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दिवाली पर शिक्षकों के लिए भाषण

यह तो हम सब ही जानते हैं कि दिवाली प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे जोश और उत्साह के साथ धार्मिक बंधनों को तोड़ते हुए हर संप्रदाय द्वारा देश भर में मनाया जाता है। हालांकि कई इस त्योहार से जुड़ी हुई ऐसी कई चीजे है जो सीधे तौर पर पर्यावरण को प्रभावित करती हैं जैसे कि पटाखे फोड़ना। ज्यादातर पटाखे बच्चों के लिए खरीदे जाते हैं और यदि इस विषय में कोई उनपर प्रभाव डाल सकता है, तो वह उनके शिक्षक हैं। जिनका वह सदैव अनुसरण करते हैं।

इसलिए हमने इस विषय का नाम शिक्षकों के लिए दिवाली पर भाषण रखा है। यदि शिक्षक चाहें तो दिवाली पर अपनी एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं और अपने छात्रों को पटाखों के द्वारा होने वाले नकारात्मक प्रभावों के विषय में समझा सकते हैं।

दिवाली पर शिक्षकों के लिए लंबे तथा छोटे भाषण (Long and Short Speech on Diwali for Teachers in Hindi)

हमारे वेबसाइट पर शिक्षकों के लिए दिवाली पर लंबे तथा छोटे दोनों प्रकार के भाषण दिये गये हैं। हमने अपने भाषणों में दिवाली से जुड़े कई सारे महत्वपूर्ण पहलुओं को संकलित किया। इन भाषणों का आप अपनी आवश्यकता अनुसार परिवर्तन करके अपने कार्यों में उपयोग कर सकते हैं।

दिवाली पर शिक्षकों के लिए भाषण - 1

आदरणीय प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, मेरे साथी शिक्षकों और प्रिय छात्रों

इस विद्यालय का वरिष्ठ शिक्षक होने के नाते मुझे आज आप सबके सामने इस भाषण को देते हुए काफी प्रसन्नता महसूस हो रही है। हम सब दिवाली का यह त्योहार काफी प्रसन्नता और उत्साह के साथ मनाते है तथा इसके लिए ढेर सारी तैयारियां भी करते हैं।

भारतीय लोगों के लिए दिवाली का त्योहार काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, इस दौरान हम अपने घरों की सफाई करते हैं, उन्हें सजाते है, खरीददारी करते हैं, जिसमें लोग उपहार, किचन के सामान, घरेलू उपकरण, कार, सोने के आभूषण जैसी वस्तुएं खरीदते हैं। ऐसी कई प्राचीन कहानियां है, जिनमें इस त्योहार को मनाने की उत्पत्ति का वर्णन मिलता है।

हर घर की महिलाएं इस दिन जमीन पर विभिन्न आकृतियों की रंगोलियांबनाती है। दिवाली के इस त्योहार में हर क्षेत्र में थोड़ी अलग-अलग भिन्नता होती है। परन्तु दिवाली के इस त्योहार में पटाखे फोड़ने की बे फिजूल प्रथा के कारण विश्व भर में प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हमें इस त्योहार को प्रेम और हर्षोल्लास के साथ मनाना चाहिए, ना कि इस तरह से जिससे हमारे पर्यावरण और हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचे।

भले ही पटाखे जलाये जाते हो पर अपनी तेज आवाज के कारण यह भारी मात्रा में ध्वनि प्रदूषण के साथ ही वायु प्रदूषण भी फैलाते है। जो कि हमारा सांस लेना दूभर कर देते है, भले ही सरकार ने पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया हो पर फिर भी कई सारे लोग पटाखे फोड़ने के कार्य से बाज नहीं आ रहे हैं। दिवाली पर पटाखों पर लगे प्रतिबंध के बावजूद लोग अवैध रुप से इनका उपयोग कर रहे है।जो कि हमारे साथ-साथ पशु-पक्षियों के लिए भी काफी नुकसानदेह है और पर्यावरण को भी काफी गंभीर क्षति पहुंचाता है।

