एसिड रेन: अर्थ, तथ्य, कारण, प्रभाव और इसके समाधान

अम्ल वर्षा को एक गंभीर समस्या है, जिसपर हमे वैश्विक रुप से ध्यान देने की आवश्यकता है। ये पौधों, जलीय जानवरों, जंगलों, ताजे पानी, मिट्टी और बुनियादी ढांचों पर हानिकारक प्रभाव ड़ालता है। ये कीड़ों और जलीय जन्तुओ के विनाश का कारण भी बनती है। इससे पत्थर की इमारतों और मूर्तियों, ऐतिहासिक स्मारकों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

हर साल हजारों इमारते और पुल इसके कारण क्षतिग्रस्त हो जाते है। इसके अलावा, यह मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा  प्रभाव डालता है। अम्ल वर्षा के कई हानिकारक प्रभाव जैसे जैव विविधता का नुकसान, मिट्टी की अम्लता में वृद्धि और वनों का विनाश आदि हैं। इस पर्यावरणीय आपदा की घटना को रोकने के लिए हमे जल्द से जल्द अम्ल वर्षा के कारण उत्सर्जित गैसों को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के समाधानों का उपयोग करना चाहिए।

अम्ल वर्षा की परिभाषा (Meaning of Acid Rain in Hindi)

अम्ल वर्षा को बारिश या वर्षा के जैसे अन्य रूपों में परिभाषित किया जा सकता है इसमें हाइड्रोजन आयन (कम पीएच) उच्च स्तर के होते हैं या सरल शब्दों में कहें तो अम्लीय होते है। सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन के कारण अम्ल वर्षा होती है। ये अम्लीय वर्षा जल उत्पादन करने के लिए वायुमंडल में पानी के अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करती हैं। नाइट्रोजन ऑक्साइड स्वाभाविक रूप से बिजली के घर्षण के द्वारा और सल्फर डाइऑक्साइड ज्वालामुखीय विस्फोट के द्वारा उत्पादित होते हैं।

अम्ल जमाव के प्रकार (Forms of Acid Deposition)

वातावरण में अम्ल जमाव के दो मुख्य तरीके है जिनके बारे में नीचे विस्तार से जानकारी दी गयी हैं।

  1. गीला जमाव: जिन क्षेत्रो मे मौसम नम होता है, वहां अम्ल धुंध, बारिश या बर्फ के टुकडे, कोहरे आदि के रुप में वातावरण को प्रभावित करते है। यह प्रक्रिया आमतौर पर तब होती है, जब हवा में अम्लीय रसायन मिश्रित हो जाती है। तब अम्ल वायुमंडल से निकलकर धरती के सतह पर जमा हो जाता है। जब यह अम्लीय वर्षा का जल नाली, नदियों और नहरों में होते हुए समुद्र के पानी के साथ मिलती है तो ये पशु, पौधे और जलीय जीवन पर भी हानिकारक प्रभाव डालती है।
  2. सूखा जमाव: जिन क्षेत्रों में जहां मौसम शुष्क होते है, वहां के हवा में अम्लीय रसायन मिश्रित हो जाते है औऱ अम्लीय प्रदूषक धुएं या धूल के साथ मिलकर शुष्क कणों के रूप में जमीन पर गिरते हैं। ये पेड़ों, इमारतों या मैदानों और सतहों पर चिपक जाते हैं। शुष्क जमावट में वातावरण लगभग 50% अम्लीय प्रदूषण को जन्म देती है। ये शुष्क अम्लीय प्रदूषक कण बारिश और तूफान के द्वारा पृथ्वी की सतह से समाप्त होते हैं।

अम्ल वर्षा के तथ्य (Facts of Acid Rain)

अम्ल वर्षा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य यहां दिए गए हैं:

  • सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड के अलावा, ज्वालामुखीय विस्फोट, कोयला और पौधे की हानि आदि भी अम्ल वर्षा के दुष्प्रभाव को बढ़ावा देती है।
  • अम्ल वर्षा का गंध और स्वाद आमतौर पर सामान्य बारिश के समान ही होती है।
  • सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड अम्ल वर्षा को बढ़ावा देता हैं, और वह कैंसर, अस्थमा और हृदय रोगों जैसी बीमारियों का कारण भी बनता हैं।
  • अम्ल वर्षा पत्तियों की प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया और पोषक तत्वों की आपूर्ति को भी नष्ट कर सकता है। यह मिट्टी के अम्ल स्तर को बदलकर मिट्टी और पौधे के स्थिति को विषाक्त बना देती है।
  • जब झील, धाराओं या नदियों जैसे जल निकायों में अम्ल वर्षा मिश्रित हो जाती है, तो ये पानी के पीएच स्तर को बदल कर उसे जलीय जीवन के लिए प्रतिकूल बना देती है।
  • अम्ल वर्षा के कारण कुछ झीलों को पूरी तरह से मृत घोषित कर दिया गया है।
  • अम्ल वर्षा का पीएच स्तर 4.3 (संतरे के रस या सिरका के समान) होता है, जबकि शुद्ध पानी का पीएच 7 है।
  • बारिश एकमात्र प्रकार की वर्षा नहीं है बल्कि इसमे धुंध, बर्फ यहां तक ​​कि धूल के कण मिलकर इसे अम्लीय बना देते है।
  • अम्ल वर्षा के प्रभाव को एक अम्ल के रूप में ही दूर किया जा सकता है।
  • सल्फर और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के वातावरण में प्रचुर मात्रा में मौजूद होने के कारण ये अम्ल वर्षा के प्रमुख कारणों मे से एक हैं।

अम्ल वर्षा का सूत्र (Acid Rain Formula)

अम्ल वर्षा का रासायनिक समीकरण कुछ इस प्रकार से है। जब सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड पानी के साथ रासायनिक अभिक्रिया करते है तो अम्ल वर्षा की उत्पती होती है। तो इस प्रकार से हम कह सकते है कि सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड अम्ल वर्षा के प्रमुख अभिकारको में से एक है।

 

सल्फर डाइऑक्साइड जब पानी के साथ अभिक्रिया करता है तो सल्फरस एसिड का निर्माण होता है।

SO2 (g) + H2O (l) -> H2SO3 (aq)

सल्फ्यूरस अम्ल और ऑक्सीजन अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक एसिड का निर्माण करते है।

2H2SO3 (aq) + O2 (g) -> 2H2SO4 (aq)

इसी प्रकार से, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, H2O  पानी के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रिक एसिड और नाइट्रस एसिड का एक मिश्रण तैयार करता है।

2NO2 (g) + H2O (l) -> HNO3 (aq) + HNO2 (aq)

नाइट्रस अम्ल और ऑक्सीजन साथ में अभिक्रीया करके नाइट्रिक एसिड का निर्माण करते है।

2HNO2 (aq) + O2 (g) -> 2HNO3 (aq)

इस प्रकार सल्फ्युरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड संगठित होकर वर्षा को अम्ल वर्षा बनाते हैं, तथा ये पानी में घुलनशील होते हैं।

अम्ल वर्षा के कारण (Causes of Acid Rain)

अम्ल वर्षा का कारण प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों स्रोतों द्वारा होता है। परन्तु इसका मुख्य कारम जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल) का दहन है, जिससे सल्फर (एसओ 2) और नाइट्रोजन (एनओएक्स) ऑक्साइड उत्सर्जित होती है।

  1. अम्ल वर्षा के प्राकृतिक कारक

अम्ल वर्षा का प्रमुख प्राकृतिक कारण ज्वालामुखीय विस्फोट है। ज्वालामुखी विस्फोट से निकले पदार्थो मे अम्ल बनाने बनाने वाले तत्व मौजूद होते है। जिससे वर्षा में सीमा से ज्यादे अम्लो का उत्सर्जन होता है, जोकि धुंध और बर्फ जैसे अन्य रुप ले लेती है। नष्ट हो रहे पेड़-पौधे या जंगल में लगने वाले आग के कारण भी अम्ल वर्षा का निर्माण होता है। वातावरण के अन्य जैविक कारक भी नाइट्रोजन और सल्फर आक्साइड उतपन्न होते है। जैविक वातावरण में सल्फर के प्रदूषण का एक सामान्य सा उदाहरण है, डाइमिथाइल सल्फाइड। इसके अलावा आकाशीय बिजली गिरने से भी नाइट्रिक ऑक्साइड की उत्पति होती है। यह पानी के अणुओ के साथ मिलकर नाइट्रिक एसिड बनाने का कार्य करती है, जिससे अम्ल वर्षा का निर्माण होता है।

