भारत

भारत के राष्ट्रपति (Presidents of India)

भारत के राष्ट्रपति (1947 से अब तक)

भारत का राष्ट्रपति देश का सबसे सर्वोच्च पद और तीनों भारतीय सेनाओं का प्रमुख होता है तथा भारत के प्रथम नागरिक जाना जाता है। भारत के प्रथम नागरिक को हिन्दी में राष्ट्रपति और संस्कृत में राज्य का भगवान कहते है। संसद और राज्य के विधानमंडल के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा देश के राष्ट्रपति का चुनाव किया जाता है।

भारत की स्वतंत्रता से अब तक, 14 राष्ट्रपति चुनाव हुए जिसमें 13 व्यक्ति भारत के राष्ट्रपति चुने गये और छोटे अंतराल के लिये तीन कार्यकारी राष्ट्रपति हुए। भारतीय संविधान के भाग 5 के अनुच्छेद 56 के द्वारा भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच साल का होता है। राष्ट्रपति के बर्खास्तगी और अनुपस्थिति में ही उपराष्ट्रपति कार्यभार सँभालता है। भाग 5 के अनुच्छेद 70 द्वारा संसद को राष्ट्रिपति के कार्यों का निर्वहन करने का अधिकार है।

राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने के लिये किसी भी उम्मीदवार की उम्र 35 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिये, लोकसभा सदस्य होने की पात्रता रखता हो, संसद अथवा राज्य सदन का सदस्य न हो, कोई लाभ का पद धारण न करता हो, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपाल, केन्द्रीय मंत्री तथा किसी राज्य के मंत्री अपने पद से इस्तीफा देने के बाद राष्ट्रपति चुनाव के लिये खड़े हो सकते है। नीचे भारत के सभी राष्ट्रपतियों की सूची उनके महत्वपूर्ण विवरण के साथ दी गयी है (आजादी के बाद से अब तक)।

भारत के वर्तमान राष्ट्रपति (चौदवहें): रामनाथ कोविंद

कार्यकाल: 25 जुलाई, 2017 से अब तक

राजनैतिक पार्टी: भारतीय जनता पार्टी

भारत के वर्तमान राष्ट्रपति माननीय श्री रामनाथ कोविंद है। 25 जुलाई, 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला। इन्होंने विपक्ष की मीरा कुमार को कड़े मुकाबलें में हराकर राष्ट्रपति का पद हासिल किया। इसके पूर्व इन्होंने ने 16 अगस्त, 2015 से 20 जून 2017 तक बिहार के 36वें राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की।

पेशे से वकील, वरिष्ठ राजनैतिक व्यक्तित्व, साम्यवाद के समर्थक, विलक्षण प्रतिभा के धनी श्री रामनाथ कोविंद जी ने लगभग 16 वर्षों तक हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के तौर पर काम किया। श्री कोविंद प्रथम बार 1994 में सांसद बने। तत्पश्चात् वे अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति कल्याण संसदीय समिति, गृह मंत्रालय संबंधी संसदीय समिति, प्राकृतिक गैस संबंधी संसदीय समिति, सामाजिक न्याय और अधिकारिता सम्बंधी संसदीय समिति; तथा विधि और न्याय सम्बंधी समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया। उन्होनें राज्य-सभा के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया।

श्री रामनाथ कोविंद ने डॉ भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य, भारतीय प्रबंधन संस्थान के बोर्ड आफ गवर्नर मेम्बर के रूप में भी काम किया। इतना ही नहीं उन्होंने  22 अक्टूबर, 2003 को संयुक्त राष्ट्र में भारतीय शिष्टमंडल के सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को सम्बोधित भी किया।

श्री रामनाथ का जन्म 1 अक्टूबर, 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के परौंख गाँव मे हुआ था। इन्होंने ने कानपुर से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। कानपुर विश्वविद्यालय से बी-काम और एलएल.बी की उपाधियां ग्रहण की। भारत के राष्ट्रपति के रूप में, श्री राम नाथ कोविंद ने 2017 मे जिबूती, इथियोपिया, 2018 में मेडागास्कर, सूरीनाम, जाम्बिया जैसे तमाम देशों की यात्राएं की।

 

