जमात-उल-विदा (Jamat-Ul-Vida Festival)

जमात उल विदा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब है कि जुमे की विदाई। इस पर्व को पूरे विश्व भर के मुस्लिमों द्वारा काफी धूम-धाम तथा उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व रमजान के अंतिम शुक्रवार यानि जुमे के दिन मनाया जाता है। वैसे तो पूरे रमजान के महीने को काफी पवित्र माना जाता है लेकिन जमातुल विदा के इस मौके पर रखे जाने वाले इस रोजे का अपना ही महत्व है।

इस दिन देश भर के मस्जिदों में नमाज पढ़ने वालों कि भारी भीड़ देखने को मिलती है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन को अल्लाह की  इबादत में बिताता है, उसे अल्लाह की विशेष रहमत प्राप्त होती है और अल्लाह उसके हर गुनाहों को माफ कर देता है।

जमात-उल-विदा 2019 (Jamat Ul-Vida 2019)

वर्ष 2019 में जमात-उल-विदा का पर्व 31 मई, शुक्रवार के दिन मनाया गया।

जमात-उल-विदा क्यों मनाया जाता है? (Why Do We Celebrate Jamat-Ul-Vida)

जमात-उल-विदा मुस्लिम समुदाय का एक प्रमुख पर्व है। यह त्योहार रमजान के आखरी शुक्रवार को मनाया जाता है। इस दिन की नमाज का मुस्लिम समुदाय में विशेष महत्व माना गया है। इस पर्व को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस दिन पैगम्बर मोहम्मद साहब ने अल्लाह की विशेष इबादत की थी।

यही कारण है कि इस शुक्रवार को बाकी के जुमे के दिनों से ज्यादे महत्वपूर्ण बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि जमात-उल-विदा के दिन जो लोग नमाज पढ़कर अल्लाह की इबादत करेंगे और अपना पूरा दिन मस्जिद में बितायेगें। उसे अल्लाह की विशेष रहमत और बरकत प्राप्त होगी।

इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस दिन अल्लाह अपने एक फरिश्ते को मस्जिद में भेजता है, जोकि लोगों की नमाज को सुनता है और उन्हें आशीर्वाद देता है। इस दिन लोग साफ-सुधरे कपड़े पहनकर मस्जिद में नमाज अदा करने जाते है और अल्लाह से अपने पापों के लिए क्षमा मांगते है और भविष्य में सही मार्ग दर्शन के लिए दुआ करते है।

इस दिन के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ऐसी मान्यता है इस दिन खुद आसमान, फररिश्ते मुस्लिमों के गम पर रोते है क्योंकि रमजान का यह पवित्र महीना समाप्त होने वाला होता है। यहीं कारण है इस्लाम धर्म के अनुयायियों द्वारा जमात-उल-विदा इस पर्व को इतने धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।

जमात-उल-विदा कैसे मनाया जाता है – रिवाज एवं परंपरा (How Do We Celebrate Jamat-Ul-Vida – Custom and Tradition of Jamat Ul-Vida)

जमात-उल-विदा के इस त्योहार को इस्लाम धर्म में काफी विशेष स्थान प्राप्त है। रमजान महीने के आखरी शुक्रवार को मनाये जाने वाले इस पर्व को लेकर ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति अपना समय नमाज पढ़ते हुए अल्लाह के प्रर्थना में बिताता है। उसे अल्लाह की विशेष कृपा प्राप्त होती है और पूरे वर्ष अल्लाह स्वयं उसकी रक्षा करते है और उसे बरकत देते है। हर पर्व के तरह जमात-उल-विदा के पर्व को मनाये जाने का अपना एक विशेष तरीका और रीति-रिवाज हैं।

जमात-उल-विदा के दिन मस्जिदों और दरगाहों में काफी संख्या में श्रद्धालु इकठ्ठा होते है। इस दिन को मनाने को लेकर मस्जिदों में कई विशेष तैयारियां की जाती है। जमात-उल-विदा के जुमें के दिन मस्जिदों में काफी चहलकदमी देखने को मिलती है, इस दिन मस्जिदों में काफी भीड़ इकठ्ठा होती है।

 

सामान्यतः इस दिन लोग समूहों में नमाज पढ़ने जाते है। जहां वह नमाज पढ़ते है और अल्लाह से प्रार्थना करते है। इस दिन लोग अपने प्रियजनों के सुख-शांति के लिए भी दुआ करते है। ऐसा माना जाता है इस दिन जो भी व्यक्ति किसी गरीब को खाना खिलाता है, उसे अल्लाह की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

इस दिन लोगों द्वारा काफी जमकर खरीददारी भी की जाती है, जिसमें सेवई की खरीददारी अवश्य होती है। घरों में खास पकवान बनाये जाते और दावतों का आयोजन किया जाता है। इस दिन ज्यादेतर रोजेदार नए कपड़े पहनकर नमाज पढ़ने जाते है और कई लोगों द्वारा तो मस्जिद में नमाज पढ़ने से पहले घर में भी कुरान पढ़ी जाती है।

इसके साथ ही इस दिन को लेकर लोगों का ऐसा भी विश्वास है कि इस दिन दान करने से काफी पुण्य प्राप्त होता है। इसीलिए इस दिन लोगो द्वारा जरुरमंतों और गरीबों को दान भी दिया जाता है।

