मेरे पसंदीदा नेता पर निबंध

इस दुनिया में सभी एक समान होते है, पर वो अपनी खूबियों या अपनी विशेषताओं के साथ इस जहाँ में अपनी अलग पहचान बनाते है। ऐसे व्यक्ति कुछ विशेष और अद्वितीय गुणों को साथ में लेकर पैदा होते है। सबकी अपनी एक अलग पसंद होती है, हर किसी के रहने, खाने, सोचने इत्यादि भिन्न होते है। मुझे कुछ और तो आपको कुछ और पसंद होगा। मगर हम एक नेता के पसंद की बात करें तो हर किसी के दिमाग में अपने पसंदीदा नेता की तस्वीर बन गयी होगी। वो ऐसा नेता होगा जो आपके दिल, मन और दिमाग को बहुत ही प्रभावित करता होगा। बात अपने सबसे पसंदीदा नेता की करें तो मेरे सबसे प्रिय नेता है "श्री लाल बहादुर शास्त्री"।

मेरे पसंदीदा नेता पर दीर्घ निबंध (Long Essay on My Favourite Leader in Hindi)

Long Essay – 1700 Words

परिचय

कोई भी नेता विशेष व्यक्तित्व के साथ पैदा होता है। उनके अंदर कुछ ऐसे गुण निहित होते है जो उन्हें दूसरों से अलग बनाते है। एक नेता अपने विशेष गुणों और व्यक्तित्व के साथ ही हमें प्रेरित करता है। वे हमें हर क्षेत्र में दूसरों से अलग और बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है।

हम सब उनके व्यक्तित्व, उनके बोलने के तरीके, काम करने के तरीके इत्यादि से प्रभावित होते हैं। उनके शब्दों में हमें एक अलग ही जोश दिखाई देता है। इस कारण से हम उनका अनुसरण करते है और हम उन्हें अपना नेता मानते है। भारत दुनिया में एक ऐसा महान देश है जहां कई ऐसे नेता हुए है जिन्होंने अपने काम के द्वारा दुनिया भर में भारत का सर गर्व से ऊँचा किया है। ऐसे नेता न केवल भारत के लोगों बल्कि पूरी दुनिया को अपने कार्यों से हमेशा प्रेरणा देते है।

श्री लाल बहादुर शास्त्री - एक महान भारतीय नेता

लाल बहादुर शास्त्री ने दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में भारत की सेवा की है। प. जवाहर लाल नेहरू की अकस्मात मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री जी को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया था। लाल बहादुर शास्त्री बहुत ही महान और देशभक्त नेता थे। सन् 1964 में प्रधानमंत्री की शपथ के साथ ही, अपनी छोटे से कद की पहचान एक ऐसे महान नेता के रूप में की जिसे लोग 'भारत के लाल' के नाम से भी पुकारते थे। इससे पहले शास्त्री जी ने पुलिस मंत्री, परिवहन मंत्री और रेल मंत्री बनकर देश की सेवा की थी। इन्होने गृहमंत्री पद की शोभा को भी गौरवांगीत किया।

इनके दृढ़ निश्चय, धैर्य, ईमानदारी, कर्मठता और अपने कुशल नेतृत्व गुणों के कारण ही पूरे विश्व भर में उन्हें पहचान मिली। वे बड़े ही सादगी पसंद व्यक्तित्व वाले इंसान थे, अपनी सादगी के साथ किसी मुद्दे का समाधान वो बहुत ही चतुराई से करते थे। एक छोटे से परिवार में पैदा हुए लाल बहादुर शास्त्री जी गरीबों और उनके दुखों को बहुत ही अच्छे से समझते थे और उसका हल जनता के हित में होता था।

एक सक्रिय राजनेता और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने पूरे राष्ट्र से गरीबी और गरीबों के उत्थान के लिए हमेशा ही प्रयत्नशील रहे थे। लाल बहादुर शस्त्री जी एक छोटे परिवार में पैदा हुए थे। गरीबी क्या होती है, इसको उन्होंने बहुत करीब से महसूस किया था। बचपन में ही अपने पिता की मृत्यु के बाद उनको और उनके परिवार को इस गरीबी से जूझना पड़ा था।

