भारत में कुपोषण पर निबंध

धरातल पर रहने वाले सभी प्राणियों को जीवित रहने तथा अपने दैनिक कार्यों को पूरा करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा उन्हें उनके आहार द्वारा मिलती है, परन्तु जब उनके आहार में लम्बे समय तक आवश्यक पोषक तत्वों की कमी बनी रहती है तो उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास ठीक से नहीं हो पाता। तथा उनका प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) भी कमजोर पड़ जाता है, जिसके कारण वो कई बीमारियों व कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। भारत में कुपोषण (Malnutrition in India) एक बहुत ही विकट रूप धारण करता जा रहा है, जिसको नियंत्रित करने के सारे प्रयास निरर्थक होते जा रहे हैं।

भारत में बढ़ते कुपोषण पर छोटे और बड़े निबंध (Short and Long Essay on Malnutrition in India in Hindi)

आज मैं ‘भारत में कुपोषण’ (Malnutrition in India) विषय पर निबंध के माध्यम से आप लोगों को कुपोषण के बारे में बताऊँगा, मुझे पूर्ण आशा है कि ये निबंध आप लोगों के लिए बहुत उपयोगी होगा। इसमें हम कुपोषण के सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे, जो वर्तमान में चर्चित है तथा जो आप के परीक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।

300 Words - Short Essay on Malnutrition in India

प्रस्तावना

हमारा शरीर स्वस्थ रहने तथा दैनिक कार्यों के लिए भोजन से ऊर्जा एवं पोषक तत्व (जैसे-प्रोटीन, वसा, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट तथा खनिजों) प्राप्त करता है लेकिन जब हम भोजन एवं पौष्टिक पदार्थों का सेवन अनियमित एवं अव्यवस्थित रूप से करने लगते हैं तो हमारे शरीर को पूर्ण पोषण नहीं मिल पाता और हम कुपोषण के शिकार हो जाते हैं।

कुपोषण के कारण (Reasons/Causes of Malnutrition)

कुपोषण के कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

  • अपर्याप्त आहार
  • भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी
  • धार्मिक कारण
  • आर्थिक कारण
  • ज्ञान का अभाव
  • अवशोषण एवं दोषपूर्ण पाचन
  • भोजन संबंधित दोषपूर्ण आदतें
  • अत्यधिक शराब पीना
  • लिंग भेद
  • बाल विवाह

कुपोषण के प्रकार (Types Kinds of Malnutrition)

मानव शरीर में उपस्थित पोषक तत्वों के आधार पर कुपोषण को दो भागों में बांटा जा सकता है

  • अल्प पोषण-

अल्प पोषण में मानव शरीर में एक या फिर एक से अधिक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।

  • अति पोषण-

पोषक तत्वों की अधिकता के कारण मानव शरीर में उत्पन्न विकृतियाँ (जैसे- पेट का बाहर आना, इत्यादि), अति पोषण को परिभाषित करती है।

बच्चों में कुपोषण के लक्षण (Symptoms of Malnutrition in Children)

 विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) तथा यूनिसेफ (UNICEF) ने कुपोषण के पहचान के लिए निम्नलिखित तीन लक्षणों को मुख्य माना है-

  • नाटापन (Stunting) -जब बच्चे की लम्बाई उसकी आयु की अनुपात में कम हो तब बच्चा नाटा कहलाता है।
  • निर्बलता (Wasting) - जब बच्चे का वज़न उसके लम्बाई के अनुपात में कम हो तब बच्चा निर्बल कहलाता है।
  • कम वज़न (Underweight) - जब आयु के अनुपात में बच्चे का वजन कम हो तब बच्चा ‘अंडरवेट’ कहलाता है।

निष्कर्ष

कंसर्न वर्ल्डवाइड (Concern Worldwide) और वेल्थुंगरहिल्फ (Welthungerhilfe) द्वारा मिलकर प्रकाशित वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 (Global Hunger Index-2021)में भारत का स्थान 101वाँ (कुल 116 देशों में) है जो स्पष्ट करता है कि भारत की एक बहुत बड़ी आबादी को दो वक़्तका रोटी भी नसीब नहीं होता है जिसके चलते वो कुपोषण से पीड़ित है। हालांकि भारत सरकार एवं राज्य सरकारों द्वारा अनेक योजनाएं बनाकर इसे नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है मगर वैश्विक भुखमरी सूचकांक एक अलग ही चित्र प्रदर्शित करता है। 2020 में वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत 94वें स्थान पर था, मगर 2021 में इसका स्थान बढ़कर 101वाँ हो गया है।

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1000 Words - Long Essay on Malnutrition in India

प्रस्तावना (कुपोषण का अर्थ - Meaning of Malnutrition)

सामान्य शब्दों में कहें तो कुपोषण का संबंध शरीर में पोषक तत्वों की कमी या अधिकता से होता है अर्थात एक लम्बे समय तक असंतुलित आहार के सेवन से शरीर में होने वाले पोषक तत्वों की कमी या अधिकता को कुपोषण कहते हैं। कुपोषण के चलते बच्चों का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है जिसके कारण वे कई बीमारियों के चपेट में आ जाते है।

बच्चों में कुपोषण के प्रकार (Types of Malnutrition in Children)

 विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार बच्चों में निम्नलिखित चार (4) प्रकार के कुपोषण होते हैं-

  • निर्बलता (Wasting)

यह समस्या बच्चों में अक्सर किसी बीमारी या इन्फेक्शन के बाद देखने को मिलती है इसमें अचानक से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिससे उनका शारीरिक विकास (जैसे-वजन) बाधित हो जाता है।

  • नाटापन (Stunting)

यह समस्या शिशु में भ्रूणावस्था के दौरान ही माता के खान-पान में हुई कमियों के कारण हो जाती है और इसका दृश्य प्रभाव शिशु के दो वर्ष का होते-होते दिखने लगता है। इस समस्या के कारण बच्चों के लम्बाई में पूर्ण रूप से विकास नहीं हो पाता है।

  • अधिक वजन (Overweight)

यह समस्या बच्चों में तब देखने को मिलती है जब उनमें किसी विशिष्ट पोषक तत्व की अधिकता हो जाती है। जैसे- वसा की मात्रा अधिक होने पर बच्चा मोटापे का शिकार हो जाता है।

  • कम वज़न (Underweight)

यह समस्या बच्चों में तब देखने को मिलती है जब उन्हें भोजन द्वारा पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाता है, इन पोषक तत्वों की कमी से उनका शारीरिक विकास धीमा पड़ जाता है।

विटामिन कुपोषण से होने वाले रोगों के लक्षण (Symptoms of Diseases caused by Vitamin Malnutrition)

कुपोषण एक बहुत घातक समस्या है जो मानव शरीर में असंख्य रोगों का कारण हो सकता है। कुपोषण जनित रोगों के कुछ मुख्य लक्षण निम्नलिखित है-

  • शारीरिक विकास का रूक जाना।
  • मांसपेशियों में ढीलापन एवं सिकुड़न।
  • त्वचा का रंग पीला होना।
  • त्वचा पर झुर्रियों का पड़ना।
  • कम कार्य करने पर भी थकान आना।
  • चिड़चिड़ापन एवं घबराहट होना।
  • आँखों के चारों ओर काला वृत्त बनना।
  • वजन का कम होना।
  • पाचन क्रिया का गड़बड़ होना।
  • हाथ, पैर आदि में सूजन आना।

कुपोषण की रोकथाम के उपाय (Measures to Prevent Malnutrition)

कुपोषण के रोकथाम के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं-

  • जनसंख्या को नियंत्रित करके कुपोषण पर काबू पाया जा सकता है।
  • फूड फोर्टिफिकेशन(Food Fortification)- इसके तहत अनेक पोषक तत्वों जैसे- विटामिन, आयरन तथा जिंक आदि को सामान्य खाद्य पदार्थों में मिला के दिया जाता है।
  • संतुलित आहार द्वारा।
  • 6 माह तक शिशु को माँ का दूध पिलाना चाहिए।
  • बाल विवाह पर रोक लगाकर।
  • गरीबी कुपोषण का मुख्य कारण है, इसलिए सरकार को चाहिए की गरीबी उन्मूलन की दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए।
  • लोगों में कुपोषण के प्रति जागरूकता लाकर।
  • कुपोषण संबंधित योजनाओं का सही क्रियान्वयन करके। इत्यादि

भारत में कुपोषण की स्थिति/आंकड़े 2021 (Status of Malnutrition in India 2021)

  • हाल ही में प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में विश्व बैंक (World Bank) ने कहा था कि वर्ष 1990 से 2018 तक भारत ने गरीबी से लड़ने में काफी हद तक सफलता पायी है और देश के गरीबी दर में बहुत कमी आयी है। गरीबी दर तकरीबन आधी रह गई है किन्तु कुपोषण और भूख की समस्या आज भी देश में बरकरार है।
  • वर्ल्ड्स चिल्ड्रेन रिपोर्ट (World's Children Report) 2019 कहता है, कि 5 वर्ष तक की आयु के प्रत्येक 3 बच्चों में 1 बच्चा कुपोषण से ग्रसित है।
  • यूनिसेफ (UNICEF) की रिपोर्ट बताती है कि सबसे कम वजन वाले बच्चों की संख्या वाले देशों में भारत का स्थान 10वाँ है।
  • ‘द लैंसेट’ (The Lancet) नामक पत्रिका द्वारा पता चलता है कि 5 वर्ष से कम आयु के 1.04 मिलियन बच्चों के मौतों में से दो-तिहाई बच्चों की मृत्यु कुपोषण के वजह से हुई है।इत्यादि

कुपोषण जनित रोग (Malnutrition Diseases)

कुपोषण का अर्थ होता है शरीर में पोषक तत्वों की कमी और जब शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है तो शरीर रोगों से ग्रसित हो जाता है। कुपोषण जनित रोग खासकर बच्चों एवं महिलाओं में ज्यादा होता है। कुपोषण जनित कुछ रोग निम्नलिखित है-

  • क्वाशिओरकोर (Kwashiorkor)

 यह बीमारी प्रोटीन एवं ऊर्जा की कमी के कारण होता है, इस बीमारी मेंशारीरिक विकास ठीक से नहीं हो पाता हैऔर शरीर में सूजन भी आ जाता है। यह बीमारी कम प्रोटीन तथा अधिक कार्बोहाइड्रेटयुक्त आहार के सेवन से होता है।

  • मरास्मस (Marasmus)

यह बीमारी भी प्रोटीन एवं ऊर्जा की कमी के कारण होता है, इस बीमारी में शरीर को आवश्यक कैलोरी की पूर्ति नहीं हो पाती जिसके कारण टिशू एवं मांसपेशियां ठीक से विकसित नहीं हो पाती।

  • माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी (Lack of Micronutrients)

जिंक, मल्टीविटामिन , फोलिक एसिड , विटामिन ए, कॉपर, आयरन इत्यादि जरूरी पोषक तत्वोंकी कमी से बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं।

भारत में कुपोषण से निपटने की सरकारी पहल (Government Initiatives to tackle Malnutrition in India)

कुपोषण से निपटने के लिए अनेक सरकारी योजनाएं बनाई गई है जिनमें से कुछ निम्न हैं-

  • राष्ट्रीय पोषण नीति 1993 (National Nutrition Policy 1993)

इस नीति को भारत सरकार ने 1993 में स्वीकार किया था। इसमें कुपोषण से लड़ने के लिए बहु-सेक्टर संबंधी योजनाओं की सिफारिश की गई थी।

  • मिड-डे मील कार्यक्रम (Mid-Day Meal Program)

इसकी शुरुआत वर्ष 1995 में केन्द्र सरकार द्वारा की गई थी। तत्पश्चात वर्ष 2004 में इस योजना में व्यापक परिवर्तन करते हुए मेनू पर आधारित ताजा, पका हुआ एवं गर्म भोजन देना प्रारम्भ किया गया।

  • भारतीय पोषण कृषि कोष (Nutrition Agriculture Fund of India)

महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 में भारतीय पोषण कृषि कोष (BPKK) की नीव रखी गई थी। इसका उद्देश्य विविधकृषि जलवायु क्षेत्रों में बेहतर एवं विविध पोषक तत्वों से युक्त उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।

  • पोषण अभियान (Nutrition Campaign)

साल 2017 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा पूरे देश में कुपोषण की समस्या को संबोधित करने तथा लोगों को जागरूक करने के लिये पोषण अभियान की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य महिलाओं, किशोरियों और छोटे बच्चों में कुपोषण तथा एनीमिया के खतरे को कम करना है।

निष्कर्ष

कुपोषण सिर्फ भारत का ही नहीं अपितु पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था का जानी दुश्मन है क्योंकि यह हमेशा मानव पूँजी पर निर्ममता से आक्रमण करके उसे तहस-नहस करने की फिराक में रहता है और मानव पूँजी किसी भी देश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है, ऐसे में सभी देश अपनी-अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने तथा अपने नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने के उद्देश्य से कुपोषण से जंग लड़ रहे हैं। कुछ देश कुपोषण के प्रति अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने में सक्षम भी सिद्ध हुए हैं परन्तु वैश्विक भूख सूचकांक के आंकड़े भारत जैसे घनी आबादी वाले देश के लिए खतरे की घंटी बजा रहे है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions on Malnutrition in India):-

प्रश्न.1 भारत का सबसे कम कुपोषित राज्य कौन सा है?

उत्तर- केरल।

प्रश्न.2 राष्ट्रीय पोषण नीति कब लागू हुई थी?

उत्तर- भारत सरकार द्वारा वर्ष 1993 में राष्ट्रीय पोषण नीति लागू की गई थी।

प्रश्न.3 न्यूट्रिशन वीक कब मनाया जाता है?

उत्तर- हर साल 1 सितंबर से 7 सितंबर तक।

प्रश्न.4 बच्चों में कुपोषण से होने वाले दो रोगों के नाम बताइये?

उत्तर- क्वाशिओरकोर (Kwashiorkor), मरास्मस (Marasmus)।

प्रश्न.5 वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 में भारत कौन से स्थान पर है?

उत्तर- वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 में भारत का 101वाँ स्थान है।