बाल स्वच्छता अभियान पर निबंध

बाल स्वच्छता अभियान एक ऐसा स्वच्छता अभियान है, जिसके जरिये बच्चों में स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतें डाली जा रही हैं, बच्चों को प्रेरित किया जा रहा है और बाल स्वच्छता अभियान के माध्यम से स्वच्छ भारत अभियान को सार्थक किया जा रहा है। यह स्वच्छता अभियान पांच दिनों तक चलता है। बच्चों के बीच व्यक्तिगत सफाई के साथ ही पर्यावरण की स्वच्छता की ओर उनको बढ़ावा देने के लिए बाल दिवस के उत्सव को करते हुए, भारत सरकार ने 14 नवंबर 2014 को एक अभियान के रुप में बाल स्वच्छता अभियान की शुरुआत की।

बाल स्वच्छता अभियान पर निबंध (Long and Short Essay on Bal Swachhta Abhiyan in Hindi)

चलिये अपने बच्चों को बाल स्वच्छता अभियान के विषय पर स्कूल में या कहीं बाहर, निबंध लेखन प्रतियोगिता के संबंध में जानकारी दें तथा इसमें भाग लेने के लिये प्रेरित करें।

हमने यहां पर बेहद सरल एवं विभिन्न शब्द सीमाओं में आपके बच्चों के लिये निबंध उपलब्ध कराया है जो उनको विभिन्न प्रतियोगिताओं में उपयोगी साबित होंगे।

निबंध की भाषा बेहद सरल है जो समझने और याद करने में भी आसान है।

You can get here some essays on Bal Swachhta Abhiyan in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

बाल स्वच्छता अभियान पर निबंध 1 (100 शब्द)

पूरे भारत में बच्चों को स्वच्छता को लेकर जागरूकता फैलाने के लिये, 14 नवंबर को बाल स्वच्छता अभियान के रुप में एक मिशन की शुरआत की गई। स्वच्छता सभी के लिये बहुत जरुरी है, हालांकि अस्वास्थ्यकर स्थिति में बीमारी एवं मृत्यु दर को कम करने के लिये बच्चों को ये सीखना बहुत जरुरी है। स्वच्छता एक अच्छा कार्य है और यदि माता-पिता बचपन से इसे बढ़ावा दें तो, बच्चों में इसे एक अच्छी आदत के रुप में विकसित किया जा सकता है। स्वच्छता के महत्व और जरूरत के बारे में जानने के साथ ही, उसकी प्राथमिकता को समझना हरेक बच्चे के लिए जरुरी है। स्वच्छता एक अच्छी आदत है जो हमें अच्छे जीवन की ओर ले जाती है और हमें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक रुप से स्वस्थ बनाती है।

बाल स्वच्छता अभियान

बाल स्वच्छता अभियान पर निबंध 2 (150 शब्द)

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, पंडित जवाहर लाल नेहरु के जन्म दिवस पर 14 नवंबर 2014 को केन्द्रीय सरकार द्वारा बाल स्वच्छता अभियान की शुरुआत की गयी। ये एक पांच दिवसीय स्वच्छता अभियान है जिसकी शुरुआत 14 नवंबर से होकर, समाप्ती 19 नवंबर (भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री, इंदिरा गांधी का जन्म दिवस) को होती है। सरकार ने बाल स्वच्छता अभियान की सफलता को सुनिश्चित करने के लिये ढ़ेरो तैयारियों के साथ स्कूल, कॉलेज और दूसरे शिक्षण संस्थानों को बाल दिवस मनाने का आदेश दिया है।

दिल्ली के मैदानगढ़ी में भारत की केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय मंत्री, मेनका गांधी द्वारा इसकी शुरुआत की गई। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री को उनके जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिये हर 14 नवंबर को बाल दिवस के रुप में मनाया जाता है। पूरे भारत में बच्चों के बीच स्वच्छता को लेकर जागरुकता फैलाने के लिये, इस अभियान को खास तौर से बाल दिवस पर शुरु किया गया।


 

बाल स्वच्छता अभियान पर निबंध 3 (200 शब्द)

