स्वामी विवेकानंद पर निबंध

स्वामी विवेकानंद एक महान हिन्दू संत और नेता थे, जिन्होंने रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ की स्थापना की थी। हम उनके जन्मदिन पर प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं। विद्यार्थियों को अपने अध्यापकों के द्वारा स्वामी विवेकानंद पर निबंध या पैराग्राफ लिखने का कार्य मिल सकता है। आजकल, किसी भी विषय पर निबंध लेखन स्कूल या कॉलेजों में विद्यार्थियों की हिन्दी लेखन कौशल और ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों के द्वारा अनुसरण की जाने वाली अच्छी रणनीतियों में से एक है। किसी भी विषय के बारे में विद्यार्थियों के विचार, दृष्टिकोण और सोच को जानने के लिए एक प्रभावी तरीका निबंध लेखन भी है।

हम यहाँ स्कूल से मिले कार्य को पूरा करने में विद्यार्थियों की मदद करने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद पर निबंध, पैराग्राफ, छोटे व बड़े निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। स्वामी विवेकानंद पर सभी निबंध साधारण और सरल हिन्दी वाक्यों का प्रयोग करके लिख गए हैं। इसलिए, आप अपनी आवश्यकता और जरुरत के अनुसार किसी भी निबंध को चुन सकते हैं:

स्वामी विवेकानंद पर निबंध (Long and Short Essay on Swami Vivekananda in Hindi)

स्वामी विवेकानंद पर दिये गये इन निबंधों का आप अपनी आवश्यकता अनुसार चयन कर सकते हैं। यह निबंध काफी सरल तथा ज्ञानवर्धक हैं। इन निबंधों के माध्यम से हमने (स्वामी विवेकानंद कौन थे? स्वामी विवेकानंद के गुरु कौन थे? स्वामी विवेकानंद के विचार क्या हैं? स्वामी विवेकानंद के दार्शनिक विचार हमें कैसे प्रभावित करते हैं? स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण क्यों महत्वपूर्ण था? स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय, स्वामी विवेकानंद का प्रारंभिक जीवन आदि जैसे विषयों पर) स्वामी विवेकानंद पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है।

You can get below some essays on Swami Vivekananda in Hindi language for students in 100, 150, 200, 300, 400 and 500 words.

स्वामी विवेकानंद पर निबंध 1 (100 शब्द)

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकत्ता में विश्वनाथ दत्त और भुवनेश्वरी देवी के घर नरेन्द्र दत्त के रुप में हुआ था। वह आध्यात्मिक विचारों वाले अद्भूत बच्चे थे। इनकी शिक्षा अनियमित थी, लेकिन इन्होंने स्कॉटिश चर्च कॉलेज से बीए की डिग्री पूरी की। श्री रामकृष्ण से मिलने के बाद इनका धार्मिक और संत का जीवन शुरु हुआ और उन्हें अपना गुरु बना लिया। इसके बाद इन्होंने वेदांत आन्दोलन का नेतृत्व किया और भारतीय हिन्दू धर्म के दर्शन से पश्चिमी देशों को परिचित कराया।

11 सितम्बर 1893 में विश्व धर्म संसद में दिए गए इनके शिकागो के भाषण ने शिकागो में भारत का नेतृत्व किया था। वह हिन्दू धर्म को विश्व का महत्वपूर्ण धर्म के रुप में स्थापित करने में सफल हो गए थे। वह हिन्दू शास्त्रों (वेद, उपनिषद, पुराण, भगवत गीता आदि) के गहरे ज्ञान के साथ बहुत बुद्धिमान व्यक्ति थे। कर्म योग, भक्ति योग, राज योग और जनन योग इनके प्रसिद्ध और मुख्य कार्य हैं।

स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद पर निबंध 2 (150 शब्द)

स्वामी विवेकानंद, महान देशभक्त नेता, का जन्म नरेन्द्र दत्त के रुप में 12 जनवरी 1863 को कोलकत्ता में हुआ था। वह विश्वनाथ दत्त और भुवनेश्वरी देवी के आठ बच्चों में से एक थे। वह बहुत ही बुद्धिमान लड़के थे और संगीत, जिम्नास्टिक व पढ़ाई में सक्रिय थे। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि ली और पश्चिमी दर्शन व इतिहास के साथ अलग-अलग विषयों का ज्ञान अर्जित किया। वह योगिग स्वभाव के साथ पैदा हुए थे और बाद में उन्होंने इसका प्रयोग ध्यान का अभ्यास करने में किया। वह बचपन से ही भगवान के बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक थे।