भारत के प्रथम राष्ट्रपति: डॉ राजेन्द्र प्रसाद

कार्यकाल 26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962 तक

राजनीतिक पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानी के रुप में अपने संघर्षपूर्ण जीवन के बाद आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद (बिहार) बने । वो भारत के इकलौते राष्ट्रपति के रुप में है जो लगातार दो कार्यकाल तक इस सम्माननीय पद पर रहे। भारतीय संविधान की कमेटी द्वारा चुनाव के बाद 26 जनवरी 1950 को स्वतंत्र और गणतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति के रुप में पदभार ग्रहण किया। तीसरे राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्होंने खुद से सार्वजनिक जीवन से राहत पाने के लिये अपने कार्यकाल को बढ़ाने के मिले मौके को नकार दिया।

 

इनका जन्म 3 दिसंबर 1884 में (अब बिहार, ब्रिटीश भारत, बंगाल प्रांत, ज़ीरादेई में एक कायस्थ हिन्दू परिवार में) हुआ था और मृत्यु 28 फरवरी 1963 में (पटना, बिहार, भारत) में हुयी। इनके पिता (महादेव सहाय) संस्कृत और पारसियन भाषा के अध्येता थे। 1907 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने अर्थशास्त्र से अपनी एम.ए की डिग्री प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। पटना कॉलेज में 1906 में बिहारी विद्यार्थी सम्मेलन बनाने के लिये इन्होंने काफी मदद की। राजनीति में आने से पहले ये एक अध्यापक और वकील भी रहे। डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने पूरे देश में शैक्षणिक विकास को बहुत बढ़ावा दिया और कई अवसरों पर नेहरु सरकार को भी शिक्षा संबंधी सलाह दी।

 

भारत के द्वीतीय राष्ट्रपति: डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन

कार्यकाल: 13 मई 1962 से 13 मई 1967

राजनीतिक पार्टी : स्वतंत्र

स्वतंत्र भारत (दूसरे व्यक्ति) के तीसरे राष्ट्रपति बने डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन। इन्होंने 13 मई 1962 से 13 मई 1967 तक राष्ट्रपति के रुप में देश की सेवा की। वो एक महान दर्शनशास्त्री, लेखक, राज्य के सूरमा, और राजनीतिज्ञ थे जो भारत (1952-1962) के पहले उपराष्ट्रपति के रुप में चयनित हुए थे। वो आन्ध्र और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के उपकुलपति भी रहे है। राष्ट्रपति बनने से पहले 1954 में ही उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा जा चुका था। 1963 में श्रेष्ठता के ब्रिटीश रॉयल ऑर्डर के सम्माननीय सदस्य और 1931 में नाइटहुड की उपाधि से नवाज़ा गया। इनके जन्म दिवस (5 सितंबर) को पूरे देश में अध्यापक दिवस के रुप में मनाया जाता है।

इनका जन्म 5 सितंबर 1888 (तेलुगु ब्राम्हण परिवार में) को थिरुथानी, मद्रास प्रांत, ब्रिटीश भारत (वर्तमान तमिलनाडु, भारत) में और निधन 17 अप्रैल 1975 को मद्रास में हुआ। राजनीतिक शुरुआत करने से पहले ये दर्शनशास्त्र के प्रोफ़ेसर रहे, फिर हैरिस मैनचेस्टर कॉलेज के प्रधानाचार्य बने उसके बाद आंध्र और बनारस हिन्दू विश्वविद्याललय (1939 से 1948) के उपकुलपति बने।

 

भारत के तीसरे राष्ट्रपति: ज़ाकिर हुसैन

कार्यकाल: 13 मई 1967 से 3 मई 1969

राजनीतिक पार्टी : स्वतंत्र

ज़ाकिर हुसैन भारत (व्यक्ति के रुप में तीसरे) के चौथे राष्ट्रपति बने। इन्होंने भारत के राष्ट्रपति के तौर पर 13 मई 1967 से 3 मई 1969 तक राष्ट्र की सेवा की। वो भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति के रुप में भी जाने जाते है। डॉ ज़ाकिर हुसैन बिहार के गर्वनर (1957 से 1962) और देश के उपराष्ट्रपति (1962 से 1967) भी रहे।

 

