प्रदूषण पर निबंध

प्रदूषण, तत्वों या प्रदूषकों के वातावरण में मिश्रण को कहा जाता है। जब यह प्रदूषक हमारे प्राकृतिक संसाधनो में मिल जाते है। तो इसके कारण कई सारे नकरात्मक प्रभाव उत्पन्न होते है। प्रदूषण मुख्यतः मानवीय गतिविधियों द्वारा उत्पन्न होते है और यह हमारे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। प्रदूषण के द्वारा उत्पन्न होने वाले प्रभावों के कारण मनुष्यों के लिए छोटी बीमारियों से लेकर अस्तित्व संकट तक जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है।

वायु प्रदूषण पर निबंध | जल प्रदूषण पर निबंध | मृदा प्रदूषण पर निबंध | ध्वनि प्रदूषण पर निबंध

प्रदूषण पर बड़ा तथा छोटा निबंध (Long and Short Essay on Pollution in Hindi)

You can find here some essays on Pollution in Hindi language for students in 100, 150, 200, 300, 350, 450 and 1600 words.

आज के समय में प्रदूषण भारत में एक ऐसी समस्या बन चुका है, जिसका हर कोई सामना कर रहा है। वह बच्चे जो 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11 और 12वीं कक्षा में पढ़ते है उन्हें अक्सर प्रदूषण के विषय में निबंध लिखने का कार्य दिया जाता है। इसलिए अभिभावकों के लिए यह काफी आवश्यक है की वह प्रदूषण के प्रकारों के विषय में, इसके कारणों के विषय में तथा इससे बचाव के तरीकों के विषय में जाने जिससे वह अपने बच्चों को भी इस विषय में समझा सके और इससे बचने के तरीके बता सके। ऐसे ही कुछ निबंधो के नीचे दिया है जो इस विषय में आपके तथा आपके बच्चों के लिए काफी सहायक होंगे। इन दिये गये निबंधो में से आप अपनी आवश्यकता अनुसार किसी भी निबंध का चयन कर सकते है।

प्रदूषण पर निबंध 1 (100 शब्द)

प्रदूषण का अर्थ हमारे आस-पास के प्राकृतिक पर्यावरण के प्रदूषित होने से है। हमारे आस-पास के प्राकृतिक संसाधन हमारे जीवन को आसान बनाते है, परन्तु यह प्रदूषण इसे नुकसान पहुंचाने का कार्य करता है और कई तरह की शारीरिक बीमारियां तथा परेशानियां उत्पन्न करता है। इसके साथ ही यह प्राकृतिक व्यवस्था और संतुलन को भी बिगाड़ देता है।

प्रदूषक, प्रदूषण के वह तत्व है जो मानवीय गतिविधियों द्वार पैदा होते है और प्राकृतिक संसाधनो जैसे कि वायु, जल और भूमि को दूषित कर देते है। इनके रासायनिक प्रकृति, लंबे समय तक बने रहने की क्षमता तथा प्रदूषक प्रवृत्ति के कारण यह प्रदूषक हमारे पर्यावरण पर वर्षो तक नकरात्मक प्रभाव उत्पन्न करते है। यह प्रदूषक जहरीले गैसों, उर्वरकों, फंगसों, शोर-शराबे के साथ ही रासायनिक तथा रेडिएक्टिव कचरे से भी उत्पन्न होते है।

प्रदूषण पर निबंध 2 (100 शब्द)

जैसा कि हम सब जानते है कि हमारे स्वस्थ रहने में हमारे वातावरण का एक बहुत अहम योगदान है और एक अच्छा वातावरण हमारी सावधानियों और अच्छी आदतों से ही तैयार हो सकता है। मनुष्य, जीव-जन्तु, तमाम पेड़-पौधे तथा पृथ्वी सभी किसी ना किसी तरह से पर्यावरण से जुड़े हुए है। जोकि हमारे स्वस्थ्य जीवन के लिए बहुत आवश्यक है।

हालांकि अगर पर्यावरण में किसी प्रकार का भी नकरात्मक बदलाव आता है, तो यह हमारे सामान्य तथा स्वास्थ्य जीवन पर भी कई तरह के प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न करता है। हमारा पर्यावरण हमारे लिए हमारा प्राकृतिक आवास है और हमें तमाम तरह की प्राकृतिक आपदाओं से बचाता है। लेकिन अगर हम प्रकृति का संतुलन बिगाड़ देगें तो हमें इसके बदले में कई तरह के समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

प्रदूषण पर निबंध 3 (150 शब्द)

प्रस्तावना

प्रदूषण का अर्थ कई तरह के हानिकारक और जहरीले तत्वों का प्राकृतिक संसाधनो में मिलने से है। यह इस ग्रह पर रहने वाले जीवों के सामान्य जीवन को प्रभावित करता है और प्राकृतिक जीवन चक्र को बिगाड़ देता है।

प्रदूषण के प्रकार

प्रदूषण को कई प्रकारों में बांटा जा सकता है जैसे कि ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण, भूमि प्रदूषण और जल प्रदूषण आदि। वाहनों की बढ़ती संख्या, जहरीलें गैसों के उत्सर्जन, कारखानों से निकलने वाले धुएं और तरल एयरोसोल आदि के कारण हमारे ग्रह पर वायु प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। इसी वायु प्रदूषण की कारण जिस हवां में हम सांस लेते है, उसके द्वारा हमें कई तरह की फेफड़ो की बीमारियां हो जाती है।

इसी तरह के भूमि और जल प्रदूषण पानी तथा भूमि में कई तरह के कीटाणु, जीवाणु और हानिकारक रसायन आदि मिलने के कारण उत्पन्न होता है। पीने के पानी में भी कई तरह के कीटनाशक, फंसग, जीवाश्म तत्व और थोरियम आदि मिलने के कारण जल प्रदूषण जैसी समस्या उत्पन्न होती है।

