ओजोन लेयर डिप्लीशन - अर्थ, तथ्य, कारण, प्रभाव, रोकथाम और समाधान

ओजोन की परत हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से रोकती है। वर्षों से ओजोन परत के क्षय होने के कारण, ओजोन परत में कई छेद हो गये है, और इसी के माध्यम से अब हानिकारक विकिरण वातावरण में प्रवेश करने लगा हैं। ओजोन परत के क्षय के कारण कैंसर जैसे बिमारियों के नकारात्मक प्रभाव बड़ जाते हैं।

ये तरंग दैर्ध्य किरणे पौधों और जीव-जन्तुओं को नुकसान पहुंचाने के अलावा मनुष्यों में त्वचा कैंसर, सनबर्न और मोतियाबिंद आदि जैसी बीमारियां पैदा करती हैं। ये समस्या वास्तव में बहुत गंभीर है और जिससे यह वैश्विक चिंता का कारण बन गयी है। इन्ही चिंताओं के कारण 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को अपनाया गया। इस प्रोटोकॉल ने सीएफसी (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) और हेलन जैसे ओजोन- अवक्षय रसायनों के उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया।

ओजोन परत क्षय का तात्पर्य (Meaning of Ozone Layer Depletion in Hindi)

ओजोन अवक्षय पृथ्वी के वायुमंडल या ओजोन परत में मौजूद ओजोन की कुल स्थिर मात्रा की कमी को प्रदर्शित करता है। इसे पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों के चारों ओर समताप मंडल में कमी के रूप में भी वर्णित किया जा सकता है। दूसरी घटना को ओजोन छिद्र के रूप में जाना जाता है, समताप मंडल घटनाओं के अलावा, वसंत ऋतु ध्रुवीय ट्रोपोस्फेरिक ओजोन अवक्षय की घटनाएं भी इसमे शामिल होती हैं।

सॉल्वैंट्स, प्रोपेलेंट्स, हेलोकार्बन रेफ्रिजरेंट्स और फोम-फ्लाइंग एजेंट (क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी), एचसीएफसी, हलों) जैसे मानव निर्मित रसायनों को ओजोन- अवक्षय पदार्थ (ओडीएस) भी कहा जाता है, जो इस समस्या के प्रमुख कारण हैं। ये यौगिक सतह पर उत्सर्जित होने के बाद समताप मंडल में प्रवेश करते हैं और वहां ये फोटोविघटन नामक प्रक्रिया द्वारा हलोजन परमाणुओं को उत्सर्जित करते हैं। इससे ये ओजोन (O3) में ऑक्सीजन (O2) के टूटने का कारण बनते है, जिससे ओजोन की मात्रा में कमी आ जाती है और इसका क्षय होने लगता हैं।

ओजोन परत क्षय से संबंधित तथ्य (Facts Related To Ozone Layer Depletion)

