हाथी पर निबंध

हम यहाँ विद्यार्थियों की मदद करने के उद्देश्य से विभिन्न शब्द सीमाओं में हाथी पर निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। आजकल, विद्यार्थियों के लेखन क्षमता और सामान्य ज्ञान को परखने के लिए शिक्षकों द्वारा  उन्हें निबंध और पैराग्राफ लेखन जैसे कार्य सर्वाधिक रुप से दिये जाते हैं। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखत हुए हमने हाथी पर विभिन्न लंबाई के निबंध तैयार किये हैं। इन दिये गये निबंधो में से आप अपनी आवश्यकता अनुसार किसी का भी चयन कर सकते हैं ।

हाथी पर बड़े तथा छोटे निबंध (Long and Short Essay on Elephant in Hindi)

Find essay on elephant in Hindi language in different words limit like 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

इन दिये गये निबंधों में से आप अपनी आवश्यकता अनुसार किसी भी निबंध का चयन कर सकते हैं, ये निबंध काफी सरल तथा ज्ञानवर्धक है। इन निबंधों के माध्यम से हमनें हाथी कितने प्रकार के होते हैं? हाथी का उपयोग क्या है? हाथीयों का मानव इतिहास में क्या योगदान है? हाथी किन देशों में पाये जाते है? हाथी का खान-पान क्या है? हाथी को पूजनीय क्यों माना जाता है? आदि जैसे विषयों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है।

हाथी पर निबंध 1 (200 शब्द)

हाथी एक विशाल जानवर होने के साथ ही एक काफी समझदार जानवर भी है। ऐसा माना जाता है की हाथी की याददाश्त बहुत तेज होती है। यदि हाथी को प्रशिक्षित किया जाए तो यह बड़ी ही आसानी से हमारे सभी आदेशों का पालन कर सकता है। वैसे तो हाथी एक जंगली जानवर है परन्तु सही प्रशिक्षण और रखरखाव से इसे अन्य कई जानवरों के तरह पालतू भी बनाया जा सकता है। यहीं कारण है कि कुछ लोग इसे प्रशिक्षित करके सर्कस आदि के माध्यम से धन कमाने के लिए एक पालतू जानवर की तरह उपयोग में लाते है।

यह चिड़िया घरों की शान को बढ़ाने के साथ ही बच्चों की रुचि को बढ़ाने के लिए भी चिड़िया घरों में रखा जाता हैं। इसका शरीर काफी विशाल होता है, जिसमें खम्भे की तरह चार पैर, बड़े पंखों की तरह दो कान, एक लम्बी सूंड़, एक छोटी पूँछ और दो छोटी आँखें होती हैं। एक नर हाथी के दो लम्बे सफेद दाँत होते हैं, जिन्हें टस्क (हाथी के दाँत) कहा जाता है। यह मुलायम हरी घास की पत्तियाँ, पौधे, गेहूँ आदि खाता है। यह मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी जानवर है और मानवता के लिए अच्छा दोस्त भी साबित हो सकता है, क्योंकि यह बहुत से कार्यों में हमारी सहायता करता है;  जैसे कि धन कमाना, भारी सामान को उठाकर ले जाना, आदि। हाथी की जीवन अवधि काफी लम्बी होती है, यह लगभग सौ साल से अधिक समय तक जीवित रहता है।

हाथी

हाथी पर निबंध 2 (300 शब्द)

प्रस्तावना

हाथी पृथ्वी पर मौजूद सबसे विशाल जानवरों में से एक है। इसे धरती का सबसे ताकतवर जानवर भी माना जाता है। आमतौर पर, यह एक जंगली जानवर है हालांकि  यह उचित प्रशिक्षण के बाद चिड़िया घर में या मनुष्यों के साथ घर में  एक पालतू जानवर के रुप में भी रह सकता है। हाथी सदैव से ही मानवता के लिए एक बहुत ही उपयोगी जानवर रहा है। इसका रंग आमतौर पर ग्रे (स्लेटी) रंग का होता है। इसकी चारों पैर विशाल स्तम्भ की तरह लगते हैं और दो बड़े कान पंखों की तरह लगते हैं। इसकी आँखें शरीर की तुलना में बहुत ही छोटी होती है। यह एक लम्बी सूंड़ और एक छोटी पूँछ रखता है। यह अपनी सूंड़ के माध्यम से बहुत छोटी से छोटी सूई जैसी वस्तु और भारी से भारी पेड़ों या वजन को उठा सकता है। यह सूंड़ के दोनों तरफ एक-एक लम्बे सफेद दाँत रखता है।

खान-पान

हाथी जंगलों में रहते हैं और आमतौर पर छोटी टहनियों, पत्तियों, भूसा, और जंगली फल खाते हैं हालांकि पालतू हाथी रोटी, केले, गन्ने आदि भी खाते हैं। यह एक शाकाहारी जंगली जीव है। आजकल ये लोगों के द्वारा भारी सामान को उठाने, सर्कस में  वजन उठाने, आदि के जैसे कार्य भी करते हैं। प्राचीन समय में ये राजा, महाराजाओं द्वारा युद्धों और लड़ाईयों में प्रयोग किए जाते थे। हाथी काफी लंबे समय तक जीवित रहने वाली जीव है, इसकी आयु लगभग 100 वर्षों से भी अधिक होती है। यहाँ तक कि, यह मृत्यु के बाद भी काफी अधिक उपयोगी होता है, क्योंकि इसके मरणोपरांत इसके दांत कई तरह की दवाईयां और सजावटी वस्तु बनाने के काम में आते है।

निष्कर्ष

आज के समय में भी अनेक हाथीयों को एक पालतू जीव के रुप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। लेकिन हाथी को पकड़ना काफी कठिन कार्य है। यद्यपि हाथी एक शांत स्वभाव का जीव है लेकिन जब इसे परेशान या फिर इसपे हमला किया जाये तो यह काफी खतरनाक बन जाता है।

 

हाथी पर निबंध 3 (400 शब्द)

प्रस्तावना

हाथी पृथ्वी पर उपस्थित सबसे बड़े जीवों में से एक है। सामान्यः यह जंगलों में रहता है, हालांकि उचित प्रशिक्षण के बाद इसे पालतू भी बनाया जा सकता है। इसकी ऊँचाई आठ फिट से भी ज्यादा होती है। इसकी बड़े और विशाल शरीर को मजबूत स्तम्भों की तरह पैरो से सहारा दिया जाता है। यह पेड़ों की पत्तियों, पौधों, फलों या पेड़ों से पत्तियों को खाने के लिए अपनी लम्बी सूंड़ की मदद लेता है।

हाथियों के प्रकार

आमतौर पर, पृथ्वी पर दो तरह के हाथी पाए जाते हैं; अफ्रीकी (इसका वैज्ञानिक नाम लोक्सोडान्टा अफ्रीकाना है) और एशियन (इसका वैज्ञानिक नाम एल्फास़ मैक्सिम्स है)। इसके बड़े लटकते हुए कान पंखे और पैर स्तंभ की तरह लगते हैं। इसकी मुंह से जुड़ी हुई लम्बी सूंड़ होती है, जिसके दोनों ओर दो लम्बे सफेद दाँत होते हैं। हाथी की सूंड़ बहुत ही लचकदार और मजबूत होती है और बहु-उद्देश्य अंग के रुप में जानी जाती है। यह हाथी द्वारा खाना खाने, सांस लेने, नहाने, भावनाओं को व्यक्त करने, लड़ने आदि के लिए प्रयोग की जाती है।

अफ्रीकी हाथी आकार में एशियन हाथियों से थोड़े से बड़े और गहरे स्लेटी रंग के होते हैं। इसके दो कान होते हैं, जो आकार में पंखे की तरह दिखाई देते हैं। हाथी आमतौर पर, भारत, अफ्रीका, श्रीलंका, बर्मा, और थाइलैंड में पाए जाते हैं। ये आमतौर पर, झुंड में रहना पसंद करते हैं और पानी के बहुत शौकीन होते हैं। ये तैरना अच्छी तरह से जानते हैं। एक शाकाहारी पशु होने के कारण, ये अपने भोजन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए जंगलों में पेड़-पौधों पर निर्भर करते हैं। वनों की कटाई होने से जंगलों में भोजन की कमी के कारण, ये गाँवों या आवासीय इलाकों का रुख करते हैं। हाथी एक बुद्धिमान पशु के रुप में जाना जाता है और इसके साथ ही यह मनुष्य को भी बहुत अधिक लाभ प्रदान करता है।

निष्कर्ष

हाथी जंगल में अपना सीमा क्षेत्र बनाकर रहते है तथा इन्हें झुंडों में रहना पसंद होता है। हाथी पकड़ने के लिए सामान्यतः बड़े जालों का प्रयोग किया जाता है। वर्तमान समय में सर्कस में तमाशे दिखाने के लिए भी इनका प्रयोग किया जाता है। इनकी सहायता से अनेक हैरतअंगेज करतब दिखाए जाते हैं। लेकिन इसके साथ ही ऐसे जगहों पर इनके ऊपर अनेक अत्याचार किये भी किये जाते हैं।

 

हाथी पर निबंध 4 (500 शब्द)

प्रस्तावना

हाथी धरती पर पाये जाने वाले सबसे ताकतवर और विशालकाय पशुओं में से एक है। यह अपने विशाल शरीर, बुद्धिमत्ता और आज्ञाकारी प्रवृति के लिए प्रसिद्ध है। यह जंगल में रहता है हालांकि, प्रशिक्षण के बाद इसे लोगों द्वारा बहुत से उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इसके स्तंभ की तरह चार बड़े पैर, पंखे की तरह दो कान, दो छोटी आँखें, एक छोटी पूँछ, एक लम्बी सूंड़ और दो लम्बे सफेद दाँत होते हैं, जिन्हें टस्क कहा जाता है। हाथी जंगलों में पत्तियाँ, केले के पेड़ का तना, मुलायम पौधे, अखरोट, फल आदि खाता है। यह सौ और 120 वर्षों तक जीवित रह सकता है। यह भारत में असम, मैसूर, त्रिपुरा आदि के घने जंगलों में पाया जाता है। आमतौर पर, हाथी गहरे ग्रे (स्लेटी) रंग के होते हैं हालांकि, साथ ही थाईलैंड में सफेद हाथी भी पाए जाते हैं।

हाथी की त्वचा एक इंच मोटी होती है हालांकि यह  बहुत ही संवेदनशील भी होती है। वे बहुत अधिक लगभग 5 मील की दूरी से एक-दूसरे की आवाजों को सुन सकते हैं। नर हाथी वयस्क होते ही अकेले रहना शुरु कर देते हैं, हालांकि मादा हाथी समूह में रहती है, समूह का नेतृत्व करने वाली हंथनी को कुलमाता भी कहा जाता है। बुद्धिमत्ता, सुनने की अच्छी क्षमता और सूँघने की बेहतर क्षमता होने के बाद भी हाथी की देखने की क्षमता बहुत कमजोर होती है, जिसके कारण इसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

हाथी एक बुद्धिमान पशु

हाथी बुद्धिमान पशु है और सीखने की अच्छी क्षमता रखता है। इसे आवश्यकता के अनुसार सर्कस के लिए आसानी से प्रशिक्षित किया जा सकता है। यह लकड़ियों के भारी वजन को बहुत ही आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकता है। हाथी सर्कस और अन्य स्थानों पर बच्चों के सबसे पसंदीदा जानवरों में से एक है। एक प्रशिक्षित हाथी बहुत से कार्य कर सकता है  जैसे सर्कस में रुचिकर गतिविधियों का प्रदर्शन करना, कर्तब करना आदि। हालांकि कभी-कभी हाथी गुस्सैल भी होता है, जो मनुष्यों के लिए बहुत ही खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह गुस्से में चीजो को तहस-नहस करने के साथ ही लोगों की जान भी ले सकता है। यह बहुत ही लाभदायक जीव है, क्योंकि इसकी मृत्यु के बाद इसके दाँतों, खाल (त्वचा), हड्डियों आदि के प्रयोग से महँगी कलात्मक वस्तुएं तथा दवाईयां बनाई जा सकती है।

युद्ध व शिकार में उपयोगी

हाथी के द्वारा शेर का शिकार भी किया जाता है। शिकारी हाथी के ऊपर बैठ कर हाथी को नियंत्रित करता है जिसे महावत कहते है। इस तरह शिकारी शेर पर अपनी नजर रख सकता है और उसका शिकार कर सकता है।

निष्कर्ष

प्रचान समय में भारत के राजा-महाराजा हाथियों पर बैठकर युद्ध किया करते थे। हाथी उनका मुख्य पशु हुआ करता था। वे हाथियों को युद्ध के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित करवाते थे क्योंकि इनकी त्वचा बहुत ही मोटी होती है और इन पर साधारण हथियारों का आसानी से असर भी नहीं होता था, जिसके कारण यह युद्ध में अजेय होते थे।


 

हाथी पर निबंध 5 (600 शब्द)

प्रस्तावना

हाथी जंगल में रहने वाला बहुत ही बड़ा और विशाल पशु है। कई लोगों को यह देखने में काफी डरावना लगता है, हालांकि बच्चों द्वारा इसे काफी पसंद किया जाता है। यह बड़ा और विशाल शरीर वाला जीव है, राजा-महराजाओं की सवारी होने के कारण इसे शाही पशु भी कहा जाता है। यह ऊँचाई में 10 फिट से ज्यादा भी हो सकता है। इसकी चमड़ी काफी मोटी और कठोर होती है और इसका रंग गहरे स्लेटी (ग्रे) रंग का होता है। कई जगहों पर सफेद रंग का हाथी भी पाया जाता है, लेकिन सफेद रंग का हाथी काफी दुर्लभ होता है। इसकी लम्बी और लचकदार सूंड़ भोजन करने, सांस लेने और भारी सामान को उठाने में मदद करती है। इसके चार पैर बहुत ही मजबूत होते हैं और स्तंभ की तरह दिखते हैं। हाथी भारत के असम, मैसूर, त्रिपुरा आदि क्षेत्रों में पाया जाता है, इसके अलावा यह  सैलोन, अफ्रीका और बर्मा के जंगलों में पाए जाते हैं। हाथी जंगलों में सौ हाथियों के झुंड़ (जिसका बड़े नर हाथी द्वारा नेतृत्व किया जाता है) में रहते हैं।

हाथी के उपयोग

यह पूरे जीवन के साथ ही मृत्यु के पश्चात भी मानवता के लिए काफी उपयोगी जीव है। इसके शरीर के बहुत से भाग पूरे संसार में बहुमूल्य चीजों को बनाने में प्रयोग किए जाते हैं। हाथी की हड्डियाँ और इसके दाँतों का उपयोग ब्रश, चाकू के हैडल बनाने, कंघी, चूड़ियाँ और फैंसी चीजों सहित अन्य बहुत से कार्यों में प्रयोग किया जाता है। यह 100 से 120 वर्ष की अवधि तक जीवित रहते हैं। हाथी को एक घरेलू जीव के रुप में पालना एक काफी मंहगा कार्य है, यही कारण है कि साधरण व्यक्ति हाथी नही पाल सकता है।

हाथी का स्वभाव

वैसे तो हाथी बहुत ही शान्त स्वभाव का जीव होता है, हालांकि चिढ़ाने और परेशान करने पर यह गुस्सैल और खतरनाक हो जाता है, गुस्सा आने पर यह लोगों की जान तक ले सकत है। हाथी अपनी बुद्धिमान और वफादारी के लिए जाना जाता है, क्योंकि यह प्रशिक्षण के बाद अपनी देखरेख करने वालों के सभी संकेतों को भी समझता है। यह अपने मालिक की आज्ञा का पालन अपनी मृत्यु तक करता है।

हाथी के प्रकार

हाथी दो प्रकार के होते हैं, अफ्रीकी हाथी और एशियाई हाथी। अफ्रीकी हाथी (नर और मादा दोनों) एशियाई हाथियों की तुलना में काफी बड़े होते हैं। अफ्रीकी हाथी झुरीदार स्लेटी तत्व के साथ दो लम्बे दाँत और सूंड़ के अन्त में दो छिद्र रखते हैं। भारतीय या एशियन हाथी निकली हुई पीठ के साथ सूंड़ के अन्त में केवल छिद्र रखते हैं और अफ्रीकी हाथी की तुलना में बहुत ही छोटे होते हैं।

