दिवाली पूजा

दिवाली पूजा (लक्ष्मी पूजा और गणेश पूजा)

दिवाली हिन्दूओं का बहुत महत्वपूर्ण और परंपरागत त्यौहार है, त्यौहार में कई हिंदू देवी-देवताओं की पूजा शामिल है, लेकिन मुख्य रूप से भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी जी की मंत्र, आरती, प्रार्थना, प्रसाद और बलिदान के माध्यम से हिन्दू धर्म में पूजा की जाती है। भक्तों द्वारा अपने भगवान की कर्मकांडवादिता और परंपरागत ढंग से पूजा की जाती हैं। देवी सरस्वती, भगवान शिव, और नौ ग्रहों की भी इस महान अवसर पर पूजा की जाती है। अग्नि देवता के साथ साथ अन्य हिन्दू देवी देवताओं की भी पूजा की जाती है। हिन्दूओं में दीवाली पूजा करने के 16 चरण है जैसे: भगवान का स्वागत करना, बैठने के लिये साफ जगह देना, पैर धोना, देवी देवताओं को अलंकरित करना, आवश्यक तत्व अर्पित करना, भगवान को वस्त्र पहनाना आदि क्रियाऍ देवी देवताओं का आशीर्वाद पाने के लिये की जाती है। किसानों द्वारा पशुओं को भी सजाया जाता है और पूजा की जाती है क्योंकि वे मानते है कि मवेशी भी धन और स्वास्थ्य के असली स्त्रोत है।

लोगों द्वारा हिंदू देवी-देवताओं के लिए एक विशेष पूजा, घरों की सफाई, भजन गाना, मंत्रों का जाप, घंटी बजाना, प्रसाद की किस्म अर्पित करना, शंख बजाना, आरती पढ़ना, प्रसाद बाँटना और परिवार में बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेकर की जाती है। लोग अन्धकार या बुराई को दूर करने और भगवान के आशीर्वाद का प्राप्त करने के लिये अपने घर के चारों ओर मिट्टी के दीये जलाते है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि देवी लक्ष्मी सबके घर आयेंगी और अपने भक्तों को अपना आशीर्वाद और समृद्धि प्रदान करेंगी। पूजा करने के बाद लोग घर की बनी हुई और तैयार की गयी मिठाईयाँ नवैध के रुप में देवी को अर्पित करते है और उसी मिठाई को परिवार के सदस्यों को प्रसाद के रुप में वितरित करते हैं। देवी देवताओं का आशीर्वाद लेने के लिये लोग इस प्रसाद को अपने माथे से लगाकर खाते हैं। पूजा के बाद लोग एक दूसरे को उपहार और मिठाईयाँ देते है।

दिवाली पूजा की प्रक्रिया

दिवाली पूजा शाम को सूरज छिपने के बाद परिवार के सभी सदस्यों द्वारा पूजा स्थान पर इकट्ठा होकर शुरु की जाती है। यह माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से आशीर्वाद, शान्ति, समृद्धि और धन की बौछार होगी। देवी और देवता की मूर्ति के आगे पाँच घी के दीये, सभी अर्पित करने वाले नवैध रखकर लोग देवी लक्ष्मी और गणेश जी के सम्मान में गीत गाकर पूजा शुरु करते हैं। पूजा आरती पढ़कर और प्रसाद बाँटने के साथ समाप्त होती है। लोग अपने जीवन के साथ-साथ संसार से भी अन्धकार को दूर करने के लिये अपने घर के चारों ओर दीये जलाते है।

दिवाली पूजा प्रक्रिया का क्रम

  • पूजा के स्थान की सफाई, प्रत्येक हिन्दू देवी देवता को पानी, पंचामृत, गुलाब जल और फिर साफ पानी से नहलाना।
  • मूर्ति को साफ करके कलश पर रखना, मूर्ति के सामने घी का दीया जलाना।
  • पंचामृत (पाँच तत्वों दूध, चीनी, शहद, दही, घी में शामिल तुलसी दल या तुलसी के पत्तों से बना) रखना।
  • कुछ मिठाई और फल को प्रसाद के रुप में रखना।
  • गुलाब और गेंदा के फूल, हल्दी, लाल अबीर और रोली रखना।
  • अगरबत्ती और घी के बडे दीये लेना।
  • मिठाई, फल, दक्षिणा, पान के पत्ते और लौंग अर्पित करके भगवान से प्रार्थना करना।
  • किसी और देवता की पूजा करने से पहले गणेश जी की पूजा करना और आरती पढना।
  • कमल के फूल पर देवी लक्ष्मी की प्रतिमा रखकर उनके पैरों में लाल फूल रखकर, पूजा में उनके सामने सिक्का रखकर देवी लक्ष्मी की पूजा करना। फिर प्रतिमा पर गुलाब की पंखुड़ियाँ फैलाकर मंत्र और आरती पढें।
  • और अन्त में उनके पैरों में अपना सिर झुका कर नमस्कार करना, परिवार में बडों के पैर छूना, प्रसाद बाँटकर पटाखे जलाना।

