जैविक खाद्य पदार्थ: अर्थ, उदाहरण, तथा फायदे

जैविक खाद्य पदार्थ कई सदियों से मानव जीवन का हिस्सा रहे हैं। पिछले कुछ समय से विश्व भर में खाद्य पदार्थों की मांग में काफी ज्यादे वृद्धि हुई है, जिसके कारण काफी तेजी से भूमि और प्राकृतिक संसाधनो का दोहन शुरु हो गया है। जैसे-जैसे भूमि की गुणवत्ता खराब होते जा रही है, विश्व भर में सूखे और अकाल की घटनाओं में वृद्धि होती जा रही है। इन घटनाओं के कारण तथा लोगों की बढ़ती जरुरतों को देखते हुए विश्व भर में खेती के उपज को बढ़ाने वाले तरीकों का प्रयोग किया जा रहा है और अंततः इसी ने विश्व भर में कार्बनिक खेती को बढ़ावा देने का कार्य किया।

हमें जैविक खाद्य पदार्थों का सेवन क्यों करना चाहिए – आर्गेनिक बनाम नान आर्गेनिक खाद्य पदार्थ

(Why You Should Eat Organic Food – Organic Vs Non-Organic food)

हालांकि पारंपरिकखेती द्वारा उत्पन्न समस्याओं के कारण लोगों में धीरे-धीरे जैविक खेती को लेकर जागरुकता भी देखने को मिल रही है, जिसमें बहुत ही कम संसाधनो द्वारा अच्छे तरीके से खेती की जा सकती है। इसके साथ ही जैविक खाद्य पदार्थों में स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए उपभोक्ताओं में भी इसकी मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

दिन-प्रतिदिन पर्यावरण के बढ़ते जागरुकता और सामान्य खेती के वजह से भूमि, पीने के पानी और वन्य जीवन पर होने वाले प्रभावों के कारण लोगों में जैविक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती जा रही है और यही कारण है कि यह इतने महगें दामों में बिक रहे है।

जैविक खाद्य पदार्थ क्या हैं? (What is Organic Food)

जैविक खाद्य पदार्थ वह खाद्य पदार्थ है जो कुछ तय मानको द्वारा उत्पादित किये जाते हैं। यह मानक विश्व भर में अलग-अलग हो सकते हैं पर मुख्यतः विश्व भर में यह बिना कीट नाशकों और रासायनिक खादद्वारा के उगाए जाते हैं। सामान्य तौर पर, जैविक खेती के अंतर्गत प्राकृतिक संसाधनों का सही तरीके से उपयोग किया जाता है और पारिस्थितिकीसंतुलन को बनाये रखा जाता है।

जैविक खाद्य पदार्थ या तो प्राकृतिक तौर-तरीकों से बिना रसायनिक उर्वरकों द्वारा उगाये जाते हैं या फिर वह जैविक तरीके से उगाये गये खाद्य पदार्थों द्वारा प्राप्त किये जाते हैं। इस तरह के खेती के तरीकों द्वारा जैविक खाद्य पदार्थों को काफी साफ और सुरक्षित तरीके से पैदा किया जा सकता है और यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभकारी होते हैं।

इनदिनों जब से लोगों को जैविक खाद्य पदार्थों के फायदों का पता चला है तब से इनके मांग में काफी वृद्धि देखने को मिली है। जैविक खाद्य पदार्थ किसी भी तरीके के रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से मुक्त होते है और इनमें कम्पोस्ट खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा इनमें रासायनिक उर्वरको के जगह जैविक उर्वरकोका उपयोग किया जाता हैं और मुख्यतः इन खादों का उपयोग जैविक खेती में ही किया जाता है।

भारत में जैविक खाद्य पदार्थ के रुप में बेचे जाने वाले किसी भी खाद्य पदार्थ को राष्ट्रीय जैविक खाद्य पदार्थ उत्पादन के मानकों पर खरा उतराना पड़ता है जोकि कृषि एंव संसाधित खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित किया जाता है।

