अंग तस्करी पर भाषण (Organ Trafficking Speech)

विशेष रूप से आज भारत में अंग तस्करी एक बहुत ही बड़ा मुद्दा बन गया है। चिकित्सा, पुलिस विभाग, संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि और विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा स्कूलों और कॉलेजों सहित कई अन्य विभागो में इस मुद्दे की आलोचना करते हुए इसके बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किये जा रहे हैं।

अंग तस्करी पर लंबे तथा छोटे भाषण (Long and Short Speech on Organ Trafficking in Hindi)

हमने यहां अंग तस्करी पर कुछ उदाहरण को साझा किया हैं जो अनेक अवसरो पर आपकी मदद कर सकते हैं। आप इन उदाहरणों पर विचार कर खुद से अंग तस्करी पर भाषण तैयार कर सकते हैं। अंग तस्करी पर संक्षिप्त भाषणो का शैक्षिक संस्थाओ में उपयोग किया जा सकता है, वहीं लंबे भाषण का चिकित्सा संस्थानों आदि के उपयोगी साबित हो सकते है। हालांकि दोनों ही भाषण व्यापक रुप से जानकारी प्रदान करने वाले और महात्वपूर्ण हैं। आप इनकी सहायता से अपने भाषण को और भी अधिक प्रभावशाली बना सकते हैं।

अंग तस्करी पर भाषण - 1

सम्मानित प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और मेरे प्रिय छात्र - आप सभी को मेरा नमस्कार।

हर साल की तरह, इस साल भी हम सब आज के दिन स्कूल में वार्षिक उत्सव मनाने के लिए यहां एकत्रित हुए है। इस साल भी हमने सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए 'अंग तस्करी' के विषय को चुना है।

अंग तस्करी मूल रूप से प्रत्यारोपण के उद्देश्य से मानव अंगों की बिक्री को दर्शाता है। हालांकि अंग तस्करी वैध और अवैध दोनों तरीको के होते हैं, परन्तु लोग ज्यादातर अवैध तरीकों का उपयोग करते हैं, क्योंकि बहुत कम लोग ही प्रत्यारोपण उद्देश्य के लिए अपने अंग दान करने के लिए स्वेच्छा से सहमत हो पाते हैं।

प्रत्यारोपण वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के किसी एक अंग को निकाल कर उसे किसी अन्य व्यक्ति के शरीर में स्थानांतरित करने के लिए बेचा या दान कर दिया जाता है। जैसा कि मैने पहले ही बताया था कि अंग तस्करी के इच्छुक दाताओं की अनुमति के साथ ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। परन्तु हमे कहीं-कहीं इस बात का प्रमाण भी मिलता है, कि इस तरह के अधिकांश मामलों में लोगों को अंग दान करने के लिए मजबूर किया जाता है या फिर उन्हें पैसों का लालच दिया जाता है। जिसके कारण कभी-कभी लोग प्रत्यारोपण के दुषप्रभाव को जाने बिना इसके लिए तैयार हो जाते हैं।

लेकिन दुर्भाग्य से, ऐसी कई खबरें सामने आई हैं। जिनसे ये पता चला है कि लोगों को अवैध रूप से अंग तस्करी के लिए खरीदा जाता हैं और उन्हें बिना कुछ भुगतान दिए, उनके अंगों को निकालकर बेच दिया जाता हैं और उन्हें उचित भोजन और देखभाल के बिना अस्वस्थ स्थिति में छोड़ दिया जाता है। यह समस्या भारत के साथ-साथ दुनिया भर के कई हिस्सो में बनी हुई है। जहां गरीब और अशिक्षित लोगों का अंग तस्करी के उद्देश्य के लिए अपहरण कर लिया जाता है और बेच दिया जाता है।

इसके अलावा, कई कार्यकर्ता और जांचकर्ता यह बताते हैं कि ऐसे कई दलाल और बिचौलिये लोग होते हैं, जो अंगों की बिक्री और तस्करी के कार्यो द्वारा काफी मुनाफा कमाते हैं।

