ओसियन डंपिंगः अर्थ, कारण, प्रभाव और समाधान (Ocean Dumping: Meaning, Causes, Effects and Solutions in Hindi)

महासागर पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से है, जिसमें कई सारी महत्वपूर्ण और मूल्यवान प्राकृतिक वस्तुएं मौजूद है। इसके साथ ही यह पृथ्वी पर मौजूद कई सारे जीवों का निवास स्थान है जैसे की शैवाल, ब्लू व्हेल, अनगिनत प्रजाती के मछलिया, कछुए आदि। इममें से कई सारी ऐसे जीव हैं जो पृथ्वी के सबसे बड़े स्तनधारियों के रुप में भी जाने जाते है। महासागर को पृथ्वी पर बहने वाली नदियों के अंतिम छोर के रुप में जाना जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि नदियों का पानी अंतिम में सागरों में मिल जाता है।

वर्तमान में मनुष्य द्वारा काफी ज्यादे मात्रा में कचरा नदियों में फेका जाता है जोकि आखिर में जाकर समुद्र में मिल जाता है। यहीं कारण है कि दिन-प्रतिदिन महासागरों में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जिससे समुद्र में रहने वाले जीव-जन्तुओं के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

ओसियन डंपिंग का अर्थ (Meaning of Ocean Dumping)

ओसियम डंपिंग का अर्थ रसायनों, कचरों, गंदे पानी और मलबों का महासागरों में मिल जाना है, जोकि समुद्री जैव विविधता के लिए बहुत ही हानिकारक है। यहीं कारण है कि ओसियन डंपिंग को समुद्री प्रदूषण के मुख्य कारक के रुप में जाना जाता है क्योंकि पहले से ही उपयोग किये गये कीटनाशक और उर्वरक आदि का भी निस्तारण समुद्र में कर दिया जाता है इसलिए समुद्री जीवन को खतरा सिर्फ विषाक्त कचरे से नही बल्कि की कई सारे दूसरे प्रदूषकों से भी है।

ओसियन डंपिग से जुड़े हुए तथ्य (Facts Related to Ocean Dumping)

क्योंकि महासगरीय प्रदूषणों का हमारे जीवन पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नही पड़ता है, इसलिए हर कोई इससे काफी हद तक प्रभावित होता है।

  • प्लास्टिक ऐसा एक सामान्य तत्व है, जो काफी ज्यादे मात्रा में समुद्रों और महासागरों को प्रदूषित करता है। इसे काफी हानिकारक माना जाता है क्योंकि इसे नाही रिसायकल किया जा सकता है नाही इसका पुनरुपयोग किया जा सकता है। कई बार समुद्री जीव इसे अपना भोजन समझकर खा लेते है जोकि उनके लिए जानलेवा बन जाता है। कई लोग मांसाहारी भोजन करना पसंद करते है, जिसमें वह मुख्यतः मछली खाना पसंद करते है। इसलिए पानी में हमारे द्वारा जो प्लास्टिक फेंका जाता है वह खुद हमारे स्वास्थ्य के लिए भी काफी हानिकारक होता है।
  • इसका अंदाजा लगाते हुए, इस बात को नजरअंदाज नही किया जा सकता है कि हरवर्ष लाखों पशु-पक्षी इस महासागरीय प्रदूषण के कारण अपनी जान गवां बैठते है। इसके अलावा समुद्रों में फैले मछली पकड़ने वाले जालों में फसकर हर वर्ष अनगिनत डाल्फिन मछलियों की मृत्यु हो जाती है।
  • कई बार हम मनुष्य सोचते कि दुनियां का ज्यादेतर हिस्सा पानी से घिरा हुआ है, इसलिए भूमि पर उत्सर्जित प्रदूषक आसानी से पानी में विलयित हो जायेंगे और कुछ समय बाद पूर्णत समाप्त हो जायेंगे, परन्तु वास्तव में यह एक भ्रम है। यह पानी में कभी भी पूर्ण रुप से समाप्त नही होते उल्टे खाद्य श्रृंखला को भी नुकसान पहुंचाते है। वह जीव-जन्तु जो खाद्य श्रृंखला के मध्य में स्थित होते है वह इन हानिकारक प्रदूषको द्वारा सबसे ज्यादे प्रभावित होते है। खाद्य श्रृंखला वह प्रक्रिया है, जिसमें छोटे जानवरों को बड़े जानवरो द्वारा खाया जाता है। खाद्य श्रृंखला में उपरी चरण में आने वाले जीव जन्तु यह प्रदूषित भोजन सबसे ज्यादे मात्रा में खाते है जो उनके जीवित रहने के क्षमता से दोगुना होता है।
  • समुद्री दुनिया को शांत क्षेत्र भी कहा जाता है क्योंकि काफी मात्रा में व्हेल, मैमल, डाल्फिन और अन्य कई समुद्री जीव एक दूसरे से ध्वनि तंरगो के माध्यम से संपर्क करती है। आपने कई बार इस बात पर गौर किया होगा की जब मछलियां चलती है तो वह पानी के बुलबुले उत्पन्न करती है। ऐसा वह इसलिए करती है क्योंकि वह इस आवाज द्वारा अपना रास्ता तलाश करती है लेकिन उनके रास्ते में इन कचरों के आ जाने के कारण उनका संपर्क बाधित हो जाता है, जिसके कारण उनकी प्रजाति पर भी संकट उत्पन्न हो जाता है।

