पारसी नव वर्ष पर निबंध

पारसी नव वर्ष पारसी समुदाय के लोगों के लिए एक नए जीवन की तरह है। पारसी नव वर्ष को नौरोज भी कहा जाता है जिसका अर्थ होता है “नया दिन”। यह नव वर्ष हिजरी शमसी कलेंडर के हिसाब से फ़रवरदीन की पहली तारीख को आता है। जिस प्रकार हमारे लिए 1 जनवरी नए साल के रूप में खुशियों की सौगात लाता है उसी प्रकार से पारसी लोग भी अपने नव वर्ष के अवसर पर खुशी से झूम उठते हैं।

पारसी नव वर्ष पर दीर्घ निबंध (Long Essay on Parsi New Year in Hindi)

हम सभी इस निबंध के माध्यम से पारसी नववर्ष से जुड़ी कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे।

Parsi New Year Essay - 800 Words

प्रस्तावना

पारसी धर्म के विद्वानों ने ईरानी कलेंडर के अनुसार पहले महीने के पहले दिन को पारसी नव वर्ष के रूप में घोषित किया है। मूलतः यह नव वर्ष तो इरानियों के द्वारा मुख्य रूप से ईरान में ही शुरू की गई थी, लेकिन समय के साथ पारसी समुदाय का विश्व में बिखराव के कारण भारत जैसे अन्य देशों में भी पारसी समुदाय द्वारा पारसी नव वर्ष मनाया जाता है। अगर इस नव वर्ष के अतीत की बात करें तो मध्य एशिया, काला सागर बेसिन, पश्चिम एशिया तथा बाल्कन जैसे क्षेत्रों में लगभग 3,000 सालों से मनाया जाता रहा है।

पारसी नव वर्ष क्या है? (What is Parsi New Year?)

जिस प्रकार से अलग अलग धर्मों में वर्ष के अलग अलग दिन पर नव वर्ष का प्रावधान किया गया है उसी प्रकार से पारसी धर्म के लोगों के हिसाब से भी वर्ष की शुरुआत के लिए एक दिन सुनिश्चित किया गया है। इसी दिन को पारसी लोग नव वर्ष के रूप में बड़े ही धूम धाम से मानते हैं। पारसी नव वर्ष की शुरुआत “इक्किनाक्स” से होती है जिसका तात्पर्य है “एक समान”। बहुत से खगोलशास्त्रियों के अनुसार यह वह समय होता है जब दिन और रात क़रीब-क़रीब बराबर होते हैं। इस समय सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर से गुजरता है। अगर ईसवी कलेंडर के हिसाब से पारसी नव वर्ष का आकलन किया जाए तो ये प्रत्येक वर्ष 20 या 21 मार्च के लगभग मनाया जाता है।

पारसी नव वर्ष कौन मनाता है? (Who Celebrate Parsi New Year?)

पारसी नव वर्ष मनाने वाले लोग पारसी धर्म से संबंधित हैं। इस धर्म के संस्थापक संत ज़रथुष्ट्र थे। यह एक अत्यन्त प्राचीन धर्म है जिसका उदय इस्लाम से भी पहले हुआ था। 7 वीं सदी में अरब के मुस्लिम निवासियों ने ईरान को युद्ध में हरा दिया। जिसके बाद मुस्लिमों ने ज़रथुष्ट्र के अनुयायियों को प्रताड़ित करके जबरजस्ती धर्म परिवर्तन करवाया। जिन पारसियों को इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं था वे सभी जलमार्ग के हसारे नाव पर स्वर होकर भारत चले आए। पारसी नव वर्ष इन्हीं पारसी समुदाय के लोगों के द्वारा मनाया जाता है।

क्या पारसी नव वर्ष एक राष्ट्रिय या आधिकारिक अवकाश है? (Is Parsi New Year a National or Public Holiday?)