गणेश पूजा

हिन्दूओं में किसी भी देवी या देवता की पूजा के पहले भगवान गणएश जी की पूजा करने की संस्कृति और परंपरा है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार,यह माना जाता है कि गणेश जी की पूजा के बिना की गयी पूजा अधूरी रहती है। भगवान गणेश जी को विघ्नविनाशक कहा जाता है क्योंकि वे मनुष्य के जीवन से सभी कठिनाईयों को नष्ट करते है। भगवान गणेश प्रत्येक दिवाली पर लोगों द्वारा आशीर्वाद, बुद्धि, शान्ति और समृद्धि प्राप्त करने के लिये पूजे जाते है। पूरे भारत में भगवान गणेश किसी भी नई परियोजना, व्यापार, उद्यम, व्यवसाय या यहां तक कि जन्मदिन पूजा शुरू करने से पहले श्रद्धालुओं द्वारा पूजे जाते है।

भगवान गणेश जी की पूजा बहुत बडी व्यवसायिक हानि से ग्रसित, नया व्यवसाय खोलने वालो और नयी शादी होने वाले उन सभी व्यक्तियों के जीवन से सभी बाधाओं को हटाने के लिये बहुत लाभदायक होती है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान की पूजा निम्नलिखित लाभ देती है:

  • मानव जीवन की दैनिक दिनचर्या की सभी समस्याओं को दूर करती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्यार के बंधन में सुधार होता है।
  • लोगों अपनी बीमारियों से राहत मिलती है।
  • बिना किसी भी बाधा के पूर्व नियोजित उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती हैं।
  • किसी भी परेशानी के बिना अध्ययन, व्यापार के कार्य में सफलता प्राप्त करने में मदद मिलती है।
  • शिक्षा और विवाह को पूरा करने में मदद मदद मिलती है।
  • स्वास्थ्य, धन और लोकप्रियता बनी रहती है।
  • जीवन के सभी जिम्मेदारियों के प्रबंधन में मदद।
  • जीवन के विभिन्न पहलुओं पर समृद्धि को प्राप्त करने में मदद करते हैं।

गणेश पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

नारियल, धूप बत्ती, अगरबत्ती, कपूर लाल कपड़ा, हल्दी, लाल फूल, लाल तिलक, पंच अमृत, गणेश की प्रतिमा, तुलसी के पत्ते, बीटल पत्ते, लाल चंदन, दूब घास, फल, घी, दीये, हवन कुंड, लड्डू या मोदक, हवन कुंड सामग्री, कच्चे चावल, पुरोहितों के लिए दान दक्षिणा, तांबे पर गणेश यंत्र।

गणेश पूजा कैसे करते है

दिवाली भारत का बडे पैमाने पर मनाया जाने वाला त्यौहार है जिसमें घर पर गणेश पूजा भी शामिल है। यहां हिन्दू शास्त्रों के अनुसार घर में गणेश पूजा करने के लिए कुछ उपाय दिये गये हैं:

  • दीवाली की शाम को पूजा के कमरे की सफाई के बाद, भक्त सबसे पहले नहाते है।
  • भगवान गणेश की प्रतिमा को पूजा के स्थान पर रखते है।
  • भगवान गणेश के लिए प्रतिबद्ध मंत्र, भजन पढ़ कर भगवान से प्रार्थना करें।
  • पूजा के स्थान पर भगवान गणेश का ध्यान करना, जिसे प्राण प्रतिष्ठा के नाम से भी जाना जाता है।
  • भगवान के ध्यान के बाद, आरती करके दीया जलाते है।
  • दूब घास की पत्ती अर्पित करते है (21)।
  • मोदक या लड्डू अर्पित करते है (21), 21 अंक, 5 क्रिर्याशील अंगो, 5 ज्ञानेद्रियों, 5 स्वश्नेद्रियों, 5 तत्वों और 1 मस्तिष्क को इंगित करता है।
  • लाल गुलाब या फूल माला अर्पित करते है।
  • लाल चंदन के लेप के साथ तिलक करें।
  • नारियल तोड़ कर चढायें। इसके अलावा उनके वाहन, चूहे के लिए कुछ तला हुआ अनाज भेंट करें।
  • भगवान गणेश को नमस्कार करके ध्यान लगाकर प्रार्थना करों।
  • आरती करके पैर छू कर आशर्वाद लो और प्रसाद वितरित करों।