राष्ट्रवाद की भावना लाल बहादुर शास्त्री में बचपन में ही आ गई थी। वह कम उम्र से ही आंदोलनों में हिस्सा लेने लगे थे और भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष में उन्होंने अपना योगदान दिया। वह महात्मा गाँधी, एनीबेसेन्ट, और स्वामी विवेकानंद के विचारों से बहुत प्रभावित थे। शास्त्री जी वैसे तो बहुत ही सामान्य और शांत विचारों वाले व्यक्ति थे पर देश की जनता पर हो रहे अत्याचार पर उन्होंने महात्मा गाँधी के नारे "करो या मरो" को बदलकर "मरो नहीं मारो" का नारा दिया था। सन् 1965 में पाकिस्तान द्वारा किये गए अकस्मात हमले के दौरान उन्होंने किसानों और जवानों की निस्वार्थ सेवा के लिए "जय जवान, जय किसान" का नारा दिया। 11 जनवरी 1966 को उज्बेकिस्तान के ताशकंद से उनकी मृत्यु खबर आई थी। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें "भारत रत्न" की उपाधि भी प्रदान की गयी।

लाल बहादुर शास्त्री का प्रारंभिक जीवन

हर महान नेता हम सभी के बीच से ही आता है और ऐसे लोग एक आम परिवार में ही जन्म लेते है। उनके गुण और कार्य-क्षमता ही उन्हें लोकप्रिय और महान बनाती हैं। जहां तक लाल बहादुर शास्त्री की बात है, उनका जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर से सात मील दूर मुगलसराय नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव और माता का नाम रामदुलारी देवी था। जब शास्त्री जी अट्ठारह माह के थे, तभी उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था। इस घटना के बाद इनकी माता इन्हें लेकर अपने पिता के घर मिर्जापुर चली गई और उनकी प्रारंभिक शिक्षा वही उनके मामा की देख-रेख में हुई। बाद में उच्च शिक्षा के लिए इन्हें वाराणसी के रामनगर इनके चाचा के यहां भेज दिया गया।

अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद इन्होंने हरिश्चंद्र हाई स्कूल में दसवीं कक्षा में प्रवेश लिया, और इसी दौरान वो स्वतंत्रता सेनानियों के महान नेताओं से वो बहुत प्रभावित हुए। बाद में इन्होंने वाराणसी के काशी विद्यापीठ से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की और उन्होंने 'शास्त्री' की उपाधि प्रदान की। विद्यापीठ में पढ़ाई के दौरान ही इन्होंने आंदोलनों में भाग लेना आरम्भ कर दिया था। 23 वर्ष की उम्र में 16 फरवरी 1928 को मिर्जापुर की ललिता देवी के साथ इनका विवाह हुआ। विवाह के उपरांत इनके चार बेटे और दो बेटियां हुई।

देशभक्ति भावना का उदय

लाल बहादुर शास्त्री में देशभक्ति की भावना का उदय स्कूली शिक्षा के दौरान 16 वर्ष की छोटी सी आयु में आ गई थी। उन्ही दिनों स्वतंत्रता सेनानियों के कई महान नेताओं से ये इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने आंदोलनों में भी भाग लेना शुरू कर दिया था। स्वामी विवेकानंद और महात्मा गाँधी के विचारों और कार्यों से वो बहुत प्रभावित थे और उनके ही विचारों और छवि पर चलने की कोशिश करते रहते थे।

उनके अंदर स्वतंत्रता की भावना का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता आंदोलनों के संघर्षों में अपना योगदान और स्वयं सेवा के लिए इन्होंने अपना स्कूल तक छोड़ दिया था। उस दौरान कई बार उन्हें जेल भी जाना पड़ा पर उन्होंने स्वतंत्रता के प्रति अपने समर्पण को कभी नहीं छोड़ा। वे लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित लोक समाज के सदस्य के रूप में और महात्मा गाँधी के नेतृत्व में मुजफ्फर के हरिजनों के उत्थान के लिए काम किया।

लाल बहादुर शास्त्री का राष्ट्र के प्रति योगदान

लाल बहादुर शास्त्री जी अपने समय के महानतम नेताओं में से एक थे। देश के लिए उनके योगदान और बलिदान का व्याख्यान करना बड़ा मुश्किल है। उन्होंने अपना सारा जीवन देश और उसकी सेवा के लिए बलिदान कर दिया और देश को हर कठिन परिस्थितियों से उभरने में मदद की। वो बहुत ही साधारण और गरीब परिवार से आते थे, इसलिए उन्हें लोगों के दुःख और दर्द का एहसास था। वो आम लोगों के नेता थे और उन्हीं की बेहतरी के लिए सारी उम्र काम किया। मैं यहां उनके दृढ़ व्यक्तित्व और किये गए महान कार्यों के बारे में बताऊंगा जिसके कारण देश में बड़ा बदलाव सम्भव हो पाया है।

