इसरो पर निबंध

इसरो(ISRO) यानि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation), भारत सरकार के लिए अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों, अंतरिक्ष अन्वेषण और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास से संबंधित कार्य करने वाली एक सार्वजनिक संस्था है। इसरो अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) के अंतर्गत संचालित होता है जिसका निरक्षण भारत के प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन पर दीर्घ निबंध (Long Essay on Indian Space Research Organisation in Hindi)

भारत सरकार की इस महत्वपूर्ण संस्था, इसरो से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में हम सभी आज इस निबंध के माध्यम से जानेंगे।

इसरो व इसकी उपलब्धियां - 1150 Words Essay

प्रस्तावना

भारत सरकार के सभी अंतरिक्ष अभियानों (Missions of ISRO) का संचालन इसरो के अंतर्गत ही होता है। इसरो संस्था के अंतर्गत समस्त अंतरिक्ष प्रक्षेपण और समय समय पर उपग्रहों का परीक्षण भी किया जाता है। भारत के विकास में और अन्य देशों के साथ खगोलशास्त्र की दौड़ में इसरो ने एक अहम भूमिका निभाई है। इसरो ने न सिर्फ अपने देश बल्कि अन्य देशों के उग्रह प्रक्षेपण में भी बढ़ चढ़ कर अपना योगदान दिया है। अपने सफ़ल अभियानों के बदौलत इसरो ने खगोलशास्त्र के क्षेत्र में विश्व भर में अपना वर्चस्व स्थापित कर चुका है।

इसरो की स्थापना (Establishment of ISRO)

1957 में सोवियत संग रूस द्वारा प्रक्षेपित पहले उपग्रह स्पूतनिक के बाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भविष्य में अंतरिक्ष कार्यक्रमों की आवश्यकता को महसूस किया। 1961 में परमाणु ऊर्जा विभाग के अध्यक्ष होमी भाभा की देख-रेख में अंतरिक्ष अनुसंधान को रखा गया था जिसके बाद 1962 में “अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति” का गठन किया गया जिसमें डॉ० विक्रम साराभाई सभापति के रूप में नियुक्त हुए।

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों के जनक डॉ विक्रम साराभाई के नेतृत्व में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी गई थी। 15 अगस्त 1969 को जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की स्थापना हुई उस वक्त इसका नाम “अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति (INCOSPAR)” था।

इसरो की भूमिका (Role of ISRO)

भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रमों के संचालन की जिम्मेदारी इसरो के कंधों पर वर्ष 1962 से ही है जिसका निर्वाहन इसरो ने बड़ी ही ईमानदारी से किया है। इसरो का मुख्यालय बैंगलोर में है और अहमदाबाद के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र में सेंसर और पेलोड विकसित किया गया है। रिमोट सेन्सिंग डेटा के लिए रिसेप्शन और प्रोसेसिंग सुविधाएं हैदराबाद में राष्ट्रीय रिमोट सेन्सिंग सेंटर में हैं।

बैंगलोर के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, जो पहले इसरो सैटेलाइट सेंटर था, में उपग्रहों का डिजाईन, संग्रहण, निर्माण तथा परीक्षण आदि किया जाता है। उपग्रहों को लांच करने के लिए लॉन्च वाहन तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में विकसित किए जाते हैं। उपग्रहों का प्रक्षेपण चेन्नई के समीप श्रीहरिकोटा द्वीप पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाता है। भूस्थिर उपग्रह स्टेशन के रख-रखाव के लिए मास्टर नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं हासन और भोपाल में स्थित हैं।

इसरो की उपलब्धियां (Achievements of ISRO)

इसरो ने ढेरों अंतरिक्ष प्रणालियों को विकसित किया जिसमें मौसम विज्ञान, दूरसंचार, टेलीविजन प्रसारण तथा आपदा चेतावनी की प्रणालियाँ भी मौजूद हैं। इसरो द्वारा 19 अप्रैल 1975 में निर्मित पहला उपग्रह “आर्यभट्ट” को सोवियत संघ ने लॉन्च किया था। भारत द्वारा निर्मित पहला लॉन्च वाहन “सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल 3” के द्वारा उपग्रह “रोहिणी” को कक्षा में 18 जुलाई 1980 में स्थापित किया गया था। इसरो ने पहला इनसैट उपग्रह तथा पहला आईआरएस उपग्रह 1988 में लॉन्च किया था।

इसरो ने रडार इमेजिंग सैटेलाईट-1, RISAT-1 को 2012 में लॉन्च किया। इसरो ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान, उपग्रहों को ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करने के लिए तथा भूस्थिर अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहन उपग्रहों को भूस्थिर कक्षा में स्थापित करने के लिए विकसित किया है। इसरों के द्वारा चंद्रमा का अवलोकन करने के लिए चंद्रयान-1 2008 में तथा चंद्रयान-2 2019 में लॉन्च किया गया था। 2013 में मार्स ऑर्बिटर मिशन के सफ़ल प्रक्षेपण से इसरो ने दुनिया भर में खूब ख्याति प्राप्त की।

इसरो के प्रमुख प्रक्षेपण (Major Launches of ISRO)