डॉ साहब ज़ामिया मिलीया इस्लामिया के सह-संस्थापक थे और 1928 में इसके उपकुलपति बने। वो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भी उपकुलपति रहे। 1963 में इनको भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न और पद्म विभूषण से नवाज़ा गया। इनका जन्म 8 फरवरी 1897 में हैदराबाद राज्य (वर्तमान तेलांगना, भारत) के हैदराबाद में हुआ था। इनका ताल्लुक ख़ेशग़ी जनजाति के एक पश्तुन परिवार से था। इनकी शिक्षा मुहम्द ओरियंटल कॉलेज़ (वर्तमान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) से हुई। बर्लिन के यूनिवर्सिटी ने इन्हें साल 1926 में अर्थशास्त्र में की डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। वो देश के पहले ऐसे राष्ट्रपति बने जिनकी मृत्यु अपने कार्यकाल के दौरान हुई।

भारत के कार्यकारी राष्ट्रपति: वराहागिरी वेंकट गिरी

कार्यकाल : 3 मई 1969 – 20 जुलाई 1969

राजनीतिक पार्टी: स्वतंत्र

डॉ ज़ाकिर हुसैन की मृत्यु के बाद वी.वी गिरी को कार्यकारी राष्ट्रपति के तौर पर नियुक्त कर दिया गया हालाँकि अगले राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने के लिये इन्होंने कुछ महीने बाद ही पद से इस्तीफा दे दिया। कार्यकारी राष्ट्रपति के तौर पर उनका कार्यकाल सिर्फ 2 महीन और 17 दिन का रहा।

 

भारत के कार्यकारी राष्ट्रपति: मुहम्मद हिदायतुल्ला

कार्यकाल : 20 जुलाई 1969 -24 अगस्त 1969

राजनीतिक पार्टी: स्वतंत्र

छोटे समय के लिये भारत के कार्यकारी राष्ट्रपति के रुप में न्यायधीश मुहम्मद हिदायतुल्ला को नियुक्त किया गया था जब वी.वी गिरी ने अगले राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेने के लिये इस्तीफा दिया था जबतक कि भारत के अगले राष्ट्रापति का चुनाव नहीं हो जाता। कार्यकारी राष्ट्रपति के तौर इनका कार्यकाल केवल 1 महीने 4 दिन रहा। वो भारत (25 फरवरी 1968 से 16 दिसंबर 1970) के 11वें मुख्य न्यायधीश के साथ ब्रिटीश साम्राज्य की तरफ से दर्ज़ा पाने वाले बने। इन्होंने भारत के छठवें उपराष्ट्रपति (20 अगस्त 1977 से 20 अगस्त 1982) के तौर पर भी देश की सेवा की। ये भारत के सुप्रसिद्ध कानूनविद्, शिक्षाविद्, वकील, अध्येता (हिन्दी, अंग्रेजी, परश़ियन, उर्दू और फ्रेंच) लेखक और बहु-भाषा अध्ययन संबंधी जानकार थे।

इनका जन्म ब्रिटीश भारत, केन्द्रीय प्रांत, लखनऊ (वर्मान उत्तर प्रदेश) में उच्च वर्ग के मुस्लिम परिवार में 17 दिसंबर 1905 में हुआ था। 18 सितंबर 1992 में मुम्बई में इनका निधन हो गया।

 

भारत के चौथे राष्ट्रपति: वराहागिरी वेंकट गिरी

कार्यकाल: 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974

राजनीतिक पार्टी: स्वतंत्र

वी.वी गिरी एकमात्र कार्यकारी राष्ट्रपति थे जो भारत के कार्यकारी राष्ट्रपति और फिर बाद में राष्ट्रपति बने। 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक उन्होंने भारत के पाँचवे राष्ट्रपति (चौथे व्यक्ति) के रुप में देश की सेवा की। भारत रत्न वी.वी गिरी भारत के श्रम मंत्री और सेलॉन (श्रीलंका) के में उच्चायुक्त भी रह चुके थे। उन्होंने भारत के उपराष्ट्रपति (13 मई 1967 से 3 मई 1969) और कर्नाटक (2 अप्रैल 1965 से 13 मई 1967) के राज्यपाल के पद को भी सुशोभित किया। इसके अलावा वो केरल (1 जुलाई 1960 से 2 अप्रैल 1965) और उत्तर प्रदेश (10 जून 1956 से 30 जून 1960) के भी राज्यपाल रहे।

