वेस्ट डिस्पोजल – अर्थ, तथ्य, जानकारी, प्रकार, महत्व और समाधान

Waste Disposal: Meaning, Facts, Types, Importance and Solutions

औद्योगिक और तकनीकी के  तेजी से विकास के कारण दुनिया को आज वेस्ट डिस्पोजल  की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अपशिष्ट की बढ़ती विविधता पर्यावरणीय के लिये एक बड़ी चुनौती बन गया है।

पुराने समय में, उत्पन्न अपशिष्ट आमतौर पर कार्बनिक प्रकृति के हुआ करते थे और वो भूमी में आसानी से विघटित हो जाया करते थे, लेकिन आधुनिक विकास के साथ, अपशिष्ट में खतरनाक पदार्थों का अनुपात कई गुना बढ़ गया है जिसके कारण इन अपशिष्टों का पुनरीकरण करने में अनेक प्रकार के समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं। यह मनुष्यों, जानवरों और पौधों के लिए गंभीर खतरे के कारण बनता जा रहा है।

पहले प्रयोग किये जाने वाले बैग कपड़े और जूट जैसे हानिरहित वस्तुओ से निर्मित होते थे। उस दौरान मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल दूध, चाय या दही जैसी चीजों को ले जाने या लाने के लिए किया जाता था। जैसा की हम जानते है कि प्लास्टिक की पुनरावृत्ति संभव नहीं है, जिसके कारण आमतौर पर इसके निपटान के लिए सुरक्षित, गुणवत्ता और उचित प्रबंधन में कमी होती जा रही हैं।

भारत में, अपशिष्ट निपटान की समस्या हर जगह देखी जा सकती है; ई-वेस्ट के अनुचित निपटान के लिए वेस्ट डिस्पोजल एक बहुत ही गंभीर मुद्दा बन गया है। अनुचित जल निकासी व्यवस्था, कचरे के पहाड़, सार्वजनिक जगहों पर पेशाब करना, सड़कों पर अपशिष्ट फेंकना आदि हमारे देश में ऐसे बहुत सामान्य जगहें हैं जहां अपशिष्ट पदार्थों का निष्काषन किया जाता हैं जिससे वेस्ट डिस्पोजलकी समस्याओं को बढ़ावा मिलता हैं। हमें अपने जीवन तथा पर्यावरण को बचाये रखने के लिए वेस्ट डिस्पोजलके प्रभावी तरीकों को विकसित करने की आवश्यकता है।

वेस्ट डिस्पोजल का अर्थ (Meaning of Waste Disposal)

वेस्ट डिस्पोजल क्षतिग्रस्त, अनुउपयोगी या अन्य अवांछित घरेलू, कृषि या औद्योगिक उत्पादों को निष्काषित या विनाश करने की प्रवृत्ति को प्रदर्शित करता है। समुद्र या किसी गहरे गढ्ढ़े में अपशिष्टों को दफन कर देना अपशिष्ट पुनरावृत्ति प्रक्रिया का एक अच्छा तरीका हैं।

मोटे तौर पर, वेस्ट डिस्पोजल में अपशिष्ट उत्पादों के लिए निगरानी और नियम निर्माण जैसे उपायों के साथ-साथ संग्रह, परिवहन, डंपिंग, पुनरावृत्ति, मलजल आदि उपाय शामिल है। इन विभिन्न प्रक्रियाओं के दौरान, ऐसी कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं जो अपशिष्ट निपटान से जुड़ी परोशानियों को बढ़वा देती हैं।

अनुचित तरीके से वेस्ट डिस्पोजल के कारण होने वाली समस्याएं (Problems due to Improper Waste Disposal)

  1. अत्यधिक मात्रा - दुनिया भर में नियमित रूप से भारी अपशिष्ट उत्पादन होता रहा है। अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रतिवर्ष लगभग 220 मिलियन टन अपशिष्ट का उत्पादन होता है। हालांकि इससे हम यह कल्पना कर सकते हैं कि वैश्विक स्तर पर लगभग कितना प्रतिशत अपशिष्ट उत्पन्न होता है।

