्रामीण क्षेत्रो में हर घर में शौचालय बनाया जा रहा है। सरकार अब तक 98 प्रतिशत शौचालय बनवा चुकि है और वहीं शहरों मे जगह-जगह सड़को पर सुलभ शौचालयों का निर्माण किया गया है। हमें पूरा भरोसा है कि इस वर्ष हम अपने लक्षय को जरुर हासिल कर पाएंगे।

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान पर लेख 2 (200 शब्द)

स्वच्छ भारत अभियान एक स्वच्छता अभियान है। एक तरफ नोटबंदी के जरिये मोदी जी देश में भ्रष्ट लोगों को साफ कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ स्वचछता अभियान के जरिये देश में व्याप्त गंदगी भी साफ करने में लगे हुए हैं। जिसकी शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को गांधी जी को श्रधांजलि देते हुअ मोदी जी ने की थी। गांधी जी उस दौर में भी स्वच्छता को लेकर इतने जागरुप थे कि वे सबको इसका महत्व समझाते रहते थे और उनका सपना था कि भारत स्वच्छ राष्ट्र बने। इस लिये इस अभियान के लिए उनके जन्म दिन को चुना गया।

इस योजना के तहत इसे दो भागों में बांटा गया, एक शहर के लिये और दूसरा ग्रामीण क्षेत्र के लिये। जिसमें से शहरों की सफाई, शहरी विकास मंत्रालय द्वारा निश्चित किया जा रहा है, तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र कि सफाई ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा देखा जा रहा है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश को पूरी तरह खुले में शौच मुक्त करना है।

देश में हर साल लोग कई खतरनाक बिमारियों से ग्रसित होते हैं और इस पर आने वाला खर्च बहुत अधिक होता है। डब्लू एच ओ के मुताबिक खुले में शौच से कई बिमारियां फैलती हैं और किसी भी देश के विकास को बाधित करती हैं। इस लिये देश को बिमारियों के उपचार पर खर्च करने से अच्छा है, कि उसके वजह को खत्म किया जाए। हमे काफी हद तक इस समस्या से निजात पा चुके हैं और आशा करते हैं कि गांधी जी के 150 वीं जन्म तिथी पर उन्हे स्वच्छ भारत का तोहफा जरुर दे पाएंगे।


 

स्वच्छ भारत अभियान पर लेख 3 (300 शब्द)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत मिशन का शुभारंभ किया। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का लक्ष्य 2 अक्टूबर, 2019 को, राष्ट्रपिता की 150 वीं जयंती के अवसर पर देश भर में गलियों, सड़कों और बुनियादी ढांचों को स्वच्छ बनाने का है। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा सफाई अभियान है।

 

स्वच्छ भारत मिशन की प्रासंगिकता

सर्वप्रथम 2011 की जनगणना में, स्वच्छता की आवश्यकता को एक प्रमुख मुद्दे के तौर पर वरीयता दी गई क्योंकि उस वर्ष जनगणना के दौरान यह पता लगा कि भारत में 26 लाख से भी अधिक लोग शौचालय उपलब्ध नहीं होने की वजह से खुले में शौच कर रहे थे। 62,009 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य देश में खुले में शौच के उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करना है। इस मिशन के अन्य उद्देश्यों में अस्वच्छ शौचालयों का रूपांतरण फ्लश शौचालयों में करना, मैला ढोने की अमानवीय प्रथा को समाप्त करना एवं और नगरपालिका द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सम्मिलित हैं।

विख्यात हस्तियों की भागीदारी

इस अभियान का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने अभियान के लिए नौ मशहूर हस्तियों को नामित किया था। वे अभियान में शामिल हुए और उन्होंने और नौ लोगों को नामित किया। इस प्रकार, इस अभियान में जीवन के सभी क्षेत्रों से लोग जुड़ते गए और इस अभियान में तीव्रता आई। प्रमुख हस्तियां जैसे आमिर खान, अमिताभ बच्चन, कैलाश खेर, प्रियंका चोपड़ा और साथ ही सचिन तेंदुलकर, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल और मैरी कॉम जैसे प्रमुख खिलाड़ी आज एसबीएम का हिस्सा हैं।

कितनी सफलता हासिल हुई

सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और केरल ऐसे तीन राज्य हैं जिन्हें इस वर्ष खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 31 जनवरी तक भारत के 98 प्रतिशत से भी अधिक परिवार खुले में शौच की मजबूरी से मुक्त हो गए हैं। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के अनुसार, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात और पंजाब को 31 जनवरी 2019 तक ओडीएफ श्रेणी प्राप्त हो चुका है।

