अंग तस्करी पर निबंध (Organ Trafficking Essay)

अंग तस्करी एक अवैध व्यापार है जिसका उद्देश्य व्यावसायिक लेनदेन के लिए अंग प्रत्यारोपण तथा किसी व्यक्ति की शोषण की जाने वाली गतिविधियां शामिल हैं। यहाँ दो अलग-अलग पहलू प्रस्तुत किये गये हैं, एक जो आपराधिक साधनों के लिए मानव की तस्करी कर रहे है और दूसरा वो जो व्यक्तिगत लाभों के लिए मानव अंगों का व्यावसायीकरण करते है।

अंग तस्करी पर लंबे तथा छोटे निबंध (Long and Short Essay on Organ Trafficking in Hindi)

आपकी परीक्षा में विषय के साथ आपकी सहायता के लिए यहाँ अंग तस्करी पर अलग-अलग लंबाई के निबंध दिये गए हैं। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी भी अंग तस्करी निबंध का चयन कर सकते हैं:

अंग तस्करी पर निबंध - 1 (200 शब्दों में)

'अंग तस्करी' के संबंध में प्रत्यारोपण के उद्देश्य के लिए मानव अंगों के व्यावसायीकरण के लिए अंगों का आदान-प्रदान, संरक्षण, संग्रह, परिवहन, आयात और निर्यात के इरादे से तस्करी की अवैध गतिविधि श्रृंखला शामिल है। यह मानव अंगों, ऊतकों, कोशिकाओं और शरीर के अंगों के होने वाले व्यापार को दर्शाता है।

बहुत से लोग अंग तस्करी की गतिविधियों में शामिल होते हैं। जो अंग दाताओं, बिचौलिये, ट्रांसपोर्टर चिकित्सा कर्मचारियों और अंगों के प्रत्यारोपण के लिए सर्जरी करने वाले डॉक्टरों की तलाश करते हैं। अंग तस्करी के पीड़ित या तो गरीब आर्थिक परिस्थितियों के कारण अपने अंगों को बेचते है या फिर अवैध तरीके से उनको अंग प्रत्यारोपण के लिए मजबूर करके या धोखे से उनके अंगो को निकाल लिया जाता है। अंगों की उच्च मांग और कम आपूर्ति के साथ-साथ बढ़ती गरीबी भी, इन अपराधों को जन्म देने के प्रमुख कारणों में से हैं।

समस्या यह है कि तस्करी में शामिल लोग को लोग इसे एक अपराध के रूप में नहीं देखते है। उन्हे लगता है कि इससे गरीबो को आर्थिक सहायता मिल रही है और इसके साथ जो व्यक्ति बिमार है उसे भी सहायता मिल रही है, जिससे दोनो ही पक्षो का लाभ हो रहा है। पर उनके द्वारा इसमे दाता और प्राप्तकर्ता के ऊपर होने वाले दीर्घकालिक प्रभावों को अनदेखा कर दिया जाता है।

अंग तस्करी वह मुद्दा है जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। अपराध को रोकने के लिए कानून को लागू करने की आवश्यकता है इसके साथ ही चिकित्सा संगठनों द्वारा प्रत्येक अंग प्रत्यारोपण के प्रत्येक विवरण को पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है।


 

अंग तस्करी पर निबंध – 2 (300 शब्दों में)

प्रस्तावना

प्रत्यारोपण के लिए मानव अंगों या शरीर के अन्य हिस्सों की तस्करी करना एक अवैध व्यापार है। अवैध प्रत्यारोपण में मानव शरीर से अंग को निकाल लिए जाते हैं और फिर मानव अंगो का पशु मांस के रूप में व्यापार किया जाता हैं। हालांकि मीडिया द्वारा पिछले कुछ दशकों में इस विषय में जागरूकता फैलाने के लिये कई कार्य किये गये है और कई अंग तस्करी और मानव तस्करी जैसे अपराधों को उजागर किया जा है।