वर्तमान समय में पारसी लोगों की जनसंख्या समस्त विश्व में महज़ 1 लाख से भी कम रह गई है। पारसी समुदाय की इतनी कम जनसंख्या होने के बावजूद भी लोगों में इस नव वर्ष को लेकर काफी उत्साह नजर आता है। अगर बात आकड़ों की करें तो अकेले भारत में पारसियों की जनसंख्या 65,000 है बाकी बची 35000 हजार की जनसंख्या ईरान, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, पाकिस्तान, किरगिस्तान, अरबैजान, अफगानिस्तान, इराक, जॉर्जिया और तुर्की जैसे देशों में बिखरी हुई है।

इतनी दुविधाओं के बावजूद पारसी समुदाय का हर परिवार पारसी नव वर्ष को बड़े ही धूम धाम से मनाता है। देश की सरकारों द्वारा पारसी नव वर्ष को राष्ट्रीय या राजपत्रित अवकाश का दर्जा तो नहीं दिया गया है परंतु पारसी बाहुल्य क्षेत्रों में इसे आधिकारिक अवकाश के रूप में घोषित किया गया है। 

पारसी नव वर्ष क्यों और कैसे मनाते हैं? (Why and How Parsi New Year Celebrated?)

पारसी ग्रंथों के मुताबिक नौरोज या पारसी नव वर्ष का उत्सव राजा जमशेद के शासन काल से जुड़ा हुआ है। पारसी ग्रंथों के अनुसार राजा जमशेद ने सम्पूर्ण मानवजाति को एक ठंड मौसम के कहर से बचाया था जिससे समस्त मानवजाति का विनाश होना तय था। ईरानी मिथकशास्त्रों में जमशेद के द्वारा ही नौरोज की शुरुआत करने का साक्ष्य मिलता है।

इस शास्त्र के अनुसार राजा जमशेद ने एक रत्न जड़ित सिंहासन का निर्माण करवाया था। जिसे उन्होंने देवदूतों की मदद से स्वर्ग में स्थापित करवा कर उसपर सूर्य की तरह दीप्तिमान होकर बैठ गए थे। दुनियाँ के समस्त जीव जन्तु उन्हें कीमती वस्तुएं चढ़ाए और तभी से इस दिन को नौरोज कहा जाने लगा।

इस दिन पारसी समुदाय के लोग घर के सबसे बड़े सदस्य के यहाँ उनसे मिलने जाते हैं उसके बाद वह बड़ा सदस्य बाकी सबके घर जाता है। इस दिन सभी लोग एक जगह एकत्र होकर तरह तरह के व्यंजनों का लुप्त उठाते हैं और पटाखों की आतिशबाजी का आनंद लेते हैं। मिलने जुलने का यह सिलसिला पूरे महीने या कम से कम महीने की तेरह तारीख तक जारी रहती है। समुदाय के जिस परिवार ने अगर बीते वर्ष में किसी अपने को खो दिया है तो सभी लोग मिलकर सबसे पहले उस सदस्य के घर जाते हैं और उनके काले कपड़े उतरवा के उन्हें नए कपड़े उपहार स्वरूप देते हैं।

निष्कर्ष

नौरोज या पारसी नव वर्ष अपने आप में मुसीबतों में खुशियां ढूँढने का प्रतीक है। जिस प्रकार से प्राचीन समय में पारसी लोगों के साथ अत्याचार हुआ था वो मानवता के मुंह पर एक कालिक के समान है। लेकिन उसके बाद भी जिस प्रकार से पारसी समुदाय के लोग अपनी हर छोटे बड़े पल को खुशी खुशी बिताते आए हैं वो काबिल-ए-तारीफ है। हम सभी को पारसी समुदाय के लोगों से तकलीफों को भूलकर खुशियां मनाना सीखना चाहिए। पारसी नव वर्ष प्रकृति से जुड़े लोगों के लिए और भी अधिक प्रिय होता है। इस समय वातावरण एकदम संतुलित और स्वच्छ नज़र आता है।

FAQs:  Frequently Asked Questions

प्रश्न 1 – पारसी नव वर्ष भारत में कब मनाया जाता है?

उत्तर – ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह पर्व 16 अगस्त को मनाया जाता है।

प्रश्न 2 – पारसी नव वर्ष को और किन किन नामों से जाना जाता है?

उत्तर – इस नव वर्ष को “नौरोज” और “पतेती” नाम से भी जाना जाता है।

प्रश्न 3 – पारसी नव वर्ष किस धर्म से संबंधित है?

उत्तर – पारसी नव वर्ष ईरान के मूल निवासी पारसी धर्म से संबंधित है।

प्रश्न 4 – विश्व में पारसियों की जनसंख्या कितनी है?

उत्तर – सम्पूर्ण विश्व में पारसी जनसंख्या 1 लाख से भी कम है।

प्रश्न 5 – भारत में सबसे अधिक पारसी कहाँ निवास करते हैं?

उत्तर – भारत में सबसे अधिक पारसी मुंबई में निवास करते हैं।