  • प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली ओजोन गैस, पृथ्वी के सतह से लगभग 15 से 30 किलोमीटर उपर उपस्थित होती है। यह एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है, जिससे सूर्य द्वारा उत्सर्जित हानिकारक पराबैंगनी बी विकिरण से पृथ्वी के वायुमंडल को सुरक्षा प्राप्त होती है।
  • ओजोन एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील अणु है। जिसमें तीन ऑक्सीजन परमाणु पाये जाते हैं, यह समताप मंडल नामक स्थान में, उच्च वातावरण में लगातार निर्मित होते और टूटते रहते है।
  • हालांकि, कुछ ओजोन परत निचले वायुमंडल (क्षोभ मंडल) में भी पाए जाते हैं। क्षोभ मंडल में स्थित ओजोन परत एक हानिकारक पदार्थ के रुप में कार्य करता है और कभी-कभी हल्का रासायनिक धुआं भी उत्पन्न करता है। क्षोभ मंडल में मौजूद यह गैस कुछ मात्रा में मानव फेफड़ों, तंतुओं और पेड़-पौधो को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
  • मानव निर्मित औद्योगिक प्रदूषण के परिणामस्वरूप, क्षोभ मंडल में ओजोन की मात्रा बढ़ रही है और जहां इसकी आवश्यकता है, अर्थात समताप मंडल में इसकी मात्रा घट रही है।
  • आज ओजोन परत में रसायन क्लोरीन और ब्रोमाइन के मुक्त होने के कारण इसका क्षय होता जा रहा है और परिणामस्वरूप पृथ्वी पर बड़ी मात्रा में पराबैंगनी बी किरणें पहुंच रही हैं और ये मनुष्यों में मोतियाबिंद और कैंसर पैदा करने के साथ-साथ जीव-जन्तुओं के स्वास्थ विकार का कारण भी बनती जा रही हैं।
  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) ओजोन परत के क्षय होने के प्राथमिक कारणों में से एक है।
  • यू.एस. एजेंसी ऑफ एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन के अनुसार, क्लोरीन के एक परमाणु में हजारों ओजोन अणुओं को नष्ट करने की क्षमता होती है।
  • 1980 के दशक के मध्य से ओजोन परत विशेष रूप से प्रदूषण से प्रभावित हुई है। कम तापमान सीएफसी के क्लोरीन में रूपांतरण का कारण बनती है जिसे "ओजोन छिद्र" के रूप में जाना जाता है। आज के समय में ओजोन परत का लगभग 20 प्रतिशत भाग का क्षय हो चुका है।
  • औद्योगिक देश जैसे कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और यूरोपीय संगठन के कई देश वायुमंडल में लगभग 90 प्रतिशत सीएफसी को मुक्त करते है, जिससे ओजोन परत में भारी क्षति होती है।
  • 1996 में इन देशों द्वारा सीएफसी के उत्सर्जन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि क्लोरीन के स्तर को अपने सामान्य स्तर पर वापस लौटने में लगभग 50 साल का समय लग सकता हैं।
  • अल्ट्रावाइलेट बी विकिरणों ने शैवाल और फाइटोप्लांकटन जैसे एक कोशिकीय जीवों के प्रजनन चक्र तथा खाद्य श्रृंखला को बिगाड़ने के साथ-साथ पृथ्वी के अन्य जीव-जन्तुओं और पौधों के विकास को प्रभावित कर दिया है।

 

ओजोन परत क्षय के कारण (Causes of Ozone Layer Depletion)

ओजोन परत रिक्तीकरण के कारणों को व्यापक रूप से मानव निर्मित कारणों और प्राकृतिक कारणों में विभाजित किया गया है। मानव निर्मित प्रभाव प्राकृतिक कारणों से कई अधिक है। इन दोनों प्रकार के प्रभावो को नीचे वर्णित किया गया हैं -

  1. मानव निर्मित कारण

क्लोरीन आधारित पदार्थ जैसे सीएफसी का अंधाधुंध उपयोग ओजोन परत की कमी का मुख्य कारण बनता है। व्यापक रूप से इनका कई विनिर्माण संयंत्रों, रेफ्रिजरेंट्स और एयरोसोल में उपयोग किया जाता है और  जब ये वायु में मुक्त होती है, तो ये ओजोन परत पर हानिकारक प्रभाव डालती है। हालांकि यह पाया गया है कि क्लोरीन के सिर्फ एक परमाणु ओजोन के लगभग 100, 000 अणुओं को नष्ट कर सकता है।

हवा सीएफसी को समताप मंडल में फैला देती है। ओजोन अणु अस्थिर होते है और ये सीएफसी में क्लोरीन परमाणु के साथ प्रतिक्रिया करते हैं और टूट जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप ऑक्सीजन अणु और एकल मुक्त प्रवाहित ऑक्सीजन परमाणु का निर्माण होता है। वायुमंडल में क्लोरीन से अत्यधिक खतरे की संभावना होती है, परन्तु स्विमिंग पूल जैसे अन्य स्थानों में क्लोरीन के खतरे की संभावना कम हो जाती है।

प्रक्रियाओं में कई प्रतिक्रियाएं शामिल है, लेकिन कुछ सरलीकृत प्रतिक्रियाएं निम्न प्रकार से हैं:

C l+ O 3 —–> C lO + O 2

C lO + O —–> C  l+ O 2

शुद्ध प्रभाव: O 3 + O —–> 2 O 2

इसके अलावा, हलोजन, मिथाइल क्लोरोफॉर्म, कार्बन टेट्राक्लोराइड जैसे रसायन तथा मुख्य रूप से हमारे द्वारा दैनिक जीवन में उपयोग किये जान वाले एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, फोम, रंग, प्लास्टिक इत्यादि जैसे पदार्थ ओजोन परत की कमी का कारण बनते हैं।

