ओसियन एसिडिफिकेशन: अर्थ, तथ्य, कारण, प्रभाव और समाधान

Meaning, Facts Causes, Effects and Solutions of Ocean Acidification

पृथ्वी के दो-तिहाई हिस्से पर महासगरो का विस्तार है। यह जैव विविधता को इसके साथ ही यह हजारो लोगो के आजिविका का साधन भी है।

महासागरीय अम्लीकरण क्या है (Meaning of Ocean Acidification)

जब कार्बन डाइआक्साइड को समुद्र के पानी द्वारा संचित कर लिया जाता है, तो इससे कई सारी रासायनिक अभिक्रियाएँ उत्पन्न होती है, जिससे पानी का pH स्तर (pH स्तर - यह पानी में अम्लीयता और क्षारीयता के मात्रा को प्रदर्शित करता है) घट जाता है। इससे समुद्र का पानी ज्यादे अम्लीय हो जाता है, जिससे यह कैल्शियम कार्बोनेट जैसे जैविक रूप से महत्वपूर्ण खनिजो के लिये संकट बन जाता है। समुद्र के पानी में उत्पन्न होने वाली इस तरह की रासायनिक अभिक्रियाओं को महासागरीय अम्लीकरण (ओसियन एसिडिफिकेसन या ओए)  के रुप में जाना जाता है। वास्तव में ये रासायनिक अभिक्रियाएँ महासागर के पानी के गुण और तापमान में नकरात्मक परिवर्तन करती हैं। जिससे की वायुमंडल में अत्यधिक मात्रा में कार्बन डाइआक्साइड जमा हो जाती है।

महासागरीय अम्लीकरण के महत्वपूर्ण तथ्य (Some Interesting Facts about Ocean Acidification)

यह एक जाना माना तथ्य है कि वायुमंडल हवा से बना हुआ है और हवा आक्सीजन, नाईट्रोजन, आर्गन और कार्बन डाइआक्साइड जैसी कई गैसे क मिश्रण है। यह सभी वायुमंडल में प्राकृतिक रुप से बनती है। प्राकृतिक वन भारी मात्रा में कार्बन डाइआक्साइड का अवशोषण करते है और महासागरो द्वारा भी काफी मात्रा में कार्बन का अवशोषण किया जाता है।

महासागरीय अम्लीकरण महासागर के द्वारा अधिक कार्बन के अवशोषण से होने वाले रासायनिक और तापमान के परिवर्तन के कारण होता है। इन परिवर्तनो से पानी का pH स्तर घट जाता है जिससे महासागरो में अम्लीयता बढ़ जाती है। इसके साथ तेजी से हो रहे औद्योगिक विकास के चलते ज्यादेतर महासागर लगभग पहले की अपेक्षा 30 प्रतिशत ज्यादे अम्लीय हो गये है।

वैज्ञानिको के द्वारा ऐसा अनुमान लगाया गया है कि इस शताब्दी के बाद अंत तक औद्योगिक काल के पूर्व की तुलना में महासागरो में अम्लीयता की मात्रा दोगनी या तिगुनी हो जाएगी। वर्तमान समय में, महासागरो के पानी का pH स्तर पूरे विश्व में एक समान नही है, किसी महासागर में pH स्तर कम है तो किसी में ज्यादा। इसी तरह पूर्वी पैसिफीक में pH स्तर कम है जबकि आर्कटिक सागर में pH स्तर ज्यादे है।

महासागरीय अम्लीकरण एक समस्या क्यों है (Why is Ocean Acidification a Problem)

पिछले दो दशको में मानव जाति द्वारा वायुमंडल में उत्सर्जित कार्बन डाइआक्साइड के कारण पूरे विश्व भर के महासागरो का pH स्तर घट रहा है। इस वजह से यह घटता हुआ pH स्तर समुद्रो और महासागरो के लिये कई तरह के समस्याओं का कारण बन गया है, जिससे यह कई समुद्री जीवो और पर्यावरण के लिये एक गंभीर संकट बन गया है।

वास्तव में यह एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है, जोकि कई प्रकार से जलवायु परिवर्तन के समान ही है। यह समस्या पर्यावरणविदों के लिये वर्तमान में एक चिंता का विषय बन गया है। उनके अनुमान के अनुसार महासागरो में बढ़ते अम्लीयता के कारण पूरे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, खासतौर से महासागरो की ऊपरी सतह इससे विशेष रुप से प्रभावित होंगी।