निष्कर्ष

प्रदूषण की समस्या को रोकने के लिए सरकार को कई तरह के उपायों को अपनाने की आवश्यकता है। इसके लिए वाहनों के उपयोग को कम करने के साथ पानी की बचत करनी होगी तथा जैविक खेती को बढ़ावा देना होगा।


 

प्रदूषण पर निबंध 4 (150 शब्द)

प्रस्तावना

पर्यावरण प्रदूषण वह स्थिति है, जिसके अंतर्गत प्राकृतिक चक्र और हमारा पर्यावरण बिगड़ जाता है, जो हमारे लिए काफी हानिकारक है। इसमें कुछ हानिकारक तत्व जो धुएं, ठोस या तरल अपशिष्ट के रुप में इकठ्ठा हो जाता है, वह हमारे पर्यावरण के लिए काफी हानिकारक होते है। इसके अलावा ऐसे कुछ बुरे रासायनिक तत्व जो हमारे पर्यावरण को क्षति पहुंचाते है और हमारे प्राकृतिक कार्यों में भी बाधा उत्पन्न करते है, जोकि प्रत्यक्ष रुप से हमारे स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

पर्यावरण प्रदूषण को कैसे रोके

वह केवल मनुष्य ही है जो अपनी बुरी गतिविधियों को रोककर पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर लगाम लगा सकता है। इसके साथ ही और भी ज्यादे मात्रा में पेड़ो को लगाकर भी पर्यावरण प्रदूषण पर लगाम लगाया जा सकता है। इसी तरह वाहनों का उपयोग कम करके, वस्तुओं की पुनरुपयोग और पुनरावृत्ति करना भी प्रदूषण को रोकने में काफी सहायक हो सकता है।

निष्कर्ष

हम और हमारा पर्यावरण एक दूसरे के बिना अधूरे है। अनजाने में अपने कार्यों द्वारा हम पर्यावरण के लिए कई तरह की समस्याएं खड़ी कर रहे है और इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपनी भूमिकाओं को निभाने के लिए प्राकृतिक तरीकों को अपनाए।

प्रदूषण पर निबंध 5 (200 शब्द)

प्रस्तावना

आज के समय में प्रदूषण एक बहुत बड़ी पर्यावरणीय समस्या बन गया है, इसके कारण मनुष्यों तथा पशुओं में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही है। औद्योगिकरण के कारण पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषण का स्तर काफी तेजी से बढ़ा है और इसके कारण प्रदूषण भी काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है क्योंकि औद्योगिक गतिविधियों के कारण इससे उत्पन्न होने वाला कचरा प्रत्यक्ष रुप से भूमि, वायु और पानी में मिलता जा रहा है। फिर भी लोग प्रदूषण की इस समस्या और इसके प्रभावों के प्रति जागरुक नही हो रहे है। यह वह समय है जब हमें इस मुद्दे को लेकर संजीदा होने की आवश्यकता है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ीयों को इस तरह की समस्याओं का सामना ना करना पड़े।

प्रदूषण के प्रकार

प्रदूषण को उनके द्वारा प्रदूषित किये जाने वाले प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर बांटा गया है जैसे कि वायु प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण आदि। इसके अलावा भी कई अन्य तरह के भी प्रदूषण है, जो हमारे ग्रह और इसके जैव विविधता के लिए हानिकारक है।

प्रदूषण के कारण

लगातार कटते जा रहे पेड़, वाहनों के बढ़ते प्रयोग, तेजी से हो रहा शहरीकरण और औद्योगिकरण तथा दूसरे बड़े स्तर पर हो रहे कार्यों के कारण हमारे पर्यावरण पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। इन जहरीले और नुकसानदायक कचरों के कारण भूमि, वायु और जल में अपरीवर्तनीय परिवर्तन होते है, जिसके कारण हमारे समान्य जीवन में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। मनुष्य अपने स्वार्थ और इच्छाओं को पूरा करने के लिए पर्यावरण पर प्रदूषण का भार दिन-प्रतिदिन बढ़ाता ही जा रहा है।

निष्कर्ष

प्रदूषण के इस समस्या को रोकने के लिए हमें सार्वजनिक जागरुकता के कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए ताकि प्रदूषण की इस समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सके। इसके साथ ही हर व्यक्ति की यह जिम्मेदारी बनती है कि प्रदूषण को रोकने के लिए वह अपने स्तर पर अपना महत्वपूर्ण योगदान दे, तभी हम अपनी आने वाली पीढ़ीयों को प्रदूषण मुक्त माहौल दे पायेंगे।


 

प्रदूषण पर निबंध 6 (200 शब्द)

प्रस्तावना

पर्यावरणीय प्रदूषण आज के समय में एक बड़ी समस्या बन गया है और पृथ्वी पर बसने वाला ऐसा कोई भी प्राणी नही है, जो इससे प्रभावित ना होता हो। प्राकृतिक पर्यावरण के दूषित होने के कारण यह मनुष्यों तथा जीव-जन्तुओं में कई तरह के बीमारियों का कारण बनता जा रहा है।

प्रदूषण के प्रभाव

प्रदूषण हमें हर तरह से प्रभावित करता है फिर चाहे वह सामाजिक हो, शारीरिक हो या फिर मानसिक। प्रदूषण का बढ़ता हुआ यह प्रभाव सिर्फ मनुष्यों को ही नही बल्कि की पृथ्वी पर मौजूद हर जीव के लिए काफी घातक है। पृथ्वी पर बढ़ते प्रदूषण स्तर ने ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसे पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म दिया है।

प्रदूषण के कारण

वाहनों से निकलने वाले धुएं, औद्योगिक कचरा और धुआं, अव्यवस्थित तरह से किया गया कचरा निस्तारण और ज्यादे मात्रा में प्लास्टिक और पॉलीथिन आदि के उपयोग के कारण प्रदूषण में वृद्धि होती जा रही है। इसके साथ ही अत्यधिक मात्रा में रासायनिक और कीटनाशकों के उपयोग के कारण भूमिगत जल भी प्रदूषित होता जा रहा है।

