वेस्ट मैनेजमेंट: अर्थ, प्रकार, महत्व, लाभ और समाधान

प्राचीन समय के दौरान, मनुष्य अपने घरेलू अपशिष्ट को हटाने के लिए, गढ़्ढा खोदकर बेकार या खराब वस्तुओं को उसी में दफना दिया करते थे। उस दौरान ये तरीका बहुत उपयोगी हुआ करता था। क्योंकि उस समय जनसंख्या आज अपेक्षाकृत बहुत कम थी, और उनकी जरूरते भी सीमित थी और वे कचरे का उत्पादन भी छोटे पैमाने पर किया करते थे।

अब मानव आबादी और औद्योगिक विकास में जबरदस्त वृद्धि के कारण परिस्थितियों में काफी बदलाव हो चुका है। नतीजतन, विशाल अपशिष्ट का प्रबंधन करना अब मानव के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है।

वेस्ट मैनेजमेंट की परिभाषा (Waste Management in Hindi)

अपशिष्ट प्रबंधन केवल अनचाहे, बेकार या खराब वस्तुओं को किसी भी तरीके से निपटाना नही है। बल्कि अब यह एक व्यवस्थित प्रक्रिया बन गया है जिसमें संग्रहण, परिवहन और कचरा, सीवेज और अन्य अपशिष्ट उत्पादों का उचित निपटान को शामिल कर दिया गया है। ये कचरे का ठीक तरीके से उपयोग तथा पुनरुपयोग के लिए विभिन्न समाधान भी प्रदान करता है।

अपशिष्ट के प्रकार (Types of Waste)

व्यापक रूप से, अपशिष्ट को शहरी अपशिष्ट, औद्योगिक अपशिष्ट, बायोमास अपशिष्ट और बायोमेडिकल अपशिष्ट के प्रमुख चार रूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है। उनमे भी अधिक विशिष्ट वाले अपशिष्टों को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • ठोस अपशिष्ट: ठोस अपशिष्ट के रुप में व्यापारिक और औद्योगिक के साथ घरेलू स्थानो से निकलने वाले कचरे को शामिल किया जाता है।
  • तरल अपशिष्ट: घरेलू और उद्योग स्थलो द्वारा तरल अपशिष्ट उत्पन्न किया जाता हैं।
  • कार्बनिक अपशिष्ट: इसमे खाद्य, उद्यान और लॉन के कटाई-छटाई से निकलने वाले कार्बनिक पदार्थ से युक्त कार्बनिक अपशिष्ट तथा पशुओं और पेड़-पौधे आधारित सामग्री और पेपर, कार्डबोर्ड, लकड़ी जैसे अव्यवस्थित कार्बन आदि शामिल होते हैं, जो आम तौर पर घरो में पाए जाते हैं।
  • कृषि अपशिष्ट: कृषि कार्यो द्वारा उत्पन्न अपशिष्टों में फसलों और पशुओं द्वारा प्राप्त अपशिष्ट शामिल होते है, इन्हे कृषि अपशिष्ट कहा जाता है।
  • जैव चिकित्सा अपशिष्ट: मनुष्यों या जानवरों के निदान, उपचार या टीकाकरण के दौरान उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट बायो-मेडिकल अपशिष्ट कहलाते हैं।
  • पुनर्नवीनीकरण अपशिष्ट: पुनर्नवीनीकरण अपशिष्ट में उन सभी अपशिष्ट वस्तुओं का समावेश होता है जिन्हें पुनः उपयोग में लाने के लिए परिवर्तित किया जाता हैं जैसे धातु, कागज और कार्बनिक अपशिष्ट इत्यादि।

अपशिष्ट प्रबंधन के प्रकार/विधि/तकनीक (Types of Waste Management)

हानिकारक सामग्रियों को समुद्र में प्रवाहित करने के कुछ मामलों में नियंत्रित, विनियमित प्रतिबंध लगा दिये गये है। अपशिष्ट प्रबंधन के प्रभावी तरीके निम्नलिखित हैं:

  • महासागर डंपिंग
  • स्वच्छ भराव क्षेत्र
  • भस्मीकरण
  • खाद
  • अपशिष्टों का पृथक्करण, पुनर्नवीनीकरण और पुन:प्राप्ति
  • अपशिष्टों का मैकेनिकल और जैविक उपचार
  • अपशिष्टों का मैकेनिकल वर्गीकरण

