जैव विविधता पर निबंध

जैव विविधता से तात्पर्य विस्तृत रूप से उन विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु और वनस्पति से है जो संसार में या किसी विशेष क्षेत्र में एक साथ रहते है। जैव विविधता की समरसता को बनाये रखने के लिए हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है की हम अपनी धरती की पर्यावरण संबंधित स्थिति  के तालमेल को बनाये रखे। जैव विविधता का संबंध, जिसे हम जैविक विविधता भी कह सकते है, मुख्य रूप से अलग अलग तरह के पेड़ पौधों और पशु पक्षियों का धरती पर एक साथ अपने अस्तित्व को बनाये रखने से है।यह बहुत ही जरुरी है की ऊँचे स्तर की जैव विविधिता को बनाये रखने के लिए हम अपने प्राकृतिक परिवेश की अवस्था सही तरीके से बना के रखे।

जैव विविधता पर छोटे तथा बड़े निबंध (Short and Long Essay on Bio-Diversity in Hindi)

निबंध 1 (250 शब्द)

जैव विविधता जिसे जैविक विविधता भी कहते है, अलग-अलग तरह की वनस्पतियों एवं जानवरों का संग्रह है जो एक ही विशेष क्षेत्र में रहते या फैले हुए है। जैव विविधता जितनी समृद्ध होगी उतना ही सुव्यवस्थित और संतुलित हमारा वातावरण होगा। अलग-अलग तरह की वनस्पति तथा जीव-जंतु भी धरती को रहने के योग्य बनाने के लिए अपना योगदान देते है। इंसान के जीवन के पीछे भी जैव विविधता का ही हाथ है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अलग-अलग जंतु और पेड़-पौधे ही मिलकर मनुष्य की मूलभूत जरूरतें पूरी करने में सहायता करते है।

एक अनुमान के मुताबिक पृथ्वी पर लगभग 3,00,000 वनस्पति तथा इतने ही जानवर है जिसमें पक्षी, मछलियां, स्तनधारी, कीड़े, सींप आदि शामिल है। हमारे गृह पृथ्वी की खोज लगभग 450 करोड़ साल पहले हुई थी और ऐसा वैज्ञानिकों का मानना है की पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत 350 करोड़ साल पहले हुई थी।

जैव विविधता

पिछली कुछ शताब्दियों में कई वनस्पति एवं जानवरों की प्रजातियां विलुप्त हो गयी है और आने वाले समय में कई लुप्त होने की कग़ार पर है। यह जैव विविधता के लिए ख़तरे का संकेत है।

पिछले कुछ समय से मनुष्य का तकनीक की तरफ इतना ज्यादा झुकाव हो गया है की वह इसके दुष्परिणाम को भी नहीं समझना चाहता। शुद्धता की नज़र से देखा जाये तो कई नए अविष्कार मनुष्य एवं जैव विविधता के प्रति नकरात्मक प्रभाव डाल रहे है। मनुष्य के लिए यह बिलकुल सही समय है की वो इस संकट को गंभीरता से ले और वातावरण को शुद्ध बनाने का संकल्प ले। साफ़ सुथरा वातावरण ही समृद्ध जैव विविधता को बढ़ावा दे सकता है जिससे मानव जाति को अपना जीवनयापन में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।


 

निबंध 2 (300 शब्द)

प्रस्तावना

जैव विविधता मुख्य रूप से एक मापदंड है जिसमें अलग-अलग तरह के पेड़-पौधे और पशु-पक्षी एक साथ रहते है। हर किस्म की वनस्पति और पशुवर्ग पृथ्वी के वातावरण को बेहतर बनाने में अपना अमूल्य योगदान देते है जिससे आख़िरकार पृथ्वी पर जीवन समृद्धशाली बनता है। ये सभी प्रजातियां एक दूसरे की मूलभूत जरूरतों को पूरा करती है जिससे एक समृद्धशाली जैव विविधिता का निर्माण होता है।

जैव विविधता का पतन कैसे हुआ?

हालाँकि पिछले कई सालों से जैव विविधता को समृद्ध बनाये रखने पे जोर दिया जा रहा है परंतु फिर भी कुछ समय से इसकी गरिमा में गिरावट देखी गयी है जिसकी आने वाले समय में और भी ज्यादा गिरने की आंशका जताई जा रही है। इसके पीछे मुख्य कारण है औद्योगिक फैक्टरियों से लगातार निकलता प्रदूषण। इस प्रदूषण के कारण ही कई वनस्पतियों की और जानवरों की प्रजातियां विलुप्त हो गयी है और कई होने की कग़ार पर है। इस बदलाव का एक संकेत तो साफ़ है की आने वाले समय में हमारे गृह पृथ्वी पे बहुत ही भयंकर संकट खड़ा हो जायेगा। इससे जैव विविधता का संतुलन तो निश्चित रूप से बिगड़ेगा ही तथा मनुष्य के साथ साथ जीवजंतुओं के जीवन पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो जायेगा।

 

जैव विविधता को समृद्ध कैसे बनाये?

