बाल मजदूरी पर भाषण

भाषण देना, समूह चर्चा आदि छात्र के स्कूली जीवन की कुछ महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं क्योंकि इस तरह की गतिविधियाँ, उनके लोगों के सामने अपने विचारों को रखने के डर को खत्म करने के द्वारा उनमें नेतृत्वकारी गुणों को विकसित करने में मदद करती हैं। आज-कल, विद्यार्थियों के लिए बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा के कारण शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा अन्य गतिविधियों में भी भाग लेना बहुत आवश्यक हो गया है। उन्हें मौका मिलने पर ऐसी गतिविधियों में अवश्य भाग लेना चाहिये और भाषण प्रतियोगिता में भाग लेना ही केवल इकलौती कला है जिससे कि वो सबके समाने अपने विचारों को रखने की झिझक को खत्म कर सकते हैं। यहाँ हम बाल श्रम पर बहुत से भाषण प्रदान कर रहे हैं। सभी बाल श्रम पर भाषण बहुत ही सरल और साधारण शब्दों में लिखे गए हैं जिसमें से, आप किसी भी भाषण को अपनी आवश्यकता के अनुसार चुन सकते हैं।

बाल मजदूरी (बाल श्रम) पर भाषण

बाल श्रम पर भाषण 1

आदरणीय प्रधानाध्यापक, सर, मैडम और मेरे प्यारे सहपाठियों, आप सभी को मेरा नमस्कार। मेरा नाम...........है। मैं कक्षा............में पढ़ता/पढ़ती हूँ। हम सब यहाँ इस अवसर.......... को मनाने के लिए उपस्थित हुए हैं। इसलिए मैं बाल श्रम जैसे बड़े सामाजिक मुद्दे पर भाषण देना चाहता/चाहती हूँ, जो देश के विकास में बाधा डाल रहा है। सबसे पहले मैं अपने कक्षा अध्यापक को धन्यवाद कहना चाहूँगा/चाहूँगी, जिन्होंने मुझे अपने विचार आप लोगों के सामने रखने का मौका दिया।

बाल मजदूरी

मेरे प्यारे मित्रों, बाल श्रम एक बहुत बड़ा सामाजिक मुद्दा हो गया है जो राष्ट्र के विकास को बहुत बड़े स्तर पर प्रभावित करता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि, बच्चे देश का भविष्य होते हैं तो फिर लोग क्यों बाल श्रम को अपने थोड़े से फायदे के लिए प्रयोग कर रहे हैं। वो हमारे नजरिये से क्यों नहीं देखते, वो क्यों छोटे, मासूम बच्चों को अपना बचपन नहीं जीने देते? वो क्यों बच्चों को उनके शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार से वंचित करते हैं। कुछ उद्यमी और व्यापारी कुछ कामों में बच्चों को बहुत कम कीमत पर शामिल करते हैं। वो यह सब अपने लालचीपन और कम कीमत पर अधिक काम कराने के लिए करते हैं।

बाल श्रम छोटे बच्चों को उनके मासूम, यादगार व बचपन के पलों से महरुम कर देता है। यह उनकी स्कूली शिक्षा को जारी रखने में बाधा उत्पन्न करता है क्योंकि यह उन्हें मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और नैतिक रुप से परेशान करता है। यह बच्चों के साथ-साथ देश के लिए भी बहुत ही खतरनाक और हानिकारक बीमारी है। यह शोषणकारी प्रथा पूरे विश्व में, कड़े नियमों और कानूनों, जो बाल श्रम को निषेध करते है, के बावजूद आज भी विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में जारी है। यह सामाजिक मुद्दा समाज में प्राचीन काल से ही बहुत वर्षों से चला आ रहा है जिसने विकास को बड़े स्तर पर प्रभावित किया है।