अपशिष्ट प्रबंधन का महत्व/अपशिष्ट प्रबंधन इतना महत्वपूर्ण क्यों है? (Importance of Waste Management)

शोध के मुताबिक, हर साल 62 मिलियन टन अपशिष्ट उत्पन्न होते है, जिसमें से केवल 28% अपशिष्टों का पुनर्नवीनीकरण किया जाता है जबकि शेष 72% अपशिष्टों को सड़कों या गड्ढों में फेक दिया जाता है, जो अततः पर्यावरण में हानिकारक परिणामों को बढ़ावा देते है। वर्तमान समय में, अधिकांश विकासशील देशों को लगभग इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए हमे अपने घरों से विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों को अलग करने, कुशल अपशिष्ट संग्रह प्रणाली, उचित निपटान और पुन:प्राप्ति जैसी आधुनिक प्रक्रियाओं को अपनाने की आवश्यकता हैं।

कोई भी वस्तु कभी बर्बाद नहीं होती, जब तक हम उसका किसी न किसी तरीके से उपयोग न कर ले। आम तौर पर हम अपशिष्ट वस्तुओं के ढेर को देखते हैं लेकिन उन्हें उपयोग करने के तरीके पर पर्याप्त गहराई से नहीं सोचते। आज कल अपशिष्ट प्रबंधन में कई नवाचार उपलब्ध देखने को मिलते हैं जैसे उपयोग करने योग्य उत्पादों का पुनर्नवीनीकरण, अपशिष्ट पदार्थों से मीथेन या ईंधन पैदा करना, फर्नीचर आदि के लिए नए उत्पादों का निर्माण करना इत्यादि। इसलिए, आजकल अपशिष्ट पदार्थों को बहुत प्रभावी तरीके से प्रबंधित करने पर महत्व दिया जा रहा है।

 

वैज्ञानिक विधी से अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन के लिये क्या किया जा सकता है?

एक प्रभावी अपशिष्ट रणनीति सामग्री विभिन्न अपशिष्टों के विभिन्न समस्याओं के लिए  कई समाधान प्रदान करते है। अनुपयोगी पदार्थों की पुनरावृत्ति करना और खाद तैयार करना अपशिष्ट प्रबंधन का सबसे प्रभावी तरीका है। हालांकि इससे यह पता चल जाता है कि नई और लागत प्रभावी सुविधाए क्रमिक सुधार के लिए लाभदायक है या नही। इसका उद्देश्य उच्च पर्यावरण संरक्षण के लिए मानवो को प्रोत्साहित करना भी है।

अपशिष्ट लैंडफ़िलो का कुशल प्रबंधन: अधिकांश लैंडफ़िलो में उचित अपशिष्ट प्रबंधन स्थलों की कमी देखने को मिलती है। इसकी उचित व्यवस्था न होने पर ये पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव डालती है। कुछ अवधि के बाद, ये लैंडफ़िल अपशिष्ट रिसाव के कारण भूजल और अन्य पर्यावरणीय आवासों को प्रदूषित कर देते हैं और अपशिष्ट प्रबंधन के कार्य को और अधिक कठिन बना देते हैं। अपशिष्ट लैंडफ़िल संभावित रूप से कभी-कभी असुरक्षित गैसों को भी उत्सर्जन करते हैं।

गड्ढों की भराई के संचालन के लिए मार्गदर्शन करने वाले अधिकांश नियम-कानून अक्सर चिकित्सा अपशिष्ट, नगरपालिका अपशिष्ट, विशेष अपशिष्ट या खतरनाक अपशिष्ट जैसे विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों की निगरानी और नियम में कोताही बरतते हैं। जिसके कारण इन अपशिष्टों के विषाक्त एवं खतरनाक प्रभावो का सामना करना पड़ता है। हालांकि यह देखा गया है कि लैंडफ़िलो के बर्बादी की ये समस्याएं कई दशकों से चली आ रही हैं।

