मैं दिवाली किस तरह मनाता हूँ पर निबंध

भारत एक प्राचीन और सांस्कृतिक देश है। यह विविधताओं में एकता वाला देश है। भारत एक सांस्कृतिक देश होने के कारण यहां साल भर त्योहारों का मौसम होता है। होली, ईद, दशहरा, दिवाली, इत्यादि उनमें से कुछ प्रमुख त्योहार है। दिवाली हिंदुओं के लिए सबसे बड़े और महान त्योहार के रूप में मानते हैं। हर वर्ष यह बड़े उत्साह, हर्ष और एक नई उम्मीद के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार की धूम पूरे विश्व में सभी जाती-धर्म के लोग बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मानतें हैं।

मैंने दिवाली कैसे मनाया पर दीर्घ निबंध (Long Essay on How I Celebrated Diwali in Hindi)

Long Essay - 1600 Words

परिचय

सभी धर्मों के लोग प्रकाश के इस पर्व "दिवाली" को केवल भारत में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में बड़े ही हर्षों उल्लास और एकजुटता के साथ मनाई जाती है। भारत के इस प्राचीनतम सांस्कृतिक त्योहार के दिन हिंदू घरों में लोग लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं और सभी धर्मों के लोग अपने घरों में मोमबत्ती या तेल के दिए जलाकर रोशन करते है। आजकल के दिनों में लोग रंग-बिरंगी झालरों के साथ अपने घरों को बहुत ही मनमोहक रूप देते है। दिवाली के इस त्योहार में बच्चे बहुत प्रफुल्लित होते है, क्योंकि उन्हें जलाने के लिए पटाखे और मोमबत्ती के साथ-साथ, नए कपड़े और खाने के लिए तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां मिलती हैं।

दिवाली क्यों मनातें हैं

दीयों का यह पर्व दिवाली हम कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन मनाते हैं। इसी दिन श्री राम अपनी पत्नी सीता को राक्षस-राज रावण के चुंगल से आज़ाद करवा कर और रावण का वध कर अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास काल को पूरा करके अयोध्या वापस लौटें थे। अयोध्या की प्रजा ने श्रीराम के हाथों रावण का वध और अयोध्या लौटने की ख़ुशी में सारी अयोध्या को मिट्टी के दीयों से जगमग किया था, तभी से दीयों का यह त्योहार दिवाली हर वर्ष हर्षोल्लास के साथ मनाने का प्रावधान है।

दीपोत्सव का त्योहार कैसे मनायें

भारत वर्ष के ऐतिहासिक पर्वों में से एक पर्व दिवाली मेरा सबसे पसंदीदा त्योहार है। सभी को इस त्योहार का बड़ी बेसब्री से इंतिजार रहता है। कार्तिक-अमावस्या के इस त्योहार को हर बार हम उत्साह और नए तरीके से मानते है, और मैं भी दिवाली के दीयों से जगमगाते इस त्योहार को बड़े ही उत्साह और जोश के साथ हर साल नए तरीकें से मानाने की कोशिश करता हूँ। हर साल नवरात्री के साथ ही मैं दीपोत्सव के इस पर्व की तैयारी में जूट जाता हूँ, और कुछ नया धमाल करने की कोशिश करता हूँ।

  • घरों की साफ़-सफाई

दीपावली के इस पावन त्योहार पर सभी के घरों की साफ़-सफाई, मंदिरों, दुकानों और आस-पास की गन्दगी को हम सभी मिलकर साफ करते हैं, और घरों, मंदिरों व दुकानों में रंगाई का काम कराते है। क्योंकि प्राचीन काल से ऐसी मान्यता है की साफ घरों में ही लक्ष्मी का वास होता है और वह अपना आशीर्वाद हमेशा हमारें ऊपर बनाये रखती हैं। मैं भी अपने परिवार के साथ मिलकर घरों की साफ़-सफाई और रंग-रोगन में उनका हाथ बटाता हूँ, और दिवाली में उपयोग सारे सामानों की व्यवस्था कर घरों में रख देता हूँ।

  • खरीदारी में उत्साह और कमी

दिवाली की तैयारी मेरे लिए बहुत ही रोमांचक और दिलचस्प होता है। दिवाली की तैयारी के लिए मैं किन-किन चीजों की खरीददारी करू अपने लिए किस तरह के कपड़े, मिठाइयां और अन्य चीजों की खरीद्दारी करूं सारीं चीजों की एक सूचि बनाकर मैं बाजारों से वह सामान लेकर आता हूँ। इन दिनों बाजारों में काफी भीड़ होती है। मैं और मेरी माँ साथ जाकर दिवाली में उपयोगी चीजों को खरीद कर घर लाते हैं। इस दिवाली पर कुछ सामान मैंने ऑनलाइन भी मंगवाएं थे।