प्रदूषण की रोकथाम

अगर हम प्रदूषण जैसी समस्या से लड़ना चाहते है तो हमें वाहनों के उपयोग को कम करना होगा, उद्योग से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करना होगा, जल बचाना होगा, कोयले और पेट्रोलियम पदार्थों के उपयोग को भी कम करना होगा। इसके साथ ही भूमि को प्रदूषण से बचाने तथा उसकी उर्वरता को बनाये रखने के लिए रसायनों और किटनाशकों के उपयोग को भी कम करना होगा।

निष्कर्ष

पर्यावरण प्रदूषण मात्र एक देश की समस्या नही है बल्कि की यह पूरे विश्व की समस्या है, इसलिए इसे रोकने के लिए हम सब को एक साथ आना होगा और यदि इसे रोका नही गया तो आने वाले भविष्य में यह पूरे ग्रह के लिए खतरा बन जायेगा। इसके साथ ही यह पूरे पृथ्वी को भी काफी बुरे तरह से प्रभावित कर रहा है, जिससे यह मानव जीवन के लिए भी एक संकट बन गया है।


प्रदूषण पर बड़ा निबंध 7 (250 शब्द)

प्रस्तावना

जब बाहरी तत्व और विषैले पदार्थ पर्यावरण में मिल जाते है, तो यह प्रदूषण जैसी समस्या उत्पन्न करते है। प्राकृतिक संसाधनों के प्रदूषण के कारण पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन भी बिगड़ गया है। प्रदूषण आज के समय में विश्व के हर देश के लिए एक चिंता का कारण बन गया है।

कारण

औद्योगिकरण, वनोन्मूलन, शहरीकरण आदि प्रदूषण के मुख्य कारण है। हमारी कई सारी दैनिक गतिविधियों से निकलने वाले कचरें के कारण भी इस समस्या में वृद्धि होती जा रही है। हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले प्रदूषकों में अधिकतर गैसे (एनओ, एसओ2, सीओ2, सीओ, एनओ2) हालोजन (आयोडिन, क्लोरीन, ब्रोमाइन) इकठ्ठा होने वाले तत्व (धुल, धुंध) कृषि रसायन (कीटनाशक) आदि होते है।

शोर शराबा, फोटोकेमिकल आक्सीडेंट (फोटोकेमिकल स्मोग, पेरोक्सोटिल नाइट्रेट, ओजोन, नाइट्रोजन, ऑक्साइड) औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला (असेटिक एसिड, बेन्जीन, ईथर) और रेडियोएक्टिव तत्व (रेडियम, थोरियम) आदि ऐसे कुछ ठोस कचरे हैं, जिनका हमें सावधानीपूर्वक निस्तारण करने की आवश्यकता है।

प्रभाव

वायु, जल और भूमि प्रदूषण वह सबसे खतरनाक तरीके के प्रदूषण है जो मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रत्यक्ष रुप से प्रभावित करते है। आज के समय में ना तो हमारे पास पीने का शुद्ध पानी है नाही सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु और नाही फसल उगाने के लिए प्रदूषण मुक्त भूमि, औद्योगिक क्रांति और ग्रीन हाउस इफेक्ट के कारण हमारे पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न हो गये है। मानव स्वार्थ और आजादी के दुरुपयोग के कारण हमने प्राकृतिक संसाधनो का काफी दोहन किया है।

निष्कर्ष

अपने इस ग्रह पर हमें भविष्य में स्वस्थ जीवन को बनाये रखने के लिए इन तेजी से फैल रहे प्रदूषणों को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। अगर हम अपने आने वाली पीढ़ीयों के लिए एक अच्छा पर्यावरण चाहते है तो हमें इसके लिए कड़े कदम उठाते हुए प्रदूषण को रोकने की आवश्यकता है ताकि पृथ्वी को एक और अच्छी जगह बनायी जा सके।


 

प्रदूषण पर बड़ा निबंध 8 (250 शब्द)

प्रस्तावना

पृथ्वी को एक आनोखा ग्रह माना जाता है क्योंकि यहीं एक ऐसा ग्रह है, जिसपर जीवन संभव है। इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनो का हानिकारक तत्वों के द्वारा प्रदूषित हो जाने के कारण कई तरह की बीमारियां उत्पन्न होती है और यह हमारे पूरे प्राकृतिक वातावरण को प्रभावित करता है। सड़को पर दिन प्रतिदिन बढती वाहनों की संख्या और तेजी से हो रहे औद्योगिकीकरण से निकलने वाली विषैली गैसों के कारण वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है।

वायु प्रदूषण कैसे हमें और हमारे पर्यावरण को प्रभावित करता है

प्रदूषण हमें और हमारे पर्यावरण को निम्नलिखित तरीकों द्वारा प्रभावित करता है-

अम्लीय वर्षा

हानिकारक रसायनों, जहरीली गैसों और धुल के कण अम्लीय वर्षा के रुप में पुनः धरती पर आ जाते हैं और इसके वजह से जनजीवन और फसलों को काफी हानि पहुंचती है। अम्लीय वर्षा के प्रभाव किसानों और कुछ दूसरे प्रजातियों के लिए काफी हानिकारक है।

कृषि दूषितकरण

औद्योगिक तरल के समुद्रों, नदियों और तालाबों में निस्तारण के कारण जल प्रदूषण की समस्या में काफी वृद्धि हो गई है और क्योंकि यह पानी किसानों द्वारा खेती के लिए इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए इससे निकलने वाला पानी हमारे स्वास्थ्य पर कई तरह के नकरात्मक प्रभाव उत्पन्न करता है।