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, दैनिक आधार पर प्रति व्यक्ति की औसत ग्लोबल म्युनिसिपल सॉलिड जनरेशन (एमएसडब्ल्यू) लगभग 1.2 किलोग्राम है और 2025 तक यह आंकड़ा 1.5 किग्रा तक बढ़ जाने की आशंका जताई जा रही है। वेस्ट डिस्पोजल के लिए प्रत्येक राज्य और स्थानीय क्षेत्र की एक प्रमुख आवश्यकता होती है। पर्यावरण को अनुकूल बनाने के लिए सामग्रियों को पुन: उपयोग एवं पुनरावृत्ति के लिए प्राथमिकता दी जाती है जिससे वैश्विक स्तर पर एक बार फिर उपयोग उत्पादों के उत्पादन पर जोर दिया जाता है, जिससे उत्पन्न अपशिष्ट की मात्रा में वृद्धि हो जाती है।

  1. अपशिष्ट की विषाक्त प्रकृति - बढ़ते निर्माण उद्योग कभी-कभी बहुत खतरनाक जहरीले उत्पादों का उत्पादन करते हैं, उदाहरण के लिए, पैकेजिंग ठोस अपशिष्ट को सबसे तेजी से बढ़ाने वाली प्रक्रिया है। जिसमें अपशिष्ट का लगभग 40% भाग प्लास्टिक से बना होता है तथा ये बायोडिग्रेडेबल नहीं होता है।
  2. स्थानो पर फैले अपशिष्ट - अपशिष्ट निस्तारण के लिये उचित स्थानो की कमी भी पर्यावरण के लिए गंभीर खतरे का कारण बनती जा रही है। लंबी अवधि में, लैंडफिल के रिसाव भूजल और अन्य पर्यावरणीय स्थलो के लिये समस्या बन जाते है, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य और पुनरावृत्ति की समस्याए बढ़ जाती है। इसके साथ ही यह पर्यावरण के प्रतिकूल गैसों का भी उत्सर्जन करती हैं।
  3. निहित हितों का प्रसार - वेस्ट डिस्पोजल और प्रबंधन एक आकर्षक व्यवसाय बन गया है। लैंड फिल्स, सीवर सिस्टम और भट्टी को रीसायक्लिंग सुविधाओं के संचालन का कार्य बड़े उद्यमों द्वारा निर्धारित किया जाता है, जोकि वेस्ट डिस्पोजल व्यवसाय का कार्य करती हैं। ऐसे व्यवसायों का उद्देश्य केवल अपशिष्ट न्यूनीकरण आवश्यकताओं या पर्यावरणीय विनाशकारी परिणामों के प्रभावों के कम करना होता है।
  4. पुरानी पद्धति की वेस्ट डिस्पोजल प्रणाली- प्रभावी पुनरावृत्ति और अपशिष्ट न्यूनीकरण कार्यक्रमों के बजाय, अपशिष्ट निपटान प्रबंधन सुविधाओं के लिए अल्पकालिक समाधान पर भरोसा किया जाना चाहिए। नतीजतन, पुरानी प्रौद्योगिकियों का उपयोग वेस्ट डिस्पोजल से निपटने के लिए किया जाना चाहिए। विषाक्तता और अपशिष्ट की मात्रा को कम करने या पुनरावृत्ति प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकियों की कमी विशेष रूप से ठोस अपशिष्टो के लिए एक बड़ा मुद्दा है। कुछ तरीके जिन्हे पर्यावरण के लिये अनुकूल माना जाता है, वास्तविकता में वह होते नही है।

 

अपशिष्ट के प्रकार (Types of Waste)

