भूमि प्रदूषण

भूमि (मृदा) प्रदूषण क्या है? (साइल पोल्लुशन)

मिट्टी के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में से किसी का भी अवांछनीय परिवर्तन जो पर्यावरण, जीवों और पौधों के लिए हानिकारक हो उसे 'भूमि प्रदूषण' कहा जाता है। यह मानव जीवन, फसल उत्पादन, मिट्टी की गुणवत्ता और उपयोगिता पर विपरीत प्रभाव डालती है। कैडमियम, क्रोमियम, तांबा, कीटनाशक, रासायनिक उर्वरक, जंगली घास, जहरीली गैस आदि कुछ प्रमुख भूमि प्रदूषक हैं। उदाहरण के लिए यदि कीटनाशकों का उपयोग खेती के दौरान किया जाता है तो यह कीड़ों को मारने के अलावा पौधों और मिट्टी को भी प्रभावित करती है।

भूमि (मृदा) प्रदूषण की समस्या

मिट्टी में जहरीले और प्रदूषित सामग्री को मिलाकर भूमि प्रदूषण की समस्या पैदा होती है। अवैध तरीके से मिट्टी में अपशिष्ट पदार्थों को दबाना भूमि के प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है जो मिट्टी की गुणवत्ता और इस पर रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। भूमि प्रदूषण भी मिट्टी द्वारा अवशोषित प्रदूषित जल के माध्यम से फैलता है। कृषि कार्य, कूड़े और गंदगी में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक खाद भी मिट्टी को बुरी तरह प्रदूषित करते हैं। किसी दुर्घटना की वजह से धरती पर खनिज तेल के फ़ैलने से भी मिट्टी दूषित हो गई है। हवा में मौजूद प्रदूषक भी मिट्टी को प्रदूषित करने में योगदान करते हैं। बारिश के पानी के माध्यम से हवा में मौजूद प्रदूषक जमीन पर उतरते हैं जो अंततः मिट्टी को प्रदूषित करते हैं।

मृदा प्रदूषण

मिट्टी पृथ्वी पर मौजूद अति महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है जो जीवित रहने के लिए आवश्यक वनस्पति, अनाज और भोजन आदि अन्य प्राकृतिक पदार्थों का उत्पादन करती है जो मानव जाति और पशुओं के जीवन को चलाने के लिए आवश्यक है। धरती पर उपजाऊ मिट्टी सभी जीवित प्राणियों के भोजन के लिए आवश्यक फसलों के उत्पादन हेतु आवश्यक है। रासायनिक उर्वरक, कीटनाशकों और औद्योगिक प्रवाह के कारण मिट्टी में विषाक्त तत्वों को शामिल करने के कारण भूमि की उर्वरता गंभीर रूप से प्रभावित होती है।

आइए हम आपको कुछ आंकड़ों के बारे में बताते हैं। 1999 से 2000 के बीच दुनिया भर के किसानों ने 1 करोड़ 7 लाख टन रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल किया और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग अब भी बिना किसी बाधा पर चल रहा है। इन जहरीले रसायनों ने मिट्टी को प्रदूषित किया और अंततः खाद्य पदार्थों में प्रवेश कर हमें खतरनाक बीमारियों से संक्रमित किया। यहां तक ​​कि नवजात शिशु भी इस घटना के कारण कई प्रकार की शारीरिक अक्षमतों के साथ पैदा हो रहे हैं।

टैकोमा वाशिंगटन में करीब 1000 वर्ग मील का इलाका जमीन पर वायु प्रदूषकों के गिरने की वजह से चंद मिनटों में प्रदूषित हो गया  इसलिए इस घटना को मिट्टी प्रदूषण के एक गंभीर उदाहरण के रूप में उद्धृत किया गया है।