  • 3-आर की अवधारणा: घरों और उद्योगों द्वारा उत्पन्न होने वाले अपशिष्टों की चुनौतीपुर्ण प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, 3आर के मंत्र रीयूज, रीडयूस और रीसायकल का पालन करना चाहिए। अतः अपशिष्ट पदार्थो के हानिकारक प्रभाव को कम करने के लिए इन विकल्पों को सुचारु रुप से लागु करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
  • शून्य अपशिष्ट प्रणाली: उद्योगो द्वारा अपशिष्ट प्रबंधन के कार्य को सरल बनाकर और अपने अपशिष्ट प्रबंधन को केंद्रीकृत करके इस कार्य में बहुत महात्वपूर्ण भूमिका निभायी जा सकती है। कंपनिया अपने द्वारा उतपन्न खतरनाक कचरे का संचालन और परिवहन करके सुरक्षित रुप से कचरे का निस्तारण कर सकती है। जिससे वह शून्य अपशिष्ट लैंडफिल के लक्ष्य को हासिल कर सकते है।

अपशिष्टों के पुनरावृत्ति तथा कम अपशिष्ट संसाधन तरीकों पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए। अपशिष्ट प्रबंधन में खरीददारी, वस्तुओं का पुन: उपयोग और प्रयोज्य और पुनर्नवीनीकरण योग्य उत्पादों का इस्तेमाल करके और टूटी चीजों की मरम्मत कर उन्हें पुनः उपयोग करने के तकनीकों को शामिल किया गया है।

अपशिष्ट प्रबंधन का लाभ (Benefits of Waste Management)

अपशिष्ट प्रबंधन के लाभ निम्नलिखित रुप से यहां दिये गये हैं:

  • प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा: वनो, गैसों और पानी जैसे कई प्राकृतिक संसाधनों की घटती समस्या हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय बन गयी है। हम सभी यह जानते हैं कि पेपर, अलमारी, पेपर कप और कई अन्य उत्पाद पेड़ो की लकड़ी से बने होते हैं और इसीलिए प्रत्येक वर्ष बड़े पैमाने पर वनों की काटाई भी की जाती है। अततः हमें पेपर उत्पादों की पुनरावृत्ति करनी चाहिए ताकि पेड़ों को काटने की इस प्रक्रिया को रोका जा सके। हमें प्लास्टिक और धातु से बने वस्तुओं का पुन: उपयोग करना चाहिए। कुछ देशों ने उत्पादों के पुनर्नवीनीकरण और पुनरावृत्ति के लिए निर्माण-स्थान या भराव क्षेत्रों की स्थापना की है जहां लोग अपने पुराने समाचार पत्र, धातु या अन्य वस्तुओं को ला सकते हैं और उनका पुनर्नवीनीकरण कर सकते हैं।

 

  • ऊर्जा का उत्पादन: पुनरावृत्ति ऊर्जा का उत्पादन करने का एक शानदार तरीका है। एक नई वस्तु का उत्पादन करने के लिए आमतौर पर अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसीलिए हम कभी-कभी वस्तुओ की पुनरावृत्ति करने में कुछ ऊर्जा को बचा लेते हैं औऱ कुछ ऊर्जा अपशिष्ट के पुनरावृत्ति द्वारा प्राप्त करना संभव हो जाता है। प्रयोंगो से यह पता चला है कि हमारे घरो के अपशिष्ट पदार्थों को एक विशेष प्रणाली के द्वारा बिजली उत्पन्न में प्रयोग किया जा सकता है, इस प्रणाली में सबसे पहले, शुष्क और गीले कचरे अलग कर दिये जाते हैं। कचरे की पुनरावृत्ति प्रणाली प्रक्रिया का उपयोग बड़े घरों में बिजली उत्पादन के लिए किया जा रहा है। उदाहरण के लिए मुकेश अंबानी जी के घर में अपशिष्ट प्रयोग प्रणाली के माध्यम से बिजली उत्पादित किया जाता है।
  • प्रदूषण में कमी: प्रकृति और मानवता को बचाने के लिए वस्तुओं की पुनरावृत्ति करना सबसे शक्तिशाली तरीका माना जाता है। इसीलिए हमें लोगों को इसके बारे में अधिक से अधिक जागरूक करना चाहिए। जितना अधिक लोग अपने अपशिष्टों का प्रबंधन शुरू करगे उतना ही अधिक वो बेहतर पर्यावरण के निर्माण में अपनी भागीदारी निभा पायेगें। अत्यधिक अपशिष्ट मुक्त करने के साथ-साथ मानव विभिन्न उत्पादों, फैक्ट्री निर्माण प्रक्रियाओं तथा धूम्रपान के द्वारा वायुमंडल को काफी हद तक प्रदूषित कर रहे है। वहीं पुनरावृत्ति की प्रक्रिया प्रदूषण को कम करने तथा ऊर्जा को बचाने में भी मददगार है।
  • अपशिष्ट पुनरावृत्ति: अपशिष्ट जलीय जीवन के लिए भी एक बड़ी समस्या है। बहुत सारे अपशिष्ट समुद्र और महासागर में फेंक दिये जाते है। हर जगह से जमा किए गए कचरे के ढ़ेर को एक बड़े से कचरे के मैदान में फेक दिया जाता है जिसे "अपशिष्ट द्वीप" कहा जाता है। प्रकृति और मानवता के लिए अपशिष्टों की पुनरावृत्ति करने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि पुनरावृत्ति अपशिष्ट प्रबंधन के साथ प्रारंभ होता है। जैसे कागज के वस्तु कागज वाले तथा ग्लास के वस्तु को ग्लास बिन में पुनरावृत्ति के लिए इकट्ठा किया जाता है।