दिवाली पर पैदा होने वाले ध्वनि प्रदूषण के कारण जानवर काफी डर जाते हैं और अजीब व्यवहार करने लगते हैं, इसके साथ ही इससे उत्पन्न होने वाले वायु प्रदूषण और अन्य प्रदूषणों के निम्नलिखित हानिकारक प्रभाव हैः

  • स्थायी या अस्थायी बहरापन
  • पटाखों के कारण वायुमंडल में उत्पन्न होने वाली जहरीली गैसों के कारण आंखों की रोशनी का खराब हो जाना।
  • श्वास संबंधी और अस्थमा से जुड़ी समस्याएं

यह सूची यही समाप्त नहीं होती, पटाखे फोड़ने के कारण उत्पन्न होने वाले धुएं के कारण पर्यावरण में सफेद धुंध की परत बन जाती है। जिसके कारण दृश्यता काफी कम हो जाती है, जिससे की सड़क पर कई सारी दुर्घटनाएं होने लगती हैं। पटाखों से सबसे ज्यादा छोटे बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित होते हैं।

हम सबको अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सरकार के पटाखों पर प्रतिबंध के फैसले का समर्थन करना चाहिए और आप छात्रों को भी दिवाली पर पटाखों का उपयोग ना करते हुए दूसरों को भी इसके हानिकारक प्रभावों के विषय में जागरूक करना चाहिए। इसलिए यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि ना सिर्फ हम दिवाली का त्योहार इस तरीके से मनाये कि यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हो बल्कि की दूसरों को भी इसके प्रति अधिक से अधिक जागरूक करने का प्रयास करें।

धन्यवाद!

 

दिवाली पर शिक्षकों के लिए भाषण – 2

आदरणीय प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, साथी शिक्षकों और प्रिय छात्रों आप सभी का इस कार्यक्रम में हार्दिक स्वागत है।

आज मैं अहाना गुप्ता कक्षा 8वीं डी की कक्षा अध्यापिका आप सबके सामने एक ऐसा भाषण देना चाहूंगी जो काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। दिवाली का यह त्योहार काफी पास आ चुका है और इससे जुड़ी समस्याओं के विषय में जानना हमारे लिए काफी आवश्यक है। इस देश का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम इस समस्या को लेकर सामने आये और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने का प्रयास करें।

क्या आप छात्रों ने कभी इस बात पर गौर किया है कि आखिरकार सरकार को पटाखों पर क्यों प्रतिबंध लगाना पड़ा? इसका रहस्य पटाखों से निकलने घातक प्रदूषणों में छिपा हुआ है, जो कि हमारे पर्यावरण के लिए काफी घातक है, क्योंकि इनमें से ज्यादातरप्रदूषण काफी हानिकारक होते हैं और इनमें कापर, सल्फर, और कैल्शियम आदि के तत्व मौजूद होते हैं, जिनमेंनाइट्रसआक्साइड गैस तथा अन्य रसायन मौजूद होते है जैसे कि रेड्यूजिंग एजेंट, कलरिंग एजेंट, स्टेबलाइजर, आक्साडइजर और बाइंडर आदि ।

इसके अलावा इन पटाखों को रंग प्रदान करने के लिए भी तमाम तरह के रसायनों का उपयोग किया जाता है जैसे किलाल रंग के लिए लिथियम, सफेद के लिए एल्यूमीनियम होता है। यह सही ही कहा गया है कि हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती ठीक उसी प्रकार पटाखे अपने चमक-धमक से हमारेआंखों के सामने कितने भी मनमोहक नजारे क्यों ना पेश करें। यह पटाखे बड़ो की तुलना में छोटे बच्चों को अधिक हानि पहुंचाते है क्योंकि छोटे बच्चों की पर्यावरण प्रदूषण तत्वों को बाहर निकालने की क्षमता वयस्कों से काफी कम होती है। पटाखों में मुख्यतः यह निम्नलिखित तत्व मौजूद होते हैजो कि कई सारी बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

