नदियों में बढ़ रहे प्रदूषण पर निबंध

प्राचीन काल से ही भारत नदियों का देश रहा है, भारत की भूमि में नदियाँ ऐसे बिछी हैं जैसे मानो शरीर में नसें, नसों में बहने वाला खून तथा नदियों में बहने वाला पानी दोनों ही जीवन के लिए उपयोगी होते हैं। नदियों ने ही विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं को अपने गोद में रखकर पाला था, जिनकी गौरव गाथाएं आज भी इतिहास बड़े गर्व से गाता है।

सैकड़ों सभ्यताओं की जन्मदात्री, ऋषि-मुनियों कि अराध्य देवी, जीव-जन्तु तथा वनस्पतियों के जीवन का आधार होने के बाद भी वर्तमान समय में नदियों का जो हाल है, वो मानव के लज्जाहीन एवं एहसान फरामोश होने के साथ-साथ भविष्य से अनभिज्ञ होने का भी संकेत देता है।

नदियों में बढ़ रहे प्रदूषण पर छोटे और बड़े निबंध (Short and Long Essay on Increasing Pollution in Rivers in Hindi)

यहाँ मैं निबंध के माध्यम से आप लोगों को नदी प्रदूषण के बारे में कुछ जानकारियां दूँगा, मुझे पूर्ण आशा है कि इनके माध्यम से आप नदियों के प्रदूषित होने के कारण, उनके निवारण तथा उसके प्रभाव को भलि- भाँति समझ सकेंगे।

300 Words Essay – Short Essay on Increasing Pollution in Rivers

प्रस्तावना

(जल प्रदूषण का अर्थ - Meaning of River Water Pollution)

नदी जल प्रदूषण से हमारा तात्पर्य, घरों से निकलने वाला कूड़ा-कचरा, उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्टों, नदी में चलने वाले वाहन के अपशिष्टों एवं उनके ऱासायनिक रिसाव आदि का जल में मिलकर उसको दूषित करने से है। नदियों के दूषित जल में आक्सीजन की कमी हो जाती है जिसके कारण यह जलीय जीवों के साथ-साथ जैव विविधता के लिए भी अत्यधिक घातक सिद्ध होता है। इसमें उपस्थित विभिन्न औद्यौगिक रासायन सिंचाई के माध्यम से कृषि भूमि की उर्वरा क्षमता को भी घटा देते हैं।

नदियों के प्रदूषण के कारण (Causes of River Pollution)

नदी प्रदूषण के लिए वर्तमान समय में निम्नलिखित कारक उत्तरदायी है-

  • घरों से निकलने वाला गंदा पानी छोटे-छोटे नालियों के सहारे नालों में जाकर मिलता है और ये नाले घरों का सारा गंदा पानी इक्ट्ठा करके नदियों में गिरा देते हैं।
  • उद्योगों से निकलने वाले कूड़े-कचरे एवं रासायनिक अपशिष्टों का निपटारा भी इन्हीं नदियों में ही किया जाता है।
  • अम्लीय वर्षा, पर्यावरण प्रदूषण के कारण जब वायुमण्डल में सल्फर डाइआक्साइड (SO2 ) तथा नाइट्रोजन डाइआक्साइड (NO2) की मात्रा बढ़ जाती है तो ये वायुमण्डल में उपस्थित जल कि बूंदो के साथ अभिक्रिया करके अम्ल का निर्माण करती है तथा वर्षा के बूंदो के साथ धरातल पर गिरती है और नदी तथा झीलों आदि के जल को प्रदूषित कर देती है। इत्यादि
  • नदियों को प्रदूषित होने से बचाने के उपाय (Measures to Save Rivers from Getting Polluted)

नदियों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिए

  • कृषि, घरों, तथा उद्योगों के बेकार पानी को एकत्रित करके उनके पुनरूपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  • वायु प्रदूषण को नियंत्रित करके अम्ल वर्षा में कमी लाई जा सकती है जिसके फलस्वरूप नदी प्रदूषण में भी कमी आयेगी।
  • उद्योगों का निर्माण उचित स्थान पर तथा उनके अपशिष्टों के लिए उचित प्रबंध होना चाहिए।। ै ै

निष्कर्ष

नदियों का समस्त जीवित प्राणियों के जीवन में अपना एक महत्व है। मानव इसके जल का उपयोग सिंचाई एवं विद्युत उत्पादन में, पशु-पक्षी इसके जल का उपयोग पीने में तथा जलीय जीव इसका उपयोग अपने आवास आदि के रुप में करते हैं। परन्तु वर्तमान समय में नदियों के जल को प्रदूषित होने से, इसका उपयोग करने वाले जीवों के जीवन में काफी बदलाव आया है। जैसे- सिंचाई से भूमि की उर्वरा क्षमता में ह्रास एवं इसके उपयोग से बिमारियों में वृद्धि आदि। नदियों की उपयोगिता को देखते हुए अगर कोई उचित कदम नहीं उठाया गया तो इनका बढ़ता प्रदूषण मानव सभ्यता पर बिजली बनकर गिरेगा और सब कुछ जलाकर राख कर देगा।