 

लक्ष्मी पूजा

लक्ष्मी पूजा पारंपरिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान है जो हर साल दीवाली के दौरान किया जाता है। लोगों घरों के अंदर के साथ साथ बाहर भी तेल और घी के बहुत से दीये जलाकर लक्ष्मी पूजा करते हैं। उनका ऐसा विश्वास है कि सभी जगह दीये जलाने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होंगी और हमेशा के लिये उनके घर में आयेंगी। लोग देवी लक्ष्मी की पूजा आशीर्वाद पाने और धन और स्वास्थ्य में धनी होने के लिये करते है। वे देवी लक्ष्मी को घर में प्रवेश कराने के लिये घर के प्रत्येक कोने को साफ करते है। उनका विश्वास है कि साफ-सफाई धन और खुशहाली लायेगी वहीं गन्दगी लोगो को आलसी और सुस्त बनायेगी।

लक्ष्मी पूजा कब की जाती है

दिवाली उत्सव का तीसरा दिन बहुत महत्वपूर्ण और मुख्य दिवाली का दिन होता है, जब लोगों द्वारा लक्ष्मी पूजा की जाती है। पूरे वर्ष आशीर्वाद और धन प्राप्त करने के लिए वे इस पूजा को करने के लिए बहुत उत्सुक और समर्पित हैं। यह सबसे शुभ और चमत्कारिक दिन अमावस्या की अंधेरी रात को पडता है। लोग धन्य हैं क्योंकि अंधेरी रात बीत गयी और प्रकाश की असंख्य किरणें (आशीर्वाद की वर्षा के रूप में) उनके जीवन में स्थायी रूप से आयेंगी।

लक्ष्मी पूजा के बाद, दीपक जलाने की रस्म सभी घरों, सड़कों, नीम के पेड़, और अन्य स्थानों पर भी शुरू कर दिया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार पूजा से पहले बिना किसी भी स्थान को छोडे पूरे घरों को साफ करना बहुत आवश्यक है। यह माना जाता है कि धन की देवी पहले घर का मुआइना करेंगी तब आशीर्वाद की बारिश करेंगी। पूजा आम तौर पर हल्दी, कुमकुम और प्रसाद अर्पित करके की जाती है।

लक्ष्मी पूजा में पाँच हिंदू देवी-देवताओं की संयुक्त पूजा शामिल है

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा में पाँच हिंदू देवी-देवताओं की एक संयुक्त पूजा शामिल है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि सबसे पहली पूजा में भगवान गणेश (विघ्नेश्वर) की पूजा यह सुनिश्चित करने के लिये की जाती है कि पूजा पूरी हो गयी है। देवी लक्ष्मी के तीन रूप हैं जिनकी तदनुसार पूजा की जानी चाहिए। तीन रूप महालक्ष्मी (धन, समृद्धि और धन की देवी के रूप में जाना जाता है), महासरस्वती (बुद्धि और ज्ञान की देवी के रूप में जाना जाता है), और महाकाली (समस्याओं हटानेवाली के रूप जानी जाती है) है। पांचवें हिंदू देवता भगवान कुबेर (देवताओं के कोषाध्यक्ष के रूप में जाना जाता है) है, जिनकी दीवाली पर पूजा की जाती है।

 

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के संस्कार

जैसे ही यह दिन नजदीक आता है लोग अपने घरों, रास्तों, रसोई, मवेशियों के कमरे आदि अन्य स्थानों की साफ सफाई और रंगाई कराते है। वे अपने घरों, रास्तों, अध्ययन कमरे, कार्यालयों, और उनके घर के पास के सभी स्थानों को विद्युत उपकरणों और दीये के साथ सजाते है। वे अपने मुख्य गेट के सामने के साथ ही सभी कमरों के केंद्र में रंगोली बनाते है। वे अपने घर देवी लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए दरवाजे पर कृत्रिम रूप से बनाये गये लक्ष्मी जी के पैर चिपकाते हैं।