निष्कर्ष: हालांकि सरकार अच्छे से अच्छा प्रयास कर रही है। स्वच्छ भारत के मिशन को सही अर्थों में पूरा करने के लिए, देश के नागरिकों में व्यवहारगत परिवर्तन लाए जाने की आवश्यकता है और आशा है कि इस वर्ष हम अपने लक्षय को अवश्य प्राप्त कर लेंगे।


 

स्वच्छ भारत अभियान पर लेख 4 (500 शब्द)

करीब 62,009 रुपये की अनुमानित लागत के साथ अक्टूबर 02, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गए, स्वच्छ भारत मिशन के तहत, 1.04 करोड़ परिवारों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसके अंतर्गत 2.5 लाख सामुदायिक शौचालयों, 2.6 लाख सार्वजनिक शौचालयों के अतिरिक्त सभी शहरों मे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा प्रदान करना आदि सम्मिलित है।

 

मिशन का प्रबंधन

मिशन का शहरी घटक, शहरी विकास मंत्रालय द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है और मिशन का ग्रामीण घटक पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है। तीन लाख के आसपास सरकारी कर्मचारियों और भारत के स्कूल और कॉलेज के छात्रों ने इस मिशन के प्रारंभिक चरण में भाग लिया।

ऐतिहासिक गतिविधियां:

संपूर्ण स्वच्छता अभियान (टीएससी)

वर्ष 1999 में, केन्द्र सरकार ने संपूर्ण स्वच्छता अभियान (टीएससी) की शुरूआत की। इसका उद्देश्य ग्रामीण लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना एवं उनकी स्वच्छता सुविधाओं की मांग को बढ़ाना था। समुदायिक नेतृत्व पर जोर देते हुए इस योजना को लागू किया गया था। इसके अंतर्गत सरकार ने उन परिवारों को, जो गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) थे, वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया। प्राथमिक स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (सीएससी) में भी शौचालयों के निर्माण के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराई गई थी।

निर्मल भारत अभियान (एनबीए)

भारत सरकार ने इस क्षेत्र में लोगों के योगदान को सम्मानित करने के लिए निर्मल ग्राम पुरस्कार (एनजीपी) का शुभारंभ किया। एनजीपी काफी सफल साबित हुई जिस वजह से सरकार ने सामुदायिक स्वच्छता अभियान (सीएससी) का नाम बदलकर निर्मल भारत अभियान (एनबीए) कर दिया इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को तेजी से बढ़ाना था। इस योजना का संचालन ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किया गया था।

निर्मल भारत अभियान के तहत सरकार ने समुदाय केंद्रित रणनीति को अपनाया। मांग आधारित दृष्टिकोण द्वारा घरों एवं स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं की मांग एवं स्वचछता के प्रति जागरूकता पैदा करना इत्यादि गतिविधियों पर जोर दिया गया और साथ ही वातावरण को भी स्वच्छ बनाने संबंधी गतिविधियों को गति प्रदान की गयी।

स्वच्छ भारत अभियान का उद्भव

संपूर्ण स्वच्छता अभियान और निर्मल भारत अभियान जैसे कार्यक्रमों ने इनकी योजना में निहित खामियों, अपव्यय और कई अन्य अनियमितताओं के कारण वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहे। कैग (सीएजी) के आकलन के अनुसार, व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के 30 प्रतिशत से अधिक निर्माण की खराब गुणवत्ता, अधूरी संरचना, और रखरखाव की उचित व्यवस्था ना होने के कारणों से बेकार हो गए। बाद में यह कहा गया कि वैचारिक ढांचा हालांकि आपूर्ति प्रेरित से मांग प्रेरित के बीच परिवर्तित होता रहा और हमने इनसे जो सबक सीखा उनके प्रयोगों द्वारा देश में स्वच्छता की स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं लाया जा सका। हमें अपनी पिछली गलतियों से सीखने की जरूरत है।

स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत के साथ, सरकार ने निर्मल भारत अभियान (एनबीए) का पुनर्गठन दो भागों, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), में कर दिया। अब सरकार का पूरा ध्यान वर्ष 2019 तक साफ एवं खुले में शौच मुक्त भारत को प्राप्त करने का है और इस योजना में हम काफी हद तक सफल हो चुके हैं।

निष्कर्ष: वर्ष 2019 के लिए निर्धारित लक्ष्य को राष्ट्रपिता की 150वीं जयंती पर उन्हें दी जानेवाली एक उपयुक्त श्रद्धांजलि के तौर पर देखा जा रहा है। इससे हमारे देश में साफ-सफाई के स्तर में सुधार हो जाएगा एवं यह देश को खुले में शौच से मुक्त बनाने में लगभग कामयाब भी हो चुका है। लेकिन स्वच्छ भारत मिशन की सफलता एवं देश में साफ-सफाई के स्तर में सुधार लाने की दिशा में हर नागरिक के योगदान पर निर्भर करेगा, समाज के हर व्यक्ति को इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपना योगदान देने की आवश्यकता है।