ओसियन डंपिग के कारण (Causes of Ocean Dumping)

आज के समय में महासागरीय प्रदूषण एक महत्वपूर्ण समस्या बन गया है। इसके लिए हम सबको मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है क्योंकि कई सारी मानवीय गतिविधियों द्वारा महासागरों की साफ-सफाई प्रभावित होता है। महासागरीय प्रदूषण के मुख्य कारण निम्नलिखित हैः

 

  • विषाक्त कचरे का निस्तारण

समुद्र के पानी को प्रदूषित करने वाले सबसे खतरनाक प्रदूषक कचरे और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को फेंकने में शामिल हैं। भारत एक विकासशील देश है, इसलिए यहां विभिन्न प्रकार के कारखाने संचालित होते है जो अपने अपशिष्ट अक्सर समुद्र में विसर्जित करते हैं क्योंकि कचरा निस्तारण का यह सबसे आसान विकल्प माना जाता है, इसके साथ ही लोगो का ऐसा मानना है कि पानी में मिलने पर अपशिष्ट पतला होकर समाप्त हो जाएगा। इन औद्योगिक सीवेजों के कचरों में पारा, जस्ता और डीडीटी जैसी सामग्री होती है, जोकि जलीय जीवन के लिए काफी घातक है।

कई सारे ऐसे उद्योगिक कारखाने भी हैं जो परमाणु रिएक्टरों का भी निर्माण करते हैं, जिनसें वायुमंडल में रेडियोधर्मी पदार्थ उत्पादित होते हैं जोकि अंततः समुद्र के पानी में मिल जाता है। यह दूषित पानी जीवों पर कई विपरीत प्रभाव डालता है जिससे समुद्री जीव एक जगह से दूसरे जगह स्थानांतरित हो जाते है और इसके कारण एक ही जगह पर कई सारी मछलियां जमा हो जाती है, जोकि उनके लिए प्रकार का निवास संकट उत्पन्न कर देता है।

  • भूमि पर अत्यधिक मात्रा में कचरे की उत्पत्ति

खेतों में काम कर रहे किसानों को इस बात का पता भी नही होता है कि उनकी खेती की जमीन से उत्पन्न हुआ कचरा आस-पास के तलाबों में चला जाता है, जोकि नदियों से होते हुए आखिर में समुद्र में मिल जाता है।

