भ्रष्टाचार पर निबंध

भ्रष्टाचार एक व्यक्ति या एक समुह द्वारा किए गए एक कार्य को संदर्भित करता है, जो किसी व्यक्ति या अन्य जनता के अधिकारों का गम्भीरता से समझौता करता है। “भ्रष्टाचार” में शासन, प्रशासन की विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं। भ्रष्टाचार न केवल सरकार और उनके कार्यालयों तक सीमित है, बल्कि इसमें निजी व्यवसाय और संगठन भी सम्मिलित हैं। भ्रष्टाचार एक समाज और एक राष्ट्र के विकास के मार्ग को बाधित करता है। एक भ्रष्ट प्रणाली समाज में सरकार के ऊपर लोगों के विश्वास को ढ़ीला कर देता है, जिसके परिणाम स्वरूप भय और अराजकता का महौल होता है।

भ्रष्टाचार पर बड़े तथा छोटे निबंध (Short and Long Essay on Corruption in Hindi)

निबंध – 1 (300 शब्द)

परिचय

जैसा की हम सभी इस बात से अवगत है की भ्रष्टाचार देश एवं समाज दोनों के लिए हानिकारक है। यह व्यक्तिगत विकास के साथ समाज के विकास के लिए भी बाधा उतपन्न करता है। यह समाजिक बुराई है जो मानव के शरीर और मन को सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक रूप से अपने वश में कर लिया है। यह धन, शक्ति और पद के प्रति बढ़ते मानव के लालच के कारण लगातार अपनी जड़ो को मजबूत कर रहा है।

भारत में व्यापत भ्रष्टाचार

किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए प्राकृतिक या सार्वजनिक संसाधन तथा शक्ति का दुरुपयोग भ्रष्टाचार है। सूत्रों के अनुसार यह पता चला है की भ्रष्टाचार के मामलें में भारत तीसरे स्थान पर है।सिविल सेवा, राजनैतिक, व्यवसाय और अन्य क्षेत्रों में भ्रष्टाचार व्याप्त है। भारत अपने लोकतंत्र के लिए प्रशिद्ध है लेकिन भ्रष्टाचार के फलस्वरूप लोकतांत्रिक प्रणाली सुचारु रूप से काम नहीं कर रहा है। देश में व्याप्त सभी प्रकार के भ्रष्टाचार के लिए राजनेता प्रमुख रूप से ज़िम्मेदार हैं।

भ्रष्टाचार

हमनें हमारे राजनेताओं का चुनाव करके उनसे अपेक्षा किया था की वह हमारे देश का मार्गदर्शन सही दिशा में करेंगे शुरूआत में वह हमसे बहुत सारे वादे करते हैं परन्तु एक बार चुनाव जीत जाने के पश्चात् वह सब कुछ भूलकर भ्रष्टाचार में शामिल हो जाते हैं। पर फिर भी हमें पूर्ण विश्वास है की, एक दिन भारत भ्रष्टाचार मुक्त होगा जब हमारे राजनैतिक नेता लालच से मुक्त होंगे और अपनी शक्ति, पद और धन का सही उपयोग देश के हित में करेंगे न की अपनी विलासिता एवं इच्छाओं को पूरा करने के लिए।

हमें भारत के लिए ईमानदार और विश्वासपात्र नेता का चुनाव करना चाहिए जैसे हमारे पूर्व नेता  लाल बहादुर शास्त्री, सरदार बल्लभ भाई पटेल इत्यादि। इस प्रकार के नेता ही देश को भ्रष्टाचार मुक्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

हमारे देश के राजनेता तथा युवा को भ्रष्टाचार के कारणों के प्रति जागरूक होना होगा तथा एक साथ एक समुह बनाकर इस समस्या का समाधान करना होगा। भ्रष्टाचार के बढ़ते स्तर के लिए कठोर कदम लेना आवश्यक हो गया है।

 

निबंध – 2 (400 शब्द)