इसरो के द्वारा 21 नवंबर 1963 में पहले रॉकेट का प्रक्षेपण किया गया। 1965 में थुंबा स्थित अंतरिक्ष विज्ञान एवं तकनीकी केंद्र की स्थापना तथा 1967 में अहमदाबाद स्थित उग्रह संचार प्रणाली केंद्र की स्थापना की गई। 1972 में अंतरिक्ष आयोग और अंतरिक्ष विभाग की स्थापना की गई। 1979 में भास्कर-1 का प्रक्षेपण किया गया। 1981 में भास्कर-2 का प्रक्षेपण किया गया। 1984 में भारत तथा सोवियत संघ के संयुक्त अंतरिक्ष अभियान में राकेश शर्मा पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बनें। 1987 में SROSS-1 उपग्रह का प्रक्षेपण किया गया। 1990 में इनसैट-1D का प्रक्षेपण किया गया। 1997 में इनसैट-2D का प्रक्षेपण किया गया। वर्ष 2000 में इनसैट-3B का प्रक्षेपण तथा 2001 में जी एस अल वी D-1 का प्रक्षेपण किया गया।

इसरो के प्रक्षेपण यान (ISRO Launch Vehicle)

वर्ष 1970 में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में उपग्रह प्रक्षेपण यान परियोजना की शुरुआत की गई थी। इस परियोजना का लक्ष्य 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर 40 किलो के वजन वाले पेलोड को स्थापित करना था परंतु अगस्त 1979 में एसएलवी-3 का पहला प्रक्षेपण विफल रहा। आगे कुछ वर्षों बाद समय समय पर इसरो ने कई तरह के प्रक्षेपण यान विकसित किए जो निम्नलिखित हैं-

  • ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (Polar Satellite Launch Vehicle)

इसका प्रयोग 1994 में पहली बार किया गया यह दूसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है। इसकी मदद से 1994 से 2017 तक लगभग 257 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया जा चुका है जिसमें 48 भारतीय तथा 209 विदेशी उपग्रह भी शामिल हैं। पी एस एल वी, 2008 में चंद्रयान-1 तथा मार्स अर्बिटर अंतरिक्ष यान के सफ़ल प्रक्षेपण के बाद और अधिक कारगर और विश्वसनीय हो गया है।

  • भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (Geostationary Satellite Launch Vehicle)

इसे जियोसिन्क्रॉनस लॉन्च वेहिकल मार्क 2 के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रयोग सबसे पहले 2001 में पहली बार किया गया था। इसका प्रयोग 2 टन तथा 36000 किलोमीटर की ऊंचाई पर भूस्थिर कक्षा में स्थापित करने के लिए किया जाता है। इसके द्वारा अब तक कुल 13 प्रक्षेपण किए गए हैं जिसमें 4 सफ़ल रहें।

  • संवर्धित उपग्रह प्रक्षेपण यान (Augmented Satellite Launch Vehicle)

इस प्रक्षेपण यान का प्रयोग 1980 के दशक में किया गया था। इसके द्वारा 150 किलो के उपग्रहों को प्रक्षेपित किया जाता था। यह एक पाँच चरण ठोस ईंधन वाला रॉकेट है। इस प्रक्षेपण यान का प्रयोग अब नहीं किया जाता है।

  • भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क 3 (Geostationary Satellite Launch Vehicle Mark 3)

इस प्रक्षेपण यान की क्षमता जियोसिन्क्रॉनस लॉन्च वेहिकल मार्क 2 की दोगुनी है। इसका सर्वप्रथम प्रयोग 2014 में किया गया था। चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण इसी के द्वारा किया गया था।

इसरो की आगामी परियोजनाएं (Upcoming Projects of ISRO)

इसरो आगामी वर्षों में कुछ चुनिंदा परियोजनाओं को करने की योजना बना रहा है जिनमें चंद्रयान-3, आदित्य-1, भारतीय शुक्र आर्बिटर मिशन, मंगलयान-2 तथा बृहस्पति मिशन हैं। मंगलयान-2 को 2024 में लॉन्च करने का निश्चय किया गया है। इसरो ने भविष्य में पुन: प्रयोज्य लॉन्च वाहन-प्रौद्योगिकी प्रदर्शनकार (Reusable Launch Vehicle-Technology Demonstrator) (RLV-TD) विकसित करने की ओर बढ़ रहा है। इसमें विंग रीज्युलेबल लॉन्च वाहन टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाएगा। इसरो के द्वारा एकीकृत प्रक्षेपण यान का भी विकास किया जा रहा है।

निष्कर्ष

इसरो अपनी अंतरिक्ष परियोजनाओं के सफ़ल प्रक्षेपणों द्वारा दुनिया में एक अलग मुकाम हासिल कर चुका है। एक समय था जब भारत को अपने उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए अमेरिका और रूस जैसे देशों के आगे हाथ फैलाने पड़ते थे परंतु आज वो दिन है जब भारत खुद अमेरिका और रूस जैसे तमाम देशों के उपग्रहों को अपने प्रक्षेपण यान से प्रक्षेपित करता है। इसरो ने खुद के साथ साथ भारत वर्ष का भी नाम गर्व से ऊंचा कर दिया है। आज इसरो का वैज्ञानिक बनना अपने आप में एक सम्मान की बात है।

FAQs: Frequently Asked Questions

प्रश्न 1 – इसरो की स्थापना किसने कब और किसने की?

उत्तर – इसरो की स्थापना 15 अगस्त वर्ष 1969 में विक्रम साराभाई ने की थी।

प्रश्न 2 – इसरो का वार्षिक बजट कितना है?

उत्तर – इसरो का वार्षिक बजट लगभग 14 करोड़ है।

प्रश्न 3 – इसरो का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

उत्तर – इसरो का मुख्यालय बैंगलोर, कर्नाटक में स्थित है।

प्रश्न 4 – इसरो के वर्तमान निदेशक कौन हैं?

उत्तर – इसरो के वर्तमान निदेशक डॉ० के० शिवान हैं (2021)।

प्रश्न 5 – इसरो केंद्र सरकार के किस विभाग के अंतर्गत आता है?

उत्तर – इसरो केंद्र सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत आता है जिसका अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होता है।