 

स्वच्छ भारत मिशन पर लेख 5 (600 शब्द)

एक अनुमान के मुताबिक, खराब स्वास्थ्य रक्षा एवं स्वच्छता सुविधाओं की वजह से भारत में प्रति वर्ष लगभग 600,000 लोग दस्त एवं अन्य इसी प्रकार की बिमारियों की वजह से काल के गाल में समा जाते हैं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 45 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनके पास शौचालय की सुविधा नहीं है और वे खुले में शौच करते हैं। इतना ही नहीं, शौचालयों की कमी के कारण देश की महिलाओं में से एक तिहाई के उपर यौन उत्पीड़न का खतरा हर वक्त मंडराता रहता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2 अक्टूबर, 2014 को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में राजघाट स्थित उनकी समाधी स्थल पर स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) की शुरूआत की गई। भारत सरकार द्वारा आरंभ किए गए इस राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत, देश भर में 4041 वैधानिक कस्बों को शामिल किया गया और 2 अक्टूबर, 2019 तक गलियों, सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढ़ाचे) को स्वच्छ बना देने का लक्ष्य तय किया गया है।

उठाए जा रहे कदम:

भारत के शहरों और गांवों को साफ करने के लिए चलाए जा रहे इस मिशन का अनुमानित लागत 62,009 करोड़ रुपये के आस-पास तय की गई है। यह हाल के समय भारत के नागरिकों के बीच गंदगी से मुकाबला करने एवं लोगों में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से चलाई जा रही योजना है। लोग, मशहूर हस्तियों, राजनेताओं, शैक्षणिक संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों और स्थानीय सामुदायिक केन्द्रों, देश भर के लाखों लोगों ने पूरे देश में साफ-सफाई के मुहिम एसबीएम की शुरूआत की। बॉलीवुड अभिनेताओं से खिलाड़ियों तक और सरकारी अधिकारियों, सैनिकों, उद्योगपतियों के साथ ही आध्यात्मिक नेता भी स्वेच्छा से भारत को स्वच्छ बनाने की दिशा में योगदान दे रहे हैं।

शहरी विकास मंत्रालय, (एसबीएम) शहरी घटक प्रबंध का नियंत्रण कर रही है, जबकि पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय मिशन के ग्रामीण घटक को संभाल रही है। बड़ी संख्या में स्कूलों के द्वारा भी बार-बार साफ-सफाई अभियान का आयोजन किया जा रहा है जिसके अंतर्गत नाटकों और अन्य साधनों के माध्यम से स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य:

भारत सरकार ने 1 अप्रैल, 1999 से प्रभावी संपूर्ण स्वच्छता अभियान (टीएससी) का शुभारंभ किया। टीएससी को एक बड़ा प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए सरकार ने जून 2003 में एक प्रोत्साहन योजना शुरू की जिसके अंतर्गत व्यापक स्वच्छता कवरेज, पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण, खुले में शौच मुक्त पंचायतों, गांवों, ब्लॉक, और जिलों में एक पुरस्कार “निर्मल ग्राम पुरस्कार” की घोषणा की। टीएससी का बाद में नाम बदलकर निर्मल भारत अभियान (एनबीए) कर दिया गया। उसके बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए 2 अक्टूबर, 2014 को, अभियान का नाम बदलकर स्वच्छ भारत अभियान या स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) रखा गया।

एसबीएम का मुख्य उद्देश्य:

इस मिशन का लक्ष्य 2019 तक खुले में शौच का उन्मूलन करना है। प्रधानमंत्री ने एसबीएम की शुरूआत करते हुए स्वच्छ भारत मिशन को एक जन आंदोलन में परिवर्तित करने की घोषणा की और लोगों को न तो खुद कूड़ा फैलाने एवं न दूसरों को फैलाने देने के लिए शपथ लेने का आह्वान किया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार, भारत में साफ-सफाई और स्वच्छता की कमी के कारण औसतन प्रति व्यक्ति 6500 रू का नुकसान हो गया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि स्वच्छ भारत मिशन का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव होगा। इसके द्वारा गरीबों की आय की रक्षा होगी और इस प्रकार यह अंत में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान देगा। उन्होंने रेखांकित किया कि स्वच्छता को राजनीतिक औजार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में देशभक्ति की अभिव्यक्ति और योगदान समझा जाना चाहिए।

