पर्वतारोहण पर निबंध

“अभी तो इस बाज की असली उड़ान बाकी है।

अभी तो इस परिंदे का इम्तिहान बाकी है।

अभी-अभी तो मैने लांघा है समुन्दर को,

अभी तो पूरा आसमां बाकी है।” - अरुणिमा सिन्हा

पहाड़ की चढ़ाई कई लोगों के शौक के वरीयता सूची में रहता है। यह एक ऐसी गतिविधि है जिसे बहुत ही रोमांचक और साहसिक माना जाता है। इसके अलावा, यह एक ऐसी गतिविधि है जिसे दुनिया भर के लोगो द्वारा पसंद किया जाता है।

पर्वतारोहण पर छोटे-बड़े निबंध (Short and Long Essay on Mountain Climbing in Hindi)

निबंध – 1 (300 शब्द)

परिचय

वास्तव में पहाड़ पर चढ़ना बहुत ही दिलचस्प माना जाता है। पहले के लोगों को इसे पूरा करने में बेहद कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था; हालाँकि, अब ऐसा नहीं है। हाँ, यह अब भी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उतना चुनौतीपूर्ण नहीं है जितना पहले हुआ करता था। आधुनिक उपकरणों और प्रौद्योगिकी ने इसे आसान बना दिया है।

पर्वतारोहण – साहस और दृढ़ता का परिचायक

जीवन-स्वभाव के लिए एक बहुआयामी विविधता प्रदान करता है। कुछ लोग इस खतरनाक उद्यम से मोहित हो जाते हैं। पर्वतारोहण ऐसे पुरुषों से अपील करता है जो साहस, दृढ़ता और धीरज की शक्तियों पर खरे उतरे।

खतरनाक खेल

यह एक खतरनाक खेल है जिसे नकारा नहीं जा सकता। जैसे-जैसे कोई ऊंचा चढ़ता जाता है, हवा और अधिक कठोर होती जाती है और ऑक्सीजन की कमी के कारण सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसे कम करने के लिए कुछ पर्वतारोही अब एक ऑक्सीजन सिलेण्डर ले जाते हैं, जिससे वे ऑक्सीजन को ग्रहण कर सकते हैं।

दुर्गम पथ

पर्वतारोही को यह वास्तव में खतरनाक लगता है क्योंकि किसी भी समय वह ठोकर खा सकता है या फिसल सकता है और नीचे की ओर दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है। उच्च ऊंचाई पर असहनीय ठंड एक बड़ी कठिनाई है जिसका सामना पर्वतारोहियों को करना पड़ता है।

जीरो से भी नीचे तापमान

ठंड इतनी खतरनाक होती है कि पर्वतारोहियों के पैर और पैर की उंगलियां ठिठुरते हैं, और बेकार हो जाते हैं। हिमस्खलन के कारण कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। फिर भी लोगो की हिम्मत को नहीं डिगा पाया।

यह वास्तव में अद्भुत है कि इतने खतरों और कठिनाइयों के बाद भी यह अजेय नहीं है। पर्वतीय चोटियों और शिखर को विभिन्न चढ़ाई अभियानों द्वारा जीत लिया गया है।

निष्कर्ष

पहाड़ की चढ़ाई विशेष ज्ञान, कौशल और उपकरणों का अनुरोध करती है। पर्वतारोहियों को अच्छी शारीरिक स्थिति में होना चाहिए और उनका निर्णय उचित होना चाहिए। यहां तक ​​कि कई कुशल पर्वतारोहियों ने चुनौतीपूर्ण चोटियों पर विजय प्राप्त करने की कोशिश में अपना जीवन खो दिया है।

निबंध – 2 (400 शब्द)

परिचय

पहाड़ पर चढ़ना एक प्राणपोषक, पुरस्कृत और जीवन बदलने वाला अनुभव हो सकता है। यद्यपि पहाड़ पर चढ़ना जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हो सकता है, यह मनोरम दृश्यों से अधिक है। शिखर तक पहुंचने की संतुष्टि और एक सच्चे एडवेंचर का अनुभव, शब्दों में बयां कर पाना असंभव है।

