शहरीकरणः अर्थ, कारण, प्रभाव और उपाय (Urbanization: Meaning, Causes, Effects and Solutions)

शहरीकरण के अर्थ और प्रभाव (Meaning and Implications of Urbanization)

आज के समय में विकासशील और विकसित देशों में शहरीकरण काफी आम हो गया है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें लोग अच्छे स्वास्थ्य, शिक्षा, अच्छी साफ-सफाई, अच्छे निवास और व्यवसायिक अवसरों के तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन करते है। शहरीकरण एक क्रमिक प्रकिया है, जो कई सारी आर्थिक, राजनैतिक और भौगोलिक कारणों पर निर्भर करता है।

सामान्य तौर से शहरीकरण शहरों और गाँवों के उस वृद्धि को दिखाता है, जिसमें लोग ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों के ओर अच्छी जीवन के तलाश में जाते है। यहीं कारण है कि आज के समय में विश्व भर में शहरी जनसंख्या में इजाफा होता जा रहा है। इसलिए शहरीकरण को कस्बों और शहरों में लोगों की प्रगतिशील वृद्धि के रुप में भी देखा जा सकता है।

शहरीकरण आज के दौर विश्व भर में आर्थिक वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन चुका है क्योंकि शहरीकरण और आर्थिक वृद्धि दोनो एकदूसरे से परस्पर जुड़े हुए है। किसी देश की आर्थिक तरक्की उस देश के प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि को दर्शाती है। शहरीकरण की प्रक्रिया कुछ औद्योगिक शहरी केंद्रों के क्रमिक विकास के साथ-साथ ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की बची हुई आबादी के स्थांनातरण पर निर्भर करती है।

सामाजिक और आर्थिक दबावों के कारण, पिछड़े क्षेत्रों के लोग नौकरियों की तलाश में शहरी क्षेत्रों की ओर बढ़ते हैं क्योंकि नए स्थापित उद्योग तथा अन्य सहायक गतिविधियां शहरों में प्रवास करने वाले लोगों के लिए अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। औद्योगिक विकास द्वारा शहरीकरण की गति में काफी तेजी आई है, लेकिन जब देश की कुल जनसंख्या शहरी आबादी का अनुपात बहुत अधिक हो जाता है तो कुछ समय बाद धीरे-धीरे इसमें गिरावट शुरू हो जाती है ।

शहरीकरण का कारण (Causes of Urbanization)

शहरीकरण का मुख्य कारण लोगो का शहरो और कस्बो की तरफ तेजी से किया जाना वाला पलायन है क्योंकि लोगो का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र कठिनाइयों और चुनौतियों से परिपूर्ण होते है। इसलिए जब भी लोग अधिक संख्या में शहरों और कस्बों के तरफ पलायन करते है तो यह शहरीकरण की घटना को जन्म देता है।

हम शहरीकरण की घटना को निम्न वर्गों में बांट सकते हैः

  • शहरीकरणः पुराने कृषक पेशों से अकृषक पेशों के तरफ जाने का काफी पुराना चलन रहा है। पिछले कुछ समयों में इसमें काफी वृद्धि हुई है और लोग शहरों के ओर काफी तेजी से आकर्षित हो रहे है क्योंकि लोगों को शहरों में हो रही औद्योगिक क्रांति के कारण रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होते है। इसके अलावा लोगो को औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलने से उन्हें आर्थिक तरक्की भी प्राप्त होती है।
  • व्यावसायीकरणः व्यापार भी शहरीकरण में एक अहम भूमिका निभाता है। आज के दौर में वस्तुओं के ढुलाई, सेवा और व्यावसायिक लेनदेन में काफी वृद्धि हुई है, जिसके कारण कई आधुनिक विपणन संस्थाओ और लेनदेन के तरीकों की उत्पत्ति हुई है। शहरों और कस्बों की संख्या में हो रही वृद्धि में इसका भी एक अहम योगदान है। लोगों में इस बात की एक सामान्य अवधारणा होती है कि व्यावसायीकरण और व्यापार के कारण शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों के अपेक्षा अधिक मौके उपलब्ध होते है।
  • सामाजिक लाभः इसके अलावा शहरों और कस्बों में रहने के कई सारे सामाजिक लाभ है क्योंकि शहरों में रहने वाले लोग अच्छी शिक्षा, साफ-सफाई, घर, स्वास्थ्य सुविधा, मनोरंजन और अच्छे रहन-सहन के स्तर की आसानी से प्राप्ति कर पाते है। इन्हीं कारणों से ज्यादे से ज्यादे संख्या में लोग शहरों और कस्बों के तरफ पलायन कर रहे है ताकि उन्हें यह सब सुविधाएं प्राप्त हो सके जो वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में नही उपलब्ध है।
  • रोजगार अवसरः शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध प्रचुर रोजगार संभावनाए भी लोगो को शहरों के तरफ आने के लिए प्रोत्साहित करती है। जिसके वजह से लोग गांवो से बड़े शहरों का रुख करते है क्योंकि वहां उन्हें अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, यातायात सुविधा, मनोरंजन और रोजगार की सुविधाएं शहरी क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
  • आधुनिकीकरण और बदली हुआ रहन-सहनः आधुनिकीकरण और आज के समय में तेजी से हो रहे परिवर्तन के कारण भी शहरीकरण में तेजी से इजाफा हुआ है। आज के समय में शहरी क्षेत्र और भी तेजी से तकनीकी को अपनाते जा रहे है और वहां संचार, आधारिक संरचना, चिकित्सा सुविधाएं, ज्ञान, उदारीकरण और सामाजिक सुविधाओं में दिन-प्रतिदिन काफी तेजी से वृद्धि होती जा रही है। इसके अलावा कई लोगों का यह मानना होता है कि शहरों में वह अच्छा जीवन व्यतीत कर सकते है। जिसके कारण लोग दिन-प्रतिदिन शहरों के ओर पलायन करते जा रहे है और शहरों का तेजी से विकास होता जा रहा है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों का शहरीकरणः कई सारे जगहों पर खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों या अन्य खेती की गतिविधियों के कारण और भी तेजी से तरक्की हो रही है। यह एक जाना-माना तथ्य है कि उत्पादकता बढ़ने के कारण आर्थिक उन्नति और विकास दर में भी वृद्धि होती है और रोजगार के नये अवसर उपलब्ध होते है। इसके कारण तरक्की के कई सारे अवसर उपलब्ध होते है जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति अच्छी होती है।

 

शहरीकरण का प्रभाव (Effects of Urbanization)

शहरीकरण के सकरात्मक और नकरात्मक दोनो तरह के प्रभाव हो सकते है-

सकरात्मक प्रभाव (Positive Effects)

1.अच्छा रहन-सहन स्तर

शहरीकरण के द्वारा रोजगार के नये अवसर पैदा होते है, जिससे तकनीकी और आधारिक संरचनाओं में वृद्धि, यातायात और संचार सुविधा में बेहतरी जैसी सुविधाएं प्राप्त होती है और इसके अलावा उन्हें गुणवत्ता युक्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं और रहन-सहन भी मिलता है।

2.अच्छे बाजार की संभावना

एक शहर में रहने के कारण जनसंख्या स्थिति के कारण हमें कई तरह के बाजार उपलब्ध हो जाते है। जिसके कारण हमें कई तरह के खरीददारी अवसर प्राप्त होते है जो हमें ग्रामीण क्षेत्रों में नही मिल पाते है। कई सारे शहरों में खरीददारी के लिए शापिंग माल और अन्य जगहें होती है जो देर रात तक लोगो के मनोरंजन, खाने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए खुली रहती है। हालांकि इनमें से कई सारी दुकानें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समूहो द्वारा चलायी जाती है, जो छोटे व्यवसायिकों के लिए इन क्षेत्रों में तरक्की पाने को और भी मुश्किल बना देते है।

3.अच्छी सुविधा

शहरी क्षेत्र कई तरह के सुविधाएं प्रदान करते है जो छोटे शहरों के दुकानों द्वारा नही प्रदान किया जा सकता है। जिसमें सार्वजनिक परिवहन प्रणाली, पानी और जल निकासी सुविधा कई तरह की शैक्षिक तथा मनोरंजक सुविधाएं शामिल है।

नकरात्मक प्रभाव (Negative Effects)

