अम्लीय वर्षा पर निबंध

एसिड रेन का तात्पर्य अत्यधिक अम्लीय बारिश से है जिससे पर्यावरण तथा वायुमंडल के संतुलन के बिगड़ने का खतरा पैदा हो जाता है। यह प्रमुख रूप से पौधों, जलीय प्राणियों, अवसंरचना आदि को प्रभावित करती है। अम्लीय होने का अर्थ है इसमें हाइड्रोजन के आयनों का स्तर ऊँचा होना, अर्थात् कम  पीएच। वास्तव में सामान्य वर्षा का जल पहले से ही थोड़ी अम्लीय होता है, जिसमें पीएच का स्तर 5.3-6.0 होता है। वर्षा के जल का अम्लीय होने के पीछे कारण है कार्बन डाइऑक्साइड और वायु में मौजूद पानी का कार्बोनिक एसिड बनाने के लिए एक साथ प्रतिक्रिया करना, जो खुद एक कमजोर एसिड है। जब बारिश के पानी का पीएच स्तर इस सीमा से नीचे आता है, तो यह एसिड रेन में तब्दील हो जाता है।

प्राकृतिक और मानव निर्मित स्रोत दोनों ही एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन यह मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन के दहन के कारण होती है जिससे सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOX) वातावरण में फैल जाती है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) एक महत्वपूर्ण विषय है जिस पर छात्रों को अक्सर अनुच्छेद या निबंध लिखने के लिए कहा जाता है। हम यहां विभिन्न शब्द सीमाओं में एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) पर निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। छात्र जिस शब्द सीमा से संबंधित निबंध का चुनाव करना चाहते है अपनी आवश्यकता के अनुसार कर सकते हैं।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) पर निबंध

You can get below some essays on Acid Rain in Hindi language for students in 200, 300, 400, 500 and 600 words.

अम्ल वर्षा पर निबंध 1 (200 शब्द)

हममें से अधिकांश बारिश को पर्यावरण के लिए ताज़ा और फायदेमंद मानते हैं, लेकिन वास्तव में सभी प्रकार की वर्षा अच्छी नहीं होती है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) बारिश का ही एक प्रकार है जो पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) में बारिश, बर्फबारी, ओलों का गिरना, कोहरा या ओस शामिल हैं जिनमें एसिड प्रदूषक, विशेष रूप से सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक एसिड अधिक मात्रा में होते हैं। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन के कारण होती है, जो एसिड के उत्पादन के लिए वातावरण में मौजूद पानी के अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करते हैं।

अम्लीय वर्षा

प्राकृतिक और मानव निर्मित हवा में एसिड की उपस्थिति के दो मुख्य कारण हैं। ज्वालामुखीय विस्फोट और क्षयकारी वनस्पति प्राकृतिक कारणों के उदाहरण है तथा सड़क परिवहन, चिमनी, औद्योगिकीकरण, जीवाश्म इंधनों के जलने से पैदा होता धुआं मानव निर्मित कारणों के उदाहरण है जिनसे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होने का खतरा रहता है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से जंगलों, पानी और मिट्टी पर खराब प्रभाव पड़ता है। इससे कीड़े और समुद्री जीव-रूपों के जीवन के साथ-साथ भवनों को नुकसान तथा मानव स्वास्थ्य को भी हानि पहुँचती है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) नदियों, झीलों और अन्य जल निकायों को भी जहरीली बनाती है। कई इमारतों और स्मारकों के क्षतिग्रस्त होने के पीछे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) ही मुख्य कारण है क्योंकि एसिड कैल्शियम कार्बोनेट पत्थर को काटता है।

हालाँकि एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्राकृतिक कारणों के संबंध में तो ज्यादा कुछ किया नहीं जा सकता परन्तु हम मानव निर्मित कारकों को कम करने के लिए कदम जरुर उठा सकते हैं। हमें ऊर्जा के साफ़ सुथरे तरीकों का चयन करना चाहिए, जैसे कि सौर ऊर्जा का उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों का पुनः पुनर्चक्रण और अधिक से अधिक पेड़ लगाना।

अम्ल वर्षा पर निबंध 2 (300 शब्द)