इनका जन्म (तेलुगु ब्राम्हण परिवार में) 10 अगस्त 1894 में ब्रिटीश भारत (वर्तमान ओड़िसा) के मद्रास प्रांत के बेरहमपुर में हुआ था। इन्होंने अपनी कानून की डिग्री डुबलिन विश्वविद्यालय (1913 से 1916) से ली। 1916 (सिन फिन आंदोलन में शामिल होने की वजह से और ईस्टर बगावत में संदिग्ध भूमिका के लिये) में ऑयरलैंड से निकाले जाने के बाद ये भारत आये और राजनीति से जुड़ गये। इनकी मृत्यु 23 जून 1980 में मद्रास (वर्तमान) में हुई।

 

भारत के पाँचवे राष्ट्रपति: फ़ख़रुद्दीन अली अहमद

कार्यकाल: 24 अगस्त 1974 से 24 अगस्त 1977

राजनीतिक पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस

फ़ख़रुद्दीन अली अहमद भारत (व्यक्ति के रुप में पाँचवे) के छठवें राष्ट्रपति बने और 24 अगस्त 1974 से 24 अगस्त 1977 तक देश की सेवा की। डॉ ज़ाकिर हुसैन के बाद फ़ख़रुद्दीन अली अहमद भारत के दूसरे मुस्लिम राष्ट्रपति बने। अपने कार्यकाल को पूरा करने से पहले ही 11 फरवरी 1977 को इनकी मृत्यु हो गई (ये दूसरे राष्ट्रपति हुए जिनकी मृत्यु अपने कार्यालय में हुई)।

इनका जन्म 1905 में पुरानी दिल्ली (हौज क़ाजी क्षेत्र), दिल्ली, पंजाब प्रांत, ब्रिटीश भारत में हुआ। उनकी शिक्षा दिल्ली के सेंट स्टीफ़न कॉलेज और कैंब्रिज़ के कैथरीन कॉलेज से पूरी हुई।

राष्ट्रपति बनने से पहले वो मंत्री भी रहे। इंग्लैंड में जवाहर लाल नेहरु से मिलने के बाद वो भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस में शामिल हो गये और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने लगे।

 

भारत के कार्यकारी राष्ट्रपति: बस्प्पा दन्नप्पा जाटी

कार्यकाल: 11 फरवरी 1977 से 25 जुलाई 1977

राजनीतिक पार्टी: स्वतंत्र

अपने कार्यकाल के दौरान फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के बाद भारत के कार्यकारी राष्ट्रपति के रुप में बस्प्पा दन्नप्पा जाटी (बी.डी. जाटी) को नियुक्त किया गया। वो भारत (1 सितंबर 1974 से 25 जुलाई 1977) के उपराष्ट्रपति, ओड़ीसा के राज्यपाल (8 नवंबर 1972 से 20 अगस्त 1974), पाँडीचेरी के उपराज्यपाल (14 अक्टूबर 1968 से 7 नवंबर 1972) और मैसूर (16 मई 1958 से 9 मार्च 1962) के मुख्यमंत्री भी बने।

इनका जन्म (कन्नाडिगा लिंगाय़त परिवार में) ब्रिटीश भारत के बम्बई प्रांत के सवलागी में 10 सितंबर 1912 को हुआ था। जमखंडी के नगरपालिका सदस्य के रुप में 1940 में इन्होंने राजनीति की शुरुआत की और बाद में 1945 में उसी नगरपालिका के अध्यक्ष बने। 7 जून 2002 में इनकी मृत्यु हुई।

 

भारत के छटवें राष्ट्रपति: नीलम संजीवा रेड्डी

कार्यकाल: 25 जुलाई 1977 से 25 जुलाई 1982

राजनीतिक पार्टी: जनता पार्टी

नीलम संजीवा रेड्डी भारत (छटवें व्यक्ति) के सातवें राष्ट्रपति थे और इन्होंने 25 जुलाई 1977 से 25 जुलाई 1982 तक राष्ट्रपति के तौर पर देश की सेवा की। ये देश के सबसे युवा राष्ट्रपति थे साथ ही ये आंध्र प्रदेश (1 नवंबर 1956 से 11 जनवरी 1960) के पहले मुख्यमंत्री भी बने। ये लोकसभा (17 मार्च 1967 से 19 जुलाई और 26 मार्च 1977 से 13 जुलाई 1977) के चौथे दो बार स्पीकर बने और केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री रहे (1964 से 1967)।

