निबंध

भारतीय ध्वज संहिता पर निबंध (Essay on Flag Code of India in Hindi)

भारत का ध्वज संहिता नियमों का एक समूह है जो भारत के राष्ट्रीय ध्वज के उचित प्रदर्शन को नियंत्रित करता है।

भारत को आजाद कराने के लिए अपने जान की कुर्बानी देने वाले सभी भारतीय वीरों से हम सब अच्छी तरह वाकिफ हैं। हमारी स्वतंत्रता का प्रतिक हमारा राष्ट्रीय ध्वज पूरे देश के लिए गौरव और सम्मान का प्रतीक है। इसका अनादर करने का अर्थ है, देश के साथ-साथ सभी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अनादर करना। इसलिए, हमारे राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को बनाए रखने के लिए कुछ नियम और कानून हैं। हम इसे “भारत का ध्वज संहिता” कहते हैं। आइए इस महत्वपूर्ण विषय पर विस्तार से जानें।

भारतीय ध्वज संहिता पर 10 वाक्य || हर घर तिरंगा पर निबंध

भारत का ध्वज संहिता पर लघु और दीर्घ निबंध  (Short and Long Essay on Flag Code of India in Hindi Language, Bhartiya Dhwaj Sanhita par Nibandh Hindi mein)

यहाँ, मैं अलग-अलग शब्द सीमाओं के तहत भारत के ध्वज संहिता पर छोटे और बड़े निबंध प्रस्तुत कर रही हूँ। यह विषय सभी कक्षाओं के छात्रों के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी उपयोगी है। निबंध के साथ – साथ आपको ध्वज संहिता से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न भी मिलेंगे जो इस विषय से सम्बंधित संशय का निवारण करेंगे।

भारतीय ध्वज संहिता पर छोटा निबंध 1 (100 – 150 शब्द)

ध्वज संहिता राष्ट्रीय ध्वज के उचित उपयोग को नियंत्रित करता है। यह ध्वज की गरिमा को बनाए रखने के लिए एक मार्गदर्शक है। 26 जनवरी 2002 को ध्वज संहिता प्रभाव में आया था। फ्लैग कोड राष्ट्रीय ध्वज के उचित उपयोग से सम्बंधित सभी कानूनों और परंपराओं को एकत्रित करने के लिए बनाया गया था। देश के प्रत्येक नागरिक को ध्वज संहिता का पालन करना चाहिए।

भारत के ध्वज संहिता में तीन खंड हैं। राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को बनाए रखने के लिए ध्वज संहिता आवश्यक है। संहिता में कहा गया है कि ध्वज को हमेशा सम्मानजनक स्थान दिया जाना चाहिए।हर घर तिरंगा अभियान के कारण ध्वज संहिता में 20 जुलाई 2022 को संशोधन किया गया था। ध्वज संहिता का उल्लंघन करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।


भारतीय ध्वज संहिता पर लघु निबंध 2 (200 – 250 शब्द)

प्रस्तावना

भारत का ध्वज संहिता एक शासी निकाय नहीं है, यह नियमों और परम्पराओं का एक समूह है जो भारत के राष्ट्रीय ध्वज के उचित उपयोग को नियंत्रित करता है। यह राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और गरिमा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत का ध्वज संहिता 26 जनवरी 2002 को लागू हुआ, जिसने बिना किसी प्रतिबंध के तिरंगे को सही तरीके से प्रदर्शित करना कानूनी बना दिया, ताकि ध्वज का सम्मान और मर्यादा बना रहे।

भारतीय ध्वज संहिता व संशोधन

भारतीय ध्वज संहिता पिछले सभी कानूनों और परंपराओं का संयोजन है। ध्वज संहिता को तीन खंडों में विभाजित किया गया है। द एम्ब्लेम्स एंड नेम्स (प्रिवेंशन ऑफ़ इम्प्रॉपर यूज़) एक्ट 1950 और द प्रिवेंशन ऑफ़ इंसल्ट्स टू नेशनल हॉनर एक्ट 1971, भारत के ध्वज संहिता के 2002 में लागू होने से पहले राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन को नियंत्रित कर रहे थे।

