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मोबाइल की लत पर निबंध

आज हम सभी के हाथ में एक टुल है, जिसे मोबाइल कहते हैं। मोबाइल की लत से आशय मोबाइल के न होने पर असहज (discomfort) महसूस करने से है। वर्तमान में हम बहुत अधिक हद तक मोबाइल पर निर्भर है। इसके ऑफ हो जाने पर या गिर जाने पर ऐसा लगता है जैसे सीने पर चोट लगी है। प्रतीत होता है जैसे डिजीटल इंडिया का मार्ग मोबाइल से होकर ही गुज़रता है। मोबाइल का साइज़ उसे यात्रा अनुकूल (Travel Friendly) बनाता है, इस वजह से लोगों को और अधिक मोबाइल की लत (बुरी आदत) होती जा रही है। यह हर लहजे से हमारे आने वाले जीवन के लिए बुरा है।

मोबाइल की लत पर छोटे-बड़े निबंध (Short and Long Essay on Mobile Addiction in Hindi)

निबंध - 1 (300 शब्द)

परिचय

मोबाइल फ़ोन हमारे जीवन का अभिन्न अंग हो गया है, इसके आभाव में हमारे अनेकों महत्वपूर्ण काम रुक जाते हैं। जब व्यक्ति खुद को अपने मोबाइल फ़ोन से दूर नहीं रख पाता, इस स्थिति को मोबाइल की लत (Addiction of Mobile) कहते हैं। मोबाइल फ़ोन का अविष्कार वर्तमान में व्यक्ति के लिए वरदान है। जिस तरह ज्यादा मीठा सेहत के लिए अच्छा नहीं होता, वैसे ही वरदान का इतना उपयोग मतलब मोबाइल की लत भी सेहत के लिए अच्छी नहीं होती ।

मोबाइल का अविष्कार

मोबाइल फ़ोन के अविष्कारक मार्टिन कूपर हैं, इन्होंन अपनी टीम के साथ मिलकर अनेक प्रयासों के बाद 1973 में मोबाइल के रूप में दुनिया को एक सुंदर उपहार दिया। पहला मोबाइल फ़ोन 2 किलोग्राम का था और बहुत महंगा था। समय बीतने के साथ यह आम नागरिक के लिए सामान्य हो गया।

मोबाइल फ़ोन की लत क्या है

मोबाइल की लत में हम स्वयं को अपने मोबाइल से दूर नहीं रख पाते हैं। कोई विषेश काम न होने पर भी हम मोबाइल को स्क्रोल करते रहते हैं। आज के समय में हमें मोबाइल की इतनी बुरी लत है, इसका अनुमान आप इस वाक्य से लगा सकते हैं- ‘मोबाइल की लत को दूर करने के उपाय हम घंटों लगाकर मोबाइल पर ही ढुंढते हैं’। यह आदत हमारे जीवन को बहुत अधिक प्रभावित करता है।

मोबाइल की लत हमारे स्वस्थ्य के लिए हानिकारक है

हमारे स्वास्थ्य पर मोबाइल फ़ोन के लत का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। इसके अधिक उपयोग से व्यक्ति में चिड़चीड़ापन का होना, हमेशा सिर दर्द की समस्या, नेत्र संबंधित समस्या, अनिंद्रा व मोबाइल के हानिकार रेडिएशन से हृदय संबंधित रोग भी हो सकते हैं।

निष्कर्ष

कुछ साल पहले तक मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल कर पाना सबके बस में नहीं था, पर समय बीतने के साथ आज आम तौर पर यह सभी के पास देखा जा सकता हैं। मोबाइल की लत ने हमारे जीवन को बहुत अधिक प्रभावित किया है, अतः हमें इस लत को दूर करने के प्रयास करने चाहिए।

 

निबंध - 2 (400 शब्द)

परिचय

जब कोई व्यक्ति मोबाइल के अभाव में स्वयं को असहज महसूस करता है, उसे मोबाइल का लत कहते है। बेशक मोबाइल ने हमारा अनेकों काम आसान किया है पर समय बीतने के साथ हम मोबाइल के अधिन हो गए है। मोबाइल के ऑफ हो जाने पर कई लोगों का मूड भी ऑफ हो जाता है। वह गुस्सा करने लगते हैं। यह सही संकेत नहीं तथा इसका साफ तौर पर यह मतलब है आप ‘नोमोफोबिया’ के शिकार हो गए है। यह ज़रूरत से ज्यादा मोबाइल के उपयोग करने से होता है।