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन

बढ़ते प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग के स्तर में भी काफी वृद्धि देखने को मिली है, जिसके कारण कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। इसके कारण जलवायु परिवर्तन जैसी समस्या भी उत्पन्न हो गई है, जिससे पृथ्वी पर से कई तरह की प्रजातियां भी विलुप्त हो गई है।

निष्कर्ष

प्रदूषण के कारण हमारे पृथ्वी का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता काफी बुरे तरीके से प्रभावित हो रही है। यदि यह प्रदूषण इसी तरह से बढ़ता रहा तो आने वाले भविष्य में इसके हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण काफी गंभीर नकरात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे।


 

प्रदूषण पर बड़ा निबंध 9 (300 शब्द)

प्रस्तावना

प्रदूषण आज के समय में एक चुनौती बन चुका है क्योंकि इसके कारण लोग अपने जीवन में कई तरह के खतरों को सामना कर रहे है। औद्योगिक कार्यों और कई अन्य माध्यमों से निकलने वाले कचरे के कारण वायु, जल और भूमि जैसे हमारे प्राकृतिक संसाधन दिन-प्रतिदिन और भी ज्यादे प्रदूषित होते जा रहे है। यह जल, वायु और भूमि में मिलने के बाद मानव तथा अन्य जीव जन्तुओं के स्वास्थ्य को प्रत्यक्ष रुप से प्रभावित करते है। जिससे की हमारे स्वास्थ्य पर कई तरह के नकरात्मक प्रभाव उत्पन्न हो जाते है।

शहरों में प्रदूषण

वाहनों और यातायात साधनों के कारण शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों के अपेक्षा प्रदूषण स्तर काफी ज्यादे है। उद्योगो और कारखानों से निकलने वाले धुएं के कारण शहरों में स्वच्छ वायु की गुणवत्ता काफी खराब हो चुकी है और यह वायु अब हमारें सांस लेने योग्य नही है। इसके अलावा जब सीवेज, घरेलु कचरा और उद्योगों तथा कारखानों से निकलने वाला कचरा जब नदियों, झरनों और समुद्र के पानी में मिल जाता है तो यह पानी को जहरीला और अम्लीय बना देता है।

गावों में प्रदूषण

हालांकि गावों में शहरों के अपेक्षा प्रदूषण का स्तर काफी कम है लेकिन तेजी से हो रहे औद्योगिकीकरण के कारण अब गावों का स्वच्छ वातावरण भी प्रदूषित होता जा रहा है। बढ़ते यातायात संसाधनो और कीटनाशकों के कारण गावों में वायु और भूमि की गुणवत्ता काफी प्रभावित हुई है। इसके कारण भूजल भी दूषित हो गया है, जोकि आज के समय में कई बीमारियों का कारण बन गया है।

प्रदूषण की रोकथाम

शहरों और गावों में बढ़ते प्रदूषण को मात्र लोगों में जागरुकता लाकर ही रोका जा सकता है। इसके लिए हमें कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता है जैसे कि वाहनों के उपयोग को कम करना, अधिक पेड़ लगाना, रसायनों और कीटनाशकों का कम उपयोग करना आदि ऐसे उपाय है जिनके द्वारा प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सकता है। इसके अलावा प्रदूषण की इस समस्या को देखते हुए सरकार को भी प्लास्टिक और पॉलीथिन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

मानव निर्मित प्रोद्योगिकी में उन्नति के कारण ही प्रदूषण की यह समस्याएं उत्पन्न हुई है। इससे पहले प्रदूषण की यह समस्या काफी बढ़ जाये और खतरे के स्तर तक पहुंच जाये। हमें इसे रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता है। हम सब एक साथ मिलकर ही प्रदूषण की इस समस्या पर काबू पा सकते है और प्रदूषण के इस खतरे से निपट सकते है।


 

प्रदूषण पर बड़ा निबंध 10 (300शब्द)

प्रस्तावना

पर्यावरणीय प्रदूषण आज के समय में पूरे मानवता के लिए एक गंभीर समस्या बन चुका है। हम जाने-अनजाने में अपने कार्यों द्वारा पर्यावरण में लगातार प्रदूषण बढ़ाते जा रहे है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण एक मनुष्य के रुप में हमारा प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। जब हम पर्यावरण के प्राकृतिक चक्र से खिलवाड़ करते है तो यह हमारे लिए कई बड़ी चुनौतियां उत्पन्न कर देता है और हमारे स्वस्थ जीवन को काफी मुश्किल बना देता है। यह प्रदूषण मनुष्य और प्रकृति दोनो के ही अस्तित्व को खतरें में डाल देता है क्योंकि यह दोनो ही अपनी जरुरतों के लिए एक दूसरे पर निर्भर करते है।

प्रदूषण के मुख्य कारण

प्रदूषण के मुख्य कारणों के विषय में नीचे बताया गया हैः

पेड़ो को काटना

पर्यावरण प्रदूषण के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक पेड़ो का लगातार काटा जाना भी है। दिन-प्रतिदिन पेड़ो की घटती संख्या के कारण पर्यावरण में जहरीली गैसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है क्योंकि पेड़ो द्वारा वातावरण में मौजूद कार्बन डाइआऑक्साइड का अवशोषण किया जाता है और आक्सीजन उत्सर्जित किया जाता है।

औद्योगिकरण और यातायात

तेजी से हो रहे औद्योगिकरण और यातायात के कारण कई तरह के हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है, जो अंततः वायु में मिल जाते है इसके अलावा उद्योगों से निकलने वाले कचरे का सही तरीके से निस्तारण ना करने के कारण यह नदियों और झीलों के पानी में मिल जाता है। जिसके कारण जल प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है और जलीय जीवों पे यह कई तरह के हानिकारक प्रभाव डालता है।

