महावीर जयंती पर निबंध (Mahavir Jayanti Essay in Hindi)

ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार मार्च-अप्रैल के महीने में महावीर जयंती मनाई जाती है। यह जैन धर्म का मुख्य त्योहार है जो महावीर की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं। जैन धर्म में विश्वास रखने वाले लोगों द्वारा महावीर जयंती का पर्व काफी हर्ष-उल्लास के साथ मनाया जाता है।

महावीर जयंती पर लघु और दीर्घ निबंध (Short and Long Essays on Mahavir Jayanti in Hindi, Mahavir Jayanti par Nibandh Hindi mein)

निबंध 1 (250 शब्द)

परिचय

मार्च-अप्रैल के महीने में जैन धर्म के लोगों द्वारा महावीर जयंती मनाई जाती है। यह महावीर स्मरण करने के लिए मनाया जाता है जो जैन धर्म के अंतिम और 24वें तीर्थंकर थे।

महावीर की कथा

इक्ष्वाकु वंश में राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला से महावीर का जन्म हुआ था। किंवदंती है कि गर्भावस्था की अवधि के दौरान महावीर की मां को कई शुभ सपने आते थे। जैन धर्म में, गर्भावस्था के दौरान इस तरह के सपने एक महान आत्मा के आगमन का संकेत देते हैं। राजा सिद्धार्थ ने रानी के देखे गए कुल सोलह सपनों की व्याख्या की थी।

यह भी माना जाता है कि महावीर के जन्म के दिन, देवराज इंद्र ने अभिषेक किया, जो सुमेरु पर्वत का अनुष्ठानिक अभिषेक है।

आध्यात्मिक घटना

जैन धर्म और धार्मिक तपस्वियों के लिए महावीर जयंती एक आध्यात्मिक अवसर है। वे अपना समय ध्यान और महावीर के श्लोकों का पाठ करने में बिताते हैं। आमतौर पर, पूजा और ध्यान का स्थान एक मंदिर होता है। भक्त देश भर में स्थित महत्वपूर्ण सामान्य और जैन मंदिरों की यात्रा भी करते हैं। कई जैन गुरुओं को मंदिरों और यहां तक ​​कि घरों में महावीर की शिक्षाओं और अहिंसा तथा मानवता के सिद्धांतों के बारे में प्रचार करने के लिए आमंत्रित भी किया जाता है। महावीर जयंती का पालन करने के लिए एक सख्त उपवास का अभ्यास भी महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है। महावीर के उपदेश के अनुसार भक्त मानवता, अहिंसा और सद्भाव को अधिक महत्व देते हैं।

निष्कर्ष

महावीर जयंती केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में जैन अनुयायियों का एक प्रमुख त्योहार है। जैन धर्म का मूल सिद्धांत अहिंसा है। यह महावीर द्वारा स्वयं उनके जीवन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत भी है।

निबंध 2 (400 शब्द)

परिचय

महावीर जयंती, जैन धर्म के चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर महावीर का जन्मदिन है। वह जैन धर्म के सबसे श्रद्धेय आध्यात्मिक शिक्षक थे। महावीर जयंती पर उनके भक्तों द्वारा महावीर की शिक्षाओं और उपदेशों का पाठ किया जाता है जो आमतौर पर मार्च-अप्रैल के महीने में आता हैं।

महावीर जयंती समारोह – प्राचीन रीति-रिवाज

महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व में बिहार राज्य में वैशाली जिले के पास कुंडग्राम में हुआ था। वह जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर थे और इतिहास से पता चलता है कि उनसे पहले तीर्थंकर की जयंती सदियों से मनाई जाती थी।

कभी समय बीतने के साथ-साथ जैन धर्म के ग्रंथ खो गए थे लेकिन सौभाग्य से महावीर की शिक्षाओं का मौखिक प्रसारण बना रहा। उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में स्थित एक पुरातत्व स्थल महावीर जयंती के उत्सव और महावीर की शिक्षाओं के ठोस प्रमाण प्रदान करता है। इस जगह को पहली शताब्दी ईसा पूर्व से संबंधित पाया गया था।