हमारे जीवन पर मोबाइल की लत का प्रभाव

किसी भी सामाग्री की लत व्यक्ति को अनेक समस्याओं से घेर देता है। मोबाइल की लत भी मनुष्य के साथ यही व्यवहार करता है। इसमें व्यक्ति अपने जीवन में अनेक समस्याओं से घिर जाता है-

  • अपनों से दूरी - ‘अपनो से जोड़ना’ कहां मोबाइल की परिभाषा के रूप में पढ़ा जाता था। आज अपनों से दूरी का मुख्य कारण मोबाइल है। व्यक्ति एक रूम में एक साथ होने के बाद भी पास बैठे लोगों में अपनी कोई रुचि नहीं दिखाता और अपने-अपने मोबाइल के स्क्रीन स्क्रोल करता रहता है। इससे आपसी संबंध कमज़ोर होते हैं।
  • स्वस्थ्य पर बुरा प्रभाव - मोबाइल के लगातार इस्तेमाल से उससे निकलने वाली हानिकारक रेडिएशन से हमें हृदय संबंधी रोग हो सकते है। इसके अलावां आँखों के रौशनी पर भी गहरा असर पड़ता है। साथ ही सिर दर्द, नींद न आना, चिड़चीड़ापन, याददाश्त का कमज़ोर होना अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं हो सकते हैं।
  • जीवन के दौड़ में पीछे रह जाना - बेशक टेकनॉलजी के माध्यम से हम विकास की ओर बढ़ पाते है, जिसमें मोबाइल फ़ोन मुख्य भूमिका निभाता है। क्योंकि सबके पास पढ़ाई के लिए लैपटॉप या कम्पूटर नहीं हो सकता पर मोबाइल होता है। जिसकी मदद से वह अपने संदेह दूर कर सकते हैं पर मोबाइल की लत में आज लोग घंटों अपना किमती समय मोबाइल को दे देते हैं। जिससे उनका ध्यान पढ़ाई पर नहीं लगता है। अपने व्यवसाय में वह अपना पूर्ण योगदान नहीं दे पाते हैं।
  • खुद में ही खोए रहते हैं और खुद से दूर होते चले जाते हैं। हम पढ़ाने वाले समय पर भी खुद से झुठ बोलकर मोबाइल पर पढ़ाई करने के बहाने ढुंढ़ते हैं।

निष्कर्ष

मात्र शराब सिगरेट की लत ही व्यक्ति के जीवन को संकट में नहीं डालते अपितु संसार के किसी भी वस्तु या सामाग्री की लत हमारे लिए हानिकारक है। उनमें से एक मोबाइल फ़ोन की लत है। जिसके वजह से जीवन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित अनेक समस्याएं व्यक्ति के लिए उत्पन्न होती हैं।


 

निबंध – 3 (500 शब्द)

परिचय

मोबइल फ़ोन हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है तथा इसका अविष्कार यंत्रों की दुनिया में क्रांति लेकर आया है। आज के समय में हमारे बहुत सारे काम मोबाइल की सहायता से घर-बैठे ही कुछ मीनट में हो जाते हैं। पर मोबाइल के इतना अधिक उपयोग ने हमें उसका आदी बना दिया है। जिसके वजह से हम एक पल के लिए भी अपने मोबाइल को खुद से दूर नहीं रखना चाहते हैं। यह हमारे जीवन पर अनुचित प्रभाव डालता है।

नोमोफोबीया क्या है

मोबाइल के न मिलने पर या खो जाने पर हम सभी परेशान हो जाते है पर बहुत अधिक चिंता का होना  नोमोफोबीया कहलाता हैं। इसमें मोबाइल के न होने पर व्यक्ति असहज महसूस करता है तथा उसे बहुत अधिक घबराहट होने लगता है। विश्व भर में किए गए शोध से पता चला है, नोमोफोबिया की शिकायत तेजी से बढ़ती जा रही है। मोबाइल फ़ोन को बहुत अधिक चलाने से यह बीमारी हो सकती है।