परिचय

भ्रष्टाचार एक संक्रामक बीमारी है जिसने अपने जड़े बुरे लोगों के दिमाग में अच्छी तरह फैला दिया है।  समाज में इस तरह के गतिविधियों को करने के लिए किसी ने जन्म नहीं लिया, लेकिन जीवन के कुछ बुरी स्थितियों ने उन्हें ऐसा करने पर मजबूर किया है। धीरे-धीरे वह इन सभी गलत गतिविधियों को करने के लिए अभ्यस्त हो गए। हाँलाकि किसी भी समस्या, बीमारी आदि से पीड़ित लोगों को धैर्य और खुद पर भरोसा रखना चाहिए और अपने जीवनकाल में कभी गलत कार्य नहीं करना चाहिए।

भ्रष्टाचार में लिप्त भ्रष्ट राजनेता

आज व्यक्ति अपने स्वार्थ की पूर्ति हेतु कोई भी गलत कार्य करने को तैयार है। एक गलत कदम बहुत से जीवन को बर्बाद कर सकता है। हम इस जहां में अकेले नहीं हैं बल्कि हमारे जैसे ही अन्य और लोग हैं, इसलिए हमें अन्य के हित का भी सोचना चाहिए और शांतिपूर्ण जीवन व्यतित करना चाहिए।

अब भारत सरकार द्वारा गरीब लोगों को नियमों और विनियमों के आधार पर समाज में समानता लाने के लिए बहुत से लाभ दिए जाते हैं। हांलाकि उन तक इन फायदों का लाभ नहीं पहुंच पाता है क्योंकि अधिकारियों द्वारा गरीबों का हक मार लिया जाता है। वे सिर्फ पैसे से अपनी जेब भरने के लिए कानून के खिलाफ भ्रष्टाचार कर रहे हैं।

समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार के कई कारण हैं। वर्तमान समय के राजनैतिक नेता, राष्ट्र उन्मुख कार्यक्रमों और नीतियों के बजाय रूचि उन्मुख नीति बना रहे हैं। वह नागरिकों के हितों और आवश्यकता के बजाय अपने हित और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशिद्ध राजनीतिज्ञ बनना चाहते हैं। मानव मन में धन अर्जित करने के प्रणाली का स्तर बढ़ रहा है साथ ही नैतिक गुणों में कमी हो रही है। विश्वास का स्तर घट रहा है जो भ्रष्टाचार को जन्म देता है।

भ्रष्टाचार के प्रति सहन शक्ति बढ़ने के साथ आम लोगों की संख्या बढ़ रही है। भ्रष्टाचार का विरोध करने के लिए समाज में एक मजबूत मंच की कमी है, ग्रामिण क्षेत्रों में व्यापक अशिक्षा, खराब आर्थिक ढ़ांचा आदि सार्वजनिक जीवन में स्थानिक भ्रष्टाचार का कारण हैं। सरकारी कर्मचारी के कम वेतन के मानदंड उसे भ्रष्टाचार की ओर ले जाते हैं। सरकार के जटिल कानून एवं प्रक्रियाएं व्यक्ति को सरकार से किसी भी प्रकार का सहायता प्राप्त करने से विचलित करते हैं।

निष्कर्ष

चुनाव के समय भ्रष्टाचार अपने उत्तम शिखर पर हो जाता है। राजनेता सदैव अपने भाषण के दौरान गरीब और अनपढ़ लोगों को सुन्दर भविष्य का सपना दिखा कर उनका समर्थन लेते हैं लेकिन जीतने के बाद कुछ नहीं करते हैं, अतः देश से भ्रष्टाचार पूर्ण रूप से हटाने के लिए निष्ठावान नेताओं की आवश्यकता है।

 

निबंध – 3 (500 शब्द)

परिचय

भ्रष्टाचार एक बीमारी के तरह भारत में फैलने के साथ-साथ विदेश में भी फैला हुआ है। भारतीय समाज के लिए यह बहुत तेजी से बढ़ने वाला सामाजिक समस्या बन गया है। इसकी शुरूआत सामान्य रूप से अवसरवादी नेताओं द्वारा की गई है। वह कभी भी देश के हित का नहीं सोचते और अपने छोटे स्वार्थ की पूर्ति के लिए भ्रष्टाचार कर देश को नुकसान पहुंचाते हैं। वह अपने देश के सम्पत्ति को गलत हाथों में सौपते हैं और अन्य देश में रह रहे लोगों के मन मस्तिष्क में भारत के लिए गलत धारणा उतपन्न करते हैं।