हवा में उपस्थित हानिकारक रसायन एसिड वर्षा के रूप में आसमान से नीचे आतें हैं और खतरनाक स्तरों पर मिट्टी प्रदूषण को बढ़ाने में योगदान देतें हैं। प्रदूषित मिट्टी का प्रत्यक्ष प्रभाव पुरुषों और जानवरों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। हानिकारक रासायनिक पदार्थों द्वारा प्रदूषित मिट्टी में उत्पादित फसल मानव और अन्य जीवों के शरीर में पहुँच कर कैंसर और अन्य असाध्य रोगों का कारण बनती है।

बड़े पैमाने पर औद्योगिकीकरण के कारण औद्योगिक अपशिष्ट को लगातार अपशिष्ट जल के रूप में छोड़ दिया जाता है। नतीजतन भारी धातु मिट्टी में मिलकर इसे विषाक्त बना देते हैं।

पूरे विश्व के वैज्ञानिकों ने समय-समय पर चेतावनी दी है कि अगर भूमि प्रदूषण की तरफ समय पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो इससे विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। प्रदूषित मिट्टी के कारण फसलों की पैदावार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अन्य देशों के साथ भारत के कई हिस्सों में हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि ने रासायनिक उर्वरकों के निरंतर उपयोग के माध्यम से अपनी उर्वरता खो दी है।

 

भूमि प्रदूषण के प्रकार

भूमि प्रदूषण के दो प्रकार हैं पहला प्राकृतिक और दूसरा मानव निर्मित।

घरेलू और औद्योगिक कचरे से भूमि प्रदूषण

इलेक्ट्रॉनिक सामान, टूटा फर्नीचर, जंक पेपर, पॉलिथीन बैग, प्लास्टिक के डिब्बे, बोतलें, अपशिष्ट जल, अस्पताल से निकला जहरीला कचरा आदि ठोस कचरे के उदाहरण हैं जो मिट्टी को प्रदूषित करते हैं। इस कूड़े में से अधिकांश गैर बायोडिग्रेडेबल है। ये अपशिष्ट मिट्टी की संरचना को लंबे समय तक अवरुद्ध करके प्रभावित करता है क्योंकि ये ठोस अपशिष्ट आसानी से गलते नहीं हैं। वे हजारों सालों तक लैंडफिल साइट पर पड़े रहकर मिट्टी और पर्यावरण को लगातार प्रदूषित करते रहते हैं। मिट्टी के अलावा इन लैंडफिल साइटों के आसपास रहने वाले मनुष्यों और जानवरों को भी इससे काफी नुकसान पहुंचा है।

घरेलू अपशिष्ट, औद्योगिक अपशिष्ट आदि में हानिकारक विषैले अकार्बनिक और जैविक रसायनों के अवशेष शामिल होते हैं। इन अवशेषों में स्ट्रोंटियम, कैडमियम, यूरेनियम, सीसा जैसे विकिरण तत्व पाए जाते हैं जो भूमि की जीवन शक्ति और उर्वरता को प्रभावित करते हैं। फ्लाई ऐश औद्योगिक क्षेत्र के आस-पास प्रदूषण का प्रमुख स्रोत है।

उद्योगों से रसायन और अन्य प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ निकलते हैं जो किसी भी जगह पर फेंक दिए जाते हैं। इस कारण मिट्टी इतनी अधिक प्रदूषित हो जाती है और वृक्ष और पौधे ऐसे हिस्से में भी नहीं बढ़ते।

रासायनिक पदार्थों द्वारा भूमि प्रदूषण

अधिक से अधिक फसलों की खेती करने के लिए रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के उपयोग में वृद्धि हुई है जिससे इन प्रदूषकों ने मिट्टी को जहरीला बना दिया है। कई स्थानों में रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण मिट्टी बेकार हो गई है।

उर्वरकों, कीटनाशकों, फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादक बड़ी मात्रा में ठोस और तरल कचरे का उत्पादन करते हैं। पाइप और नाले से लीक होने के कारण भी भूमि प्रदूषक मिट्टी में फैलते हैं और प्रदूषण फैलाते हैं।