नोमोफोबीया के लक्षण

  • मोबाइल से संबंधित सपनें आना - नोमोफोबिया में संबंधित व्यक्ति को मोबाइल चोरी होने या गिर जाने के सपनें आते हैं, इससे वह घबराहट में नींद से उठ जाता हैं। ऐसा दिन भर मोबाइल की चिंता करने के वजह से होता है।
  • पैंनिक होना - हम सभी अपने किमती सामानों के न मिलने पर घबरा जाते हैं, पर नोमोफोबीया में व्यक्ति का मोबाइल खो जाने पर वह इतना घबरा जाता है की उसे पैंनिक अटैक आ सकते हैं।
  • मोबाइल को स्वयं से दूर नहीं रखना - नोमोफोबिया का अर्थ नो मोबाइल फोबिया है, इसमें व्यक्ति किसी भी स्थिति में मोबाइल को स्वयं से दूर नहीं कर सकता। वह जहां कहीं भी जाता है मोबाइल लेकर हीं जाना पसंद करता है। सोने पर भी वह अपने समीप ही मोबाइल को रख कर सोता है।
  • बार-बार कॉल के आने का आभास होना - नोमोफोबिया में बार-बार व्यक्ति को कॉल आने का आभास होता है, उसे लगता है मोबाइल की रिंग जैसे बज रही हो।

यह कुछ लक्षण है, जिससे मालुम चलता है व्यक्ति नोमोफोबिया का शिकार हो चुँका है, अतः सही समय पर इससे छुटकारा पाने के लिए उचित कदम उठाना चाहिए।

मोबाइल की अधीनता

मोबाइल की लत ने व्यक्ति को अपने अधीन कर लिया है। गैजेट हमारे उपयोग के लिए है पर यहां गैजेट्स हमारा उपयोग कर रहे हैं। व्यक्ति को मोबाइल की ऐसी लत है की वह पास बैठे लोगों से बात करने के स्थान पर सोशल मीडिया पर मित्रों से लगा रहता है। इससे उसके अपनों से आपसी संबंध कमज़ोर होते चले जाते है। साथ ही व्यकि के जीवन की विभिन्न पहलुओं को भी यह लत प्रभावित करता है जैसे स्वास्थ्य, आजीविका (career), अध्ययन आदि।

निष्कर्ष

मोबाइल के लत से होने वाली बीमारी को नोमोफोबिया कहते हैं। इसके लक्षण को पढ़ कर साफ तौर पर पता चलता है व्यक्ति कितना ज्यादा इस यंत्र के अधीन है। नोमोफोबिया हमें अपनों से दूर करता है और इसके साथ स्वास्थ्य संबंधित अनेक समस्याएं व्यक्ति को देता है जैसे सिर दर्द, गर्दन दर्द, नेत्र रोग आदि। इस बीमारी का व्यक्ति को सही समय पर पता चलना आवश्यक है, नहीं तो इसके बुरे परिणाम हो सकते हैं।

 

निबंध – 4 (600 शब्द)

परिचय

विशेष काम में मशरूफ होने के दौरान, किसी विज्ञापन का नोटीफिकेशन आने पर यह जानते हुए की इस नोटीफिकेशन का हमारे लिए कोइ महत्व नहीं मोबाइल को देखे बिना न रह पाना मोबाइल की लत है। किसी जरूरी समारोह के दौरान यह सोचना मोबाइल देखलु कहीं किसी का कॉल तो नहीं आया, मोबाइल अडिक्शन है। इसमें कोई संदेह नहीं मोबाइल हमारे जीवन का अभिन्न अंग हो गया है, व्यक्ति उठने के बाद सबसे पहले मोबाइल देखता है, पर किसी भी सामाग्री, वस्तु या व्यक्ति के लत का हमेशा घातक परिणाम होता है।

जैसे हर सिक्के के दो पहलु होते है वैसे ही मोबाइल फ़ोन के लाभ तथा हानि दोनों हैं और यह हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं।