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का नाम सुनकर ऐसा लगता है की शुद्ध एसिड आकाश से गिर रहा है लेकिन नहीं, एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) वास्तव में तब होती है जब कुछ गैसें वायुमंडल में मौजूद नमी के साथ मिलकर मिश्रण बनाती हैं जो सामान्य बारिश के मुकाबले अधिक अम्लीय होती है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को बारिश, कोहरे, ओलों के साथ भारी वर्षा या बर्फ के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो कि जीवाश्म ईंधन और औद्योगिक दहन के परिणामस्वरूप हवा में मौजूद दूषित पदार्थों द्वारा अम्लीय बन गई है और जो ज्यादातर नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOX) और सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) का उत्सर्जन करती है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को निम्नानुसार वर्गीकृत किया जा सकता है: सूखी एसिड वर्षा या गीली एसिड वर्षा। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के दोनों रूप, गीले और शुष्क, बरसने से पहले हवा के द्वारा लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। इन प्राकृतिक कारणों के अलावा चिमनी, उद्योग, वाहनों से निकलता प्रदूषण आदि एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के मानव निर्मित कारणों में शामिल है।

जब एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) गिरती है, तो यह नाटकीय रूप से निवास स्थान के अम्लता स्तर को बदल देती है जिससे गैर-जीवित के साथ-साथ जीवित चीजों की जीवन शैली में विनाश का खतरा हो सकता है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्रभाव हर एक के लिए, जिसमें वनों सहित सभी वन्यजीव, जलीय जैव विविधता, मनुष्य, भवन, अवसंरचना, मिट्टी, ऐतिहासिक स्मारक शामिल है, हानिकारक हो सकते हैं।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को केवल तभी रोका जा सकता है जब हम सभी मिल कर ऊर्जा का सही इस्तेमाल करें जैसे सौर ऊर्जा का ज्यादा से ज्यादा उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों का रीसाइक्लिंग करना और वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करना। यदि हम सभी एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को रोकने के लिए दृढ़ संकल्प ले तो इससे निश्चित रूप से पर्यावरण की स्थिति बेहतर और हवा में पीएच के संतुलित स्तर का निर्माण हो सकता है जो हमारे वातावरण के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।

अम्ल वर्षा पर निबंध 3 (400 शब्द)

एसिड रेन (गीली या शुष्क) मुख्यतः एक प्रकार का एक मिश्रण होती है जो बड़े पैमाने पर अपने अन्दर भारी मात्रा में नाइट्रिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड का समावेश रखती हैं।

सरल शब्दों में कहें तो इसका मतलब है कि चलती कारों और औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलते प्रदूषण की वजह से हवा में कुछ तत्वों की उपस्थिति बढ़ जाती है जिस कारण धरती पर एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होती है। अम्लता को पानी की बूंदों के पीएच संतुलन के आधार पर निर्धारित किया जाता है। हालांकि सामान्य वर्षा का जल 5.3-6.0 की पीएच श्रेणी के साथ थोड़ा अम्लीय है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और पानी (H2O) हवा में मौजूद कार्बोनीक एसिड को बनाने के लिए एक साथ प्रतिक्रिया करते हैं।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कारण

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होने में प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों ही कारण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ज्वालामुखी तथा क्षयकारी वनस्पति गैस से जहरीली गैस निकलती है जिससे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का निर्माण होता है। हालांकि अधिकांश गैस मानव निर्मित स्रोतों से जन्म लेती हैं, जैसे कि जीवाश्म ईंधन दहन।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का प्रभाव

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कई नकारात्मक प्रभाव है, जिन्हें इस प्रकार वर्णित किया गया है:

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से विभिन्न श्वसन समस्याएँ जन्म लेती है जिससे साँस लेने में अधिक कठिनाई महसूस होती है।

  • एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से भवन और इमारतों की निर्माण सामग्री की क्षति तेज़ी से होती है तथा किए हुए पेंट का रंग भी जल्दी फ़ीका पड़ने लगता है।
  • एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से पत्थर की मूर्तियों पर भी बुरा असर पड़ता है जिस कारण वे समय से पहले पुरानी दिखनी लगती है तथा उनकी अहमियत और उनका मूल्य भी कम हो जाता है। उदाहरण के लिए ताजमहल के रंग-रूप पर एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का खराब प्रभाव किसी से छुपा नहीं है।
  • एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कारण पेड़ के चारों ओर की मिट्टी में एल्यूमीनियम की मात्रा अधिक हो जाती है जिसकी वजह से पेड़ की जड़ों को पानी सोखने में मुश्किल होती है। उदाहरण के लिए जर्मनी में "ब्लैक फॉरेस्ट" नामक एक जगह है। इसे यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) ने पेड़ों को काफी नुक्सान पहुँचाया जिस कारण पेड़ सूखी पत्तियों और शाखाओं में बदल गए।
  • हमें ऐसा लगता है कि एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) एक सामान्य सा मुद्दा है पर यह बड़ी आपदाओं को जन्म दे सकता है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को कैसे बंद करें