मांग और आपूर्ति

वैश्विक स्तर पर स्वस्थ अंगों की काफी ज्यादे मांग है जो व्यावसायिक उद्देश्य के लिए अंग तस्करी जैसे अपराधों को बढ़ावा देती है। मृत दाताओं और जीवित दाताओं की संयुक्त अंग तस्करी, आपूर्ति अंगों की कुल मांग को पूरा नहीं कर पा रही है इनमें सबसे अधिक यकृत और गुर्दे जैसे अंग व्यापार किए जाते हैं। अंग तस्करी के पीड़ित ज्यादातर गरीब, अशिक्षित और समाज के सबसे कमजोर समूह के लोग होते हैं। कुछ मामलों में पीड़ितों को तस्करी करने वालों के द्वारा मजबूर या गुमराह किया जाता है और कुछ में तो पीड़ितों को कुछ राशि देकर इसके लिए तैयार किया जाता हैं।

 

अन्य सबसे कमजोर पीड़ित वे होते हैं जो बीमारी के इलाज के लिए जाते है और धोखे से उन्हें बिना बताये उनके अंग निकाल लिए जाते हैं। वैज्ञानिक उन्नति और चिकित्सा जगत में हुई तरक्की ने भी अंग तस्करी को बढ़ावा दिया है। गरीबी और निरक्षरता इस अपराध को बड़ाने के प्रमुख कारण हैं, इसमें पीड़ितों को अंग तस्करी के लिए बहुत कम या फिर बिल्कुल भी भुगतान नहीं किया जाता। तस्करी पीड़ित व्यक्ति किसी भी आयु वर्ग का हो सकता है। बाल तस्करी और मानव तस्करी पीड़ित भी अंग तस्करी के शिकार हुए हैं। अंग तस्करी के पीड़ित सर्जरी के कारण खराब स्वास्थ्य परिस्थितियों और प्रतिरक्षा प्रणाली से ग्रस्त हो जाते हैं।

निष्कर्ष

वैधानिक नियमों के द्वारा अंग तस्करी के रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी जा सकती है। सरकार के द्वारा अंगों की आपूर्ति में वृद्धि करके अंग तस्करी के काले बाजार पर लोगो की निर्भरता को कम करना चाहिए। इसके लिये कानून द्वारा अंग तस्करी में शामिल डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाना चाहिए।


 

अंग तस्करी पर निबंध – 3 (400 शब्दों में)

प्रस्तावना

अंग तस्करी का अर्थ प्रत्यारोपण के लिए मानव अंगों, ऊतकों, कोशिकाओं और शरीर के अन्य हिस्सों की तस्करी से है। उच्च मांग और कम आपूर्ति ने मुख्य रूप से अंग तस्करी के अपराध को बढ़ावा दिया है।

भारत में अंगों की तस्करी

भारत एक विकासशील देश है और हम सभी जानते हैं कि गरीबी और बढ़ती आबादी भारत की एक बहुत  बड़ी समस्याएं हैं जो कई आपराधिक गतिविधियों को जन्म देती हैं, जिनमे से एक अंग तस्करी भी है। कुछ क्षेत्रों में लोग बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं से वंचित हैं, तो वहीं अन्य क्षेत्रों में चिकित्सा विज्ञान इतना उन्नत हुआ है कि मानव अंगो का व्यक्तिगत लाभ के लिए व्यापार किया जा रहा हैं। हमारे समाज में कई  तरीकों से गरीब और कमजोर समूहों का शोषण किया जाता है।

भारत में अंगों की उच्च मांग और कम आपूर्ति और प्रत्यारोपण पर्यटन ने अंग तस्करी को बढ़ावा देने में विशेष योगदान दिया है। केवल कुछ प्रतिशत लोग ही प्रत्यारोपण कराने में समर्थ हैं, और उनके लिये भी प्रत्यारोपण के लिए समान समूह का दाता को ढूंढना मुश्किल हो जाता है। कानून के अनुसार परिवार के केवल कुछ रिश्तेदारों को ही अंग दान करने की अनुमति होती है जो संभावित दाताओं की संख्या को और कम कर देता है। मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर इस प्रकार के अंग तस्करी के अपराधों को बढ़वा देता है।