कीटनाशक

किसान फसलों की उर्वरकता बढ़ाने के लिए काफी ज्यादे मात्रा में कीटनाशक का इस्तेमाल करते है, जिसके कारण जलीय स्त्रोतों में प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ जाती है। जब इस पानी का उपभोग किया जाता है तो इसके कारण कई सारी बीमारियां उत्पन्न हो जाती है।

निष्कर्ष

अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमें ताजे और साफ हवा, स्वच्छ भोजन तथा पीने के लिए साफ पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन बढ़ते प्रदूषण के कारण हमारे लिए यह चीजें मुश्किल होती जा रही है। हमें प्रभावित करने के अलावा, प्रदूषण हमारे लिए कई तरह के पर्यावरणीय समस्याएं भी पैदा करता है जैसे ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और प्रजातियों का विलुप्तीकरण आदि।


 

प्रदूषण पर बड़ा निबंध 11 (400 शब्द)

प्रस्तावना

वर्तमान युग में तरक्की के कारण पृथ्वी वह मुख्य समस्या बनकर उभरा है जो पृथ्वी के वातावरण को प्रभावित कर रहा है। इसमें कोई शक नही है कि प्रदूषण हमारे पर्यावरण और समान्य जीवन स्तर को प्रभावित कर रहा है। हमारा प्राकृतिक पर्यावरण हमारे मूर्खतापूर्ण कार्यों के कारण दिन-प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है, जिससे हम खुद भी प्रभावित हो रहे है।

प्रदूषण के प्रकार

वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण कुछ ऐसे मुख्य प्रदूषण है, जिनके कारण पर्यावरण दिन-प्रतिदिन प्रभावित होता जा रहा है। इन्हीं मुख्य प्रदूषणों के विषय में नीचे विस्तार से जानकारी दी गयी है।

जल प्रदूषण

जल प्रदूषण वह बड़ी समस्या है जो प्रत्यक्ष रुप से जलीय जीवन को प्रभावित करता है क्योंकि जलीय जीव अपने आहार तथा पोषण के लिए पूर्ण रुप से पानी पर निर्भर करते है। लगातार जलीय जीवों के विलुप्त होने कारण मनुष्यों के रोजगार और भोजना श्रृंखला पर भी खतरा मंडराने लगा है। कारखानों से निकला हानिकारक रसायन, सीवेज, फार्म से निकले कचरों को सीधे तौर पर नदियों, झीलों और समुद्र जैसे जल स्त्रोंतों में निस्तारित कर दिया जाता है। जिससे यह पानी दूषित हो जाता है और कई तरह की बीमारियां उत्पन्न करता।

भूमि प्रदूषण

भूमि प्रदूषण काफी ज्यादे मात्रा में कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के कारण होता है। इनके उपयोग से पैदा होने वाली फसलों का सेवन करने से सेहत पर कई तरह के हानिकारक प्रभाव उत्पन्न होते है।

ध्वनि प्रदूषण

हैवी मशीनरी, टेलीवीजन, रेडियों और स्पीकर आदि ध्वनि प्रदूषण के मुख्य स्त्रोत है। जिसके कारण बहरेपन की भी समस्या हो सकती है, ध्वनि प्रदूषण के कारण बुजुर्ग व्यक्ति सबसे अधिक प्रभावित होते है और इसके कारण उनमें हृदयघात और तनाव जैसी बीमारियां भी उत्पन्न हो जाती है।

निष्कर्ष

हर प्रकार का प्रदूषण हमारे लिए काफी खतरनाक होता है और हमें इसके काफी गंभीर परिणाम भुगतने होते है। इसके अलावा हमें पर्यावरण का ध्यान रखने की आवश्यकता है ताकि हम प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाये रख सके। इस समस्या से निपटने के लिए हम सबको संयुक्त प्रयास करने की आवश्यकता है, जिससे हम पृथ्वी पर स्वच्छ और अप्रदूषित वातावरण बनाये रख सके। इस प्रदूषण को रोककर हम अपने ग्रह पर निवास करने वाले कई सारे मासूम जीवों के लिए वातावरण को उनके अनुकूल बनाकर उन्हें बचा पायेंगे।


 

प्रदूषण पर बड़ा निबंध 12 (400 शब्द)

प्रस्तावना

पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ हानिकारक प्रदूषकों का पर्यावरण में मिल जाना है। जिसके कारण प्राकृतिक चक्र में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। पर्यावरण प्रदूषण को कई तरह प्रदूषणों में वर्गीकृत किया गया है जैसे कि जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, भूमि प्रदूषण आदि। पिछले कुछ दशकों से प्रदूषण के स्तर में काफी वृद्धि देखने को मिली है और यह प्रदूषण स्तर पहले के अपेक्षा काफी खराब हो चुका है। इसलिए यह वह समय है जब हमें प्रदूषण से निपटने के लिए मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।

प्रदूषण के प्रभाव

पर्यावरण में मौजूद सभी प्रकार की प्राकृतिक गैसे एक-दूसरे से अभिक्रिया करके इसका संतुलन बनाये रखती है। इनमें से कुछ पेड़-पौधे द्वारा भोजन के रुप में ग्रहण की जाती है जैसे कि कार्बन डाइआऑक्साइड, लेकिन इस विषय में सोचिये कि यदि पृथ्वी पर किसी प्रकार के पेड़-पौधे ना हो तो क्या होगा? पेड़ो की घटती संख्याओं के कारण पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जा रही है। जिसके कारण ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।

प्रदूषण को कैसे रोके

आज के समय में प्रदूषण एक महत्वपूर्ण समस्या बन चुका है, जिसे हमें नियंत्रित करने की आवश्यकता है। इसे समय रहते नियंत्रित करने के लिए हम कुछ आवश्यक उपाय अपना सकते है, इन्हीं में से कुछ उपायों के विषय में नीचे बताया गया है।