बाल श्रम में अधिकतर बच्चे मैदानी कार्यों जैसे - कृषि, कारखानें, सामूहिक घरेलू कार्य, खनन, उत्पादन और अन्य कार्यों में लगे हुए हैं। उनमें से कुछ रात की शिफ्ट (पाली) में या समय से अधिक काम (ओवर-टाइम) की आवश्यकता और घर की वित्तीय हालत को सुधारने के लिए अधिक आय प्राप्ति करने के लिए करते हैं। उनके काम करने की सामान्य दिनचर्या 12 घंटे लम्बी होती है जिसके लिए उन्हें बहुत कम राशि वेतन के रुप में मिलती है। बाल श्रम के लिए बहुत कम पारिवारिक आय, गरीब बच्चों के लिए उचित सुविधाओं के साथ स्कूलों की अपर्याप्त संख्या, और गरीब माता-पिता की अशिक्षा सबसे महत्वपूर्ण व प्राथमिक कारक हैं।

यह मुद्दा बहुत बड़े विस्तार से विकासशील देशों में गरीबी, खराब स्कूली शिक्षा के अवसर, अधिक जनसंख्या दर, वयस्कों के लिए प्रतिस्थापनों की कमी आदि के कारण एक वायरस की तरह फैल रहा है। बाल श्रम की सबसे ज्यादा घटनाएं 2010 में उप-सहारा अफ्रीका में दर्ज की गयी थी। इसके अनुसार, अफ्रीका के 50% से अधिक बच्चे (जिनकी आयु 5-14 साल के बीच थी) कार्यरत थे। वर्षों से पूरे संसार में, कृषि क्षेत्र सबसे अधिक बाल श्रमिकों को रखता है। बाल श्रम का एक बड़ा प्रतिशत ग्रामीण परिवेश और अनौपचारिक शहरी अर्थव्यवस्था में पाया जाता है जहाँ बच्चे जबरदस्ती माता-पिता या नियोक्ताओं के द्वारा काम पर लगाये जाते हैं। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, विश्वभर में बाल श्रम की घटनाओं में गिरावट आयी है (1960 में 25% थी हालांकि 2003 में, 10% की कमी आयी है)।

मेरे प्यारे दोस्तों, हमें विस्तार से इस समस्या के बारे में जागरुक होना चाहिये और इस मुद्दे को समाज से हटाने के लिए कुछ सकारात्मक कदमों को उठाना चाहिये। देश के युवा होने के नाते, हमें देश के विकास और वृद्धि के लिए अधिक जिम्मेदार होना चाहिये, इसलिए इस समस्या को बढ़ने में अपनी दखल देकर रोकें और सकारात्मक रुप से कार्य करें।

बच्चों के मासूम बचपन के खोने पर, बिलख रहा हैं विश्व,
न रोका गया इसे जल्दी से तो, खो देगा हर राष्ट्र अपना भविष्य ।।

धन्यवाद

जय हिन्द, जय भारत।

बाल श्रम पर भाषण 2

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षक, शिक्षिकाएं, मेरे सीनियर (वरिष्ठ सहपाठी) और मेरे प्यारे सहपाठियों, सभी को मेरा सुप्रभात। मेरा नाम .......है। मैं कक्षा...में पढ़ता/पढ़ती हूँ। इस अवसर पर, मैं आपके सामने बाल श्रम, इसके कारण और समाज में इसे रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाये गए कदमों पर भाषण देना चाहता/चाहती हूँ। मैं अपने/अपनी कक्षा अध्यापक/अध्यापिका का/की बहुत आभारी हूँ, जिन्होंने इस महान अवसर पर मुझे अपने विचार आप सब के सामने रखने का अवसर प्रदान किया।

बाल श्रम प्राचीन समय से, पूरे विश्व के समाज में वर्षों से चली आ रही बुरी प्रथा है। यह केवल राष्ट्रीय मुद्दा नहीं है बल्कि एक वैश्विक मुद्दा है। बाल श्रम वो प्रक्रिया है जिसमें बच्चों को बहुत कम वेतन पर कार्य करने के लिए नियुक्त किया जाता है। सामान्यतः, वो बच्चों को अंशकालिक आधार (पार्ट टाइम) पर आर्थिक क्रियाओं में शामिल करते हैं। कहीं-कहीं बच्चों से पूरी रात और अधिक समय के लिए, बिना किसी छुट्टी के वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए कार्य कराया जाता है। बाल श्रम बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा पहुँचाता है। यह समाज में गरीबी, आवास और भोजन की कमी, गरीब लोगों के लिए सुविधाओं की कमी, शिक्षा की कमी, अमीर और गरीब के बीच में बड़ा अन्तर, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का विकास आदि के कारण गहराई तक पहुँची हुई है।