इन पदार्थों का मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक उद्यमियों में उपयोग किया जाता है। एयर कंडीशनर में इस्तेमाल किये जाने वाले गैस फ्रायन -11 और गैस फ्रायन -12 ओजोन के लिए हानिकारक होते है क्योंकि इन गैसों के अणु ओजोन के लाखों अणुओं को नष्ट कर देने में सक्षम होते है।

हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचसीएफसी): इनका उपयोग सीएफसी के स्थान पर किया जाता है, परन्तु ये सीएफसी की तरह ओजोन परत के लिए हानिकारक नहीं होते हैं।

हेलान: इन्हें पानी या आग बुझाने वाले रसायनों की तरह अग्निरोधक के रुप में उपयोग किया जाता है।

कार्बन टेट्राक्लोराइड: चयनित सॉल्वैंट्स और आग बुझाने वाले यंत्रों के रुप में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

मिथाइल क्लोरोफॉर्म: आम तौर पर उद्योगों में इसका उपयोग वाष्प डिग्रीसिंग, सफाई, रासायनिक प्रौद्योगिकी और चिपचिपे पदार्थ के रुप में किया जाता है।

 

  1. वनों की कटाई

पृथ्वी पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई भी ओजोन परत के क्षय का कारण बनती है। पेड़ों की कटाई के कारण, वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आ जाती है, जिसके कारण ओजोन गैस के अणुओं का निर्माण नहीं हो पाता।

  1. प्रकृतिक कारण

रसायनों के अलावा, कुछ अन्य प्राकृतिक घटनाएं जैसे सूर्य की किरण और समताप मंडल में उत्पन्न हवाए, ओजोन परत को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार माने जाती है। इसके कारण होने वाले नुकसान लगभग 1-2% से कम और अस्थायी होते है। यह भी माना जाता है कि ज्वालामुखीय विस्फोट भी प्रमुख रुप से ओजोन परत को कम करने में आपना योगदान देती हैं।

ओजोन परत क्षय के प्रभाव (Effects of Ozone Layer Depletion)

ओजोन परत की कमी से उत्पन्न छिद्रो के कारण हानिकारक पराबैंगनी किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने में सक्षम हो जाती है। सूर्य की पराबैंगनी किरणें विभिन्न स्वास्थ्य और पर्यावरणीय मुद्दों के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं।

  1. मनुष्यों पर प्रभाव
  • त्वचा कैंसर: पराबैंगनी किरणों के अनावरण मनुष्यों में कई प्रकार के त्वचा कैंसर का कारण बनती है। इनमे कुछ घातक मेलेनोमा, बेसल और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा शामिल हैं।
  • आंखों को क्षति: यूवी किरणों के प्रत्यक्ष संपर्क के कारण फोटोकैराइटिस (धुंध अंधापन) और मोतियाबिंद जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली क्षति: पराबैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभाव प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुँचाती है। जिसके परिणामस्वरूप प्रतिरक्षा प्रणाली में कमी आ जाती है।
  • त्वचा की उम्र का तेजी से बढ़ना: पराबैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभाव के कारण गोरे चमड़ी वाले लोगों को चकत्ते और अन्य त्वचा की बीमारियों का सामना करना पड़ता हैं।
  • अन्य प्रभाव: यह मनुष्यों और जीव-जन्तुओं के डीएनए को प्रभावित करता है। ये फेफड़ों से संबंधित समस्याओं जैसे श्वास में कठिनाई, अस्थमा आदि बीमारिया, पराबैंगनी किरणों के प्रत्यक्ष संपर्क में आने से उत्प्न्न होती हैं। यदि गर्भवती महिला इन किरणों के संपर्क में आती है, तो उन्हें अपूरणीय गर्भ क्षति के हानिकारक प्रभावो को सामना करना पड़ता है।
  1. उभयचरो पर होने वाले प्रभाव

ओजोन की कमी उभयचरों की कई प्रजातियों के जीवन चक्र को विभिन्न चरणों में प्रभावित करती है। इसके कुछ निम्नलिखित प्रभाव के बारे में नीचे बताया गया हैं।