1.आवास की समस्याः शहरों के प्रति बढ़ते आकर्षण के कारण शहरीकरण में तेजी से वृद्धि होती जा रही है, बीते कुछ वर्षों शहरी जनसंख्या में काफी ज्यादे मात्रा में वृद्धि दर्ज की गई है। जिससे शहरों में आवास की एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शहरों में इतनी ज्यादे आबादी के आवास व्यवस्था के लिए जगह नही है। इसके साथ ही इस समस्या में सार्वजनिक संसाधनो की कमी, गरीबी, बेरोजगारी और महंगे निर्माण उत्पादों की भी अहम भूमिका है।

2.ज्यादे भीड़-भाड़ः बड़े शहरों में बहुत ही कम जगह में काफी सारे लोग रहते है। यहीं कारण है कि इन शहरों में जनसंख्या की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और इसके अलावा भी कई सारे लोग शहरों तथा कस्बों में अच्छे जीवन के तलाश में आते है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के लोगो में हमेशा शहरी क्षेत्रों में बसने की चाह होती है, जो उन्हें तंग जगहों पर रहने के लिए मजबूर कर देती है।

 

3.बेरोजगारीः शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की समस्या काफी ज्यादे है, खासतौर से पड़े-लिखे लोगो में यह काफी ज्यादे है। एक अनुमान के अनुसार, आधे से ज्यादे बेरोजगार युवा महानगरों में रहते है। इसका कारण लोगो का ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों के तरफ पलायन है, जो शहरों में दिन-प्रतिदिन बढ़ती बेरोजगारी का कारण बनता जा रहा है क्योंकि भले ही शहरों में आय अधिक पर वहां रहने का खर्च भी काफी ज्यादे है।

4.झुग्गी-झोपड़ियों का विकासः शहरी क्षेत्रों में रहने की कीमत काफी ज्यादे है। बड़े शहरो में लोग अपने रहने की व्यवस्था करने में असमर्थ होते है। जिसके कारण वहां लोग भारी मात्रा में अवैध झुग्गी-झोपड़ीयों का निर्माण कर लेते है। ज्यादेतर इन क्षेत्रों में गैरकानूनी रुप से बसे हुए लोग रहते है, जो कई सारी संलिप्त गतिविधियों में शामिल होते।

5.पानी की कमीः आज हम उस दौर में पहुच चुके है, जहां भारत के हर शहर में आवश्यकतानुसार पानी की आपूर्ति नही हो पा रही है। कई सारे शहरों में लोग महानगर पालिका से आधे दिन तक ही पानी पा रहे है और वह भी नियमित रुप से ना होकर हर दूसरे दिन। सूखे के दिनों में यह समस्या और भी भयावह हो जाती है, जबकि इस समय उन्हें पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। इन दिनों लोग काफी ज्यादे मात्रा में पानी के संकट से जूझते है।

6.साफ-सफाई की समस्याः क्योंकि शहरी क्षेत्रों में आबादी काफी तेजी बढ़ती जा रही है, इसलिए वहां सीवेज सुविधाओं की अनुपलब्धता आम हो गयी और संसाधनो की समस्या भी खड़ी हो गई है। इसके कारण से तमाम जहगों पर साफ-सफाई से जुड़ी तमाम तरह की समस्या उत्पन्न हो गई है। इन सीवेज समस्याओं के कारण टाईफायड, पेचिश, प्लेग, डाइहरिया और मृत्यु भी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो गई है। इसके अलावा शहरों में अधिक मात्रा में बढ़ती भीड़-भाड़ के कारण पानी की कमी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

7.खराब स्वास्थ्यः शहरी क्षेत्रों में गरीब वर्ग का स्वास्थ्य मध्यम और धनी वर्गों के अपेक्षा काफी खराब है। संगठित शहरी क्षेत्रों में उनकी सामाजिक, आर्थिक और रहने की स्थितियों के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं का उचित उपयोग नही मिल पाता है। इसके अलावा झुग्गी झोपड़ियों वाले क्षेत्रों में खराब स्वच्छता और अपर्याप्त जल आपूर्ति का अनुभव होता है जो उनकी आबादी में संक्रमणीय बीमारियों को बढ़ाता है। जिसमें एलर्जी, अस्थमा, बांझपन, खाद्य विषाक्तता, कैंसर और यहां तक कि असमय मृत्यु जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण जैसी खराब पर्यावरणीय स्थितियों के कारण होती हैं।