बाल स्वच्छता अभियान स्वच्छता का एक ऐसा मिशन है, जो अधिक उन्नति संबंधी और उद्देश्यपूर्ण अंदाज में बाल दिवस को मनाने के लिये 14 नवंबर 2014 को शुरु किया गया था। एक पांच-दिवसीय लंबे कार्यक्रम के रुप में मनाने के लिये इस अभियान की शुरुआत की गयी जो कि भारत के पहले प्रधानमंत्री (पं.नेहरु, 14 नवंबर) के जन्मदिन पर शुरु होता है और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री (इंदिरा गांधी, 19 नवंबर) के जन्म दिवस पर खत्म होता है। पर्यावरणीय और व्यक्तिगत स्वच्छता की ओर देश के बच्चों को बढ़ावा देने के लिये भारतीय सरकार द्वारा बाल स्वच्छता अभियान को लागू किया गया।

बहुत सारी गतिविधियां जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम, निबंध लेखन प्रतियोगिता, स्वच्छता पर चर्चा, समूह चर्चा, चित्रकारी, चार्ट बनाना, स्वच्छता प्रदर्शनी, चित्रकारी प्रतियोगिता, अपने आस-पास के क्षेत्रों की साफ-सफाई, पर्यावरणीय स्वच्छता क्रिया-कलाप, व्यक्तिगत स्वास्थ्य विज्ञान पर पोस्टर बनाना आदि में सक्रिय भागीदारी द्वारा सभी स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा इस कार्यक्रम को मनाया जाता है। बाल स्वच्छता अभियान का एकमात्र उद्देश्य आने वाले भविष्य में भारत को एक स्वच्छ भारत बनाने के लिये देश के बच्चों के बीच स्वच्छता संबधी आदतों को बढ़ावा देना है। स्वच्छता एक अच्छी आदत है जिसे बच्चों को उनके बचपन से ही बढ़ावा देना चाहिये जिससे वो इसका पूरे जीवन भर अनुसरण करते रहें।

 

बाल स्वच्छता अभियान पर निबंध 4 (250 शब्द)

बाल स्वच्छता अभियान एक पर्यावरणी और व्यक्तिगत स्वच्छता मिशन है, इस अवसर को उद्देश्यपूर्ण और अर्थपूर्ण बनाने के लिये बाल दिवस (14 नवंबर 2014 को) पर भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरु किया गया। स्वच्छ भारत अभियान (भारतीय लोगों के बीच स्वच्छता के कार्य को आरंभ करने का कार्यक्रम) का उद्देश्य इस मिशन से संभवत: अधिक मेल खाता है।

बाल स्वच्छता अभियान के माध्यम से इस स्वच्छता अभियान में स्कूली बच्चों को शामिल करने के लिये, भारतीय सरकार द्वारा बाल स्वच्छ मिशन एक बड़ा कदम है। पांच दिनी ये लंबा उत्सव इस अभियान को और अधिक सफल और असरदार बनाने के लिये सभी दिनों को पाँच अलग-अलग थीम पर आधारित होता है। ये मिशन पंडित नेहरु के जन्म दिवस (14 नवंबर) को शुरु होता और इंदिरा गाँधी के जन्म दिवस (19 नवंबर) पर खत्म होता है।

ये मिशन इस समझ के द्वारा लागू किया गया है कि 2019 तक स्वच्छ भारत की प्राप्ति में अधिक संभावना के साथ एक बड़ी भूमिका बच्चे अदा कर सकते हैं। बच्चों को कुछ भी करने के लिये प्रोत्साहन और बढ़ावे की जरुरत होती है इसलिये पर्यावरण, घर, अपने आस-पास, रोड, स्कूल, व्यक्तिगत साफ-सफाई आदि में स्वच्छता की आदत को बढ़ावा देने में बच्चे एक अच्छा माध्यम हैं। घरों और समुदायों में खासतौर से पूरे भारत भर में बच्चे स्वच्छता के दूत होते हैं।