मोबाइल फ़ोन के लाभ

  • मोबाइल फ़ोन अपने मूल्य के वजह से संचार का सबसे अच्छा माध्यम हैं। यह मार्केट में कम मूल्य से लेकर बहुत अधिक मूल्य तक उपलब्ध है।
  • मोबाइल फ़ोन में इंटरनेट के ज़रीए व्यक्ति किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को प्राप्त कर सकता है।
  • मोबाइल मनोरंजन का एक बेहतरीन साधन है, जिससे लोगों का मूड लाइट हो जाता है।
  • मोबाइल के माध्यम से हम अपनों से कितने भी दूर हो उनका हांल पूछ सकते हैं, उनसे जुड़े रह सकते हैं।
  • इसके अतिरिक्त मोबाइल फ़ोन से हम घर बैठे ही खाना ऑडर कर सकते हैं, टिकट बुकिंग, शॉपिंग, मोबाइल बैकिंग जैसे विषेश काम कर सकते हैं।

मोबाइल फ़ोन के हानि

  • मोबाइल में अनेक ऐसे एप्लिकेशन हैं जिससे व्यक्ति पूरा-पूरा दिन दोस्तों से बाते करते रह सकते हैं, जैसे- वॉट्सएप, फेशबुक, इन्टाग्राम आदि। इसके वजह से बच्चे पढ़ाई में समय नहीं देते, बड़े अपने काम पर ध्यान नहीं देते हैं।
  • मोबाइल फ़ोन के हद से ज्यादा उपयोग से हम अनेक तरह के रोगों के चपेट में आ सकते हैं जैसे- आँखों का कमज़ोर होना, सिर दर्द, कम सुनाई देना, तनाव, अनिंद्रा आदि।
  • मोबाइल में सब कुछ आसानी से मिल जाने के वजह से हमारी याद करने की क्षमता कम होती जा रही है।
  • मोबाइल की लत में पड़ा व्यक्ति सुबह उठने के बाद सबसे पहले मोबाइल चैक करता है, जब तक नींद न आ जाए मोबाइल उपयोग करता है तथा सोने के बाद भी अपने सिरहानें उसे रख कर सोता है। बेशक इस उपकरण से ज्यादा महत्वपूर्ण लोग आपके जीवन में हैं, उन्हें महत्व देना चाहिए।
  • मोबाइल की लत से समय का दुरोपयोग होता है, समय से न सोना, समय से न उठना हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है।
  • मोबाइल में आज अनेक तरह के गेम्स बच्चों को मिल जाते हैं, इसके फलस्वरूप बच्चें बाहर खेले जाने वाले खेल से कटते जा रहे हैं।
  • मोबाइल में लोग कभी-कभी बहुत लीन हो जाते हैं, जिससे वह किसी बड़े हादसे का शिकार हो जाते है या उनके सामने ही कोई बड़ा हादसा हो जाता है।

उपाय

  • मोबाइल उपयोग तथा दोस्तों से बात करने के लिए एक निश्चित समय तय करें।
  • एक पूरे दिन में तीन घंटे बहुत होते है मोबाइल उपयोग करने के लिए अतः इससे ज्याद न करें।
  • मोबाइल उपयोग करने के स्थान पर आउटडोर गेम्स, रोचक कार्य तथा दोस्तों व अपने परिवार जनों के साथ समय बीताए।
  • मोबाइल की लत से छुटकारा पाने के लिए अपने बड़ों से सहायता ले सकते हैं।
  • स्वयं को अनुशासित करने का प्रयास करें इससे मदद मिलेगा।

निष्कर्ष

मोबाइल के लाभ तथा हानि दोनों होते हैं। सहीं प्रकार से उपयोग करने पर यह हमारा काम आसान करता है पर मोबाइल की लत में, व्यक्ति के मोबाइल उपयोग करने के स्थान पर मोबाइल व्यक्ति का उपयोग करने लगाता है। अतः हमें मोबाइल की लत में नहीं पड़ना चाहिए।

लक्ष्मी श्रीवास्तव

लक्ष्मी श्रीवास्तव ने अर्थशास्त्र एवं पत्रकारिता में स्नातक किया है। इनकी समाज कल्याण के कार्यों में अति रूचि है। इस कारण इन्होंने समाज कार्य में परास्नातक किया है। इनके अनुसार, लेखनी ही वो विधा है, जिससे हम बड़ी आसानी से अपनी बात लोगो तक पहुँचा सकते हैं। ये अपना ज्यादातर समय सृजनात्मक कार्यों में लगाती है।

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लक्ष्मी श्रीवास्तव

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