1994 में मानव अंग अधिनियम के निर्माण से पहले भारत में कानूनी रुप से अंग व्यापार होता था। उच्च मांग और कम लागत ने वैश्विक व्यापार को बढ़ावा दिया, जिससे भारत दुनिया के प्रमुख किडनी प्रत्यारोपण केंद्रों में से एक बन गया। भारत में ऐसे अपराधों की बहुत सारी घटनाएं हैं, कुछ मामलों में पीड़ित अपने कर्ज का भुगतान करने या अन्य वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अपना अंग दान करते हैं, तो वहीं कुछ अन्य मामलों में लोगों को अपहरण कर लिया जाता है और अंग देने के लिए मजबूर किया जाता है। एक और चौंका देने वाली बात तो यह है, कि अक्सर छोटे बच्चों को अंग तस्करी के लिए अपहरण कर लिया जाता है और उन्हें मार दिया जाता हैं।

 

हर साल ऐसे कई मामले सामने आते हैं जिनमें मृत शरीर गायब अंगों के साथ मिलते हैं। मानव अंग प्रत्यारोपण, चिकित्सा ज्ञान के बिना नहीं हो सकता और इससे यह पता चलता है कि डॉक्टर जैसे लोग भी इस प्रकार के मानव अंग तस्करी जैसे घिनौने कृत्यो में शामिल है। कई चिकित्सा फर्मों में डॉक्टर दाता को बिना बताये उसके अंग को निकाल लेते हैं या उसके लिए उन्हें बहुत कम भुगतान करते हैं या फिर उच्च भुगतान करने वाले मरीजों को बेच देते हैं। सबूत और तथ्यों की कमी के कारण अंग तस्करी के सही आंकड़े सत्यापित करना काफी मुश्किल है, परन्तु लगभग 42% अंगो का प्रत्यारोपण अवैध होने का अनुमान लगाया गया है।

निष्कर्ष

अंग तस्करी की रोकथाम के लिए कानून लागू करने के साथ-साथ, गरीबी और शिक्षा की कमी जैसे मुद्दों को भी ऐसे अपराधों को रोकने के लिए गंभीर ध्यान की आवश्यकता है।


 

अंग तस्करी पर निबंध - 4 (500 शब्दों में)

प्रस्तावना

प्रत्यारोपण का सम्बंध मानव अंगों, ऊतकों, कोशिकाओं और शरीर के अन्य हिस्सों की तस्करी से है। प्रत्यारोपण के लिए स्वस्थ मानव अंगों की वैश्विक मांग बढ़ रही है जबकि इसकी आपूर्ति में कमी आई है,  इन्ही कारणो की वजह से जब आपूर्ति मांग पूरी नहीं होती है तो लोग आपराधिक और अवैध साधनों का सहारा लेने लगते हैं।

अंग तस्करी- वैश्विक स्तर पर बढ़ता एक गंभीर संकट
कुछ अंग जैसे गुर्दा, फेफड़ा, दिल, पैनक्रिया आदि दाता के द्वारा दान किये जाते है या फिर अपराधियों द्वारा पीड़ितों के ऊपर अंगो को दान करने के लिए के दबाव बनाया जाता हैं। सभी अंगों को समान रूप से मूल्यवान नहीं माना जाता क्योंकि अंगों की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि इसे सफलता के साथ कितनी आसानी से प्रत्यारोपित किया जा सकता है। अंगो का मूल्य मांग और आपूर्ति के कारक पर भी निर्भर करता है, उदाहरण के लिए गुर्दे की आपूर्ति अधिक है क्योंकि मानव को यह पता है कि वो एक गुर्दे पर आसानी से अपना जीवन बिता सकता है। इसीलिए वो अपने गुर्दे बेचने के लिए तैयार रहते हैं।

लोग ब्लैक मार्केट ( जिसे स्कॉट कार्नी द्वारा मानव शरीर के अंगो के व्यापारिक लेनदेन के कारण रेड मार्केट की भी संज्ञा दी गयी है) के माध्यम से अपनी मांग को पूरा करते हैं और अवैध प्रत्यारोपण के लिए उच्च राशि का भुगतान करने के लिए तैयार रहते हैं। अंगों के विक्रेताओं और तस्करो को अमेरिका और जापान जैसे विदेशी देशों के अमीर खरीदारों से कई गुना का लाभ होता है परन्तु फिर भी वो अंग तस्करी बाजार के पीड़ितों को सिर्फ 5% से 10% का ही भुगतान करते हैं, वहीं कुछ अन्य मामलों में तो मानव तस्करी के पीड़ितों को अंग देने के लिए मजबूर किया जाता है और उन्हें किसी प्रकार का भुगतान भी नहीं दिया जाता है।