8.यातायात की समस्याः इसके अलावा शहरों में रहने वाले लोगों को परिवहन प्रणाली के उपयोग में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जब अधिक संख्या में लोग कस्बों और शहरों में जाते हैं तब जनसंख्या वृद्धि के कारण लोगों की काम करने के लिए ऑटोमोबाइल पर निर्भरता बढ़ जाती है जिसके परिणामस्वरूप अक्सर यातायात की समस्याएं और वायु प्रदूषण होता है।

अधिक संख्या में लोगो के द्वारा वाहनों के उपयोग के कारण शहरों में वायु प्रदूषण काफी मात्रा में बढ़ जाती है। शहरी क्षेत्रों में, अधिकतर लोग काम पर जाने के लिए अधिकतर गाड़ी का उपयोग करते हैं और इससे एक गंभीर यातायात समस्या पैदा होती है। दिन-प्रतिदिन जैसे-जैसे शहर आयाम में बढ़ते जा रहे हैं, लोग अपनी जरूरतों को पुरी करने के लिए बाजार जाते हैं जो अंततः यातायात की भीड़ को बढ़ाने का कारण बनता है।

9.कचरा निस्तारणः जिस तरह से भारतीय शहरों की जनसंख्या और आकार तेजी से बढ़ रहे हैं, कचरा निस्तारण की समस्या भी उतने ही खतरनाक स्तर बढ़ती जा रही है। बड़े शहरों से निकलने वाली कचरे की बड़ी मात्रा एक आम आदमी में कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है। कई जगहों पर कचरे का निपटान करने के लिए उचित व्यवस्था नहीं होती है और मौजूदा लैंडफिल पहले से ही भरे हुए हैं।

यह लैंडफिल कचरा चूहों और मख्खियों को आमंत्रण देने वाले कचरे से भरा हुआ होता है, जो कई तरह की संक्रामक बीमारियों का कारण बनते है । ऐसे कचरे और कच्चे नालियों के पास रहने वाले लोग आसानी से मलेरिया, प्लेग, जौनिस, दस्त, टाइफाइड जैसे रोगों का शिकार हो जाते है।

10.बढ़ते हुए अपराधः बड़े शहरों के कई क्षेत्रों में संसाधनों की कमी, अतिसंवेदनशीलता, गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक सेवाओं तथा शैक्षिक सुविधाओं की कमी जैसी कुछ प्रमुख समस्याएं हैं। जोकि अक्सर बर्बरता, अपराध, हिंसा, और नशीली दवाओं के दुरुपयोग सहित जैसी कई सामाजिक समस्याओं का कारण बनती है। वास्तव में, शहरी क्षेत्रों के आसपास के इलाकों में हत्या, बलात्कार, अपहरण, दंगों, हमले, चोरी, अपहरण जैसे सामाजिक अपराध ज्यादे होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में गरीबी से जुड़े अपराध भी सबसे ज्यादा हैं।

शहरी अपराध से संबंधित सभी ऐसे कार्य आम तौर पर शहरों और कस्बों की शांति और व्यवस्था को प्रभावित करते है। शहरी अपराध की समस्या इन दिनों अधिक जटिल हो रही है क्योंकि अपराधियों को अक्सर राजनेताओं, नौकरशाहों और शहरी समाज के अभिजात वर्गों से सुरक्षा मिलती है। इनमें से कई सारे अपराधी अपने धन और बाहुबल का इस्तेमाल करके उच्च पदो पर भी पहुंच गये हैं।

शहरीकरण की समस्याओं का समाधान (Solutions to Urbanization Challenges)

शहरीकरण आज के समय में विश्व भर के लिए एक समस्या बन चुका है। कई प्रमुख चुनौतियों के बावजूद भी सरकारें और लोग इस समस्या का कोई पूर्ण हल नही निकाल पाये है। इन्हीं समस्याओं के कुछ समाधानों के विषय में नीचे चर्चा की गयी है।