  1. तरल अपशिष्ट - इस प्रकार का अपशिष्ट आम तौर पर घरों के साथ-साथ उद्योगों में भी पाया जाता है। गंदे पानी, कार्बनिक तरल पदार्थ, कपड़े धोने के पानी, डिटर्जेंट आदि अपशिष्टों के साथ-साथ वर्षा जल भी इसी प्रकार के अपशिष्ट पदार्थों के कुछ उदाहरण हैं। तरल अपशिष्ट को प्रमुख तथा गैर-प्रमुख स्रोत अपशिष्ट के रुप में वर्गीकृत किया जा सकता है। प्रमुख स्रोत अपशिष्ट में निर्मित सभी तरल अपशिष्ट शामिल होते है जबकि प्राकृतिक तरल अपशिष्ट को गैर-प्रमुख स्रोत अपशिष्ट के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
  2. ठोस अपशिष्ट - इस प्रकार के अपशिष्ट में वाणिज्यिक और औद्योगिक स्थानों के साथ-साथ घरों में मौजूद कई ठोस प्रकार के अपशिष्ट वस्तुओं को शामिल किया जाता है। ठोस अपशिष्ट निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:-
  3. प्लास्टिक अपशिष्ट- हमारे घरों में पाए जाने वाले उत्पादन जैसे - बैग, जार इत्यादि कई वस्तुएँ है जो इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, हालांकि ये गैर-बायोडिग्रेडेबल होते है परन्तु फिर भी इनमे कई ऐसे प्रकार के वस्तुऐं भी शामिल होती है जिन्हें पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है। इनका पुनरावृत्ति करने के लिए इन्हें अन्य अपशिष्ट पदार्थों से छाँट कर अलग कर दिया जाता हैं।
  4. पेपर/कार्ड के अपशिष्ट-पैकेजिंग सामग्री, समाचार पत्र, कार्डबोर्ड और अन्य उत्पादों को इस अपशिष्ट श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया जाता है।
  5. टिन और धातु- हमारे घरों में मौजूद इन धातुओं से बने विभिन्न सामग्रियों को इस श्रेणी के अंतर्गत रखा जाता हैं।
  6. मिट्टी तथा कांच के बरतन- ये आसानी से पुनर्नवीनीकरण योग्य सामग्री होती है।
  7. जैविक अपशिष्ट - इस प्रकार के अपशिष्टों में घरेलू अपशिष्ट के सभी खाद्य अपशिष्ट, बगीचों के अपशिष्ट, खाद और सड़े हुए मांस के अपशिष्टों को शामिल किया जाता है। जैविक अपशिष्ट समय के साथ सूक्ष्मजीवों द्वारा खाद में परिवर्तित हो जाते है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे कहीं भी निष्कासित किया जा सकता है। ये भराव भूमि में मीथेन गैस को भी उत्सर्जित करते है इसीलिए इसे कभी भी सामान्य अपशिष्टों के साथ नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
  8. अपशिष्टों के पुनर्नवीनीकरण - इस श्रेणी के अंतर्गत आने वाले सभी अपशिष्ट पदार्थों को फिर से उपयोग में लाने के लिए पुनर्नवीनीकरण किया जाता हैं। पेपर, धातु, फर्नीचर और जैविक अपशिष्ट इस प्रकार के अपशिष्ट पदार्थों के कुछ उदाहरण है जिन्हें पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है।
  9. खतरनाक अपशिष्ट - सभी ज्वलनशील, जहरीले, संक्षारक और प्रतिक्रियाशील अपशिष्ट इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ये वस्तुएं पर्यावरण के साथ-साथ मानवों को भी नुकसान पहुंचाती हैं और इसलिए इनका निपटान सावधानी से किया जाना चाहिए।

वेस्ट डिस्पोजल के तरीके (Methods of Waste Disposal)