इस मिशन का लक्ष्य परिवारों, समुदायों के लिए शौचालयों के निर्माण द्वारा खुले में शौच करने की; मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करना है और साथ ही इस दिशा में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तरीकों के द्वारा उन्नत नगरपालिका का गठन एवं स्वच्छता के संबंध में लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना है।

निष्कर्ष: हालांकि सरकार ने इस मिशन का जबरदस्त प्रचार किया है, इसके बावजूद अभी भी भारत में स्वच्छता के प्रति जागरूकता में कमी है जो चिंता का एक प्रमुख कारण है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर वातावरण को साफ रखने के लिए प्रयास करना शुरू कर दे तो जल्द ही निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम की प्राप्ति होगी। कहीं-कहीं लोग इतने सजक हैं कि हर साल पहला स्थान पा रहे हैं जैसे कि इंदौर, जो लगातार हर साल स्बसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतता आ रहा है। तो प्रयास किया जा सकता है और केवल एक छोटी सी पहल की आवश्यकता है भारत को पूरी तरह स्वच्छ बनाने के लिए।


 

स्वच्छ भारत मिशन पर लेख 6 (800 शब्द)

पिछले कुछ वर्षों से भारत निरंतर आर्थिक विकास के पथ पर अग्रसर है, लेकिन इसके बावजूद अस्वच्छता एवं सफाई की कमी ऐसे दो कारण हैं जिनकी वजह से इसे भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही के विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में भी यह तथ्य प्रकाश में आया है कि भारत को प्रति वर्ष घरेलू उत्पाद में 6.4% प्रति वर्ष का नुकसान इन दो वजहों से झेलना पड़ता है। हालांकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) की शुरूआत की है जिसके अंतर्गत, भारत सरकार ने वर्ष 2019 तक 'संपूर्ण स्वच्छता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस मिशन का लक्ष्य है कि वर्ष 2019 के अंत में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक भारत के हर घर में एक शौचालय होगा।

स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य

स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्य हैं - खुले में शौच के उन्मूलन, अस्वच्छ शौचालयों का फ्लश शौचालयों में रूपांतरण, मानव द्वारा मैला ढोने के कार्य का उन्मूलन, मैले के 10% का संग्रह और उसका वैज्ञानिक प्रसंस्करण/निपटान के बाद पुन: उपयोग/नगरपालिका द्वारा ठोस अपशिष्टों का पुनर्चक्रण और साथ ही लोगों को इस विषय में जागरूक करना और उनके व्यवहार मे परिवर्तन लाना ताकि स्वच्छता से संबंधित स्वस्थ परंपराओं का विकास हो सके। इस मिशन का उद्देश्य सफाई से संबंधित शहरी एवं स्थानीय निकायों को मजबूत करना है और साथ ही इस मिशन के संचालन में निजी क्षेत्रों की भी भागिदारी सुनिश्चित करना।

खुले में शौच से नुकसान

खुले में शौच, देश में साफ-सफाई का अभाव होने के प्रमुख कारणों में से एक है। यह एक ऐसी प्रथा है जिसकी वजह से लोग शौच करने कि लिए शौचालय के बजाए खेतों या अन्य खुले स्थानों का तलाश करते हैं और भारत में यह प्रथा बड़े पैमाने पर फैली हुई है। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार खुले में शौच करने की इस प्रथा की वजह से भारत, जहां खुले में शौच करने वाले लोगों की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है, हर दिन करीब 65,000 टन मलमूत्र वातावरण में सम्मिलत हो जाता है।

खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ)

खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनना हमारे देश के लिए एक कठिन लक्ष्य था। क्योंकि यह एक तरह से सदियों पुरानी प्रथा थी और इस वजह से लोगों के बीच जागरूकता फैलाना भी जरूरी था। उन्हें यह समझाना वाकई एक बड़ी चुनौती है, कि खुले में शौच करना स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है। भारत के तीन राज्य -- सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और केरल को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) राज्यों की सूची में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त है।

अक्टूबर 2016 में, हिमाचल प्रदेश को भी एसबीएम के तहत खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) राज्य घोषित कर दिया गया था। सिक्किम के बाद, हिमाचल प्रदेश में भी हर व्यक्ति के घर में शौचालय होने का लक्ष्य पूरा हो जाने की वजह से इस राज्य के सभी 12 जिलों को ओडीएफ का दर्जा मिला। इस दर्जे की वजह से हिमाचल प्रदेश में स्वच्छता अभियान को गति देने के लिए और परियोजनाओं को चलाने के लिए विश्व बैंक द्वारा 9,000 करोड़ रूपए की राशी मिलेगी। नवंबर 2016 में, केरल को भी ओडीएफ राज्य का दर्जा मिल गया और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2017 तक हरियाणा, गुजरात, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों को भी ओडीएफ का दर्जा मिल गया। इन्हीं आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल 113,000 गांव ओडीएफ बन चुके है।

