महासागरों पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव पर निबंध

ग्लोबल वार्मिंग आज के समय में चिंता का एक बड़ा विषय बन गया है। दूसरी चीजो के तरह इसका भी महासागरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग का महासागरों के पानी के कम होते गुणवत्ता स्तर के साथ ही विश्व भर में फैले विशाल जल स्रोतों पर भी कई तरह का नकरात्मक प्रभाव पड़ता है। पिछले कुछ दशको में ग्लोबल वार्मिंग का महासागरों पर काफी ज्यादे नकरात्मक प्रभाव पड़ा है जोकि दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

महासागरों पर ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव पर लम्बे तथा छोटे निबंध (Long And Short Essay on Impact of Global Warming on Oceans in Hindi)

यहा महासागरो पर ग्लोबल वार्मिंग के होने वाले प्रभावो के उपर विभिन्न लंबाई के निबंध दिये गये है, जोकि आपके परीक्षा या विद्यालय के कार्यो में काम आयेंगे। आप अपने आवश्यकता अनुसार इनमें से किसी भी निबंध का चयन कर सकते है।

महासागरों पर ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव पर छोटा निबंध - 1 (200 शब्द)

महासागर एक बहुत ही बहूमुल्य संपदा है, यह पृथ्वी के ज्यादेतर भूभाग पर फैले है और यह हमारा कर्तव्य है कि हम इनकी स्वच्छता को सुनिश्चित करें। हालांकि पूरे विश्व भर में मानवीय गतिविधियों द्वारा सिर्फ इन्हे नुकसान ही पहुचांया जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है, यह समस्या वायुमंडल में कार्बन डाइआक्साइड और मेथेन जैसी हानिकारक गैसो की बढ़ती मात्रा के कारण उत्पन्न हो रही है। शोधकर्ताओं द्वारा बताया गया है कि 1880 से अब तक हमारे ग्रह का तापमान 1.4 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ चुका है। जिसके कारण पृथ्वी के वायुमंडल में कई तरह के बदलाव आ चुके है और इस समस्या से महासागर सबसे बुरे तरह से प्रभावित हुए है।

हानिकारक गैसो के उत्सर्जन की तेजी से बढ़ती मात्रा के कारण महासागरों का अम्लीकरण होने लगा है। अब वह समुद्री जीवों के वृद्धि और जीवन के लिए पहले के तरह अनुकूल नही रहे। ग्लोबल वार्मिंग के ही कारण ग्लेशियर भी पिघलने लगे है, जिसके कारणवश महासागरो का विस्तार और समुद्र स्तर में वृद्धि होती जा रही है। इस बढ़ते समुद्र स्तर के कारण तटीय क्षेत्रो में बाढ़ो की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे उन क्षेत्रो में रहने वाले लोगो का जीवन भी प्रभावित हुआ है। इसके अलावा महासागरो द्वारा पृथ्वी के जलवायु निर्धारण में भी विशेष योगदान दिया जाता है, इन बदलावो के कारण पृथ्वी के मौसम चक्र में भी परिवर्तन हुआ है।

समुद्र के पानी के गुणवत्ता में हुए परिवर्तन के कारण कई सारी प्रजातियो के जीव इससे प्रभावित हुए है। जिससे कई जीव अब विलुप्त हो चुके है और कई विलुप्तता के कगार पर है, यदि यह स्थिति ऐसे ही बनी रही तो यह संकट भविष्य में और भी भयावह हो सकता है।


 

महासागरीय जीवन पर ग्लोबल वार्मिंग के होने वाले प्रभावो पर निबंध- 2 (300 शब्द)

प्रस्तावना

ग्लोबल वार्मिंग का महासागरीय जीवन पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा है। इस वैश्विक घटना से समुद्री धाराएं प्रभावित हुई है, महासागर स्तर में वृद्धि हुई है और महासागरो के जल का अम्लीकरण के साथ ही अन्य कई समस्याएं उत्पन्न हो गयी है। जिससे इन सुंदर जल निकायो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े है, इसके साथ ही समुद्र के समीप रहने वालो का जन-जीवन भी ग्लोबल वार्मिंग की इस घटना से बुरे तरह से प्रभावित हुआ है।