महासागरीय अम्लीकरण के कारण (Causes of Ocean Acidification)

जैसा कि हम जानते है कि कुछ महत्वपूर्ण गैसे जैसे की आक्सीजन, नाइट्रोजन, आर्गन और कार्बन डाइआक्साइड प्राकृतिक रुप से वायुमंडल में स्थित होती है और कार्बन चक्रण और कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि विश्व भर में तेजी से हो रहे औद्योगिक विकास के कारण वायुमंडल में भारी मात्रा में कार्बन डाइआक्साइड इकठ्ठा हो गयी है और जीवाश्म ईंधन के दहन के कारण इसमे काफी वृद्धि हुई है, जिससे यह पहले की अपेक्षा और ज्यादे बढ़ गयी है।

महासागरो और समुद्रों के पानी के उपरी सतह के द्वारा कार्बन डाइआक्साइड का अवशोषण करके कार्बनिक एसिड का निर्माण किया जाता है, जिससे पानी में हाइड्रोजन आयनो की संख्या बढ़ जाती है परन्तु कार्बोनेट आयनो की संख्या घट जाती है। इस प्रक्रिया के फलस्वरुप पानी के pH स्तर में 0.1 प्रतिशत की वृद्धी हो जाती है, जिससे महासागर के पानी की अम्लीयता बढ़ जाती है।

महासागरो के पानी का pH स्तर पूरे विश्व में एक समान नही है, किसी महासागर में pH स्तर काफी कम है तो किसी में थोड़ा ज्याद। हालांकि यह परिस्थितियाँ सामान्य है परन्तु पिछले कुछ वर्षो औद्योगिक विकास के कारण मानव जाति द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा में भारी वृद्धि हुई है। मानवजनित कार्बन डाइआक्साइड वायुमंडलीय कार्बन डाइआक्साइड का हिस्सा है, जोकि जीवाश्म ईंधनो के दहन जैसी मानव गतिविधियो द्वारा उत्पन्न होती है। इसके चलते महासागर जल द्वारा अधिक मात्रा में कार्बन डाइआक्साइड का अवशोषण किया जाने लगता है, जिसके चलते महासागर के जल का संतुलन बिगड़ जाता और इसकी अम्लीयता बढ़ जाती है।

 

महासागरीय अम्लीकरण के प्रभाव (Effects of Ocean Acidification)

महासागरीय अम्लीकरण हमे कैसे प्रभावित करता है (How does Ocean Acidification Impact us)

महासागर पर्यावरण से जुड़ी चीजो जैसे कि भोजन, संस्कृति, मनोरंजन और पोषक आहारो के पुनरावृत्ति के अलावा कार्बन के अवशोषण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महासागरीय अम्लीकरण मानव जाति को निम्नानुसार रुप से प्रभावित करता हैः

