Categories: कविता

पर्यावरण पर कविता

पर्यावरण का अर्थ हमारे पृथ्वी के परिवेश से है जो हमें चारो ओर से घेरे है तथा जिसके अंतर्गत हम अपना जीवन व्यतीत करते है। आज के समय में दिन-प्रतिदिन पर्यावरण पे संकट गहराता जा रहा है, क्योंकि नित्य बढ़ते प्रदूषण का इसपर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण का महत्व और भी ज्यादे बढ़ जाता है और यदि हमनें इस समस्या पर अभी भी ध्यान नही दिया तो वह दिन दूर नही, जब अपनी ही गलतियों के कारण मानव जाति के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगेगा।

पर्यावरण पर कवितायें (Poems on Environment in Hindi)

इसी पर्यावरण संकट के विषय को देखते हुए इन कविताओं को तैयार किया गया है। जो आज के समय में हमें इन समस्याओं से वाकिफ कराती हैं। इन कविताओं के माध्यम से हमने पर्यावरण पे प्रदूषण के द्वारा होने वाले प्रभावों, बढ़ते नगरीकरण और वन्यक्षेत्र विलोपन जैसी समस्याओं पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है।

ऐसे कई अवसर आते हैं जब आपको पर्यावरण के विषय से संबधित कविताओं, भाषणों तथा निबंधों की आवश्यकता पड़ती है। यदि आपको भी ऐसे ही सामग्रियों की आवश्यकता है, तो परेशान मत होइये हमारे वेबसाइट पर पर्यावरण से जुड़ी कई कविताएं तथा अन्य सभी सामग्रियां उपलब्ध है। जिनका आप अपने आवश्यकता अनुसार उपयोग कर सकते हैं।

 

प्रदूषण - पर्यावरण के लिए अभिशाप

जिसे कहते है पृथ्वी का आवरण वह है हमारा पर्यावरण,

प्रदूषण बन गया है पर्यारण के लिए चिंता का कारण|

 

यह प्रदूषण इस कदर बढ़ रहा जिसका नही कोई है माप,

देखो कैसे धीरे-धीरे यह प्रकृति के लिए बन रहा अभिशाप|

 

हरियाली खत्म हो रही धधक रही सूर्य की ज्वाला,

बढ़ता प्रदूषण ओजोन परत को बना रहा अपना निवाला|

 

यदि ऐसे ही चलता रहा तो होगा प्रकृति को बड़ा नुकसान,

प्रकृति की रक्षा करों प्रदूषण रोक लौटाओ उसका सम्मान|

 

देखो कैसे चारो ओर मचा रखा है, प्रदूषण ने हाहाकार,

वृक्षारोपण करके लाओ खुशहाली, करो तुम प्रदूषण पर वार|

 

 

प्रकृति का करो सम्मान पर्यावरण स्वच्छता का रखो ध्यान,

पृथ्वी के हम है उत्तराधिकारी इसलिए करों इसका सम्मान|

 

प्रकृति है हमारी पृथ्वी की सुंदरता और इसका अभिमान,

इसलिए इसकी रक्षा हेतु तुम चलाओ प्रदूषण मुक्ति अभियान|

 

----------------- Yogesh Kumar Singh

 

प्रकृति का सम्मान

हरियाली खत्म हो रही, नही कहीं है छांव,

हरे मैदान बन रहे शहर, प्रकृति को देकर घाव|

 

जिस तरह से, मरघट पर नही पनपती हरियाली,

वैसी ही क्रंक्रीट के जंगलो में नही आती खुशहाली|

 

प्रकृति को देना धोखा, कैसा है यह पागलपन,

कैसे भूल गये तुम, यह प्रकृति तुम्हे है देती जीवन|

 

 

समझो इस बात को, प्रकृति है हमारी माँ समान,

प्रदूषण से रक्षा करके, तुम इसे दो सम्मान|

 

ऐसा कार्य करों कि, पृथ्वी का पर्यावरण रहे स्वच्छ,

तभी संभव है, पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित और समस्त|

 

हरे भरे मैदान चाहिये, या फिर ये पथरीले नगर,

यह फैसला हमें करना है, चुननी है हमें कौन सी डगर|

 

पाषाण काल से तरक्की प्राप्त मनुष्य, फिर उसी ओर जाता है,

देखो हरे-भरे मैदान काटकर, पत्थर के नगर बासाता है|

 

यदि ऐसा हम करेंगे तो, प्रकृति कैसे रहेगी सुरक्षित,

आओ मिलकर प्रण ले, प्रदुषण रोकथाम को करेंगे सुनिश्चित|

 

तो आओ मिलकर प्रण ले, करेंगे प्रकृति का सम्मान,

अब से प्रदूषण फैलाकर, नही करेंगे इसका अपमान|

 

-------------------Yogesh Kumar Singh

 

Yogesh Singh

Yogesh Singh, is a Graduate in Computer Science, Who has passion for Hindi blogs and articles writing. He is writing passionately for Hindikiduniya.com for many years on various topics. He always tries to do things differently and share his knowledge among people through his writings.

Recent Posts

मेरी माँ पर भाषण

माँ के रिश्ते की व्याख्या कुछ शब्दों करना लगभग असंभव है। वास्तव में माँ वह व्यक्ति है जो अपने प्रेम…

5 months ago

श्रमिक दिवस/मजदूर दिवस पर कविता

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस का दिन विश्व भर के कामगारों और नौकरीपेशा लोगों को समर्पित हैं। 1 मई को मनाये जाने…

5 months ago

मेरी माँ पर निबंध

माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को…

5 months ago

चुनाव पर स्लोगन (नारा)

चुनाव किसी भी लोकतांत्रिक देश की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, यहीं कारण है कि इसे लोकतंत्र के पवित्र पर्व के…

5 months ago

भारत निर्वाचन आयोग पर निबंध

भारत में चुनावों का आयोजन भारतीय संविधान के द्वारा गठित किये गये भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है। भारत…

5 months ago

चुनाव पर निबंध (Essay on Election)

चुनाव या फिर जिसे निर्वाचन प्रक्रिया के नाम से भी जाना जाता है, लोकतंत्र का एक अहम हिस्सा है और…

5 months ago