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जल बचाओ जीवन बचाओ पर निबंध

पृथ्वी पर जीवन के लिए जल का होना बहुत ही आवश्य है क्योंकि जल भी वायु के तरह ही मानव जीवन के लिए बहुत ही जरूरी है। सभी जीवित जीव फिर चाहे वह मनुष्य हो या फिर दूसरे जीव-जन्तु हो या पेड़ पौधे सभी अपने जीवन के लिए ताजे पानी पर निर्भर करते हैं। इसी जल बचाओ पृथ्वी बचाओ विषय पर हमने आप के लिए छह निबंध तैयार किये हैं, जोकि आपके काफी काम आयेंगे। इसके साथ ही इन निंबधों में जल संरक्षण के तरीकों और आवश्यकता के विषय में भी बताया गया है। इन निबंधों को तैयार करते वक्त इसमें हमें जल सरक्षण की आवश्यकता क्यों है? तथा जल संरक्षण के लिए चलाये जाने वाले अभियान, जल संरक्षण का महत्व जैसे विषयों को ध्यान में रखा है।

जल बचाओ जीवन बचाओ पर छोटे तथा बड़े निबंध (Long and Short Essay on Save Water Save Life in Hindi)

आप अपनी आवश्यकता अनुसार जल बचाओ जीवन बचाओ विषय पर दिये गये इन निबंधो का उपयोग कर सकते हैं। इन निबंधो के माध्यम से हमने जल के महत्व, जल संरक्षण क्यों आवश्यक है, जल का क्या महत्व है, जल संरक्षण जागरुकता के लिए कौन से विभिन्न तरीके है, जल सरंक्षण के क्या तरीके है, जीवन के रक्षा के लिए जल कैसे बचाये, हमें जल बचाने की आवश्यकता क्यों है, जल को जीवन क्यों कहा जाता है, जल संरक्षण अभियान क्या है जैसे प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास किया है।

जल के महत्व पर निबंध 1 (200 शब्द)

वायु के बाद जल वह दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है जो पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे आवश्यक है। पीने के अलावा जल का कपड़े धोने, खाना बनाने, साफ-सफाई करने जैसे अन्य कई कार्यों के लिए भी उपयोग किया जाता है। पानी मनुष्यों और जीव-जन्तुओ के साथ ही पेड़-पौधों के लिए भी बहुत ही आवश्यक है। जल जैसी हमारी यह महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा कृषि के साथ ही उद्योगों के लिए भी बहुत ही आवश्यक है।

जल का महत्व

पृथ्वी पर जीवन के शुरुआत से ही जल एक बहुत ही महत्वपूर्ण संसाधन रहा है और यहीं कारण है कि विश्व की सभी प्रमुख सभ्यताओं का उदय नदियों के किनारे ही हुआ है। भारत के कई बड़ो शहरों के विकास में नदियों का काफी बड़ा योगदान रहा है क्योंकि नदियों के रास्ते परिवहन का कार्य काफी सुगमता से हो जाता है। आज के समय में वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर जीवन की संभवनाओं की तलाश कर रहे हैं क्योंकि उन्हें वहां पानी का कुछ जमा हुआ अंश और वायु में नमी मिली है। इस विषय की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम कहीं भी जल द्वारा ही जीवन की संभवना की परिकल्पना करते है, यहीं कारण है कि जल को जीवन भी कहा गया है।

पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए भी जल काफी महत्वपूर्ण है, जैसे कि समुद्र से वाष्पित हुआ पानी, वायु में मिलकर बादल बन जाता है। जब बादल समुद्र से मैदानी इलाकों में पहुंच कर ठंडा होता है तो यह पानी में बदल जाता है और वर्षा के रुप में नदियों तथा जल स्त्रोतों को भर देता है।


 

जल बचाओ जीवन बचाओ :  जल संरक्षण के महत्व पर निबंध 2 (300 शब्द)