जैविक रुप से उगाये गये फसलों के वृद्धि के लिए प्राकृतिक खादों का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा जैविक खेती द्वारा मिट्टी के गुणवत्ता भी काफी बढ़ जाती है। इसके साथ ही जैविक खेती के द्वारा पर्यावरण में प्रदूषण की मात्रा भी काफी कम हो जाती है।

कई देशों में केवल जैविक खेती को ही कानूनी रुप से मान्यता मिली हुई है, जिसे इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ आर्गेनिक एग्रीकल्चर मूवमेंट्स द्वारा निर्धारित किया जाता है। यह जैविक खेती के देखरेख करने वाली संस्था है जिसका गठन सन् 1972 में हुआ था।

 

जैविक खाद्य पदार्थों की विभिन्न श्रेणियां - जैविक खाद्य पदार्थों की श्रृंखला और उदाहरण

(Various Categories of Organic Food)

विभिन्न प्रकार के जैविक फल और सब्जियां बाजार में उपलब्ध है। इनमें से जैविक फल, सब्जियां, अनाज और दुग्ध उत्पाद और मीट सबसे ज्यादे मात्रा में खरीदे जाते हैं। इसके अलावा जैविक खाद्य पदार्थों द्वारा तैयार किये गये सोडा, कुकीज और नाश्ते में उपयोग होने वाला दलिया आदि जैसी वस्तुएं बाजार में आसानी से उपलब्ध है। इसी तरह आर्गेनिक दूध और मीट भी साधरण दूध और मीट के तुलना में अधिक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।

बाजार में खाद्य पदार्थों जैसे की फलों और सब्जियों के बढ़ती मांग के कारण उनमें कई बार कीटनाशकों के तत्व भी पाये गये हैं। यहीं कारण है कि जैविक खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता काफी बढ़ गयी है और अब लोग अनाज, दालों, चाय, मसालों और तिलहन में भी जैविक तरीके से उत्पन्न वस्तुओं को वारीयता दे रहे हैं।

सेब, पीच, स्ट्राबेरी, अंगूर, सेलरी, पालक, खीरे, चेरी, टमाटर, पीज, आलू और मिर्च जैसी ऐसी कुछ फल और सब्जियां है, जिन्हें जैविक रुप से ही उगाया जाना चाहिए क्योंकि इन पर अन्य फलों और सब्जियों की तुलना में अधिक मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।

नीचे दिए गये कुछ खाद्य पदार्थ जैविक मानको की श्रेणी में आती है।

1.सब्जियां

जैविक सब्जियां जैविक खाद्य पदार्थों का सबसे बड़ा हिस्सा है। पालक, टमाटर, फूलगोभी, आलू, करेला, गाजर, शिमला मिर्च और हरी मिर्च जैविक रुप से उगायी गयी सब्जियों का एक बड़ा हिस्सा है। इन सब्जियों में जहरीले रसायन और उर्वरक नही इस्तेमाल किये जाते हैं। इनकी बुवाई हाथों द्वारा काफी सघन तरीके से की जाती है।

2.फल और इनके रस

जैविक तरीके से उगाये गये फल भारत में जैविक खाद्य पदार्थों में एक अहम योगदान देते हैं। अलफांसो आम, अनार, केला, आड़ू और सेव सबसे ज्यादे खरीदे जाने वाले जैविक फल होते हैं। इन तरह के फलों में तेजी से पकाने वाले रसायनो जैसे कि असेटलीन गैस और कैल्शियम कार्बइड का उपयोग नही किया जाता है। हम कह सकते हैं कि आर्गेनिक तरीके से तैयार किये गये फलों का स्वाद और गुणवत्ता में रसायनिक तरीके से पकाये गये फलों से कही ज्यादे अच्छे होते है।

 