  • अल्मूनियमसल्फाइडजोकि मुख्यतः पटाखों में रंग पैदा करने के लिए उपयोग किया जाता है और दुकानों में आसानी से उपलब्ध होता है। इस तरह के तत्व जब पटाखों के फूटने पर निकलते हैं तो यह अल्जाइमर के रोग का कारण बनने के साथ मृत्यु का भी कारण बन सकते हैं।
  • पोटैशियम और अमोनियमजोकिआक्साडाइजिंग एजेंट माने जाते हैं, उनके कारण फेफड़ो के कैंसर जैसी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
  • इसके अलावा पटाखों में बेरियमनाइट्रेट जैसे जहरीले तत्व भी होते हैं, जो श्वास संबंधी समस्याएं, गैस की समस्याओं के साथ ही अपनी रेडियोधर्मिता के कारण मांसपेशियों में कमजोरी भी पैदा कर सकते है।
  • पटाखों के कारण थायराइड की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है
  • इसके अलावा पटाखों में कापर और लीथीयम के यौगिक तत्व मौजूद होने के कारण शरीर में हार्मोन का असंतुलन भी उत्पन्न हो जाता है। जो कि सभी पशुओं और जानवरों पर काफी बुरा प्रभाव डालता है।

 

भारत सरकार द्वारा पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है इसके बावजूद भी कई लोग गैरकानूनी रुप से इन्हें बेचने और इनका उपयोग करने से बाज नहीं आते है। हम सब को एक साथ मिलकर सरकार के इस फैसले को सही रुप से लागू करने में अपनी सहायता प्रदान करनी चाहिए। मैं आशा करती हुं कि मैंने आप सबको इस मुद्दे पर प्रेरित करने का कार्य किया हो, जिससे आप पटाखों के पर्यावरण पर होने वाले नकारात्मक प्रभावों को समझ सके। लेकिन यह काफी नहीं है हमें अभी इस मुद्दे को लेकर लोगों में और भी ज्यादाजागरूकता लाने की कोशिश करने की जरूरत है। हम चाहे तो इस कार्य के लिए बिलबोर्डऔर सेमिनार जैसे चीजों की सहायता ले सकते है और इस देश के एक गौरव नित तथा जिम्मेदार छात्र होने का परिचय दे सकते है।

धन्यवाद!


 

दिवाली पर शिक्षकों के लिए भाषण  – 3

प्रिय छात्रों उम्मीद करता हूँ आप सभी सकुशल होंगे

मैं नम्रता श्रीवास्तव कक्षा 10 बी की कक्षा अध्यापिका, आप सब के इस विद्यालय के सभागार में स्वागत करती हुं। आज कोई विशेष उत्सव नही है, जिसके लिए आप सब यहां इकट्ठा हुए है बल्कि की एक महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए इकट्ठा हुए है, जो कि हमारा प्रिय त्योहार दिवाली है, अब यह त्योहार अब काफी नजदीक आ चुका है, यहीं कारण है कि हर कोई इतना उत्साहित दिख रहा है और यह उत्साह काफी स्वाभाविक है क्योंकि हम सब चाहे वह बड़े हो या छोटे वर्ष भर इस त्योहार का इंतजार करते हैं।

इस त्योहार के दौरान ना सिर्फ हम अपने व्यस्तता भरे दैनिक दिनचर्या से छुटकारा पाते हैं बल्कि की अपने उन दोस्तों और रिश्तेदारों से भी मिल पाते हैं, जिनसे काफी समय से नहीं मिल सके होते हैं। इस त्योहार का सबसे खास पल लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा का होता है, जो खुशहाली, धन-संपदा और उनका आशीर्वाद पाने के लिए की जाती है। यहीं कारण है कि दिवाली का यह त्योहार इतना खुशनुमा और मनमोहक हो जाता है।