  • आज के समय में केंद्र सरकार को सतत शहरीकरण के अवधारणा को बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही हमें राष्ट्रीय शहरीकरण नीती और शहरी योजना, संस्थागत सुधार, वित्तिय पोषण के विषय में सोचने की आवश्यकता है।
  • भूमि उपयोग और अंतर सरकारी हस्तांतरण शहरों में जाने वाले प्रवासी श्रमिकों की संख्या के अनुरूप किया जाना चाहिए। शहरीकरण के पक्ष में आवास पंजीकरण नीतियों को सुधारने के लिए स्थानीय सरकारों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • विकास तकनीकों के साथ सतत और पर्यावरणीय रूप से अनुकूल शहरों के निर्माण के लिए कानून पारित किए जाने चाहिए ताकि लोगों को शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त आवास मिल सके। प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों को संरक्षित करना, निजी निवेशों को प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करना और अधिक नौकरी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जिससे हम पर्यटन प्रचार और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग करके शहरी आबादी के लिए और भी अधिक नौकरियां पैदा की जा सकें।
  • शहरी क्षेत्रों में प्रमुख हितधारकों को जनसंख्या वृद्धि की उच्च दर को कम करने में मदद के लिए प्रभावी स्वास्थ्य क्लीनिक और परिवार नियोजन के लिए अभियान और परामर्श प्रदान करना होगा। पारिवारिक नियोजन विकल्पों की ओर उन्मुख चिकित्सा स्वास्थ्य क्लीनिकों को पूरे शहरी क्षेत्र में बीमारियों और जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सुलभ किया जाना चाहिए।
  • उद्योग और निर्माण कार्य ज्यादातर शहरों से जुड़े हुए हैं। ऐसे उद्योगों की उपस्थिति स्थानीय रूप से शहरों को अधिक मात्रा में उत्पादित उपभोक्ता उत्पाद, रोजगार के अवसर और अतिरिक्त कर प्रदान कर सकती है। दूसरी ओर, उद्योग और निर्माण की उपस्थिति शहरी केंद्रों में परिवहन और पानी और वायु गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं में जोड़ सकती है।
  • पर्यावरण संरक्षण के आधार पर अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए शहरी संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। पर्यावरण अभियान, प्रदूषण प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, हरी सार्वजनिक परिवहन, और जल पुनर्चक्रण और पुनर्विचार की देखभाल ठीक से की जानी चाहिए।
  • शहरी क्षेत्रों के प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शहरी क्षेत्रों के लोगों को भोजन, स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और स्वच्छता जैसी पर्याप्त आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। इसके साथ ही सारी आबादी को रोजगार के अवसर और धन अर्जन के अवसर भी उपलब्ध होने चाहिए, ताकि लोग अधिक सेवाओं का आनंद ले सके और इसका समयानुसार भुगतान कर सकें।
  • अंत में, शहरीकरण की प्रक्रिया में सामाजिक प्रबंधन के साथ-साथ सार्वजनिक शासन में सुधार किया जाना चाहिए।

भारत में शहरीकरण (Urbanization in India)

दूसरे ही देशों के तरह भारत में भी काफी तेजी से शहरीकरण हो रहा है। भारत में आजादी के बाद एक मिश्रित अर्थव्यवस्था होने के कारण शहरीकरण काफी तेजी से हुआ है। जिससे यहां सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनो में ही काफी तेजी से विकास हुआ है।

ग्रामीण और शहरी जनसंख्या की गणना से यह पता चलता है कि भारत में काफी तेजी से शहरीकरण हुआ है, इसमें सबसे ज्यादे तेजी 21 शताब्दी के अंत में देखने को मिली।

भारत के कुछ हिस्सें में काफी तेजी और वृहद स्तर पर औद्योगिकरण हुआ है। जिससे इन क्षेत्रों में काफी तेजी से विकास हुआ है और रोजगार के मौके उपलब्ध हुए है, यहीं कारण है इन क्षेत्रों की ओर लोग काफी तेजी से पलायन कर रहे है।

भारत में शहरीकरण की तीव्रता 2007 से 2017 तक के बीच में काफी बढ़ गयी है। वर्तमान में भारत की लगभग 34% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है और 2011 की जनगणना के बाद से इसमें लगभग 3% की वृद्धि दर्ज की गई है जो हमारे देश में शहरीकरण की गति में हो रही उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है। वास्तव में, प्रति व्यक्ति आय के स्तर और भारत में शहरीकरण की गति के बीच एक अच्छा सहसंबंध है। कुल आबादी के लिए शहरी आबादी के अनुपात और प्रति व्यक्ति आय का स्तर लगभग 0.5 है।