यह ना सिर्फ समस्याएं उत्पन्न करता है बल्कि की कई तरह के रसायनों से युक्त होने के कारण यह जलीय जीवन के लिए भी काफी घातक होता है। जिससे की महासागरीय पानी में जगह-जगह पर डेड जोन उत्पन्न हो जाते है।

  • तेल का फैलना

भारतीय उप-महाद्वीप में दैनिक रुप से कई सारे तेल के टैंकर समुद्री रास्ते से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाते है। यह जहाज समुद्र में इन तेलों के टैकरों के परिवहन के दौरान काफी सारा तेल समुद्र में गिरा देते है, जिसके की काफी बुरे परिणाम देखने को मिलते है और इससे समुद्री प्रदूषण में वृद्धि होती है। इसके अलावा कई बार यह जहाज एक-दूसरे से टकरा भी जाते है, जिसके की और भी ज्यादे विध्वंसक परिणाम देखने को मिलते है।

तेल का फैलना सबसे समुद्री प्रदूषण बढ़ाने वाली सबसे हानिकारक घटनाओं में से एक है। इसके कारण कई सारे पक्षीयों और समुद्री जीवों की काफी दर्दनाक तरीके से मृत्यु होती है। यह साधरण कचरे तथा गंदे पानी से कही ज्यादे खतरनाक होता है और इसके साथ ही यह समुद्री प्रदूषण का मुख्य कारण भी है। तेल के लीकेज की समस्या भूमि से शुरु होती है, जोकि समुद्री जानवरों के लिए काफी घातक होता है। यह उनके अंदर के तरह के व्यवहारिक बदलाव पैदा करता है जिससे इन जलीय जीवों का प्रजनन रुक जाता है और यह धीरे-धीरे नष्ट होने लगते है।

 

  • समुद्री खनन

समुद्र के अंदर से कई तरह के धातुओं जैसे कि चांदी, सोना, कोबाल्ट आदि के प्राप्ति के लिए खुदाई की जाती है, यह भी महासागरीय प्रदूषण का एक मुख्य कारण है। जहां भी इन धतुओं की खुदाई होती है, वहां इनके अवशेष और कचरे पानी में मिल जाते है। जिससे की पानी में जहरीले तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है और इसके वजह से हमारा पूरा पर्यावरण तंत्र क्षतिग्रस्त हो जाता है। समुद्री खनन का प्रभाव काफी लंबे समय तक बना रहता है क्योंकि इससे काफी ज्यादे मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है।

  • घरेलु सीवेज

वह सीवेज जो मुख्य रूप से हमारे घरों से निकलती है उसे घरेलू सीवेज के रूप में जाना जाता है। इसमें कई तरह के कचरे निष्काषित होते है। हम अपने घरों को साबुनों और डिटर्जेंटों से साफ करते हैं जिनमें उच्च मात्रा में रसायनों मिले होते हैं जो अक्सर जल स्त्रोतों में मिल जाते है और जल प्रदूषण का कारण बनता हैं। मानव उत्सर्जन के कारण जो रासायन पानी में घुल जाते है, यह अंततः धाराओं और महासागर के पानी में मिल जाते है और समुद्र में मौजूद जीवाणुओं के लिए भोजन का कार्य करते है। इस प्रक्रिया का मुख्य परिणाम यह होता है कि शैवाल और बैक्टीरिया पानी के नीचे अधिक मात्रा में आते जाते हैं जो अन्य जलीय जीवों के जीवन को मुश्किल बनाता है।

ओसियन डंपिंग के प्रभाव (Effects of Ocean Dumping)

कई टैंकरों और समुद्री जहाजों द्वारा महासागर में फैलाया गया तेल समुद्री जीवों के स्वश्न तंत्र और ग्रिल्स को जाम कर देता है जिससे की उनके अंगों को पानी में मौजूद ऑक्सीजन नही मिल पाता है। इसके साथ ही यह उनकी खाद्य तथा प्रजनन प्रक्रिया जैसी गतिविधियों को भी प्रभावित करता है तथा उनके शरीर के तापमान को कम कर देता है। ओसियन डंपिंग के कारण इसके प्रभावों के समान ही हैं।

