सुभाष चन्द्र बोस का जन्मदिन

सुभाष चंद्र बोस जयंती

सुभाष चंद्र बोस से जुड़े तथ्य

जन्म: 23 जनवरी 1897, बंगाल प्रान्त के उड़ीसा प्रभाग के कटक शहर में

मृत्यु: 18 अगस्त 1945

नागरिकता: भारतीय

धर्म: हिन्दू

शिक्षा: कलकत्ता यूनिवर्सिटी

प्रसिद्धि: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग

उपाधि

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष (1938)

आजाद हिन्द फौज के जनरल (1943-1945)

राजनीतिक दल: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और फार्वड ब्लॉक

परिवार

माता: पार्वती देवी

पिता: जानकी नाथ बोस

पत्नी: एमिली शेंकल

बेटी: अनीता बोस पॉफ्फ

 

सुभाष चंद्र बोस का नाम हमारे देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों में गिना जाता है। इतिहास में सुभाष चंद्र बोस जैसे व्यक्ति बहुत बिरले ही देखने को मिलते हैं। जो सेनापति, वीर सैनिक, कुशल राजनितिज्ञ होने के साथ ही एक कुशल नेतृत्वकर्ता भी होते हैं। उनका जीवन हम सबके लिए एक प्रेरणा के समान है उनके इन्हीं देशहित और आजादी के कार्यों को देखते हुए भारत में हर वर्ष 23 जनवरी के दिन सुभाष चंद्र बोस जयंती मनाई जाती है। जिसपर देशभर में विभिन्न प्रकार के कार्यों का आयोजन किया जाता है।

सुभाष चंद्र बोस जयंती 2020

वर्ष 2020 में सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी,गुरूवार के दिन मनाई जाएगी। इस वर्ष नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जन्म की 123वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी।

सुभाष चंद्र बोस जयंती 2019 विशेष

बिलासपुर स्थित फ्रेंड्स यूथ एसोसिएन सरकंडा द्वारा 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती मनाई गयी। इसके तहत अरपा क्षेत्र के सभी स्कूली बच्चों तथा उनके संचालक और अध्यापकों द्वारा एकत्रित होकर सुबह 8.45 बजे सुभाष चौक कार्यक्रम स्थल पर प्रतिभाफेरी निकालकर, सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के निकट उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की गयी।

रायपुर के भिलाई में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती को लेकर विशेष तैयारिया की गयी। इस दौरान बंगाली समाज द्वारा 20 जनवरी रविवार के दिन निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया था।

पंजाब के रुपनगर में सुभाष चंद्र बोस जयंती के तहत आजाद हिंद फौज को न्याय दिलाने को लेकर 22 जनवरी 2019 को फावरवर्ड ब्लाक द्वारा मार्च निकाला गया। इस आयोजन में प्रधानमंत्री मोदी को मांगपत्र भी भेजा गया, जिसमें सुभाष चंद्र बोस की जयंती को देश प्रेम दिवस घोषित करने की मांग की गयी।

हरियाणा के गुरुग्राम स्थित स्वतंत्रता सेनी उत्तराधिकारी समिति द्वारा आजादी के महानायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी, बुधवार के दिन मनायी गयी। इस कार्यक्रम में देशहित के विषयों पर चर्चा करते हुए नेताजी सुभाषचंद्र बोस के कदमों पर चलने की प्रतिज्ञा ली गयी।

हरियाणा के जींद में एसजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जुलना में नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों को सुभाषचंद्र के जीवनी के विषय में जानकारी दी गयी। इसके पश्चात बच्चों के लिए प्रश्नोत्तरी तथा भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती के अवसर पर देश के विभिन्न जगहों पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इसी के तहत छत्तीसगढ़ के रायपुर में रेडक्रास ब्लड बैंक रायपुर द्वारा रक्तदान शिविर लगाया गया, जिसमें काफी सारे युवाओं ने रक्तदान किया।

सुभाष चन्द्र बोस का जीवन परिचय

सुभाष चन्द्र बोस महान राष्ट्रवादी और नेताजी की उपाधि से प्रसिद्ध, 23 जनवरी 1897 को बंगाल प्रान्त के उड़ीसा प्रभाग के कटक शहर में जन्में थे। इनकी मृत्यु 18 अगस्त 1947 को केवल 48 साल की आयु में हो गयी थी। इनकी माता का नाम पार्वती देवी और पिता का नाम जानकी नाथ बोस था। इनके पिता पेशे से वकील थे। ये अपने माता-पिता के 14 बच्चों में से 9वीं संतान थे।

 