ये जनता पार्टी से चुने हुए एक मात्र संसद सदस्य बने जो आंध्र प्रदेश से चयनित हुये थे। भारत का सातवाँ राष्ट्रपति बनने के लिये इन्होंने लोकसभा का स्पीकर पद 13 जुलाई 1977 को छोड़ दिया। इनका जन्म (तेलुगु भाषी हिन्दू कृषक परिवार में) ब्रिटीश भारत (अनन्तपुर जिला, आंध्रप्रदेश), मद्रास प्रांत के इल्लूर में 19 मई 1933 में हुआ। इनकी मृत्यु 1 जून 1996 में बैंगलोर, कर्नाटक में हुआ था।

 

भारत के सातवें राष्ट्रपति: ज्ञानी जैल सिंह

कार्यकाल: 25 जुलाई 1982 से 25 जुलाई 1987

राजनीतिक पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस

भारत के आठवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह (व्यक्ति के रुप में आठवें) का कार्यकाल 25 जुलाई 1982 से 25 जुलाई 1987 तक रहा। इन्होंने 1972 में पंजाब के काँग्रेसी मुख्यमंत्री, गृह मंत्रालय (14 जनवरी 1980 से 22 जून 1982) और गुट-निरपेक्ष आंदोलन (12 मार्च 1983 से 6 सितंबर 1986) के महासचिव तौर पर भी देश की सेवा की। इनका जन्म 5 मई 1916 को ब्रिटीश भारत के पंजाब, संधवान में हुआ था। चंडीगढ़ के एक कार दुर्घटना में 25 दिसंबर 1994 में इनकी मौत हुई।

 

भारत के आठवें राष्ट्रपति: रामास्वामी वेंकटरमन

कार्यकाल: 25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992

राजनीतिक पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस

भारत के नौंवे राष्ट्रपति (आठवें व्यक्ति के रुप में) के रुप में रामास्वामी वेंकटरमन ने 25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992 तक देश की सेवा की। इन्होंने भारत के उपराष्ट्रपति (20 अगस्त 1982 से 27 जुलाई 1987), गृह-मंत्रालय (22 जून 1982 से 2 सितंबर 1982), रक्षा मंत्रालय (15 जनवरी 1982 से 2 अगस्त 1984) और वित्त मंत्रालय (14 जनवरी 1980 से 15 जनवरी 1982) के तौर पर भी राष्ट्र की सेवा की। वो एक वकील, भारतीय स्वतंत्रता के आंदोलन के कार्यकर्ता और राजनीतिज्ञ भी थे।

इनका जन्म 4 दिसंबर 1910 में ब्रिटीश भारत के मद्रास प्रांत के राजामदाम (वर्तमान तमिलनाडु) में हुआ। इन्हें मद्रास और नागार्जूना विश्वविद्यालय से कानून की डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिये इन्हें तांब्र पत्र से भी नवाज़ा गया। 27 जनवरी 2009 में नई दिल्ली में इनकी मृत्यु हो गयी।

 

भारत के नौंवे राष्ट्रपति: शंकर दयाल शर्मा

कार्यकाल: 25 जुलाई 1992 से 25 जुलाई 1997

राजनीतिक पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस

व्यक्ति के तौर पर नौवें और भारत के दसवें राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा का कार्यकाल 25 जुलाई 1992 से 25 जुलाई 1997 तक रहा। राष्ट्रपति के अलावा इन्होंने भारत के उपराष्ट्रपति (3 सितंबर 1987 से 25 जुलाई 1992), महाराष्ट्र के राज्यपाल (3 अप्रैल 1986 से 2 सितंबर 1987), पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक (26 नवंबर 1985 से 2 अप्रैल 1986), आंध्र प्रदेश के राज्यपाल (29 अगस्त 1984 से 26 नवंबर 1985), भोपाल के मुख्यमंत्री (1952 से 1956), कैबिनेट मंत्री (1956 से 1967), केन्द्रीय मंत्री दूरसंचार (1974 से 1977)