स्वच्छ भारत मिशन के लिए अनुदान

यह मिशन केन्द्र द्वारा प्रायोजित एक प्रमुख योजना है जिसके लिए सभी राज्यों का सहयोग मिलना काफी महत्वपूर्ण है। एसबीएम के लिए बजटीय आवंटन, स्वच्छ भारत कोष और निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) द्वारा धन जुटाया जाता है। इसे भी विश्व बैंक जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन द्वारा वित्तीय सहायता मिलती है। भारत सरकार ने 2015 में स्वच्छ भारत उपकर (एसबीसी) लगाना शुरू किया है, जिसके द्वारा भी इस योजना के लिए धन जुटाया जा रहा है और इस इस अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है।

यह उपकर सभी कर योग्य सेवाओं पर लागू है। इस कर को एकत्र करके भारत सरकार को दे दिया जाता है। स्वच्छ भारत उपकर की शुरूआत, स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा देने के लिए ही किया गया है। यह सभी कर योग्य सेवाओं पर 0.5% की दर से, 15 नवंबर 2015 से प्रभावी है। एसबीसी को भारत की संचित निधि में एकत्र किया जाता है।

केंद्र सरकार ने पहले ही 2014 में स्वच्छ भारत कोष (SBK) की घोषणा कर दी थी। इसका गठन सचिव, व्यय विभाग और वित्त मंत्रालय की अध्यक्षता में हुआ है। कई मंत्रालयों के सचिव इसके भागिदार हैं। इसके अनुदेशों के अनुसार कॉरपोरेट सेक्टर, परोपकारी लोगों एवं कॉरपोरेट सेक्टर के नियमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) राशियों से इस अभियान के लिए धन जुटाया जा सकता है। साथ ही इस कोष के लिए कोई भी व्यक्ति अलग से भी अनुदान कर सकता है। इस कोष में जमा धन को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में साफ-सफाई के स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे कार्यक्रमों के लिए प्रयोग किया जाता है।

इस संदेश के प्रचार-प्रसार में कि गयी 'साफ-सफाई भी पूजा के बराबर ही है, लोगों का तांता लगना शुरू हो चुका है, लेकिन अभी भी इस दिशा में पूर्ण उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एक लंबा रास्ता तय किया जाना बाकी है। अभी भी सरकार द्वारा इस मिशन के लिए पानी की आपूर्ति, कचरे के सुरक्षित निपटान और उपचार एवं उचित इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढ़ांचे) के निर्माण एवं रखरखाव सहित स्वच्छता के लिए आवश्यक कार्यों की एक पूरी श्रृंखला पर काम किए जाने के लिये लगी हुई है। केवल शौचालयों का निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ उसके इस्तेमाल के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए भी जागरूकता अभियान के चलाए जाने की आवश्यकता है। केवल यही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में चली आ रही सदियों पुरानी खुले में शौच करने की प्रथाओं का अंत करने के लिए पूरे समुदाय को एक साथ मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। गांव-गांव में देश के हरेक नागरीक को प्रतिज्ञा लेनी होगी कि वह भारत को स्वच्छ बनाने के लिए सही अर्थों में अपना योगदान देगा।

निष्कर्ष: सरकार के अथक प्रयासों के बाद आज हम अपने लक्षय के काफी करीब पहुंच चुके हैं, देश का 98 प्रतिशत हिस्सा खुले में शौच मुक्त हो चुका है। सरकार लोगों में जागरुकता लाने के लिये विभिन्न प्रकार के प्रतियोगिताएं करा रही है, जैसे कि सबसे स्वच्छ शहर, सबसे स्वच्छ स्टेशन, कचड़े का सबसे अच्छे निपटान तरीकों का उयोग करने वाले शहर जैसी कई प्रतियोगिताएं सरकार हर साल करावाती है और लोग इसमें बढ़-चढ़ के हिस्सा भी लेते हैं। इंदौर लगातार कई वर्षों से सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतता आरहा है। देश मे लोग जागरुप तो हुए हैं, परंतु सफाइ एक बार की जाने वाली चीज़ नहीं है, हमें इसे आदत को बनाए रखना होगा और आशा है कि हम इस वर्ष अपने लक्षय को जरूर पूरा कर पाएंगे।

 

 

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