पर्वतारोहण - एक जुनून

यह एक जुनून है। पहाड़ पर चढ़ना जान जोखिम में डालने जैसी चुनौती है, जिसमें खतरा और कठिनाई शामिल है। पहाड़ पर चढ़ना हर किसी के बस की बात नहीं है, हालांकि कुछ लोग इसे अप्रतिरोध्य मान सकते हैं, साथ ही निराशा और कभी-कभी घातक भी। पहाड़ पर चढ़ना किसी भी शगल या खेल से कहीं अधिक है। बिना जुनून के आप इतना बड़ा फैसला ले ही नहीं सकते।

कौशल की आवश्यकता

एक पहाड़ का दूर का दृश्य रोमांच की बात कर सकता है, लेकिन पहाड़ केवल खुशियों और पहाड़ पर चढ़ने की जद्दोजहद पर ही इशारा नहीं करते हैं। एक पहाड़ पर चढ़ने से पहले बहुत तैयारी, ज्ञान और कौशल प्राप्त करना होता है। पहाड़ पर चढ़ने का वातावरण मानवीय जरूरतों के हिसाब से नहीं होता है और हर कोई इसके लिए तैयार नहीं हो सकता है।

अलग-अलग प्रकार की चढ़ाई

कई अलग-अलग प्रकार की चढ़ाई होती हैं। निचली ऊंचाई के पहाड़ों पर लंबी पैदल यात्रा, मध्यम ऊंचाई के पहाड़ों पर पारंपरिक चढ़ाई, पहाड़ों की चट्टान की दीवारों को स्केल करना, बर्फ पर चढ़ना, ग्लेशियरों पर चढ़ना और अल्पाइन ट्रेकिंग करना शामिल है।

विविध उपकरणों की आवश्यकता

जैसे-जैसे ऊँचाई बढ़ती जाती है चढ़ाई के लिए अतिरिक्त उपकरणों की आवश्यकता पड़ने लगती है। जैसे कि एक कुल्हाड़ी, रस्सियाँ, कैराबाईनर आदि। ग्लेशियरों या बर्फ पर चलने के लिए या रॉक क्लाइम्बिंग के लिए बूट जोकि धातु की प्लेट से बनी होती है, ऊपर चढ़ने और चलने में मदद करती है और फिसलने से बचाती है। साथ ही गैटर (विशेष किस्म का परिधान) का उपयोग करना आवश्यक होता है।

कुल्हाड़ी, चढ़ाई करते वक़्त, एक अमूल्य उपकरण है। इसका उपयोग अतिरिक्त संतुलन के लिए किया जाता है। ऊपर चढ़ते समय यह बर्फ पर पकड़ बनाने में मदद करता है और फिसलने से बचाता है।

निष्कर्ष

पहाड़ पर चढ़ना एक अदम्य साहस का काम है। सच है, यह नसों में उबाल लाने जैसा अनुभव है। जाऩ का ख़तरा होने के बाद भी लोग ऐसा करने की सोच लेते है। बहुतों ने पर्वत पर चढ़ने के दौरान अपनी जान गवांई है। लेकिन अगर जीवन में कुछ कर गुजरने का जज्बा और जुनून हो, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।

‘अरुणिमा सिन्हा’ पर्वतारोहण की जीवंत उदाहरण है। माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली दिव्यांग भारतीय है। बिना इनकी चर्चा के पर्वतारोहण का अध्याय अधूरा है।

निबंध – 3 (500 शब्द)