मुझे पता है आप सब में से कई सारे छात्र यह जानते होंगे कि दिवाली का यह त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास में पड़ता है। जो किअक्तूबर या नवंबर महीने में आता है। यह त्योहार भगवान राम के 14 वर्ष के लंबे वनवास के बाद रावण को मारकर वापस अयोध्या वापस लौटने के खुशी में मनाया जाता है। यह हमारे देश के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है और कई जगहों पर यह पांच दिन पहले से ही मनाया जाता है। यह त्योहार परिवारजनों के एक-दूसरे से मिलने का समय होता है। इसके अलावा इस त्योहार की सबसे खास बात यह है कि भारत के कई जगहों पर इसे नव वर्ष के शुरुआत का दिन भी माना जाता है। अब यह त्योहार इतना लोकप्रिय हो चुका है की इसकी प्रसिद्धि विदेशों तक भी पहुंच चुकी है।

ज्यादातर लोग दिवाली के एक हफ्ते पहले ही माँ लक्ष्मी के स्वागत के लिए अपने घरों और दुकानों की साफ-सफाई और साज-सज्जा का कार्य शुरु कर देते है। इस दौरान हर जगह ना सिर्फ में साफ-सफाई शुरु कर दी जाती है बल्कि की दुकानों और कार्यालयों को तरह-तरह के फूलों और खिलौनों और तस्वीरों से भी सजाया जाता है। इस त्योहार के समय के दौरान लोग ना सिर्फ नये कपड़े पहनते है बल्कि की एक-दूसरे से मिलते हुए उन्हें मिठाई और तोहफे भी भेंट करते हैं।

शाम में पूजा करने के बाद लोग ऐसा मानते हुए रात को बत्तियों को जलता छोड़ देते हैं कि रात में देवी लक्ष्मी उनके घरों तथा दुकानों पर आयेंगी और अपना आशीर्वाद देंगी। इसलिए इन जगहों को प्रकाशित तथा साफ-सुथरा रखा जाता है।

दिवाली के इन्हीं कारणों से हम इस त्योहार को इतना ज्यादा पसंद करते है, लेकिन एक छात्र होने के नाते आप लोगों को पटाखे फोड़ने के कारण होने वाले प्रदूषण पर भी ध्यान देना चाहिए। यह पटाखे पर्यावरण के लिए काफी हानिकारक है और यह वह समय है जब हमें पर्यावरण पर होने वाले इसके हानिकारक प्रभावों के विषय में गंभीरता पूर्वक सोचते हुए, इसपर रोक लगाने की आवश्यकता है। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर संजीदा हो और दिवाली के त्योहार को इस प्रकार से मनाये की इसका पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव ना पड़े।

बस मुझे आप सबसे इतना ही कहना था, उम्मीद है की मेरी इन बातों ने आप को प्रभावित किया हो अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आप सभी का धन्यवाद!


 

दिवाली पर शिक्षकों के लिए भाषण – 4

आदरणीय प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, शिक्षकों और मेरे प्रिय विद्यार्थियों आप सभी का इस कार्यक्रम में हार्दिक स्वागत है।

मैं श्रीमती सरबजीत कौर कक्षा 10 डी की सामाजिक विज्ञान की अध्यापिका आप सभी का प्रर्थनागार में स्वागत करती हूँ, मुझे पता है कि आप सब दिवाली के त्योहार को लेकर काफी उत्साहित है, क्योंकि अब छुट्टियाँ काफी पास आ गयी है इसलिए यह उत्सुकता और भी ज्यादा बढ़ गयी है।

मुझे खुद भी यह त्योहार काफी ज्यादा पसंद है, इस त्योहार के कुछ दिन पहले ही से हमारे आस-पास की जगहे रोशनी से सज जाती है और सारी चीजें-सुथरी नजर आती है। फिर हम सब अपने रिश्तेदारों से मिलते है तोहफों का आदान-प्रदान करते है, जो किहम सब के लिए काफी मनमोहक होता है।