1920-1930 के बीच में ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता थे और 1938-39 में इसके अध्यक्ष भी चुने गये। इन्हें बाद में 1939 में कांग्रेस से निकाल दिया गया और ब्रिटिश सरकार के द्वारा घर में ही नजर बंद कर दिये गये। फिर वो भारत को ब्रिटिश शासन से आजाद कराने में सहयोंग लेने के लिये नाजी जर्मनी और जापान गये।

वो जापानियों की मदद से राष्ट्रीय फौज के संगठन का निर्माण करने में सफल हो गये। जब ये जापान के लड़ाकू विमान से भागने का प्रयत्न कर रहे थे वो विमान ताइवान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिससे इनकी मृत्यु बहुत ज्यादा आग में जलने के कारण हो गयी।

प्रारम्भिक जीवन

जनवरी 1902 में सुभाष चन्द्र बोस ने प्रोटोस्टेट यूरोपियन स्कूल में प्रवेश लिया। इसके बाद इन्होंने रेनवेंशा कॉलिजियेट स्कूल और फिर प्रेसिडेंसी कॉलेज में 1913 में मैट्रिक की परीक्षा में द्वितीय श्रेणी प्राप्त करने के बाद प्रवेश लिया। इनका राष्ट्रवादी चरित्र इनकी पढ़ाई के बीच में आ गया जिसके कारण इन्हें स्कूल से निष्काषित कर दिया गया। इसके बाद इन्होंने स्कॉटिश चर्च कॉलेज (कलकत्ता यूनिवर्सिटी) में दर्शन शास्त्र से बी.ए. पूरी करने के लिये 1918 में प्रवेश लिया।

1919 में ये इंग्लैण्ड के फिट्ज़विलियम कॉलेज, कैम्ब्रिज स्कूल में सिविल की परीक्षा में शामिल होने के लिए गये। इन्होंने सिविल परीक्षा में चौथा स्थान की प्राप्ति के साथ चुन लिये गये लेकिन इन्होंने ब्रिटिश सरकार के अधीन रहकर कार्य करने से मना कर दिया। इन्होंने सिविल की नौकरी से इस्तीफा (त्यागपत्र) दे दिया और भारत आ गये जहाँ इन्होंने बंगाल प्रान्त की कांग्रेस समिति के प्रमोशन के लिये स्वराज्य समाचार पत्र का प्रकाशन शुरु किया। 1937 में, इन्होंने चुपके से आस्ट्रिया में एमिली शेंकल (आस्ट्रिया के पशु चिकित्सक की बेटी) से शादी कर ली।

राजनीतिक जीवन

वो अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के साथ-साथ बंगाल राज्य की कांग्रेस के सचिव के रुप में चुने गये। वो फॉर्वड समाचार पत्र के सम्पादक बन गये और कलकत्ता के नगर निगम के सी.ई.ओ. के रुप में कार्य किया। जब इन्हें गिरफ्तार किया गया तो इन्हें तपेदिक हो गया।

वर्ष 1927 में जेल से रिहा होने के बाद में इन्हें कांग्रेस महासचिव के रुप में चुना गया। भारत की स्वतंत्रता के लिये, इन्होंने पं. जवाहर लाल नेहरु के साथ कार्य किया। सविनिय अवज्ञा के मामले में इन्हें फिर से गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।

अखिल भारतीय फॉर्वड ब्लॉक

इन्होंने 22 जून 1939 को अपने राजनीतिक जीवन को फॉर्वड ब्लॉक से संयोजित कर लिया। मुथुरलिंगम थेवर इनके बहुत बड़े राजनीतिक समर्थक थे इन्होंने मुम्बई में 6 सितम्बर को सुभाष चन्द्र बोस के मुम्बई पहुँचने पर एक बहुत विशाल रैली का आयोजन किया था।

 

 

1941-1943 तक, ये बर्लिन में रहे। इन्होंने "तुम मुझे खून दो, और मैं तुम्हें आजादी दूंगा!" जैसे अपने प्रख्यात नारे के माध्यम से आजाद हिंद फौज का नेतृत्व किया। 6 जुलाई 1944 में इन्होंने अपने भाषण में महात्मा गाँधी को “राष्ट्रपिता” कहा था जिसका प्रसारण सिंगापुर आजाद हिन्द फौज के द्वारा किया गया था। उनका एक और प्रसिद्ध नारा "दिल्ली चलो" आई.एन.ए. की सेनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए था। आमतौर पर उनके द्वारा प्रयोग किया जाने वाला एक और नारा "जय हिंद", "भारत की जय हो!" था जिसे बाद में भारत सरकार और भारतीय सेनाओं ने अंगीकृत (धारण) कर लिया था।

वर्ष 2007 में 23 अगस्त को कोलकाता में सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल हॉल की अपनी यात्रा पर जापान के प्रधानमंत्री (शिंजो अबे) ने कहा था कि, ब्रिटिश सरकार के शासन से आजाद होने के लिये सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व में भारत में चलाये गये स्वतंत्रता आन्दोलन से जापानी इनके दृढ़संकल्प से बहुत ज्यादा प्रोत्साहित हुये हैं। सुभाष चन्द्र बोस जापान में बहुत प्रिय व्यक्तित्व और चहते नाम हैं।

सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु कैसे हुई?