प्रस्तावना

जल बचाओ जीवन बचाओ का यह नारा अब हमारे लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। यह तो हम सब जानते है कि पृथ्वी पर जीवन के लिए जल भी वायु के समान ही काफी आवश्यक है लेकिन इस विषय में सबसे चिंता की बात यह है कि पृथ्वी पर स्वच्छ ताजे पानी की मात्रा दिन-प्रतिदिन घटती ही जा रही है। पानी के कमी के कारण विश्व भर में सूखा, कई तरह की बीमारियां, प्राकृतिक प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही है परन्तु इस विषय की सबसे दुखद बात यह है कि लोग अभी भी जल संरक्षण के महत्व को लेकर पूर्ण रुप से जागरुक नही हो रहे है।

जल संरक्षण का महत्व

प्रकृतिक चक्र पूर्ण से जल पर निर्भर करता है क्योंकि जबतक जल वाष्प बनकर वायु में नही मिलेगा तब तक वर्षा नही होगी। जिसके कारण फसलें खराब हो जायेंगी और इसकी सबसे बुरी बात यह होगी की इसके कारण सूखे की समस्या भी उत्पन्न हो जायेगी। प्रत्येक जीवित व्यक्ति चाहे फिर वह मनुष्य हो, जानवर हो या फिर पेड़-पौधे सभी को पानी की आवश्यकता होती है और हमारे द्वारा यह पानी सिर्फ पीने के लिए ही नही उपयोग किया जाता है बल्कि की कपड़े धोने, पोछा लगाने, खाना पकाने और कृषि कार्यों तथा पावर प्लाटों  जैसे औद्योगिक कार्यों में भी उपयोग किया जाता है।

 

भारत के कई सारे क्षेत्रों में ताजे पानी की उपलब्धता या तो बहुत कम है या फिर बिल्कुल ही नगण्य है। इन जगहों पर लोगों को अपने दैनिक कार्यों के लिए पानी लाने के लिए मीलों दूर तक जाना पड़ता है। पीने का यह पानी सभी जीवित व्यक्तियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है और यदि हमने अभी भी इसके संरक्षण को लेकर कार्य नही किया तो आने वाले समय में हमारे अस्तित्व पर भी संकट आ जायेगा।

शहरीकरण में जल का उपयोग

ज्यादेतर शहर नदियों के किनारे बसे होते हैं क्योंकि प्रत्येक उद्योग को विभिन्न प्रकार के उत्पादन के लिए जल की आवश्यकता होती है, फिर चाहे वह कपड़ा बनाने का कार्य हो, धोने का कार्य हो, ठंडा करने का कार्य हो या फिर घोलने का हर काम में पानी की आवश्यकता होती ही है। इसके अलावा जल का सबसे बड़ा उपयोग बिजली बनाने में भी किया जाता है।

निष्कर्ष

पृथ्वी पर मौजूद असंख्य प्राकृतिक संसाधन जल के सहायता से ही निर्मित होते है, ताजा और पीने का पानी हमारा सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है जो हमारे स्वस्थ्य जीवन को बरकरार रखता है। बिना जल सरंक्षण किये, पृथ्वी पर जीवन को अब और नही बचाया जा सकता है, इसलिए यह काफी महत्वपूर्ण है कि हम जल संरक्षण के कार्यों को लेकर और भी संजीदा हो, ताकि हमारे ग्रह पर जीवन ऐसे ही फलता-फूलता रहे।


 

जल बचाओ पृथ्वी बचाओ : जन जागरुकता पर निबंध – 3 (400 शब्द)

प्रस्तावना

पृथ्वी के सभी जीवों के लिए जल एक बहुमूल्य संपदा है और इसके बिना जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती है। यह कहना काफी दुखद है कि भले ही पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत भाग पानी से ढंका हुआ हो लेकिन फिर भी हमारे ग्रह से दिन-प्रतिदिन पीने का स्वच्छ पानी समाप्त होता जा रहा है। यहीं कारण है कि कई सारे देशों में जल बचाओ जीवन बचाओ जैसे विषय को लेकर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों और सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।