जब ये विषाक्त प्रदूषक महासागर के पानी में मिल जाते हैं और जीवों द्वारा भोजन के रुप में ग्रहण कर लिये जाते हैं, तो यह मनुष्यों को भी प्रभावित करता है क्योंकि वे इन समुद्री जीवों को अपने आहार के रुप में सेवन करते हैं। इससे कई सारी हानिकारक बीमारियां होती हैं जिनमें हेपेटाइटिस, कैंसर और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में समस्या आदि प्रमुख है।

सागर के पानी को प्रदूषित करने वाले अधिकांश धूल के कण महासागर में घुलने बजाए बहुत लंबे समय तक पानी में उपस्थित रहते हैं। जैसे-जैसे इन प्रदूषको और सामग्रियों में क्षरण होता है, वे समुद्र के वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन को अवशोषित करने लगते हैं। जिसके कारण समुद्र के पानी में मौजूद ऑक्सीजन के स्तर में कमी होने लगती है और यह समुद्री जैव विविधता के लिए कई तरह की समस्याएं उत्पन्न कर देता है।

आपने भारत के कुछ क्षेत्रों में कचरे के मैदान देखे होंगे, इसी तरह के कचरे के विशालकाय मैदान नदियों के पानी में भी बनते जा रहे हैं, जिसमें मुख्य रूप से प्लास्टिक और कचरा मौजूद होता है जिसका पुन: उपयोग भी नहीं किया जा सकता है।

ओसियन डंपिंग का समाधान (Solutions of Ocean Dumping)

महासागरीय जैव विविधता को बनाये रखने के लिए कई सारे कदम उठाये जा सकते है। इस विषय में हमें खेती करने वाले किसानों को यह समझाने की आवश्यकता है कि उन्हें जैविक खेती के पद्धति को अपनाना चाहिए, जिसमें उर्वरको और कीटनाशकों की कम आवश्यकता पड़ती है। इस तरह की खेती में फसलों और पौधों के विकास के लिए जैविक उत्पादों की सहायता ली जाती है, जिससे उनपर रसायनों का प्रभाव नही पड़ता है।

जैविक खेती हमारे लिए काफी लाभदायक सिद्ध होगी क्योंकि हमारे लिए सेहतमंद होने के साथ ही यह पानी में बहने पर समुद्री जीवों के लिए किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न नही करेगा। इसके लिए हमें फसलों का नियमित आवर्तन करते रहना चाहिए ताकि रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम से कम किया जा सके।

इसी तरह तेलों का परिवहन करने वाले जहाजों और कंटेनरो को इस विषय में निर्देशित किया जा सकता है कि वह यात्रा से पहले अपने कंटेनरों की जांच कर ले कि उनमें लीकेज की समस्या तो नही है, जिससे की इनके द्वारा समुद्र में प्रदूषण ना फैले। इस विषय में सरकार द्वारा कठोरता से नियम-कानून लागू करके ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।

हम सब साथ मिलकर निम्न उपायों को अपनाकर समुद्री जीवन की रक्षा का दायित्व उठा सकतेः

  • आयातित सी फुड के जगह पर स्थानीय सी फुड का सेवन करें क्योंकि बाहर से आये सी फुड में अन्य कई तरह के घटक मिले होते है।
  • हमेशा अपने आस-पास के स्थानों और समुद्री बीचों को साफ-सुधरा रखे।
  • इसके साथ अपने घरों की साफ-सफाई में अधिक मात्रा में साबुन का इस्तेमाल ना करें, यदि आप चाहते तो इसके स्थान पर नींबू का उपयोग कर सकते है क्योंकि यह भी एक तरह का एंटीऑक्सीडेंट ही होता है जो घरों के सफाई में काफी उपयोगी है लेकिन समुद्री जीवों पर इसका कोई हानिकारक प्रभाव नही उत्पन्न होता है।

