डॉ अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिवस

डॉ अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिवस 2018

डॉ अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिवस 2018 में गुरुवार, 6 दिसम्बर को मनाया गया। इस साल 2018 में 63वां डॉ अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिवस (पुण्यतिथि) मनाया गया।

डॉ अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिवस 2018 विशेष

6 दिसंबर 2018 के दिन डॉ अंबेडकर का 63वां परिनिर्वाण दिवस मनाया गया। इस विशेष मौके को देश के संविधान निर्माता डॉ अबेंडकर के देहावसान के दिन मनाया जाता है, इस दिन पूरे राष्ट्र द्वारा उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। महापरिनिर्वाण दिवस के दिन सभी दलों के राजनेताओं द्वारा उन्हें विशेष श्रद्धांजलि प्रदान की गयी, इसके अलावा इस विशेष दिन को देखते हुए विद्यालयों और सरकारी कार्यलयों में भी विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

  • आयोजित किये गये विशेष कार्यक्रम

इस विशेष पर्व को देखते हुए काफी समय पूर्व से ही तैयारियां शुरु कर दी गयी थीं। इस दिन इंदौर में डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर युवा समिति द्वारा नेहरू नगर स्थित अंबेडकर वाचनालय में में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजें बाबा साहब अंबेडकर के प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। जिसके बाद बाबा साहब के विचारों पर चर्चा करने के लिए भाषण सभा भी आयोजित की गई थी।

  • अंबेडकर फाउंडेशन के कार्यक्रम में शामिल हुए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री

6 दिसंबर के अवसर पर नई दिल्ली स्थित संसद भवन में अंबेडकर फाउंडेशन द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपति द्वारा संसद भवन में स्थित बाबा साहब की प्रतिमा का माल्यार्पण करके किया गया, इस कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति वैकेंया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अन्य कई विशिष्ट नेतागण भी मौजूद रहे।

  • महापरिनिर्वाण दिवस पर समाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए आगे बढ़ने का दिन

आजादी के इतने साल बाद भी देश में अनुसूचित जातियों व जनजातियों के जीवन में कोई विशेष सुधार नही आया है। यह वह तबका है जो देश की आबादी का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है, हालांकि सरकार द्वारा इन्हें लाभवानित करने के लिए कई सारी योजनाए चलायी जाती है क्योंकि बिना सबको समान आधार पर लाये देश की तरक्की संभव नही है और वास्तव में बाबा साहब अंबेडकर का भी यहीं सपना था।

इसी कार्य के लिए सरकार द्वारा अनुसूचित जातियों व जनजातियों के लिए चलायीं जा रही कुछ विशेष योजनाए निम्नलिखित हैः

1) स्टैंड अप इंडिया

इस योजना का शुभआरंभ 5 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। इसके अंतर्गत अनुसूचित जातियों व जनजातियों और महिलाओं के लिए 10 लाख से लेकर 1 करोड़ तक का लोन प्रदान किया जाता है।

2) उद्यम पूंजी योजना

अनुसूचित जाति के लिए उद्यम पूंजी निधि द्वारा उद्यम कार्यों के लिए 81 कंपनियों द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।

इसके अलावा उज्जवला योजना, आयुष्मान भारत योजना सहित अन्य कई ऐसी योजनाएं है, जो गरीबों और पिछड़ों के कल्याण के लिए चलायी जा रही है। जिनके द्वारा अनुसूचित जातियों व जनजातियों तथा गरीब व निर्धन लोगों को सरकार द्वारा विशेष सुविधाएं मुहैया करायी जाती है।

  • बाबा साहब से जुड़े पंचतीर्थ स्थान

इसके साथ ही सरकार द्वारा बाबा साहब के जीवन से जुड़े हुए पांच महत्वपूर्ण स्थानों को तीर्थ स्थल के रुप में विकसित करने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है। ताकि आने वाली पीढ़ी भी बाबा साहब के संघर्षों और देश निर्माण में उनके दिये गये योगदान के विषय में जान सके।

  1. महू, मध्य प्रदेश उनका जन्म स्थान
  2. लंदन यू.के. में अध्ययन के दौरान उनका निवास स्थान
  3. दीक्षा भूमि, नागपुर वह स्थान जहां उन्होंने बौद्ध धर्म की दिक्षा ली
  4. चैत्य भूमि, मुबंई में स्थित उनका स्मारक
  5. महापरिनिर्वाण स्थल, दिल्ली जहां उनका परिनिर्वाण हुआ