जन जागरुकता लाने के लिए उठाये जा सकने वाले विभिन्न कदम

वर्तमान समय में लोग जल संसाधनों में कमी, गिरते भूजल स्तर, सूखे और वर्षाजल संरक्षण जैसे विषयों को लेकर कई तरह की बाते कर रहे है। इसमें सबसे बड़ा मुद्दा भूजल संसाधनो के दोहन का है, जोकि आज के समय में एक वैश्विक समस्या बन गया है। हमें हमेशा से ही बताया जाता है कि पृथ्वी का 71 प्रतिशत भाग पानी से ढका हुआ लेकिन इसमें से मात्र 3.5 प्रतिशत ही ताजा पानी है, जिसका हम सेवन कर सकते है बाकि का जल समुद्री पानी के रुप में मौजूद है। जिसका हम प्रत्यक्ष रुप से सेवन नही कर सकते है।

 

 

इस समस्या को सुलझाने के लिए हमें सभी लोगों में सामाजिक जागरुकता लाने की आवश्यकता है क्योंकि आज के समय में पूरा विश्व ही जल रिक्तिकरण की इस समस्या से जूझ रहा है।

  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रत्येक वर्ष 22 मार्च के दिन “विश्व जल दिवस” मनाया जाता है, इसके अंतर्गत लोगों को ताजे पानी के संसाधनो के प्रबंधन के विषय में समझाया जाता है।
  • भारत सरकार भी जल संसाधनों के सही संरक्षण और प्रबंधन को लेकर लोगों में कई सारे जन जागरुकता अभियान चला रही है।
  • भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा इस मुद्दे पर लोगों को जागरुक करने के लिए कई सारे विभाग बनाये गये हैं। इसके अलावा इस कार्य के लिए मंत्रालय भी है, जिसका नाम ‘पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय’ है जो गंगा तथा अन्य नदियों के सफाई का कार्य करती है।
  • केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा भी भूजल संरक्षण, वर्षा जल संग्रहण और कृत्रिम पुनरभरण को लेकर कई सारे कार्यक्रम चलाये जाते है।
  • आध्यत्मिक गुरु “श्री जग्गी वासुदेव” ने लोगों में “रैली फार रीवर” जैसे अभियान चलाकर लोगों में जागरुकता लाने का प्रयास किया है। उन्होंने नदीयों को फिर से जीवंत करने के लिए नदियों के किनारे कम से कम एक किलोमीटर तक पेड़ लगाने का सुझाव दिया है। इसी तरह सरकारी भूमि या फिर कृषि भूमि के किनारे भी पेड़ लगाये जा सकते है। इसे तरह से लगाये गये यह पेड़ सुनिश्चित करेंगे कि हमारी नदियों को पूरे साल नम मिट्टी उपलब्ध हो। यह बाढ़, सूखे के कारण होने वाले मिट्टी के कटाव को भी कम करेगा जो कि अंततः किसानों की आय में वृद्धि करेगा।

निष्कर्ष

हम सभी को अपने जीवन में जल के इस महत्व को समझना होगा क्योंकि इसके कमी के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याएं बहुत ही गंभीर होंगी। इस विषय को लेकर सरकार और कई सारे एनजीओ भी लोगों में जागरुकता फैलाने का कार्य कर रहें है। इसीलिए हमारे ग्रह पर उपलब्ध यह जल बहुत ही बहुमूल्य है और हमें इसे किसी प्रकार से व्यर्थ नही करना चाहिए।


 

जल संरक्षण करो जीवन बचाओ निबंध – 4 (500 शब्द)

प्रस्तावना

ग्लोबल वार्मिंग के कारण उत्पन्न हुई सबसे बड़ी समस्या भारी मात्रा में जल का ह्रास होना है और इसका एक दूसरा मुख्य कारण जल का दुरुपयोग करना भी है। आज के समय में यह काफी जरूरी है कि हम जल बचाओ जीवन बचाओ जैसे वाक्य के अर्थ को समझे। ताजा पानी हमारे उन तमाम जरूरतों में से सबसे मुख्य है, जो हमारे स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है।

जल संरक्षण करने के क्या-क्या तरीके हैं?