भ्रष्टाचार का देश पर नकारात्मक प्रभाव

देश के नेता अपने निजी इच्छाओं की पूर्ति हेतु हमारे पुराने रीति-रिवाज और सभ्यता को नष्ट कर रहे हैं। वर्तमान समय में जो व्यक्ति सही सिद्धान्त का पालन कर ईमानदारी से अपना कार्य करता है उन्हें आधुनिक समाज में बेवकूफ कहा जाता है। जबकि इसके विपरीत जो गलत तरीकों से काम कर लाभ अर्जित करता है उन्हें समाज के लिए अच्छा माना जाता है। तथापि, भ्रष्ट व्यक्ति बहुत आसानी से साधारण, सरल और मासूम लोगों को ठगते हैं तथा उनपर राज करते हैं।

भारत में भ्रष्टाचार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है इसका एक मुख्य कारण अधिकारी तथा राजनेताओं का अपराधियों से बढ़ते संबंध हैं, जो देश को कमजोर करते जा रहें हैं। 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ तथा धीरे-धीरे मजबूत और विकासशील होने लगा परन्तु बीच के समय में भ्रष्टाचार की बीमारी की शुरूआत हुई जिसने भारत के विकास के मार्ग को रोक दिया।

भारत के सरकारी और गैर-सरकारी दोनों विभाग में लेन-देन का प्रचलन चलता है, अर्थात कुछ पैसे देकर या लेकर काम किया जाता है। तथा इस कारणवश अब स्थिति बद्तर से बद्तर होती चली जा रही है, पहले गलत काम को कराने के लिए या गलत समय पर काम कराने के लिए पैसे दिए जाते थे, अब सही काम को भी सही तरीके से करने के पैसे देने होते है। परन्तु पैसे देने के बाद भी काम सही तरीके से और सही समय पर हो जायेगा यह कोई निश्चित नहीं होता।

प्रत्येक क्षेत्र में भ्रष्टाचार व्याप्त है अस्पताल, शिक्षा, नौकरी, सरकारी दफ्तर कुछ भी भ्रष्टाचार से अछुता नहीं रहा है। आज सब कुछ एक व्यवसाय और गलत तरीके से पैसे कमाने का स्त्रोत। शिक्षण संस्थान भी इसमें शामिल हैं, वह उन्हीं को सींट देते हैं जो इसके लिए भुगतान करते हैं, उन्हें मेधावी छात्रों से कोई मतलब नहीं होता है। बहुत कमजोर छात्रों को शीर्ष विश्वविद्यालय में स्थान मिल जाता है जबकि मेधावी छात्र पैसे न देने के कारण जीवन में पीछे छुट जाते हैं और किसी सामान्य कॉलेज में पढ़ते हैं।

वर्तमान समय में निजी विभाग सरकारी विभाग कि तुलना में अच्छा प्रदर्शन कर रहीं हैं। निजी कम्पनी उम्मीदवार के कौशल, क्षमता, तकनीकी ज्ञान तथा उनके अच्छे नम्बर के प्रतिशत के आधार पर नौकरी देता है, जबकि सरकारी विभाग में उन्हें अत्यधिक रिश्वत देना होता है।

निष्कर्ष

आज किसी भी प्रकार के सरकारी पोस्ट (उच्च स्तर या निम्न स्तर) के लिए जैसे- शिक्षण, क्लर्क, बाबू, नर्स, डॉक्टर या स्वीपर इत्यादि के बाजार में रिश्वत की मात्रा बढ़ जाती है क्योंकि नौकरी के स्तर में वृद्धि होता जा रहा है। यह अत्यधिक गंभीर स्थिति है, तथा देश के कल्याण के लिए इसे खत्म करना अतिआवश्यक हो गया है।


 

निबंध 4 (600 शब्द)

प्रस्तावना

वर्तमान समय में भारत में भ्रष्टाचार एक भयावह रुप ले चुका है। यह हमारे देश को ना सिर्फ आर्थिक रुप से क्षति पहुंचा रहा है बल्कि कि हमारे सांस्कृतिक और पारंपरिक मूल्यों को भी नष्ट कर रहा है। आज के समय में लोग पैसे के पीछे इतने पागल हो चुके है कि वह सही-गलत तक का फर्क भूल चुके है। यदि समय रहते हमने भ्रष्टाचार के इस समस्या को नही रोका तो यह हमारे देश को दिमक की तरह चट कर जायेगा।