अपशिष्ट प्रबंधन पर भारतीय परिदृश्य (Indian Scenario on Waste Management)

भारतीय परिदृश्य के तहत, आम व्यक्ति के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का दृष्टिकोण वैज्ञानिक नहीं है। चूंकि शहरीकरण में तेजी से बढ़ोतरी के चलते उद्योगों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिससे यह नगरो में पैदा होने वाले ठोस अपशिष्ट के उत्पादनो को भी काफी हद तक बढ़ा देती है। आज के समय में, यह समस्या इतनी बढ गई है कि एक थोडी सी बारिश भी कस्बों और शहरों में बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न कर देती है।

कुछ दशकों पहले का आंकलन यदि हम मौजूदा समय के साथ करते हैं, तो हमें यह पता चलता है कि वह समय वर्तमान से कहीं बेहतर था। उन दिनों के दौरान साफ-सफाई का पुरा ध्यान रखा जाता था, उस दौरान न केवल बड़े शहरों और उनके सड़कों का बल्कि छोटे शहरों और उनकी सड़कों की स्वच्छता का भी ख्याल रखा जाता था। रोजमर्रा की जिंदगी के लिए उपयोग की जाने वाली जल निकासी की सफाई की जाती थी। आम तौर पर, कोई भी जानबूझकर जल निकासी में कचरा नहीं डालता था। घरों से एकत्रित रेशम और कूड़ों को कार्बनिक उर्वरकों के रुप में परिवर्तित किया जाता था।

इस संदर्भ में, हम गुजरात राज्य के एक छोटे से शहर भावनगर के नालियों के प्रबंधन प्रणाली का एक बहुत अच्छा उदाहरण ले सकते हैं। आजादी से पहले से ही भावनगर भूमिगत जल निकासी सुविधाओं वाले कुछ शहरों में से एक रहा है। उस दौरान भावनगर के पुराने शहर में भूमिगत जल निकासी की व्यवस्था थी। सन् 1936 से राज्य के लोक निर्माण विभाग के द्वारा शहर के इन आंतरिक जल निकासी कार्यों की देखरेख की जाती थी।

उन दिनों के दौरान, लोग खरीदारी करने के लिए कपड़े के थैले का उपयोग किया करते थे। बाजार से खरीदे गए सामान आमतौर पर इसी बैग में रखकर घर ले जाया जाता था। हालांकि, धीरे-धीरे कपड़े के थैले को प्लास्टिक के थैले के साथ बदल दिया गया। उस दौरान प्लास्टिक बैग का उपयोग करना लोगों की आदत बन गयी थी। इसीलिए लोग कपड़े के थैले के साथ घूमने में शर्मिंदगी महसूस करते थे। हालांकि अब दिन-प्रतिदिन विभिन्न वस्तुओं की निरंतर खपत के कारण प्लास्टिक का उपयोग अत्यधिक बढ़ गया है।

अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपयोगी सुझाव/अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रभावी तरीके (Solutions for Waste Management)