30 दिसंबर 2021 को ध्वज संहिता में संशोधन किए गए, जिसने मशीन-निर्मित, पॉलिएस्टर झंडे की अनुमति दी। उसके बाद 20 जुलाई 2022 को फ्लैग कोड में संशोधन ने दिन-रात झंडा फहराने की इजाजत दे दी। हालांकि, पहले यह केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही सीमित था। यह आजादी का अमृत महोत्सव को चिह्नित करने के लिए हर घर तिरंगा अभियान का जश्न मनाने के लिए किया गया है। उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर, दोषियों को तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

निष्कर्ष

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज हमारा गौरव है, यह पुरे विश्व में हम सभी भारतीयों का प्रतिनिधित्व करता है। अतः भारतीय नागरिक होने के नाते हम सभी का कर्तव्य है कि भारतीय ध्वज संहिता का अनुशासित रूप से पालन करते हुए अपने राष्ट्रीय ध्वज का मान, सम्मान, गरिमा व गौरव बरक़रार रखें।


भारतीय ध्वज संहिता पर दीर्घ निबंध 3 (600 शब्द)

प्रस्तावना

भारतीय ध्वज न केवल भारत देश की स्वतंत्रता का प्रतीक है, बल्कि यह बलिदान, भक्ति और लोगों के राष्ट्र के प्रति प्रेम का भी प्रतिनिधित्व करता है। तिरंगे झंडे को देखकर हमें अपने देश पर गर्व महसूस होता है। भारतीय सशस्त्र बल ध्वज की गरिमा को बनाए रखने के लिए लगातार काम करते हैं। इसलिए, इस गौरव को सबके द्वारा बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय ध्वज के उचित प्रदर्शन की निगरानी करना महत्वपूर्ण है। जिसके लिए भारत के ध्वज संहिता को स्थापित करना अति आवश्यक है।

भारत का ध्वज संहिता क्या है?

भारतीय ध्वज संहिता कानूनों का एक समूह है जो भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का ठीक से उपयोग करने का निर्देश प्रदान करता है। फ्लैग कोड के अनुसार, भारत सरकार ने झंडे के निर्देशित आकार, रूप और रंग के साथ-साथ राष्ट्रीय ध्वज को सही तरीके से कैसे फहराया जाए, इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किये हैं।

26 जनवरी, 2002 को, भारत के ध्वज संहिता के सभी पिछले संस्करणों को बदलकर भारत का ध्वज संहिता लागू किया गया था। हालांकि, यह मौजूदा नियमों को बदलने के लिए नहीं था, यह पिछले सभी कानूनों, परंपराओं और प्रथाओं को एक साथ लाने का प्रयास था। ध्वज संहिता 2002 में प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1950 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 को संयुक्त किया गया था।

भारतीय ध्वज संहिता की विशेषताएं

भारतीय ध्वज संहिता, 2002 में तीन खंड हैं। राष्ट्रीय ध्वज का एक सामान्य विवरण संहिता के भाग I में दिया गया है। भाग II में राष्ट्रीय ध्वज को प्रदर्शित करने के लिए सार्वजनिक और निजी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य के लिए नियमों का उल्लेख किया गया है। खंड III निर्दिष्ट करता है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उनकी एजेंसियों और संगठनों के साथ राष्ट्रीय ध्वज को कैसे प्रदर्शित किया जाना है। भारतीय ध्वज संहिता की कुछ विशेषताएं इस प्रकार हैं:

1) किसी भी व्यक्ति या वस्तु को तिरंगे से सलामी नहीं दी जा सकती और न ही इसका इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