और अधिक पेड़ लगाकर

वनीकरण और पेड़ लगाना प्रदूषण से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, हम जितने ज्यादे पेड़ लगायेंगे उतने ही ज्यादे कार्बन डाइऑक्साइड और दूसरी हानिकारक गैसों का अवशोषण होगा और हमारा पर्यावरण तथा वायु उतनी ही स्वच्छ होगी।

वाहनों के उपयोग को घटाकर

हम वाहनों का उपयोग जितना कम करेंगे इनसे निकलने वाली हानिकरक गैसों का उत्सर्जन उतना ही कम होगा। इसके जगह हमें बाइसाइकल के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

उपयुक्त कचरा निस्तारण

उपयुक्त कचरा निस्तारण के तरीकों द्वारा हम उद्योगों के विषैले तत्वों को पर्यावरण में मिलने से रोक सकते है। यह वायु और जल प्रदूषण को रोकने के साथ ही जलीय जीवों को बचाने में भी काफी कारगर साबित होगा क्योंकि समुद्रों और नदियों में बिना प्रदूषण के यह जीव आराम से अपना जीवन व्यतीत कर सकते है।

सीमित मात्रा में किटनाशकों का उपयोग करना

किसानों को खेती में रासायनिक किटनाशकों के उपयोग को कम करना चाहिए और फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए। ऐसा करके हम भूमि की उर्वरकता को बनाये रख सकते है तथा भूजल को भी प्रदूषित होने से बचा सकते है।

पुनरुपयोग और पुनरावृत्ति करके

वस्तुओं की पुनरावृत्ति करना भी प्रदूषण को रोकने का एक अच्छा उपाय है। यह इधर-उधर फैलने वाले कचरे से होने वाले प्रदूषण को रोकने में सहायता करता है और पर्यावरण को स्वच्छ और साफ-सुथरा बनाये रखने में सहयोग करता है।

निष्कर्ष

हमारे पास अपने पर्यावरण को बचाने के लिए अभी भी समय मौजूद है परन्तु इसके लिए हम सबको मिलकर संगठित प्रयास करने की आवश्यकता है। पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हमें लोगों को वैश्विक स्तर पर जागरुक करने की आवश्यकता है। हमें अपनी जिम्मेदारी को समझने की आवश्यकता है और अपने ग्रह को स्वंय तथा अन्य दूसरी प्रजातियों के लिए और भी अच्छा बनाने के लिए प्रयास करने की आवश्यकता है।


 

प्रदूषण पर बड़ा निबंध 13 (1600 शब्द)

प्रस्तावना

आज के समय में प्रदूषण एक वैश्विक समस्या बन चुका है। इसने हमारे पृथ्वी को पूर्ण रुप से बदल कर रख दिया है और दिन-प्रतिदिन पर्यावरण को क्षति पहुंचाते जा रहे है, जोकी हमारे जीवन को और भी ज्यादे मुश्किल बनाते जा रहा है। कई तरह के जीव और प्रजातियां प्रदूषण के इन्हीं हानिकारक प्रभवों के कारण धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहीं है।

प्रदूषण को इसके प्रकृति के आधार पर कई वर्गों में बांटा गया है, विभिन्न प्रकार के प्रदूषण हमारे ग्रह को विभिन्न प्रकार से नुकसान पहुंचा रहे है। इन्हीं प्रदूषणों के प्रकार, इनके कारणों, प्रभावों और रोकथाम के विषय में नीचे चर्चा कि गयी है।

प्रदूषण के प्रकार

यह है मुख्य प्रकार के प्रदूषण उनके कारण तथा उनके द्वारा उत्पन्न होने वाले प्रभाव, जोकि हमारे पर्यावरण और दैनिक जीवन को कई तरह से प्रभावित करते है।

1.वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण को सबसे खतरनाक प्रदूषण माना जाता है, इस प्रदूषण का मुख्य कारण उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआं है। इन स्त्रोतों से निकलने वाला हानिकारक धुआं लोगो के लिए सांस लेने में भी बाधा उत्पन्न कर देता है। दिन प्रतिदिन बढ़ते उद्योगों और वाहनों ने वायु प्रदूषण में काफी वृद्धि कर दी है। जिसने ब्रोंकाइटिस और फेफड़ो से संबंधित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी कर दी है।

वायु प्रदूषण का प्रभाव सिर्फ मानव स्वास्थ्य तक ही सीमित नही है बल्कि की पर्यावरण पर भी इसके काफी विपरीत प्रभाव होते है, जिससे की ग्लोबल वार्मिंग जैसी भयावह समास्याएं उत्पन्न हो जाती है।

2.जल प्रदूषण

उद्योगों और घरों से निकला हुआ कचरा कई बार नदियों और दूसरे जल स्त्रोतों में मिल जाता है, जिससे यह उन्हें प्रदूषित कर देता है। एक समय साफ-सुथरी और पवित्र माने जानी वाली हमारी यह नदियां आज कई तरह के बीमारियों का घर बन गई है क्योंकि इनमें भारी मात्रा में प्लास्टिक पदार्थ, रासयनिक कचरा और दूसरे कई प्रकार के नान बायोडिग्रेडबल कचरे मिल गये है। यह प्रदूषक पानी में मिलकर हमारे स्वास्थ्य को भी खराब करते है। इसके साथ ही जल प्रदूषण की यह समस्या जलीय जीवन के लिए भी एक गंभीर समस्या बन गयी है, जिसके कारण प्रत्येक दिन कई सारे जलीय जीवों की मृत्यु हो जाती है।

3.भूमि प्रदूषण

वह औद्योगिक और घरेलू कचरा जिसका पानी में निस्तारण नही होता है, वह जमीन पर ही फैला रहता है। हालांकि इसके रीसायकल तथा पुनरुपयोग के कई प्रयास किये जाते है पर इसमें कोई खास सफलता प्राप्त नही होती है। इस तरह के भूमि प्रदूषण के कारण इसमें मच्छर, मख्खियां और दूसरे कीड़े पनपने लगते है, जोकि मनुष्यों तथा दूसरे जीवों में कई तरह के बीमारियों का कारण बनते है।