3.अनाज

वर्तमान में जैविक तरीके से उगाये गये अनाज की बाजार में काफी मांग है, क्योंकि लोग अब दिन-प्रतिदिन स्वास्थ्य को लेकर और अधिक सजग होते जा रहे हैं। इस श्रेणी में गेहुं, बाजरा, मक्का और चावल आदि जैसे आनज सबसे प्रमुख है।इन अनाजों को उगाने के लिए रसायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकोंके जगह कम्पोस्ट और जैविक खादों का प्रयोग किया जाता है।

4.फलियां

आज के समय में उपभोक्ता जैविक तरीके से उगाये गये दालो में काफी रुचि ले रहे हैं, जिनमें मूंग, चना, तूर, उड़द, अरहर, राजमा आदि प्रमुख है। ऐसा देखा गया है कि जैविक तरीके से उगाये हुई दालें ज्यादे मीठी और पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसके साथ ही इन्हें पकाने पर उत्पन्न होने वाली सुंगध भी इनके उच्च श्रेणी को प्रमाणित करने का कार्य करती हैं।

5.दुग्ध उत्पाद

दुध जैविक खाद्य पदार्थों के श्रेणी में एक लोकप्रिय वस्तु है। अगर साधरण शब्दों में कहे तो जैविक रुप से प्राप्त दुध वह दुध है, जो उन गायों से प्राप्त किया गया हो, जिन्हें नाही ग्रोथ हार्मोन लगाये गये हो और नाहि अंटिबायोटिक्स दिये गये हो। इसके साथ ही उन्हें पूर्ण रुप से सिर्फ जैविक उत्पाद खिलाये गये हो और प्राकृतिक रुप से बड़ा किया गया हो। यह सब इसलिए सुनिश्चित किया जाता है ताकि प्राप्त दुध में किसी प्रकार के अवांछनीय रसायन ना मिले हो क्योंकि पशु जो खाते हैं उनपर उनका काफी ज्यादे प्रभाव पड़ता है।

6.अंडे

जैविक रुप से प्राप्त किये गये अंडों की भी आजकल बाजार में काफी मांग है, प्रायः यह उन मुर्गियों से प्राप्त होता है, जिन्हें प्राकृतिक आहार दिया जाता है और इसमें किसी प्रकार के अंटीबायोटिक्स, केमिकल, अंडे के छिलके आदि नही मिले होते हैं। इसके साथ ही इन मुर्गियों को पिजरे में भी नही रखा जाता है।

7.मीट

आर्गेनिक मीट उन पशुओं से प्राप्त होता है, जिन्हें बिना किसी दवा, रेडियशन या किसी अन्य अप्राकृतिक तरीके से ना बड़ा किया जाता हो। जैविक रुप से बड़े किये जानवरों को अच्छे वातावरण में प्राकृतिक भोजन खिलाकर बड़ा किया जाता है। उन्हे घास, अनाज, बेरीज, बीज और हरे पत्तेदार वस्तुएं खिलाई जाती हैं। यह जैविक रुप से तैयार किये गये मीट ओमेगा 3 और अन्य कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं तथा नान-आर्गेनिक मीट से कही ज्यादे अच्छे होते हैं।

8.पेय पदार्थ

वर्तमान समय में जैविक रुप से उत्पादित चाय की काफी मांग है। इसका कारण है कि आर्गेनिक चाय में समान्य चाय के मुकाबले अधिक स्वाद और पोषक तत्वों से भरपूर होती है।जैविक तरीके से की गयी चाय की खेती उच्च गुणवत्ता वाली हरी पत्तियों का उत्पादन करने के लिए खेती के पारंपरिक तरीकों पर आधारित है। इस तरीके में चायों की छटाईं हाथ द्वारा की जातीहै और खरपतवार को गाय गोबर के साथ मिश्रित करके उर्वरक के रूप में उपयोग किया जाता है। इस विधी में विभिन्न प्रकार कीचाय के पौधों की रक्षा के लिए गौ-मूत्र का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा अन्य लोकप्रिय कार्बनिक पेय पदार्थों में कॉफी, जल जीरा, आम पन्ना, निंबू पानी, गन्ने का रस, टॉडी और कोकम रसआदि शामिल हैं।