पृथ्वी पर भंयकर सूखे जैसे जल संकट को टालने के लिए हमसब को जल का कम से कम और अच्छे तरीके से उपयोग करना होगा। इस निबंध में हमने इस बात पर प्रकाश डालने की कोशिश की है जल संरक्षण कैसे किया जाय, जिससे की वातावरण की सुदंरता को ऐसे ही बरकरार रखा जा सके। अगर इन बातों पर हम गंभीरतापूर्वक गौर करेंगे तो हमें पता चलेगा कि यह कार्य कोई बहुत मुश्किल नही है। सर्वप्रथम हमें इसकी शुरुआत अपने दैनिक कार्यों से करनी होगी।

हमारे युवा पीढ़ी को “जल बचाओ पृथ्वी बचाओ” के इस फार्मूले को अच्छे से समझने की आवश्यकता है। अगर हम चाहें तो अपने छोटे-छोटे कार्यो द्वारा सैकड़ो गैलन पानी बचा सकते है। ऐसे ही कुछ तरीकों के विषय में यहां बताया गया है, जिन्हें हम अपने दैनिक जीवन में अपना सकते है।

  • हमें अपने दैनिक गतिविधियों के दौरान थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए जैसे कि हांथ धोते वक्त, मंजन करते वक्त, दाढ़ी बनाते वक्त पानी के नल को बंद कर देना चाहिए। ऐसा करके हम लदभग 160 गैलन पानी प्रतिमाह बचा सकते है।
  • नहाने के समय फुहारे के जगह बाल्टी तथा मग का इस्तेमाल करके भी हम काफी मात्रा में पानी बचा सकते है।
  • पौधों को दोपहर के जगह सुबह और शाम के समय पानी देना पानी बचाने के कार्य में एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है, इसके साथ ही बरसात के मौसम में वृक्षारोपड़ करके हम पौधे लगाते समय खर्च होने वाले पानी को काफी कम कर सकते है।
  • हमें अपने घरों में किसी तरह के पानी के लीकेज को तत्काल रुप से ठीक कराना चाहिए, ताकि इससे होने वाली पानी की बर्बादी को रोका जा सके।
  • कार धोने के लिए पाईप के इस्तेमाल से काफी मात्रा में पानी नष्ट हो जाता है, इसलिए हमें इसके स्थान पर बाल्टी का उपयोग करना चाहिए।
  • वाशिंग मशीन और डिश वाशर का उपयोग करते समय हमें उन्हें पूर्ण रुप उनके अधिकतम क्षमता का उपयोग करना चाहिए तभी इनके द्वारा हम पानी का के बर्बादी को रोक सकते है।
  • अपने घरों में पानी के पुनरावृत्ति के लिए हमें हमेशा सही फैसला लेना चाहिए ताकि हमेशा जल संरक्षण के इस कार्य को किया जा सके और सही मात्रा में पानी को बचाया जा सके।

जल संरक्षण एक ऐसा कार्य है, जिसके द्वारा हम प्रकृति के साथ ही अपने भविष्य को भी सुरक्षित कर सकते है। जैसा कि हम जानते है पृथ्वी पर दिन-प्रतिदिन पानी का स्तर गिरता जा रहा है, जिसके कारण पर्यावरण भी काफी बुरे तरीके से प्रभावित होता जा रहा है। यह हमारे लिए काफी सहायक होगा यदि हम जल संरक्षण और जल की शुद्धता बनाये रखने के तरीकों के विषय में सीख ले। इसके द्वारा ना सिर्फ हम अपने जीवनस्तर में सुधार लायेंगे बल्कि अपने आने वाले पीढ़ीयों का भविष्य भी सुनिश्चित कर पायेंगे।