2) आपको ध्वज का उपयोग उत्सव के रूप में या किसी भी चीज़ को सजाने के लिए नहीं करना चाहिए।

3) ध्वज संहिता के अनुसार तिरंगे को हमेशा प्रमुखता से प्रदर्शित करना चाहिए और सम्मानजनक स्थान देना चाहिए।

4) झंडे को निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए और आधिकारिक प्रदर्शन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार होना चाहिए।

5) क्षतिग्रस्त तिरंगे को निजी तौर पर जलाकर या उसकी गरिमा के अनुसार ही नष्ट करना चाहिए।

6) जब किसी राज्य प्रधान या गणमान्य व्यक्ति का निधन हो जाता है या जब राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होता है तो शोक के दौरान सम्मान की निशानी के रूप में तिरंगे को आधा झुकाया जा सकता है।

भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन

पहले भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार, मशीन से बने और पॉलिस्टर के झंडे की अनुमति नहीं थी। 30 दिसंबर 2021 को भारतीय ध्वज संहिता में हुए संशोधन में, कपास, ऊन, रेशम और खादी के अलावा पॉलिस्टर के हाथ से बुने या मशीन से बने झंडों को भी इस्तेमाल करने की अनुमति मिली।

पहले यह भी उल्लेख किया गया था कि मौसम की स्थिति के बावजूद, ध्वज को केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए। हर घर तिरंगा अभियान के तहत 20 जुलाई 2022 को एक और संशोधन किया गया। जिसके अनुसार अब घर पर दिन या रात में राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति है।

निष्कर्ष

हमें अपने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज पर गर्व है। यह भारतीय लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम अपने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान, गरिमा और गौरव को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय ध्वज संहिता, 2002 में निर्दिष्ट निर्देशों का पालन करें।

मुझे आशा है कि भारतीय ध्वज संहिता पर उपरोक्त निबंध हमारे राष्ट्रीय ध्वज को फहराने और सम्मान करने की सही विधि को समझने में सहायक रहा होगा।

FAQs: भारतीय ध्वज संहिता पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.1 भारतीय ध्वज का आदर्श आकार क्या है?

उत्तर: भारत का राष्ट्रीय ध्वज आयताकार होना चाहिए। इसके आकार के बावजूद, राष्ट्रीय ध्वज की लंबाई और चौड़ाई के बीच 3:2 का अनुपात बनाए रखना चाहिए।

Q.2 भारतीय ध्वज सूर्यास्त तक क्यों प्रतिबंधित था?

उत्तर: ध्वज को तभी फहराना अनिवार्य है जब उसकी ओर पर्याप्त प्रकाश हो।

Q.3 ध्वज संहिता में अंतिम संशोधन कब किया गया था?

उत्तर: 20 जुलाई 2022 को केंद्र सरकार द्वारा भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया गया। इसने रात में भी राष्ट्रीय ध्वज को फहराने की अनुमति दी।

Q.4 क्या बारिश के दौरान झंडा फहराया जा सकता है?

उत्तर: भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार, बारिश होने पर भारतीय ध्वज को फहराने की अनुमति है।

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अर्चना सिंह

कई लोगो की प्रेरणा की स्रोत, अर्चना सिंह एक कुशल उद्यमी है। अर्चना सिंह 'व्हाइट प्लैनेट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' आई. टी. कंपनी की डायरेक्टर है। एक सफल उद्ममी होने के साथ-साथ एक कुशल लेखक भी है, व इस क्षेत्र में कई वर्षो का अनुभव है। वे 'हिन्दी की दुनिया' और अन्य कई वेबसाइटों पर नियमित लिखती हैं। अपने प्रत्येक क्षण को सृजनात्मकता में लगाती है। इन्हें खाली बैठना पसंद नहीं। इनका कठोर परिश्रम एवं कार्य के प्रति लगन ही इनकी सफलता की कुंजी है।

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द्वारा प्रकाशित
अर्चना सिंह