जैविक खाद्य पदार्थों का उपयोग क्यों करें - जैविक खाद्य पदार्थों का सेवन करने के लाभ

(Why to go for Organic Foods - Health Benefits of Eating Organic Food)

जैविक खाद्य पदार्थों के कई सारे स्वास्थ्य लाभों के विषयों में नीचे बताया गया है।धीरे-धीरे इनका महत्व अब लोगो में काफी तेजी के साथ फैल रहा है। एसोसिएट चेंबर आफ कामर्स और इंडस्ट्री आफ इंडिया के द्वारा किये गये एक सर्वे द्वारा पता चला है कि लगभग 62% प्रतिशत उच्च मध्यम परिवारों ने जैविक खाद्य पदार्थों के उपयोग की प्राथमिकता को स्वीकार किया है। हालाकि वर्तमान में यह खाद्य पदार्थ काफी महंगे है पर नित्य प्रतिदिन इनके बढ़ती मांग और आपूर्ति के कारण धीरे-धीरे इनकी कीमतों में कमी आने की संभावना है।

1.समान्यत जैविक खाद्य पदार्थों काफी ज्यादे मात्रा में अंटीओक्सिडेंट और कुछ सूक्ष्म पोषक मौजूद होते हैं जैसे कि विटामिन सी, जिंक और आयरन यह अंटीआक्सीडेंट वह जरुरी पोषक तत्व होते हैं जो फलो और सब्जियों में पाये जाते हैं।

2.जैविक तरीके से उत्पादित खाद्य पदार्थों में उनके व्यवसायिक समकक्षो की तुलना में रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग काफी कम मात्रा में या बिल्कुल ही नही किया जाता है। यहीं कारण है कि उपभोक्ताओं के मध्य यह इतने प्रिय है और लोग इनका चुनाव करते हैं, प्रमाणिक जैविक उत्पाद पूर्ण रुप से कीटनाशक मुक्त होते हैं।

3.जैविक खाद्य पदार्थों का उत्पादन बहुत ही कम एंटीबायोटिक देख-रेख में होता है। जिन जानवरों को भी आर्गेनिक तरीके से बड़ा किया जाता है, उन्हें एंटीबायोटिक दवाइया और इंजेक्शन नही दिये जाते हैं।यहीं कारण है कि आर्गेनिक दुग्ध उत्पादों और मीट में किसी भी प्रकार के एंटीबायोटिकके तत्व नहीं पाये जाते है।

4.हाल के वर्षो में अनुवांशिक रुप से उन्नत किये गये खाद्यों के उत्पादन में काफी वृद्धि देखने को मिली है, इन चीजों के सही तरीके से लेबलिंग ना किये जाने के कारण लोगों में इन्हें लेकर चिंता पैदा हो गयी है, यहीं कारण है लोग इन दिनों जैविक खाद्य उत्पादों का चयन अधिक मात्रा में कर रहें है।

इन बातों द्वारा पता चलता है कि जैविक खाद्य पदार्थ मानव स्वास्थ्य के लिए कई तरह के नुकसानदेह तत्वों से रहित होता है। जैविक खाद्य पदार्थ साधरण खाद्य पदार्थों के तुलना में अधिक पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ ही उपभोग के लिए भी ज्यादे सुरक्षित होते हैं। कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग ना किए जाने के कारण यह खाद्य पदार्थ विटामिनों और एंटीआक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं।

जैविक खाद्य पदार्थों के उत्पादन के तरीके

(Methods of Organic Food Production)

जैविक खाद्य पदार्थों का उत्पादन पूर्णतः जैविक तरीके से किया जा है। इन तरीकों में जैविक खादों, जिनमें मुख्यतः इस कार्य के लिए उगाये जाने वाली हरी खाद और अनाजो से निकलने वाली अपशिष्ट और जानवरों के हड्डियों के चूरे को मिलाकर बनाई जाती है।