समुद्री जीवों पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग के कारण महासागरो के तापमान में निरंतर वृद्धि हुई है, यह बढ़ा हुआ तापमान कई सारे जीवों के जीवन के अनुकूल नही है। मछलियों की कई सारी प्रजातिया, कछुएं और अन्य समुद्री जीव इस बदलती वातावरण परिस्थिति के कारण जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे है। एक शोध में पता चला है कि कई सारे समुद्री जीव समुद्र के बदलते तापमान के अनुरुप खुद को ढाल नही पा रहे है, जिसके कारणवश वह विलुप्त होते जा रहे है। महासागरो के अम्लीकरण के कारण  समुद्री जीवों के जीवन पर एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण महासागरो के बढ़ते तापमान और अम्लीकरण के कारण इस स्थिति अभी और भी ज्यादे बदतर होने की संभावना है।

 

तटीय क्षेत्रो पर ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग के महासागरो पे होने वाले प्रभावो के कारण सिर्फ महासागरों के भीतर रहने वाले जीव ही इससे नही प्रभावित होते है बल्कि की बाहर रहने वाले जीव भी इससे उतने ही प्रभावित होते है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघलते जा रहे है, जिसके कारण महासागरो में विस्तार की घटनाएं सामने आ रही है और समुद्रो का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा तटीय क्षेत्रो में रहने वाले लोगो में भी हमेशा बाढ़ का डर बना रहता है, क्योंकि इन क्षेत्रो में अक्सर ही बाढ़ आती रहती है, जिससे इन स्थानो पर रहने वालो का जनजीवन प्रभावित हो जाता है।

निष्कर्ष

ग्लोबल वार्मिंग महासागरो के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है, हमारे महासागर समुद्री जीवों के लिए अब और सुरक्षित नही रह गये। महासागरो के लगातार बढ़ते स्तर के कारण समुद्री जीवों के लिए कई सारे खतरे उत्पन्न हो गए है। इसके साथ ही यह तटीय क्षेत्रो में रहने वालो लोगो के लिए भी एक गंभीर समस्या बन गया है। यह काफी दुखद है कि इसके परिणामो की जानकारी होने के बावजूद भी हम लोग इस समस्या के निवारण के लिए कुछ नही करते है।


 

समुद्री जीवों पर ओसियन वार्मिंग के प्रभाव पर निबंध - 3 (400 शब्द)

प्रस्तावना

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण पृथ्वी के सतह का तापमान बढ़ता जा रहा है, इसी कारण से महासागरो का तापमान भी बढ़ता जा रहा है। जिससे महासागरो का पानी और भी ज्यादे गर्म होते जा रहा है, इन्ही कारणो से समुद्री जीवन बुरे तरीके से प्रभावित हो गया है।

विभिन्न प्रकार के वनस्पतियो और जीवों को जीवित रहने के लिए भिन्न प्रकार के मौसम और वायुमंडलीय अवस्था की आवश्यकता होती है। समय के शुरुआत से ही महासागर कई सारे जीवों का घर है। सदियो से यह विशाल महासागर कई जीवों के लिए एक सुरक्षित घर रहे है पर अब यह उनके लिए और ज्यादे सुरक्षित नही रहे।

ओशियन वार्मिंग का समुद्री जीवों पर प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग के महासागरो पर कई सारे नकरात्मक प्रभाव है, जिससे महासागरीय जीवन प्रभावित होता है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण मछली, सील, सीबर्ड और पेंग्विन जैसे कई प्रकार के महासागरीय जीव इस समस्या से प्रभावित होते है।  इनमें से कई सारी प्रजातिया समुद्र के बढ़ते हुए इस तापमान के कारण जीवित नही रह पाएंगी और कुछ अभी भी इस समस्या से जूझ रही है। नीचे दिए गये तरीको से ग्लोबल वार्मिंग महासागरीय जीवों को प्रभावित करता है।

 

मछलियां

मछलियों की कई सारी प्रजातियों को जीवित रहने लिए विशेष तापमान की आवश्यकता होती है। महासागर के पानी के लगातार बढ़ते तापमान के कारण मछलियो की कई सारी रंगबिरंगी और खुबसूरत प्रजातिया अब विलुप्त हो चुकी है।