कोरोना के कारण 2020 की दिवाली थोड़ी फीकी रही। इस बार बाजारों में दिवाली की रौनक काफी कम थी। सरकारों ने अपने-अपने राज्य में कोरोना के कारण कुछ जरूरी गाइडलाइन तैयार किये थे, जिसकें कारण दिवाली के त्यौहार में वो उत्साह देखने को नहीं मिली जो होनी चाहिए थी। कोरोना के कारण बंदी के दौरान हमारे उपयोगी सामानों का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ, जिसके कारण बाजारों में सामानों की कमी और महंगाई के रूप में हमें देखने को मिली।

इस बार कुछ सामानों जैसे पटाखों और कुछ चाइना के सामने पर प्रतिबंध भी देखने को मिला। इसका कारण पर्यावरण प्रदुषण और चाइना से हमारे सैनिकों का टकराव था। हालाँकि दिवाली के हमारे उत्साह में कमी नहीं हुई पर बाजारों में पर्याप्त सामान और कुछ पाबंदियों के कारण थोड़ी कमी देखने को अवश्य मिली।

हमारा भारत कोरोना के कारण लगभग 4 महिनों तक बंद रहा, जिससे परिवारिक खर्च पर भी इस बंदी का असर हमें दिवाली के उत्सव पर देखने को मिली। पर फिर भी हम सारें नियमों और पाबंदियों का पालन करते हुए दिवाली 2020 को हमने बड़े ही शौहार्द और उत्साह के साथ मनाया।

  • धनतेरस का उत्सव

दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस का उत्सव होता है। हिन्दू कैलेण्डर और मान्यता के अनुसार धनतेरस कृष्णपक्ष के त्रयोदशी के दिन मनाया जाता है। हिन्दू परंपरा के अनुसार इस दिन घरों की साफ सफाई कर बाजारों से नए बर्तन या आभूषण खरीद कर घर के मंदिरों में लक्ष्मीं-गणेश की मूर्तियों के साथ इनकी पूजा की जाती है। जिससे की हमारे घरों में सदैव सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है। बाद में इन बर्तनों को दैनिक जीवन में उपयोग में लाया जाता है और गहनों का भी इस्तेमाल किया जाता है। दिवाली से एक दिन पहले को छोटी दिवाली के रूप में भी जाना जाता है।

  • दिवाली का दिन

वैसे तो इस साल कोरोना महामारी के कारण बाजारों में उतनी रौनक देखने को नहीं मिली, पर इससे लोगों के दिल में उत्साह की कमी देखने को नहीं मिली। थोड़े कम संसाधनों में ही सही, सभी ने पूरे जोश और हर्षोल्लास के साथ दिवाली मनाई।

त्योहार के दिन मेरी माँ ने सभी के कार्यों को सब में बांट दिया। मेरे हिस्से के कार्य में घर की सफाई और अन्य कुछ छोटे काम आये। मैंने जल्दी से अपने सारे कामों को ख़त्म कर लिया। सभी ने मिलकर घर के और मंदिर के पास रंगोली बनायी। मैंने सभी घरों के द्वारों पर फूल-मालाओं से सजा दिया और माँ के कामों में अपना हाथ बटाया। फिर मैं नहाकर कपड़े पहन कर बाजार से नई लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति और फल-फूल खरीदकर लाया तब तक सब धीरे-धीरे तैयार हो रहे थे। फिर मैंने भी अपने दिवाली के नए कपड़ें पहने और पूजा के लिए तैयार हो गया।

सभी ने मिलकर लक्ष्मी-गणेश की पूजा की और घर की सुख शांति के लिए प्रार्थना की। पूजा के बाद हमने घरों में और घर की छतों पर चारों तरफ मिट्टी के दिए और मोमबत्तियों से सारें घर को सजाया और यह सुनिश्ति किया की कहीं अँधेरा तो नहीं रह गया। मैंने घर के मंदिरों में भी कुछ दिए जलाये और फिर दीयों की एक थाली बनाकर फूल और अगरबत्ती के साथ मैं अपने यहां के देवी-देवताओं के मंदिरों में दीप जलाये, और सभी के सुख समृद्धि की लिए कामना की। फिर घर आकर प्रसाद ग्रहण किया और अपने माता-पिता और बड़ों का आशीर्वाद लिया। मैं अपने पड़ोसियों से मिल कर उन्हें दिवाली की शुभकामनाएं दी और बड़ों का आशीर्वाद लिया।