एकबार जब वह आध्यात्मिक संकट के दौर से गुजर रहे थे, उसी समय उनकी मुलाकात श्री रामकृष्ण से हुई और उन्होंने उनसे एक प्रश्न पूछा कि, “श्रीमान, क्या अपने कभी ईश्वर को देखा है?” श्री रामकृष्ण ने उन्हें उत्तर दिया कि, “हाँ, मैंने उन्हें साक्षात ऐसे देखा है, जैसे कि मैं तुम्हें देख रहा हूँ, केवल बहुत शक्तिशाली भाव में”। वह श्री रामकृष्ण के महान अनुयायी बन गए और उनके आदेशों को मानना शुरु कर दिया।

स्वामी विवेकानंद पर निबंध 3 (200 शब्द)

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में नरेन्द्र दत्त के रुप में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम भुवनेश्वरी देवी (एक धार्मिक गृहिणी) और विश्वनाथ दत्त (कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक वकील) था। वह भारत के सबसे अधिक प्रसिद्ध हिन्दू साधु और देशभक्त संत थे। उनकी शिक्षाएं और मूल्यवान विचार भारत की सबसे बड़ी दार्शनिक परिसंपत्ति है। उन्होंने बेलूर मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। उनकी जंयती प्रत्येक वर्ष पूर्णिमा के बाद पौष कृष्ण पक्ष में सप्तमी को मनाई जाती है।

1985 से भारत सरकार द्वारा स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन, 12 जनवरी को हर साल राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की गई। इस दिन को मनाने का उद्देश्य युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के साथ ही उनके पवित्र आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों में जगाना था। इस दिन लोग स्वामी विवेकानंद और देश के लिए उनके योगदानों को याद करते हैं। यह रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की शाखाओं केन्द्रों सहित रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय में महान श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन को बहुत सी गतिविधियाँ, जैसे- हवन, ध्यान, मंगल आरती, भक्तिमय गीत धार्मिक प्रवचन, संध्या आरती, आदि के द्वारा मनाया जाता है।


 

स्वामी विवेकानंद पर निबंध 4 (300 शब्द)

प्रस्तावना

स्वामी विवेकानंद भारत में पैदा हुए महापुरुषों में से एक है। अपने महान कार्यों द्वारा उन्होंने पाश्चात्य जगत में सनातन धर्म, वेदों तथा ज्ञान शास्त्र को काफी ख्याति दिलायी और विश्व भर में लोगो को अमन तथा भाईचारे का संदेश दिया।

स्वामी विवेकानंद का प्रारंभिक जीवन

विश्वभर में ख्याति प्राप्त संत, स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। वह बचपन में नरेन्द्र नाथ दत्त के नाम से जाने जाते थे। इनकी जयंती को भारत में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में मनाया जाता है। वह विश्वनाथ दत्त, कलकत्ता उच्च न्यायालय के वकील, और भुवनेश्वरी देवी के आठ बच्चों में से एक थे। वह होशियार विद्यार्थी थे, हालांकि, उनकी शिक्षा बहुत अनियमित थी। वह बहुत धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्ति थे और अपने संस्कृत के ज्ञान के लिए लोकप्रिय थे।

स्वामी विवेकानंद के गुरु कौन थे

स्वामी विवेकानंद सच बोलने वाले, अच्छे विद्वान होने के साथ ही एक अच्छे खिलाड़ी भी थे। वह बचपन से ही धार्मिक प्रकृति वाले थे और परमेश्वर की प्राप्ति के लिए काफी परेशान थे। एक दिन वह श्री रामकृष्ण (दक्षिणेश्वर काली मंदिर के पुजारी) से मिले, तब उनके अंदर श्री रामकृष्ण के आध्यात्मिक प्रभाव के कारण बदलाव आया। श्री रामकृष्ण को अपना आध्यात्मिक गुरु मानने के बाद वह स्वामी विवेकानंद कहे जाने लगे।

वास्तव में स्वामी विवेकानंद एक सच्चे गुरुभक्त भी थे क्योंकि तमाम प्रसिद्धि पाने के बाद भी उन्होंने सदैव अपने गुरु को याद रखा और रामकृष्ण मिशन की स्थापना करते हुए, अपने गुरु का नाम रोशन किया।

 

 

स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण

जब भी स्वामी विवेकानंद के विषय में बात होती है, तो उनके शिकागों भाषण के विषय में चर्चा जरुर की जाती है क्योंकि यही वह क्षण था। जब स्वामी विवेकानंद ने अपने ज्ञान तथा शब्दों द्वारा पूरे विश्व भर में हिंदु धर्म के विषय में लोगो का नजरिया बदलते हुए, लोगो को अध्यात्म तथा वेदांत से परिचित कराया। अपने इस भाषण में उन्होंने विश्व भर को भारत के अतिथि देवो भवः, सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकार्यता के विषय से परिचित कराया।