सबसे पहले यह जरुरी है की हम वातावरण संबंधी मुसीबतों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हो। कई देशों की सरकार लोगों के बीच जैव विविधता के बिगड़ते संतुलन को लेकर जागरूकता फैला रही है और कोशिश कर रही है की इस पर जल्दी काबू पाया जाये। यह आम आदमी की भी जिम्मेदारी है की वह इस नेक कार्य में हिस्सा ले और वातावरण को शुद्ध बनाने में सरकार का सहयोग करे।

निष्कर्ष

मनुष्य के तकनीक के प्रति बढ़ते प्रेम को कम करने की जरुरत है। वह तकनीक और नए नए अविष्कार करने में इतना मग्न हो गया है की उसे अपने आसपास के वातावरण के बढ़ते प्रदूषण से कोई लेना देना ही नहीं है। मनुष्य को इस तरफ सोचना होगा की दूषित होते वातावरण से सिर्फ उसका ही नुकसान हो रहा है।


 

निबंध 3 (400 शब्द)

प्रस्तावना

भिन्न-भिन्न प्रकार की वनस्पति एवं जीव जन्तुओ के एक साथ रहने को ही जैव विविधता का नाम दिया गया है। इसने प्रजातीय समृद्धि और प्रजातीय विविधता जैसे शब्दों के अर्थ को ही बदल के रख दिया है।

जैव विविधिता - जैविक किस्मों के प्रति एकीकृत दृष्टिकोण

जैव विविधिता को स्पष्ट करने के लिए और भी कई शब्दावली है जिसमें मुख्य है पारिस्थितिक विविधता (पारिस्थितिक तंत्र से उत्पन्न), वर्गीकरण विविधता (वर्गीय तंत्र से उत्पन्न), कार्यात्मक विविधता (कार्य तंत्र से उत्पन्न) और रूपात्मक विविधता (आनुवंशिक विविधता से उत्पन्न)। जैव विविधता इन सभी के प्रति एक नई सोच को दर्शाती एवं एकत्रित करती है।

जैव विविधता क्यों महत्वपूर्ण है?

जैव विविधता के महत्वपूर्ण होने के पीछे तर्क है की यह पारिस्थितिकीय प्रणाली के संतुलन को बना के रखती है। विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी तथा वनस्पति एक दूसरे की जरूरतें पूरी करते है और साथ ही ये एक दूसरे पर निर्भर भी है। उदाहरण के तौर पर मनुष्य को ही ले लीजिए। अपनी मूलभूत आवश्यकता जैसे खाने, रहने के लिए वह भी पशु, पेड़ और अन्य तरह की प्रजातियों पर आश्रित है। हमारी जैव विविधता की समृद्धि ही पृथ्वी को रहने के लिए तथा जीवन यापन के लायक बनाती है।

दुर्भाग्य से बढ़ता हुआ प्रदूषण हमारे वातावरण पर गलत प्रभाव डाल रहा है। बहुत से पेड़-पौधे तथा जानवर प्रदूषण के दुष्परिणाम के चलते अपना अस्तित्व खो चुके है और कई लुप्त होने की राह पर खड़े है। अगर ऐसा ही रहा तो सभी प्रजातियों के सर्वनाश का दिन दूर नहीं है।

जैव विविधता को कैसे बचाये?

सबसे पहले इंसान को जैव विविधता के महत्व को समझना होगा। सड़को पे दौड़ते बड़े बड़े वाहन बड़े पैमाने पे प्रदूषण फैला रहे है जो मनुष्य जाति के लिए बहुत बड़ा खतरा है। वातावरण की शुद्धता को बचाने के लिए इन वाहनों पर अंकुश लगाना होगा ताकि ये वातावरण को और दूषित न कर पाए। फैक्टरियों से निकलता दूषित पानी जल जीवन को ख़राब कर रहा है। पानी में रहने वाले जीवों की जान पर संकट पैदा हो गया है। इस निकलते दूषित पानी का जल्दी से जल्दी उचित प्रबंध करना होगा ताकि ये बड़ी आपदा का रूप न ले ले। इसी तरह से ध्वनि प्रदूषण पर भी लगाम लगानी होगी।

वनों की कटाई भी एक बहुत बड़ी वजह है जैव विविधता में होती गिरावट का। इससे न सिर्फ पेड़ो की संख्या घटती जा रही है बल्कि कई जानवरों एवं पक्षियों से उनका आशियाना भी छिनता जा रहा है जो उनके जीवन निर्वाह में एक बड़ी मुसीबत बन चुका है। वातावरण की दुर्गति को देखते हुए इस पर तुरंत प्रभाव से नियंत्रण करना होगा।

निष्कर्ष

हर एक वनस्पति तथा जीव का वातावरण को रहने के योग्य बनाने में अलग-अलग उद्देश्य है। इसलिए अगर हमें अपने वातावरण की शुद्धता को ऊँचे स्तर तक पहुँचाना है तो हमें जैव विविधता के संतुलन को बनाये रखने पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा।