पत्नी के अवसाद से कैसे निपटें (How to Deal with Wife’s Depression)

जब आप शादी करते हैं, तो आप अपनी पत्नी से वादा करते है, कि आप उसका मुश्किल वक़्त में हमेशा साथ देंगे, कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे। अतः यह आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप उसे किसी भी समस्या से बाहर निकालें, चाहे वो बीमारी हो या कुछ और। यह बिल्कुल सच है कि जब कोई बीमार होता है, खासकर जब वो अवसाद में हो, तब उस स्थिति में, पूरा परिवार परेशान हो जाता है। ऐसे समय में उन्हें लगातार आपके स्नेह, ध्यान और देखभाल की जरुरत होती है। एक उदास व्यक्ति हमेशा निराशा और अकेलापन महसूस करता है। वो व्यक्ति काफ़ी कठिन समय का सामना कर सकता है।

एक ही प्रतिक्रिया देने के बजाय, उसे समझने की कोशिश करें। आप एक या दो सप्ताह के भीतर इस मनोदशा विकार का पता लगा सकते हैं। आप आसानी से व्यवहार में आए बदलाव को देख सकते हैं, और इससे छुटकारा पाने में उसकी मदद कर सकते हैं।

आम तौर पर, महिलाएं कई कारणों से चिंतित और थका-हारा महसूस कर सकती हैं। लेकिन अवसाद सबसे आम मनोदशा विकारों में से एक है, जो कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। जीवन के किसी भी पड़ाव में कोई भी व्यक्ति अवसाद का सामना कर सकता है।

अपनी पत्नी की अवसाद में कैसे मदद करें? (How to Help your Wife with Depression)

  • उसके साथ बातें करें: हमेशा अपने साथी के साथ संवाद करने का परामर्श दिया जाता है, क्योंकि बात करने से ही बात बनती है। यह संभव है कि आपकी पत्नी आपसे बात करना पसंद न करें, फिर भी उसे अकेला न छोड़ें, उसका मूड बदलने की कोशिश करें और उससे विभिन्न बातें पूछें। साथ बिताए खूबसूरत पलों के बारे में बात करें। इससे उसे उस कठिन परिस्थिति से बाहर आने में मदद मिलेगी जिसका वह सामना कर रही है।
  • तनाव मुक्त वातावरण बनाएं: घरों के कामकाज में उसकी मदद करें और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या तनावपूर्ण स्थिति से बचें। संगीत चलाएं और उसके साथ नृत्य करें, उसे खाना पकाने, कपड़े धोने आदि में मदद करें, इससे न केवल उसे थोड़ी मदद मिलेगी बल्कि उसे अवसाद से दूर करने में भी आसानी होगी।
  • कुछ शारीरिक गतिविधियाँ: कुछ शारीरिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की कोशिश करें, जैसे बागवानी या कुछ बाहरी खेल आज़माएँ। अगर वह तैयार हो जाती है, तो उसे शारीरिक रूप से प्राप्त करने की कोशिश करें, क्योंकि आम तौर पर अवसाद के दौरान लोग सेक्स से अपनी रुचि खो देते हैं। लेकिन आप उसे प्रोत्साहित कर सकते हैं और इससे वह खुद को तनावमुक्त महसूस कर सकती हैं और आपका प्रेम उसे अवसाद से लड़ने में मदद कर सकता हैं।
  • घबराएं नहीं: जब आप जानते हैं कि आपकी पत्नी अवसाद से पीड़ित है, तो आपको स्थिति को समझना चाहिए और यदि आपका कोई भी काम पूरा नहीं हुआ है, तो चिल्लाने की कोशिश न करें। काम को स्वयं करने की कोशिश करें, क्योंकि यह वह समय है जब उसे आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है। उसे शांति से समझाने की कोशिश करें। यह संभव है कि आपको गुस्सा आ जाए, या फिर चिढ़ जाएं। लेकिन हमेशा याद रखें कि, यह वही महिला है जो हमेशा आपके लिए सब कुछ करती है और अब आपकी बारी है।
  • उसका समर्थन करें: हमेशा उसे प्रोत्साहित करें और उसे यह महसूस कराएं कि आप उसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। साथ ही उसे भावनात्मक और नैतिक समर्थन दें। उसे बताएं कि वह आपकी जिम्मेदारी है और आप उसके साथ बहुत खुश हैं। इस प्रकार का सकारात्मक कथन एक दवा के रूप में काम करता है।

चिकित्सा - उपचार आपकी पत्नी की अवसाद में कैसे मदद कर सकते हैं (How Medical Treatments may Help your Wife with Depression)

  • चिकित्सक से नियमित रूप से परामर्श लें:

हमेशा नियमित जांच कराएं और उचित दवाओं का सेवन कराएं। हालाँकि कुछ समय के बाद, आप महसूस कर सकते हैं कि वह ठीक है, लेकिन फिर भी लगातार अपने डॉक्टर से परामर्श लेते रहें। जब तक चिकित्सक स्वयं दवा लेने से मना न करें, और इस बात की पुष्टि न कर दें कि उसे किसी और दवा या उपचार की ज़रूरत नहीं है, तब तक इलाज चालू रखें। नियमित रूप से अपने डॉक्टर से सलाह लेते रहें।

  • कुछ उपचार:

अवसाद का इलाज करने के लिए हमेशा गोलियां लेना आवश्यक नहीं होता है, कभी-कभी डॉक्टर भी कुछ अलग उपचारों की सलाह देते हैं। कभी-कभी ये उपचार रामबाण के रूप में काम करते हैं।

  1. टॉक थेरेपी: आम तौर पर, यह सबसे अच्छे उपचारों में से एक के रूप में जाना जाता है और इस थेरेपी में डॉक्टर आपके किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थिति के बारे में नकारात्मक विचारों के पैटर्न और प्रकार का विश्लेषण करते हैं और एक बार जब उन्हें आपकी समस्या का पता चल जाता है, तो फिर उसका इलाज करना आसान हो जाता हैं। कई बार इस तरह की काउंसिलिंग से उनमें सकारात्मक दृष्टिकोण भी उत्पन्न हो जाता है। कभी-कभी वे रोगी का इलाज करने के लिए कुछ नाटकीय क्रियाएं भी करते हैं।
  2. कॉग्निटिव-बिहेवियरल थेरेपी (CBT): सीबीटी आपकी भावनाओं, विचारों, कार्यों, संवेदनाओं, आपके सभी प्रकार के नकारात्मक विचारों की ओर इशारा करता है। यह उन सभी कारकों को स्पष्ट  करता है और आपको उन सभी से विस्तृत तरीके से निपटने में मदद करता है। वे नकारात्मक चीजों को बदलते हैं। मानसिक उपचार से निपटने के लिए सीबीटी एक बहुत अच्छी चिकित्सा पद्धति है। कभी-कभी सीबीटी ने वहां भी काम किया है, जहां दवाएं फेल हो गई हैं। अतः यह अवसाद से निपटने में सबसे अच्छी चिकित्सा हो सकती है।
  3. इंटरपर्सनल थेरेपी (IPT): इस थेरेपी का उपयोग कई प्रमुख विकारों जैसे द्विध्रुवीय अवसाद, खाने का अवसाद, प्रसवकालीन अवसाद, रिश्तों में कठिनाइयों आदि के इलाज के लिए किया जाता है। यह चिकित्सा आपके सामाजिक या व्यक्तिगत कार्यों के आधार पर काम करती है। यह रोगियों के लिए अलगाव से उबरने में बहुत सहायक है। गंभीरता के आधार पर इस थेरेपी को पूरा करने में 13 से 16 सप्ताह का समय लग सकता है।
  4. समस्या-समाधान थेरेपी (PST): यह एक मनोवैज्ञानिक उपचार है जो तनाव और अवसाद से निपटने में मदद करता है। यह आपको अच्छे विचारों के साथ शांतिपूर्ण जीवन जीने में मदद करता है। यह तनाव किसी की मृत्यु के कारण, तलाक लेने या किसी को खोने, या किसी भी प्रकार की खतरनाक बीमारी होने या आपको नौकरी से निकाल दिए जाने के कारण हो सकता है।
  5. इलेक्ट्रो-कन्वल्सीव थैरेपी (ECT): इलेक्ट्रो-कन्वल्सीव थेरेपी में रोगी की मानसिक स्थिति के इलाज के लिए मस्तिष्क के माध्यम से छोटे-छोटे बिजली के झटके दिए जाते हैं। इसका उपयोग तब किया जाता है, जब अन्य उपचारों में से कोई भी काम नहीं करता है।