पिछले दशको में अस्वीकृत अंग तस्करी की संभावना को कम करने के लिए रक्त संबंधित प्रत्यारोपण के बीच अंग प्रत्यारोपण करने का सुझाव दिया गया था। परन्तु, अब चिकित्सा विज्ञान के बढ़ते विकास के कारण देश-विदेश में अंग तस्करी के प्रकिया को और भी आसान बना दिया है। इसके अलावा, मृत लोगों के अंग जैसे आंख, गुर्दा आदि चिकित्सा विज्ञान के माध्यम से किसी जरुरतमंद को प्रत्यारोपण किया जा रहा है। हालांकि इस प्रकार के प्रत्यारोपण की बढ़ती मांग और कम आपूर्ति होने के कारण अपराध की दरों में भी वृद्धि हुई है। जिसमे बहुत से गरीब और कमजोर लोग, विशेष रूप से छोटे बच्चें इसके शिकार हुए हैं।

अंग प्रत्यारोपण ने सिर्फ कई परिवारों को आशा की किरण भी दिखाई है, खासतौर पर उन लोगों को जिन्हें गुर्दे, आंख और यकृत आदि की आवश्यक्ता थी। हालांकि अंग तस्करी कई देशों में पहले से ही प्रतिबंधित है। इसके अलावा अगर कोई अस्पताल अवैध तरीके से अंग प्रत्यारोपण करते हुए पाया जाता है तो उसके उपर कानूनी कारवाई के साथ उसके लाइसेंस को भी रद्द किया जा सकता है।

अवैध अंग तस्करी पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह रोगी के स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ-साथ उसके शरीर के बाकि अंगों को नुकसान पहुंचाता है। गैरकानूनी अंग तस्करी के अधिकांश मामलों में दाताओं को उपेक्षित और अनुपयुक्त स्थिति में छोड़ दिया जाता है। जिसके परिणामस्वरूप या तो वो मर जाता हैं या बहुत बेकार स्थिति में जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर हो जाता हैं।

सरकारी विभागों और मीडिया के साथ गैर-सरकारी संगठनों के अधिकांश लोग इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं। हालांकि सरकार को ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए अंग तस्करी में लिप्त लोगो के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

आज इस भाषण के माध्यम से, मैं अधिक से अधिक युवाओं से अपील करना चाहता हूं कि उन्हें इस गंभीर मुद्दे से अवगत रहना चाहिए और इस प्रकार की सामाजिक बुराईयों के समाप्त करने के लिए नये विचारों और समाधानों को उजागर करना चाहिए।

धन्यवाद!

 

अंग तस्करी पर भाषण – 2

माननीय अध्यक्ष, आदरणीय डॉ, आदरणीय  प्राध्यापक और मेरे प्रिय विद्यार्थियों - आप सभी को शुप्रभात!

सबसे पहले, मैं इस सत्र में शामिल होने के लिए आप सभी का धन्यवाद करना चाहता हूं। आज, हम 'अंग तस्करी' जैसे एक बहुत ही गंभीर विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं, अंग तस्करी एक ऐसा मुद्दा है जिसने हमारे देश को बुरी तरीके से प्रभावित किया है और जिसके कारण; हमारे देश में अपराध की दर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

वास्तव में, अंग तस्करी दुनिया की सबसे क्रूर सच्चाईयो में से एक है, रिकॉर्ड के अनुसार चीन, इंडोनेशिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत और अन्य कई देशों के ज्यादा से ज्यादा लोग अवैध रूप से अंग तस्करी में शामिल हैं। कारण बहुत स्पष्ट है कि प्रत्यारोपण के लिए विशेष रूप से किडनी की मांग सबसे अधिक हैं। चूंकि, किडनी खराब हो जाने के कारण लोग ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाते। इसीलिए लोग वैध या अवैध तरीको से इसे प्राप्त करने के लिए अपराध का सहारा लेते हैं।