  • लैंडफिल- जिस अपशिष्टों का पुन: उपयोग या पुनर्नवीनीकरण नहीं किया जा सकता है उन्हें भराव क्षेत्र(गढ्ढे) में फेक दिया जाता है और उनपर मिट्टी की एक परत ड़ाल दी जाती है। इस प्रक्रिया के बाद, उस क्षेत्र को अगले 20 वर्षों के लिए निर्माण के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया जाता है। इस क्षेत्र का उपयोग केवल खेल के मैदान या पार्क के रूप में किया जाता है।
  • भस्मीकरण - अपशिष्ट के दहन नियंत्रण प्रक्रिया को असंगत पदार्थ (राख, अपशिष्ट गैस और गर्मी) में कम करने के लिए अधिक जोर दिया जाता है। इस प्रक्रिया द्वारा उत्पन्न होने वाली अपशिष्ट गैसों का इलाज पर्यावरण में किया जाता है। ये प्रक्रिया 90 प्रतिशत तक कचरे की मात्रा को कम कर देती है। इसे अपशिष्ट निपटान के सबसे स्वच्छ तरीकों में से एक माना जाता है। हालांकि इससे उत्पन्न ऊष्मा का प्रयोग कुछ मामलों में विद्युत शक्ति का उत्पादन करने के लिए किया जाता है।
  • अपशिष्ट जमाकरण - इस प्रक्रिया में प्लास्टिक की बोतलों जैसे अपशिष्ट पदार्थों को संकुचित किया जाता है और पुनरावृत्ति के लिए भेजा जाता है। यह प्रक्रिया धातुओं के ऑक्सीकरण को रोक कर वायु अंतरिक्ष की आवश्यकता को कम कर देती है और परिवहन स्थिति को आसान बना देती है।

 

 

  • बायोगैस उत्पादन - खाद्य पदार्थों, पशु अपशिष्ट या खाद्य पैकेजिंग उद्योगों से औद्योगिक अपशिष्ट जैव-अवक्रमण संयंत्र उत्पन्न होते हैं। ये पौधे अपशिष्टों को बैक्टीरिया, कवक और अन्य जैविको की मदद से बायो-गैस में परिवर्तित कर देते हैं। ये सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थ को भोजन के रूप में उपयोग करते हैं। इनके पतन या तो एरोबिक (ऑक्सीजन के साथ) या एनारोबिकली (ऑक्सीजन के बिना) हो सकते है। इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले जैव-गैस ईंधन के रूप में प्रयोग किये जाते है और बाकि के अवशेष का उपयोग खाद के रूप में किया जाता है।
  • जैविक खाद - कार्बनिक पदार्थ समय के साथ विघटित होते रहते हैं। अधिकांश अपशिष्ट खाद्य स्क्रैप्स, यार्ड अपशिष्ट आदि द्वारा बनाये जाते है। पोषक तत्व समृद्ध खाद कार्बनिक पदार्थों द्वारा गठित किये जाते है जिन्हें मिट्टी की एक मोटी परत द्वारा नीचे दबा दिया जाता है और सूक्ष्मजीवों की क्रियाओं द्वारा इसका क्षय हो जाता है। यह खाद बनाने की एक प्रक्रिया है। ये प्रक्रिया मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढ़ा देती है और इसे समृद्ध बना देती है।
  • कृदि खाद - पोषक तत्व समृद्ध खाद में कार्बनिक पदार्थ के अवक्रमण के लिए कीड़े का उपयोग करने की प्रक्रिया को कृमि खाद के रूप में जाना जाता है। इस प्रक्रिया में कीड़ों द्वारा कार्बनिक पदार्थ को ग्रहण किया जाता है। कीड़े द्वारा उत्सर्जित उप-उत्पाद सामग्री मिट्टी के पोषक तत्व को समृद्ध बनाते है और बैक्टीरिया एवं कवक के विकास को बढ़ावा देते है।
  • पुनरावृत्ति - औद्योगिक प्रसंस्करण का उपयोग करके अपशिष्ट पदार्थों को उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया को पुनरावृत्ति के रूप में जाना जाता है। आम तौर पर पुनरावृत्ति उत्पादों में पेपर, ग्लास, एल्यूमीनियम और प्लास्टिक शामिल होते हैं। ये प्रक्रिया हमें पर्यावरण में वस्तुओं को अनुकूल तरीके से पुन: उपयोग करने की अनुमति देती है।
  • महासागर/सागर में निष्कासन - रेडियोधर्मी अपशिष्ट को आम तौर पर मानव निवास से दूर महासागरों में फेंक दिया जाता है और ये अपने अंतर्निहित पोषक तत्वों से वंचित होने के कारण महासागरों के जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाते है।