इनका जन्म ब्रिटीश भारत के केन्द्रीय प्रांत भोपाल (वर्तमान मध्य प्रदेश) में 19 अगस्त 1918 को हुआ था। दिल का दौरा पड़ने से नई दिल्ली में 26 दिसंबर 1999 को इनकी मृत्यु हो गई।

 

भारत के दसवें राष्ट्रपति: कोचेरिल रमन नारायण

कार्यकाल: 25 जुलाई 1997 से 25 जुलाई 2002

राजनीतिक पार्टी: स्वतंत्र

भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति (दसवें व्यक्ति) कोचेरिल रमन नारायण का कार्यकाल 25 जुलाई 1997 से 25 जुलाई 2002 तक था। के.आर.नारायण ने राष्ट्रपति के साथ ही भारत के उपराष्ट्रपति (21 अगस्त 1992 से 24 अगस्त 1997) के रुप में भी भारत की सेवा की। वो थाईलैंड, चाईना, तुर्की, और अमेरिका में भारत के दूत भी रह चुके थे।

न्हें विज्ञान और कानून में डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित भी किया गया है साथ ही वो कई विश्वविद्यालयों मे कुलपति और जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में उपकुलपति भी रहे।

ये ब्रिटीश भारत के त्रावणकोर के पेरुमथनम् (वर्तमान केरल) में 27 अक्टूबर 1920 को पैदा हुए। इन्होंने अपनी बी.ए और एम.ए की डिग्री केरला यूनिवर्सिटी से ली जबकि लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से बी.एस.सी पूरा किया। ये भारत के एकमात्र दलित व्यक्ति है जो भारत के राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए। नई दिल्ली में 5 नवंबर को इनका निधन हो गया।

 

भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति: ए.पी.जे अब्दुल कलाम

कार्यकाल: 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007

राजनीतिक पार्टी: स्वतंत्र

भारत के बारहवें राष्ट्रपति (11वें व्यक्ति) ए.पी.जे अब्दुल कलाम थे जिन्होंने 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक देश की सेवा की। कलाम साहब का संबंध राजनीति से नहीं था बल्कि वो एक वैज्ञानिक थे और डी.आर.डी.ओ. एवं इसरो में विज्ञान प्रशासक रहे। उन्हें भारत का मिसाईल मैन भी कहा जाता था क्योंकि वो भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैनिक मिसाइल विकास प्रयास से जुड़े थे। भारत रत्न (1997) से सम्मानित कलाम साहब को लोगों का राष्ट्रपति भी कहा जाता है। इसके अलावा इन्हें पद्म विभूषण (1990) और पद्म भषण (1981) तथा कई सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है।

इनका जन्म ब्रिटीश भारत के मद्रास प्रांत (वर्तमान तमिलनाडु) में, रामानाथपुरम् जिले के रामेश्वरम में 1931 में एक तमिल मुस्लिम परिवार में 15 अक्टूबर 1931 को हुआ था। ये अन्ना विश्वविद्यालय के एटॉमिक इंजीनियर थे और भारत के प्रथम नागरिक के रुप में स्वीकारे गये। दूसरी बार मिले राष्ट्रपति चुनाव के मौके को इन्होंने नकार दिया था। पेशे से कलाम साहब प्रोफेसर, लेखक, और एरोस्पेस वैज्ञानिक थे लेकिन बाद एक राष्ट्रपति के रुप में भी देश की सेवा की। वो शिलाँग आईआईएम, आईआईएम अहमादाबाद, आईआईएम इंदौर में अतिथी प्रोफेसर थे, बैंगलोर के इंडियन इंस्टिट्यूट में सम्मानीय फेलो थे, अन्ना यूनिर्सिटी चेन्नई में एरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे, जेएसएस यूनिर्सिटी (मैसूर), इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नॉलेजी तिरुअनन्तपुरम् के कुलपति और भारत के कई शैक्षणिक संस्थानों और शोध संस्थानों में अतिथि प्रोफेसर थे। शिलाँग आईआईएम में लेक्चर देने के दौरान इनका निधन 27 जुलाई 2015 को हुआ।