भारत की राष्ट्रीय जनगणना के अनुसार, बाल श्रमिकों की संख्या (4-15 आयु वर्ग) 1998 में, लगभग 12.6 मिलियन थी, 2009-10 के बीच में यह लगभग 4.98 मिलियन थी और 2011 में यह 4.35 मिलियन थी। इन आंकड़ों से यह ज्ञात होता है कि बाल श्रमिकों की संख्या में प्रति वर्ष कमी हुई है, जबकि सवाल यह उठता है कि इतने आधुनिक युग में रहने के बाद भी हम इसे पूरी तरह से खत्म करने योग्य क्यों नहीं है। मेरे विचार से इसके पीछे सबसे बड़ा कारण, आज भी लोगों की मानसिक अवधारणा में उस स्थिति तक परिवर्तन नहीं हुआ है जहाँ तक कि होना चाहिये था। समाज में आज भी गरीबों पर अमीरों की तानाशाही है। अमीरों और गरीबों के बीच में बहुत अधिक अन्तर है, पूरी तरह से विकसित लोग समाज में समानता को स्वीकार करने की क्षमता नहीं रखते हैं।

भारतीय कानून ने लगभग 64 उद्योगों को खतरनाक उद्योगों की श्रेणी में रखा है जिनमें बच्चों को काम पर नियुक्त करना अपराध माना जायेगा। 2001 में, लगभग 1,20,000 को देश में खतरनाक उद्योगों में काम करते हुए पाया गया था। भारत के संविधान ने खतरनाक उद्योगों में बच्चों का कार्य करना निषेध कर दिया है हालांकि सामान्य उद्योगों में नहीं जिसके कारण यह समस्या आज भी खत्म नहीं हो पायी है। यूनीसेफ के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि पूरे विश्व में भारत में सबसे अधिक बाल श्रमिक है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, लगभग 60% बच्चे कृषि में कार्यरत हैं वहीं संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार 70% बच्चे बाल श्रमिक के रुप में कार्य कर रहे हैं।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 24 के द्वारा जोखिम वाले उद्योगों में बाल श्रम निषेध है। भारतीय दंड संहिता में बच्चों के कार्य करने को रोकने के लिए बहुत से कानून (जैसे किशोर न्याय (देखभाल और सुरक्षा) बाल अधिनियम 2000, बाल श्रम (निषेध और उन्मूलन) अधिनियम 1986 आदि।) हैं।

राष्ट्र के उत्थान के लिए है, ये एक समाधान,
बाल श्रम के रोक कर, बनाये देश महान।।

धन्यवाद।

जय हिन्द।

बाल श्रम पर भाषण 3

आदरणीय प्रधानाध्यापक, सर, मैडम, मेरे वरिष्ठ और मेरे प्यारे दोस्तों को मेरा नमस्कार। मेरा नाम...है। मैं कक्षा..............में पढ़ता/पढ़ती हूँ। मैं इस अवसर पर बाल मजदूरी के विषय पर भाषण देना चाहता/चाहती हूँ क्योंकि यह उन बड़े मुद्दों में से एक है जो देश के विकास और वृद्धि को बाधित करते हैं। मैं अपने कक्षा अध्यापक/अध्यापिका का/की बहुत अधिक आभारी हूँ कि, उन्होंने इतने अच्छे मुद्दे पर मुझे भाषण देने का अवसर प्रदान किया।

फैल रहा है जो विश्व में, फैल रहा है जो विश्व में,
एक जहर के समान, बाल श्रम है इसका नाम।।