इस अभियान को मनाने का मुख्य लक्ष्य अपने आस-पास, स्कूल, आँगनवाड़ी की साफ-सफाई, व्यक्तिगत साफ-सफाई और बच्चों का स्वास्थ्य, पीने के पानी को साफ रखना, साफ भोजन और साफ शौचालय आदि है। इस मिशन की जरुरत को पूरा करने के लिये स्कूल में बहुत सारे स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।


 

बाल स्वच्छता अभियान पर निबंध 5 (300 शब्द)

बच्चों के बीच में स्वच्छता के बारे में जागरुकता को बढ़ाने के लिये भारतीय सरकार द्वारा स्वच्छता का बाल स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। इस उत्सव को और असरदार बनाने के लिये बाल दिवस पर खासतौर से 2014 में इस मिशन की शुरुआत की गयी थी। ये एक पाँच दिनी लंबा मिशन है जो 14 नवंबर से 19 नवंबर तक मनाया जाता है। 2014 में उत्सव के सभी पाँच दिनों का अलग-अलग थीम थे जैसे 14 नवंबर का थीम था “स्वच्छ स्कूल, हमारे आस-पास और खेलने के मैदान”, 15 नवंबर का थीम था “स्वच्छ भोजन”, 17 नवंबर का थीम था “आलमारियों को साफ रखे”, 18 नवंबर का थीम था “पीने के पानी की सफाई करना” और 19 नवंबर का थीम था “स्वच्छ शौचालय”।

 

भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. नेहरू का जन्मदिन हर वर्ष 14 नवंबर को बाल दिवस के रुप में मनाया जाता है। इसलिये इस स्वच्छता अभियान को और अधिक उद्देश्यपूर्ण और प्रभावशाली बनाने के लिये बाल स्वच्छता अभियान की शुरुआत की गयी है। इस कार्यक्रम को मनाने के दौरान निबंध लेखन प्रतियोगिता, संबंधित विषय पर कविता पाठ, पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता, चित्रकारी, भाषण, खेल क्रियाएँ, समूह चर्चा, बहस, स्वच्छता क्रियाकलाप आदि सहित बहुत सारे क्रियाकलाप स्कूल शिक्षकों द्वारा आयोजित किये जाते हैं। एक-दूसरे में उत्साह और प्रोत्साहन लाने के लिये सीमित समय में पूरा करने के लिये समूह के अनुसार कुछ कार्य स्कूली बच्चों को दिये जाते हैं।

सभी भारतीय नागरिकों के लिये स्वच्छता बहुत जरुरी कार्य है, हालाँकि भारत में इसका बच्चों के द्वारा बेहतर प्रचार हो सकता है। पर्यावरणीय और व्यक्तिगत स्वच्छता की आदत को बढ़ावा देने के लिये स्कूल जाने वाले बच्चे सबसे बेहतर माध्यम हैं। पूरे दिल से घर या स्कूल से स्वच्छता अभियान में हरेक विद्यार्थी भाग लेता है। उत्सव के दिन पर उनके शिक्षकों या प्रधानाध्यापक के द्वारा पर्यावरण और शरीर में स्वच्छता की जरुरत, लाभ और महत्व के बारे में विद्यार्थियों को पहले समझाया जाता है और उसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नृत्य, गायन, प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिता आदि के माध्यम से उत्सव मनाने की शुरुआत की जाती है। स्वच्छता अभियान को असरदार तरीके से देखने के द्वारा समाज में स्वच्छता के बढ़ावे की अपनी प्रगतिशील शैली और तरीके को विद्यार्थी प्रदर्शित करते हैं।


 

बाल स्वच्छता अभियान पर निबंध 6 (400 शब्द)

बच्चों की ओर अपने प्यार और भक्ति के कारण भारत के पहले प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरु के जन्म दिवस पर विशेष तौर से बाल स्वच्छता अभियान या मिशन की शुरुआत की गयी थी। चाचा नेहरु एक महान व्यक्ति थे जो बच्चों को बहुत प्यार करते थे इसी वजह से 14 नवंबर को बाल दिवस कार्यक्रम और बाल स्वच्छता अभियान का आरंभ किया गया। इस मिशन का उत्सव 14 नवंबर से 19 नवंबर तक मनाया जाता है अर्थात् भारत के पहले प्रधानमंत्री के जन्मदिवस से भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के जन्म दिवस तक।