ओसियन डंपिंग के फायदे और दुष्प्रभाव (Advantages and Disadvantages of Ocean Dumping)

समुद्रों और महासगारों में कचरा निस्तारण के कारण इसके कई सारे नकरात्मक प्रभाव उत्पन्न होते है। इसके कारण उत्पन्न होने वाले दुष्प्रभाव काफी हानिकारक होते है और तत्कालिक लाभों से काफी उपर होते है।

लोगों का समुद्र में कचरा निस्तारण करने का मुख्य कारण यह है कि ऐसा करना उनके लिए काफी आसान होता है। कई सारे कारखानों को इस बात का डर रहता है यदि उन्होंने भूमि पर कचरा निस्तारण के लिए जगह बनायी तो कानूनी संस्थाएं उन्हें दंडित करेंगी। इसलिए समुद्र कचरा निस्तारण उनके लिए एक आसान उपाय साबित होता है, जहां वह किसी भी प्रकार के नियम कानून से वह आसानी से बच सकते है।

हालांकि कुछ प्रकार के कचरे समुद्री पर्यावरण के को सुरक्षा प्रदान करने वाले भी साबित होते है। कारों के ढांचे और पुराने समुद्री जहाजों द्वारा उत्पन्न कृत्रिम रीफ समुद्री जीवों के लिए आवास का कार्य करते है। इसलिए मात्र इस तरह के वस्तुएं ही समुद्री पर्यावरण के लिए लाभदायक है क्योंकि यह जैव विविधता को बनाये रखने में काफी सहायक सिद्ध होती है।

ओसियन डंपिंग एक्ट (Ocean Dumping Act)

1972 में अमेरीकी कांग्रेस द्वारा बनाया गया समुद्री संरक्षण अनुसंधान एंव अभयारण्य अधिनियम दो मुख्य बिंदुओं पर जोर देता है, इसके अनुसारः

  1. समुद्र में जानबूझकर किसी प्रकार के कचरे का निस्तारण नही किया जाना चाहिए।
  2. इसके साथ ही इस तरह के किसी कार्य की आज्ञा प्रदान नही की जानी चाहिए।
  • इस संदर्भ में भारत में महासागरीय प्रबंधन मुख्य रूप से केंद्रीय और राज्य सरकारों दोनों के कानूनी अधिनियमन के माध्यम से किया जाता है। इसके लिए 1996 में, "महासागर नियामक क्षेत्र" का एक विशेष प्रस्ताव तैयार किया गया था। हालांकि अभी तक इस मसौदे को अंतिम रूप नही दिया जा सका है और नाही इसका उचित रूप से कार्यान्वन हो सका है।
  • इस तरह के समस्याओं से निपटने और हिंद महासागर में सतत विकास पैदा करने के लिए जुलाई 1981 में महासागर विकास विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ ओसियन डेवलपमेंट – डीओडी ) की स्थापना की गई थी। इस संस्था की मुख्य उद्देश्य सतत और समुद्री पर्यावरण के अनुकूल अन्वेषण करना और देश के सामाजिक-आर्थिक तरक्की को देखते हुए समुद्री जीवों तथा वस्तुओं के शोषण को रोकना था।

निष्कर्ष

पिछले कुछ समय में समुद्री प्रदूषण में कमी देखने को मिली है लेकिन यदि हमनें साथ मिलकर अपनी इस धरती से प्रदूषण को समाप्त करने का कार्य नही किया तो इसके परिणाम काफी विध्वंसक हो सकते है। आज के समय में ग्लोबल वार्मिंग हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुका है और यदि हमनें इसे नियंत्रित करने के उपाय नही किये तो हमारे आने वाली पीढ़ियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसलिए हमें समुद्र में कचरा निस्तारण के इस आसान और पारंपरिक कार्य को बंद करना होगा तथा इसे रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे, जिससे की ओसियन डंपिंग जैसी इस समस्या पर काबू पाये जा सके।