अवसाद के प्रकार (Types of Depression)

  • प्रमुख अवसाद: अवसाद की स्थिति जब कोई व्यक्ति मतिभ्रम (एक तरह का गलत विश्वास) होता है जो रोगी को वास्तविकता से बहुत दूर ले जाता है। उनके आसपास का वातावरण उन्हें केवल दुखी और निराश महसूस कराता है।
  • दृढ़ अवसादग्रस्तता विकार: अवसादग्रस्तता विकार सबसे लंबे समय तक रहता है, जो करीबन दो साल तक रह सकता है। इस प्रकार के मनोदशा विकार में व्यक्ति लगातार लंबे समय तक उदास महसूस करता है, और यह परिवर्तन उसके व्यवहार में बार-बार नज़र आ सकता है।
  • मानसिक अवसाद: जब कोई व्यक्ति भ्रम और सत्य के बीच भेद नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में मानसिक अवसाद विकार से ग्रस्त होने का ख़तरा बढ़ जाता है। वो ऐसी-ऐसी कल्पना करने लगती है, और सच मानने लगती है, जिसे आम लोग महसूस भी नहीं कर सकते। इसे मानसिक अवसाद (साइकोटिक डिप्रेशन) कहा जाता है। इस प्रकार के अवसाद में, रोगी आम तौर पर एक प्रकार का अपराधबोध, बीमारी या गरीबी महसूस करता है।
  • प्रसवोत्तर अवसाद: शिशुओं को जन्म देने के बाद शुरुआती कुछ दिनों के दौरान शरीर में एक हार्मोनल असंतुलन होता है, जिसे "बेबी ब्लूज़" नाम दिया गया है और इस अवधि में माँ एक पल के लिए खुश और दूजे ही पल दुखी हो सकती है। निराशा या कई प्रकार के डर, उसे कुछ दिनों के लिए (लगभग दो सप्ताह तक) बीमार और परेशान कर सकते हैं। लेकिन पोस्टपार्टम को बेबी ब्लू की तुलना में अधिक भयावह कहा जाता है। गर्भावस्था के दौरान और बाद में प्रसवोत्तर अवसाद अनुभव किया जा सकता है और इसमें महिलाएं कुछ समय के लिए बेहद उदास, क्रोधित या थकी हुई महसूस कर सकती हैं। इससे उन्हें स्वयं और बच्चे की दैनिक गतिविधियों को करने में परेशानी होती है।
  • मौसमी भावात्मक विकार (Seasonal Affective Disorder): अपने नाम के अनुसार यह मौसम के अनुसार होता है, खासकर सर्दियों में जब बहुत कम धूप होती है। जैसा कि प्रकाश हमारे जीवन में ऊर्जा भरता है। इसीलिए हमेशा उदास व्यक्ति को सूरज की रौशनी में अधिकतम समय बिताने का सुझाव दिया जाता है। सर्दियों में हम आम तौर पर अपने घरों में ही रहते हैं जिस कारण हमें धूप नहीं मिल पाता है, दिनभर आलस और नींद आता है, फलस्वरुप वजन बढ़ता है।
  • एकध्रुवीय या द्विध्रुवी विकार: यदि कोई अवसाद के प्राथमिक लक्षणों को दिखाता है, जैसे हर समय दुखी और निराश रहना, तब उसे एकध्रुवीय अवसाद कहेंगे, किंतु यदि वो व्यक्ति किसी प्रकार के ‘सनक’ (मेनिया) से भी ग्रसित हो, तब वह द्विध्रुवी अवसाद से ग्रस्त होना कहा जायेगा। वे दोनों स्थितियों में व्यक्ति सामान्य रूप से व्यवहार नहीं करते हैं और कभी-कभी दोनों के बीच अंतर करना बहुत मुश्किल हो जाता है।

अवसाद के कुछ सामान्य लक्षण (Some Common Symptoms of Depression)

