प्रतिकूलता किसी व्यक्ति को कैसे बदल सकती है पर निबंध

प्रतिकूलता/मुसीबत मनुष्य के जीवन की वह स्थिति होती है, जो की असंभव चीजों को सम्भवता की ओर मोड़ देती है। हममें से कइयों ने अपने जीवन में ऐसा देखा और सुना होगा कि प्रतिकूलता ने उस व्यक्ति के भाग्य को बदल कर रख दिया। जबकि प्रतिकूल स्थिति होने के बावजूद किसी व्यक्ति को अधिक ऊंचाइयों पर पहुंचने की बात सुनते हैं तो यह बात हमें अधिक प्रोत्साहित करती है। किसी व्यक्ति के जीवन में अच्छा और बुरा वक्त आता रहता है, बुरे समय को ही हम जीवन की प्रतिकूल समय के रूप में जानते है।

इस निबंध में मैं इसी विषय के बारे में चर्चा किया है जो की आपकी सोच को अवश्य प्रभावित करेगा। यह निबंध छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित हो सकता है।

प्रतिकूलता किसी व्यक्ति को कैसे बदल सकती है पर दीर्घ निबंध (Long Essay on How Adversity can Change a Person)

Long Essay – 1500 Words

परिचय

पूरी दुनिया कई सफल हस्तियों से भरी पड़ी है। उनमें से ज्यादातर लोगों ने अपनी अपनी सफलता के पीछे एक ही प्रकार की पुरानी बातों को साझा किया है। जब हम उनकी सफलता की कहानियों को पढ़ते हैं, तो हमें उनके जीवन के उन दुःखद लम्हों का पता चलता है, जो की उनका जीवन प्रतिकूलताओं से भरा पड़ा था। जिसे लेकर उन्होंने अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर अपने जीवन की सर्वश्रेष्ठ उचाई तक पहुंचे है। आपने यह अवश्य ही सुना होगा "बिना कष्ट किये फल नहीं मिलता", यह बात जीवन में प्रतिकूल समय से लड़कर जीवन में सफलता की उचाईयों को प्राप्त करने का सन्देश देती है।

प्रतिकूलता क्या है?

नाम के अनुसार ही प्रतिकूलता मनुष्य के जीवन के प्रतिकूल स्थिति को परिभाषित करती है। यह हमारे जीवन की दर्दनाक और संघर्षों की स्थिति को दर्शाती है, लेकिन वास्तव में यह हमारे जीवन के वास्तविक तथ्यों से हमें अवगत कराती है। हममें से हर कोई जीवन में एक सुखद जिंदगी जीने का सपना देखता है, पर वास्तविक रूप में यह संभव नहीं होता है। जीवन में सुखद पलों के साथ दुःख का होना भी बहुत आवश्यक है। यही पल हमें जिंदगी का असल बोध कराती है। प्रतिकूलता किसी के जीवन में आ सकती है लेकिन इससे हमें कैसे निपटना चाहिए ये हम पर निर्भर करता है। कोई भी व्यक्ति जो जन्म से मानसिक या शारीरिक रूप से विकलांग होता है, उसे अपने जन्म से ही प्रतिकूलता का सामना करना पड़ता है। यह प्रतिकूलता उनके जीवन विरोध नहीं करती है बल्कि यह उनके जीवन में उन्हें प्रेरक शक्ति के रूप में सफल बनाने का काम करती है।

मैंने कई ऐसे विकलांग को देखा है जिन्होंने इस भौतिक प्रतिकूलता को एक चुनौती के रूप में लिया है, और उस प्रतिकूलता से लड़कर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सफलता को हासिल किया है। भारत में 2014 के यूपीएससी सिविल सेवा में परीक्षा की टॉपर इरा सिंघल इसका हालिया उदहारण है। वह 'स्कोलियोसिस' नामक विकलांगता से पीड़ित है, उन्होंने इस विकलांगता को कभी अपनी कमजोरी नहीं समझा और इससे लड़कर उन्होंने इस परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ स्थान को हासिल किया, जो की भारत की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। यह उनका आत्मविश्वास था की उन्होंने अपनी विकलांगता को अपनी कमजोरी नहीं समझा बल्कि उन्होंने इसे एक अवसर के रूप में लिया और वो उसमें सफल भी हुई।

प्रतिकूलता के विभिन्न प्रकार क्या है?