  • समुद्री कैल्सिफिएर्स: कुछ समुद्री पर्यावरण तंत्र के हिस्से जैसे कि कोरल और ओयस्टर रीफ अपने शेलो के निर्माण के लिये कैल्श्यिम कार्बोनेट का उपयोग करते है परन्तु बढ़ते महासागरीय अम्लीकरण से उनमे बदलाव आ रहे है। इसे कैल्सिफिएर्स के नाम से जाना जाता है। महासागरीय अम्लीकरण का मुख्य प्रभाव यह है कि यह एक खास तरह के कैल्श्यिम कार्बोनेट का निर्माण करता है, जिसे एंरेगोनाइट कहते है, इसके तत्काल प्रभाव से ज्यादेतर घोंघे अपने लार्वा रुप से प्रौढ़ रुप तक नही पहुंच पाते और मर जाते है। यदि महासागर इसी तरह औद्योगिक उत्सर्जनो, जंगलो की कटाई और अन्य मानव गतिविधियो के वजह से कार्बन डाइआक्साइड का अवशोषण करते रहेगे तो इस बात की काफी संभावना है कि भविष्य में संवेदनशील प्रजातियाँ अपना रक्षा कवच खो देंगे। इस प्रकार से कुछ प्रजातिया विलुप्त हो जाएँगी और जो बचेंगी वह अपने कठोर कवच के कारण उस क्षेत्र में अपना वर्चस्व जमा लेंगी। इन्ही वजहो से पहले से ही सींप और घोंघा उद्योग पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
  • बायो-जियोकेमिकल चक्रः महासागर कार्बन चक्रण में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है, जिसमें वह ऊपरी सतह से कार्बन डाइआक्साइड का अवशोषण करके उन्हे सागर की गहराईयो में पहुचा देते है। यह पादप प्लवक के द्वारा संभव होता है जो सूर्य के प्रकाश और कार्बन-डाई आक्साइड का अवशोषण करके आक्सीजन और कार्बोहाईड्रेट का उत्पादन करते है। इसे बायोलॉजिकल कार्बन पंप के नाम से जाना जाता है। देखा जाये तो वास्तव में सागरो में अम्ल की बढ़ती मात्रा कवचधारी जीवो के लिये काफी हानिकारक है। अंटार्कटिक के समीप दक्षिणी महासागर में कुछ छोटे घोंघे इस परिवर्तन के कारण खत्म होते जा रहे है, जिससे समुद्री क्षेत्रो मे जैव विविधता पे खतरा मंडराने लगा है।
  • आर्थिक नुकसानः कई शोधो में पता चला है कि मोलूस और ऑयस्टर के लार्वा महासागरीय अम्लीकरण के द्वारा बुरे तरीके से प्रभावित होते है और यदि ऐसा ही चलता रहा तो जैव विविधता में होते बदलाव कई सारे उपयोगी कोरल रीफ प्रणालीयो को बुरे तरीके से प्रभावित करेगे।
  • मूंगा चट्टानेः महासागरीय अम्लीकरण कोरल रीफ के निर्माण को भी काफी बड़े स्तर पर प्रभावित करता है। इस प्रकार के मूंगो को बुनियादि प्रजातियो के रुप में जाना जाता है। वास्तव में मूंगे के बिना चट्टानो का भी कोई अस्तित्व नही है। वैस भी महासागरीय अम्लीकरण के कारण इनका विकास बहुत धीमी गति से हो रहा है। यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नही उठाया गया तो इनका विकास बंद हो जायेगा और जल्द ही यह विलुप्त हो जाएंगे।
  • समुद्री मछलियाः सीपो और घोंघा मछलियो को छोड़कर वो सभी प्रकार की मछलियां जो हम खाते है जैसे कि हेरिंग, सार्डिन, एन्कोवीज, टूना, कॉड, फ्लॉन्डर आदि मछलियां इस श्रेणी में आती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि समुद्री मछलिया एक बहुत महत्वपूर्ण जीव है और आहार श्रृंखला मे भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा मछलियां मनुष्यो के भी भोजन स्त्रोत का भी एक मुख्य हिस्सा है और इस विशालकाय अर्थव्यवस्था में भी काफी योगदान देती है। हालांकि महासागरीय अम्लीकरण मछलियो लिये काफी घातक है क्यों कि समुद्र के पानी में ज्यादे मात्रा में अम्ल मिल जाने से उनके निवास स्थान में कई परिवर्तन हो जायेंगे, जो उनके स्वास्थ्य, व्यवहार, और प्रजनन की क्षमता को प्रभावित करेगा।
  • जीवाश्म ईंधनों से उत्सर्जित कार्बन-डाइआक्साइडः उद्योगो द्वारा जीवाश्म ईंधन के दहन से प्रतिवर्ष वायुमंडल में खरबो मिट्रिक टन कार्बन का उत्सर्जन होता है। ये गतिविधियो ग्लोबल वार्मिंग और महासागरीय अम्लीकरण जैसी समस्याओ को सीधे तौर से प्रभावित करती है। वर्तमान समय में मानव जाति के लिए यह दोनो समस्याएं एक गंभीर पर्यावरणीय संकट है।

 

महासागरीय अम्लीकरण को कम करने के लिए समाधान (Solutions to Reduce Ocean Acidification)

ग्लोबल वॉर्मिंग की ही तरह महासागरीय अम्लीकरण भी एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है, जिसपर हमे गंभीरतापूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। एक बात तो बिल्कुल स्पष्ट है कि महासगरो का भविष्य हमारे द्वारा आने वाले वर्षो में उठाये गये कदमो पर निर्भर करेगा। इसके लिये हमें इसके कारणो को समझकर उनका उनका समाधान ढूंढने की आवश्यकता है।