जैविक खाद्य पदार्थों का उत्पादन क्राप रोटेशन विधी के द्वारा भी किया जाता है, जिसके अंतर्गत विभिन्न तरह की फसलों की बुवाई विभिन्न मौसमों में एक ही भूमि पर की जाती है। जिससे की भूमि का अधिक से अधिक उपयोग किया जा सके। यह तरीके मृदा अपरदन को कम करते हैं और भूमि के उर्वरकता बढ़ाते हुए फसल की उपजता को भी बढ़ाते हैं।

जैविक खेती का दूसरा सबसे प्रमुख तरीका कैंपिनियन प्लांटिग का है, जिसका उपयोग मुख्यतः विकसित और औद्योगिक राष्ट्रों में किया जाता है। इसके अंतर्गत कई तरह के फायदे होते है जैसे कि जगह का बचना, परागण आदि। यदि आसान शब्दों में कहे तो एक से अधिक प्रजाति के फसलों की एक साथ बुवाई करना काफी लाभप्रद है। इस तरह की खेती का तरीका ईंग्लिश काटेज गार्डेन और एशियाई जंगलो में काफी लोकप्रिय है, इसके साथ ही हजारो वर्ष पहले यह मेसोअमेरीका (उत्तरी अमरीका का एक ऐतिहासिक और सासंकृतिक भाग) में भी काफी प्रसिद्ध था।

जैविक खेती में जैविक तरीकों से कीटो पर नियंत्रण किया जाता है। इसके अंतर्गत किड़ो, घुन और खरपतवार को रोकने के लिए प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

जैविक खाद्य पदार्थों को खरीदने का तरीका (Tips to Buy Organic Food)

कई सारे खाद्य ब्रांड भारत में सक्रिय रुप से जैविक खाद्य पदार्थों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रहे हैं। कई सारी ई-कामर्स वेबसाइट इस मौके का फायदा उठाकर ग्राहकों को कई अच्छे सौदे उपलब्ध करा रहे हैं। आप इन जैविक खाद्य पदार्थों को आनलाइन बाजारों, जैविक खाद्य पदार्थों के उत्पादकों के आधिकारिक वेबसाइट, लोकल बाजार या सुपरमार्केट से खरीद सकते हैं।

इसके अलावा आप इन जैविक खाद्य पदार्थों को कई सारी किरानों की दुकानों से भी खरीद सकते हैं। इसके अलावा आप जैविक तरीके से उत्पादित किये गये अनाज, सास और स्नैक फूड जैसे कि चिप्स आदि भी खरीद सकते हैं। जैसे-जैसे इनकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है, उपभोक्ता भी इनके सेवन से होने वाले लाभों के विषय में और अधिक जागरुक होते जा रहे हैं।

आप आर्गेनिक खाद्य पदार्थों को खरीदकर इनके कीमतों को कम करने में सहायता कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए कई सारे जरुरी आवश्यकताएं है, जिनका किसी भी खाद्य पदार्थ को जैविक खाद्य पदार्थ का दर्जा देने के लिए पूरा होना आवश्यक है। इसलिए यह काफी जरुरी है कि जो उत्पाद आप खरीद रहे हों, वह पूर्णतः आर्गेनिक हो। इसके लिए इनकी खरीददारी करते समय इनके प्रमाणिकता की सील अवश्य देखें और इनका उपयोग करके स्वस्थ्य जीवन का आनंद उठाइये, अच्छा खाइये तथा प्राकृतिक रुप से स्वस्थ और सुरक्षित रहिये।

आर्गेनिक बनाम नान-आर्गेनिक खाद्य पदार्थ (Organic vs. Non-Organic Foods)

जैविक खाद्य पदार्थ व्यवसायिक रुप से उगाये जाने वाले खाद्य पदार्थों के तुलना में कहीं ज्यादे अच्छे होते हैं। यह खाद्य पदार्थ कई कारणों से समान्य खाद्य पदार्थों के तुलना में काफी स्वास्थ्यकर होते है क्योंकि यह प्राकृतिक तरीकों से उगाये और तैयार किये जाते हैं इसलिए इनमें विभिन्न प्रकार के हानिकारक रसायन मौजूद नही होतें है। यहीं कारण है कि इस तरह के फल मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए काफी अच्छे होते हैं।