हममें से कोई भी ऐसा नहीं है जिनके जीवन में कठिनाइयां न हो। जीवन में ऐसी कई कठिनाइयां है, जो मनुष्य अपने पूरे जीवन के दौरान उसका सामना करता है। कुछ को ये हालात तोड़ देते है, तो कुछ को ये उचाईयों पर पहुंचा देती है। इन हालातों से कैसे पार पाना है यह व्यक्ति पर निर्भर करता है।

  • शारीरिक प्रतिकूलता

इस प्रकार की विकलांगता जन्म से शारीरिक रूप से होती है जो किसी बीमारी के कारण या जन्म से विकलांगता हो सकती है। कई प्रकार की शारीरिक विकलांगता किसी दुर्घटना के कारण भी हो सकती है।

  • मानसिक प्रतिकूलता

कुछ ऐसी घटनाएं होती है जो किसी मानसिक तनाव या मानसिक परिस्थिति में किसी व्यक्ति के शरीर और उसके हाव-भाव पर प्रभाव डालती है। इस प्रकार की प्रतिकूलता को मानसिक प्रतिकूलता कहते है। ऐसी प्रतिकूलता स्थाई या अस्थाई दोनों रूप में हो सकती है जो उस मनुष्य के सोचने समझने की क्षमता को कम कर देती है, और उन्हें शारीरिक रूप से भी प्रभावित करती है।

  • वित्तीय प्रतिकूलता

आजकल के जीवन में इस प्रकार की समस्या को आमतौर पर देखा जा सकता है, और इस समस्या का संबंध मुख्य रूप से धन से सम्बंधित होती है। इस प्रकार की समस्या से मनुष्य को भुखमरी और गरीबी जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।

  • भावनात्मक प्रतिकूलता

हमारी सोच और हमारे अंदर की भावनाएं हमारे काम करने के तरीकों और उसके परिणाम के रूप में देखने को मिलती है। काम में अत्यधिक भावुकता हमारे काम को प्रभावित करती है, और हमारे लिए समस्या पैदा कर सकती है।

  • आध्यात्मिक प्रतिकूलता

ऐसे मनुष्य जो भगवान या किसी अन्य पर विश्वास और भरोसा नहीं करते हैं उनके अंदर नकारात्मकता अत्यधिक होती है। इसी नकारात्मक भावनाओं के कारण उन्हें अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना कारन पड़ता है।

  • सामाजिक प्रतिकूलता

समाज से सम्पर्क बनाकर रखना हमें सामाजिकता का अनुभव कराती है। ऐसे लोग जो समाज से दूर रहते है और खुद को अकेला रखते है, ऐसे व्यक्ति खुद को बहुत अकेला महसूस करते है और आगे चलकर अवसाद के मरीज हो जाते हैं।

जीवन में प्रतिकूलताओं से जीतना

वास्तव में ऐसा कहा जाता है कि हर व्यक्ति अपने भाग्य का खुद ही जिम्मेदार है। प्रतिकूलताएं हमारे जीवन की ऐसी परिस्थिति होती हैं जो हमें अपने जीवन में कुछ करने का मौका देती हैं। प्रतिकूलता हमारे जीवन में बता कर नहीं आती है, यह कभी भी किसी भी समय आ सकती है। कुछ ऐसे भी व्यक्ति है जिनके जीवन में प्रतिकूल परिस्थिति आने पर वह उसे दुर्भाग्य कहकर हमेशा रोते रहते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी व्यक्ति है जो इस प्रतिकूलता को एक अवसर के रूप में लेते हैं। केवल इंसान ही ऐसा हैं जो कि प्रतिकूलताओं को एक अवसर में बदल सकता हैं। प्रतिकूलता व्यक्ति के अंदर छिपी प्रतिभा और उन्हें उनकी ताकत का एहसास कराती है और इसी प्रतिभा और ताकत के सहारे उन्हें अपने कार्य करने और उसमें सफल होने की प्रेरणा देती हैं।

हममें से अधिकांश लोग प्रतिकूलता के आने से घबरा जाते हैं और इसे भाग्य का दिया कहकर नकारात्मकता के साथ जीते हैं। पर यह सच नहीं है, हम अपने कार्य, मेहनत और कठिन परिश्रम से प्रतिकूलता को भाग्य के अवसर के रूप में बदल सकते हैं। यह प्रतिकूलता हमें अपने जीवन में बहुत ही प्रोत्साहित करती हैं। यही प्रोत्साहन हमारे अंदर सकारात्मकता पैदा करती है और इसके माधयम से हम अपने जीवन की प्रत्येक विपरीत परिस्थितियों से लड़ने में मदद मिलती हैं। यह हमारे जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या से लड़ने के लिए हमें आतंरिक रूप से मजबूत करती है।