प्रत्यारोपण पर्यटन

प्रत्यारोपण पर्यटन शब्द विदेश में प्रत्यारोपण अंग के व्यापार को प्रदर्शित करता है। जिसमे रोगी प्रत्यारोपण के लिए तथा अंगों को खरीदने के लिए विदेश यात्रा कर सकता हैं। 'प्रत्यारोपण पर्यटन' शब्द का अर्थ व्यावसायिकता से है जो अंगों के अवैध व्यापार से संबंधित है, हालांकि सभी चिकित्सा पर्यटन अवैध नहीं होते। प्रत्यारोपण पर्यटन एक प्रमुख मुद्दा है, जिसमें अंगों के हस्तांतरण को उसी दिशा में स्थानांतरित किया जाता है जहां से अंगों की आपूर्ति की जाती हो।

अंग तस्करी की आपूर्ति दक्षिण से उत्तर की ओर या विकासशील से विकसित देशों की ओर होती है। विकसित देशों में अंगों की मांग राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध अंगों की आपूर्ति से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है। अंगों से अधिकतम लाभ आपूर्ति तथा आपराधिक समूहों की इस प्रकार की मांग को पूरा करने के लिए विकासशील देशों के व्यापार बाजारों से इसे ऊचे दाम पर खरीदा जाता हैं। कुछ लोग अंग प्रत्यारोपण के लिए अन्य देशों की यात्रा भी करते हैं तो वहीं कुछ मामलों में पीड़ितों को ही अंग प्रत्यारोपण के लिए विदेश जाना पड़ता है।

निष्कर्ष

अंग तस्करी एक वैश्विक मुद्दा है जिसे रोकने के लिए कड़े नियमों के पालन करने की आवश्यक्ता है। अंग तस्करी के मुद्दे पर विद्वानों के विस्तृत बहस के परिणामस्वरूप अंगों और अंग तस्करी मुद्दे की मांग पर ध्यान केंद्रित करने पर कई समाधान सामने आए हैं जिसके कारण, सरकारी नियम-कानूनो में वृद्धि के साथ-साथ अंग तस्करी के खिलाफ प्रतिबंध लगाया गया हैं।


 

अंग तस्करी पर निबंध - 5 (600 शब्दों में)

प्रस्तावना

मानव अंगों, ऊतकों और शरीर के अन्य अंगों की तस्करी प्रत्यारोपण के लिए अवैध व्यवसाय के तौर पर और उससे लाभ के लिए किया जाता हैं।

अंग तस्करी को बढ़वा देने वाले मुख्य कारण –

1.उच्च मांग और कम आपूर्ति

इन दिनों स्वास्थ्य विकारो में वृद्धि होने के कारण अंगों की बढ़ती मांग और अधिक बढ़ती जा रही है। लोग जीवित रहते या मृत्यु के बाद भी अपने अंगों का दान करने के लिए स्वैच्छिक रुप से तैयार नहीं होते हैं। जिसके कारण अंगों की आपूर्ति में कमी होती जा रही है। यही कारण है जब मांग और आपूर्ति पूरी नहीं होती है तो लोग अंग तस्करी जैसे अपराधों का सहारा लेते है।

2.निर्धनता

निर्धनता, अधिकांश आपराधिक गतिविधियों का मुख्य कारण है। जब लोगों को आर्थिक कमी होती है और उनके पास बेचने के लिए कुछ भी नहीं होता है तो वे अपने कर्ज या मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए अपने शरीर के अंगों को बोली लगाते है, फिर भले ही उन्हें उसके लिए वास्तविक राशि से कम भुगतान क्यों ना दिया जा रहा हो।

3.शिक्षा की कमी

शिक्षा की कमी होने के कारण लोग अंग तस्करी के दीर्घकालिक स्तर पर होने वाले स्वास्थ्य खतरो से अवगत नहीं है तथा कमजोर पीड़ित वर्ग सरकार के साधन और सहायता तथा सौदे के अवैध तरीको से अनजान कम राशि में ही अपने अंगों की तस्करी करने के लिए तैयार हो जाता है या फिर उन्हें असहाय कर अंगों को दान में देने के लिए मजबूर कर दिया जाता है।