  • खेती को आत्मनिर्भर बनाया

जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने देश के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उस समय देश की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। देश में गरीबी और भुखमरी से लोग मर रहे थे। देश में पार्यप्त खद्यान पदार्थ नहीं थे जो सबका पेट भर सकें। इसके लिए भारत अन्य देशों पर आश्रित था क्योंकि उस समय भारत की उत्पादकता बहुत ही कम थी। सन् 1965 में उन्होंने देश में हरित क्रांति लाने को देश से आह्वाहन किया, और साथ ही साथ राष्ट्र को खद्यान उत्पादन के लिए आत्मनिर्भर बनने को कहा और लोगों में साहस पैदा किया। उन्होंने देश के किसानों के मेहनत पर अपना भरोसा और उनमें आत्मविश्वाश पैदा कर देश ने अन्न उत्पादन की क्षमता को बढ़ाने के लिए कहा। उनके इस दृढ़ विश्वास, निति और भरोसे ने अच्छा काम किया और धीरे-धीरे देश को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की।

  • देश की स्वतंत्रता में योगदान

उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए स्वतंत्रता संग्राम में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उस समय के कई आंदोलनों में उन्होंने हिस्सा लिया और जेल भी गए। गाँधी जी को वो अपना गुरु मानते थे, और इसलिए उन्होंने स्वतंत्रता के लिए गाँधी जी का अनुसरण किया। भारत की स्वतंत्रता एक महान नेतृत्व और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से ही संभव हो पाया। इस नेतृत्व ने लोगों में न केवल देशभक्ति की भावना को जगाया बल्कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ना भी सिखाया।

  • हरिजनों की बेहतरी के लिए काम किया

महात्मा गाँधी के नेतृत्व में वो मुजफ्फरपुर के हरिजनों की भलाई के लिए संघर्ष किया और उनके लिए हमेशा सक्रीय रहें। उपनाम (सरनेम) को लेकर कोई जाती विवाद न हो इसलिए उन्होंने स्नातक में मिली शास्त्री की उपाधि को अपने नाम के आगे धारण किया था।

  • 1965 युद्ध के दौरान नैतिक कुशलता

लाल बहादुर शास्त्री जब प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत थे, तब पाकिस्तान ने सन् 1965 में भारत पर अघोषित युद्ध कर दिया। तब उन्होंने अपनी सेनाओं को खुली छूट देकर उन्हें लड़ने को कहा था, और इस युद्ध का नतीजा भारत के पक्ष में रहा। इसी बीच उन्होंने देश को "जय जवान, जय किसान" का नारा दिया था। यह हमारे देश के किसानों, सैनिकों के लिए सर्वोच्च सम्मान और देश की जनता को एक शानदार सन्देश था। इस नारे ने देश के सैनिकों को पाकिस्तान से लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया और परिणाम स्वरुप हमें जीत मिली। यह सब लाल बहादुर शास्त्री के बुद्धि क्षमता, कौशल, निति और कुशल नेतृत्व के कारण ही संभव हुआ था।

लाल बहादुर शास्त्री क्यों सभी के लिए अनुकरणीय है?

शास्त्री जी बड़े ही ईमानदार, धैर्य, दृढ़ निश्चय और महान गुणों की प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। पिता की मृत्यु ने शास्त्री जी को परिस्थितियों से लड़ना सीखा दिया। उनके दृढ़ निश्चय ने उन्हें नेता से लेकर देश का प्रधानमंत्री बना दिया। शास्त्री जी बहुत ही साधारण विचारों वाले व्यक्ति थे, वो दिखाने में नहीं कर्म करने में विश्वास रखते थे। जमीं से जुड़े रहते हुए मृत्यु आने तक देश की सेवा की।

शास्त्री जी ने बहुत ही चुनौतीपूर्ण और गंभीर परिस्थिति में प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला था। इन सबके बाद भी उन्होंने बहुत ही साहस, समझदारी और बहादुरी से देश को उन गंभीर परिस्थितियों से बाहर निकाला। उन्होंने लोगों से सीधे तौर पर बात कर उनकी समस्याओं का समाधान किया, ये बात उन हरिजन को बेहतर बनाने में देखने को मिली। उन्होंने अपने विशेष नेतृत्व गुणों से देश को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकाला। शास्त्री जी ने देश को बहादुरी और आत्मनिर्भरता सिखाई, जिसके कारण वे सभी के दिल में बसते है और उनसे प्रेरणा लेते है।

निष्कर्ष

आने वाली पीढ़ियों के लिए शास्त्री जी का जीवन एक प्रेरणा के रूप में होगा। मुश्किल परिस्थितियों में चतुराई से लड़ना, निति, कौशल और बौद्धिक उपयोग कैसे किया जाये ये सब सिखाती है। मुश्किल घड़ी में बाधाओं को पार कर आगे बढ़ना और सफल होना ऐसे महान कार्यों और विचारों को लेकर आज तक वो हमारे अंदर जीवित है।

Essay on My Favourite Leader