रासायनिक और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में बड़ी मात्रा में कचरे को लगातार जारी किया जाता है और उनके भंडारण और निपटान के लिए उचित व्यवस्था की अनुपस्थिति के कारण ये पदार्थ मिट्टी को प्रदूषित करते हैं।

वाणिज्यिक कृषि में कीटनाशकों का उपयोग अंधाधुंध तरीके से हो रहा है तथा अकार्बनिक रासायनिक उर्वरक का उपयोग भी दिन-प्रतिदिन किया जा रहा है। रासायनिक उर्वरक फॉस्फेट, नाइट्रोजन और अन्य जैविक रासायनिक भूमि के पर्यावरण और भूजल संसाधनों को प्रदूषित कर रहे हैं। सबसे खतरनाक प्रदूषक बायोएक्टिव रसायन हैं जो जलवायु और अन्य मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को नष्ट कर देते है जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आती है। विषाक्त रसायन आहार श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं ताकि वे भोजन के शीर्ष उपभोक्ता तक पहुंच सकें। बायोएक्टिव रसायनों को क्रिप्पिंग डेथ्स भी कहा जाता है। पिछले 30 वर्षों में जैविक रसायनों के उपयोग में 11 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। अकेले भारत में प्रति वर्ष 100,000 टन जैव रसायन का प्रयोग कर रहा है।

 

लगातार वनों की कटाई

पेड़ हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर मनुष्य और अन्य जीवों के लिए ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। इनके अलावा वृक्षारोपण भी भूमि प्रदूषण और क्षरण की रोकथाम में उपयोगी हैं। वृक्षारोपण मृदा की खोई शक्ति को फिर से जीवंत बनाता है। दुर्भाग्य से हम माइनिंग कार्य के अलावा निर्माण के लिए लाखों एकड़ जमीन पर जरूरी लकड़ी के लिए पेड़ काट रहे हैं।

भूमि प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कारक

भूमि प्रदूषण के लिए ऐसे कई कारक हैं जो जिम्मेदार हैं जिनमें प्रमुख है रासायनिक पदार्थ, कीटनाशक, सड़कों पर फैला हुआ तेल और औद्योगिक कचरा आदि। कृषि कार्यों में उपयोग कीटनाशक हवा में मिल जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप धरती पर अम्लीय वर्षा होती है। जंगलों के तेजी से क्षरण के कारण दुनिया में प्रदूषण से मिट्टी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

भूमि प्रदूषण के लिए निम्नलिखित जिम्मेदार कारक हैं:

  • खनिज तेल और तेल कुओं में लगातार ड्रिलिंग।
  • आवश्यक खनिजों को प्राप्त करने के लिए खनन गतिविधियों को भारी उद्योग चलाने की जरूरत है। खनन से निकले मलबे को पास के स्थान पर रखा जाता है। पत्थर, लोहा, अयस्क, अभ्रक, तांबे आदि जैसे खनिजों की खुदाई से निकले मलबे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को समाप्त कर देते है। बारिश के समय पानी के साथ मलबा बह कर बहुत दूर तक फ़ैल जाता है और मिट्टी को प्रदूषित करता है।
  • खनन गतिविधियों के दौरान होने वाली दुर्घटनाएं जैसे कि तेल के कुएं में किसी प्रकार की आकस्मिक घटना, भूमि पर तेल का फैलना या यूरेनियम आदि प्राप्त करने के लिए खनन गतिविधियों के दौरान कोई हादसा।
  • भूमिगत तेल भंडारण के लिए बने टैंकों द्वारा रिफाइनिंग संयंत्रों को तेल संचारित करने के लिए पाइप से होता रिसाव।
  • अम्लीय वर्षा हवा में खतरनाक प्रदूषकों का स्तर बढ़ाती है।
  • कृषि कार्यों के दौरान अधिक फसलों के लिए रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करना।
  • मिट्टी में खतरनाक रसायनों को मिश्रित करने के कारण औद्योगिक दुर्घटनाएं।
  • सड़कें और स्थान जहां मलबा फ़ैला हुआ है।
  • मिट्टी में दूषित पानी का निर्जलीकरण।
  • कचरे, तेल और ईंधन को मिट्टी में मिलाना।
  • परमाणु कचरे का निपटान।
  • लैंडफिल और अवैध डंपिंग स्पॉट्स का निर्माण।
  • कोयला जलाने के बाद बची हुई राख़।
  • इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट उत्पादन की बड़ी मात्रा।