उन्होंने बताया की जिस तरह भिन्न-भिन्न नदियां अंत में समुद्र में ही मिलती हैं, उसी प्रकार विश्व के सभी धर्म अंत में ईश्वर तक ही पहुंचाते हैं और समाज में फैली कट्टरता तथा सांप्रदायिकता को रोकने के लिए, हम सबको आगे आना होगा क्योंकि बिना सौहार्द तथा भाईचारे के विश्व तथा मानवता का पूर्ण विकास संभव नही है।

निष्कर्ष

स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष सदियों में एक बार ही जन्म लेते हैं, जो अपने जीवन के बाद भी लोगो को निरंतर प्रेरित करने का कार्य करते हैं। यदि हम उनके बताये गये बातों पर अमल करें, तो हम समाज से हर तरह की कट्टरता और बुराई को दूर करने में सफल हो सकते हैं।


 

स्वामी विवेकानंद पर निबंध 5 (400 शब्द)

प्रस्तावना

स्वामी विवेकानंद उन महान व्यक्तियों में से एक है, जिन्होंने विश्व भर में भारत का नाम रोशन करने का कार्य किया। अपने शिकागों भाषण द्वारा उन्होंने पूरे विश्व भर में हिंदुत्व के विषय में लोगो को जानकारी प्रदान की, इसके साथ ही उनका जीवन भी हम सबके लिए एक सीख है।

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय

स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता में शिमला पल्लै में 12 जनवरी 1863 को हुआ था। उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था जोकि कलकत्ता उच्च न्यायालय में वकालत का कार्य करत थे और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। स्वामी विवेकानंद श्री रामकृष्ण परमहंस के मुख्य अनुयायियों में से एक थे। इनका जन्म से नाम नरेन्द्र दत्त था, जो बाद में रामकृष्ण मिशन के संस्थापक बने।

वह भारतीय मूल के व्यक्ति थे, जिन्होंने वेदांत के हिन्दू दर्शन और योग को यूरोप व अमेरिका में परिचित कराया। उन्होंने आधुनिक भारत में हिन्दू धर्म को पुनर्जीवित किया। उनके प्रेरणादायक भाषणों का अभी भी देश के युवाओं द्वारा अनुसरण किया जाता है। उन्होंने 1893 में शिकागो की विश्व धर्म महासभा में हिन्दू धर्म को परिचित कराया था।

स्वामी विवेकानंद अपने पिता के तर्कपूर्ण मस्तिष्क और माता के धार्मिक स्वभाव से प्रभावित थे। उन्होंने अपनी माता से आत्मनियंत्रण सीखा और बाद में ध्यान में विशेषज्ञ बन गए। उनका आत्म नियंत्रण वास्तव में आश्चर्यजनक था, जिसका प्रयोग करके वह आसानी से समाधी की स्थिति में प्रवेश कर सकते थे। उन्होंने युवा अवस्था में ही उल्लेखनीय नेतृत्व की गुणवत्ता का विकास किया।

वह युवा अवस्था में ब्रह्मसमाज से परिचित होने के बाद श्री रामकृष्ण के सम्पर्क में आए। वह अपने साधु-भाईयों के साथ बोरानगर मठ में रहने लगे। अपने बाद के जीवन में, उन्होंने भारत भ्रमण का निर्णय लिया और जगह-जगह घूमना शुरु कर दिया और त्रिरुवंतपुरम् पहुँच गए, जहाँ उन्होंने शिकागो धर्म सम्मेलन में भाग लेने का निर्णय किया।

कई स्थानों पर अपने प्रभावी भाषणों और व्याख्यानों को देने के बाद वह पूरे विश्व में लोकप्रिय हो गए। उनकी मृत्यु 4 जुलाई 1902 को हुई थी ऐसा माना जाता है कि, वह ध्यान करने के लिए अपने कक्ष में गए और किसी को भी व्यवधान न उत्पन्न करने के लिए कहा और ध्यान के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई।

निष्कर्ष

स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषणों द्वारा पूरे विश्व भर में भारत तथा हिंदु धर्म का नाम रोशन किया। वह एक ऐसे व्यक्ति थे, जिनके जीवन से हम सदैव कुछ ना कुछ सीख ही सकते हैं। यहीं कारण है कि आज भी युवाओं में इतने लोकप्रिय बने हुए हैं।


 

स्वामी विवेकानंद पर निबंध 6 (500 शब्द)

प्रस्तावना

एक समान्य परिवार में जन्म लेने वाले नरेंद्रनाथ ने अपने ज्ञान तथा तेज के बल पर विवेकानंद बने। अपने कार्यों द्वारा उन्होंने विश्व भर में भारत का नाम रोशन करने का कार्य किया। यहीं कारण है कि वह आज के समय में भी लोगो के प्रेरणास्त्रोत हैं।