नीचे दिये गये कुछ बातो पर अमल करके हम महासागरीय अम्लीकरण जैसे भयावह समस्या को रोक सकते है।

  • कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करके

आज के समय में हम जीवाश्म ईंधनो से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा का अत्यधिक उपयोग करते है। इससे उत्पन्न होने वाली ऊर्जा का उपयोग हम परिवहन, तमाम तरह के उद्योगो और अपने घरो में करते है। हलांकि दिन-प्रतिदिन नवकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ता जा रहा है और लोगो द्वारा नवकरणीय ऊर्जा के संसाधनो में निवेश भी किया जा रहा है परन्तु फिर भी हमे कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने के लिये और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। स्वच्छ उर्जा को अपनाकर हम इस विषय में अपना और सार्थक योगदान दे सकते है।

  • महासागरीय प्रबंधन के द्वारा

महासागरीय अम्लीकरण के वजह से समुद्री पर्यावरण और कई सारे जीव-जन्तुओ पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। इसके लिये इन प्रजातियो को बचाने के लिये हमे कड़े नियम-कानून बनाने और उन्हे लागू करने की आवश्यकता है साथ ही इन नियमो के तोड़ने और समुद्री प्रजातियो को संकट में डालने वालो के ऊपर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिये ताकि उनमे इस विषय को लेकर जागरुकता उत्पन्न हो। इन उपायो को अपनाकर हम समुद्री जैव विविधता को सुधारने में अपना योगदान दे सकते है। मछली पकड़ने के लिये भी हमे कुछ नियमो का पालन करने की आवश्यकता है, जिससे इस ओवरफिशींग जैसे भयावह समस्या से निजात पायी जा सके।

  • शिक्षा और जानकारी प्रदान करके

लोगो को उनके आस-पास हो रहे पर्यावरणीय परिवर्तनो के प्रति जागरुक होना चाहिये। इस तरह की जानकारिया लोगो को नियम-कानून के सही ढंग से पालन को लेकर जागरुक करेंगी। हमे विश्वनीय स्त्रोतो द्वारा सामान्य लोगो तक इन जानकारियो को पहुंचाने की आवश्यकता है, जिससे इन बातो का प्रचार-प्रसार और तेजी से हो सके। इसके अलावा सरकार द्वारा भी लोगो को पर्यावरण के समस्याओं को लेकर शिक्षित करने की आवश्यकता है, जिससे सभी लोग मिलकर इस समस्या के समाधान में अपना योगदान दे सके।

  • जीवाश्म ईंधन के जगह नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतो को अपनाकर

वर्तमान समय में स्वच्छ और हरित ऊर्जा जीवाश्म ईंधन के द्वारा उत्पन्न होने वाली ऊर्जा के अपेक्षाकृत मंहगी है, जिससे लोग इनका कम उपयोग करते है। इस विषय को लेकर सभी सरकारों को सार्थक पहल करने की आवश्यकता है और हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और इसे किफायती बनाने की आवश्यकता है, जिससे जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम किया जा सके और लोगो को स्वच्छ और नवकरणीय ऊर्जा के उपयोग के लिये प्रेरित किया जा सके। हाल ही में वायुमंडल में उपस्थित अतिरिक्त कार्बन डाइआक्साईड से नवकरणीय ऊर्जा बनाने को लेकर एक सार्थक खोज देखने को मिली है, जिससे आनेवाले समय में हमे एक सस्ते और प्रभावी नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोत की प्राप्ति  हो सकती है।

निष्कर्ष और सुझाव

महासागरीय अम्लीकरण की समस्या कोई नई समस्या नही है पर हाल के दिनो में महासागरो में हो रहे रासायनिक परिवर्तनो ने गंभीर रुप धारण कर लिया है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और महासागरीय अम्लीकरण ने मूंगो, घोंघो, समुद्री अर्चिन और कैल्शिफायिंग प्रजाति जैसे समुद्री जीवो के लिये गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, जिसमे वायुमंडल में बढ़ रहे कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा और अन्य कई मानव गतिविधियो ने भी इस संकट में अपना विशेष योगदान दिया है। हम अपने कई सारे कार्यो जैसे जीवाश्म ईंधनो के दहन, जंगलो के कटाई और वाहनो द्वारा उत्पन्न होने वाले धुंए के द्वारा वायुमंडल में दिन-प्रतिदिन और अधिक मात्रा में कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन कर रहे है, जिससे वायुमंडल में कार्बन डाइआक्साइड का संतुलन बिगड़ता जा रहा है।