हर बीमारी के कुछ निश्चित लक्षण होते हैं। जिसका जितनी जल्दी पता लग जाये उतना अच्छा होता है, और समय पर इलाज होने से जल्द ही ठीक हो सकता है। यदि आपको अपने साथी में इनमें से कोई भी लक्षण मिलते हैं, तो देर न करें।

नीचे चर्चा की गई अवसाद के कुछ प्रमुख लक्षण:

  • निद्रा विकार (स्लीपिंग डिसऑर्डर): एक उदास व्यक्ति या तो बहुत अधिक या बहुत कम सो सकता है। बहुत अधिक या बहुत कम सोना, दोनों ही हमारे लिए अच्छे नहीं हैं और एक तरह का विकार है। जैसे हमारे जीवन में हर चीज का संतुलन होना चाहिए, उसी प्रकार नींद का भी संतुलित होना अनिवार्य है। हर चीज़ की अति खराब होती है।
  • रुचि की कमी: आम तौर पर भी जब हम बीमार होते हैं, तो हमारा मन कहीं भी नहीं लगता है। बात जब अवसाद की हो, तो यह और भी ज्यादा खराब हो जाती है। यहां तक कि हम अपने सबसे पसंदीदा काम से भी अपनी रुचि खो देते हैं।
  • निराशा: जब व्यक्ति निराशा महसूस करता है, तो उसे उस समय सब कुछ बुरा और खराब ही लगता है, भले ही वो अपना जीवन ही क्यों न हो। जीवन उन्हें निराशाजनक और निरर्थक लगता है। उन्हें इससे उबरने के लिए वास्तव में कुछ प्रेरणा और समर्थन की आवश्यकता होती है।
  • अपराधबोध महसूस करना: अपराधबोध की भावना उनके मूड को खराब कर देती है और यह उन्हें बिना किसी कारण के कई दिनों तक दुखी रख सकती है।
  • चिंता: वे हमेशा अपने स्वयं के अत्यधिक विचारों के कारण दुःखी रहते हैं।
  • बार-बार आत्मघाती विचार आना: एक अवसाद ग्रस्त व्यक्ति में जीवन के प्रति निराशा बनी रहती है, जो उसे बार-बार जीवन को समाप्त करने के लिए प्रेरित करती रहती है। कभी-कभी वे आत्मघाती कार्य भी करते हैं।

कई अन्य लक्षण हैं, जैसे कि क्रोध, एकाग्रता की कमी, थकान, अचानक वजन बढ़ना या घटना, और कुछ अप्रत्याशित शारीरिक गतिविधि आदि भी शामिल हो सकते हैं।

अवसाद के लिए जिम्मेदार कारक क्या हैं? (Causes of Depression)

किसी भी प्रकार के परिवर्तन के लिए हमेशा कुछ कारक जिम्मेदार होते हैं और बीमारी एक प्रकार का परिवर्तन है जो हमारे शरीर के लिए अच्छा नहीं है। हमने नीचे कुछ प्रमुख कारकों पर प्रकाश डाला है:

  • बायोकेमिकल-परिवर्तन: आम तौर पर, हमारा शरीर कुछ सामान्य कार्य करता है, जिसमें हमारी तंत्रिका कोशिकाएं मस्तिष्क को कुछ संकेत भेजतीं हैं, जिन्हें न्यूरोट्रांसमीटर कहा जाता है। वे संदेश को तंत्रिका कोशिकाओं की श्रृंखला तक पहुंचाते हैं। एक उदास व्यक्ति में, न्यूरोट्रांसमीटर आम तौर पर संदेश को पारित करने में विफल होते हैं या हम कह सकते हैं वे सामान्य रूप से कार्य नहीं करते हैं और व्यक्ति अनुचित सिग्नल ट्रांसमिशन के कारण अलग व्यवहार करता है।
  • पर्यावरण परिवर्तन: पर्यावरण भी अवसाद की वृद्धि में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चूंकि सर्दियों में बहुत कम धूप मिलती है और लोग आम तौर पर अपने घरों में ही रहते हैं जिसके कारण उन्हें बहुत नींद आती है और अवसाद भी होता है।
  • शारीरिक बीमारी: जब कोई व्यक्ति कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होता है, तो यह स्वाभाविक रूप से व्यक्ति को घोर निराशा में ले जाता है। क्योंकि उनके मन में एक प्रकार का भय विकसित हो जाता है और यह अवसाद की ओर ले जाता है।
  • सामाजिक परिवर्तन: कई बार, जब लोग अपने करीबी लोगों को खो देते हैं, वे अंदर से टूट जाते हैं और अपनों को खोने का गम उन्हें अंदर ही अंदर दुःखी करता रहता है, जिससे अवसाद होता है।
  • आनुवांशिक: द्विध्रुवी विकार, मानसिक अवसाद और उदासीनता अवसाद एक प्रकार का जीन के अनुचित संयोजन के कारण होने वाले अवसादो में से हैं, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक अवसाद को ले जाते हैं।
  • किसी भी प्रकार की दवाओं का सेवन: एंटीबायोटिक्स का सेवन भी अवसाद का कारण बन सकता है। कई बार कई अन्य गोलियां भी अवसाद का कारण बनती हैं, इसलिए हमें हमेशा सभी संभावनाओं की जांच-पड़ताल कर लेनी चाहिए, फिर अवसाद से निपटना चाहिए।
  • लिंग: लिंग भी अवसाद को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक डिप्रेशन पाया जाता है। गर्भावस्था की तरह कुछ जैविक हार्मोनल असंतुलन और शरीर में परिवर्तन के कारण भी औरतें ज्यादा अवसाद ग्रस्त होती है।

अवसाद विभिन्न आयु समूहों के लोगों को कैसे प्रभावित करता है?

  • पुरुष: शोध में पाया गया है कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में आत्महत्या करने की संभावना चार गुना ज्यादा होती है। आम तौर पर, पुरुष अपनी भावनाओं को दर्शाते नहीं हैं, इसलिए उदास पुरुषों को ढूंढना थोड़ा मुश्किल होता है। आम तौर पर, वे कुछ ऐसे कार्य चुनते हैं जो बहुत अच्छे नहीं होते। जैसे वे शराब का सेवन करना शुरू कर देते हैं, और नशे की हालत में गाली-गलौज और भी कई अवांछित क्रियाएं भी कर सकते हैं। आम तौर पर, पुरुष डिप्रेशन में होने पर अपने कार्यालय में अधिक समय बिताते हैं या अपने दोस्तों के साथ समय बिताना पसंद करते हैं।
  • महिला: महिलाओं में पुरुषों की तुलना में दोगुना अवसाद होता है। आम तौर पर जीवन के विभिन्न चरणों में होने वाले कुछ जैविक परिवर्तनों के कारण महिलाओं को इसका सामना करना पड़ता है। इसके कई अन्य कारण जैसे गर्भावस्था, रजोनिवृत्ति आदि जैसे तनाव, किसी भी तरह की हिंसा, या बहुत अधिक वजन बढ़ना आदि, हो सकते हैं। कई कारक महिलाओं में अवसाद के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • किशोर: इस उम्र में होने वाले कुछ जैविक परिवर्तनों (हार्मोन परिवर्तन) के कारण कुछ समय के लिए अवसाद का सामना करना पड़ सकता है। यह उनके शरीर, आवाज को प्रभावित करता है और कभी-कभी कुछ तनावपूर्ण स्थिति पैदा करता है, जिससे अवसाद होता है।

निष्कर्ष

अवसाद को ठीक किया जा सकता है और विशेष रूप से जब वह आपकी पत्नी को हो, तो आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो उसे आपसे बेहतर जानता-समझता हो। मुख्य बात यह है कि उसे अकेला न छोड़ें और उसे हमेशा खुश रखने की कोशिश करें। हम अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों का सामना करते हैं और उनसे कैसे निपटना है, यह हम पर निर्भर करता है। हर रात के बाद एक सुबह होती है, इसलिए अपनी आशा को मत खोइए, वह जल्द ही ठीक हो जाएगी। फिर भी उचित उपचार करें, क्योंकि दवा उसे (आपकी पत्नी को) जल्द ही ठीक करने में मदद कर सकती है और दवाओं के साथ-साथ थेरेपी को भी जारी रखें और दूसरी सबसे अच्छी दवा, अपनी पत्नी के लिए सिर्फ आपका प्यार, रामबाण की तरह काम करता है, उसे बनाए रखें।