इसके साथ ही भारी मात्रा में उत्पन्न होने वाले कचरे से भूमि विषाक्त भी हो जाती है। लगातार कीटनाशकों और दूसरे रसायनों का इस्तेमाल करने के कारण भी भूमि प्रदूषण में वृद्धि होती है। इस तरह के प्रदूषण को भूमि प्रदूषण के नाम से जाना जाता है।

4.ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण कारखनों में चलने वाली तेज आवाज वाली मशीनों तथा दूसरे तेज आवाज करने वाली यंत्रो से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही यह सड़क पर चलने वाले वाहन, पटाखे फूटने के कारण उत्पन्न होने वाला आवाज, लाउड स्पीकर से भी ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होती है। ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों में होने वाले मानसिक तनाव का मुख्य कारण है, जोकि मस्तिष्क पर कई दुष्प्रभाव डालने के साथ ही सुनने की शक्ति को भी घटाता है।

5.प्रकाश प्रदूषण

प्रकाश प्रदूषण किसी क्षेत्र में अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे रोशनी उत्पन्न करने के कारण पैदा होता है। प्रकाश प्रदूषण शहरी क्षेत्रों में प्रकाश के वस्तुओं के अत्यधिक उपयोग से पैदा होता है। बिना जरुरत के अत्याधिक प्रकाश पैदा करने वाली वस्तुएं प्रकाश प्रदूषण को बढ़ा देती है, जिससे कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है।

6.रेडियोएक्टिव प्रदूषण

रेडियोएक्टिव प्रदूषण का तात्पर्य उस प्रदूषण से है, जो अनचाहे रेडियोएक्टिव तत्वों द्वारा वायुमंडल में उत्पन्न होता है। रेडियोएक्टिव प्रदूषण हथियारों के फटने तथा परीक्षण, खनन आदि से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही परमाणु बिजली केंद्रों में भी कचरे के रुप में उत्पन्न होने वाले अवयव भी रेडियोएक्टिव प्रदूषण को बढ़ाते है। रेडियोएक्टिव तत्व पर्यावरण को काफी हानिकारक रुप से नुकसान पहुंचाते है, यह प्रदूषक जल स्त्रोतों में मिलकर उन्हें प्रदूषित कर देते हैं, जिससे यह हमारे उपयोग योग्य नही रह जाते है।

7.थर्मल प्रदूषण

थर्मल प्रदूषण का तात्पर्य जल स्त्रोतों के तापमान में एकाएक होने वाले परिवर्तन से है। यह कोई मामूली परिवर्तन नही है क्योंकि यह पूरे पर्यावरण तंत्र का संतुलन बिगाड़ने की क्षमता रखता है। कई उद्योगों में पानी का इस्तेमाल शीतलक के रुप में किया जाता है जोकि थर्मल प्रदूषण का मुख्य कारण है। शीतलक के रुप में इस्तेमाल किया गया यह पानी जब एकाएक जल स्त्रोतों में वापस छोड़ा जाता है, तब यह पानी में मौजूद आक्सीजन की मात्रा को कम कर देता है क्योंकि गैसे गरम पानी में कम घुलनशील होती है। इसके कारण जलीय जीवों को तापमान परिवर्तन और पानी में आक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।

8.दृश्य प्रदूषण

मनुष्य द्वारा बनायी गयी वह वस्तुएं जो हमारी दृष्टि को प्रभावित करती है दृष्य प्रदूषण के अंतर्गत आती है जैसे कि बिल बोर्ड, अंटिना, कचरे के डिब्बे, इलेक्ट्रिक पोल, टावर्स, तार, वाहन, बहुमंजिला इमारते आदि। दृष्य प्रदूषण के लगातार संपर्क में आने से आंखों की थकान, तनाव, अवसाद जैसी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। इसी अनियोजित और अनियमित निर्माण के कारण दृश्य प्रदूषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

विश्व के सर्वाधिक प्रदूषण वाले शहर

एक तरफ जहां विश्व के कई शहरों ने प्रदूषण के स्तर को कम करने में सफलता प्राप्त कर ली है, वही कुछ शहरों में यह स्तर काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। विश्व के सबसे अधिक प्रदूषण वाले शहरों की सूची में कानपुर, दिल्ली, वाराणसी, पटना, पेशावर, कराची, सिजीज़हुआन्ग, हेजे, चेर्नोबिल, बेमेन्डा, बीजिंग और मास्को जैसे शहर शामिल है।

इन शहरों में वायु की गुणवत्ता का स्तर काफी खराब है और इसके साथ ही इन शहरों में जल और भूमि प्रदूषण की समस्या भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिससे इन शहरों में जीवन स्तर काफी दयनीय हो गया है। यह वह समय है जब लोगों को शहरों का विकास करने के साथ ही प्रदूषण स्तर को भी नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

प्रदूषण कम करने के उपाय

जब अब हम प्रदूषण के कारण और प्रभाव तथा प्रकारों को जान चुके हैं, तब अब हमें इसे रोकने के लिए प्रयास करने होंगे। इन दिये गये कुछ उपायों का पालन करके हम प्रदूषण की समस्या पर काबू कर सकते है।

1.कार पूलिंग

वाहनों के द्वारा उत्पन्न होने वाला धुआं वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। सड़को पर दिन-प्रतिदिन बढ़ते वाहनों के कारण प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। कार पूलिंग इस समस्या को कम करने में एक अहम योगदान निभा सकता है। कार पूलिंग का तात्पर्य यात्रा या फिर काम पर जाते वक्त कार में उपलब्ध जगह का साझाकरण करने से है। इसी तरह सार्वजनिक परिवाहन का उपयोग करके भी वायु प्रदूषण की समस्या को कम करने में एक अहम योगदान दिया जा सकता है।