  • ये लार्वा के उत्पत्ति और विकास में बाधा पैदा करता हैं।
  • ये व्यवहार और आदतों में परिवर्तन कर देता है।
  • कुछ प्रजातियों में विकृतियां पैदा कर देता है।
  • ये आखों के रेटिना को क्षति पहुँचाता है जिससे अंधापन उत्पन्न हो जाता है।
  1. पौधों पर प्रभाव
  • यूवी विकिरण पौधों में प्रकाश संश्लेषण का प्रक्रिया को प्रभावित करता है और पौधे द्वारा उत्पादित फूलों की संख्या और उसके समय को भी बदल देता है।
  • पौधों की वृद्धि यूवी-बी विकिरण से सीधे तौर से प्रभावित होती है।
  1. समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
  • एक विशेष प्रकार की पराबैंगनी किरणें (यूवी-बी) समुद्र में कई किलोमीटर अंदर में प्रवेश करती है और समुद्री जीवन को नुकसान पहुँचती है।
  • पादप प्लवक और बैक्टीरियोप्लांकटन पराबैंगनी किरणों में वृद्धि के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं। पराबैंगनी विकिरणें इन सूक्ष्म जीवों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती हैं, जिससे खाद्य श्रृंखला के साथ-साथ पूरी पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो जाती है।
  1. अन्य प्रभाव

इनके अलावा, कम वातावरण में मौजूद ओजोन, प्रदूषक और ग्रीनहाउस गैस के रूप में कार्य करती है, जो ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का कारण बनती है। अध्ययनों से पता चला है कि स्टेटोस्फेरिक ओजोन की तुलना में कम वायुमंडलीय ओजोन का जीवन काफी छाटा होता है, जिससे इसे कम नुकसान होता है।

ओजोन परत क्षय को रोकने के लिए समाधान (Solutions to Prevent Ozone Layer Depletion)

वर्तमान समय में, कई प्रकार के रसायनों के बढ़ते उपयोग और पेड़ों की अंधाधुंध कटौती के कारण, ओजोन परत में तेजी से कमी होती जा रही है। ओजोन परत रिक्तीकरण की समस्या के समाधान बहुत ही सरल है और हम इसे अपने दैनिक जीवन में बहुत ही आसानी से अपना सकते है। हमें ओडीएस (ओजोन घटाने वाले पदार्थ) को जारी न कर करने के लिए सुनिश्चित बदलावों को बढ़ावा देना चाहिए। हमे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए जिससे ऊपरी वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहे और ओजोन अणुओं की संख्या में वृध्दि होती रहे। ओजोन परत पर नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए हमें उद्योग के मालिकों और उनके संचालनों को उन पदार्थों और प्रक्रियाओं का कम उपयोग करने की सलाह देनी चाहिए।

  • कीटनाशकों का उपयोग करने से बचें

कीटनाशक खरपतवार और वायरस से छुटकारा दिलाने के लिए एक आसान समाधान होता है, परन्तु ये ओजोन परत को नुकसान भी पहुंचाता हैं। इसीलिए हमे कीटनाशकों के स्थान पर, प्राकृतिक तरीकों का उपयोग करना चाहिए जैसे हमे जंगली घास के विकास को रोकने के लिए नियमित रूप से अपने बगीचें और खेतों की लवाई करनी चाहिए। प्राकृतिक कीटनाशक को व्यवस्थित रुप से बना कर उसका इस्तेमाल करना चाहिए।

  • निजी वाहनो का सीमित उपयोग करें

ओजोन परत की कमी की समस्या को कम करने के लिए धुआं जारी करने वाले तथा निजी वाहनों के उपयोग को सीमित करना चाहिए। निजी वाहनों का उपयोग करने के बजाये हमें वैकल्पिक तरीके तथा पारिस्थितिक अनुकूल जैसे कारपूलिंग या साइकिल या हाइब्रिड कार आदि सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए, जिससे इस समस्या को और अधिक कम किया जा सके।

  • पर्यावरणीय अनुकूल घरेलू सफाई उत्पादों का उपयोग

कई सफाई करने वाले पदार्थों में जहरीले रसायन मिले होते हैं जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाते हैं। बहुत सारे स्वास्थ्य भंडार और सुपरमार्केट आज सफाई करने वाले उत्पादों को बेचते हैं। जो प्राकृतिक अवयवों से बने होते हैं और किसी भी प्रकार के जहरीले उत्पादों से मुक्त होते हैं।