भूमि प्रदूषण के प्रभाव

प्रदूषक मिट्टी में मिलकर इसे विषाक्त बनाते हैं जिससे मिट्टी के प्राकृतिक रूप में रासायनिक परिवर्तन होने लगते हैं। मिट्टी को प्रदूषित करके एक तरह से हम खाद्य श्रृंखला की नींव को नष्ट कर रहे हैं। प्रदूषित मिट्टी बारिश के पानी के माध्यम से नदियों और पानी के अन्य स्रोतों में पीने के पानी को दूषित करती है। रासायनिक उर्वरकों और जैव रासायनिक रसायनों के कारण पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में एक असंतुलन पैदा होता है।

भूमि प्रदूषण: वैश्विक परिदृश्य

रूस, चीन और भारत दुनिया के ऐसे देशों में से हैं जहां जहरीली जमीन का प्रदूषण तेजी से फैल रहा है। यूक्रेन में चेरनोबिल को दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा दुर्घटना के लिए याद किया जाता है। परमाणु ऊर्जा दुर्घटनाओं के बाद प्रदूषक भूमि में प्रवेश करते हैं जिससे लाखों एकड़ कृषि भूमि की जमीन क्षतिग्रस्त होती हैं। दक्षिणी अफ्रीकी देश ज़ाम्बिया में कबाई की जमीन 1987 में भारी धातुओं के प्रदूषण से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई थी। पेरू में ला ओरोया नमक जगह में सीसा, तांबे और जस्ता के अत्यधिक खनन के कारण मिट्टी प्रदूषित हुई थी।

मिट्टी में आर्सेनिक जैसे विषाक्त रसायनों के अत्यधिक होने, कोयला खनन और प्रदूषण की वजह से चीन की लिनफ़ेन सिटी की जमीन प्रदूषित हो गई है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रोमाइट खानों की वजह से भारत में ओडिशा के सुकिंडा नमक जगह में भूमि प्रदूषण के कारण इस शहर के लोगों की जान खतरे में पड़ गई है। कीटनाशक मानव स्वास्थ्य के लिए जहरीले होते हैं। पेट्रोकेमिकल्स, कीटनाशकों, फार्मास्यूटिकल्स जैसे रसायनों के अत्यधिक उत्पादन के कारण गुजरात के वापी शहर में मिट्टी जहरीली हो गई है।

जनवरी 2011 में उत्तराखंड में किए गए एक अध्ययन में यह पता चला है कि एक साल में यूरिया की खपत में ढाई गुना बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले जहां खेतों में यूरिया के औसतन चार बैग इस्तेमाल किए जाते थे वहीं अब 10 बैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। पोटाश और फास्फोरस का उपयोग कम हो रहा है और यूरिया का उपयोग बढ़ रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक यह ऊपरी मिट्टी की सतह में हुई क्षति के कारण हो रहा है। पहाड़ी जिलों में मिट्टी की ऊपरी सतह की क्षति वनों की कटाई के कारण तेजी से बढ़ रही है। यह बारिश के नुकसान के लिए अग्रणी है। यूरिया की बढ़ती उपयोग के साथ मिट्टी के स्वभाव में गड़बड़ हो रही है। असंतुलित खाद के उपयोग से मिट्टी रोगग्रस्त हो जाती है।