  1. अम्ल वर्षा के मानव निर्मित कारक

मानव द्वारा की गयी गतिविधियां भी अम्ल वर्षा के प्रमुख कारणो में से एक हैं। कारखानों, ऑटोमोबाइल और बिजली से निकलने वाली गैसें भी अम्ल वर्षा पैदा करने के कारक हैं। इलेक्ट्रिकल पावर जनरेशन के लिए कोयले का उपयोग, विशेष रूप से, अम्ल वर्षा में गैसीय उत्सर्जन का कारण बनती है। कोयला जलाने से सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ 2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) का उत्पादन होता है। यातायात संसाधनो और कारखानों से उच्च मात्रा में हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है। जिन शहरो में बड़ी मात्रा में यातायात संसाधनो का उपयोग होता है वहाँ यह एक बड़ी समस्या बन चुकी है। ये गैस वायुमंडल में पानी और ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे इन क्षेत्रों में उच्च मात्रा अम्ल वर्षा होती है।

 

अम्ल वर्षा के प्रभाव (Effects of Acid Rain)

अम्ल वर्षा के प्रतिकूल दुष्प्रभाव एक स्थान तक सीमित नहीं हैं, और ना ही ये औद्योगिक और परिवहन के सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जित करने वाले स्रोतों तक ही सीमित हैं। ये इन स्रोतों से दूर अत्यधिक विशाल क्षेत्रों को भी प्रभावित करते है; अम्ल वर्षा के लिए जिम्मेदार कारक गैसीय रूप में मौजूद हैं, जो हवा और बादलों के द्वारा व्यापक रूप से दूर तक फैले हुए हैं। ब्रिटेन और जर्मनी में स्थित कारखानों से निकलने वाले सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रस ऑक्साइड के कारण, नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड में अम्ल वर्षा होती रहती है। जिसके परिणामस्वरूप उनके अधिकतर क्षेत्र जैव विविधता के गंभीर खतरे का सामना करते है।

यह दिखा गया है कि अम्ल वर्षा के कारण पौधों, जानवरों, मनुष्यों और यहां तक ​​कि बुनियादी ढांचों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आईए अब हम सब ये जाने की अम्ल वर्षा कैसे इन सभी को प्रभावित करती हैं।

  • जलीय पर्यावरण को प्रभावित करता है: अम्ल वर्षा जलीय निकायों पर सीधे गिरती है। अम्ल वर्षा सड़कों, नालियों, नहरो से होते हुए नदियों और झीलों में जाकर मिल जाती है। पानी में अम्ल के मिल जाने के कारण, पानी का समग्र पीएच कम हो जाता है। यदि पीएच स्तर 4.8 से नीचे आ जाता है, तो यह जलीय जीवन के अस्तित्व के लिए नुकसान देह हो जाता हैं। अम्ल वर्षा के कारण मछली और अन्य जलीय जीवन अत्यधिक प्रभावित होते हैं क्योंकि इससे पीएच और एल्यूमीनियम सांद्रता में बदलाव आ जाता है। यह एक वयस्क मछली को भी मार सकता है। इसके प्रभाव के कारण जैव-विविधता को गंभीर संकट का सामना करना पड़ता है। अम्ल वर्षा के कारण झीलों और नदियों के मछली, पौधे और कीटो सहित अन्य प्रजातियों की कई किस्मे विलुप्त हो चुकी है।
  • वनस्पति और वनों के लिए हानिकारक: उच्च ऊंचाई वाले वन और वनस्पति अम्ल वर्षा जल के जमाव से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। वहां के पेड़ और पौधे ज्यादातर अम्लीय धुंध और बादलों से ढके होते हैं। पारिस्थितिक सद्भावना भी अम्ल वर्षा से बाधित होती है, जिसके परिणामस्वरूप कई पेड़ और पौधें नष्ट हो जाते है। अम्ल वर्षा पत्तियों को नष्ट कर, उनकी छाल और वृद्धि को नुकसान पहुंचाती हैं। अम्ल वर्षा के कारण जर्मनी, पोलैंड और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों के वन क्षतिग्रस्त होते जा रहे है।
  • वस्तुकला और भवनों पर हानिकारक प्रभाव: अम्ल वर्षा खनिजों के साथ प्रतिक्रिया करके चूना पत्थर से निर्मित इमारतों को खराब कर देती है। ये इमारतों को कमजोर और अतिसंवेदनशील बना देती है। सिर्फ यहीं नहीं; ऑटोमोबाइल, हवाई जहाज, स्टील पुल और पाइप भी अम्ल वर्षा से प्रभावित होते हैं। अम्ल वर्षा के कारण पुराने ऐतिहासिक इमारतों की हालत दिन पर दिन खराब होती जा रही है।
  • मृदा संरचना और जैविकी पर प्रभाव: मृदा (मिट्टी) अम्ल वर्षा से अत्यधिक प्रभावित होती है। अम्ल वर्षा के कारण मृदा मे पाये जाने वाले सूक्ष्मजीव और मिट्टी की रासायनिक संरचना क्षतिग्रस्त या उलट पड़ जाती है। जैविक गतिविधि की निरंतरता बनाए रखने के लिए मिट्टी को अनुकूल पीएच स्तर पर बनाए रखने की आवश्यकता होती है। अम्ल वर्षा का पानी मिट्टी में घूलकर मिट्टी के पीएच स्तर को बढ़ा देता है, जिससे मिट्टी के आस-पास की जैविक और रासायनिक गतिविधिया प्रभावित होती है, जिसके वजह से कुछ सूक्ष्मजीव जो पीएच स्तर के परिवर्तन होने पर खुद को उसके अनुकूल नहीं ढाल पाते वो नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ हाइड्रोजन आयन मिट्टी से कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों को खींच कर समाप्त कर देती हैं।
  • मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव: सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड गैसों और वायुमंडल में सल्फाट्स और नाइट्रेट जैसे यौगिक गैसो की उपस्थिति दृश्यता को कम करती है जोकि दुर्घटनाओं का कारण बनती है। वैसे तो मनुष्य सीधे रुप से अम्ल वर्षा से प्रभावित नहीं होते हैं परन्तु दूषित तरह के पतले पानी के उपयोग से कई तरह के स्वास्थ्य समस्याओ का कारण बनती है। इसके अलावा गैसों के शुष्क जमाव में साँस लेने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं उत्पन्न होती हैं। जैसे की फेफड़ों और दिल की समस्याएं तथा श्वास और अस्थमा आदि रोग इसमे शामिल हैं।