 

वेस्ट डिस्पोजल के समाधान (Waste Disposal Management/Solutions)

प्राकृतिक संसाधन कम हो रहे हैं। कच्ची सामग्री महंगे होते जा रहे है तथा इसकी लागत भी बढ़ती जा रही है। उदारहण के लिए हम एल्यूमीनियम जैसी धातु को ले सकते है हालांकि इसकी पुनरावृत्ति करने में 95 प्रतिशत ऊर्जा लगती है परन्तु इसमे 60 प्रतिशत तक समय की बचत भी होती है।

  1. सरकारी पहल - इंडोनेशिया में गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से, अपशिष्ट के जैविक हिस्से को गलने के लिए छोड़ दिया जाता है तथा रासायनिक भाग इससे अलग कर दिया जाता है। जहां तक ​​संभव हो सके पर्यटकों को जैविक अपशिष्ट का उपयोग करने की सलाह दी जानी चाहिए, जिससे शहरी खनिज संसाधनों के विकास की संभावना को बढ़ावा दिया जा सके।

ऐसी पहलों का एक फायदा यह होता है कि लोग अपशिष्ट के बारे में अधिक से अधिक जागरूक हो जाते हैं और इसके निष्काषन से होने वाली कठिनाइयों से अवगत होकर इसका कम उपयोग करने लगते हैं। किशोरों को भी अपशिष्ट और रासायनिक अपशिष्ट को कम करने की सलाह दी जानी चाहिए।

भारत सरकार ने भी देश भर में स्वच्छता, सफाई के मानकों को बेहतर बनाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान (एसबीए) और स्मार्ट सिटी मिशन (एससीएम) लॉन्च किया है। तीन साल के कार्य एजेंडा (2017-18 से 2019-20) की तैयारी में, राष्ट्रीय अयोध ने नगर सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्लू) की समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार किया है।

2011 की जनगणना के अनुसार, 7,935 शहरी क्षेत्रों में रहने वाले 77 मिलियन निवासियों ने भारत में प्रति वर्ष 170,000 टन ठोस अपशिष्ट पैदा किया था। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए, ये अयोग तय समय पर काम को पूरा करने के लिए एजेंडा तैयार कर रहा है, क्योंकि यह अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक, शहरों की सीमाओं के विस्तार तथा लगभग 590 मिलियन से अधिक लोगों के निवास के कारण अपशिष्टों का प्रबंधन करने में बहुत मुश्किले आ सकती हैं।

इस एजेंडा में सुझाव के लिए दो प्रकार के समाधान दिये गये हैं: पहला नगर पालिका द्वारा बड़ी अपशिष्ट सामग्री से ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है तथा दुसरा छोटे शहरों और अर्ध शहरी क्षेत्रों के लिए अपशिष्ट निपटान के लिए एक संयंत्र स्थापित किया जा सकता है। इसमें, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत भारत के ऊर्जा निगम (डब्ल्यूईसीआई) को एक नया अपशिष्ट स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। जिसकी स्थापना के बाद, प्रस्तावित निगम 2019 तक 100 स्मार्ट शहरों में अपशिष्ट से ऊर्जा की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।

सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याओं पर चर्चा की शुरूआत करने के लिए सरकार की प्रशंसा कि जानी चाहिए क्योंकि उन्होंने देश को स्वच्छ और साफ-सुथरा बनाने के लिए राष्ट्रीय अयोध द्वारा प्रस्तावित एजेंडा उचित अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक अच्छी पहल की है।