जैविक खाद्य पदार्थ कई तरह के प्राकृतिक पोषक तत्वों और खनिज पदार्थों से भरपूर होते हैं, जोकि हमारे शरीर के वृद्धि, प्रतिरोधी क्षमता और उर्जा उत्पादन के लिए जरुरी होता है। जबकि पारंपरिक खाद्य पदार्थों में कई तरह के कृतिम रसायनिक तत्व मौजूद होते हैं, जिनका लंबे समय तक सेवन करना किसी भी व्यक्ति के लिए हानिकारक हो सकता हैं।

कई सारे शोधों द्वारा पता चला है कि आर्गेनिक खाद्य पदार्थों में सामान्य की तुलना में अधिक मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते है। साधारण और आर्गेनिक दोनो ही खाद्य पदार्थों में एक-दूसरे की तुलना में पोषक तत्वों की मात्रा बिल्कुल भिन्न होती है। ऐसा देखा गया है कि आर्गेनिक फल और सब्जियों में स्वास्थ्य के लिए जरुरी कई सारे पोषक तत्व मौजूद होते है वही दूसरी ओर साधरण फल तथा सब्जियों में इनका काफी आभाव देखने को मिलता है। इसके अलावा आर्गेनिक डेयरी और मीट उत्पादों में सामान्य की तुलना में काफी ज्यादे मात्रा में ओमेगा 3 फैटी असिड मौजूद होता है।

हालांकिजैविक तरीके से प्राप्त खाद्य पदार्थों और गैर जैविक तरीके से प्राप्त खाद्य पदार्थों के अंदर पाये जाने वाले पोषक तत्वों में मिश्रित परिणाम देखने को मिले है। इन अवलोकनों के अनुसार, पोषक तत्व संरचना में जैविक और गैर जैविक खाद्य पदार्थों में कोई खास भिन्नता नहीं है। तुलनात्मक रूप में इनमें समान रुप से मिनरल, विटामीन सी और ई तथा दूसरे प्रोटीन पाये जाते है।

जैविक रुप से उगाये जाने वाले फसलों को समान्य फसलों की तुलना में तैयार होने में थोड़ा ज्यादे समय लगता है। इसके साथ ही इसके उत्पादन की मात्रा भी कम और अपर्याप्त है,जैविक खाद्य पदार्थ काफी महंगे होने के साथ ही बाजार में आसानी से उपलब्ध नही है, यहीं कारण है कि बाजार में हमेशा इनकी कमी बनी रहती है है। इसके अलावा जैविक खाद्य पदार्थों पर सरकार द्वारा अनुदान भी नही दिया जाता है, इसलिए यह आर्थिक और किफायती रुप से सामान्य फसलों की तुलना में काफी पिछड़ जाते है।

हालाकि जैविक खाद्य पदार्थ कई प्रकार से साधरण खाद्य पदार्थों के तुलना में बढ़त बना लेते है जैसे कि इनका स्वाद अच्छा होना और रसायनमुक्त होना। इसके अलावा यह पर्यावरण के भी अनुकूल होते है और पर्यावरण तथा भूमि प्रदूषण रोकने में सहायक होते है। ये कृषि विविधता बनाये रखने और हमारे आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित बनाये रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते है।

इसके साथ ही जैविक खाद्य पदार्थ हमारे शरीर को बीमारियों और शारीरिक तंत्र असामान्यताओं से बचाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। वहीं गैर जैविक कृषि उत्पाद हमारे शरीर में कई तरह के भोजन विकार, मोटापा और अन्य कई बीमारियां उत्पन्न करते है।

जैविक खाद्य पदार्थों में पाये जाने वाले पोषक तत्व पाचन तंत्र के लिए बहुत ही आवश्यक है। वही दूसरी तरफ पारंपरिक खाद्य पदार्थों में कई तरह के रसायन मिले होते है और इनके सेवन करने पर यह हमारे शरीर में पहुंचकर पूरी तरह से नष्ट नही हो पाते है तथा कई तरह के दुष्प्रभाव पैदा करते है।