 

भारत के बारहवीं राष्ट्रपति: प्रतिभा देवी सिंह पाटिल

कार्यकाल: 25 जुलाई 2007 से 25 जुलाई 2012

राजनीतिक पार्टी: राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी

प्रतिभा देवी सिंह पाटिल को भारत की पहली महिला राष्ट्रपति साथ ही राजस्थान की पहली महिला राज्यपाल (8 नवंबर 2004 से 23 जून 2007) होने का गौरव भी हासिल है इनका कार्यकाल 25 जुलाई 2007 से 25 जुलाई 2012 रहा। इनका जन्म 19 दिसंबर 1934 में ब्रिटीश भारत के बम्बई (वर्मान महाराष्ट्र) प्रांत के नदगाँव में हुआ था। इन्होंने राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र से अपनी परास्नातक की डिग्री जलगाँव के मूलजी जेठा कॉलेज से हासिल की तथा कानून के स्नातक की डिग्री सरकारी लॉ कॉलेज मुम्बई से प्राप्त की।

 

भारत के तेरहवें राष्ट्रपति: प्रणव मुखर्जी

कार्यकाल: 25 जुलाई 2012 से पदस्थ

राजनीतिक पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस

भारत के  राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी थे। 25 जुलाई 2012 इन्होंने भारत के 14वें राष्ट्रपति (13वें व्यक्ति) के रुप में कार्यभार सँभाला। इन्होंने प्रतिद्वंधी प्रत्याशी (लोकसभा के पूर्व स्पीकर श्री पी.ए.संगमा) को हराने के बाद यूपीए सरकार द्वारा आधिकारिक रुप से नामित उम्मीदवार के रुप में राष्ट्रपति का चुनाव जीता। राष्ट्रपति बनने से पहले ये कैबिनेट मंत्री के तौर पर वित्त, रक्षा, विदेशमंत्री का कार्यभार सँभाल चुके थे साथ ही योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे। असल में इनका संबंध पश्चिम बंगाल से है और वो पहले बंगाली है जो राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए थे।

22 जुलाई 2012, राष्ट्रपति चुनाव से पहले अपने इस्तीफे तक वो भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। यूरोमनी मैगज़ीन के अनुसार वो पूरी दुनिया में भारत के सबसे बेहतरीन वित्त मंत्री साबित हुए।

वो बंगाल प्रांत (वर्तमान पश्चिम बंगाल में) के वीरभूम जिले के मिराटी में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में 11 दिसंबर 1935 को पैदा हुए थे। भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के प्रतिनिधि के रुप में 1952 से 1964 के बीच पश्चिम बंगाल विधान परिषद और ए.आई.सी.सी में इनके पिता सदस्य थे। इन्होंने राजनीति शास्त्र और इतिहास से एम.ए किया और अपनी कानून की डिग्री कलकत्ता विश्वविद्यालय से प्राप्त की। इसके पहले कलकत्ता में वो बतौर उच्च डिवीजन क्लर्क (प्रमुख लेखाकार कार्यालय) थे, बाद में विद्यानगर कॉलेज में राजनीतिशास्त्र के अध्यापक रहे, उसके बाद वो देश़र दक़ (मातृभूमि की पुकार) से जुड़ पत्रकारिता की और अंतत: 1969 में वो राजनीति में आ गये।

अर्चना सिंह

कई लोगो की प्रेरणा की स्रोत, अर्चना सिंह एक कुशल उद्यमी है। अर्चना सिंह 'व्हाइट प्लैनेट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' आई. टी. कंपनी की डायरेक्टर है। एक सफल उद्ममी होने के साथ-साथ एक कुशल लेखक भी है, व इस क्षेत्र में कई वर्षो का अनुभव है। वे 'हिन्दी की दुनिया' और अन्य कई वेबसाइटों पर नियमित लिखती हैं। अपने प्रत्येक क्षण को सृजनात्मकता में लगाती है। इन्हें खाली बैठना पसंद नहीं। इनका कठोर परिश्रम एवं कार्य के प्रति लगन ही इनकी सफलता की कुंजी है।

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