परिचय

पर्वतारोहण सबसे साहसिक खेलों में से एक है जो रग-रग में जोश भर देता है। लोग इस गतिविधि में रोमांच और आनंद का अनुभव करते हैं। इसके अलावा, यह अपने आप को फिर से जीवंत करने के लिए यह एक शानदार गतिविधि भी है। पर्वतारोहण एक अभियान है जो आपको प्रकृति के करीब लाता है और आपको इसके साथ जुड़ने में मदद करता है।

रोमांच का पर्याय

यह रोमांच का दूसरा नाम है। इन सबसे ऊपर, लोग नए रिकॉर्ड बनाने या पुराने लोगों के रिकार्ड को तोड़ने के लिए भी पहाड़ की चढ़ाई करते हैं। लेकिन, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि उनमें से अधिकांश इसे केवल अनुभव और रोमांच के लिए करते हैं। यह व्यक्ति के लिए बहुत सारी चुनौतियाँ पेश करता है लेकिन फिर भी यह लोगों को आगे बढ़ने से नहीं रोकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यहां जो उत्साह मिलती है, वह कहीं और नहीं मिलती।

एक चुनौतीपूर्ण अनुभव

लोगों को यह भी पता करना होता है कि, पहाड़ पर चढ़ाई का समय सही है भी या नहीं। हालांकि, यह काफी चुनौतीपूर्ण भरा हैं। यह सच में जीवन में परिवर्तन ला देता है। पहाड़ पर चढ़ने का फैसला बहुत बड़ा होता है। चढ़ने से पहले और बाद के बीच का सफर बहुत ही क्रांतिकारी होता है। जाते वक़्त पता नहीं होता है कि जो इंसान पर्वतारोहण के लिए जा रहा है, वो लौट कर आएगा भी या नहीं। उनके घरवाले बस उनके जीवित लौटने की ही दिन-रात प्रार्थना करते हैं।

डर पर काबू

एक व्यक्ति जो पहाड़ पर चढ़ने का फैसला करता है, वह पहले ही खुद को पूरी तरह से तैयार कर चुका होता है और अपने डर पर काबू पा लेता है। यह एक ऐसी गतिविधि है जो चुनौतियों का सामना करने और हमारे डर पर काबू पाने, के बारे में बहुत कुछ सिखाता है। अन्ततः यह हमें मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से मजबूत बनाता है।

सबसे खतरनाक एडवेंचर

सबसे खतरनाक चीजों में से एक, निश्चित रूप से पहाड़ की चढ़ाई है। इस चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा करने में सक्षम होने के लिए बहुत अधिक साहस और धीरज रखने की शक्ति होनी चाहिए।

पर्वतारोही भी शीतदंश से पीड़ित होता है और उनके पैर की उंगलियां और हाथों की उंगलियां सुन्न हो जाती हैं। किसी को सही निर्णय लेने का कौशल भी होना चाहिए और यह जानना भी आवश्यक होता है कि मानचित्र का सही उपयोग कैसे करें।

साथ ही लोगों को खड़ी चट्टान के स्वरुप को भी मापना पड़ता है। गीली चट्टानों पर फिसलने का भी खतरा होता है। इसके बाद, अतिरिक्त कपड़े और उपकरण जो उन्हें अपनी पीठ पर ले जाने होते हैं, जो उनकी चढ़ाई को अधिक चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा बनाते हैं।

निष्कर्ष

यह वास्तव में एक जीवन-मरण का अनुभव है क्योंकि इसको करते समय बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सबसे पहले, आप सांस लेने में तकलीफ का सामना करते हैं क्योंकि जितनी अधिक ऊँचाई पर जाओ, हवा उतनी ही कम और दुर्लभ होती जाती है। उसके बाद, हमेशा गिरने या फिसलने का खतरा होता है। हर दूसरा पल मौत के करीब नज़र आता है।

इसके अलावा, ठंड का मौसम इसे बद से बदतर बना देता है। फिर भी लाखों चुनौती के बावजूद हर साल भारी संख्या में लोग साहसिक रोमांच के लिए पर्वतारोहण करते हैं और आगे भी करते रहेंगे।