मानव गतिविधियों के कारण मिट्टी का क्षरण और मिट्टी प्रदूषण के रूप में एक गंभीर समस्या पाई गई है। भारत सरकार के वन मंत्रालय का अनुमान है कि भारत की कुल भूमि का लगभग 57% इन कारणों की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया है। एक अनुमान के मुताबिक भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 47 प्रतिशत कृषि पर खेती की जाती है जिसमें से लगभग 56-57 प्रतिशत भाग पर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति में कमी देखी गई है। इसी तरह कुल वन क्षेत्रों में 55 प्रतिशत से कम पेड़ों का छाया क्षेत्र 40 प्रतिशत से कम है। आंकड़े स्पष्ट रूप से स्थिति का परिमाण दिखाते हैं।

भूमि प्रदूषण को रोकने के उपाय

भूमि प्रदूषण को कम करने और पूरी तरह से इसे रोकने के लिए कड़े नियम बनाने की आवश्यकता है। भूमि प्रदूषण के दूरगामी प्रभावों को देखते हुए इस पर तुरंत प्रभाव से नियंत्रण लगाना आवश्यक है। पशु साम्राज्य और पौधों की दुनिया का अस्तित्व मिट्टी पर आधारित है। मिट्टी किसानों की संपत्ति है इसकी संपत्तियों का अभाव न केवल किसानों को नुकसान पहुंचाता है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, मानव स्वास्थ्य, जीवों और वनस्पतियों को भी नुकसान पहुंचाता है।

दुनिया भर में संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों ने मजबूत नियामकों के विकास के माध्यम से भूमि प्रदूषण को नियंत्रित करने में सफलता पाई है हालांकि भारत और चीन जैसे कई बड़े एशियाई देशों ने इस दिशा में कोई बड़ी प्रगति हासिल नहीं की है।

गौरतलब है कि अमरीका में कॉम्प्रेहेंसिव एनवायर्नमेंटल रिस्पांस कंपनसेशन एंड लायबिलिटी एक्ट (CERCLA) ने मिट्टी के उपयोग के लिए कई नियमों की स्थापना की है जिसके कारण वहां से हजारों संक्रमित साइटें साफ हो गई हैं। इंग्लैंड में मिट्टी के प्रदूषण को रोकने के लिए कई नियम बनाए गए हैं जिसके द्वारा भूमि के प्रदूषण की समस्या का सामना करने वाले स्थान के लोग इस संबंध में शिक्षित हुए हैं। निश्चित रूप से मिट्टी प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियमों को अपनाने की आवश्यकता है जो निम्नानुसार हैं:

  1. घरेलू कचरे का नियंत्रण

घरेलू कचरा एकत्र होने के कारण भूमि प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके लिए एक अच्छी योजना बनाकर रणनीति के अनुसार काम करने की आवश्यकता है। घरेलू कचरे में अधिकांश भोजन जैविक कचरा है। इसे नियंत्रित करने के लिए हमें फ्रिज में हमारे भोजन को अधिक कुशलतापूर्वक स्टोर करना होगा। इस प्रकार हम भोजन की बर्बादी को कम कर सकते हैं और साथ ही जैविक अपशिष्ट के उत्पादन को कम कर सकते हैं तथा इन हानिकारक पदार्थों को मिट्टी में आने से रोकते हैं।

  1. औद्योगिक अपशिष्ट के उचित निपटान

औद्योगिक प्रदूषण में बड़ी मात्रा में रासायनिक प्रदूषक पाए जाते हैं जो मिट्टी को प्रदूषित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। औद्योगिक कचरे के उचित निपटान के लिए सख्त नियम बनाने और उनका कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता है। कारखानों के कचरे को शुद्ध करने के लिए पहले पुरीफयिंग प्लांट्स में