हाथियों की आयु

हाथी जंगलों में रहते हैं और आमतौर पर छोटी टहनियों, पत्तियों, भूसा, और जंगली फल खाते हैं, हालांकि पालतू हाथी रोटी, केले, गन्ने आदि भी खाते हैं। यह शाकाहारी जंगली जीव है। आजकल, ये लोगों के द्वारा भारी सामान को उठाने, सर्कस में, वजन उठाने, आदि के लिए प्रयोग किए जाते हैं। प्राचीन समय में, ये राजा, महाराजाओं द्वारा युद्धों और लड़ाईयों में प्रयोग किए जाते थे। हाथी की आयु काफी लंबी होती है और यह सौ वर्ष से भी अधिक समय तक जीवित रहता है। हाथी हमारे लिए मृत्यु के बाद भी काफी उपयोगी होता है, क्योंकि इसकी हड्डियों और दाँतों से कई सारी सजावटी वस्तुएं और दवाईयां भी बनाई जाती है।

निष्कर्ष

हाथियों का जीवन 100 साल से भी अधिक होता है। ये आमतौर पर जंगलों में रहते हैं तथापि, इन्हें सर्कस और चिड़ियाघर में भी देखा जा सकता है। ये 11 फिट की ऊँचाई और 5800 किलोग्राम वजन तक बढ़ते हैं। अभी तक का सबसे बड़ा हाथी 13 फिट और 1088 किलोग्राम वजन का मापा गया है। एक अकेला हाथी प्रतिदिन 180  किलोग्राम खाना और 113 लीटर पानी पी सकता है।


 

हाथी पर निबंध 6 (700 शब्द)

प्रस्तावना

एक हाथी बहुत चालाक, आज्ञाकारी और पृथ्वी के सबसे बड़ा स्तनधारी जीवों में से एक है। यह अफ्रीका और एशिया में पाया जाता है। आम तौर पर, यह ग्रे (स्लेटी/धूसर) रंग का होता है हालांकि, थाईलैंड में सफेद रंग का भी पाया जाता है। नर हाथियों के विपरीत मादा हाथियों को समूह में रहना पसंद होता है। हाथियों का जीवन 100 साल से भी अधिक होता है। ये आमतौर पर जंगलों में रहते हैं, लेकिन  इन्हें सर्कस और चिड़ियाघर में भी देखा जा सकता है। ये 11 फिट की ऊँचाई और 5800 किलोग्राम वजन तक बढ़ते हैं। अभी तक का सबसे बड़ा हाथी 13 फिट और 1088 किलोग्राम वजन का मापा गया है। एक अकेला हाथी प्रतिदिन 180 किलोग्राम खाना और 113 लीटर पाना पी सकता है।

हाथी का आकार

हाथी की त्वचा एक इंच मोटी होती है लेकिन इसके बावजूद भी यह काफी संवेदनशील जीव होते है। वे बहुत अधिक दूरी से लगभग 5 मील की दूरी से एक-दूसरे की आवाजो को सुन सकते हैं। नर हाथी वयस्क होते ही अकेले रहना शुरु कर देते हैं हालांकि, मादा हाथी समूह में रहती है (समूह की सबसे बड़ी मादा को कुलमाता कहा जाता है)। बुद्धिमत्ता, सुनने की अच्छी क्षमता और सूँघने की बेहतर क्षमता होने के बाद भी हाथी की देखने की क्षमता बहुत कमजोर होती है।

हाथी बच्चों को अपने रुचिकर दिखावट जैसे दो बड़े कान, दो लम्बे दाँत (लगभग 10 फिट लम्बे), स्तंभ की तरह चार पैर, एक बड़ी सूंड़, एक विशाल शरीर, दो छोटी आँखें, और एक छोटी पूँछ आदि के कारण बहुत ही आकर्षित लगता है। यह माना जाता है कि, इसके दाँत (टस्क) पूरे जीवन भर बढ़ते रहते हैं। सूंड़ खाना खाने, पानी पीने, नहाने, सांस लेने, सूँघने, वजन उठाने आदि के लिए प्रयोग किया जाता है। यह माना जाता है कि, हाथी बहुत ही चालाक होते हैं और जीवन में हुई किसी भी घटना को हमेशा याद रखते हैं। वे एक-दूसरे से बहुत ही धीमी आवाज में बात करते हैं।