2.पटाखों को ना कहिये

दिवाली, नववर्ष और दशहरा जैसे त्योहारों पर जलाये जाने वाले पटाखें भी काफी मात्रा में वायु और ध्वनि प्रदूषण पैदा करते है। खासतौर से यह बुजुर्ग व्यक्तियों, छोटे बच्चों और जानवरों के लिए काफी कष्टदायक होते है। हमें एक जिम्मेदार व्यक्ति होने का परिचय देना चाहिए और पटाखों का उपयोग नही करना चाहिए।

3.रीसायकल/पुनरुयोग

बेकार के प्लास्टिक और अन्य नान-बायोडिग्रेडेबल पदार्थों के कारण भूमि और जल प्रदूषण में वृद्धि होती है, जिससे कई तरह की बीमारियां उत्पन्न होती है। इसलिए हमें इस प्रकार की वस्तुओं को तत्काल फेककर नयी वस्तुएं नही लेनी चाहिए बल्कि की इससे पहले उनका जितनी बार हो सके पुनरुपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही हमें वस्तुओं के रीसायकलीकरण पर भी ध्यान देना चाहिए।

4.अपने आस-पास की जगहों को साफ-सुथरा रखकर

हमें अपने आस पास की जगहों को साफ-सुथरा रखना चाहिए और कूड़े को डस्टबीन में ही फेकना चाहिए। ऐसा करके हम एक बड़ा परिवर्तन ला सकते है और अपने पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अपना अहम योगदान दे सकते है।

5.कीटनाशको और उर्वरकों का सीमित उपयोग करके  

यह काफी जरुरी है कि हम हमेशा सीमित मात्रा में ही कीटनाशकों, उर्वरकों और दूसरे अन्य रसायनों का उपयोग करें क्योंकि यह वस्तुएं भूमि प्रदूषण की समस्या को बढ़ाती है। इसके जगह हमें फसलों से कीट-पतंगो को दूर रखने के लिए प्राकृतिक उपायों का उपयोग करना चाहिए।

6.पेड़ लगाकर

पेड़-पौधे द्वारा कार्बन डाई ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साईड जैसे हानिकारक गैसों को अवशोषित कर लिया जाता है और आक्सीजन उत्सर्जित किया जाता है। इसलिए यह वायु प्रदूषण को रोकने में काफी सहायक होते है। यहीं कारण है कि शुद्ध हवा की प्राप्ति के लिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए।

7.काम्पोस्ट का उपयोग किजिए

अतिरिक्त खाद्य पदार्थों, पत्तियों और पेड़-पौधों को डिक्पोज करके आसानी से खाद बनाया जा सकता है। यह बेकार के वस्तुओं का उपयोग करने का सबसे अच्छा और आसान तरीका है।

8.प्रकाश का अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे उपयोग ना करके

हमें प्रकाश के अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे उपयोग को कम करने की आवश्यकता है। इसके लिए हमें काफी सावधानी बरतनी चाहिए और सरकार को भी इस विषय के रोकथाम को लेकर जरुरी कदम उठाने चाहिए ताकि लोग अत्यधिक मात्रा में प्रकाश के वस्तुओं को स्थापित ना कर सकें। इसके साथ ही हमें सार्वजनिक स्थानों पर तेज प्रकाश का उपयोग नही करना चाहिए।

9.रेडियोएक्टिव पदार्थों के उपयोग को लेकर कठोर नियम बनाकर

रेडियोएक्टिव पदार्थों का जहां तक हो सके कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए और यदि इसका इस्तेमाल करना ही पड़े तो इसके लिए काफी सावधानी बरतनी चाहिए। इसी तरह सरकारों को भी विनाशाकारी गतिविधियों जैसे कि परमाणु हथियारों और नरसंघारक हथियारों के लिए रेडियोएक्टिव पदार्थों का उपयोग नही करना चाहिए।

10.कड़े औद्योगिक नियम-कानून बनाकर

प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने वाले उद्योगों को पर्यावरण में होने वाली क्षति के लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए। एक शीतलक के रूप में पानी का उपयोग करने वाले किसी भी उद्योग को पानी को जल स्त्रतों में जल वापस छोड़ने से पहले उसे प्राकृतिक तापमान के अनुसार ठंडा करना चाहिए। जिससे यह थर्मल प्रदूषण को काफी कम करेगा और हमारे प्राकृतिक संसाधनों तथा पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में सहायता प्रदान करेगा।

11.योजनापूर्ण निर्माण करके

आज के समय में निर्माण पहले की अपेक्षा काफी तेजी से किया जाता है, इसके अलावा यह अनियोजित और अनयमित भी होता है। दृश्य प्रदूषण ऐसे ही अनियमित और अनियोजित निर्माणों का परिणाम है। यदि आप किसी शहर के निवासी हैं, तो आप इस बात से भलीभांति परिचित होंगे कि छत पर खड़े होने पर भी आप कुछ मीटर ऊपर या थोड़ी दूर सीधे काफी मुश्किल से ही देख पायेंगे। शहरों को इस तरह से योजनाबद्ध किया जाना चाहिए ताकि दृश्य प्रदूषण को कम करने में सफलता प्राप्त की जा सके।

निष्कर्ष

प्रदूषण दिन-प्रतिदिन हमारे पर्यावरण को नष्ट करते जा रहा है। इसे रोकने के लिए हमें जरुरी कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि हमारी इस पृथ्वी की खूबसूरती बरकरार रह सके। यदि अब भी हम इस समस्या का समाधान करने बजाए इसे अनदेखा करते रहेंगे, तो भविष्य में हमें इसके घातक परिणाम भुगतने होंगे।

 

 

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