  • रॉकेट लॉन्च के लिए सख्त नियम बनाना

अंतरिक्ष की यात्रा बढ़ जाने के कारण पिछले कुछ सालों में रॉकेट लॉन्च की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। हालांकि ये कई तरीकों से ओजोन परत को नुकसान पहुंचाता है। अध्ययनों से पता पता चला है कि रॉकेट लॉन्च के कारण ओजोन परत में होने वाला नुकसान सीएफसी के कारण होने वाले नुकसान से काफी अधिक है।

सभी प्रकार के रॉकेट इंजन द्वारा ओजोन-नष्ट करने वाले यौगिक उत्पादों का दहन किया जाता है। इन्हें ओजोन परत के पास स्थित मध्य और ऊपरी समताप मंडल परत में सीधे निष्कासित कर दिया जाता है, जिससे इसके कारण सीधे तौर पर ओजोन परत को भारी क्षति होती है।

उपरोक्त समाधानों के अतिरिक्त, कुछ अन्य चीजें जो ओजोन परत की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं:

  • हैलॉन आधारित अग्निरोधक का उपयोग करने के बजाये फोम का उपयोग करना चाहिए।
  • दुकानों से खरीदे गए उत्पादों के लेबल की जांच कर यह सुनिश्चित करना चाहिए की कही ये ओजोन परत को नुकसान तो नहीं पहुंचाता।
  • शीतल करने वाले यंत्र जैसे रेफ्रिजरेटर या एयर कंडीशनिंग उपकरण जिसमे सीएफसी का उपयोग होता है, ऐसे उपकरणों का उपयोग या खरीदना नही चाहिए।
  • प्लास्टिक फोम (शुष्क बर्फ या फ्रीजर) से बने स्प्रे या उत्पादों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष

ओजोन परत की कमी एक समस्या है जिसपर हमे तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। ओजोन परत की कमी का मुख्य कारण वायुमंडल में क्लोरोफ्लोरोकार्बन का उत्सर्जन है। ओजोन परत में छिद्र होने के कारण पराबैंगनी बी की हानिकारक किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाती है और अनेक प्रकार के  हानिकारक परिणाम उत्पन्न करती है।

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि प्रदूषण और मौसमी परिवर्तन, ओजोन परत को और अधिक नुकसान पहुंचा रहे है। उनका मानना है कि अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो, दक्षिणी ध्रुव में बर्फ और महासागरों का जल स्तर तेजी से बढ़ने लगेंगा, इस तरह के संकट से समुद्री तटीय इलाको के जलमग्न हो जाने के कारण करोड़ो की संख्या में लोगो को विस्थापन का समना करना पड़ेगा जिससे उनका और उनके पड़ोसी देशों की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रिश्तो पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

ओजोन परत की कमी के वैश्विक संकट को देखते हुए, 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का गठन हुआ। जिसने एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेंट्स में सीएफसी के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया। नासा के द्वारा जारी की गयी एक रिपोर्ट के अनुसार इस प्रतिबंध के बाद ओजोन परत के क्षरण दर में कमी पायी गयी। जिन देशों द्वारा मॉन्ट्रियल संधि पर हस्ताक्षर किया गया था, उन देशों द्वार सीएफसी और टेट्राक्लोराइड जैसे हानिकारक गैसों के उपयोग पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगा दिया गया।

भारत में, ओजोन संरक्षण से संबंधित कार्य मुख्य रूप से पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा आयोजित किये जाते है और इंदौर मे स्थित "लघु उद्योग विकास संगठन" भी इसमे अपना योगदान देता आ रहा है।

प्रत्येक वर्ष, 16 सितंबर अंतर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस के रुप में मनाया जाता है। इस दिन ओजोन परत से जुड़े तथ्यों के बारे में जागरूकता प्रदान की जाती है। हालांकि लोग ओजोन परत की स्थिति को सुधारने में अपना योगदान दे रहे है, परन्तु इसकी क्षतिपूर्ति करने में अभी भी कई साल लग सकते हैं।

इस तरह के अंतरराष्ट्रीय पहल के कारण हानिकारक रसायनों के उत्पादन में काफी कमी आई है और ये ओजोन परत के नुकसान को रोकने में भी काफी मददगार साबित हो रहे है। लेकिन फिर भी, प्रत्येक व्यक्ति को ओजोन परत की सुरक्षा में अपना और अधिक योगदान देना चाहिए और अपने दैनिक जीवन में आवश्यक उपायों को अपनाना चाहिए। जिससे हम स्वयं को तथा पौधें और जीव-जन्तुओं को एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा सके।