बाबा साहेब पर कविता
एक दिन ऐसा भी थागले में हांड़ी, कमर में झाड़ू था,गायों के दूध वो पीते लेकिनमरने पर चमड़ा सिर्फ हमारा था। एक भारत ऐसा भी था,जहाँ दलित की ज़िन्दगी,जानवर से भी बदतर थी,पशु पी सकते थे पानी,लेकिन हमें ये सम्मान न था। अगर बनाया सबको भगवान ने,तो मंदिर में प्रवेश क्यों न था?हमारे पूर्वज भी […]
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