ईको फ्रेंडली दिवाली

दिवाली का त्योहार दीयों की रोशनी और आसमान को पटाखों की रौशनी से भर देने का त्योहार है। अधिकांश लोग ऐसा ही करते है, पर इस बार की दिवाली पर पटाखों की रोक और इको-फ्रेंडली दिवाली मानाने का जोर दिया गया। जिसे मैंने समझा और मैंने भी इको-फ्रेंडली दिवाली मनाई।

सरकार द्वारा अक्सर यह बताया और समझाया जाता है कि पटाखों के शोर से लोगों को होने वाली स्वास्थ्य समस्या और वातावरण में इसके द्वारा पैदा हुए वायु प्रदूषण का क्या नुकसान है। पटाखों पर बैन और इको-फ्रेंडली तरीके से दिवाली मनाने की ओर एक कदम था। इसके अलावा इन पटाखों से कही-कही बच्चों और वयस्कों के घायल होने और कही-कही भारी आगजनी की घटनाएं सामने आती है। पटाखों के शोर से छोटे बच्चों और बीमार बुजुर्गों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती हैं। उनके स्वास्थ्य पर भारी असर पड़ता है। मुझे लगता है की हमारी सरकार के द्वारा जागरूकता के इस कार्यक्रम में हम सभी को समझना चाहिए और हमे इको-फ्रेंडली दिवाली माननी चाहिए।

दिवाली एक प्रतीक्षित त्योहार है?

भारतीय संस्कृति और इतिहास को देखते हुए यह भारत का प्राचीनतम रूप से सबसे प्रसिद्ध त्योहार के रूप में जाना जाता है। जिसका इंतजार सारा हिन्दू समाज ही नहीं बल्कि सारा विश्व करता है। इस त्योहार के बारे में यह विचार है की यह त्योहार अपने साथ सुख-शांति और समृद्धि साथ लेकर आता है, और ऐसी खुशियों और प्रकाश से भरे इस त्योहार का सारा विश्व बड़ी ही उत्सुकता से इंतजार करता है।

प्रकाश उत्सव का यह त्योहार पांच दिवसीय त्योहार होता है, धनतेरस से लेकर गोवर्धन पूजा तक इस त्योहार को मनाते है। इस पांच दिवसीय त्योहार के साथ ही घर के सदस्यों को एक साथ रहने और समय बिताने का मौका मिलता है। साल भर की व्यस्तता के साथ सारें परिवार को एक साथ समय बिताने के लिए इस दिवाली के त्योहार की प्रतीक्षा रहती हैं। इससे सभी को कुछ समय के लिए अपने काम से आराम मिलता है और सभी आपस में अपनों और रिश्तेदारों के साथ समय बिताते है। इस त्योहार की सभी को प्रतीक्षा रहती है, इस त्योहार के साथ ही हम लोग अपनी संस्कृति और अपने ऐतिहासिक परंपरा में रंग जाते है।

इस प्रकाश पर्व के साथ ही हमारे जीवन में सुख, शांति, और शौहार्द आता है और अनेक प्रकार की पकवानों और मिठाइयों के साथ ही हमारे जीवन में मिठास लाता है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीयों के साथ-साथ विश्वभर के सभी लोग इस त्योहार का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते है, ताकि वे बड़ों का आशीर्वाद और अपनों से मिलकर उनके साथ कुछ समय व्यतीत कर सकें, और जीवन में सुख शांति और समृद्धि की ओर आगे बढ़ें।

निष्कर्ष

यह त्योहार प्रकाश, सुख-समृद्धि और आपसी सौहार्द का त्यौहार है। अतः हम अपनों के साथ मिलकर खुशियों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से इस त्योहार को मनायें। दिवाली का यह पर्व हमें अपने अंदर के अहंकार को मार कर आपस में एकजुटता से रहने की सिख देता है। अतः हमें शांतिपूर्ण तरीकें से लोगों और अपने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली तरीकें से दिवाली मनानी चाहिए।

अर्चना सिंह

कई लोगो की प्रेरणा की स्रोत, अर्चना सिंह एक कुशल उद्यमी है। अर्चना सिंह 'व्हाइट प्लैनेट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' आई. टी. कंपनी की डायरेक्टर है। एक सफल उद्ममी होने के साथ-साथ एक कुशल लेखक भी है, व इस क्षेत्र में कई वर्षो का अनुभव है। वे 'हिन्दी की दुनिया' और अन्य कई वेबसाइटों पर नियमित लिखती हैं। अपने प्रत्येक क्षण को सृजनात्मकता में लगाती है। इन्हें खाली बैठना पसंद नहीं। इनका कठोर परिश्रम एवं कार्य के प्रति लगन ही इनकी सफलता की कुंजी है।

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