600 Words Essay - Long Essay on Increasing Pollution in Rivers

प्रस्तावना

प्राचीन काल से अब तक मानव तथा अन्य स्थलीय एवं जलीय जीवों के लिए नदियों का महत्व बढ़ता ही गया और साथ-साथ इनके जलों का प्रदूषित होना भी जारी रहा। आज स्थिति यह है कि प्राचीन काल में जिन नदियों को जीवन का आधार समझा जाता था वो अब धीरे-धीरे रोगों का आधार बनती जा रही हैं और यह सब उनमें बढ़ रहे प्रदूषण के कारण है।

नदी प्रदूषण को अगर परिभाषित करना हो तो हम कह सकते हैं कि नदी जल में घरेलू कूड़ा-कचरा, औद्यौगिक रसायनों तथा जलीय वाहन के अपशिष्टों आदि का मिलना ही नदी जल प्रदूषण कहलाता है।

नदी जल प्रदूषण के प्रकार (Kinds of River Water Pollution)

नदी जल प्रदूषण को निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है-

  1. भौतिक जल प्रदूषण- जब जल का स्वाद, गन्ध तथा उष्मीय गुण परिवर्तित हो जाए तो इस प्रकार का प्रदूषण भौतिक जल प्रदूषण कहलाता है।
  2. रासायनिक जल प्रदूषण- जब जहाजों तथा उद्योगों आदि के अपशिष्ट एवं रासायनिक पदार्थ जल में मिल जाते हैं तो इस प्रकार के प्रदूषण को रासायनिक प्रदूषण कहते हैं।
  3. जैविक जल प्रदूषण- जब जल के दूषित होने के लिए हानिकारक सुक्ष्म जीव उत्तरदायी हों तब इस प्रकार के प्रदूषण को जैविक जल प्रदूषण कहते हैं।

नदी प्रदूषण के कारण (Causes of Rivers Pollution)

नदी प्रदूषण निम्नलिखित दो स्रोतों से होता है -

1- प्राकृतिक स्रोत

  • बरसात के मौसम में विभिन्न प्रकार के भू-खण्डों से होते हुए वर्षा का जल अपने साथ अनेक प्रकार के प्राकृतिक पदार्थों (जैसे- खनिज, लवण, ह्यूमस, पौधों की पत्तियाँ तथा जीवित प्राणियों के मल-मूत्र आदि) को लाता है जो जल में मिलकर उसको प्रदूषित कर देते हैं।
  • अम्लीय वर्षा में बारिश के बूंदों के साथ बरसने वाला अम्ल नदियों के जल में मिलकर उसे प्रदूषित कर देता है।

2- मानवीय स्रोत

इसके अन्तर्गत नदी प्रदूषण के वो कारक आते हैं जो मानवीय गतिविधियों द्वारा उत्पन्न होते हैं। जैसे-

  • घरेलू बहिःस्राव नालों के माध्यम से नदी में गिरते हैं और उसके जल को प्रदूषित कर देते हैं।
  • उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों का निपटारा भी नदियों में ही किया जाता है।
  • खेतों में प्रयोग होने वाले रासायन वर्षा के समय बहकर नदियों में मिल जाते हैं, जिससे नदी प्रदूषण बढ़ता है।
  • जहाजों से जो तेल का रिसाव होता है वह भी नदी को प्रदूषित करता है।
  • सामाजिक एवं धार्मिक रीति-रिवाज भी नदी प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं।

जैसे- मृत्यु के बाद शव को पानी में बहाना, मूर्तियों का विसर्जन, स्नान आदि।

  • यूट्रोफिकेशन (सुपोषण), इसका तात्पर्य है जल को पोषक तत्वों से परिपूर्ण करना। इस क्रिया में पौधों एवं शैवालों का जल में विकास होता है तथा बायोमास की उपस्थिति इसमें पहले से ही होती है। ये सभी मिलकर जल में घुलनशील आक्सीजन को अवशोषित करने लगते हैं, जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर खतरा मंडराने लगता है।

नदी जल प्रदूषण के रोकथाम व उपाय (Prevention and Measures of River Water Pollution)