वैसे तो एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को रोकने के कई तरीके हैं लेकिन एक रास्ता है जिसके द्वारा हम सभी इसे रोक सकते हैं वह है सौर ऊर्जा के स्वच्छ तरीके इस्तेमाल करके। जैसे कचरे के पुनर्चक्रण और इलेक्ट्रिक कारों के उपयोग को शुरू करना आदि मुख्य है। हालाँकि हवा को साफ करने के कई प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अभी भी वातावरण को साफ करने के मनुष्य को बहुत लंबा रास्ता तय करना है। यदि मनुष्य पर्यावरण के बारे में अधिक सावधानी बरतता है तो एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से होने वाले नुकसानों की घटना को कम किया जा सकता है। लेकिन अगर वायुमंडलीय प्रदूषण को कम करने के हमारे प्रयासों में मजबूती नहीं हैं तो हमारे सभी प्राकृतिक संसाधनों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिससे पृथ्वी ग्रह पर जीवन के विलुप्त होने का खतरा पैदा हो जाएगा।


 

अम्ल वर्षा पर निबंध 4 (500 शब्द)

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को बारिश या कोहरे के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो प्राकृतिक रूप से अम्लीय है।

मूल रूप से, एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) तब होती है जब कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOX) जैसी खतरनाक गैसें वर्षा के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करती हैं। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के फैलने के पीछे कारखानों से तथा वाहनों से निकलता धुआं है।

जब ये गैसें वातावरण में प्रवेश करती हैं तो वे जंगली रसायनों और कार्बोनिक एसिड, सल्फ्यूरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड जैसे एसिड बनाने के लिए शुद्ध बारिश के पानी से मिलकर रासायनिक प्रतिक्रिया करती हैं जिसके फलस्वरूप एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का निर्माण होता है।

एसिड रेन के कारण

मुख्यतः प्रदूषण के बढ़ते स्तर के परिणामस्वरूप एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) उत्पन्न होती है। बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई और नई दिल्ली आदि में एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होना काफी आम बात है। ऐसा तेजी से होता औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) और उसके खतरनाक प्रभाव किसी एक निश्चित क्षेत्र तक ही सीमित नहीं हैं जैसे ही हवा चलती है, वह अपने साथ एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) में मौजूद खतरनाक रसायनों को दूर स्थानों तक ले जाती है। वैज्ञानिक भी इस बात से सहमत हैं कि तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म इंधनों का जलना एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का एक प्रमुख कारण है। इसलिए वे कारखाने जो ऑटोमोबाइल उद्योगों, पेपर उद्योगों और रासायनिक उद्योगों में जीवाश्म ईंधन का उपयोग करते हैं उन्हें हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को कम करना चाहिए जिससे बारिश में एसिड की मौजूदगी की प्रतिशत कम हो जाएगी।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्रतिकूल प्रभाव

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कई प्रतिकूल प्रभाव हैं जिनका वर्णन निम्नानुसार किया गया है:

  • झीलों और नदियों के पानी में जब एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से बरसा पानी मिल जाता है तो वहां जलीय जीवन की कोई गुंजाईश नहीं बचती। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) पारिस्थितिकी तंत्र के जलीय आवास को प्रभावित करती है। झीलों, नदियों और अन्य मीठे पानी के निकायों के अधिक अम्लीय बनने के कारण इनके जल में रहने वाले पानी के पशुओं और अन्य जलीय पौधों की संख्या और कम हो जाती हैं।
  • इससे फसल की पैदावार में भी कमी हो जाती है।
  • इससे जंगलों और वन्यजीवों को भारी क्षति पहुंचती है। जब एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) वन क्षेत्रों में पड़ती है तो इससे सीसा और जस्ता जैसे विषाक्त धातु निकलते है जिससे वृक्षों और पौधों की कम वृद्धि होती है। इस तरह एसिड रेन से वनों और जंगल के विस्तार में कम वृद्धि होती है।
  • संक्षारक होने के कारण यह भवनों और बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा सकती है। इसका एक महत्वपूर्ण है ताजमहल की इमारत जिस पर एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से चढ़ता जंग साफ़ देखा जा सकता है।
  • एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) मनुष्यों को भी प्रभावित करती है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कारण त्वचा पर दाने निकलना, खुजली, बालों का झड़ना और श्वास संबंधी समस्याएं हो जाती हैं। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से हृदय और फेफड़ों की समस्याएं हो सकती हैं।
  • एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कारण जहरीले धातुएं भूमिगत पेयजल स्रोतों में मिलकर भूमि के पानी को मानव उपयोग के लिए अयोग्य बना देती हैं।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के उपाय:

अधिकांश कारखानों को अब स्क्रबर्स से लैस होना आवश्यक है। महंगा होने के बावजूद कोयले को जला दिया जाता है जिससे उसमें मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड की अधिकतम मात्रा खत्म हो जाती है। स्क्रबर्स में पानी और चूने के मिश्रण से जहरीली गैसों का छिड़काव किया जाता है जिससे लाइमवाटर बनता है, जो कि गाढ़ा कीचड़ के रूप में जाना जाता है।

झीलों के पानी में मौजूद अम्लता का दूसरा समाधान चूना है। चूना बहुत क्षारीय हैं, इसलिए जब झीलों में डाला जाता है तो यह अम्लता को साफ करता है। इस प्रक्रिया की एक ही समस्या कि यह बहुत महंगी है तथा केवल एक अस्थायी समाधान है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का अन्य समाधान उत्प्रेरक कनवर्टर है, जो सभी कारों, बसों, ऑटो और अन्य सड़क परिवहन के लिए आवश्यक है। कनवर्टर को धुंए के निकासी पाइप पर लगाया जाता है जिससे धुआं इस निकासी पाइप से होकर गुजरता है। वह उत्प्रेरक कनवर्टर, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, और अपरिवर्तित हाइड्रोकार्बन जैसे गैसों को शुद्ध वायु में परिवर्तित करता है।


 

अम्ल वर्षा पर निबंध 5 (600-800 शब्द)

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) में बारिश, बर्फ, ओलों, कोहरे या ओस आदि शामिल है जिसमें एसिड प्रदूषक विशेष रूप से सल्फरिक और नाइट्रिक एसिड होता है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन के कारण होती है, जो वातावरण में पानी के अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करके एसिड का उत्पादन करती है।

पहली बार "एसिड रेन" शब्द 1872 में रॉबर्ट एंगस स्मिथ द्वारा इस्तेमाल में लाया गया था। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) की समस्या न केवल आबादी और औद्योगिकीकरण में होती वृद्धि के साथ बढ़ी है, बल्कि अब यह और भी अधिक खतरनाक हो गई है। वास्तव में, स्थानीय प्रदूषण को कम करने के लिए प्रयोग में लाई गई स्मोकास्टेक्स (फैक्ट्री, जहाज, आदि पर लंबी चिमनी) ने क्षेत्रीय वायुमंडलीय परिसंचरण में गैसों को जारी करके एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के फैलाव को बढ़ावा दिया है।

कनाडा, संयुक्त राज्य और स्वीडन, नॉर्वे और जर्मनी के कुछ हिस्सों सहित यूरोप के अधिकांश भागों में एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होती अक्सर देखी जा सकती है। वर्तमान में इसके अलावा दक्षिण अफ़्रीका और दक्षिण एशिया के इलाकों खासकर श्रीलंका और भारत में बंगलौर, नई दिल्ली, मुम्बई जैसे कुछ दक्षिणी हिस्सों में एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होती देखी गई है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्रकार:

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के दो प्रकार हैं जिन्हें निम्नानुसार वर्गीकृत किया गया है:

गीली एसिड रेन: जब एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) बारिश, बर्फ, कोहरे या धुंध के रूप में जमीन पर गिरती है तो यह वातावरण से एसिड को निकाल कर उन्हें पृथ्वी की सतह पर जमा देती है। उसके बाद यह एसिड भूमि के माध्यम से बहने लगता है जिससे पौधों, जानवरों और जलीय जीवन का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित होता है। नाले से निकलता गन्दा पानी नदियों और नहरों जैसे जल स्रोतों में बह जाता है जिससे बाद में यह समुद्र के पानी में मिल कर जलीय जीवन को प्रभावित करता है।

सूखी एसिड रेन: जब अम्लीय प्रदूषक धूल या धुएं मिलकर सूखे कणों के रूप में जमीन पर गिरते हैं तो यह जमीन पर और अन्य सतहों जैसे इमारतों, कारों, घरों, पेड़ और स्मारकों पर चिपक जाते हैं। वातावरण में अम्लीय प्रदूषकों का अधिकांश भाग जमने से फैलता है।

एसिड रेन के कारण

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्रमुख कारण प्राकृतिक और मानव-संगठित होते है। हालांकि एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) मूल रूप से जीवाश्म ईंधन के दहन के कारण होती है जो वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOX) की मात्रा को बढ़ावा देती है।