मेरे प्यारे मित्रों, बाल श्रम या मजदूरी एक वैश्विक मुद्दा है, यह केवल हमारे देश का ही मुद्दा नहीं है, इसलिए, इसे समाज से हटाने के लिए वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता है। यह पूरे विश्व को काफी हद तक प्रभावित करता है विशेषरुप से विकासशील देशों को। बच्चों को विभिन्न प्रकार की मजदूरी में बहुत कम वेतन पर शामिल किया जाता है; उनमें से एक बंधक मजदूरी है। यह भारत में बहुत पुरानी व्यवस्था है, जिसमें बच्चों को पूरी तरह से या कुछ हद तक मालिक के द्वारा पूरे समय के लिए या कुछ समय के लिए बहुत लम्बी समयावधि तक नौकरी करने के लिए मजबूर किया जाता है। इस व्यवस्था में, विशेषरुप से बच्चा या उसके माता-पिता को ऋणदाता के एक समझौते, जो लिखित या मौखिक दोनों प्रकार का होता है, पर सहमत होना पड़ता हैं। यह व्यवस्था ऋण या भूमि पट्टा संबंध के आधार पर विश्वसनीय और सस्ता श्रम पाने के लिए औपनिवेशिक काल के दौरान भारत में अस्तित्व में आयी थी। इस व्यवस्था की बुराईयों को देखते हुये, भारत में बंधुआ बाल श्रम को निषेध करने के लिए 1977 में कानून पारित किया गया था। हालांकि, इसके बाद भी देश में बंधुआ बाल मजदूरी की निरंतरता को साबित करने वाले कुछ सबूत पाये गए हैं।

आर्थिक कल्याण के विषय में, बाल श्रम समाज में एक गंभीर मुद्दा है क्योंकि बच्चे बहुत ही कम उम्र में मजदूरों के रुप में शामिल हो जाते हैं और जिससे वो आवश्यक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते। इस तरह वो राष्ट्र के अच्छी तरह से विकसित (शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और वित्तीय रुप से) नागरिक होने के अवसर को छोड़ देते हैं। उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति दिन प्रति दिन कम होती जाती है, जो उन्हें विभिन्न रोगों के माध्यम से और अधिक कमजोर बना देती है। वो जीवनभर अशिक्षित रहते हैं जिससे उनके स्वंय के और देश के अच्छे करने के योगदान करने की क्षमता सीमित हो जाती है।

देश के विकास पर बाल श्रम के सभी प्रतिकूल प्रभावों के बारे में उद्योगपतियों और व्यापारियों को अच्छी तरह से अवगत कराने की जरूरत है। सभी को यह समझना चाहिये कि बच्चों के बीच में आवश्यक कौशल में सुधार करने के लिए एकमात्र यंत्र केवल शिक्षा है, जिससे भविष्य में सुरक्षित उच्च कुशल नौकरियों के माध्यम से अपनी और देश की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस सामाजिक मुद्दें को हटाने के लिए सभी भारतीय नागरिकों विशेषरुप से देश के अच्छी तरह से शिक्षित युवाओं को कुछ सकारात्मक प्रभावशाली कदम उठाने की आवश्यकता है।

धन्यवाद।

शिक्षित बच्चे, विकसित राष्ट्र।


बाल श्रम पर भाषण 4

आदरणीय मान्यवर, प्राचार्य महोदय, शिक्षक एंव शिक्षिकाएं, मेरे वरिष्ठ और मेरे साथियों को सुप्रभात। मेरा नाम...है। मैं कक्षा..............में पढ़ता/पढ़ती हूँ। आज हम इस उत्सव को मनाने के लिए यहाँ एकत्र हुए हैं, इसलिए, मैं बाल मजदूरी पर भाषण देना चाहता/चाहती हूँ। मैं अपनी कक्षा अध्यापिका की बहुत आभारी हूँ, कि उन्होंने मुझे इस महान अवसर पर, इस विषय पर भाषण देने की अनुमति प्रदान की।