भेजना चाहिए और उन पर उचित करवाई करने के बाद उन्हें ज़मीन में दबा देना चाहिए।

  1. रीसाइक्लिंग और पुनः प्रयोग

मिट्टी के प्रदूषकों के उत्पादन को कम करने के लिए यह आवश्यक है कि हम वस्तुओं के रीसाइक्लिंग और पुन: उपयोग पर ध्यान दें। उदाहरण के लिए यदि आप कचरे में अपने घर का फर्नीचर फेंकना चाहते हैं तो आपको पहले यह देखना चाहिए किस प्रकार आप उस फर्नीचर को संशोधित कर उनका पुन: उपयोग कर सकते हैं।

फर्नीचर की तरह हम अपने घर में कई अपशिष्ट उत्पादों को रीसायकल कर सकते हैं और कचरे के उत्पादन को कम कर भूमि प्रदूषण को रोक सकते हैं। घरेलू अपशिष्ट को लैंडफिल साइटों में फेंकने से हम अनजाने में मिट्टी में कार्बन की मात्रा को बढ़ाते हैं जो भूमि प्रदूषण का एक प्रमुख कारक है। मिट्टी की सुरक्षा के लिए रीसाइक्लिंग और पुनः उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है।

अन्य उपाय

  1. जीवन में रसायनों के उपयोग को सीमित करें और एकीकृत कीट प्रबंधन को अपनाए।
  2. रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर एकीकृत संयंत्र पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाकर मिट्टी के मौलिक गुणों को मजबूत किया जाना चाहिए।
  3. लवणता युक्त मिट्टी के सुधार के लिए वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए जिप्सम और पाइराइट जैसे रसायनों का उपयोग करना
  4. खेतों में जल निकासी को दूर करने के लिए जल निकासी की व्यवस्था बहुत जरूरी है।
  5. वनों के कटाई को प्रतिबंधित करके मृदा क्षरण को रोका जाना चाहिए और मिटटी के पोषक तत्वों की रक्षा के लिए मिट्टी संरक्षण प्रणालियों को अपनाया जाना चाहिए।
  6. ज़ोनिंग सहित जमीन के इस्तेमाल का नियम भूमि क्षरण की समस्या को कम कर सकता है।
  7. बाढ़ से नष्ट हुई भूमि की रक्षा के लिए आवश्यक योजनाओं के निर्माण और कार्यान्वयन जरूरी है।
  8. भूमि उपयोग और फसल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना अत्यंत जरूरी है।

निष्कर्ष

जलवायु की तरह मिट्टी भी एक प्राकृतिक संसाधन है जो प्राणियों और जानवरों को भोजन तथा जीवन प्रदान करती है। भूमि का योगदान जल चक्र, नाइट्रोजन चक्र, ऊर्जा चक्र आदि को व्यवस्थित करना है। जहां तक ​​मानव गतिविधियों का सवाल है भूमि कटाई के समय तक सभी आर्थिक गतिविधियों का आधार है।

जैसा कि हम सब जानते है भोजन पृथ्वी से उत्पन्न होता है जो मनुष्य की बुनियादी आवश्यकता है। इसलिए इसकी पवित्रता बहुत आवश्यक हैं। मनुष्य अपनी प्राकृतिक संसाधनों से इस प्राकृतिक संसाधन को प्रदूषित कर रहा है जो मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित कर रहा है। बढ़ती आबादी के लिए अधिक अनाज का उत्पादन करने के लिए बड़े पैमाने पर रासायनिक उर्वरक का उपयोग किया जा रहा है। इस प्रवृत्ति को रोकना अति आवश्यक है अन्यथा हम अगली पीढ़ी के उपयोग के लिए मिट्टी की उर्वरता को पूरी तरह से खो देंगे और विभिन्न प्राणियों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। भूमि प्रदूषण के दूरगामी परिणाम इतने खतरनाक हैं कि मानव सभ्यता का भविष्य खतरे में पड़ता दिख रहा है।