4.युद्ध

युद्ध बड़े पैमाने पर लोगो और बच्चों के विस्थापन का कारण बन सकता है। युद्ध से पीड़ित लोग  अंगों के तस्करी के लिए आसान लक्ष्य माने जाते हैं और बड़ी संख्या में लोग और बच्चे ऐसी परिस्थितियों में अंग-तस्करी करने के लिए विवश होते है।

5.विकासशील क्षेत्र

विकासशील क्षेत्रों में लोग अंग तस्करी के मुख्य श्रोत माने जाते हैं। तस्कर मुख्य रूप से हमारे समाज के सबसे कमजोर लोगों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं क्योंकि इन लोगों को मनाना और तस्करी के लिए  कम पैसों में राजी कराना आसान हो जाता है।

6.चिकित्सीय संस्थाए

चिकित्सीय सहायता के बिना अंग प्रत्यारोपित करना संभव नहीं है और ना ही इसके पूर्व ज्ञान के बिना कोई प्रत्यारोपण हो सकता है। अंग प्रत्यारोपण जैसे आपराधिक गतिविधियां फर्मों में डाटा ट्रैक के बिना अवैध तरीको से किये जाते हैं। उचित चिकित्सा देखभाल पोस्ट सर्जरी की कमी के कारण शोषित पीड़ितों को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

7.कानूनी कार्यवाहियों में कमियां

कानून अभी भी अवैध गतिविधियों तथा अंगों की तस्करी करने वाले तस्करो को रोकने में पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया हैं। इसके अलावा अंग प्रत्यारोपण के अपराध में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कारवाई करने के लिए कानून को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया गया है, जिससे यह पूर्ण रुप से कारगर नही सिद्ध होता है।

8.मानव तस्करी

मानव तस्करी पीड़ितों का कई तरीकों से शोषण किया जाता है। नतीजतन, अधिक लालच के काऱम तस्कर हमेशा पीड़ितों के अंगों को उनके व्यक्तिगत लाभों के लिए बेचने के लिए तैयार रहते हैं और कभी-कभी तो मानव तस्करी का एकमात्र उद्देश्य पीड़ितों के अंगों को बेच कर उसका लाभ लेना होता है।

अंग तस्करी के प्रभाव

हमारे समाज में अंग तस्करी के कई नकारात्मक प्रभाव हैं। अंग तस्करी के लिए समाज के सबसे कमजोर और गरीब वर्ग के लोगों का शोषण किया जाता है। जिसके कारण समाज में अंगों की तस्करी के उद्देश्य के लिए बच्चों के अपहरण और मानव तस्करी जैसे गँभीर आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता हैं। कुछ मामलों में तो पीड़ितों को अनेक स्वास्थ्य समस्यओं का सामना करना पड़ता है तो कुछ में उनकी हत्या तक कर दी जाती है। अंगों की तस्करी में प्राप्तकर्ता और दाता दोनों को कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम उठाने पड़ते हैं। स्वस्थ अंगों की उच्च मांग ने भी गंभीर अपराधों को जन्म देती है तथा ऐसे अपराधों में शामिल चिकित्सीय संस्थाए लोगों के लिए खतरे का कारण हैं।

निष्कर्ष

नियम कानून के उचित कार्यान्वयन के द्वारा ही अपराधो के मूल कारणों को समाप्त किया जा सकता हैं। ऐसे ही कुछ अन्य उदाहरण है जिनके माध्यम से इन अपराधों को रोका जा सकता है। जैसे कि मृत दाताओं से अंगो की आपूर्ति के लक्ष्य को पूरा किया जाना चाहिए तथा इसके विषय में अधिक से अधिक जागरूकता फैलानी चाहिए और लोगों के मृत्यु के बाद अंग दान करने के लिए पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जैसे यदि कोई व्यक्ति मृत्यु के बाद कोई अपनी आंख को दान करना चाहता है तो इसके लिए वो व्यक्ति पंजीकरण करा ले। जिससे बाद में उसके मृत्यु के पश्चात अंगो को वैध रुप से किसी जरुरतमंद व्यक्ति को दान दिया जा सके।

 

 

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