मेरे प्यारे दोस्तो, एक तरफ तो मैं भारत का/की नागरिक होने पर बहुत गर्व महसूस करता/करती हूँ, हालांकि, वहीं दूसरी तरफ यह तथ्य मुझे शर्मिंदा करता है, कि हमारा देश पूरे विश्व में बाल मजदूरों की बड़ी संख्या का घर है। वो भी केवल कुछ लालची और चालक भारतीय नागरिकों के कारण जो छोटे से बच्चों को जोखिम वाली मजदूरी के कार्यों में बहुत कम वेतन पर अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए लगाते हैं। वो कभी भी अपने देश के विकास के बारे में नहीं सोचते; वो बहुत स्वार्थी होते हैं और केवल अपना लाभ चाहते हैं। सबसे अधिक बाल श्रमिक ग्रामीण क्षेत्रों में, कृषि में, और शहरी इलाकों में - खनन, जरी, कढ़ाई आदि उद्योगों में पाये जाते हैं।

बाल मजदूरी के कुछ प्रमुख कारण गरीबी, सभी के लिए आधारभूत सुविधाओं की कमी, सामाजिक सुरक्षा की कमी आदि है। समाज में अमीर और गरीब लोगों के बीच बहुत बड़ा अन्तर, आधारभूत सुविधाओं की सीमितता और बहुत बड़े स्तर पर असमानता है। इस प्रकार के सामाजिक मुद्दे समाज में, विशेषरुप से गरीबों के बच्चों पर अन्य आयु वर्ग की तुलना में प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

बेकार स्थिति और कम ज्ञान के कारण, गरीब बच्चे कम वेतन पर कठिन कार्य करने को तैयार हो जाते हैं, वहीं वो शहरी क्षेत्रों में घरेलू नौकर की तरह प्रयोग किये जाते हैं। बाल श्रम की यह हालत लगभग गुलामी की स्थिति जैसी ही दिखती है। अधिकतर माता-पिता बच्चों को जन्म केवल रुपये कमाकर उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए देते हैं। वो अपने बच्चों को घरेलू कामों में अपने सहयोगी के रुप में शामिल करते हैं। हम आमतौर पर बच्चों को चाय के स्टालों, ढाबों, होटलों और अन्य जोखिम वाले कार्य को करते हुए देखते हैं।

यह देखा गया है कि बाल मजदूरी में शामिल बच्चे सामान्य रुप से अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़े वर्ग और मुस्लिम वर्ग से जुड़े होते हैं। इसका अर्थ है कि जातिवाद (निम्न जाति के गरीब लोग) भारत में बाल श्रम का बड़ा कारण है। इस तरह के एक उन्नत युग में इसके अस्तित्व का कारण अप्रभावी कानून, बुरी प्रशानिक व्यवस्था, इसे पूरी तरह से खत्म करने की राजनीतिक इच्छा की कमी और नियोक्ताओं को भारी लाभ हैं।

बाल मजदूरी का एक और दूसरा रुप बंधक बाल मजदूरी भी है जो सामान्यतः अनौपचारिक क्षेत्रों में पायी जाती है। इसमें, गरीब बच्चे एक नियोक्ता के अधीन ऋण, वंशानुगत ऋण या परिवार द्वारा सामाजिक कर्तत्व के कारण बंधक बन जाते हैं। हम बंधुआ मजदूरी को गुलामी का एक रुप कह सकते हैं। बंधुआ बाल मजदूर शारीरिक और यौन शोषण और किसी भी प्रकार की लापरपवाही के कारण मौत की ओर उन्मुख हैं। वो मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से बीमार हो जाते हैं और उनके पास जीवित रहने के लिए अन्य कोई विकल्प नहीं होता है। देश के युवा होने के नाते, हमें राष्ट्र के लिए अपने दायित्वों को समझना चाहिये और इस सामाजिक मुद्दे का उन्मूलन करने के लिए कुछ सकारात्मक कदम उठाने चाहिये।

धन्यवाद।

यदि सुरक्षित होगा बचपन, बन जायेगा भविष्य उज्ज्वल।

जय हिन्द, जय भारत।

 

 

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