14 नवंबर 2014 को नई दिल्ली के मैदानगढ़ी आंगनवाड़ी में भारत की केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती मेनका गाँधी के द्वारा इस मिशन की शुरुआत की गयी थी। पूरे राष्ट्रभर के सफाई व्यवस्था के आरंभिक कार्यक्रम के रुप में इस अभियान की शुरुआत की गयी है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आरंभ किया गया स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य इस अभियान के लक्ष्य से संभावित तौर पर बहुत अधिक मेल खाता है। दोनों अभियानों का उद्देश्य निकट भविष्य में एक स्वच्छ भारत की प्राप्ति है। घर, अपने आस-पास, पर्यावरण और स्कूल आदि में स्वच्छता को बनाये रखने में दूसरों को प्रोत्साहित करने के साथ ही पूरे भारत भर में स्वच्छता और सफाई व्यवस्था आरंभ करने के लिये बच्चे सबसे बेहतर माध्यम हैं।

रोजाना के जीवन में स्वच्छता को एक बड़ा भाग बनाने के साथ ही भारत को एक स्वच्छ भारत बनाने के लिये चल रहे स्वच्छता अभियान में सभी स्कूलों के बच्चे सक्रियता से भाग लेते हैं। स्वच्छता एक अभियान है, जिसका उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है जब सभी भारतीय नागरिक इसमें भाग लेंगे और रोजाना स्वच्छता को बनाये रखने में अपना सर्वोत्तम योगदान देंगे। 2014 में उत्सव की तारीख के अनुसार इस पाँच दिनों के लंबे मिशन का निम्न थीम था:

14 नवंबर का थीम था “स्वच्छ स्कूल, हमारे आस-पास और खेलने के मैदान”।

15 नवंबर का थीम था “स्वच्छ भोजन”।

17 नवंबर का थीम था “आलमारियों को साफ रखे”।

18 नवंबर का थीम था “पीने के पानी की सफाई करना”।

19 नवंबर का थीम था “स्वच्छ शौचालय”।

इस अभियान में जान डालने के लिये इसमें विभिन्न थीमें जोड़ी गई हैं, और यह सुनिश्चित किया जाता है कि, सभी विद्यार्थियों ने सक्रियता से स्वच्छता अभियान में भाग लिया और आस-पास के क्षेत्रों से कूड़े को हटाने के लिये कड़े निर्देशों का अनुसरण किया। कार्यक्रम से संबंधित बहुत सारी क्रियाओं को प्रस्तुत करने के लिये अपने शिक्षकों और प्रधानाध्यापक द्वारा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित, निर्देशित और निरीक्षण किया जाता है।


 

बाल स्वच्छता अभियान पर बड़ा निबंध 7 (600 शब्द)

प्रस्तावना

भारत में जो स्वच्छ भारत अभियान की लहर उठी है, इस क्रम में स्वच्छता अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए, 14 नवंबर को बाल दिवस के अवसर पर इसे बाल स्वच्छता अभियान के रुप में मनाया जाता है। 14 नवंबर को हमारे पहले प्रधान मंत्री, श्री जवाहरलाल नेहरू जी को बच्चों से बहुत लगाव था और वे चाहते थे कि उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रुप में मनाया जाए, इस लिये उनके जन्म उत्सव को बाल दिवस के रुप में मनाया जाता है। बच्चे किसी भी देश के भविष्य होते हैं और हम उन्हें जैसा सिखाएंगे वे वैसा ही आचरण करते हैं, तो क्यों न उन्हे स्वच्छता संबधी अच्छे आचरण सिखाए जाएं। इन्ही विचारों के साथ बाल स्वच्छता अभियान कि शुरआत की गई।