अंग तस्करी की समस्या आज हमारे समाज द्वारा सामना किये जाने वाले बड़े मुद्दों में से एक है। यह ड्रग इंजेक्शन द्वारा या सर्जरी अथवा शैल्य चिकित्सा के माध्यम से किसी भी व्यक्ति के अंग को चोरी करने या मृत व्यक्ति के अंगों की तस्करी करने की प्रक्रिया को प्रदर्शित करता है, हालांकि इन अंगों को रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के काले बाजारों में बेचा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हर साल प्रत्यारोपण होने वाले कुल 70,000 गुर्दो का लगभग 1/5 वां भाग काले बाजार से अवैध रूप से प्राप्त किया जाता है। यह अंग तस्करी के व्यापक नेटवर्क द्वारा संभव बनाया गया है, जो अब वैश्विक व्यापार बन गया है और दुर्भाग्य से यह अभी भी बढ़ता ही जा रहा है।

कई लोगों के जीवित रहते या मरने के बाद भी अपने अंगों को दान करने से इनकार करने के कारण, अंग तस्करी की मांग में बढ़ोतरी हुई हैं। गुर्दे की आवश्यकता वाले मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कि गुर्दे के प्रत्यारोपण के लिए भारी पैसा चुकाने के लिए तैयार हैं। कई अस्पताल भी अंग तस्करी या प्रत्यारोपण के अवैध तरीको में शामिल होकर भारी मुनाफा कमा रहे हैं।

फेफड़ों, दिल, यकृत, गुर्दे और आंख आदि जैसे अंगों की मांग दिन-प्रतीदिन बढ़ती जा रही है और सर्जरी के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को इसे प्रत्यारोपित भी किया जा रहा है। कई अस्पताल काले बाजार से संबंध बनाकर भारी पैसा कमा रहे हैं।

हम सभी यहां अंग तस्करी के गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए इकट्ठे हुए हैं, इसलिए मैं आप सभी विशेष रूप से युवा डॉक्टरों और छात्रों से अपील करना चाहता हूं कि आपको हमेशा इस तरह के अभ्यास के खिलाफ खड़े रहना चाहिए। हालांकि आप सभी मरीज के प्रति अपने कर्तव्यों को जानने में सक्षम और नैतिक हैं, परन्तु हमेशा आपको इस तथ्य को स्वीकारना होगा कि लालच किसी भी रूप में आपके पास आ सकता है।

 

हमारा अस्पताल हमेशा दवाओं और विशेष भावनाओ के साथ रोगियों का इलाज करने के लिए प्रसिद्ध रहा है। हम बिना किसी कीमत के गरीब मरीजों का इलाज करने के लिए भारी मात्रा में धन भी एकत्रित कर रहे हैं। इन कार्यों ने न केवल हमें प्रसिद्धि अर्जित करने में मदद की है बल्कि की हमें हमारे प्रत्येक मरीज की मदद करने के अपने वादे को भी पूरा करने में भी सहायता की हैं।

भारत में जहां गरीब लोगों की संख्या अधिक है, वहीं पैसों के लिए अंग प्रत्यारोपण करना अत्यधिक प्रभावशाली है। गरीब और अशिक्षित लोग पैसों की लालच में इससे होने वाले स्वास्थ्य विकार को जाने बिना आसानी से इसके प्रति आकर्षित हो जाते हैं।

मैं इस माध्यम से सरकार, मीडिया और आप सभी से अपील करना चाहता हूं कि इस प्रकार के अवैध अभ्यास को तुरंत रोकने का प्रयास करे और हर किसी को नैतिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करे।

धन्यवाद!


 

अंग तस्करी पर भाषण – 3

सम्मानित संस्थापक, अभिभावक गण और हमारे गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के सदस्य – आप सभी को शुप्रभात!

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि, पांच साल पहले इसी तारीख को, हमारे राज्य में अंग तस्करी के अपराध को  रोकने के उद्देश्य के लिए इस एनजीओ की स्थापना हुई थी। उस समय इस लक्ष्य को प्राप्त करना मुश्किल लग रहा था, हालांकि फिर भी हमें विश्वास था कि यह असंभव नहीं है। मुझे यह बात साझा करते हुये बेहद प्रसन्नता हो रही है कि हम अपने मिशन में काफी हद तक सफल रहे हैं और महज पांच वर्षों में हमने राज्य में दो और शाखाएं स्थापित कर ली हैं।