निष्कर्ष

हमारे ग्रह पर उपलब्ध वर्तमान जल के स्थिति को देखते हुए, हमें जल का एक-एक कतरा बचाने की आवश्यकता है। जैसा कि हम जानते हैं कि हमारे ग्रह का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है लेकिन इसमें से मात्र 3.5 प्रतिशत ही ताजा पानी है, जोकि हमारे पीने के लिए उपयुक्त है। इसलिए यह काफी आवश्यक है कि हम पानी की महत्वता को समझे और इसके संरक्षण के लिए प्रयास करें ताकि भविष्य में हमारे आने वाले पीढ़ीयों तक भी स्वच्छ जल की उपलब्धता बनी रहे।


 

जल बचाओ जीवन बचाओ और पृथ्वी बचाओ पर निबंध - 5 (600 शब्द)

प्रस्तावना

पृथ्वी पर उपलब्ध सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से जल सबसे प्रमुख है क्योंकि इसका उपयोग मनुष्य, जीव-जन्तु, पेड़-पौधे जैसे सभी जीवित जीवों द्वारा किया जाता है। हमें हमारे हर दैनिक कार्य के लिए पानी की आवश्यकता होती है और इसके बिना हम जीवन की कल्पना भी नही कर सकते है। हमें पीने, खाना पकाने, नहाने, कपड़े धोने जैसे सभी कार्यों के लिए पानी की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही हमें कृषि, उत्पादन उद्योगों, विभिन्न प्रकार के रसायन उद्योगों, पावर प्लांट तथा कई अन्य औद्योगिक कार्यों के लिए पानी की आवश्यकता पड़ती है। परन्तु दुर्भाग्य से विश्व भर में पानी के कमी की समस्या विश्व भर में बढ़ती जा रही है।

जल बचाओ जीवन बचाओ पृथ्वी बचाओ

पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवों के लिए जल सबसे जरूरी वस्तु है। सभी जीवों को सुरक्षित और स्वस्थ जीवन के लिए पानी की आवश्यकता होती है। जैसे-जैसे जनसंख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जल का उपयोग भी बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा शहरीकरण के कारण पेड़ो की संख्या भी तेजी से घटती जा रही है, जिसके कारण प्रदूषण, कई क्षेत्रों में सूखे, फसलों के नुकसान और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं में तेजी से वृद्धि होती जा रही है। इसलिए यह वह समय है जब हमें जल संरक्षण के कार्यों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि जीवन और पृथ्वी को भी बचाया जा सके।

पानी की कमी

हमने विश्व के विभिन्न भागो में पानी के कमी के कई सारी खबरें सुनी है। यहां हम बतायेंगे की आखिर पानी की कमी क्या और कैसे होती है। यह वह समस्या होती है जब स्वच्छ और ताजे पानी की काफी कमी हो जाती है। कुछ तथ्यों से पता चला है कि विश्व की एक तिहाई आबादी जो लगभग 2 अरब के करीब है, उसे वर्ष में करीब एक महीने पानी के कमी जैसी समस्या से जूझना पड़ता है। इसके साथ ऐसा अनुमान है कि लगभग 50 करोड़ लोगों को पूरे वर्ष पानी के कमी का सामना करना पड़ता है। अब इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है कि साउथ अफ्रीका का केपटाउन शहर विश्व का वह पहला बड़ा शहर होगा जहां जल्द ही पानी खत्म हो जायेगा।

पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत भाग पानी से ढका हुआ है, लेकिन फिर भी ऐसा क्यों है कि हमारे उपर यह गंभीर जल संकट मंडरा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि विश्व का लगभग 96.5 प्रतिशत पानी समुद्री पानी के रुप में मौजूद है, जोकि खारा होता है और हमारे सेवन के लिए उपयुक्त नही है, मात्र 3.5 प्रतिशत जल ही जो भूजल, ग्लेशियर, नदियों और झीलों के रुप में उपलब्ध है सिर्फ वहीं हमारे सेवन योग्य है। आबादी बढ़ने के कारण पानी के यह प्राकृतिक संसाधन तेजी से खत्म होते जा रहे है और इसके साथ ही पानी की बर्बादी, तेजी से हो रहे औद्योगिकरण और शहरीकरण के कारण जल का यह संकट और भी गहराता जा रहा है। भारत के कुछ हिस्सों तथा कुछ अन्य देशों में लोग पानी के गंभीर संकट से जूझ रहे है। जिसके कारण इन स्थानों पर सरकार को पानी के टैंकर द्वारा पानी उपलब्ध करवाना पड़ रहा है। भारत में 1951 से 2011 के बीच में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता लगभग 70 प्रतिशत तक घट चुकी है तथा सन् 2050 तक इसमें 22 प्रतिशत और कमी होने की संभावना है।

