कविता

बाबा साहेब पर कविता

एक दिन ऐसा भी था
गले में हांड़ी, कमर में झाड़ू था,
गायों के दूध वो पीते लेकिन
मरने पर चमड़ा सिर्फ हमारा था।

एक भारत ऐसा भी था,
जहाँ दलित की ज़िन्दगी,
जानवर से भी बदतर थी,
पशु पी सकते थे पानी,
लेकिन हमें ये सम्मान न था।

अगर बनाया सबको भगवान ने,
तो मंदिर में प्रवेश क्यों न था?
हमारे पूर्वज भी राजा थे,
पर इतिहास ने उनको राक्षस कहा ।

भीषण, हनुमान-सा बल था उनमें,
दिमाग़ तलवार-सा धार था,
शासन में न्याय, युद्ध में जीत
फिर भी मनु ने छीन लिया अधिकार था।

ब्रह्मा के पैर से जन्मे हो तुम,
शूद्र हो, अछूत हो
न पढ़ने का हक, न जीने का,
यही मनु का विधान था।

हमें क्या पता भगवान कैसा होता है,
पर जिसने बदला हमारा इतिहास
संविधान में कलम से लिख दिए
समान अधिकार और सम्मान।

शायद ऐसा ही होता है भगवान…
वो थे बाबासाहेब महान!
वो थे बाबासाहेब महान!

— नवीन भारत

अर्चना सिंह

कई लोगो की प्रेरणा की स्रोत, अर्चना सिंह एक कुशल उद्यमी है। अर्चना सिंह 'व्हाइट प्लैनेट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' आई. टी. कंपनी की डायरेक्टर है। एक सफल उद्ममी होने के साथ-साथ एक कुशल लेखक भी है, व इस क्षेत्र में कई वर्षो का अनुभव है। वे 'हिन्दी की दुनिया' और अन्य कई वेबसाइटों पर नियमित लिखती हैं। अपने प्रत्येक क्षण को सृजनात्मकता में लगाती है। इन्हें खाली बैठना पसंद नहीं। इनका कठोर परिश्रम एवं कार्य के प्रति लगन ही इनकी सफलता की कुंजी है।

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अर्चना सिंह