आइये जैविक खाद्य पदार्थों के सकरात्मक पहलुओं को समझें

(Let us have a Glance on the Positive Aspects of Organic Food)

  • जैविक खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों का उपयोग बहुत ही कम किया जाता है। ऐसा देखा गया है कि यह बिल्कुल ताजे, किफायती और अच्छे आकार के होते है।
  • जैविक खेती पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है, यह हमारे स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त, मिट्टी के कटाव को रोकने, खेत की उर्वरकता को बढ़ाने के साथ ही पानी और उर्जा को बचाने का भी कार्य करती है। यह तरीके खेती को और भी ज्यादे किफायती बनाने का कार्य करते है।
  • सामान्य फलों, सब्जियों और अनाजों के तुलना में इनके जैविक रुपों में अधिक एंटीआक्सीडेंट होते है।
  • जैविक उत्पादों में सामान्य उत्पादों के तुलना में कीटनाशको का काफी कम प्रयोग किया जाता है।
  • जैविक खाद्य पदार्थों में रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग नही किया जाता है।
  • जैविक रुप से उत्पादित खाद्य पदार्थों में बहुत ही कम नाइट्रेट और ज्यादे विटामीन मौजूद होते है।
  • जैविक रुप से उत्पादित डेयरी और मीट में ओमेगा 3 फैटी एसिडकी मात्रा भी ज्यादे होती है।
  • जैविक खाद्य पदार्थों का सेवन करने सेएलर्जी रोगों, मोटापा और वजन बढ़ने की संभावना भी कम हो जाती है, इसके साथ ही इनका सेवन करने वालो का स्वास्थ्य भी काफी अच्छा रहता है।
  • क्योंकि कीटनाशक युक्त खाद्य पदार्थ बच्चों के ज्ञानात्मक बढ़ोत्तरी में बाधक होते है, इसलिए इनका जैविक खाद्य पदार्थों का सेवन करना ज्यादे लाभदायक है।
  • इसके अलावा जैविक खाद्य पदार्थों में अनुवांशिक रुप से कोई छेड़-छाड़ नही की गयी होती है,परन्तु सामान्य खाद्य पदार्थों को ज्यादे दिन तक टिके रहने और भारी मात्रा में उत्पादन के लिए इनमें अनुवांशिक स्तर पर कई बदलाव किये गये होते है।

निष्कर्ष

यदि साधरण शब्दों में कहा जाये तो जैविक खाद्य पदार्थ उपभोग के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ ही ताजे और पोषक तत्वों से भरपूर होते है। जैविक खेती के कई सारे फायदे है जैसे स्थिरता, फसलों की विविधता, लंबी उम्र, आत्म-निर्भर विकास, स्वयत्ता, सेहत और सुरक्षा आदि।

हमारा मानसिक, शारीरिक और भावुक स्वास्थ्य इससे काफी ज्यादे प्रभावित होता है कि हम किसतरीके से पैदा किये गये खाद्य पदार्थों का सेवन करते है। इको-फ्रेंडली खेती समान रुप से पौधों, पशुओं और पर्यावरण के लिए लाभकारी है। जैविक खाद्य पदार्थों के सेवन के कई सारे स्वास्थ्य लाभ भी है, यही कारण है कि इनकी लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन लोगों में बढ़ती जा रही है।

हमें ऐसी चीजों का चुनाव करना चाहिए, जो स्वास्थ्य के लिए बेहतर होने के साथ ही पोषक तत्वों से भी भरपूर हो। यहीं कारण है जैविक खाद्य पदार्थ मानव स्वास्थ्य के लिए एक ज्यादे अच्छे विकल्प है क्योंकि यह ना सिर्फ वायु, जल और भूमि प्रदूषण को कम करते है बल्कि की जल को संरक्षित करने, मृदा अपरदन रोकने और ऊर्जा खपत को कम करने में भी सहायता करते है