विश्व जल दिवस

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 22 मार्च के दिन को “विश्व जल दिवस” घोषित किया गया है, ताकि लोगों को ताजे पानी के महत्व और पृथ्वी पर इसके समाप्ति से उत्पन्न होने वाले समस्याओं के विषय मे समझाया जा सके। सन् 2018 के इस वर्ष में विश्व जल दिवस का थीम ‘प्रकृति के लिए जल’ रखा गया है, जिसका अर्थ 21 सदी में होने वाली पानी के समस्या के प्राकृतिक उपाय खोजने से है।

निष्कर्ष

जल हमारा वह सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है, जिसकी जरूरत हर जीवित व्यक्ति को होती है। यदि हम कहते हैं कि जल ही जीवन है तो इसमें कुछ भी गलत नही है। इसलिए हमें जल संरक्षण पर बल देने की आवश्यकता है ताकि इसके द्वारा जीवन और पृथ्वी को भी बचाया जा सके। पीने योग्य पानी का अर्थ उस तरह के पानी के उपलब्धता से है जो हमारे पीने के लिए सुरक्षित और उपयुक्त हो। इसके साथ ही हमें अपने पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने तथा ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से निपटने के लिए भी हमें जल संरक्षण के विषय पर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि स्वच्छ जल की गुणवत्ता ऐसे ही बने रहे तथा वह किसी प्रकार के रसायनों तथा कचरों से भी मुक्त रहे।


 

जल बचाओ जीवन बचाओ पर निबंध – 6 (1000 शब्द)

प्रस्तावना

जैसा कि हम सब जानते है कि वायु के बाद जल हमारे ग्रह के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक है। जल हमारे जीवनयापन के लिए काफी महत्वपूर्ण है, इसके बिना हम जीवन की कल्पना भी नही कर सकते हैं। हम सब जानते है कि पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत भाग समुद्रों, महासागरों, नदियों और ग्लेशियरों के रुप में जल से ढका हुआ है लेकिन इसमें से मात्र 1 प्रतिशत ही मानव उपयोग के लिए उपयुक्त है।

जल ना सिर्फ मनुष्यों के जीवन के लिए आवश्यक है बल्कि की पृथ्वी पर मौजूद लगभग सभी प्रजातियां इस पर निर्भर करती है अगर इसे जैविक रुप से देखा जाये तो पानी में ऐसे कई गुण होते हैं जो वस्तुओं के साथ प्राकृतिक अभिक्रियाएं करती है। पृथ्वी पर उपस्थित लगभग सभी प्राणी अपने जीवन के लिए जल पर निर्भर है और जल की दिन-प्रतिदिन होती जा रही कमी तथा कई सारी प्रजातियों की इस पर निर्भरता को देखते हुए यह काफी आवश्यक है कि हम जल संरक्षण पर ध्यान दे।

जल ही जीवन है

जल हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमारे जीवनयापन के लिए बहुत ही आवश्यक है। इसके बिना जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती है और यदि हमें पृथ्वी पर जीवन को बनाये रखना है तो इस बात में कोई संदेह नही है की हमें जल को भी बचाना होगा। हम पानी ना सिर्फ पीते हैं बल्कि की अपने दूसरे अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में भी इसे उपयोग में लाते है जैसे कि स्नान, खाना पकाने में, कपड़े धोने में, बागवानी और अन्य कई कार्यों में भी इसका दैनिक रुप से उपयोग करते है।