 

डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिन

डॉ भीमराव रामजी अम्बेडकर की मृत्यु 6 दिसम्बर 1956 को हुई थी यही कारण है कि डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिन या पुण्यतिथि हर साल उन्हें 6 दिसम्बर को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिये मनाया जाता है। उन्हें, "भारतीय संविधान का जनक" कहा जाता है। भारत के लोग सुंदर ढंग से सजायी गयी प्रतिमा पर फूल, माला, दीपक और मोमबत्ती जलाकर और साहित्य की भेंट करके उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। इस दिन लोगों की बड़ी भीड़ उन्हें सम्मान और आदर देने के लिये सुबह संसद भवन परिसर में आती है और एक सबसे प्रसिद्ध नारा "बाबा साहेब अमर रहें" लगाते हैं। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षु सहित कुछ लोग कई पवित्र गीत भी गाते हैं।

देश भर से लोगों की एक बड़ी भीड़ भारत के संविधान के महान वास्तुकार, डॉ बाबासाहेब अंबेडकर के लिए श्रद्धा अर्पण करने के लिए दादर में "चैत्य भूमि" (डॉ अम्बेडकर के स्मारक) पर जमा हो जाते हैं। सभी तरह की सुविधाएं जैसे शौचालय, पानी के टैंकर, वाशिंग कमरे, फायर स्टेशन, टेलीफोन केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, आरक्षण काउंटर आदि लोगों को आसानी से चैत्य भूमि पर इस दिन पर उपलब्ध हो जाती है।

उनके बेटे की पत्नी (पुत्र-वधू) मीरा ताई अम्बेडकर द्वारा 5 दिसंबर को आधी रात को समता सैनिक दल सलाम लिया जाता है। सलामी देने के बाद, उनकी शिक्षाओं को सस्वर पढ़ा जाता है और फिर स्तूप फाटक सभी के लिए खोल दिया जाता है।

डॉ अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिवस क्यों मनाया जाता है?

डॉ अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिवस हर साल देश के प्रति डॉ भीमराव अम्बेडकर के महान योगदान को मनाने के लिए नगर निगम और अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए राज्य सरकार के कर्मचारियों के संघ द्वारा एक समारोह का आयोजन करके मनाया जाता है। उनके महान प्रयास ने देश को एकजुट रखने में बहुत मदद की है। डॉ भीमराव अम्बेडकर द्वारा लिखित भारत का संविधान अभी भी देश का मार्गदर्शन कर रहा है और आज भी ये कई संकटों के दौरान सुरक्षित रूप से बाहर उभरने में मदद कर रहा है।

भारत सरकार द्वारा डॉ अंबेडकर फाउंडेशन (वर्ष 1992 में मार्च 24 को) स्थापित किया गया, ताकि पूरे देश में लोग सामाजिक न्याय का संदेश प्राप्त कर सकें।

 

 

डॉ अंबेडकर फाउंडेशन द्वारा प्रदर्शन की जाने वाली गतिविधियॉं

डॉ अंबेडकर फाउंडेशन द्वारा निम्नलिखित गतिविधियॉं की गयी है:

> जनपथ पर डॉ अम्बेडकर नेशनल पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना।

> हिन्दी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं में डॉ बी आर अम्बेडकर के कामों के व्याख्यान को उपलब्ध करा रहें हैं।

> डॉ अंबेडकर के जीवन के मिशन के साथ ही विभिन्न सम्मेलनों, कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों, व्याख्यान, सेमिनार, संगोष्ठी और मेलों का आयोजन।

> समाज के कमजोर वर्ग के लिए डॉ अंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार और सामाजिक परिवर्तन के लिए डॉ अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार देना।

> हर साल डॉ अम्बेडकर की 14 अप्रैल को जन्मोत्सव और 6 दिसंबर पर पुण्यतिथि का आयोजन।

> अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के मेधावी छात्रों के बीच में पुरस्कार वितरित करने के लिए डॉ अम्बेडकर नेशनल मेरिट अवार्ड योजनाएं शुरू करना।

> हिन्दी भाषा में सामाजिक न्याय संदेश की एक मासिक पत्रिका का प्रकाशन।

> अनुसूचित जाति से संबंधित हिंसा के पीड़ितों के लिए डॉ अंबेडकर राष्ट्रीय राहत देना।

 

 

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