भारत में भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार एक बीमारी की तरह जोकि सिर्फ हमारे देश में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में फैलता जा रहा है। भारतीय समाज में ये सबसे तेजी से उभरने वाला मुद्दा है। सामान्यतः इसकी शुरुआत और प्रचार-प्रसार मौकापरस्त नेताओं द्वारा शुरु होती है जो अपने निजी स्वार्थों की खातिर देश को खोखला कर रहे है। वो देश की संपदा को गलत हाथों में बेच रहे है साथ ही इससे बाहरी देशों में भारत की छवि को भी धूमिल कर रहे है।

वो अपने व्यक्तिगत फायदों के लिये भारत की पुरानी सभ्यता तथा संसकृति को नष्ट कर रहे है। मौजूदा समय में जो लोग अच्छे सिद्धांतों का पालन करते है दुनिया उन्हें बेवकूफ समझती है और जो लोग गलत करते है साथ ही झूठे वादे करते है वो समाज के लिये अच्छे होते है। जबकि, सच ये है कि ऐसे लोग सीधे, साधारण, और निर्दोष लोगों को धोखा देते है और हमेशा उनके ऊपर हावी रहने का प्रयास करते है।

भ्रष्टाचार दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि अधिकारियों, अपराधियों और नेताओं के बीच में सांठगांठ होती है जो देश को कमजोर करते जा रही है। भारत को 1947 में आजादी मिली और वो धीरे-धीरे विकास कर रहा था कि तभी बीच में भ्रष्टाचार रुपी बीमारी फैली और इसने बढ़ते भारत को शुरु होते ही रोक दिया। भारत में एक प्रथा लोगों के दिमाग में घर कर गई है कि सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं में बिना रिश्वत दिये अपना कोई काम नहीं कराया जा सकता और इसी सोच की वजह से परिस्थिति और गिरती ही जा रही है।

भ्रष्टाचार की व्याप्तता

भ्रष्टाचार हर जगह व्याप्त है चाहे फिर वो अस्पताल हो, शिक्षा हो, सरकारी कार्यालय हो या फिर कुछ भी हो कोई भी इससे अछुता नहीं है। सबकुछ व्यापार हो चुका है लगभग हर जगह पैसा गलत तरीके से कमाया जा रहा है शिक्षण संस्थान भी भष्टाचार के लपेटे में है, यहाँ विद्यार्थीयो को सीट देने के लिये पैसा लिया जाता है चाहे उनके अंक इस लायक हो या न हो। बेहद कमजोर विद्यार्थी भी पैसों के दम पर किसी भी कॉलेज में दाखिला पा जाते है इसकी वजह से अच्छे विद्यार्थी पीछे रह जाते है और उन्हें मजबूरन साधारण कॉलेज में पढ़ना पड़ता है।

आज के दिनों में गैर-सरकारी नौकरी सरकारी नौकरीयों से बेहतर साबित हो रही है। प्राईवेट कंपनीयाँ किसी को भी अपने यहाँ क्षमता, दक्षता, तकनीकी ज्ञान और अच्छे अंक के आधार पर नौकरी देती है जबकि सरकारी नौकरी के लिये कई बार घूस देना पड़ता है जैसे टीचर, क्लर्क, नर्स, डॉक्टर आदि के लिये। और घूस की रकम हमेशा बाजार मूल्य के आधार पर बढ़ती रहती है। इसलिये कदाचार से दूर रहे और सदाचार के पास रहें तो भ्रटाचार अपने-आप समाप्त हो जाएगा।

निष्कर्ष

भारत में भ्रष्टाचार की समस्या दिन-प्रतिदिन और भी भयावह होती जा रही है। हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि भ्रष्टाचार ना सिर्फ हमारे वर्तमान का नुकसान कर रहा है बल्कि कि हमारे भविष्य का भी नुकसान कर रहा है। आज के समय में सरकारी दफ्तरों में कार्यों तथा नौकरियों में चयन के लिए दिये जाने वाले रिश्वत के कारण महगांई तेजी से बढ़ती जा रही है। इसलिए इस समस्या को रोकने के लिए देश के हर तबके को साथ आना होगा तभी भ्रष्टाचार रुपी इस दानव का अंत संभव है।

 

 

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