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइवन के निकट एक विमान दुर्घटना में हुई थी।

सुभाष चंद्र बोस जयंती क्यों मनाई जाती है?

भारत के आजादी में सुभाष चंद्र बोस का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने अपने क्रांतिकारी कार्यों के तहत भारत में आजादी के ज्वलंत नेतृत्व की भावना बनाये रखा। उनके द्वारा बनाये गये आजाद हिंद फौज ने देश के विभिन्न हिस्सों को अंग्रेजी हुकूमत से मुक्त कराने का महत्वपूर्ण प्रयास किया। अपने बेहतरीन कूटनीति के द्वारा उन्होंने यूरोप के कई देशों से संपर्क करके उनसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सहयोग प्राप्त किया।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरु, लाला लाजपतराय, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद आदि जैसे प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे। भले ही देश की आजादी के लिए उन्होंने हिंसा का मार्ग चुना था, लेकिन उनके कार्यों का भारत की आजादी में एक महत्वपूर्ण योगदान है। यहीं कारण है कि भारत के आजादी में उनके बहुमूल्य योगदान को देखते हुए, 23 जनवरी को उनकी जयंती को पूरे देशभर में काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

सुभाष चंद्र बोस जयंती कैसे मनाई जाती है?

23 जनवरी के दिन ही सुभाष चंद्र बोस का जन्म हुआ था। इसलिए प्रतिवर्ष इस दिन को उनके जंयती के रुप में मनाया जाता है। इस दिन देश के विभिन्न स्थानों पर उनके स्मारकों तथा प्रतिमाओं पर राजनेताओं, विशिष्ट अतिथिगण तथा आम जनता द्वारा माल्याअर्पण किया जाता है। इसके साथ ही इस दिन विद्यालयों में भी कई प्रकार के आयोजन किये जाते हैं। जिसमें बच्चों द्वारा रैली निकालने के साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर भाषण तथा निबंध जैसे कार्यक्रमों भी भाग लिया जाता है।

इस दिन का सबसे भव्य इंतजाम पश्चिम बंगाल में किया जाता है। जहां इस दिन कई तरह के सांस्कृतिक तथा सामाजि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, इसके तहत कई तरह के स्वास्थ्य शिविर, प्रशिक्षण शिविर, निशुल्क भोजन शिविर जैसे कार्यों का आयोजन किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों से सुभाष चंद्र बोस के समर्थकों और प्रशंसको द्वारा इस दिन को प्रेम दिवस घोषित करने की भी मांग की गयी।

सुभाष चंद्र बोस जयंती का महत्व

सुभाष चंद्र जयंती का अपना एक अलग ही महत्व है। यह दिन हमें सुभाष चंद्र बोस के किये गये महान कार्यों की याद दिलाता है कि आखिर किस प्रकार से उन्होंने देश के खातिर अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। उन्हें अपने देश से काफी प्रेम था और इसके आजादी के लिए उन्होंने काफी कार्य किया।

इस आजादी के लड़ाई में उन्हें अपना सब कुछ त्यागकर अपने देश से दूर रहते हुए निर्वासन की जिदंगी बितानी पड़ी और आखिरकार सन् 1942 में उनकी मेहनत रंग लायी और उन्होंने भारत को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया में आजाद हिंद फौज की स्थापना की। जिसने भारत में अंग्रेजी हुकूमत को कमजोर करने में एक अहम भूमिका अदा की, उनके द्वारा राष्ट्रहित में किये गये इन्हीं कार्यों के लिए आज भी देश के जनता द्वारा उन्हें याद करते हुए। उनके सम्मान में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

सुभाष चन्द्र बोस के नारे

  • “स्वतंत्रता दी नहीं जाती, ली जाती हैं।”
  • “एक अकेला व्यक्ति अपने विचार के लिये मर सकता हैं, किन्तु वो विचार, उसकी मृत्यु के बाद, हजारों लोगों के जीवन में खुद उतर जाता है। इस प्रकार परिवर्तन का चक्र घूमता हैं और एक राष्ट्र के विचार और सपने आने वाली पीढ़ी को विरासत के रुप में मिलते है।”
  • “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।”