  • हम नियम और कानून की कमी के कारण अपशिष्ट प्रबंधन में सबसे बुरी तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसा कोई भी शहर नहीं है, जहां शहर के पूरे अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाता हो। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों के प्रतिरोध के माध्यम से उन स्थानों की पहचान कर अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य किया जाना चाहिए। अधिकांश कस्बों में, इन अपशिष्टों को अंततः नदियों के किनारे या जल निकायों के बाह्य सतह पर फेक दिया जाता है नतीजतन, इससे उपरी सतह के जल निकाय प्रदूषित हो जाती हैं। इसीलिए यह आवश्यक है कि नगर नियोजक को अपनी योजना बनाने से पहले ही इस पहलू पर विचार कर लेना चाहिए।
  • अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रियाओं पर उचित ध्यान दिया जाना चाहिए। इसलिए अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए जनता को शिक्षित करना तथा उचित तरीके से योजना बनाना और वर्तमान अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को लागू करना अति आवश्यक है। अनुकूल तरीके से पर्यावरण अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उचित जागरूकता वाले कार्यक्रम भी आयोजित किये जाने चाहिए। यदि हम इन अपशिष्ट पदार्थों को सही तरीके से प्रतिबंध करते है, तो यह हमें कई प्रकार के लाभ दे सकते है, जैसे ये व्यक्तिगत और समाजिक स्तर पर पैसे बचाने में हमारी सहायता कर सकते हैं।
  • अपशिष्ट प्रबंधन को कुशलतापूर्वक करने के लिए संबंधित अधिकारियों को कुछ कार्यक्रमों और नीतिगत विकास की शुरुआत करनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि हर चीज का विघटन हो जाएगा, परन्तु इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप अंत में कई गैर-योग्य उत्पाद योग्य उत्पाद के लिए उपयोगी हो जायेगें। अपशिष्ट प्रबंधन टिकाऊ और प्रभावी होने चाहिए, क्योंकि अनजाने में हम जिन चीजों को भूमिगत स्तर पर भारी मात्रा में स्टोर करने के लिए छोड़ देते है वे अधिकांशतः विघटित नहीं होते हैं। वर्तमान समय में, ठोस अपशिष्ट को उचित प्रबंधन, आर्थिक रूप से किफायती, सामाजिक रूप से स्वीकार्य और पर्यावरण के अनुकूल उपयुक्त तकनीक की आवश्यकता होती है।
  • पुनरावृत्ति हमारी अर्थव्यवस्था के अधिकांश क्षेत्रों में अपना योगदान देती है। आधुनिक शहरों में, अपशिष्ट जल का फिर से उपयोग करने के लिए साफ किया जता है, लेकिन जब खाना पकाने का तेल इस पानी में मिल जाता है तब यह ठोस होकर अपशिष्ट जल के प्रवाह में बाधा डालता है, जिसको ठीक करने में हमारी लागत बड़ जाती है। हालांकि सभी प्रकार के अपशिष्ट को पुनर्नवीनीकरण नहीं किया जा सकता परन्तु धातु से निर्मित वस्तुओं को लगभग 100% तक पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है वहीं ग्लास और पेपर दूसरे स्थान पर हैं जिन्हें लगभग 50% से भी कम पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है। इस समस्या का एक बहुत ही उपयोगी विकल्प जैव-प्लास्टिक का उपयोग करना हो सकता है, जो पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल होता है।
  • विभिन्न समुदायों चाहे फिर वो शहरी हो या ग्रामीण, को विभिन्न मल्टीमीडिया के माध्यमो से बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अपशिष्ट के हानिकारक प्रभाव और स्थानीय स्तर पर अपशिष्ट संग्रह सेवाओं और सुधार के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए, क्योंकि इन अपशिष्ट पदार्थों से मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण को भी गंभीर खतरा होता है। इसीलिए हमें लोगों को इसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करनी चाहिए।
  • असल में वस्तुओ को फेंकने के जगह उनका पुन: उपयोग या पुनरावृत्ति करना, एक बेहतर तरीका हो सकता है। अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम का हमारा मुख्य और अंतिम उद्देश्य पर्यावरण को सुरक्षित रखना होना चाहिए। हमारी गतिविधियां पर्यावरण तंत्र के अनुकूल होनी चाहिए। इसके साथ ही हमें भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का निर्माण करने में अपना योगदान देना चाहिए।