  1. 3-आर - तीन आर मंत्र अर्थात री-यूज़, रिड्यूस, रीसायकल के द्वारा सही दिशा में कार्य करके तथा कार्यान्वयन और सही प्रयास के साथ शून्य अपशिष्ट का लक्ष्य हासिल किया जाता है। स्थानीय समुदायों, अधिकारियों और राज्यों द्वारा अपशिष्ट प्रबंधन की शिक्षा के लिए अधिक प्रयास किए जाने चाहिए। 3 आर अपशिष्ट के उचित पृथक्करण और निष्काषन के बारे में लोगों के बिच जागरूकता फैलाकर इस मुद्दे से निपटने में मदद मिल सकती है।
  2. प्रभावी अपशिष्ट निपटान और प्रबंधन - अपशिष्ट सामग्री से जुड़ी विभिन्न समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए नगरपालिका अपशिष्ट निपटान और प्रबंधन द्वारा बेहतर समाधान प्रभावी रणनीति पेश किए जा सकते हैं। उच्च पर्यावरण संरक्षण के मानकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नए और लागत प्रभावी सुविधाओं में धीरे-धीरे सुधार करना इस रणनीति का एक अनिवार्य हिस्सा है।
  3. लैंड फिलिंग गतिविधियो का नियंत्रण और निगरानी - विभिन्न स्थानीय उद्योग निर्माण विध्वंस सामग्री उत्पन्न करते हैं। निर्माण और विध्वंस सामग्रियों को सार्वजनिक परियोजनाओं के क्षेत्र में गतिविधियों के नियंत्रण और निगरानी के साथ भूनिर्माण, गांव के घरों, मनोरंजन सुविधाओं या कार पार्कों या सड़कों जैसी अन्य परियोजनाओं में संसाधनों का पुन: उपयोग, पुन: दावा या पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है।
  4. स्वच्छ और कुशल अपशिष्ट निस्तारण प्रबंधन - अधिक स्वच्छ और कुशल अपशिष्ट निपटान प्रबंधन के मामले में अपशिष्ट हस्तांतरण और बहुआयामी दृष्टिकोण द्वारा समस्याओं को कम करने के लिए समाधान की पेशकश की जा सकती है। स्थानीय अधिकारियों और राज्य अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं को अपशिष्ट निपटान योजना तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अपशिष्ट समस्याओं को हल करने के लिए लैंडफिल और अपशिष्ट हस्तांतरण सुविधा अत्यन्त सुविधाजनक और उचित अपशिष्ट निपटान प्रक्रियाओं में से एक है। मानक आदर्श उपकरण और पुन: उपयोग संग्रह/हस्तांतरण पुनरुत्थान के ऐसे उपाय हैं जो अपशिष्ट निपटान संचालन के पर्यावरणीय प्रदर्शन को बढ़ा सकते हैं।
  5. थर्मल वेस्ट ट्रीटमेंट - यह साबित कर दिया गया है कि थर्मल अपशिष्ट उपचार 100% सही नहीं हो सकता। राज्य के शोधकर्ता समुह और शिक्षाविद उन्नत थर्मल अपशिष्ट उपचार तकनीकों के संभावित विकास के बारे में पता लगा सकते हैं। पर्यावरणीय समस्यओं से निपटने के लिए, उचित और बेहतर थर्मल अपशिष्ट उपचार तकनीकी एक महत्वपूर्ण रणनीति है।
  6. प्रदूषकों के लिए अतिरिक्त शुल्क - जब अपशिष्ट प्रबंधन प्रदूषक की बात आती है तो गैर सुधार योग्य सामग्रियों को उपयुक्त निपटान के लिए भुगतान करने की आवश्यकता होती है। कानून को भी प्रदूषक द्वार किये जाने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए भुगतान करने की आवश्यकता पड़ती है। उचित योजनाओं को प्रभावी रूप से सिद्ध करने के लिए सार्वजनिक भरन सुविधाओं के माध्यम से निर्माण अपशिष्ट और घरेलू अपशिष्ट सहित सभी अपशिष्ट निपटान पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए। ये इको-उत्पाद जिम्मेदार नीति का एक हिस्सा है, जो अपशिष्ट कमी, वसूली और पुनरावृत्ति को प्रोत्साहित करता है। उत्पादकों, थोक विक्रेताओं, आयातकों और खुदरा विक्रेताओं को ऐसे उत्पादों के माध्यम से पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने तथा संचालन के उद्देश्य से प्रयुक्त उत्पादों के संग्रह, उपचार, निपटान और पुनरावृत्ति की जिम्मेदारी को साझा करने में सहायता मिलती है।