पेंग्विन

पेंग्विन ध्रुवीय क्षेत्रो में रहते है और अपना ज्यादेतर समय समुद्र में बिताते है। उन्हे जिन्दा रहने के लिए ठंडे पानी और ठंडे तापमान की आवश्यकता होती है। पर महासागरो के पानी का बढ़ता तापमान उनके जीवन के लिए एक संकट बन गया है। वह इस भयावह रुप से परिवर्तित हो रहे जलवायु परिवर्तन का सामना अब और नही कर पा रहे है, इसी जलवायु परिवर्तन के कारण ही उनमें तरह-तरह की बीमारियां उत्पन्न हो रही है।

सील

प्रशान्त महासगागर में भारी संख्या में सील निवास करते है। महासागरो के पानी के बढ़ते तापमान की इस समस्या ने सार्डिन और एन्कोवीज को ठंडे क्षेत्रो में पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया है। सील ज्यादेतर इन्ही दो समुद्री जीवों को खाते है और चूकि वह धीरे-धीरे ठंडे क्षेत्रो के तरफ पलायन कर रहे है इसलिए सीलो भी भूख के कारण मरते जा रहे है। उनके लिए भोजन तलाशना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है, इस वजह से ज्यादेतर सीलो के छोटे बच्चे कुपोषण और अन्य तरह के कई समस्याओं का शिकार होते जा रहे है।

निष्कर्ष

हमारे पृथ्वी का पूरा पर्यावरण और महासागर भी औद्योगिक क्रांति के पहले पूरे तरीके से शुद्ध और शांत थे। औद्योगिक क्रांति ने पृथ्वी के पूरे परिदृश्य को ही बदल दिया है। भले ही हमारे जीवन में औद्योगिक क्रांति द्वारा कई सारे सकरात्मक परिवर्तन हुए हो लेकिन पर्यावरण पर इसका बिल्कुल विपरीत प्रभाव पड़ा है। हमारे साफ-सुधरे और सुदंर महासागर तथा उसके भीतर रहने वाले जीव भी इस औद्योगिक विकास से उतने ही प्रभावित हुए है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण महासागरो का तापमान बढ़ता जा रहा है, जोकि समुद्री जीवों के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।


 

महासागरीय धाराओं, महासागरीय पानी का खारापन तथा महासागरीय तापमान पर ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव पर निबंध - 4 (500 शब्द)

प्रस्तावना

ग्लोबल वार्मिंग का महासागरों और समुद्री जीवों पर काफी बढ़ा प्रभाव पड़ता है। इसके कारण समुद्रो का तापमान बढ़ गया है, जिसके कारण पानी का अम्लीकरण हो रहा है और जिससे हमारे इन खूबसूरत महासागरो के बायोजियोकेम्सट्री में कई सारे परिवर्तन हुए है।

ग्लोबल वार्मिंग का समुद्री धाराओं पर प्रभाव

समुद्री धाराओं का बहाव बहुत दूर तक होता है और यह पृथ्वी के तापमान में बहुत महत्वपूर्ण योगदान निभाते है। ग्लोबल वार्मिंग के महासागरो के धाराओं को भी प्रभावित कर रहा है, जिससे कि हमारे जलवायु पर भी प्रभाव पड़ता है। जैसे कि बर्फीली चोटिया का पिघलना जिससे उनका ताजा पानी महासागरो में पहुंच जाता है, जिससे कि समुद्र के पानी का घनत्व कम हो जाता है। जिससे धाराएं कम और धीमी हो जाती है।

महासागरीय धाराएं अपने साथ कई सारे जरुरी पोषक तत्व भी लाती है जोकि महासागरीय जीवन के लिए जरुरी है। महासागरीय धाराओं के धीमा होने के कारण समुद्रो में अब बहुत कम मात्रा में ही पोषक तत्व पहुंच पा रहे है। जिसकें कारण भोजन श्रृंखला प्रभावित होती जा रही है। जिसका महासागरीय जीवों पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते प्रभाव के कारण यह समस्या आने वाले वर्षो में और भी ज्यादे भयावह होने वाली है।

महासागरो के पानी के खारेपन पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव

शोधों से पता चला है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण महासागरो के पानी का खारापन बहुत ही ज्यादे मात्रा में बढ़ गया है। चूंकि हवा दिन-प्रतिदिन गर्म होती जा रही है। इसलिए इसके पानी को सोखने की क्षमता बढ़ती जा रही है। जिससे काफी तेज मात्रा में पानी भाप बनकर उड़ रहा है और इसी कारणवश कुछ क्षेत्रो में सघन वर्षा होती जा रही है।