प्रतिकूलताएं हमारे जीवन का महत्वपूर्ण मोड़

दुनिया में कई ऐसी जानी-मानी हस्तियां हैं जिन्हें कभी अपने अंदर की क्षमताओं का एहसास नहीं हुआ होता अगर उनके जीवन में प्रतिकूलता नहीं आई होती। उन्होंने अपनी प्रतिकूलताओं से लड़ कर अपने अंदर की शक्ति के कारण अपने जीवन में सफलता प्राप्त की और एक अलग नई पहचान बना कर एक नवरत्न की तरह चमके।

महात्मा गांधी नाम सारी दुनिया में एक जाना-माना नाम है। गांधी जी के पास सब कुछ था पर उन्हें उनकी क्षमता और अच्छे गुणों के कारण वह दुनिया भर में एक महान नेता होंगे ये बात उन्हें पता न था। दक्षिण अफ्रीका में उनके साथ हुआ अन्याय प्रतिकूल समय था। जिसका उन्होंने बहुत ही दृढ़ता के साथ सामना किया और इसी दृढ़ता और आत्मशक्ति ने उन्हें एक दिन दुनिया के सबसे महान नेताओं में से एक बना दिया। प्रतिकूल परिस्थितियां हमारे जीवन की ऐसी परिस्थितियां होती है जो हमारे प्रयास और आत्मविश्वास से उस परिस्थिति से लड़ने की क्षमता, एक नए राह की ओर मोड़ देती है।

आज कोविड-19 महामारी के दौरान सारी दुनिया की स्थिति बहुत ही प्रतिकूल स्थिति है। इस महामारी ने लोगों को पर्यावरण के प्रति किये लापरवाही का एहसास कराया है। इसने मानव जाती को सबक दिया हैं और दूसरी तरफ कई नयी संभावनाओं को भी जन्म दिया है। हमारा जीवन वैसे तो बहुत आसान लगता है, जब तक की हम जीवन में किसी प्रतिकूलता का सामना नहीं करते। वास्तविक रूप से यह हमें अपने जीवन में अवसर और सफल बनाने की शक्ति देने का काम करता है।

प्रतिकूलता एक व्यक्ति को कैसे बदल सकती है?

प्रतिकूलता व्यक्ति के चरित्र को बदलने की क्षमता रखता है। यह लोगों को उनके जीवन में आई परेशानियों और कठिनाइयों से लड़ने का साहस और उनके अंदर के आत्मविश्वास को उजागर करता है। इसके द्वारा व्यक्ति जीवन के महत्त्व को अच्छी तरह से समझ सकता है। जिस प्रकार धातुओं में चमक लाने के लिए उन्हें कई शुद्धिकरण प्रणाली से होकर गुजरना पड़ता है उसी तरह व्यक्ति के अंदर की क्षमता को चमकाने के लिए प्रतिकूलता की अत्यंत आवश्यकता होती है जो उन्हें सफलता के साथ उन्हें उचाईयों तक ले जाती हैं।

भारत के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का प्रारंभिक जीवन दुखों से भरा पड़ा था। बचपन से ही गरीबी और वित्तीय प्रतिकूलताओं का सामना करते हुए उन्होंने अपनी हिम्मत और उम्मीद नहीं खोयी। उनकी हिम्मत और उनके आत्मविश्वास ने उन्हें जीवन में हर प्रतिकूल परिस्थिति जीत दिलाने में मदद की और आज वह पूरे देश और दुनिया के लिए एक मिशाल के तौर पर हैं।

प्रतिकूलता हमें जीवन का असल पाठ पढ़ाती है। जीवन के हर मुश्किलों और कठिनाइयों से लड़ने की साहस और आत्मिविश्वास पैदा करती है। जीवन में हमें चाहिए कि हम प्रतिकूलता को स्वीकार करें और उसके साथ अपन जीवन जिएं। ऐसी परिस्थिति में दूसरों को कोषने के बजाय उसका हल निकालने की आवश्यकता है। जिस प्रकार से हम अपने जीवन में प्रतिकूलता का समाधान करते है, वही हमारी क्षमता और साहस का परिचय देती है। बेशक यह कहा जा सकता है की प्रतिकूलता किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकता है यदि वह व्यक्ति बेहतर तरीके से इससे पार पाने की क्षमता अपने अंदर रखता हो।

निष्कर्ष

हम सभी को अपने जीवन में प्रतिकूलता को सकारात्मकता के साथ स्वीकार करना चाहिए। इसके द्वारा ही हमें जीवन का वास्तविक अनुभव प्राप्त होता है। इससे हमारी बौद्धिक क्षमता और हमारी परिपक्वता का भी पता चलता है और इससे हमारा आत्मविश्वाश और अधिक मजबूत होता है। वास्तव में प्रतिकूलता एक अवसर की तरह है जो हमें वास्तविक होने का अनुभव कराती है।