पृथ्वी पर उपस्थित पेड़-पौधे और जीव-जन्तु भी पूर्ण रुप से पानी पर निर्भर करते है और इसकी कमी इनके भी वृद्धि और विकास को प्रभावित करेगी जिससे पूरा पर्यावरण तंत्र और खाद्य श्रृंखला प्रभावित हो जायेगा। इसलिए यह काफी आवश्यक है कि हम पानी की बचत करके इसके पर्याप्त उपलब्धता को बनाये रखें ताकि पृथ्वी पर जीवन इसी प्रकार से फलता-फूलता रहे।

जल संरक्षण की आवश्यकता

विश्व के कई सारे हिस्से कम वर्षा के कमी और भूजल के गिरते स्तर के कारण पानी की भयंकर कमी से जूझ रहे है। कई सारे स्थानों पर भूजल या तो दूषित हो चुका है या फिर वर्षा के कमी के कारण उसकी पुनःपूर्ति नही हो पायी है। इन सभी कारणों से कई क्षेत्रों में पानी की कमी दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।

औद्योगिकरण और शहरीकरण के जैसे वजहों से भूजल के कमी में वृद्धि हुई है क्योंकि तेजी से होते विकास के कारण पानी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रति 9 व्यक्तियों में से एक व्यक्ति तथा लगभग 84.4 करोड़ लोगो आज भी शुद्ध पानी उपलब्ध नही हो पाया है। इन आकड़ों को देखने से पता चलता है कि अगर पानी की यह समस्या ऐसे ही बनी रही तो भविष्य में आने वाले इस गंभीर जल संकट को टाला नही जा सकता है। इसके लिए हमें अभी से प्रयास करते हुए जल संरक्षण के कार्य शुरु कर देने चाहिए ताकि इस महत्वपूर्ण संसाधन को हम अपने भविष्य के पीढ़ियों के लिए भी बचा सके।

जल संरक्षण की पहल

जल संरक्षण एक ऐसी पहल है, जिसका मकदस लोगों को जल संरक्षण के विषय में जागरुकता फैलाना तथा उन्हें जल के महत्व के विषय में बताना है ताकि लोग भविष्य के लिए इसका संरक्षण कर सके। जल संरक्षण अभियान लोगो को इस बात का अहसास दिलाता है कि हमारे पृथ्वी के लिए जल कितना महत्वपूर्ण है, जिससे की हम भविष्य के लिए इसका संरक्षण कर सके। जल संरक्षण अभियान के द्वारा लोगो को इस बात का ज्ञान दिया जाना चाहिए की स्वच्छ और साफ पानी के स्त्रोत काफी सीमित है और उनका अत्यधिक उपयोग करने पर वह समाप्त हो जायेंगे, जोकि मानव अस्तित्व के लिए भी संकट पैदा कर देगा।

हालांकि पृथ्वी का 71 प्रतिशत भाग पानी से ढका हुआ है, लेकिन प्रत्यक्ष रुप यह पानी से हमारे उपयोग के लिए उपयुक्त नही है। इसलिए हमारे पास पृथ्वी पर जो भी स्वच्छ पानी मौजूद है, हमें जितना हो सके उसका उतने अच्छे से उपयोग करना चाहिए। यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि अपने आने वाली पीढ़ीयों के सुरक्षा के लिए जल संरक्षण का कार्य करे।

अगर हम जीवन को बनाये रखने के लिए हर जगह ताजे पानी की उपलब्धता चाहते है तो हमें आज से जल संरक्षण के आदतों को अपना लेना चाहिए तभी आगे चलकर हम जल की उपलब्धता को बरकरार रख पायेंगे और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी स्वच्छ जल उपलब्ध करा पायेंगे।

जल बचाओ जीवन बचाओ

जैसा कि हम सब जानते है कि जल ही जीवन है इसीलिए हर तरह का जीवन इसपर निर्भर करता है लेकिन आज भी भारत में 21 प्रतिशत बीमारियां गंदे पानी के उपयोग से पैदा होती है और साफ पानी की कमी के कारण यह समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। आज भी भारत में लगभग 16.3 करोड़ लोगों को पीने का सवच्छ और सुरक्षित पानी नही उपलब्ध है, जोकि तमाम तरह के बीमारियां को बढ़ाने के साथ ही घातक होता जा रहा है।

बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए हम इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि आने वाले समय में पीने के साफ पानी की मांग भी बढ़ेगी। यदि भारत का प्रत्येक नागरिक प्रतिदिन 1 लीटर पानी भी बचायेगा तो यह एक बड़ा बदलाव ला सकता है। आपका बचाया हुआ 1 लीटर यह पानी उस बच्चे को एक नया जीवन दे सकता है, जिसके पास पीने के स्वच्छ पानी की सुविधा नही है। इसके साथ ही आपके द्वारा बचाया हुआ पानी सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए भी बहुत सहायक होगा। आप अपने इन छोटे कदमों द्वारा कई लोगों के जीवन में बड़े बदलाव आ सकते हैं।

जल सरंक्षण कैसे करें? (पानी कैसे बचाये)

यह तो हम सब ही जानते हैं कि जल, जीवन के समतुल्य है और यदि हम चाहते हैं कि पृथ्वी पर मानव जीवन बना रहे तो हमें जल बचाने के नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। इसी विषय में नीचे कुछ तरीके बताये गये हैं, जिनका पालन करके हम और भी अच्छे से जल संरक्षण कर सकते हैः

  • दाढ़ी बनाते समय और मंजन करते समय जब उपयोग ना हो तो पानी के नलों को अच्छे से बंद कर दे।
  • ऐसे फ्लशिंग सिस्टम का उपयोग किजिए, जो पानी की खपत कम करता हो।
  • नहाने के लिए फुहारे का उपयोग कम किजिए, इसके जगह मग और बाल्टी का उपयोग किजिए।
  • सिचाईं के लिए पानी भराई प्रणाली की जगह ड्रिप इरीगेशन प्रणाली का उपयोग किजिए।
  • अपने बगानों में शाम के समय पानी का छिड़काव करें और इसमें जरुरत से ज्यादे पानी की इस्तेमाल ना करें।
  • सार्वजनिक स्थलों पर खुले हुए पानी के नलों को बंद कर दे और यदि ऐसा ना हो पाये तो तात्कालिक रुप से इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को अवश्य दें।
  • अपने घरों और क्षेत्रों में वर्षाजल संरक्षण तंत्र की स्थापना करवायें।
  • आरओ फिल्टर से निकले हुए खराब पानी को व्यर्थ ना करें बल्कि की इसका उपयोग पौधों को सींचने और कपड़े धोने में करे।
  • टंकियों में पानी भरकर बहने से बचाने के लिए फ्लोट वाल्व लगवायें।

निष्कर्ष

जल जीवन का आधार है, उदाहरण के लिए यदि आप किसी बर्तन में कुछ दिन के लिए पानी रख देंगे तो कुछ दिन बाद उसमें से कुछ ना कुछ अवश्य उग जायेगा। यह इस बात को प्रमाणित करता है कि आखिर किस प्रकार से जल जीवन के स्थापना में सहयोग करता है। चाहे वह मनुष्य हो, जीव-जन्तु हो या फिर पेड़-पौधे सभी का जीवन जल पर टिका हुआ है। यदि पानी उपलब्ध ना हो तो किसी प्रकार प्रकार के जीव के लिए थोड़े समय तक भी जिंदा रह पाना मुश्किल होगा। पृथ्वी का सबसे बुद्धिमान जीव होने के कारण हम मनुष्यों की यह जिम्मेदारी है कि हम किसी प्रकार से भी पानी की बर्बादी ना करें ताकि पृथ्वी पर हर तरह का जीवन बना रहे, जिससे हमारे ग्रह का पर्यावरण संतुलन इसी प्रकार से बना रहे।

 

 

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Yogesh Singh

Yogesh Singh, is a Graduate in Computer Science, Who has passion for Hindi blogs and articles writing. He is writing passionately for Hindikiduniya.com for many years on various topics. He always tries to do things differently and share his knowledge among people through his writings.

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