जमात-उल-विदा की आधुनिक परंपरा (Modern Tradition of Jamat Ul-Vida)

वैसे तो जमात-उल-विदा के पर्व में आज के समय में भी कोई विशेष परिवर्तन नही आया है, हालांकि वर्तमान में इसका स्वरुप पहले के अपेक्षा और भी भव्य और विस्तृत हो गया है। इस पर्व को विश्व भर के मुस्लिमों द्वारा काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन मस्जिदों और मजारों पर काफी चहलकदमी देखने को मिलती है क्योंकि इस दिन कई सारे लोग एक साथ नमाज अदा करने जाते है। इस दिन लोग अपने गलत कार्यों से तौबा करते हैं और अल्लाह से खुद के लिए और अपने परिवार के लिए प्रार्थना करते है।

जमात-उल-विदा के दिन लोग अपने कार्यों का आत्ममंथन भी करते है। हालांकि आज के समय में बढ़ती आबादी के कारण सभी लोगों के लिए मस्जिद में नमाज के लिए जगह बना पाना संभव नही है। इसलिए इस दिन मस्जिदों में मस्जिद की इमारत के बाहर तंबू बनाए जाते है, ताकि भारी संख्या में इकठ्ठा हुए लोग बिना किसी समस्या के जमात-उल-विदा की नमाज अदा कर सके।

हमें इस बात का अधिक से अधिक प्रयास करना चाहिए कि जमात-उल-विदा के इस पर्व का यह पारंपरिक और सांस्कृतिक रुप इसी तह से बना रहे क्योंकि यही इसके लोकप्रियता का आधार स्तंभ है।

 

जमात-उल-विदाल का महत्व (Significance of Jamat-Ul-Vida)

वैसे तो पूरे साल भर जुमे (शुक्रवार) की नामज को खास माना जाता है पर रमजान का आखिरी जुमा या फिर जिसे जमात-उल-विदा के नाम से भी जाना जाता है, उसका अपना अलग ही महत्व है क्योंकि यह दिन पूरे रमजान का दूसरा सबसे पवित्र दिन है। ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति जमात-उल-विदा के दिन सच्चे दिल से नमाज पढ़ता है और अल्लाह से अपने पिछले गुनाहों के लिए माफी मांगता है, उसकी दुआ जरुर पूरी होती है।

इसीलिए जमात उल विदा को इबादत के दिन के रुप में भी जाना जाता है। कई लोग तो इस दिन अपना पूरा दिन ही अल्लाह के इबादत में बिता देते है। इसके साथ ही इस दिन को लेकर यह मान्यता भी है कि इस दिन नमाज पढ़ने वाले व्यक्ति को जहन्नम से मुक्ति मिलती है और सच्चे दिल से इबादत करने वालों की इच्छा भी पूरी होती है। यहीं कारण है कि जमात-उल-विदा के इस पर्व को इस्लामिक पर्वों में इतना महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

जमात-उल-विदा का इतिहास (History of Jamat Ul-Vida)

जमात-उल-विदा का यह पर्व काफी पुराना पर्व है, खुद कुरान शरीफ में इस पर्व का जिक्र किया गया है। रमाजन के आखिरी जुमे को मनाये जाने वाले इस त्योहार को पूरे दुनियां भर में मुस्लिम समुदाय द्वारा काफी जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं और पुरुषों द्वारा मस्जिदों तथा घरों में नमाज पड़ी जाती है, वास्तव में इस दिन को काफी धार्मिक दिन माना गया है। इस दिन को लेकर यह मान्यता भी काफी प्रचलित है कि इस दिन पैगंबर मोहम्मद साहब ने अल्लाह की विशेष इबादत की थी।

इस दिन मुसलमान अपना सारा दिन अल्लाह की इबादत में बिताते है। इस दिन के विषय में ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति गरीबों को दान देता है और उन्हें खाना खिलाता है। उसे अल्लाह की विशेष रहमत प्राप्त होती है।

इसलिए इस दिन बहुत सारे नमाज पढ़ने तथा अल्लाह की इबादत करने के साथ ही भूखे लोगो को खाना खिलाना, चादर और कंबल बांटने जैसे पुण्य के काम भी करते है क्योंकि इस दिन इस तरह के कार्य करने से अन्य दिनों के अपेक्षा कई गुणा पुण्य प्राप्त होता है। यहीं कारण है कि कई सारे लोग इस दिन कई सारे दानकार्य करते हैं। जमात-उल-विदा पर किये जाने वाले इन पुण्य कार्यों के इस महत्व का खुद कुरान शरीफ में भी जिक्र है।

रमजान का यह आखिरी शुक्रवार लोगो को आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करता है। ताकि वह अपने अच्छे-बुरे कर्मों के विषय में सोच सके और अपने बुरे कार्यों से तौबा करें क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति नमाज पढ़ते हुए सच्चे दिल से अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगता है। उसके पापों को अल्लाह द्वारा क्षमा कर दिया जाता है। अपने इन्हीं धार्मिक और ऐतिहासिक महत्वों के कारण जमात-उल-विदा के इस पर्व को इस्लाम धर्म के अनुयायियों द्वारा इतना महत्वपूर्ण माना जाता है।