दुर्भाग्य से इस तेजी से हो रहे शहरीकरण से भी भारत में बेरोजगारी का स्तर घट नही रहा है क्योंकि यहां शहरी आबादी और रोजगार के मध्य का अंतर .18 है जोकि काफी ज्यादे है। इसके अलावा इसके बीच के नकरात्मक स्तर में कमी आई है पर वह काफी कम है और लोगो कों आबादी के अनुसार रोजगार के अवसर नही उपलब्ध हो पा रहे है।

शहरीकरण के आकड़े (Urbanization Statistics)

यह अनुमान लगाया गया है कि दुनिया की आधे से अधिक आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है। हाल के सर्वेक्षणों के अनुसार दुनिया की लगभग 55% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है जबकि 1950 में,  यह केवल 30% थी। यह भी भविष्यवाणी की गई है कि 2050 तक विश्व की लगभग 68% जनसंख्या शहरों में निवास करने वाली हो जायेगी।

आज के समय में सबसे अधिक शहरीकृत श्रेणी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में उत्तरी अमेरिका (82%), लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई (81%), यूरोप (74%) और ओशिनिया (68%) शामिल हैं। एशिया में शहरीकरण का स्तर अभी भी लगभग 50% कम है। दूसरी तरफ, अफ्रीका में अभी भी ग्रामीणों (57%) के रूप में आधी से अधिक रहती है,  जिसमें शहरी क्षेत्रों में रहने वाली अपनी आबादी का केवल 43% हिस्सा है।

1950 में दुनिया की शहरी आबादी तेजी से 751 मिलियन से बढ़कर 2018 में 4.2 अरब हो गई है। एशिया दुनिया की की  54% और यूरोप और अफ्रीका (13%) शहरी आबादी का घर बन चुका है। शहरी आबादी में वृद्धि से समग्र आबादी में वृद्धि भी वृद्धि होती है जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार होता है। इन दोनों क्षेत्रों में 2050 तक दुनिया की शहरी आबादी में 2.5 बिलियन लोगों के जुड़ने का अनुमान है, जिसमें एशिया और अफ्रीका में लगभग 90% हिस्सा होगा।

निष्कर्ष

शहरीकरण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में निवास, पर्यावरण और विकास की स्थितियों को महत्वपूर्ण रुप से प्रभावित करता है, जोकि मानव परिदृश्य से काफी आवश्यक है। शहरीकरण के लिए सतत विकास मुख्य रूप से शहरी विकास के सफल प्रबंधन पर निर्भर करता है, खासतौर पर निम्न आय और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में जहां अगले कुछ दशकों में सबसे तेजी से शहरीकरण होने की संभावना है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच संबंधों को मजबूत और विकसित करने के लिए शहरी और ग्रामीण निवासियों दोनों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए एकीकृत नीतियों की आवश्यकता है।

वर्तमान परिदृश्य के तहत, शहरों में सतत विकास की आवश्यकता है,  यानी आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण के तीन आयामों के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। यह सुनिश्चित करने के लिए उचित नीतियों की आवश्यकता है कि शहरीकरण के लाभ ठीक से साझा किए जाएं। बुनियादी ढांचे और सामाजिक सेवाओं का उपयोग करने के लिए किसी को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

शहरी विकास के सभी प्रमुख कार्यक्रम अधिकांश रुप से संसाधनो से संकट से ग्रस्त हैं। इन योजनाओं के शुरुआत से ही इनका मुख्य उद्देश्य शहरी विकास का कम रहा है परन्तु शहरी क्षेत्र में कुल योजना व्यय का केवल 3-4 प्रतिशत ही विकास सेवाओं और संसाधनो की आपूर्ति के लिए आवंटित किया जाता है।

इसके साथ शहरों में गरीबों के आवास, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, अच्छी नौकरियों और सुरक्षा के लिए कार्य किया जाना चाहिए, ताकि उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके। वर्तमान में दुनिया के कई सारे देश अपने शहरों का आधुनिकीकरण करने में सक्षम नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि सावधानी और व्यवस्थापूर्वक किया गया शहरीकरण मनुष्यों के जीवन को और भी अधिक आरामदायक तथा अच्छा बना सकता है, जिससे यह दुनियाँ सुंदरता के नयी उचायाइयों को प्राप्त कर सकती है।