वेस्ट डिस्पोजल का महत्व (Importance of Waste Disposal)

  1. सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा - संभावित खतरनाक रसायनों को समाप्त करने की आवश्यक्ता है क्योंकि पर्यावरणीय अपशिष्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालती है। उदाहरण के लिए, मृत कार की बैटरी में खतरनाक तत्वों की उपस्थिति के कारण, उन्हें बहुत सावधानी से निपटाया जाना चाहिए।
  2. आर्थिक लाभ - उचित वेस्ट डिस्पोजल प्रणाली सामाजिक आर्थिक लाभ प्रदान करती है। जैसे- खाद के लिए किसी क्षेत्र (बगीचे या स्थानीय खेत) के हिस्से को उत्पादक के रूप में उपयोग किया जाता है, तो वो जमीन में पोषक तत्वों को भरने तथा नगर पालिकाओं को लैंडफिल क्षेत्रों पर पैसे बचाने में मदद कर सकता है।
  3. पर्यावरण संरक्षण – एक प्लास्टिक या खतरनाक रसायन वाले उत्पादन अनुचित निपटान के लिए स्थानीय जल स्रोतों या मिट्टी में अपना रास्ता बनाते है और स्थानीय वन्य जीवन के साथ-साथ प्राकृतिक विकास प्रक्रियाओं को प्रभावित करते है। गैर सरकारी संगठनों के अलावा, सरकार दुनिया भर के वन्यजीवन की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी लेते हैं, इसीलिए अपशिष्ट निपटान के अनुचित तरीकों द्वारा विलुप्त होने वाले जीवित जीवों को बचाने के लिए इनके द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
  4. ऊर्जा की बचत - संगठन उचित अपशिष्ट प्रबंधन और निपटान रणनीतियों के उपयोग द्वारा लाभ उठा सकती हैं। इन संगठनों द्वारा भूकंप प्रणाली के संसाधनों पर बिना किसी विशेष लाभ के महत्वपूर्ण राशी तथा ऊर्जा खर्च की जाती है। इन प्रयोगों द्वारा ऊर्जा को अवशोषित करने वाली तकनीकी तैयार की जाती हैं जिसमे शहरों को भूकंप की प्रक्रिया के माध्यम से बिजली उत्पन्न करने की अनुमति दी जाती हैं।
  5. जलवायु परिवर्तन - अपशिष्ट के अनुचित निपटान के कारण, ग्रीनहाउस गैसों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। ये बहुत सारी ऊर्जा को अवशोषित करती हैं जीवित जीवों को नुकसान पहुंचाती हैं।

निष्कर्ष

गलत तरीके से किया गया वेस्ट डिस्पोजल कई सारे मुद्दों या समस्याओं के जन्म कारण है और यह हमारे इस पृथ्वी ग्रह को भी नुकसान पहुंचाता है। हालांकि 3 आर जैसी सरल तकनीकों का पालन करके हम अपशिष्ट उत्पादन में कमी ला सकते है। विभिन्न अपशिष्ट निस्तारण विधियों, प्रबंधन तकनीकों और समाधानों और उचित वेस्ट डिस्पोजल का उपयोग कर हम विश्व स्तर पर होने वाली अपशिष्ट सम्बन्धी समस्याओं में उल्लेखनीय रुप से कमी लाने में मदद कर सकते हैं।