इस दिन हम दिवाली के त्योहार को लेकर सुबह से ही तैयारियां करना शुरु कर देते हैं और दिये तथा मोमबत्ती जलाना, घरों को फूलों और रंगोली से सजाना, दीवालों को साफ करना तथा रंगने जैसे कार्य करते हैं। यह कार्य इसलिए जरूरी हैं क्योंकि ऐसा माना जाता हैकि साफ-सुथरे और सजे हुए घरों में इस दिन देवी लक्ष्मी आती हैं और आशीर्वाद प्रदान करती है। इसके साथ ही इस दिन हमें अपने दिल और दिमाग में भी अच्छे विचार रखने चाहिए ताकि हमें माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सके। इसके अलावा शाम में लक्ष्मी पूजा जैसी एक पवित्र रस्मभी निभायी जाती है ताकि हमारे घर में सुख-समृद्धि बनी रहे।

इसके अलावा इस त्योहार का एक दूसरा सबसे अच्छा पहलू रंगोली बनाना है जो कि दिवाली के इस पूरे सजावट में चार चांद लगा देता है। इसके साथ ही दिवाली के दिन लोग नये कपड़े पहनते हैं, मिठाइयां बाटते हैं, स्वादिष्ट पकवान तथा व्यंजन बनाते है और पटाखे फोड़ते हैं। दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी आकाश में देखने पर काफी मनमोहक लगती है पर इसके अपने नकारात्मक प्रभाव भी है। इसलिए इस बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण असंतुलन को देखते हुए, हमें पटाखे फोड़ने से परहेज करना चाहिए और अपने पर्यावरण की रक्षा में अपना योगदान देना चाहिए।

बच्चों मैं आपको बता दूं की दिवाली पांच दिन का त्योहार है, जिसमें यह दिन होते हैः

  • धनतेरसः यह दिवाली त्योहार के शुरुआत का दिन है, इस दिन हमारी माँ और दादी माँ कई जरूरी वस्तुएं खरीदती है। इसके अलावा इस दिन लोगों द्वारा सोने और चांदी की वस्तुएं भी खरीदी जाती है क्योंकि लोगों का मानना है कि इस दिन इन वस्तुओं की खरीददारी करने से देश में समृद्धि और खुशहाली आती है।
  • नरक चतुर्दशी इस दिन को छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन स्नान में तेल का भी इस्तेमाल किया जाता है तथा इसके पश्चात माथे पर कुमकुम का टिका लगाकर माँ काली की और भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इसी दिन उन्होंने नरकासुर नामक दानव का वध किया था।
  • दिवालीःयह दिवाली के त्योहार का मुख्य दिन होता है, यह वह दिन होता है जब हम माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
  • गोवर्धन पूजाः इस दिन हम भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं, इस दिन हमारे घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन तैयार करके उसकी पूजा करने की परंपरा है।
  • भाई दूजः जैसा कि इसके नाम से पता चलता है कि यह त्योहार भाई और बहन का है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर कुमकुम और केसर का टिका लगाती है और बदले में उनके भाई उन्हें कोई विशेष उपहार भेंट करते हैं।

तो छात्रों तो आइये हम सब मिलकर दिवाली के इस त्योहार का स्वागत करते हैं और इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाते हुए पटाखों के उपयोग को ना कहें।

मेरे इस भाषण को इतना ध्यानपूर्वक सुनने के लिए आप सभी का धन्यवाद!

 

 

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Yogesh Singh

Yogesh Singh, is a Graduate in Computer Science, Who has passion for Hindi blogs and articles writing. He is writing passionately for Hindikiduniya.com for many years on various topics. He always tries to do things differently and share his knowledge among people through his writings.

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