प्राकृतिक स्रोत: एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्राकृतिक स्रोत में मुख्य हैं ज्वालामुखी विस्फोट। ज्वालामुखी बड़ी मात्रा में लावा को उत्सर्जित करता है जो हानिकारक गैसों का उत्पादन करता है जिससे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) सामान्य मात्रा से अधिक होती है। वनस्पति, जंगल की आग और अन्य जैविक प्रक्रियाओं से जो गैस उत्पन्न होती है उस कारण भी एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) बनती है। डाइमिथाइल सल्फाइड वायुमंडल में मौजूद सल्फर युक्त एक प्रमुख जैविक योगदानकर्ता का एक विशिष्ट उदाहरण है। बिजली गिरने से भी नाइट्रिक ऑक्साइड बनती है जो नाइट्रिक एसिड के उत्पादन के लिए विद्युत गतिविधि के माध्यम से पानी के अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करती है जिससे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का निर्माण होता है।

मानव-संगठित स्रोत: मानव गतिविधियों में सबसे पहले शामिल है कारखानों, बिजली उत्पादन परिसर और ऑटोमोबाइल उद्योगों से निकलती सल्फर और नाइट्रोजन गैस जो रासायनिक गैस का रूप है। इनसे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) की मात्रा में बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा बिजली उत्पादन के लिए कोयले का उपयोग गैसीय उत्सर्जन का प्रमुख कारण है जो सीधे-सीधे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से के होने से जुड़ी है। इन गैसों में मौजूद पानी ऑक्सीजन और अन्य रसायनों के साथ प्रतिक्रिया करता है ताकि वे सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड आदि जैसे विभिन्न अम्लीय यौगिकों का निर्माण कर सकें। परिणामस्वरूप, उन इलाकों में एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) अत्यधिक मात्रा में होती है।

एसिड रेन के हानिकारक प्रभाव:

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) पर्यावरण को निम्नलिखित व्यापक श्रेणियों में प्रभावित करती है:

  • समुद्री जैव विविधता
  • मिट्टी
  • वास्तुकला और अवसंरचना
  • वन और वन्यजीव
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से बचने के तरीके:

प्राकृतिक कारणों से होने वाली एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को नहीं रोका जा सकता लेकिन ऐसे तरीके हैं जिनसे हम मानव-निर्मित कारणों से होती एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से बच सकते है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से जिस तरह बचा जा सकता है वह इस प्रकार हैं:

चूना के पत्थर का उपयोग करके जिसे लाईमिंग प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है जिसके द्वारा लोग लोग झीलों, नदियों और अन्य जल स्रोतों को एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कारण होने वाले नुकसान की मरम्मत कर सकते हैं। इसके तहत अम्लीय सतह में चूने को डाला जाता है जो पानी की अम्लता को संतुलित करता है। यद्यपि, यह केवल SO2 और NOX के उत्सर्जन की व्यापक चुनौतियों को सुलझाने और मानव स्वास्थ्य के जोखिम के लिए केवल एक अल्पकालिक समाधान प्रदान करता है। फिर भी लाईमिंग प्रक्रिया से समुद्री जीवों के अस्तित्व को पुनर्स्थापित करने में सहायता मिलती है तथा लंबे समय से अम्लीकृत पानी में सुधार भी देखने को मिलता है।

लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से SO2 और NOX के उत्सर्जन की ओर योगदान देते हैं। इस चुनौती के निवारण के लिए लोगों को ऊर्जा संरक्षण के बारे में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है जैसे रोशनी या विद्युत उपकरणों का उपयोग न करने पर उन्हें बंद करना, सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना, कुशल बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल तथा हाईब्रिड वाहनों को उपयोग में लाना जिनसे कम से कम मात्रा में SO2 और NOX का उत्सर्जन होता हो।

जीवाश्म ईंधन के अलावा और कई ऊर्जा स्रोतों की एक विस्तृत श्रृंखला है जो विद्युत शक्ति उत्पन्न कर सकते है। इनमें पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और जल ऊर्जा शामिल है। ये ऊर्जा के स्रोत जीवाश्म ईंधन की बजाय प्रभावी विद्युत शक्ति का विकल्प प्रदान कर सकते है। प्राकृतिक गैस, ईंधन कोशिकाएं और बैटरी भी जीवाश्म ईंधन की जगह इस्तेमाल सकते हैं।

निष्कर्ष

जैसा कि आप देख सकते हैं हमारी हवा को साफ करने के कई तरीके हैं लेकिन आबादी और तेजी से औद्योगिकीकरण में वृद्धि के कारण हमें एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) की घटना को कम करने के लिए युद्धपद्धति पर प्रयास करने की आवश्यकता है। पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने से बचने के लिए पूरी दुनिया को इस दिशा में एक साथ योगदान देने की आवश्यकता है।

 

 

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