ऐसा देखा गया है कि नम क्षेत्र और ज्यादे नम होते जा रहे है तथा सूखे क्षेत्र दिन-प्रतिदिन और ज्यादे सूखते जा रहे है। इसी वजह से वर्षा की तुलना में वाष्पीकरण की उच्च दर वाले क्षेत्र सूखे होते जा रहे हैं, वही वर्षा की उच्च दर वाले क्षेत्रो में वाष्पीकरण की अपेक्षाकृत कम दर में के कारण अधिक बारिश होती जा रही है। जिसके कारण महासागरो के वह क्षेत्र जो खारे है वह और अधिक खारे होते जा रहे है तथा जो स्वच्छ और ताजे है वह और ताजे होते जा रहे है। इसके अलावा ग्लोबल वार्मिंग के कारण आईस कैप्स पिघलने के वजह से भी महासागरो का खारापन प्रभावित हुआ है, जिससे महासागरो के पानी में नमक की मात्रा कम होती जा रही है।

महासागरो के तापमान पर ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव

जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिग बढ़ने के साथ ही पृथ्वी का तापमान भी बढ़ते जा रहा है, इसके कारण ही महासागरो का तापमान भी बढ़ते जा रहा है। जिससे महासागरो का पानी और भी ज्यादे गर्म होते जा रहा है। जिससे समुद्री जीवन बहुत बुरे तरीके से प्रभावित होते जा रहा है। समुद्रो जीवों की कई सारी प्रजातिया इस जलवायु परिवर्तन के कारण खुद को अनुकुलित नही कर पा रही है। पानी के इस बढ़ते तापमान के कारण कई सारी मछलियों, कछुओं और अन्य कई समुद्री जीवों की प्रजातिया या तो विलुप्त होते जा रही है या तो कई गंभीर बिमारियो का शिकार होते जा रही है।

समुद्र के तापमान में वृद्धि के कारण वर्षा चक्र पर भी प्रभाव पड़ा है। जिसके कारण हमारे ग्रह के कई जगहो पर अनियमित वर्षा जैसे समस्याएं उत्पन्न हो गयी है।

निष्कर्ष

इस बढ़ती समस्या के कारण महासागर काफी बुरे तरीके से प्रभावित हुए है। जिससे पानी का खारापन बढ़ गया है, जिससे कुछ हिस्से ज्यादे खारे हो गए है वही कुछ हिस्से कम खारे है। इसने महासागरीय धाराओं को भी बुरे तरीके से प्रभावित किया है। ग्लोबल वार्मिंग के ही कारण महासागरो के तापमान में भी वृद्धि हुई है, जिससे महासागरीय जीवों के जीवन पर एक गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।


 

महासागरो पर ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव पर लम्बा निबंध- 5 (600 शब्द)

प्रस्तावना

ग्रीनहाअस गैसे जोकि ग्लोबल वार्मिंग के इस समस्या का मुख्य कारण है, पिछले शताब्दी से इनकी मात्रा वायुमंडल में काफी बढ़ गयी है। जिसके कारणवश ना सिर्फ पृथ्वी का तापमान बढ़ गया है बल्कि महासागरो पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। इस ग्लोबल वार्मिंग के समस्या के कारण महासागर और महासागरीय जीवन दोनो ही बुरे तरीके से प्रभावित हुए है, जिसका मुख्य कारण विभिन्न मानवीय गतिविधियां है।

महासागरो पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव

  • महासागरो के पानी का बढ़ता तापमान

महासागरो के पानी का तापमान बढ़ना ग्लोबल वार्मिंग के घटना के होने वाले सबसे बड़े प्रभावो में से एक है। महासागरो द्वारा हवा में से गर्मी सोख ली जाती है, जिसके कारण महासागरो के पानी का तापमान बढ़ जाता है। रिसर्च द्वारा पता चला है कि पिछले 50 वर्षो में हमारे ग्रह के कई महासागर काफी गर्म हो चुके है।

महासागरो का उपर का हिस्सा इस वायुमंडलीय गर्मी के कारण सबसे बुरे तरह से प्रभावित हुआ है, इसके साथ ही मध्यस्तर भी कुछ हद तक इसके चपेट में आ गया है। शोधकर्ताओं के इकठ्ठा की गयी सूचनाओं से पता चला है कि प्रत्येक दशक बीतने के साथ ही महासागरो के उपरी सतह का तापमान 0.2 डिग्री फारेनहाईट बढ़ता जा रहा है।