महासागरीय अम्लीकरण के स्तर में कुछ वृद्धि, बढ़ती हुई औद्योगिक गतिविधियो द्वारा भी देखी गयी है। जिससे जलवायु परिवर्तन जैसी समस्या को जन्म दिया है, जिसके कारणवश हवा तथा समुद्र का तापमान दिन-प्रतिदिन और ज्यादे गर्म होते जा रहा है। विश्व भर में हो रही जलवायु परिवर्तन की समस्या सिर्फ कार्बन प्रदूषण के वजह से नही है, इस समस्या में महासागरीय अम्लीकरण का भी बराबर का योगदान है।

लगातार दहन हो रहे जीवाश्म ईंधनो से लाँखो टन कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन होता है। जिसे महासागरो द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है, जोकि परोक्ष रुप से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर अपरिवर्तनीय रुप से नकरात्मक प्रभाव डालता है। हमारे सबसे बड़े चिंता का कारण यह है कि महासागर अम्लीकरण का प्रभाव को खत्म करना हमारे जीवनकाल में संभव नही है, इस कार्य में हजारो वर्षो का समय लगेगा तब जाकर यह आज से दो सौ साल पहले अर्थात औद्योगिकरण काल से पहले की स्थिति में पहुंचेगा।

महासागरीय अम्लीकरण के प्रभाव को कम करने के लिये कुछ रासायनिक उपाय कोई बहुत कारगर नही सिद्ध होगें। इस तरीके प्रयास बस छोटे स्तर पर सफल हो सकते है परन्तु इसके साथ ही यह समुद्री जीवन के लिये भी हानिकारक सिद्ध होंगे। वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, वायुमंडल में कार्बन डाइआक्साइड के उत्सर्जन को कम करना ही लम्बे समय मे होने वाली इस महासागरीय समस्या को बड़े स्तर पर रोकने का सबसे कारगर उपाय है।

महासागर मानव जाति के लिये एक बहुत ही महत्वपूर्ण संसाधन है, इस लिए इसके समस्याओ के समाधान को लेकर हमे विशेष अनुसंधान करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही वर्तमान परिस्थितियों का आकलन करने और अगले चरणों की योजना बनाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के गठन की भी आवश्यकता होगी। अनुसंधान को पूरा करने के लिये कई प्रकार के उपकरणो के अलावा सबको साथ लाने के लिये एक स्वायत्त मंच की आवश्यकता होगी, जिससे इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर तेज गति से इसके निवारण के लिये कार्य किया जा सके।

विभिन्न अध्ययनों के प्रायोगिक निष्कर्षों को इस तरह से प्रकाशित किया जाना चाहिए कि आम जनता इस समस्या की गंभीरता को समझ सके और अपने नेताओ और सरकारो के द्वारा महासागरों के संरक्षण के समर्थन में कानून का निर्माण करवा सके। इसके साथ ही महासागरीय अम्लीकरण को रोकने के समाधान में हर किसी के सहयोग से कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करके भी इस समस्या के समाधान में सराहनीय परिणाम प्राप्त किये जा सकते है। इसके अलावा नीति तथा कानून निर्माताओं को भी इस समस्या पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है जिससे वह इस समस्या के समाधान के लिये सही मापदंड तय करके उचित कानून का निर्माण कर सके।

इस विषय में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि महासागरीय अम्लीकरण की इस समस्या को लेकर हमे तत्काल कारवाई करने की आवश्यकता है। हमे ईंधनो के साथ ऊर्जा दक्षता के उत्पादो तथा कम कार्बन उत्पन्न करने वाले उत्पादो का इस्तेमाल करना चाहिये और साथ ही हमे कार्बन उत्सर्जन की सीमा का भी निर्धारण करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही हमे सौर और पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतो को भी अपनाने की आवश्यकता है। इसके अलावा एक ऐसी व्यवस्था प्रणाली का निर्माण किया जा सकता है जिसके अंतर्गत कार्बन उत्सर्जन के ऊपर शुल्क लागू हो, इन उपयो को अमल में लाकर हम अपने प्राकृतिक संसाधनो की रक्षा कर सकते है और इस गंभीर संकट को टाल सकते है।