बाल स्वच्छता अभियान की शुरुआत

पहली बार इस योजना की शुरुआत 14 नवंबर 2014 को हमारी केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती मेनका गांधी जी द्वारा नयी दिल्ली के मैदानगढ़ी आंगनवाड़ी केंद्र पर किया गया। बाल स्वच्छता अभियान एक छः दिवसीय स्वच्छता कार्यक्रम है, जो 14 नवंबर से शुरु हो कर 19 नवंबर को समाप्त होता है, जोकि इंदिरा गांधी जी कि जन्म तारीख है। इस पांच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान बच्चों को स्वच्छता संबधी शिक्षा दी जाती है, विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन किया जाता है। इस प्रकार बाल स्वच्छता कार्यक्रम और स्वच्छ भारत अभियान भले ही दो अलग नाम हों, पर उनका उद्देश्य एक ही है। दोनो का उद्देश्य भारत में स्वच्छता को बढ़ावा देना है।

बाल स्वच्छता अभियान का उद्देश्य

बच्चों की खासियत होती है कि यदि हम उन्हें कोई काम सिखा दें, तो वे उसे आजीवन वैसे ही करते हैं, वे उसे आदत बना लेते हैं। इस लिये स्वच्छता अभियान को चलाने का इससे अच्छा तरीका और कुछ नहीं हो सकता। क्यों कि बच्चे ही किसी देश के भविष्य होते हैं और जब वे ऐसी अच्छी आदतों का पालन करने लगेंगे, तो निश्चित रुप से देश का भविष्य सुरक्षित रहेगा और हम अपने स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्य को और आसानी से पूरा कर पाएंगे। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता सिखाना, स्वच्छ भोजन, जल, शौचालय की आदतों के लिए प्रेरित करना है। जब देश के बच्चे इसका महत्व सीख लेंगे तो, उस देश का भविष्य जरुर सुरक्षित होगा जो कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।

कैसे मनाया जाता है बाल स्वच्छता अभियान

इस पांच दिवसीय स्वच्छता कार्यक्रम के दौरन बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाता है। जैसे कि अपने वातावरण को साफ रखना, घर, स्कूल को साफ रखना, कूड़े का पुनःउपयोग जैसे कि गीले कचड़े का खाद बनाकर और सूखे कचड़े का कोई उपयोगी वस्तु बनाना सिखाकर, भोजन करने से पहले हाथों को साबुन से धुलना। कुछ इस प्रकार इस पूरे सप्ताह में हर दिन को अलग-अलग थीम में बांटा जाता है, और उसके हिसाब से विभिन्न क्रियाकलाप कराए जाते हैं। इसके छः थीम हैं – स्वच्छ आंगनवाड़ी, साफ परिवेश, व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वच्छ भोजन, स्वच्छ जल, स्वच्छ शौचालय।

बाल स्वच्छता अभियान के लाभ

इस स्वच्छता अभियान के कई लाभ हैं जैसे कि, बच्चों में स्वच्छता संबंधी आदतें विकसित होंगी, जब बच्चे स्वयं जागरूक होगा तो वो स्वयं को कई बिमारियों से सुरक्षित रख सकता है। जब बच्चे स्वच्छता को लेकर इतने सजक हो जाएंगे, तो बड़ों को भी मजबूरन इन आदतों को सीखना पड़ेगा। इस प्रकार के और कई ऐसे लाभ हैं जिनके जरिये यह सिद्ध होता है कि बाल स्वच्छता अभियान कई मायनो में लाभकारी है। इस अभियान को आंगनबाड़ी केंद्रों, सभी स्कूलों, राज्य स्तर पर, पंचायती स्तर पर लागू किया गया है।

निष्कर्ष

हम यह कह सकते हैं कि हम इस अभियान के माध्यम से सरकार देश का भविष्य सुरक्षित कर रही है। बच्चों में खास तौर पर ज्यादातर बिमारियां गंदगी के कारण फैलती हैं और जब वे स्वयं सजक हो जाएंगे, तो कम से कम उनके मृत्यु दर में अवश्य कमी आएगी और इस प्रकार देश का बहुत सारा धन बचाया जा सकता है, जो बिमारियों पर खर्च हो जाता है। यह अभियान कई मायनो में लाभकारी है, इस लिये सरकार इसे बड़े जोर-शोर से चला रही है।

 

 

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