आने वाले समय में महासागरो के पानी का तापमान अभी और भी बढ़ने वाला है।

जिसका महासागरो के दोनो सतहो अर्थात उपरी सतह और गहरे महासागर दोनो जगह पड़ने वाला है।

  • महासागरीय जल का अम्लीकरण

इसके साथ ही कार्बन, मेथेन जैसी कई सारी हानिकारक गैसो के अवशोषण के कारण ही महासागरो का पानी और ज्यादे अम्लीय होते जा रहा है। इन गैसो के अवशोषण से होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं के कारण ही महासागर के पानी का ph  स्तर गिरता जा रहा है।

समुद्र के पानी के अम्लीकरण कारण समुद्री जीवों के जीवन के साथ ही पूरा वायुमंडल प्रभावित हो रहा है। इसके हानिकारक प्रभाव की कुछ घटनाओं में महासागरीय जीवों के प्रतिरक्षा तंत्र में कमी और कोरल ब्लीचिंग जैसी घटनाएं शामिल है।

  • मौसम में बदलाव

महासागरो द्वारा पृथ्वी के जलवायु निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी जाती है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण महासागरो पर प्रभाव पड़ता है, जिससे काफी बड़े स्तर पर जलवायु में परिवर्तन आता है। ग्लोबल वार्मिंग और महासागरो पर इसके प्रभाव के कारण ही आज के समय में क्षैतिज जलवायु जैसी परिस्थितिया उत्पन्न हो रही है। जिसमें पृथ्वी के कुछ स्थानो पर काफी भीषण वर्षा हो रही है और वही कुछ स्थानो पर सूखे की समस्या बनी हुई है। ग्लेशियरो और बर्फीली चोटियों के पिघलने का कारण तटीय क्षेत्रो में बाढ़ का खतरा पहले के अपेक्षा अब और भी ज्यादे मंडराने लगा है।

  • ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्री जीवों पर उत्पन्न हुए संकट

समुद्री जीव ईश्वर की बनायी हुई सबसे खूबसूरत कलाकृतियों में से एक है। इन प्यारे पेंग्विनो को हम कितना पसंद करते है जोकि अपना ज्यादेतर समय पानी में बिताते है। इसके आलावा हमें अर्ध-जलीय सीलो और बहुरंगी मछलिया भी बहुत प्रिय है जोकि समुद्र के इस चमकीले पानी में रहती है। लेकिन क्या हमें इस बात का पता है कि हम इन निरीह जीवों को कितना नुकसान पहुंचा रहे है? ग्रीन हाउस गैसो के स्तर में वृद्धि के कारण यह ग्लोबल वार्मिंग की समस्या उत्पन्न हुई है, जिसके कारण महासागरो पर इसके कई सारे नकरात्मक प्रभाव सामने आये है।

मछलियों की कुछ प्रजातिया और कुछ अन्य समुद्री जीवों का जीवन महासागरो के इस बढ़ते तापमान और अम्लीकरण के कारण संकट में पड़ गया है। जिसमें से कुछ विलुप्त हो चुके है तो कुछ विलुप्त होने के कगार पर खड़े है।

निष्कर्ष

हम मनुष्य अपने इन खूबसुरत महासागरों को को तबाह करते जा रहे है। हमारे इन महासागरो की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रही है। कई सारे नई कारखानो के निर्माण से फैक्ट्रियो द्वारा भारी मात्रा में हानिकारक गैसो का उत्सर्जन हो रहा है। उद्योगो से निकलने वाले अपशिष्टो के पानी में मिलने के कारण भूमि और जल प्रदूषण में बढ़ गया है जिसके कारण हमारे वायुमंडल में हानिकारक गैसों का स्तर को बढ़ गया है। वनों की कटाई, शहरीकरण, ईंधन संचालित वाहनों का उपयोग बढ़ना, जीवाश्म ईंधन और कई अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों का स्तर बढ़ गया है, जिससे महासागरो पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गये है।

शोधो द्वारा पता चला है कि यदि वायुमंडल हमने इन ग्रीन हाउस गैसो के उत्सर्जन की गतिविधियो पर काबू नही किया तो आने वाले समय में समुद्र का पानी और भी ज्यादे गर्म हो जायेगा, जिसका हमारे वायुमंडल पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

 

 

 

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