भारत के महापुरुष – स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में मकर संक्रांति के त्योहार के अवसर पर, परंपरागत कायस्थ बंगाली परिवार में हुआ था। स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त (नरेन्द्र या नरेन भी कहा जाता था) था। वह अपने माता-पिता (पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता उच्च न्यायालय में वकील थे और माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक महिला थी) के 9 बच्चों में से एक थे। वह पिता के तर्कसंगत मन और माता के धार्मिक स्वभाव वाले वातावरण के अन्तर्गत सबसे प्रभावी व्यक्तित्व में विकसित हुए।

वह बाल्यकाल से ही आध्यात्मिक व्यक्ति थे और हिन्दू भगवान की मूर्तियों (भगवान शिव, हनुमान आदि) के सामने ध्यान किया करते थे। वह अपने समय के घूमने वाले सन्यासियों और भिक्षुओं से प्रभावित थे। वह बचपन में बहुत शरारती थे और अपने माता-पिता के नियंत्रण से बाहर थे। वह अपनी माता के द्वारा भूत कहे जाते थे, उनके एक कथन के अनुसार, “मैंने भगवान शिव से एक पुत्र के लिए प्रार्थना की थी और उन्होंने मुझे अपने भूतों में से एक भेज दिया।”

उन्हें 1871 (जब वह 8 साल के थे) में अध्ययन के लिए चंद्र विद्यासागर महानगर संस्था और 1879 में प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिल कराया गया। वह सामाजिक विज्ञान, दर्शन, इतिहास, धर्म, कला और साहित्य जैसे विषयों में बहुत अच्छे थे। उन्होंने पश्चिमी तर्क, यूरोपीय इतिहास, पश्चिमी दर्शन, संस्कृत शास्त्रों और बंगाली साहित्य का अध्ययन किया।

स्वामी विवेकानंद के विचार

वह बहुत धार्मिक व्यक्ति थे हिन्दू शास्त्रों (वेद, रामायण, भगवत गीता, महाभारत, उपनिषद, पुराण आदि) में रुचि रखते थे। वह भारतीय शास्त्रीय संगीत, खेल, शारीरिक व्यायाम और अन्य क्रियाओं में भी रुचि रखते थे। उन्हें विलियम हैस्टै (महासभा संस्था के प्राचार्य) के द्वारा "नरेंद्र वास्तव में एक प्रतिभाशाली है" कहा गया था।

वह हिंदू धर्म के प्रति बहुत उत्साहित थे और हिन्दू धर्म के बारे में देश के अन्दर और बाहर दोनों जगह लोगों के बीच में नई सोच का निर्माण करने में सफल हुए। वह पश्चिम में ध्यान, योग, और आत्म-सुधार के अन्य भारतीय आध्यात्मिक रास्तों को बढ़ावा देने में सफल हो गए। वह भारत के लोगों के लिए राष्ट्रवादी आदर्श थे।

उन्होंने राष्ट्रवादी विचारों के माध्यम से कई भारतीय नेताओं का ध्यान आकर्षित किया। भारत की आध्यात्मिक जागृति के लिए श्री अरबिंद ने उनकी प्रशंसा की थी। महान हिंदू सुधारक के रुप में, जिन्होंने हिंदू धर्म को बढ़ावा दिया, महात्मा गाँधी ने भी उनकी प्रशंसा की। उनके विचारों ने लोगों को हिंदु धर्म का सही अर्थ समझाने का कार्य किया और वेदांतों और हिंदु अध्यात्म के प्रति पाश्चात्य जगत के नजरिये को भी बदला।

उनके इन्हीं कार्यों के लिए चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल) ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने हिन्दू धर्म तथा भारत को बचाया था। उन्हें सुभाष चन्द्र बोस के द्वारा "आधुनिक भारत के निर्माता" कहा गया था। उनके प्रभावी लेखन ने बहुत से भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ताओं; जैसे- नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, अरविंद घोष, बाघा जतिन, आदि को प्रेरित किया। ऐसा कहा जाता है कि 4 जुलाई सन् 1902 में उन्होंने बेलूर मठ में तीन घंटे ध्यान साधना करते हुए अपनें प्राणों को त्याग दिया।

निष्कर्ष

अपने जीवन में तमाम विपत्तियों के बावजूद भी स्वामी विवेकानंद कभी सत्य के मार्ग से हटे नही और अपने जीवन भर लोगो को ज्ञान देने कार्य किया। अपने इन्हीं विचारों से उन्होंने पूरे विश्व को प्रभावित किया तथा भारत और हिंदुत्व का नाम रोशन करने का कार्य किया।