अम्ल वर्षा और ओजोन परत का क्षय (Acid Rain and Ozone Layer Depletion)

ओजोन ऊपरी वायुमंडल या समताप मंडल में पाया जाने वाला एक रंगहीन गैस है। ओजोन गैस की परत, वह परत है जो हमें सूर्य के हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों से बचाती है। ओजोन गैस की परत सूर्य की हानिकारक यूवी किरणों को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से रोकती हैं और उन्हें अवशोषित कर लेती हैं।

पराबैंगनी विकिरण सूर्य द्वारा उत्सर्जित विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं। यदि यूवी किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं, तो वे विभिन्न पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी विकारों का कारण बन सकती हैं। ओजोन परत का क्षय पर्यावरण, मानव और पशु सभी के जीवन के लिए बहुत हानिकारक है। आज ये हमारे ग्रह पृथ्वी द्वारा सामना की जाने वाली सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। यह ग्लोबल वार्मिंग की गंभीर समस्या का भी एक प्रमुख कारण है।

ओजोन परत की कमी का मुख्य कारण उन रसायनों का उत्सर्जन भी है जिन्हें सीएफसी या क्लोरोफ्लोरोकार्बन कहा जाता है। चूंकि ये ऊपरी वायुमंडल तक पहुंचते हैं और क्लोरीन परमाणुओं को मुक्त करने के लिए अल्ट्रा बैंगनी किरणों के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। ये क्लोरीन परमाणु ओजोन गैस के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे ओजोन परत नष्ट होने लगती है।

ओजोन परत का क्षय अम्ल वर्षा की समस्या से सीधे रुप से संबंधित नहीं है। यह सच है कि इन दोनों के बिच एक सूक्ष्म लिंक है। क्योंकि दोनों औद्योगिक प्रक्रियाओं के परिणाम हैं, हालांकि दोनों ऐसी गंभीर समस्याएं हैं। जिनपर हमे तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता हैं।

अम्ल वर्षा को कम करने के समाधान (Solutions to Reduce Acid Rain)

यद्यपि ग्रीनहाउस उत्सर्जन को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर कर इसे पूरे यूरोप और उत्तरी अमेरिका विशेष रूप से एशिया और दक्षिण अमेरिका जैसे विकासशील देश जो ऊर्जा के लिए कोयला और तेल पर निर्भर है। उनके  इस कोयला और तेल के निर्भरता को कम करने के लिए लागू किया गया हैं। चूंकि अम्ल वर्षा का सबसे बड़ा स्रोत कोयला आधारित बिजली संयंत्र हैं, इसलिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को विकसित करना अब पहले से कहीं और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। अन्यथा, अम्ल वर्षा के कारण पेड़-पौधें, जंगल, वन्यजीवन और ऐतिहासिक इमारत और स्मारक इसी तरह नष्ट होते रहेगें।