हाथी स्तनधारी जीव

हाथी के बच्चे को कॉल्फ कहा जाता है। हाथी स्तनधारियों की श्रेणी में आते हैं, क्योंकि वे एक बच्चे को जन्म देते हैं और अपना दूध पिलाते हैं। एक हाथी का बच्चा अपनी माँ के गर्भ में लगभग 20 से 22 महीने में विकसित होता है। अन्य कोई भी बच्चा जन्म से पहले अपनी माँ के गर्भ में विकसित होने में इतना अधिक समय नहीं लेता है। एक मादा हाथी प्रत्येक चार या पाँचवें साल में एक समय में केवल एक ही बच्चे को जन्म देती है। वे 85 से.मी.(33 इंच) लम्बे और 120 किलो वजन वाले बच्चे को जन्म देती हैं। एक हाथी का बच्चा अपनी सूंड़ का प्रयोग करना लगभग एक साल से भी अधिक समय में सीखता है। हाथी का बच्चा प्रतिदिन 10 लीटर दूध पी सकता है। हाथियों पर अपने आकार, शिकार, बहुमूल्य आइवरी दाँत, आदि के कारण विलुप्त होने का संकट मंडरा रहा है। हमें इनकी प्रजाति को बचाने के लिए इनका संरक्षण करने की आवश्यकता है क्योंकि यह एक विलुप्तप्राय जीव हैं।

हाथियों के प्रकार

आमतौर पर, पृथ्वी पर दो तरह के हाथी पाए जाते हैं; अफ्रीकी (इसका वैज्ञानिक नाम लोक्सोडान्टा अफ्रीकाना है) और एशियन (इसका वैज्ञानिक नाम एल्फास़ मैक्सिम्स है)। इसके बड़े लटकते हुए कान पंखे और पैर स्तंभ की तरह लगते हैं। इसकी मुंह से जुड़ी हुई लम्बी सूंड़ होती है, जिसके दोनों ओर दो लम्बे सफेद दाँत होते हैं। हाथी की सूंड़ बहुत ही लचकदार और मजबूत होती है और बहु-उद्देश्य अंग के रुप में जानी जाती है। यह हाथी द्वारा खाना खाने, सांस लेने, नहाने, भावनाओं को व्यक्त करने, लड़ने आदि के लिए प्रयोग की जाती है।

अफ्रीकी हाथी आकार में एशियन हाथियों से थोड़े से बड़े और गहरे स्लेटी रंग के होते हैं। इसके दो प्रमुख कान होते हैं, जो आकार में पंखे की तरह दिखाई देते हैं। हाथी आमतौर पर, भारत, अफ्रीका, श्रीलंका, बर्मा, और थाइलैंड में पाए जाते हैं।

निष्कर्ष

कई सारे हाथियों को आज भी जंगलो से पकड़कर प्रशिक्षित किया जाता है लेकिन इन्हें पकड़ना एक बहुत ही मोहनती एवं कठिन कार्य है। यद्यपि हाथी एक शांत स्वभाव का जीव है, लेकिन जब इस पर को हमला करता है तो यह शत्रु के लिए खतरनाक हो जाते हैं। हाथी पकड़ने के लिए सामान्यतः बड़े जालों का प्रयोग किया जाता है। सर्कस में तमाशे दिखाने के लिए भी इनका प्रयोग किया जाता है और सर्कसों में इनकी सहायता से अनेक हैरतअंगेज करतब दिखाए जाते हैं। हालांकि ऐसे जगहों पर इन पर अनेक अत्याचार भी किये जाते हैं। अतः हमें इस विशालकाय और अनोखे जीव का सम्मान करना चाहिए और इनके खिलाफ होने वाले अत्याचार तथा कष्टदायी गतिविधियों को रोकने का प्रयास करना चाहिए।

 

 

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