आज, हम सब यहां हमारे एनजीओ की 5वीं वर्षगांठ को मनाने और अपने मिशन की सफलता और प्रत्येक सदस्य के कार्यों और जिम्मेदारियों की प्रशंसा करने के लिए एकत्रित हुए है।

मुझे भाषण देने की अनुमती प्रदान करने के लिए मैं आप सभी को शुक्रिया कहना चाहता हूं। मैं आप सभी के समक्ष अंग तस्करी के बारे में कुछ जानकारी साझा करना चाहता हूं और उम्मीद करता हूं कि यह सूचनात्मक चर्चा आप सभी के लिए लाभदायक हो।

मानव ऊतकों, अंगों, और शरीर के अन्य हिस्सों को अंग तस्करी या प्रत्यारोपण के उद्देश्य के लिए व्यापार किया जाता है। अंग प्रत्यारोपण कई ज़िंदगी बचाता है, तो वहीं व्यक्ति के रक्त समूह के मेल न खाने के कारण ये चिंता का विषय भी बन जाता है, क्योंकि यह अवैध तस्करी के कारण दाता के साथ-साथ प्राप्तकर्ता के स्वास्थ को भारी नुकसान पहुँचा सकता है। जिसके कारण उसकी मत्यु संभव हैं।

2017 के रिपोर्ट के अनुसार, चीन, इंडोनेशिया, भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और कई अन्य देशों में अंग प्रत्यारोपण के दस्तावेजी मामलों में वृद्धि हुई है। आंकड़ों से यह भी पता चला है कि खासकर किडनी प्रत्यारोपण के लिए लगभग 123,000 लोग (महिलाएं, पुरुष और बच्चे) दाता की सूची में शामिल थे तथा वैध या अवैध रूप से अंग प्राप्त करने के लिए हर दिन लगभग 25 लोगो की जान चली जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा साझा की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010 में काले बाजार में मनुष्यों के लगभग 11,000 अंग पाए गए थे। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, औसतन 1 अंग प्रतिदिन हर एक घंटे में बेचा जाता है। इससे यह पता चलता है कि मानव अंगों की मांग और आवश्यकता कितनी अधिक बढ़ गई है। ज्यादातर मामलों में अंगों की बढ़ती मांग काले बाजार में शामिल लोगों द्वारा अन्य लोगों की हत्या करने का कारण बन जाती है।

हालांकि यह माना जाता है कि अमेरिका, ब्रिटेन जैसे विकसित देश अंग तस्करी में शामिल नहीं हैं, रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के कुछ बड़े अस्पतालों को भी अंगों की अवैध तस्करी करने में लिप्त पाया गया था। हालांकि यू.एस. में अंगों के दान को वैध बनाया गया है, वहीं उन देशों को जिन्हें विकासशील या अविकसित माना जाता है, वहां के कमजोर लोगों को अपहरण कर गैरकानूनी तरीको से उनके अंग निकाल लिए जाते हैं और काले बाजार में बेचे दिये जाते हैं। कुछ बच्चों को व्यापार और गुलामी के लिए मजबूर किया जाता है और वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके अंग उनकी जानकारी के बिना बेच दिये जाते हैं। इसके अलावा, बहुत से लोग ऐसे होते है, जो झोपड़पट्टी जैसे इलाकों में निवास करते हैं और आजीविका कमाने के लिए अपने शरीर के अंगों जैसे गुर्दे, यकृत, आंखें इत्यादि बेच देते हैं।

अंत में, मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हमें अंगों की तस्करी के इस व्यापार गिरोहो को कम करने तथा उसे जड़ से समाप्त करने के लिए अपना पूर्ण योगदान देना चाहिए।

धैर्य के साथ मेरा भाषण सुनने के लिए मैं आप सभी को धन्यवाद करना चाहता हूं।

आपका दिन शुभ हो!


 

अंग तस्करी पर भाषण – 4

सम्मानित प्रिंसिपल, शिक्षकगण और मेरे प्रिय छात्र - आप सभी को नमस्कार!