इससे पहले महावीर जयंती के समारोह अधिक आध्यात्मिक थे और उनमें आधुनिकता के उत्सव की भव्यता का अभाव था।

महावीर जयंती समारोह – आधुनिक रीति-रिवाज

महावीर जयंती के आधुनिक-दिवस समारोह प्राचीन काल की तरह ही आध्यात्मिक हैं; हालांकि, वे समय बीतने के साथ अधिक अक्खड़ और भव्य होते चले गए।

आज, जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा सड़कों पर कई जुलूस निकाले जाते हैं। आमतौर पर, जुलूस का नेतृत्व एक प्रमुख जैन गुरु करते हैं, उसके बाद उनके शिष्य और समुदाय के अन्य लोग उनका अनुसरण करते हैं। जुलूस पूरी तरह से तपस्वी नहीं है और जैन धर्म के लोग महिलाओं और बच्चों सहित जीवन के सभी क्षेत्रों में आस्था रखते हैं। वे महावीर के उपदेश गाते हैं और उनके चित्र पर पुष्प चढ़ाते हैं।

महावीर के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का बड़ा तांता लगा रहता है। भक्त आमतौर पर लंबे समय तक ध्यान करते हैं और महावीर के उपदेशों का पाठ करते हैं। कई मंदिर और समुदाय गरीबों के लिए मुफ्त भोजन का आयोजन करते हैं और कपड़े भी वितरित करते हैं। भौतिकवादी संपत्ति पर आध्यात्मिक शक्ति हासिल करने के लिए महावीर जयंती के अवसर पर भक्तों द्वारा एक सख्त उपवास भी मनाया जाता है। वे फल और अनाज खाते हैं और प्याज, लहसुन या अन्य इस तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करते हैं।

निष्कर्ष

महावीर जयंती एक खूबसूरत त्योहार है क्योंकि यह हमें मानवता का मूल चरित्र सिखाता है। महावीर ने जो भी उपदेश दिया, उसके मूल में प्रेम, सत्य और अहिंसा था। यद्यपि वे एक जैन तीर्थंकर थे, उनका प्राथमिक धर्म मानवता था और उनकी शिक्षाओं का सभी धर्मों के लोगों को पालन करना चाहिए।

निबंध 3 (600 शब्द)

परिचय

महावीर जयंती को ‘महावीर जन्म कल्याणक’ भी कहा जाता है। यह जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर – भगवान महावीर की जयंती के रूप में मनाया जाता है। वह जैन धर्म के तीर्थंकरों में भी अंतिम थे। जैन धर्म, तीर्थंकर को धर्म के आध्यात्मिक गुरु के रूप में वर्णित करता है।

महावीर जयंती कब मनाई जाती है?

भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व में चैत्र के महीने में हुआ था, जो कि पारंपरिक हिंदू लुनीसोलर कैलेंडर का पहला महीना है। उनका जन्म चैत्र महीने में आधे उज्जवल चन्द्रमा के तेरहवें दिन हुआ था। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, महावीर जयंती मार्च या अप्रैल के महीनों में आती है।

महावीर जयंती समारोह

महावीर जयंती को जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान महावीर की मूर्ति या चित्र के साथ जुलूस निकाला जाता है। इन जुलूसों को ‘रथ यात्रा’ कहा जाता है और भक्त महावीर को समर्पित भजन गाते हैं।

साथ ही, देशभर में स्थित महावीर मंदिरों में महावीर की प्रतिमाओं का उनकी जयंती पर विधिवत अभिषेक किया जाता है। इस अभिषेक को ‘अभिषेकम’ कहा जाता है। भक्त अपना समय ध्यान करने और महावीर के उपदेश सुनने में व्यतीत करते हैं।

जैन धर्म के पाँच नैतिक व्रतों – अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, और अपरिग्रह का पालन करने के लिए भक्त इसे याद करते हैं और इसकी प्रतिज्ञा करते हैं। वे लहसुन प्याज आदि से परहेज रखने वाले, फलों और सब्जियों के सख्त आहार का भी पालन करते हैं।

महावीर को भारत में अहिंसा पर उनकी शिक्षाओं के लिए भी याद किया जाता है। महात्मा गांधी ने भी कहा था कि महावीर अहिंसा के सबसे बड़े लेखक हैं। महावीर के जन्म के उपलक्ष्य में भक्तों द्वारा एक अहिंसा यात्रा भी की जाती है।

इस दिन की एक और महत्वपूर्ण गतिविधि में दान भी शामिल है। जैन धर्म से संबंधित भक्त, मंदिर, तपस्वी गरीब और जरूरतमंदों के लिए जो कुछ भी उनसे संभव होता है दान करते हैं। दोपहर का भोजन नि:शुल्क वितरित किया जाता है, प्रसाद और कुछ स्थानों पर मौद्रिक सहायता भी प्रदान की जाती है।

दिन भर ध्यान रखने और महावीर की पूजा करने के लिए देश भर के भक्त महत्वपूर्ण जैन मंदिरों में जाते हैं। कुछ महत्वपूर्ण जैन मंदिर इस प्रकार से हैं-जबलपुर में हनुमंतल, मध्य प्रदेश; माउंट आबू के पास दिलवाड़ा मंदिर; इसके अलावा गुजरात में पालिताना मंदिर।

महावीर जयंती का महत्व

भगवान महावीर सभी वक़्त के महानतम आध्यात्मिक गुरु के रूप में पूजनीय हैं। यहां तक ​​कि राष्ट्रपिता, अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी ने एक बार कहा था कि महावीर की तुलना में अहिंसा का दूसरा सबसे बड़ा शिक्षक कोई नहीं था। महावीर की जयंती मनाने से एक संदेश मिलता है कि अहिंसा हर समय का सबसे बड़ा धार्मिक सिद्धांत है और हमें अन्य जीवित प्राणियों के साथ एकजुटता से रहना चाहिए।

यह एक ऐसा अवसर है जब जैन धर्म के बारे में अन्य धर्मों के लोगों को पता चलता है और उन्होंने इसके सिद्धांतों की प्रशंसा भी की है। महावीर की शिक्षाएँ हमें जीवन की कठिनाइयों से जूझना, सकारात्मकता बनाए रखना और उम्मीद न खोना सिखाती हैं। उनका पूरा जीवन कठिन तपस्या के माध्यम से प्राप्त आत्मज्ञान का एक उदाहरण है, केवल तभी जब किसी को उन सिद्धांतों पर पूरा विश्वास है, जिनमें वह विश्वास करता है।

महावीर जयंती अन्य जीवित प्राणियों के कष्टों के प्रति सांप्रदायिक सद्भाव और विचार को भी बढ़ावा देता है। यह हमें जानवरों, मनुष्यों और अन्य प्राणियों की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करता है; जो किसी भी तरह की बीमारी, गरीबी या अन्य से पीड़ित हैं। यह किसी भी मानव के तपस्वी कर्मों को जाति, पंथ या धर्म के जनसांख्यिकीय विभाजनों से उपर रखता है।

निष्कर्ष

महावीर जयंती न केवल जैनों के लिए बल्कि अन्य आस्था और धर्म के लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह धर्म द्वारा निर्धारित मिसाल से परे है और अंतर-जाति, अंतर-धर्म और अंतर-प्रजातियों, करुणा और एकजुटता सिखाता है। मूल रूप से यह मानवता को मनाने और महावीर की शिक्षाओं को याद करने की एक घटना है। यह सभी धर्मों में विश्वास रखने वाले लोगों द्वारा मनाया जाना चाहिए।

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