वर्तमान में पूरा विश्व प्रदूषित जल की चपेट में है, चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है, जनता तथा सरकारें मिलकर इससे लड़ने को प्रयासरत हैं। हालांकि इसे पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता परन्तु कुछ उपायों के माध्यम से इसपर अंकुश जरूर लगाया जा सकता है, जो निम्नलिखित है-

  • घरेलू अपशिष्टों एवं गंदे जल को नालों में बहाने पर प्रतिबंध तथा जल संरक्षण तकनीक के द्वारा इसके पुनः उपयोग को बढ़ावा देना।
  • नदी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार औद्योगिक इकाईयों के लिए कड़े नियम बने एवं उनका कठोरता से पालन हो।
  • पर्यावरण प्रदूषण को कम करके।
  • सामाजिक एवं धार्मिक रूढ़ियों पर आघात करके।
  • जैविक खेती को प्रोत्साहित करके। इत्यादि

नदी प्रदूषण का जलीय जीवों व आस पास के लोगों के जीवन पर प्रभाव (Effect of River Pollution on the Life of Aquatic Organisms and People Around)

नदियों के जल में उपस्थित प्रदूषण के कारण मछलियाँ रोग ग्रसित हो जाती है जिसके कारण अधिकांश मछलियाँ मर जाती है। यहीं हाल जल में पाए जाने वाले अन्य जीवों एवं वनस्पतियों का भी होता है। नदियों का बढ़ता प्रदूषण जलीय पारिस्थितिकी (AquaticEcosystem) के संतुलन को बिगाड़ रहा है, जिससे जुड़े रोजगार एवं करोड़ों उपभोक्ता भी प्रभावित हो रहे हैं। किसी का रोजगार खतरे में है तो किसी का स्वास्थ्य खतरे में है।

दूसरी तरफ ध्यान दें तो पता चलेगा की नदी प्रदूषण से किसान भी परेशान है, क्योंकि नदी के जल से सिंचाई करने पर उसमें उपस्थित रासायनिक प्रदूषकों के कारण मिट्टी की उर्वरा क्षमता भी प्रभावित होती है। जिसके कारण उत्पादन में कमी आती है और किसानों की परेशानियों में वृद्धि होती है। अप्रत्यक्ष रूप से ही सही नदी प्रदूषण ने सभी जीवित प्राणियों को प्रभावित किया है।

नदी प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम (Steps taken by the Government to Stop River Pollution)

समय-समय पर भारत सरकार ने नदियों के सफाई के लिए कदम उठाए हैं, जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण कदम निम्नलिखित हैं-

  • पर्यावरण और वन मंत्रालय के द्वारानदी प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क (Water Quality Monitoring & Surveillance) की स्थापना की गई है, जिसके तहत देश भर के विभिन्न नदियों एवं जल निकायों पर निगरानी के लिए 1435 निगरानी केंद्र बनाये गए हैं।
  • नमामि गंगे परियोजना (Namami Gange Programme)

इस परीयोजना की शुरुआत वर्ष 2014 में गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से की गई थी। इस परियोजना का क्रियान्वयन गंगा कायाकल्प मंत्रालय, केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय तथा नदी विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।

  • स्वच्छ गंगा परियोजना (Clean Ganga Project)

2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लागू की गई स्वच्छ गंगा परियोजना, कार्य योजना आदि के आभाव असफल रहीं।

निष्कर्ष

उपरोक्त तमाम बातें वनस्पतियों, जीव-जन्तुओं तथा मानव जीवन में नदियों के महत्व को उजागर करती हैं एवं साथ ही इनके सम्मान पर चल रहे प्रदूषण रूपी तलवार की भी व्याख्या करती हैं। जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि मानव ने अपने विकास के लिए जो भी कदम उठाए हैं उसने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नदियों के जल को प्रदूषित किया है। धीरे-धीरे लोग इसके प्रति जागरुक हो रहे हैं, सरकारों ने भी नदी प्रदूषण से लड़ने के लिए कमर कस लिया है। परन्तु ऐसा लगता है कि ये सारे प्रयास कागजों तक ही सीमित है, वास्तविकता से इनका कोई नाता नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

प्रश्न.1 केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board- CPCB) का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

उत्तर- नई दिल्ली (New Delhi)

प्रश्न.2 जल प्रदूषण को कैसे मापा जाता है?

उत्तर- हवाई रिमोट सेंसिंग द्वारा। (Aerial Remote Sensing)

प्रश्न.3 भारत के केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का गठन कब हुआ था?

उत्तर- सितम्बर, 1974

प्रश्न.4 विश्व की सबसे प्रदूषित नदी कौन सी है?

उत्तर- सीतारुम नदी (Citarum River), इंडोनेशिया