मुझे आज यहां हमारे देश को अत्यधिक प्रभावित करने वाली गंभीर समस्या “अंग तस्करी” पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया हैं।

अंग तस्करी, अवैध साधनों के माध्यम से काले बाजार में अंगों के बेचने के कार्य को संदर्भित करता है।

प्रत्यारोपण के उद्देश्य के लिए स्वस्थ अंगों की वैश्विक मांग के परिणामस्वरूप अंगों के काले बाजार का निर्माण हुआ है जिसके कारण अंग तस्करी अब एक वैश्विक मुद्दा बन गई है। हालांकि लगभग हर देश में अवैध अंग तस्करी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, परन्तु फिर भी इसके अस्तित्व में होने के कारण यह संभवतः आपके आस-पास के चिकित्सा केंद्र में अभी भी जारी हो सकता है।

विशेष रूप से गुर्दे के लिए अंगों की बढ़ती मांग ने निराशाजनक और सामान्य गतिशीलता को जन्म दिया है। झोपड़ियों में रहने वाले सबसे वंचित और गरीब लोगों को ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, यूरोप, इज़राइल और दुनिया के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों को वैश्विक रूप से गुर्दे या अन्य अंगों की आपूर्ति करने के लिए उपयोग किया जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, कुछ आतंकवादी समूह भी अंगों के व्यापार में शामिल हो सकते हैं।

अंग तस्कर पर्दे के पीछे से अपना कार्य करते हैं और कानून को धोखा देने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। वे तस्करी करने वाले व्यक्ति को धोखा देते हैं और अपने अंगों को बेचने के लिए उन्हें मजबूर करते हैं। वहीं कुछ तस्करों द्वारा कभी-कभार लोगों को मामूली बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा लिया जाता है और रोगियों की जानकरी के बिना उनके अंगों को निकाल कर अंग तस्करी के काले बाजार में बेच दिये जाते हैं। इसके आलावा कुछ लोगों को अपने अंग दान करने के लिए पैसों का लालच दिया जाता है और कुछ को इसके लिए मजबूर किया जाता हैं।

इस तरह के गैरकानूनी कार्यो को तुरंत बंद कर देना चाहिए। हालांकि सरकार तथा गैर-सरकारी और गैर-लाभकारी संगठनों को अवैध तस्करी के खिलाफ सख्त नियम और सजा के मानदंडो का निर्माण करने के साथ-साथ इन कृत्यों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाने चाहिए।

यह भी देखा गया है कि एशिया, चीन जैसे अन्य अविकसित देशों में, अंग तस्करी करने के लिए तस्कर लोगों की तलाश में घुमते रहते है, इसके लिए वे मध्यस्थ ग्रामीण इलाकों में जाते हैं और गरीब परिवारों और बच्चों को अपना लक्ष्य बनाते हैं। वे उन्हें पैसों का लालच देते हैं और अंग दान करने के लिए मनाते हैं।

गरीबी और शिक्षा की कमी होने के कारण, अंग तस्करी भी भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। शिक्षा और रोजगार ऐसे कुछ साधन हैं जिनके माध्यम से इस गंभीर अपराध को रोका जा सकता है। चूंकि अविकसित देशों में अधिकांश लोगों के अशिक्षित होने के कारण वो अवैध तरीको से अंग दान करने के नुकसान को समझ नहीं पाते। यदि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों द्वारा उचित उपाय औऱ इलाज ना किया जाये तो अंग दाताओं को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ सकता है।

जनसमुदाय के बीच जागरूकता पैदा की जानी चाहिए, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में ताकि लोग अवैध अंग तस्करी के पेशेवरों के खिलाफ सचेत हो सके।

विद्यालय और कॉलेज प्रशासनों को इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए और छात्रों को अंग तस्करी के गैरकानूनी साधनों के दुष्प्रभाव से अवगत कराने के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए। छात्रों के समूह को ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाना चाहिए और ऐसे क्षेत्रों में जागरूकता और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

दोस्तों, इस भाषण के माध्यम से मैं आप सभी को खासतौर से युवा पीढ़ी को यह अपील करना चाहता हूं कि वे इस गंभीर अपराध को रोकने में अपना योगदान दे।

धन्यवाद!

 

 

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