मानवो द्वारा ऊर्जा के अत्यधिक उपयोग और जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को कम कर अम्ल वर्षा के कारण को रोका जा सकता हैं। अम्ल वर्षा की समस्या के कुछ समाधान नीचे वर्णित किए गए हैं:

  1. निकास पाइप्स, चिमनी और अन्य धुआं के रिसाव फ़नल को निरंतर साफ करवाना चाहिए
  • विद्युत शक्ति ज्यादातर कोयले और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन के दहन से प्राप्त होते है। यह नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) और सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ 2) को उत्पन्न करते है. जिसके कारण अम्ल वर्षा को बढ़ावा मिलता हैं।
  • कुछ तकनीकी उपकरणों और समाधानों का उपयोग करके कम गैस उत्पादन करने वाले पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है या फिर स्क्रबिंग प्रक्रिया का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • फ्लू-गैस विगंधकन की प्रक्रिया जिसमे धूएँ की नाल / चिमनी से निकलने वाली गैस सल्फर डाइऑक्साइड को रासायनिक रूप से खत्म करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में SO2 गैस का 95% भाग समाप्त हो जाता है।
  • कोयले से बिजली उत्पादन की बजाय प्राकृतिक गैसों का उपयोग SO2 उत्सर्जन को कम करने के लिए किया जा सकता है।
  • निकास पाइप प्रणाली के लिए उत्प्रेरक परिवर्तक की आवश्यकता होती है। इसीलिए उत्प्रेरक परिवर्तक का उपयोग ऑटोमोबाइल जीवाश्म ईंधन दहन से नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस के उत्सर्जन को कम करने के लिए किया जा सकता है।
  1. वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग

वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की एक विस्तृत श्रृंखला विद्युत शक्ति उत्पन्न करती है। पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और जल विद्युत आदि इसके कुछ उदाहरण हैं। ये ऊर्जा स्रोत जीवाश्म ईंधन के लिए वैकल्पिक विद्युत ऊर्जा स्रोत बन जाते हैं। जीवाश्म ईंधन के क्लीनर विकल्प में ईंधन कोशिकाओं, बैटरी और प्राकृतिक गैस आदि शामिल हैं। मानव जाति के भविष्य की रक्षा करने के लिए तथा अम्ल वर्षा जैसी घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक और टिकाऊ ऊर्जा का उपयोग करना उचित समाधान हैं।

  1. क्षतिग्रस्त पर्यावरण के पुनः निर्माण की आवश्यकता

चूना प्रक्रिया का उपयोग भी किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को लोग अम्ल वर्षा के कारण होने वाले नुकसान की मरम्मत के लिए उपयोग करते हैं। अम्लीय सतह के पानी में चूना प्रक्रिया का उपयोग उसकी अम्लता को संतुलित करता है। पीएच स्तर को संतुलित करने के लिए इस अभ्यास का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। चूना प्रक्रिया एक महंगी विधि है। इसके अलावा, यह NOx और SO2 के कारण होने वाली क्षति के लिए केवल एक अल्पकालिक समाधान है। हालांकि, यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे पानी की अम्लता को संतुलित करके जलीय जीवन रूपों के अस्तित्व को सुनिश्चित किया जा सकता है।

  1. सतत रहने की आदतों का पालन करना चाहिए

हम सीधे या परोक्ष रूप से सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन में अपना योगदान देते हैं। इसलिए, हमें ऊर्जा संरक्षण और उत्सर्जन को कम करने के तरीकों के बारे में अधिक जानकारी लेनी चाहिए। रोशनी या विद्युत उपकरणों का उपयोग न होने पर बंद कर देना चाहिए। हमे सार्वजनिक परिवहन और बिजली बचाने वाले विद्युत उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।

निष्कर्ष

अम्ल वर्षा एक गंभीर समस्या है जो दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रहा है, हमे वैश्विक रुप से इसपर ध्यान देना चाहिए। अम्ल वर्षा में वृद्धि धरती पर रहने वाले प्राणियों के पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव डाल सकती है और यदि हमने इसे नियंत्रित नहीं किया तो भविष्य में ये एक घातक समस्या के रुप में हमारे सामने आ सकती है।